भारत पन्ना

संपादकीय नीति

क्या छपता है, किस कसौटी पर छपता है, और क्या नहीं छपता।

अंतिम बदलाव: शनिवार, 29 अगस्त

यह पन्ना बताता है कि भारत पन्ना पर कोई लेख छपने तक किन नियमों से गुज़रता है। ये नियम पहले लिखे गए थे, लेख बाद में। जहाँ कोई लेख इन पर पूरा नहीं उतरता, वह नहीं छपता।

1. हर तथ्य के पीछे कुछ होना चाहिए

नियम सीधा है। जो भी तथ्य लेख में जाता है, उसके पीछे या तो मूल दस्तावेज़ हो, या दो अलग-अलग भरोसेमंद स्रोत।

मूल दस्तावेज़ का मतलब है वह चीज़ ख़ुद, किसी की रिपोर्टिंग नहीं: पीआईबी की विज्ञप्ति, मंत्रालय का आदेश, अदालत का फ़ैसला, रिज़र्व बैंक या राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का आँकड़ा, संसद में दिया गया जवाब, कंपनी की तिमाही रिपोर्ट।

दो स्रोतों का मतलब है दो अलग संस्थान, एक ही ख़बर के दो हवाले नहीं। एक ही एजेंसी की कॉपी छापने वाले बीस अख़बार दो स्रोत नहीं हैं, एक हैं।

इतिहास की बात भी इसी कसौटी पर जाती है। पुराने आँकड़े और पुराने कार्यक्रम याद से नहीं लिखे जाते। जो लिखा है, वह किसी सरकारी अभिलेख या शोध-पत्र से निकला है, और उसका लिंक लेख के नीचे रहता है।

2. जो हम नहीं जानते, नहीं लिखते

अगर कोई ज़रूरी बात पता नहीं चल पाई, तो लेख में यही लिखा जाता है कि वह पता नहीं चली। अंदाज़ा लगाकर खाली जगह भरना सबसे आसान ग़लती है, और सबसे महँगी।

अनुमान और तथ्य अलग-अलग दिखने चाहिए। जहाँ कोई बात आगे की आशंका है, वहाँ यह साफ़ लिखा जाता है कि यह आशंका है।

3. शीर्षक अपने आप में सच हो

शीर्षक पढ़कर जो समझ आए, लेख खोलने पर वही मिलना चाहिए।

4. आँकड़े का पैमाना साथ जाता है

अकेला आँकड़ा जानकारी नहीं है। 6.7 फ़ीसदी तब तक कुछ नहीं बताता जब तक यह न पता हो कि पिछले महीने क्या था, पिछले साल क्या था, और अनुमान क्या लगाया गया था।

इसलिए हर बड़े आँकड़े के साथ कम से कम एक तुलना जाती है। जहाँ आँकड़े का तरीक़ा बदला हो, या आधार वर्ष बदला हो, वहाँ यह बताया जाता है, क्योंकि उसके बिना तुलना झूठी हो जाती है।

5. अदालत, अपराध और आरोप

यह वह जगह है जहाँ ख़बर सबसे ज़्यादा नुक़सान कर सकती है, इसलिए नियम सख़्त हैं।

6. जाति, धर्म, इलाक़ा और लिंग

किसी व्यक्ति की जाति, धर्म, इलाक़ा या लिंग लेख में तभी आता है जब वह ख़बर का हिस्सा हो। अपराध की ख़बर में आरोपी का धर्म तब तक ग़ैर-ज़रूरी है जब तक मामला ख़ुद उसी के बारे में न हो।

समुदाय के बारे में कोई सामान्य बात, जो पूरे समुदाय पर लागू कर दी गई हो, यहाँ नहीं छपेगी।

7. राजनीति

हम किसी दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं लिखते। सरकार का किया हुआ काम काम है और उसकी नाकामी नाकामी, और दोनों एक ही सख़्ती से लिखे जाते हैं।

चुनाव के दिनों में एक और नियम जुड़ता है: कोई दावा तब तक नहीं छपता जब तक उसका दस्तावेज़ी आधार न हो, चाहे वह दावा किसी भी तरफ़ से आया हो।

राय का कोई कॉलम इस साइट पर नहीं है। यह जान-बूझकर तय किया गया।

8. स्वास्थ्य और पैसा

इन दो विषयों पर पढ़ने वाला अक्सर कुछ करने के लिए पढ़ता है, इसलिए इनके नियम अलग हैं।

9. पैसे का कोई लेन-देन नहीं

कोई लेख पैसे लेकर नहीं छपता। कोई विज्ञापन लेख की शक्ल में नहीं छपता। अभी साइट पर विज्ञापन है ही नहीं।

अगर आगे चलकर विज्ञापन शुरू होते हैं, तो वे साफ़ अलग दिखेंगे और यह पन्ना उससे पहले बदलेगा।

10. ग़लती होने पर

ग़लती चुपचाप नहीं सुधरती। जो बदला गया, वह लेख पर दिखता है, तारीख़ के साथ, और सुधार के पन्ने पर भी दर्ज होता है।

छपा हुआ लेख हटाया नहीं जाता, सिवाय उस हालत के जब क़ानून ऐसा कहे। ग़लत लेख का इलाज उसे मिटाना नहीं, सुधार दर्ज करना है।

11. लेख बनने का रास्ता

रोज़ शाम एक ही क्रम चलता है, और तैयार अंक अगली सुबह 7 बजे खुलता है।

आख़िरी क़दम कभी अपने आप नहीं होता। कोई लेख बिना पढ़े नहीं छपता।

12. वह जो हम नहीं छापते

13. यह नीति कब बदलेगी

बदलेगी, और जब बदलेगी तब ऊपर लिखी तारीख़ बदल जाएगी। जो बड़ा बदलाव होगा, वह सुधार के पन्ने पर भी दर्ज होगा।

इस नीति पर कोई सवाल या असहमति हो तो संपर्क के पन्ने पर लिखा पता काम आएगा।