निजता नीति
हम आपका कौन-सा डेटा रखते हैं, क्यों रखते हैं, और आप उसे कैसे हटवा सकते हैं।
छोटा जवाब
भारत पन्ना पढ़ने के लिए आपको कुछ नहीं देना पड़ता। न नाम, न ईमेल, न लॉगिन। कोई कुकी नहीं चलती, कोई विज्ञापन ट्रैकर नहीं है, और आप कौन हैं यह जानने का ज़रिया हमारे पास नहीं है।
जो थोड़ा-सा डेटा हम रखते हैं, उसकी पूरी सूची नीचे है।
जब आप सिर्फ़ पढ़ रहे हैं
पाठकों की गिनती के लिए हम क्लाउडफ़्लेयर वेब एनालिटिक्स (Cloudflare Web Analytics) इस्तेमाल करते हैं। यह पन्नों की गिनती करता है, लोगों की नहीं।
- कोई कुकी नहीं, आपके ब्राउज़र में कुछ सहेजा नहीं जाता
- कोई फ़िंगरप्रिंटिंग नहीं
- कोई विज्ञापन पहचान संख्या नहीं
- दूसरी वेबसाइटों तक आपका पीछा करने का कोई इंतज़ाम नहीं
हमें दिखता है कि किसी दिन कौन-सा लेख कितनी बार खुला, ब्राउज़र और देश का मोटा हिसाब क्या रहा, और पन्ना कितनी देर में लोड हुआ। हर आंकड़ा जोड़ का है, किसी एक पाठक का नहीं। उसमें से किसी को अलग करके पहचानना मुमकिन नहीं।
कुकी की इजाज़त मांगने वाला पॉप-अप भी कभी नहीं आएगा। जब इकट्ठा कुछ किया ही नहीं जा रहा, तो इजाज़त किस बात की।
साइट कहां से चलती है
पूरी वेबसाइट क्लाउडफ़्लेयर पर बनी है। इसका नेटवर्क दुनिया भर में फैला है, इसलिए मुमकिन है कि पन्ना आपको भारत के बाहर किसी सर्वर से मिले और तकनीकी लॉग भी वहीं बनें।
डीपीडीपी क़ानून ऐसे ट्रांसफ़र की इजाज़त देता है, पर सरकार किसी देश पर रोक लगा सकती है। ऐसी रोक लगी तो हम पालन करेंगे और यह पन्ना बदलेगा।
पाठक खाता (अभी शुरू नहीं हुआ)
खाता बनाने की सुविधा अभी नहीं है। जब शुरू होगी, यह पन्ना पहले अपडेट होगा। जो अभी से तय है:
- लॉगिन गूगल से होगा, या आपके ईमेल पर भेजे गए एक बार चलने वाले लिंक से
- पासवर्ड हम कभी नहीं रखेंगे। न बनवाएंगे, न सहेजेंगे, न रीसेट करेंगे। जो चीज़ रखी ही नहीं गई, वह चोरी नहीं हो सकती
- खाते में सिर्फ़ चार चीज़ें रहेंगी: ईमेल पता, नाम, खाता बनने की तारीख़, और न्यूज़लेटर की सहमति
- खाता जब चाहें बंद करा सकते हैं, और बंद होते ही यह डेटा मिट जाएगा
न्यूज़लेटर
यह भी अभी शुरू नहीं हुआ। शुरू होने पर नाम दर्ज कराते ही पुष्टि का ईमेल जाएगा, और उस पर क्लिक करने पर ही आप सूची में जुड़ेंगे। हर ईमेल के नीचे निकलने का लिंक रहेगा, और निकलते ही पता सूची से हट जाएगा।
पता न बेचा जाएगा, न किसी को दिया जाएगा। भेजने के लिए बाहरी सेवा लगेगी, क्योंकि क्लाउडफ़्लेयर ईमेल लेता है, भेजता नहीं। सेवा तय होते ही नाम यहां दर्ज होगा।
आप जो लिखकर भेजते हैं
साइट पर कमेंट नहीं हैं और पाठक यहां कुछ प्रकाशित नहीं कर सकते। आपकी तरफ़ से सिर्फ़ ईमेल आते हैं: सुधार, शिकायत, या ख़बर की जानकारी। वे संभालकर रखे जाते हैं, क्योंकि शिकायतों का रिकॉर्ड और उनका मासिक ब्योरा सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 की शर्त है।
आपके अधिकार
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 की भाषा में हम "डेटा फ़िड्यूशरी" हैं और आप "डेटा प्रिंसिपल"। जो डेटा हमारे पास है, उस पर आपके ये अधिकार हैं:
- जानने का हक़: आपका कौन-सा डेटा हमारे पास है, उसका क्या हो रहा है, और किसके साथ साझा हुआ, यह ब्योरा मांग सकते हैं
- सुधरवाने का हक़: ग़लत, अधूरी या पुरानी जानकारी ठीक करा सकते हैं
- मिटवाने का हक़: डेटा हटाने को कह सकते हैं, बशर्ते किसी क़ानून के चलते उसे रखना ज़रूरी न हो
- सहमति वापस लेने का हक़: दी हुई सहमति जब चाहें वापस ले सकते हैं, और वापस लेना उतना ही आसान रहेगा जितना देना था
- नामांकन का हक़: किसी को नामज़द कर सकते हैं, जो आपकी मृत्यु या अशक्तता पर ये अधिकार इस्तेमाल करे
- शिकायत का हक़: हमारी किसी चूक पर हमें सीधे शिकायत भेज सकते हैं
इनमें से किसी के लिए [email protected] पर लिखिए।
डीपीडीपी नियम जवाब की बाहरी सीमा 90 दिन रखते हैं। हमारे लिए 90 दिन ज़्यादा हैं। हम 30 दिन के भीतर जवाब देंगे।
क़ानून पंजीकृत कंसेंट मैनेजर के ज़रिये सहमति देने और वापस लेने का रास्ता भी खोलता है। वह व्यवस्था अभी बन रही है। तैयार होने पर हम उससे जुड़ेंगे।
बच्चों का डेटा
भारत का क़ानून 18 साल से कम उम्र वाले हर व्यक्ति को बच्चा मानता है। यह यूरोप के जीडीपीआर से सख़्त है, जहां यह उम्र आम तौर पर 16 है।
लॉगिन न होने से हम किसी की उम्र नहीं जानते और किसी बच्चे का डेटा जमा नहीं करते। खाता शुरू होने पर 18 से कम उम्र वाले का डेटा तभी लिया जाएगा जब माता-पिता या क़ानूनी अभिभावक की सत्यापित सहमति मिले।
तीन चीज़ें हर हाल में मना हैं और हम इनमें से कुछ नहीं करते: बच्चों की निगरानी, उनके व्यवहार पर नज़र, और उन्हें निशाना बनाकर दिखाए गए विज्ञापन।
डेटा लीक हो जाए तो
जो थोड़ी जानकारी हमारे पास है, उस पर कभी सेंध लगी तो दो काम तुरंत होंगे।
पहला, जिन पाठकों का डेटा गया उन्हें बताया जाएगा: क्या गया, कैसे गया, हमने क्या किया, और उन्हें क्या करना चाहिए। दूसरा, भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड को सूचना दी जाएगी और 72 घंटे के भीतर विस्तृत ब्योरा भेजा जाएगा। एक का इंतज़ार दूसरे के लिए नहीं होगा।
विज्ञापन
अभी कोई विज्ञापन नहीं है। किसी विज्ञापन नेटवर्क का कोड यहां नहीं चलता, इसलिए कोई तीसरा पक्ष आपको इस साइट पर ट्रैक नहीं कर रहा। आगे विज्ञापन आए तो यह नीति बदलेगी और उसकी तारीख़ यहीं दर्ज होगी।
शिकायत कहां करें
हर बात के लिए एक ही पता: [email protected]।
जवाब से संतुष्ट न हों तो भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड के पास जा सकते हैं। बोर्ड तक जाने से पहले हमारे यहां शिकायत का रास्ता आज़माना क़ानूनन ज़रूरी है, इसलिए पहले हमें लिखिए। बोर्ड के आदेश के ख़िलाफ़ अपील दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय अधिकरण (TDSAT) में होती है।
छपे हुए लेख पर शिकायत का रास्ता अलग है, जो संपर्क पन्ने पर लिखा है।
यह पन्ना कब बदलेगा
डीपीडीपी नियम नवंबर 2025 में अधिसूचित हुए। इनकी ज़्यादातर शर्तें मई 2027 से लागू होनी हैं, पर हम उस तारीख़ का इंतज़ार नहीं कर रहे।
नीति बदलने पर ऊपर की तारीख़ बदलेगी, और बड़े बदलाव की जानकारी अलग से दी जाएगी।