सुधार
जो ग़लत छपा और जो ठीक किया गया, उसका खुला रिकॉर्ड।
यह पन्ना उन सब ग़लतियों का रिकॉर्ड है जो भारत पन्ना पर छपीं और बाद में ठीक की गईं। नीचे की सूची अपने आप बनती है। कोई सुधार दर्ज होते ही वह यहाँ आ जाता है, और हटाया नहीं जा सकता।
हम चुपचाप क्यों नहीं सुधारते
छपी हुई ग़लती को चुपचाप बदल देना सबसे आसान रास्ता है। किसी को पता नहीं चलता।
पर तब यह पता लगाने का कोई तरीक़ा नहीं बचता कि साइट कितनी बार ग़लत रही। जिस साइट के लेख एआई की मदद से बनते हैं, उसके लिए यह और भी ज़रूरी है। हम कह सकते हैं कि हम जाँच करते हैं, या हम अपनी ग़लतियाँ गिनकर दिखा सकते हैं। दूसरी बात का वज़न ज़्यादा है।
इसलिए नियम यह है: जो सुधरा, वह दिखेगा।
तीन तरह के बदलाव
हर बदलाव सुधार नहीं होता। हम तीन में फ़र्क़ करते हैं।
- सुधार। कोई तथ्य ग़लत था: नाम, तारीख़, आँकड़ा, पद, जगह, या कोई ऐसी बात जिससे लेख का मतलब बदल जाए। लेख के ऊपर सुधार की टिप्पणी लगती है और उसका पूरा ब्योरा इस पन्ने पर आता है
- स्पष्टीकरण। तथ्य ग़लत नहीं था, पर लिखा ऐसे गया कि ग़लत समझा जा सकता था। लेख पर टिप्पणी लगती है, और यह पन्ना भी उसे दर्ज करता है
- अपडेट। ख़बर आगे बढ़ गई और लेख में नई जानकारी जोड़ी गई। यह ग़लती नहीं है। लेख पर बदलाव की तारीख़ दिख जाती है, पर यह पन्ना उसे दर्ज नहीं करता
वर्तनी की ग़लती, टूटा लिंक या तस्वीर बदलना बिना दर्ज किए ठीक हो जाता है, बशर्ते उससे मतलब न बदलता हो।
हम लेख हटाते नहीं
छपा हुआ लेख इंटरनेट से नहीं हटाया जाता, सिवाय उस हालत के जब अदालत या क़ानून ऐसा कहे।
अगर कोई लेख इतना ग़लत निकले कि उसे पढ़ा जाना ही ठीक न हो, तो वह अपनी जगह बना रहता है, ऊपर एक साफ़ टिप्पणी के साथ कि यह लेख वापस लिया गया और क्यों। पता वही रहता है, ताकि जिसने उसे कहीं साझा किया हो, वहाँ टूटा लिंक न मिले।
लेख मिटा देने से ग़लती नहीं मिटती। सिर्फ़ उसका सबूत मिटता है।
ग़लती दिखे तो क्या करें
लिखिए: sudhar@bharatpanna.com
तीन चीज़ें बता दीजिए तो जाँच तेज़ हो जाती है:
- लेख का पता
- वह लाइन या आँकड़ा जो ग़लत लगा
- आपके हिसाब से सही क्या है, और अगर कोई स्रोत हो तो वह
हर शिकायत पढ़ी जाती है। तीन कामकाजी दिनों में जवाब जाता है, चाहे जाँच में बात सही निकले या नहीं। बात सही निकली तो सुधार उसी दिन दर्ज होता है।
जो शिकायत सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत औपचारिक शिकायत है, उसका रास्ता अलग है और संपर्क के पन्ने पर लिखा है। उसकी समय-सीमा क़ानून तय करता है।
यह भी पढ़िए
तथ्य किस कसौटी पर जाँचे जाते हैं, यह संपादकीय नीति में लिखा है। एआई की भूमिका कहाँ ख़त्म होती है और इंसान की कहाँ शुरू, यह एआई और यह साइट पर।
अब तक के सुधार
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सत्य निकेतन की ढही इमारत के पीछे छात्र आवास का कारोबार
प्रकाशन के समय इस लेख में मृतकों की संख्या छह लिखी थी और यह कि पुलिस ने मामला दर्ज किया है। उसी दोपहर तक संख्या सात हो चुकी थी और मालिक हरिराम बंसल, उनकी पत्नी तथा बेटा गिरफ़्तार हो चुके थे। दोनों बातें सुधार दी गई हैं, और भारतीय न्याय संहिता की धाराएँ तथा नगर निगम के पाँच अधिकारियों के निलंबन का ब्योरा जोड़ा गया है।
प्रकाशन से पहले दोपहर की रिपोर्टें नहीं देखी गईं -
इस बार वृद्धि 7.8 फ़ीसदी है, और पिछले साल इसी तिमाही के लिए भी यही आँकड़ा छपा था
पहले संस्करण में लिखा था कि नॉमिनल जीडीपी चालू क़ीमतों पर होने के कारण पुरानी और नई श्रृंखला के बीच सीधे तुलना की जा सकती है, और इस आधार पर अप्रैल-जून 2025 की तिमाही का नॉमिनल आकार लगभग सात फ़ीसदी छोटा बताया गया था। यह ग़लत था। आधार वर्ष बदलने पर आँकड़ों के स्रोत, दायरा और नापने का तरीक़ा भी बदलते हैं, इसलिए नॉमिनल स्तर भी दोबारा नापा जाता है और दोनों श्रृंखलाओं के स्तर घटाए नहीं जा सकते। 86,05,365 करोड़ और 80,00,192 करोड़, दोनों आँकड़े सही हैं और अपनी-अपनी जगह दर्ज हैं, पर वे एक ही तिमाही के दो अलग आकलन हैं। वह हिस्सा बदल दिया गया है। लेख का मुख्य तथ्य, कि उसी तिमाही की वृद्धि दर पहले 7.8 छपी थी और अब 6.9 है, अपनी जगह क़ायम है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 2 सितंबर 2026 को जारी अतिरिक्त जानकारी में यही बात स्पष्ट की।