सलामी जोड़ी के 129 रन पर भारत का आठवाँ एशिया कप, दुबई के फ़ाइनल में श्रीलंका 111 पर सिमटी
रविवार रात दुबई में भारत ने महिला एशिया कप का फ़ाइनल 72 रन से जीता। शेफ़ाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने 77 गेंदों पर 129 रन जोड़े, और उनके आउट होने के बाद भारत ने पाँच विकेट 38 रन के भीतर गँवा दिए। जवाब में श्रीलंका एक विकेट पर 62 से 111 पर पूरी सिमट गई।

दुबई में रविवार रात भारत ने श्रीलंका को 72 रन से हराकर महिला एशिया कप जीत लिया। यह भारत का आठवाँ एशिया कप ख़िताब है।
भारत ने टॉस जीतकर बल्लेबाज़ी चुनी और बीस ओवर में पाँच विकेट पर 183 रन बनाए। इनमें 127 रन दो बल्लेबाज़ों के थे: शेफ़ाली वर्मा के 39 गेंदों पर 68 और स्मृति मंधाना के 39 गेंदों पर 59। दोनों की सलामी साझेदारी 77 गेंदों पर 129 रन की रही, और वे दोनों पाँच गेंदों के भीतर आउट हुईं।
जवाब में श्रीलंका 111 रन पर सिमट गई। एक समय उसका स्कोर एक विकेट पर 62 था। उसके बाद उसने 64 गेंदों में नौ विकेट गँवाए और 49 रन जोड़े। श्री चरणी ने चार ओवर में 20 रन देकर चार विकेट लिए और दीप्ति शर्मा ने चार ओवर में 19 देकर तीन।
दो साल पहले दंबुला में इन्हीं दो टीमों का फ़ाइनल हुआ था और श्रीलंका आठ विकेट से जीती थी।
भारत की पारी: 57, 129, 167 और 183
भारत की पारी शेफ़ाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने शुरू की और पहले चार ओवर सँभले हुए रहे। पाँचवाँ ओवर कप्तान चमारी अटापट्टू ने ख़ुद डाला और उसमें बीस रन गए। उस ओवर की तीसरी गेंद पर शेफ़ाली ने लॉन्ग-ऑन के ऊपर से मैच का पहला छक्का मारा और आख़िरी गेंद पर सीधे गेंदबाज़ के सिर के ऊपर से दूसरा। उसी ओवर की चौथी गेंद पर श्रीलंका का असली नुक़सान हुआ: थ्रो फेंकते हुए विश्मी गुणरत्ने का दायाँ टख़ना मुड़ गया और उन्हें स्ट्रेचर पर मैदान से बाहर ले जाना पड़ा।

छठा ओवर सुगंदिका कुमारी ने डाला, उसमें चार गेंदें बिना रन के निकलीं, और पावरप्ले भारत के 57 रन पर ख़त्म हुआ। बिना कोई विकेट खोए।
अगले साढ़े छह ओवरों में 72 रन और आए। सातवें ओवर में शेफ़ाली ने चमुदी प्रबोधा की लगातार दो गेंदों पर चौके लगाए। आठवें ओवर में उनका अर्धशतक पूरा हुआ, और ग्यारहवें ओवर में मंधाना का, 35 गेंदों पर। उसी ओवर में साझेदारी सौ के पार गई।
तेरहवें ओवर की पाँचवीं गेंद पर पहला विकेट गिरा। शेफ़ाली 39 गेंदों पर 68 रन बनाकर प्रबोधा की गेंद पर अटापट्टू के हाथों लपकी गईं, नौ चौके और दो छक्के लगाकर। सलामी साझेदारी 77 गेंदों पर 129 रन की रही। इस टूर्नामेंट में इससे पहले भारत की सबसे बड़ी सलामी साझेदारी 74 रन की थी।
उसके पाँच गेंद बाद मंधाना भी चली गईं, 39 गेंदों पर 59 बनाकर, कविशा दिलहारी के थ्रो और कौशनी नुत्यंगना के दस्तानों के बीच रन आउट। स्कोर 132 पर दो।
पारी की आख़िरी अड़तीस गेंदों का हिसाब इसके बाद यह रहा। ऋचा घोष ने 13 गेंदों पर 17 बनाए और अठारहवें ओवर की पहली गेंद पर अटापट्टू को विकेट दे गईं, स्कोर 160 पर तीन। हरमनप्रीत कौर 14 गेंदों पर 14 रन बनाकर मिथाली अयोध्या की गेंद पर बदली क्षेत्ररक्षक कव्या कविंदी के हाथों लपकी गईं, 166 पर चार। अगली ही गेंद पर दीप्ति शर्मा रन आउट हुईं, 167 पर पाँच।
129 से 167 तक पहुँचने में भारत ने 38 रन जोड़े और पाँच विकेट गँवाए।
आख़िरी ओवर सुगंदिका कुमारी ने डाला और उसमें 16 रन गए। उनकी आख़िरी दो गेंदों पर गुनालन कमलिनी ने एक चौका और एक छक्का लगाया। कमलिनी पाँच गेंदों पर 15 रन बनाकर नाबाद लौटीं और भारत बीस ओवर में पाँच विकेट पर 183 तक पहुँच गया।
श्रीलंका की सबसे महँगी गेंदबाज़ चमुदी प्रबोधा रहीं, चार ओवर में 40 रन देकर एक विकेट। अयोध्या और अटापट्टू को भी एक-एक विकेट मिला, और तीन गेंदबाज़ बिना विकेट के रहीं। श्रीलंका के सामने लक्ष्य 184 रन का था।
श्रीलंका का जवाब: 62 पर एक से 111 पर पूरी टीम
लक्ष्य का आकार एक आँकड़े से साफ़ हो जाता है। इस टूर्नामेंट में श्रीलंका ने जो सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल किया था, वह बांग्लादेश के ख़िलाफ़ 115 रन का था।
पहला ओवर क्रांति गौड़ ने डाला और उसकी चौथी गेंद पर इमेषा दुलानी बोल्ड हो गईं, चार गेंदों पर चार रन बनाकर। स्कोर चार पर एक।
इसके बाद चमारी अटापट्टू और विश्मी गुणरत्ने ने दूसरे विकेट के लिए 53 गेंदों पर 58 रन जोड़े। गुणरत्ने वही खिलाड़ी हैं जिन्हें उसी शाम भारत की पारी के पाँचवें ओवर में टख़ने की चोट के बाद स्ट्रेचर पर मैदान से बाहर ले जाया गया था, और वे पारी की शुरुआत करने उतरीं। पाँचवाँ ओवर शेफ़ाली वर्मा ने डाला और उसमें अटापट्टू ने एक छक्का और एक चौका लगाया। पावरप्ले के छह ओवर बाद श्रीलंका का स्कोर एक विकेट पर 38 था, और बाक़ी 84 गेंदों में उसे 146 रन चाहिए थे।
नौवें ओवर तक स्कोर एक विकेट पर 61 पहुँच गया था। मैच दसवें ओवर में पलटा, जो दीप्ति शर्मा ने डाला। उस ओवर की तीसरी गेंद पर अटापट्टू आगे निकलीं और ऋचा घोष ने उन्हें स्टंप कर दिया, 32 गेंदों पर 36 रन, चार चौके और दो छक्के। उसी ओवर की आख़िरी गेंद पर गुणरत्ने बोल्ड हुईं, 22 गेंदों पर 20 बनाकर। स्कोर 62 पर दो, फिर 63 पर तीन।
बाक़ी पारी श्री चरणी की है। उन्होंने चार ओवर में एक मेडन डाला, 20 रन दिए और चार विकेट लिए। हर्षिता समरविक्रमा 14 गेंदों पर 9 बनाकर उन्हीं की गेंद पर उन्हीं के हाथों लपकी गईं, स्कोर 86 पर चार। कविशा दिलहारी का विकेट 100 पर गिरा, निलक्षी डी सिल्वा का 101 पर और सुगंदिका कुमारी का 104 पर। डी सिल्वा ने 16 गेंदों पर 22 बनाए, जो उस पारी का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर रहा।

बीच में हसिनी परेरा शेफ़ाली वर्मा की गेंद पर आउट हुईं और मिथाली अयोध्या प्रेमा रावत की गेंद पर स्टंप हुईं। ऋचा घोष ने इस पारी में दो स्टंपिंग कीं। आख़िरी विकेट कौशनी नुत्यंगना का गिरा, जो चौदह गेंदों पर 9 बनाकर दीप्ति शर्मा की गेंद पर बोल्ड हुईं, और श्रीलंका बीसवें ओवर की आख़िरी गेंद पर 111 रन पर सिमट गई।
एक विकेट पर 62 से पूरी टीम 111 तक पहुँचने में 64 गेंदें लगीं और नौ विकेट गए। भारत के छहों गेंदबाज़ों में से पाँच को विकेट मिला और किसी का इकॉनमी रेट 7.3 से ऊपर नहीं गया।
टॉस का फ़ैसला और दुबई का पार स्कोर
फ़ाइनल से पहले इस टूर्नामेंट के चौदह मैच हो चुके थे, सारे के सारे दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में। उन चौदह में ग्यारह बार टॉस जीतने वाली कप्तान ने पहले गेंदबाज़ी चुनी। जिन तीन मैचों में पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला हुआ, तीनों बार वह फ़ैसला पाकिस्तान की फ़ातिमा सना का था।
हरमनप्रीत कौर ने रविवार को बल्लेबाज़ी चुनी। इस टूर्नामेंट में यह चौथा ऐसा फ़ैसला था और पाकिस्तान के बाहर पहला।
ग्रुप चरण के बारह मैचों में पहली पारी का औसत स्कोर 117 रन रहा और बीच वाला स्कोर 120। बारह में से दो बार पहली पारी 150 के पार गई, और दोनों बार बल्लेबाज़ी भारत की थी: थाईलैंड के ख़िलाफ़ 159 और हांगकांग के ख़िलाफ़ 193। बाक़ी दस पारियों में सबसे बड़ा स्कोर पाकिस्तान का 143 रहा।
दोनों सेमीफ़ाइनल में भी टॉस जीतने वाली कप्तान ने गेंदबाज़ी ही चुनी थी: 10 सितंबर को बांग्लादेश की निगार सुल्ताना और 11 सितंबर को ख़ुद अटापट्टू।
पहले बल्लेबाज़ी करने वाली टीम ग्रुप चरण के बारह में से आठ मैच जीती। दोनों सेमीफ़ाइनल जोड़ लें तो चौदह में से नौ।
पाँच पारियों में सलामी जोड़ी के 449 रन
पूरे टूर्नामेंट में भारत ने पाँच पारियाँ खेलीं और 741 रन बनाए। इनमें 20 रन अतिरिक्त के थे, यानी बल्ले से 721। उन 721 में से 449 दो बल्लेबाज़ों के हैं: शेफ़ाली वर्मा के 236 और स्मृति मंधाना के 213।
मध्यक्रम का सवाल फ़ाइनल से पहले ही खड़ा था, और उसका हिसाब अलग से देखने लायक़ है। पहली चार पारियों में भारत ने 558 रन बनाए, जिनमें 17 अतिरिक्त के थे। बल्ले से 541, और उनमें से 322 इन्हीं दो बल्लेबाज़ों के। दोनों ने मिलकर 189 गेंदों पर वे 322 रन बनाए, स्ट्राइक रेट 170 के आसपास।
तीसरे से सातवें नंबर के बीच जिन पाँच बल्लेबाज़ों ने बल्लेबाज़ी की, उन्होंने उन्हीं चार मैचों में 198 गेंदें खेलीं और 191 रन बनाए। स्ट्राइक रेट 96।
नाम-दर-नाम यह ऐसा दिखता है। प्रतिका रावल ने चारों मैच तीसरे नंबर पर खेले और 57 गेंदों पर 56 रन बनाए। हरमनप्रीत कौर ने 64 गेंदों पर 57, ऋचा घोष ने 30 गेंदों पर 32, दीप्ति शर्मा ने 28 गेंदों पर 31, और भारती फुलमाली ने 19 गेंदों पर 15। कप्तान दो बार नाबाद लौटीं, इसलिए उनका औसत 28 का बनता है। टी20 में जो आँकड़ा बताता है कि बल्लेबाज़ ने पारी को कितनी दूर खींचा, वह स्ट्राइक रेट है, और चार मैचों में उनका स्ट्राइक रेट 89 रहा।
ऋचा घोष, भारती फुलमाली और दीप्ति शर्मा ने चार मैचों में मिलाकर 77 गेंदें खेलीं। तेरह ओवर से कम।
इसकी एक वजह मौक़े की है। पाकिस्तान के 55 रन का पीछा करते हुए भारत को 8.4 ओवर लगे और तीन ही विकेट गिरे। हांगकांग के ख़िलाफ़ मंधाना 64 गेंदों पर 124 बनाकर उन्नीसवें ओवर तक टिकी रहीं, और उनके बाद बल्लेबाज़ी के लिए कुछ बचा ही नहीं था।
पर जहाँ मौक़ा मिला, वहाँ भी। थाईलैंड के ख़िलाफ़ नौ ओवर बाद भारत 91 पर एक विकेट खोकर खड़ा था, और आख़िरी ग्यारह ओवरों में उसने आठ विकेट गँवाकर 68 रन जोड़े। बांग्लादेश के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में 13.5 ओवर पर स्कोर 92 और तीन विकेट था, और पारी 149 पर छह विकेट खोकर ख़त्म हुई।
एक और आँकड़ा इसी पन्ने पर है: मंधाना के पहले चार मैचों के 154 रनों में 124 एक ही पारी के हैं। बाक़ी तीन में उन्होंने 19, 9 और 2 बनाए।
फ़ाइनल ने इस तस्वीर को बदला नहीं, बस उसे दोहरा दिया। पाँच मैचों को जोड़कर तीसरे से सातवें नंबर के बल्लेबाज़ों के 240 गेंदों पर 244 रन हैं, स्ट्राइक रेट 102। सलामी जोड़ी के 267 गेंदों पर 449।
श्रीलंका दुबई तक कैसे पहुँची
श्रीलंका ने ग्रुप बी के तीनों मैच जीते और सेमीफ़ाइनल में पाकिस्तान को हराया। उन चार में से तीन मैचों में उसका शीर्षक्रम गिरा, और हर बार टीम को नीचे से उठाया गया।
29 अगस्त को संयुक्त अरब अमीरात 79 रन पर सिमटा और श्रीलंका ने 7.5 ओवर में लक्ष्य पा लिया। अटापट्टू 25 गेंदों पर 48 नाबाद रहीं। पूरे टूर्नामेंट में उनकी बल्ले से वही एक बड़ी पारी है।
2 सितंबर को इंडोनेशिया के ख़िलाफ़ श्रीलंका 9.3 ओवर में 45 रन पर पाँच विकेट खो चुकी थी। निलक्षी डी सिल्वा ने 35 गेंदों पर 50 बनाकर स्कोर 124 तक पहुँचाया। फिर अटापट्टू गेंद लेकर आईं और 3.3 ओवर में पाँच रन देकर सात विकेट ले लिए। इंडोनेशिया 49 पर सिमट गई। उस पारी की आख़िरी तीन गेंदों पर तीन विकेट गिरे, जो श्रीलंका की महिला टीम की टी20 अंतरराष्ट्रीय में पहली हैट्रिक है।
6 सितंबर को बांग्लादेश के 114 रन का पीछा करते हुए श्रीलंका 9.3 ओवर में 44 पर पाँच थी। हर्षिता समरविक्रमा ने 37 गेंदों पर 48 नाबाद बनाकर मैच चार गेंद बाक़ी रहते जिता दिया।
11 सितंबर के सेमीफ़ाइनल में पाकिस्तान ने पाँच विकेट पर 130 रन बनाए, जिनमें कप्तान फ़ातिमा सना के 36 गेंदों पर 47 नाबाद थे। जवाब में श्रीलंका ने 1.3 ओवर के भीतर दोनों सलामी बल्लेबाज़ पाँच रन पर खो दिए, और 33 तक चार विकेट गिर चुके थे। समरविक्रमा ने 31 गेंदों पर 36 और कविशा दिलहारी ने 33 गेंदों पर 33 बनाए, और श्रीलंका आठ गेंद बाक़ी रहते जीत गई। उस मैच में फ़ातिमा सना ने 3.4 ओवर में चार विकेट भी लिए, और हारने वाली टीम से होते हुए भी मैच की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुनी गईं।
दंबुला में श्रीलंका के लिए जो ग्यारह खिलाड़ी उतरी थीं, उनमें से सात इस टूर्नामेंट में खेलीं: अटापट्टू, समरविक्रमा, कविशा दिलहारी, निलक्षी डी सिल्वा, हसिनी परेरा, सुगंदिका कुमारी और विश्मी गुणरत्ने। बाक़ी चार ने यहाँ एक भी मैच नहीं खेला, और उनमें वह विकेटकीपर भी हैं जो दंबुला में दस्ताने पहने थीं, अनुष्का संजीवनी। भारत ने उस ग्यारह में से पाँच खिलाड़ी बरक़रार रखीं, श्रीलंका ने सात।
टूर्नामेंट भर में समरविक्रमा ने चार पारियों में 98 रन बनाए, जिनमें बांग्लादेश के ख़िलाफ़ 48 नाबाद सबसे बड़ी पारी है। अटापट्टू के पाँच पारियों में 99 रन हैं, जिनमें 48 पहले ही मैच के हैं।
दंबुला, 28 जुलाई 2024
पिछला फ़ाइनल दो साल पहले श्रीलंका में हुआ था, रंगीरी दंबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में। उस दिन भी टॉस भारत ने जीता था और उस दिन भी भारत ने पहले बल्लेबाज़ी चुनी थी।

भारत ने बीस ओवर में छह विकेट पर 165 रन बनाए। शेफ़ाली वर्मा 19 गेंदों पर 16 रन बनाकर कविशा दिलहारी की गेंद पर एलबीडब्ल्यू हुईं, स्कोर 44 पर एक। स्मृति मंधाना ने 46 गेंदों पर 60 रन बनाए और दस चौके लगाए, पर सोलहवें ओवर की पाँचवीं गेंद पर वे आउट हुईं और भारत 133 पर पाँच हो गया। जेमिमा रोड्रिग्स 16 गेंदों पर 29 बनाकर रन आउट हुईं। ऋचा घोष ने 14 गेंदों पर 30 बनाए और उन्नीसवें ओवर में लौटीं।
श्रीलंका ने 18.4 ओवर में दो विकेट खोकर 167 रन बना लिए, यानी आठ गेंद बाक़ी रहते।
उस पारी का ढाँचा यह था। विश्मी गुणरत्ने दूसरे ओवर में रन आउट हुईं, स्कोर 7 पर एक। फिर कप्तान चमारी अटापट्टू ने 43 गेंदों पर 61 रन बनाए, नौ चौके और दो छक्के, और बारहवें ओवर में दीप्ति शर्मा की गेंद पर बोल्ड हुईं। स्कोर तब 94 था। बचे हुए 73 रन हर्षिता समरविक्रमा और कविशा दिलहारी ने बिना आउट हुए जोड़ दिए, और वह साझेदारी चालीस गेंदों से कम में बनी। समरविक्रमा 50 गेंदों पर 69 नाबाद, दिलहारी 16 गेंदों पर 30 नाबाद। दिलहारी ने उसी मैच में चार ओवर में 36 रन देकर दो विकेट भी लिए थे।
भारत की गेंदबाज़ी का हिसाब उस रात यह था: राधा यादव चार ओवर में 47 रन देकर बिना विकेट, तनुजा कँवर चार ओवर में 34 देकर बिना विकेट, पूजा वस्त्रकार 3.4 ओवर में 29 देकर बिना विकेट, रेणुका सिंह तीन ओवर में 23 देकर बिना विकेट। पूरी पारी में भारत का इकलौता विकेट दीप्ति शर्मा का था।
श्रीलंका का यह पहला एशिया कप था। उससे पहले वह पाँच बार ख़िताबी मुक़ाबले में पहुँचकर हार चुकी थी।
उस ग्यारह में से पाँच
दंबुला में जो ग्यारह खिलाड़ी उतरी थीं, उनमें से पाँच दुबई के इस फ़ाइनल में भी थीं: शेफ़ाली वर्मा, स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर, ऋचा घोष और दीप्ति शर्मा।
बाक़ी छह में से तीन इस एशिया कप के पंद्रह खिलाड़ियों के दल में ही नहीं थीं: उमा छेत्री, पूजा वस्त्रकार और तनुजा कँवर। जेमिमा रोड्रिग्स दल में चुनी गई थीं, पर हैमस्ट्रिंग की चोट के बाद उनकी जगह प्रतिका रावल को लिया गया। राधा यादव और रेणुका सिंह दल में रहीं और टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं खेलीं।
दंबुला में जिन चार गेंदबाज़ों ने मिलकर 14.4 ओवर में 133 रन दिए थे और एक भी विकेट नहीं लिया था, उनमें से दो अब दल से बाहर हैं और दो ने इस टूर्नामेंट में एक गेंद नहीं डाली।
उनकी जगह जो गेंदबाज़ी भारत ने फ़ाइनल से पहले के चार मैचों में की, उसके आँकड़े ये हैं। दीप्ति शर्मा ने 11.2 ओवर डाले, 40 रन दिए और 11 विकेट लिए। श्री चरणी ने 14.2 ओवर में 47 रन देकर आठ विकेट लिए, प्रेमा रावत ने 15 ओवर में 53 रन देकर छह, और नंदनी शर्मा ने 11 ओवर में 48 रन देकर सात। क्रांति गौड़ ने 11 ओवर में 53 रन दिए और एक विकेट लिया। उन चार मैचों में भारत के गेंदबाज़ों को कुल 34 विकेट मिले, और उनमें से 32 इन्हीं चार नामों के थे।
प्रतिका रावल ने अपना पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच 30 अगस्त को इसी टूर्नामेंट में खेला। श्री चरणी ने जून 2025 में पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय खेला था, और बांग्लादेश के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में उनका पचासवाँ टी20 विकेट पूरा हुआ। फ़ाइनल के चार विकेट मिलाकर वे अब 54 पर हैं।
फ़ाइनल से पहले के चारों मैच भारत ने एक ही ग्यारह खिलाड़ियों से खेले। यह उस दल की स्थिरता भी बताता है और यह भी कि सामने कौन था: थाईलैंड, हांगकांग, पाकिस्तान और बांग्लादेश। बदलाव फ़ाइनल में आया, और एक ही आया: तीसरे नंबर की प्रतिका रावल बाहर हुईं और गुनालन कमलिनी अंदर। कमलिनी सातवें नंबर पर उतरीं और पाँच गेंदों पर 15 रन बनाकर नाबाद लौटीं।
एशिया कप के दस संस्करण और उनके विजेता
महिला एशिया कप 2004 में शुरू हुआ था। दुबई का यह फ़ाइनल इसका दसवाँ संस्करण था। उससे पहले नौ हो चुके हैं, और उनमें सात भारत ने जीते हैं।
पहला संस्करण अप्रैल 2004 में श्रीलंका में हुआ और उसमें दो ही टीमें थीं। भारत और श्रीलंका ने पाँच एकदिवसीय मैच खेले, भारत ने पाँचों जीते, और ख़िताब उसी सीरीज़ में तय हो गया। उस संस्करण में फ़ाइनल जैसा कोई मैच खेला ही नहीं गया।
अगले तीन संस्करण भी पचास ओवर के थे और तीनों के ख़िताबी मुक़ाबले में भारत के सामने श्रीलंका थी: 2005-06 में कराची, 2006 में जयपुर, 2008 में कुरुनेगला। 2008 के फ़ाइनल की गेंद-दर-गेंद पर्ची आज भी मिलती है। भारत ने पचास ओवर में सात विकेट पर 260 रन बनाए, श्रीलंका 83 पर सिमटी, और जीत 177 रन की रही।
2012 से टूर्नामेंट टी20 में चला गया। उस साल ग्वांगझू में जो फ़ाइनल हुआ, वह इस टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे कम स्कोर वाला ख़िताबी मुक़ाबला है: भारत बीस ओवर में 81 पर ढेर, पाकिस्तान 19.1 ओवर में 63 पर, जीत 18 रन से। 2016 में बैंकॉक में भारत ने पाँच विकेट पर 121 बनाए, पाकिस्तान छह विकेट पर 104 तक पहुँची, अंतर 17 रन का।
2018 का फ़ाइनल कुआलालंपुर में था, और उसी मैच में भारत पहली बार हारा। भारत ने नौ विकेट पर 112 बनाए और बांग्लादेश ने सात विकेट खोकर वह लक्ष्य पा लिया। बांग्लादेश का वह पहला एशिया कप था। 2022 में सिलहट में भारत ने श्रीलंका को 65 पर रोका और 8.3 ओवर में दो विकेट खोकर जीत लिया। 2024 में दंबुला में श्रीलंका ने भारत को आठ विकेट से हराया, और वह श्रीलंका का पहला एशिया कप था।
भारत की दोनों हारें ख़िताबी मुक़ाबले में हैं, और दोनों बार जीतने वाली टीम का वह पहला ख़िताब था।
टी20 के छह ख़िताबी मुक़ाबलों में टॉस का हिसाब भी अपने आप में एक पंक्ति है। भारत ने उनमें से चार बार टॉस जीता है, 2012, 2016, 2024 और रविवार को, और चारों बार पहले बल्लेबाज़ी चुनी है।
नौ संस्करणों में भारत नौ बार ख़िताबी मुक़ाबले तक पहुँचा है। श्रीलंका छह बार, पाकिस्तान दो बार, बांग्लादेश एक बार।
मेज़बानी की सूची भी इस संस्करण के साथ एक जगह बदली। 2004 से 2024 तक यह टूर्नामेंट श्रीलंका, पाकिस्तान, भारत, चीन, थाईलैंड, मलेशिया और बांग्लादेश में हुआ था। संयुक्त अरब अमीरात पहला मेज़बान है जो पश्चिम एशिया से है।
13 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस की स्कूल-असेंबली सुर्ख़ियों वाली सूची में लिखा था कि भारत उस रात आठवें एशिया कप ख़िताब के लिए उतर रहा है। संस्करण-दर-संस्करण गिनने पर यह आँकड़ा सही निकलता है, क्योंकि सात ख़िताब पहले से थे, और रविवार की जीत के साथ आठवाँ पूरा हुआ। जो संख्या इसके साथ अक्सर ग़लत छपती है वह संस्करणों की है। यह दसवाँ संस्करण था, नौवाँ नहीं। और भारत की हारें दो हैं, एक नहीं।
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