दलीप ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में 270 और 99 बनाने वाले दोनों कप्तान इंडिया ए की उन टीमों में नहीं हैं जो उसी हफ़्ते चुनी गईं
चेन्नई में पूर्व क्षेत्र ने 708 बनाकर दक्षिण क्षेत्र पर 372 रन की पहली पारी की बढ़त ली और चौथे दिन का खेल ख़त्म होने तक कुल बढ़त 584 रन थी। उसी बुधवार को ऑस्ट्रेलिया ए के दौरे की दोनों इंडिया ए टीमें घोषित हुईं। ईशान किशन और तिलक वर्मा, दोनों फ़ाइनल के कप्तान, किसी सूची में नहीं हैं; पूर्व क्षेत्र का दूसरा विकेटकीपर कुमार कुशाग्र है।

चेपॉक की तीन निचली दीर्घाओं में उस फ़ाइनल के पहले दिन टिकट नहीं लगा था। बीसीसीआई और तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन ने वहाँ मुफ़्त प्रवेश रखा, और चेन्नई के मैदान में हिंदी के नारे सुनाई देने लगे। ईशान किशन बल्लेबाज़ी करने उतरे तो दीर्घा से "एक बिहारी, सब पे भारी" उठा। वैभव सूर्यवंशी उतरे तो भीड़ ने उसी नारे को मोड़ दिया, "दो बिहारी, सब पे भारी।" मोहम्मद सिराज गेंद लेकर आए तो आवाज़ आई, "सिराज भाई, स्टंप उड़ाओ।"
तीन दिन बाद जो दो टीमें चुनी गईं, उनमें इन तीनों में से कोई नहीं है।
बुधवार, 9 सितंबर को राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया ए के ख़िलाफ़ इंडिया ए की दो टीमें घोषित कीं। उस दोपहर फ़ाइनल का चौथा दिन चल रहा था। पहली पारी में 270 बनाने वाले किशन दोनों सूचियों से बाहर हैं। 99 बनाने वाले दक्षिण क्षेत्र के कप्तान तिलक वर्मा भी।
चौथे दिन खेल यहाँ रुका
बुधवार शाम खेल ख़त्म होने तक पूर्व क्षेत्र पहली पारी में 708 और दूसरी पारी में 51 ओवर में पाँच विकेट पर 212 रन बना चुका था। दक्षिण क्षेत्र 107.3 ओवर में 336 पर सिमटा। कुल बढ़त 584 रन। कुमार कुशाग्र 34 और मो. कौनैन क़ुरैशी 26 पर नाबाद लौटे, फ़ॉलोऑन नहीं दिया गया। इंडियन एक्सप्रेस की चेन्नई से भेजी रिपोर्ट, जो शाम 7:42 बजे अद्यतन हुई, यही स्थिति दर्ज करती है। पाँचवाँ और आख़िरी दिन गुरुवार, 10 सितंबर को है। किसी स्रोत ने अब तक विजेता घोषित नहीं किया। मैदानी अंपायर रोहन पंडित और वीरेंद्र शर्मा हैं।
708 का ब्योरा
पूर्व क्षेत्र की पहली पारी 163 ओवर चली, रन गति 4.34। किशन ने 334 गेंदों पर 270 बनाए, 30 चौके और सात छक्के। अपनी 301वीं गेंद के बाद वे ऐंठन के कारण 250 पर मैदान छोड़ गए थे और पानी पीकर लौटे; उस पारी का ब्योरा हमने 8 सितंबर को अलग से लिखा था। कुमार कुशाग्र ने 132 गेंदों पर 101, शिखर मोहन ने 120 गेंदों पर 85 और अभिमन्यु ईश्वरन ने 86 गेंदों पर 72 बनाए; ईश्वरन रन आउट हुए। किशन और कुशाग्र की पाँचवें विकेट की साझेदारी 241 से 471 तक चली, यानी 230 रन। दोनों झारखंड के विकेटकीपर हैं।
270 या 273, किसका सर्वश्रेष्ठ
इंडियन एक्सप्रेस ने 270 को किशन के "करियर का सर्वश्रेष्ठ" स्कोर लिखा। विकिपीडिया पर उनके प्रोफ़ाइल में, जो 1 फ़रवरी 2026 तक अद्यतन है, प्रथम श्रेणी का सर्वोच्च स्कोर 273 दर्ज है। दोनों आँकड़े यहाँ जैसे हैं वैसे रखे जा रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस यह भी लिखता है कि 270 दलीप ट्रॉफ़ी के किसी फ़ाइनल में दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है, रमन लांबा के 1987 के 320 के बाद। याहू स्पोर्ट्स की रिपोर्ट इसे टूर्नामेंट के इतिहास का आठवाँ सबसे बड़ा स्कोर बताती है।
सिराज के 25 ओवर, 140 रन
दक्षिण क्षेत्र के तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज ने पहली पारी में 25 ओवर डाले, तीन मेडन, 140 रन, कोई विकेट नहीं। श्रेयस गोपाल ने 42 ओवर में 165 देकर दो और त्रिपुराना विजय ने 42 ओवर में 180 देकर चार विकेट लिए। दूसरी पारी में सिराज के आँकड़े बदले: सात ओवर, दो मेडन, 17 रन, एक विकेट। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ पहले दिन की सुबह सीम के लिए मददगार परिस्थितियाँ थीं और सिराज ने छोटी तथा दिशाहीन गेंदें डालीं।
एक गेंदबाज़ कम होने का हिसाब
अनुकूल रॉय बल्लेबाज़ी करते हुए उँगली पर चोट खा बैठे और गेंदबाज़ी के लिए उपलब्ध नहीं रहे। बोझ ऑफ़ स्पिनर कौनैन क़ुरैशी पर आया। दक्षिण क्षेत्र की 107.3 ओवर की पारी में क़ुरैशी ने अकेले 39.3 ओवर डाले, आठ मेडन, 99 रन, दो विकेट। यानी पूरी पारी के एक तिहाई से ज़्यादा ओवर एक ही गेंदबाज़ के। स्कोरकार्ड में किशन का नाम भी गेंदबाज़ों में है, एक ओवर, आठ रन। तिलक वर्मा का विकेट क़ुरैशी को ही मिला, कॉट ऐंड बोल्ड।
211 गेंद और एक रन

तिलक ने 211 गेंदों पर 99 बनाए, नौ चौके, कोई छक्का नहीं, स्ट्राइक रेट 46.91। नौ विकेट गिर चुके थे और वे आख़िरी बल्लेबाज़ के रूप में लौटे। बीसीसीआई डोमेस्टिक के आधिकारिक खाते ने लिखा कि पवेलियन जाते कप्तान की सराहना पूर्व क्षेत्र के खिलाड़ियों ने की। उनसे पहले चमा मिलिंद ने 68 गेंदों पर 43 बनाए। देवदत्त पडिक्कल के स्कोर पर स्रोत बँटे हुए हैं: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुख्य हिस्से में 66 लिखा है, उसी रिपोर्ट के संक्षिप्त स्कोर में 62, और ESPN क्रिकइन्फ़ो के स्कोरकार्ड में 62 रन, 104 गेंद, चार चौके।
तिलक के आँकड़ों में जो जुड़ता नहीं
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ तिलक के 24 प्रथम श्रेणी मैचों में आठ शतक और सात अर्धशतक हैं, औसत 58 से ऊपर। विकिपीडिया का उनका प्रोफ़ाइल, जो 13 मार्च 2026 तक अद्यतन है, 23 मैच, 1,562 रन, 50.38 का औसत और सात शतक तथा पाँच अर्धशतक दर्ज करता है, सर्वोच्च स्कोर 121। इस टूर्नामेंट में दक्षिण क्षेत्र सीधे सेमीफ़ाइनल में उतरा, इसलिए तिलक ने सिर्फ़ दो मैच खेले। मार्च तक के 23 में ये दो जोड़ें तो 25 बनते हैं। अख़बार 24 लिखता है।
"लाल गेंद मेरा ए-गेम है"
चौथे दिन के बाद तिलक ने कहा, "ईमानदारी से कहूँ तो यह अहम पारी है, पर मेरा ध्यान सिर्फ़ इस पर था कि टीम को क्या चाहिए। मैं पहले भी ज़्यादा जोखिम ले सकता था, पर योजना यही थी कि सत्र दर सत्र चलें।" उन्होंने यह भी कहा, "मैं सबसे कहता हूँ कि मुझे भारत के लिए लाल गेंद का क्रिकेट खेलना है।" पिछले साल हैम्पशायर के लिए काउंटी खेलते हुए उन्होंने 256 गेंदों पर 112 और एसेक्स के ख़िलाफ़ 241 गेंदों पर शतक बनाया था।
जिस दोपहर टीमें चुनी गईं
ऑस्ट्रेलिया ए के ख़िलाफ़ इंडिया ए की बहुदिवसीय टीम की कप्तानी देवदत्त पडिक्कल को मिली है, उपकप्तान साई सुदर्शन। एकदिवसीय टीम के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ हैं। हार्दिक पंड्या का नाम फ़िटनेस मंज़ूरी की शर्त के साथ जोड़ा गया है; वे मई में मुंबई इंडियंस के लिए खेलने के बाद से मैदान से बाहर हैं। चार दिनी मैच 22 से 25 सितंबर और 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पुडुचेरी में हैं, तीन एकदिवसीय मैच 6, 9 और 11 अक्टूबर को उसी शहर में।
दोनों कप्तान सूची से बाहर
बहुदिवसीय टीम में पूर्व क्षेत्र के दूसरे विकेटकीपर कुमार कुशाग्र हैं, जिन्होंने फ़ाइनल में 101 बनाए। दक्षिण क्षेत्र के विकेटकीपर नारायण जगदीशन भी हैं, और शेख़ रशीद भी, जिन्होंने फ़ाइनल की पहली पारी में 27 बनाए। पडिक्कल को कप्तान उस दिन घोषित किया गया जिस दिन वे चेन्नई में उसी फ़ाइनल में खेल रहे थे। फ़ाइनल के दोनों कप्तान किसी भी टीम में नहीं हैं। तिलक इसी महीने एशियाई खेलों के लिए भारत की टी20 टीम के साथ उपकप्तान के तौर पर जाएँगे।
किशन का लाल गेंद का रिकॉर्ड
विकिपीडिया पर दर्ज आँकड़ों के मुताबिक़, 1 फ़रवरी 2026 तक किशन के 64 प्रथम श्रेणी मैचों में 3,893 रन हैं, औसत 39.72, नौ शतक और 19 अर्धशतक। टेस्ट में उनके नाम दो मैच, 78 रन और 78.00 का औसत है, सर्वोच्च नाबाद 52। इंडियन एक्सप्रेस की 7 सितंबर की रिपोर्ट कहती है कि टेस्ट टीम में ऋषभ पंत आगे हैं, ध्रुव जुरेल विशेषज्ञ बल्लेबाज़ के तौर पर खेल रहे हैं, और इंडिया ए में जगदीशन क्रम में ऊपर हैं। दो दिन बाद घोषित सूची में जगदीशन का नाम है, किशन का नहीं।
करुण नायर, जो खेले ही नहीं
पिछले रणजी सत्र में 699 रन बनाने वाले करुण नायर न सेमीफ़ाइनल की अंतिम एकादश में थे, न फ़ाइनल की। दक्षिण क्षेत्र के कोच विक्रम वर्मा ने कहा, "हर टीम के पास दो बाएँ हाथ के स्पिनर हैं, इसलिए हमें लगा कि मध्य क्रम में एक बाएँ हाथ का बल्लेबाज़ हमें मौक़ा देगा।" वर्मा ने यह भी कहा कि नायर पारिवारिक कारणों से अनुमति लेकर लौट गए थे। सोमवार को 34 साल के नायर चिन्नास्वामी स्टेडियम में केएससीए सचिव एकादश के लिए खेले और 104 बनाए। अगले दिन उन्होंने लिखा, "इनएक्सप्लिकेबल कहना कम होगा।"
चार दिन में 25 विकेट

लाल मिट्टी की यह पिच पाँच दिन चलने के लिए बनाई गई थी। रेवस्पोर्ट्ज़ पर भरत रामराज लिखते हैं कि चार दिन में कुल 25 विकेट गिरे और चौथे दिन के पहले घंटे में सीम से हिलती एक भी गेंद याद नहीं पड़ती। तापमान तीस के मध्य में था और पूर्व क्षेत्र के तेज़ गेंदबाज़ों ने चार ओवर से लंबा कोई स्पेल नहीं डाला। मुकेश कुमार ने कहा, "यहाँ पाँच-छह ओवर के स्पेल काम नहीं करते, उनसे ऐंठन आती है, इसलिए हमने उन्हें तीन ओवर का किया।" उनके आँकड़े 19 ओवर में 62 रन देकर तीन विकेट रहे, शमी के 16 ओवर में 42 देकर दो।
92 मैच, 21 जीत
दलीप ट्रॉफ़ी में पूर्व क्षेत्र का पूरा हिसाब 92 मैच, 21 जीत, 46 हार और 25 ड्रॉ है। पश्चिम क्षेत्र ने 115 मैचों में 58 जीते, उत्तर ने 114 में 53, दक्षिण ने 110 में 47 और मध्य ने 104 में 28। पाँचों मूल क्षेत्रों में सबसे कम जीत पूर्व क्षेत्र की हैं और हार ठीक आधे मैचों में। फ़ाइनल की अलग तालिका में पूर्व क्षेत्र सात फ़ाइनल में दो जीत के साथ दर्ज है, जीत का अनुपात 28.57 फ़ीसदी, जो हर क्षेत्रीय टीम से कम है।
आठवाँ फ़ाइनल, पाँच हार
विजेताओं की सूची से पूर्व क्षेत्र के पिछले सात फ़ाइनल गिने जा सकते हैं। 1970-71 में दक्षिण क्षेत्र ने उन्हें दस विकेट से हराया। 1980-81 और 1981-82 में पश्चिम क्षेत्र ने लगातार दो बार पहली पारी की बढ़त पर ख़िताब लिया। 2003-04 में उत्तर क्षेत्र 59 रन से जीता और 2005-06 में पश्चिम क्षेत्र पाँच विकेट से। जीत दो बार मिली, 2011-12 में इंदौर के होलकर स्टेडियम में मध्य क्षेत्र को एक पारी और 20 रन से हराकर, और अगले साल चेन्नई में।
वही चेपॉक, अक्टूबर 2012
पिछला ख़िताब जिस मैदान पर तय हुआ था, वह यही है। 2012-13 का फ़ाइनल 21 से 25 अक्टूबर 2012 तक एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम में मध्य क्षेत्र के ख़िलाफ़ खेला गया। पूर्व क्षेत्र 101.5 ओवर में 232 पर आउट हुआ, ईशांक जग्गी नाबाद 100 पर रहे। मध्य क्षेत्र 83.5 ओवर में 189 पर सिमटा, तन्मय श्रीवास्तव ने 94 बनाए। जलज सक्सेना ने पहली पारी में 5/62 और इरेश सक्सेना ने दूसरी में 5/58 लिए। मैच ड्रॉ रहा और पूर्व क्षेत्र पहली पारी की बढ़त पर जीता। उस नतीजे से इस फ़ाइनल के आख़िरी दिन तक 13 साल, 10 महीने और 16 दिन बनते हैं; रिपोर्टें इसे 14 साल लिखती हैं।
708 कोई कीर्तिमान नहीं है
दलीप ट्रॉफ़ी का सबसे बड़ा टीम स्कोर उत्तर क्षेत्र का 868 है, पश्चिम क्षेत्र के ख़िलाफ़, 1987-88 में। उसी सत्र का रमन लांबा का 320 सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है। सबसे कम स्कोर की तालिका में दो नाम बराबर हैं और दोनों के सामने दक्षिण क्षेत्र है: उत्तर क्षेत्र 48, सन 1961 में, और पूर्व क्षेत्र 48, सन 1969 में। गेंदबाज़ी के दोनों कीर्तिमान भी पूर्व क्षेत्र के नाम हैं। देबाशीष मोहंती ने दक्षिण क्षेत्र के ही ख़िलाफ़ एक पारी में 10/46 और मैच में 14/91 लिए।
जिनके नाम पर ट्रॉफ़ी है

कुमार श्री दलीपसिंहजी का जन्म 13 जून 1905 को नवानगर में हुआ, जो आज जामनगर है। रणजीतसिंहजी, जिनके नाम पर रणजी ट्रॉफ़ी है, उनके चाचा थे। पढ़ाई राजकोट, चेल्टनहैम और कैम्ब्रिज में हुई। ससेक्स के लिए 1926 से 1932 तक खेले और 1931 में उसके कप्तान बने। 1930 में नॉर्थैम्पटनशायर के ख़िलाफ़ एक ही दिन में 333 रन बनाए, जो आज भी ससेक्स के किसी बल्लेबाज़ का सर्वोच्च स्कोर है। टेस्ट उन्होंने इंग्लैंड के लिए खेले, 12 मैचों में 995 रन, औसत 58.52। भारत के लिए एक भी नहीं।
पहला फ़ाइनल और ढाँचे के फेरबदल
दलीपसिंहजी की मृत्यु 5 दिसंबर 1959 को बंबई में हुई और टूर्नामेंट 1961-62 में शुरू हुआ, उनके जाने के दो साल के भीतर। पहला ख़िताब पश्चिम क्षेत्र ने जीता, दक्षिण क्षेत्र को दस विकेट से हराकर। 1993-94 से लीग, फिर चार सत्र नॉकआउट, फिर 2000-01 से तीन सत्र लीग। 2002-03 में रणजी समूहों के आधार पर पाँच टीमें बनीं और वह प्रयोग एक ही साल चला। 2003-04 से पाँच क्षेत्रों के साथ एक विदेशी मेहमान टीम जुड़ी, पहली बार इंग्लैंड ए। मेहमान टीम 2009-10 से हटा दी गई।
गुलाबी गेंद के तीन साल
2015-16 में टूर्नामेंट हुआ ही नहीं। जून 2016 में बीसीसीआई ने घोषणा की कि दलीप ट्रॉफ़ी दूधिया रोशनी में और गुलाबी गेंद से खेली जाएगी। 2016-17 में क्षेत्रीय टीमों की जगह बोर्ड की चुनी तीन टीमें आईं, इंडिया रेड, इंडिया ब्लू और इंडिया ग्रीन, जो राउंड रॉबिन खेलतीं और शीर्ष दो फ़ाइनल में जातीं। पहला ख़िताब इंडिया ब्लू ने 355 रन से जीता। उस सत्र में सबसे ज़्यादा रन चेतेश्वर पुजारा के थे, 453, और सबसे ज़्यादा विकेट कुलदीप यादव के, 17।
गुलाबी गेंद क्यों छूटी
विकिपीडिया का मुख्य पृष्ठ लिखता है कि 2016-17 से 2019-20 तक सभी मैच दूधिया रोशनी में गुलाबी गेंद से खेले गए। उसी विश्वकोश का 2019-20 का पृष्ठ इसके उलट कहता है: उस सत्र के मैच दिन में, लाल गेंद से हुए। फ़ाइनल पहले दिन-रात का घोषित हुआ, फिर बदल दिया गया, और वजह खिलाड़ियों की पसंद बताई गई। ESPN क्रिकइन्फ़ो की 4 सितंबर 2019 की रिपोर्ट में इंडिया ग्रीन के कप्तान फ़ैज़ फ़ज़ल का कहना दर्ज है, "सच कहूँ तो गुलाबी गेंद मुझे कभी पसंद नहीं आई।" जयदेव उनादकट ने भारतीय परिस्थितियों में उसके व्यवहार पर सवाल उठाया।
बोर्ड का अपना बयान बदला
उसी रिपोर्ट में बीसीसीआई के महाप्रबंधक सबा करीम पहले कहते हैं कि फ़ाइनल दिन-रात का होगा, फिर कहते हैं, "यह कभी दिन-रात का मैच होना ही नहीं था।" शिकायतें ठोस थीं। पुरानी होने पर गेंद में न सीम बचती, न रिवर्स स्विंग, और सिलाई जल्दी बैठ जाने से स्पिनरों की पकड़ ख़राब होती। लाह उतरने पर गेंद गहरी पड़ जाती और रोशनी में दिखनी मुश्किल हो जाती। अंपायरों ने भी यही दर्ज कराया। इस प्रयोग को बंद करने का कोई औपचारिक कारण किसी दस्तावेज़ में दर्ज नहीं मिलता।
तीन सत्र की ग़ैरहाज़िरी, फिर वापसी
कोविड के कारण टूर्नामेंट तीन सत्र नहीं हुआ। 2022-23 में वह क्षेत्रीय ढाँचे के साथ लौटा, पाँच पुराने क्षेत्रों के साथ नया पूर्वोत्तर क्षेत्र जुड़ा, और मैच तमिलनाडु तथा पुडुचेरी में खेले गए। पश्चिम क्षेत्र ने दक्षिण क्षेत्र को 294 रन से हराकर अपना 19वाँ ख़िताब लिया। 2023 में दक्षिण क्षेत्र ने बदला चुकाया, 75 रन से। 2024-25 में ढाँचा फिर बदला और इंडिया ए, बी, सी, डी नाम की चार टीमें उतरीं।
2024-25 का फ़ाइनल हुआ या नहीं
यहाँ स्रोत सीधे टकराते हैं। विकिपीडिया की विजेता तालिका 2024-25 के सामने लिखती है कि अनंतपुर के आरडीटी स्टेडियम 'बी' में इंडिया ए ने इंडिया सी को 132 रन से हराया। उसी पृष्ठ का विवरण कहता है कि उस सत्र में नॉकआउट चरण था ही नहीं और सबसे ज़्यादा अंक वाली टीम विजेता बनी। इंडियन एक्सप्रेस की सूची तीसरी बात कहती है, "कोई फ़ाइनल नहीं, इंडिया ए कुल अंकों पर जीता।" तीनों जैसे हैं वैसे दर्ज हैं।
इस बार का रास्ता
2025-26 में मध्य क्षेत्र ने बेंगलुरु में दक्षिण क्षेत्र को छह विकेट से हराया, इसलिए इस बार वही दोनों सीधे सेमीफ़ाइनल में गए। 63वाँ संस्करण 23 अगस्त से 10 सितंबर तक, छह टीमें, सीधा नॉकआउट। पूर्व क्षेत्र ने पहले पूर्वोत्तर क्षेत्र को एक पारी और 210 रन से हराया, जहाँ शाहबाज़ अहमद ने 244 गेंदों पर 167 बनाए और अभिजित सरकार ने 5/20 लिए। सेमीफ़ाइनल में उसने गत विजेता मध्य क्षेत्र को चार विकेट से हराया; वैभव सूर्यवंशी ने 81 गेंदों पर 92 बनाए और मुकेश कुमार ने 4/44 के साथ मैच का पुरस्कार लिया।
पाँचवें दिन क्या बाक़ी है
गुरुवार की सुबह दक्षिण क्षेत्र के सामने 584 रन का अंतर है और पूर्व क्षेत्र के पाँच विकेट बचे हैं। ड्रॉ की सूरत में भी ख़िताब पहली पारी की बढ़त पर तय होगा, जैसा 2012 में इसी मैदान पर हुआ था और जैसा 1980-81 तथा 1981-82 में पूर्व क्षेत्र के ख़िलाफ़ हुआ था। इंडिया ए की बहुदिवसीय टीम का पहला मैच 22 सितंबर से पुडुचेरी में है, और 1 अक्टूबर से श्रीनगर में ईरानी कप शुरू होगा, जिसमें जम्मू-कश्मीर के सामने शेष भारत की टीम होगी। वह टीम भी राष्ट्रीय चयनकर्ता ही चुनेंगे।
स्रोतESPN क्रिकइन्फ़ो, दलीप ट्रॉफ़ी 2026-27 फ़ाइनल का पूरा स्कोरकार्ड, चौथे दिन के खेल के बाद की स्थिति, विकिपीडिया, 2026-27 दलीप ट्रॉफ़ी, टीमें, क्वार्टर फ़ाइनल, सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल का विवरण, विकिपीडिया, दलीप ट्रॉफ़ी का मुख्य पृष्ठ, विजेता सूची, टीमवार रिकॉर्ड और कीर्तिमान, इंडियन एक्सप्रेस, चेन्नई से वेंकट कृष्ण बी की रिपोर्ट, 9 सितंबर 2026, शाम 7:42 बजे अद्यतन, इंडियन एक्सप्रेस, ऑस्ट्रेलिया ए के ख़िलाफ़ इंडिया ए की दोनों टीमों की घोषणा, 9 सितंबर 2026, इंडियन एक्सप्रेस, 1961-62 से अब तक दलीप ट्रॉफ़ी के विजेताओं की पूरी सूची, 9 सितंबर 2026, इंडियन एक्सप्रेस, ईशान किशन की 270 रन की पारी पर रिपोर्ट, 7 सितंबर 2026, इंडियन एक्सप्रेस, करुण नायर के बाहर रहने और कोच विक्रम वर्मा के बयान पर रिपोर्ट, 8 सितंबर 2026, इंडियन एक्सप्रेस, तीसरे दिन की गेंदबाज़ी और मुकेश कुमार के बयान पर रिपोर्ट, 9 सितंबर 2026, रेवस्पोर्ट्ज़, चौथे दिन की मैच रिपोर्ट और संक्षिप्त स्कोर, 9 सितंबर 2026, रेवस्पोर्ट्ज़, भरत रामराज का पिच पर विश्लेषण, 9 सितंबर 2026, रेवस्पोर्ट्ज़, सिमरन गुप्ता की चेपॉक से रिपोर्ट, 6 सितंबर 2026, विकिपीडिया, 2019-20 दलीप ट्रॉफ़ी, लाल गेंद पर लौटने का ब्योरा, ESPN क्रिकइन्फ़ो, गुलाबी गेंद पर खिलाड़ियों और बोर्ड की राय, 4 सितंबर 2019, विकिपीडिया, 2012-13 दलीप ट्रॉफ़ी, पूर्व क्षेत्र के पिछले ख़िताब का स्कोरकार्ड, विकिपीडिया, कुमार श्री दलीपसिंहजी का जीवन और आँकड़े, विकिपीडिया, ईशान किशन का प्रोफ़ाइल, आँकड़े 1 फ़रवरी 2026 तक, विकिपीडिया, तिलक वर्मा का प्रोफ़ाइल, आँकड़े 13 मार्च 2026 तक