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हरमनप्रीत ने 150वीं बार कप्तानी की, और यह रिकॉर्ड जितना उनका है उतना ही एक नियम बदलने का

शुक्रवार को दुबई में भारत ने पाकिस्तान को सात विकेट से हराया। पाकिस्तान 55 पर सिमटा, जो टी20 में उसका सबसे कम स्कोर है। उसी मैच में हरमनप्रीत कौर दुनिया की पहली खिलाड़ी बनीं जिसने 150 टी20 अंतरराष्ट्रीय में किसी देश की कप्तानी की।

दुबई स्पोर्ट्स सिटी का क्रिकेट मैदान, जहाँ 5 सितंबर 2026 को यह मैच खेला गया
तस्वीर: https://www.flickr.com/photos/bilalmirza, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 2.0

शुक्रवार शाम दुबई में जो मैच हुआ, वह एकतरफ़ा था।

पाकिस्तान ने टॉस जीतकर बल्लेबाज़ी चुनी और 55 रन पर ढेर हो गया। यह टी20 अंतरराष्ट्रीय में उसका सबसे कम स्कोर है।

श्री चरणी ने सात रन देकर तीन विकेट लिए और प्रेमा रावत ने नौ रन देकर तीन। पाकिस्तान की तरफ़ से सबसे ज़्यादा 14 रन शवाल ज़ुल्फ़िक़ार ने बनाए, वह भी 14 गेंदों पर।

भारत ने 57 रन तीन विकेट खोकर बना लिए। हरमनप्रीत कौर 18 रन पर नाबाद रहीं, दीप्ति शर्मा 12 पर। श्री चरणी को मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।

पर इस मैच की सबसे बड़ी बात स्कोरकार्ड पर नहीं थी।

टॉस के लिए जब हरमनप्रीत मैदान पर आईं, तो वह किसी देश की कप्तानी करते हुए उनका 150वाँ टी20 अंतरराष्ट्रीय था।

ऐसा पहले किसी ने नहीं किया। पुरुष क्रिकेट में भी नहीं।

आँकड़ा क्या कहता है

इस मैच से पहले हरमनप्रीत 149 टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत की कप्तानी कर चुकी थीं।

उनमें से 86 भारत जीता, 57 हारा, एक टाई रहा और पाँच बेनतीजा।

जीत का अनुपात साठ फ़ीसदी के आसपास बैठता है, और यह उस दौर का है जिसमें भारतीय महिला टीम ने पहली बार विश्व कप जीता।

2025 का महिला विश्व कप भारत ने उन्हीं की कप्तानी में जीता।

वह फ़ाइनल 2 नवंबर 2025 को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेला गया। भारत ने पचास ओवर में सात विकेट पर 298 रन बनाए और दक्षिण अफ़्रीका 45.3 ओवर में 246 पर सिमट गया। जीत 52 रन से मिली।

यह भारत का तीसरा विश्व कप फ़ाइनल था। 2005 में ऑस्ट्रेलिया से हारा था, 2017 में इंग्लैंड से।

इससे पहले की सूची भी छोटी नहीं है। 2022 में इंग्लैंड में द्विपक्षीय एकदिवसीय शृंखला जीती, जो 1999 के बाद पहली थी। 2023 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहला टेस्ट जीता। 2025 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहली टी20 शृंखला।

यानी यह सिर्फ़ लंबे समय तक टिके रहने का रिकॉर्ड नहीं है।

कप्तानी कब शुरू हुई

हरमनप्रीत का जन्म 8 मार्च 1989 को हुआ और अंतरराष्ट्रीय पदार्पण 7 मार्च 2009 को, पाकिस्तान के ही ख़िलाफ़ एकदिवसीय मैच में।

पहली बार कप्तानी उन्होंने 2012 के एशिया कप के फ़ाइनल में की, और वह भी मजबूरी में। नियमित कप्तान मिताली राज और उपकप्तान झूलन गोस्वामी दोनों चोट के कारण बाहर थीं।

उस फ़ाइनल में भी सामने पाकिस्तान था, और भारत जीता।

नियमित टी20 कप्तानी उन्हें अक्तूबर 2018 में मिली, वेस्टइंडीज़ में हुए आईसीसी महिला विश्व टी20 के लिए।

यानी 2018 से 2026 तक, आठ साल में 150 मैच। औसतन साल में उन्नीस।

आठ साल में डेढ़ सौ मैच, यानी साल में औसतन उन्नीस
तस्वीर: Acabashi, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

अब उस सूची को देखिए जिसमें वे सबसे ऊपर हैं

रिकॉर्ड की ख़बर के साथ जो सूची छपी, वह इस तरह थी। हरमनप्रीत के बाद श्रीलंका की चमारी अटापट्टू, फिर ऑस्ट्रेलिया की मेग लैनिंग, फिर इंग्लैंड की हीथर नाइट, और उन्हीं के आसपास रवांडा की मारी डायने बिमेनयिमाना।

चार नाम जाने-पहचाने हैं। श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, तीनों पूर्ण सदस्य हैं और तीनों का महिला क्रिकेट दशकों पुराना है।

पाँचवाँ नाम रवांडा का है।

रवांडा में क्रिकेट का ढाँचा इस सदी में बना है, और वहाँ का पहला अंतरराष्ट्रीय स्तर का मैदान 2017 में खुला। वह देश किसी विश्व कप में नहीं खेला है।

फिर उसकी कप्तान इस सूची में ऊपर से चौथे-पाँचवें पायदान पर कैसे है, यही इस ख़बर का दूसरा हिस्सा है।

26 अप्रैल 2018 को एक नियम बदला

उस दिन आईसीसी ने एक घोषणा की, जिसका शीर्षक था कि उसके सदस्यों के बीच खेले जाने वाले सभी टी20 मैचों को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलेगा।

महिला टीमों के लिए यह 1 जुलाई 2018 से लागू हुआ। पुरुष टीमों के लिए 1 जनवरी 2019 से।

इससे पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय का दर्जा सीमित टीमों को मिलता था। इसके बाद आईसीसी के हर सदस्य देश की टीम, चाहे वह पूर्ण सदस्य हो या सहयोगी, अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने लगी।

रवांडा, युगांडा, तंज़ानिया, नाइजीरिया, जर्मनी, जापान, इंडोनेशिया, ऐसे दर्जनों देशों की महिला टीमों के मैच रातोंरात आँकड़ों की किताब में दर्ज होने लगे।

और यहीं से गिनती का गणित बदल गया।

सहयोगी देश ज़्यादा मैच क्यों खेलते हैं

यह उल्टा लगता है, पर वजह सीधी है।

भारत या ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम का कैलेंडर तीनों प्रारूपों में बँटा होता है। टेस्ट, एकदिवसीय और टी20। उसके ऊपर घरेलू लीग, विश्व कप और लंबी विदेशी यात्राएँ।

रवांडा जैसी सहयोगी टीम सिर्फ़ टी20 खेलती है। और वह जिन प्रतियोगिताओं में खेलती है, वे छोटे प्रारूप के गुच्छों में होती हैं। पूर्वी अफ़्रीका का कोई टूर्नामेंट दस दिन में आठ या दस मैच दे सकता है।

एक कप्तान के लिए इसका मतलब यह है कि वह एक हफ़्ते में उतने अंतरराष्ट्रीय मैच खेल सकती है जितने एक पूर्ण सदस्य टीम की कप्तान दो महीने में।

बिमेनयिमाना ने रवांडा की कप्तानी करते हुए सौ का आँकड़ा जून 2025 में पार किया था। यह उनके अपने बोर्ड ने घोषित किया था।

पुरुष क्रिकेट में सबसे ऊपर कौन है

तुलना इस रिकॉर्ड को उसकी असली जगह पर रख देती है।

पुरुषों के टी20 अंतरराष्ट्रीय में सबसे ज़्यादा बार कप्तानी करने वाले खिलाड़ी बाबर आज़म हैं। उन्होंने 2019 से पाकिस्तान की कप्तानी 85 मैचों में की।

रोहित शर्मा 69 मैचों में भारत के कप्तान रहे, जिनमें 49 जीत हैं। असग़र अफ़ग़ान ने अफ़ग़ानिस्तान की कप्तानी 52 मैचों में की।

यानी हरमनप्रीत का आँकड़ा पुरुष क्रिकेट के सबसे बड़े आँकड़े से लगभग दोगुना है।

इसकी वजह भी परिस्थिति में है, और उसे मान लेना चाहिए।

पुरुष क्रिकेट में कप्तानी तीन प्रारूपों में बँटी होती है और अक्सर अलग-अलग लोगों के पास रहती है। टी20 का कप्तान टेस्ट का कप्तान नहीं होता। बड़े देशों में खिलाड़ियों को आराम देने के लिए कप्तान बदलते रहते हैं, इसलिए एक ही नाम लगातार दर्ज नहीं होता।

महिला क्रिकेट में यह बँटवारा कम है। ज़्यादातर देशों में एक ही कप्तान सभी प्रारूपों में रहती है, और आराम देने की गुंजाइश भी कम होती है क्योंकि खिलाड़ियों का पूल छोटा है।

इसलिए 150 और 85 की सीधी तुलना पूरी तस्वीर नहीं देती। पर एक बात यह ज़रूर बताती है: महिला क्रिकेट में कप्तानी ज़्यादा लंबी चलती है, और उसके साथ ज़्यादा बोझ भी आता है।

भारतीय टीम। पुरुष क्रिकेट में कप्तानी अक्सर तीन प्रारूपों में बँटी होती है, महिला क्रिकेट में एक ही खिलाड़ी के पास रहती है
तस्वीर: Chubby Chandru, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 2.0

एक बात जो साफ़ कह देनी चाहिए

इस सूची के नीचे के हिस्से पर स्रोत आपस में नहीं मिलते।

रिकॉर्ड की ख़बर के साथ छपे आँकड़ों में अटापट्टू 121 मैच पर थीं, लैनिंग 100 पर, और नाइट तथा बिमेनयिमाना 96-96 पर।

कुछ दूसरे आँकड़ा-संग्रहों में यही संख्याएँ अलग हैं। किसी में अटापट्टू 114 पर हैं, किसी में बिमेनयिमाना 101 पर।

इसकी वजह ऊबाऊ है, पर असली है। हर संग्रह की कटऑफ़ तारीख़ अलग होती है, कुछ मैच बाद में दर्ज होते हैं, और सहयोगी देशों के टूर्नामेंट के नतीजे कभी-कभी देर से चढ़ते हैं।

इसलिए इस लेख में हरमनप्रीत के अपने आँकड़े दिए गए हैं, जो हर जगह एक जैसे हैं, और बाक़ी नामों के बारे में सिर्फ़ यह कि वे किस समूह में हैं।

जो पाठक कोई एक संख्या ढूँढ़ रहे हैं, उनके लिए ईमानदार जवाब यह है कि नीचे के पायदान अभी हिल रहे हैं।

अलग-अलग आँकड़ा संग्रहों की कटऑफ़ तारीख़ें अलग होती हैं, इसलिए एक ही सूची कई जगह अलग दिखती है
तस्वीर: Acabashi, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

डेढ़ सौ मैच इतनी जल्दी कैसे हो गए

एक सवाल बचता है। अगर हरमनप्रीत को नियमित कप्तानी अक्तूबर 2018 में मिली, तो आठ साल में 150 मैच कैसे हुए।

जवाब उस बदलाव में है जो इसी दौर में महिला क्रिकेट के कैलेंडर में आया।

2018 से पहले भारतीय महिला टीम को साल में गिने-चुने द्विपक्षीय दौरे मिलते थे। बड़े टूर्नामेंट के बीच लंबे ख़ाली अंतराल रहते थे, कभी-कभी महीनों के।

इसके बाद तीन चीज़ें एक साथ हुईं।

पहली, टी20 प्रारूप में द्विपक्षीय शृंखलाएँ बढ़ीं, क्योंकि उन्हें आयोजित करना सस्ता और छोटा पड़ता है। एक दौरे में तीन या पाँच टी20 मैच सामान्य हो गए।

दूसरी, महिला प्रीमियर लीग मार्च 2023 में शुरू हुई। लीग ख़ुद अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं देती, पर उसने खिलाड़ियों का पूल गहरा किया और बोर्ड के लिए महिला क्रिकेट में पैसा लगाने का कारण बनाया। उसका असर अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम पर पड़ा।

तीसरी, आईसीसी और क्षेत्रीय संस्थाओं ने प्रतियोगिताओं की संख्या बढ़ाई। एशिया कप अब ज़्यादा नियमित है, और टी20 विश्व कप हर दो साल में आता है।

इन तीनों का जोड़ यह है कि 2018 के बाद की कप्तान को उसके पहले की कप्तान के मुक़ाबले दोगुने से ज़्यादा मैच मिले।

मिताली राज ने भारत की कप्तानी बीस साल से ज़्यादा की, पर टी20 अंतरराष्ट्रीय में उनकी कप्तानी के मैच बत्तीस हैं। यह उनकी कमी नहीं, उनके दौर का हिसाब है।

इसलिए 150 का आँकड़ा दो चीज़ों का जोड़ है: एक खिलाड़ी का आठ साल तक टिकना, और एक खेल का इन्हीं आठ सालों में फैलना।

दोनों में से किसी एक को हटा दीजिए, तो यह रिकॉर्ड नहीं बनता।

तो रिकॉर्ड की क़ीमत क्या है

इस सबका मतलब यह नहीं है कि हरमनप्रीत का रिकॉर्ड कमज़ोर है।

इसका मतलब यह है कि यह सूची दो चीज़ें एक साथ नाप रही है, और उन्हें अलग करके देखना चाहिए।

पहली चीज़ यह कि कोई कप्तान कितने साल तक अपनी जगह पर टिकी। यह असली उपलब्धि है, और महिला क्रिकेट में यह और मुश्किल है, जहाँ करियर छोटे रहे हैं और कप्तान जल्दी बदले हैं।

दूसरी चीज़ यह कि उस कप्तान के देश को कितने मैच मिले। यह उपलब्धि नहीं, परिस्थिति है।

हरमनप्रीत के मामले में दोनों साथ चलती हैं। भारत ज़्यादा मैच खेलता है, यह सच है। पर आठ साल तक एक ही खिलाड़ी का कप्तान बने रहना, और उस दौरान विश्व कप जीतना, परिस्थिति से नहीं आता।

बिमेनयिमाना के मामले में भी दोनों साथ चलती हैं, बस अलग अनुपात में। रवांडा को मैच ज़्यादा मिले, यह सच है। पर एक ऐसे देश की कप्तानी करते हुए सौ मैच पूरे करना जहाँ क्रिकेट का ढाँचा अभी बन रहा है, अपनी तरह की उपलब्धि है।

सूची दोनों को एक ही कॉलम में डाल देती है। पढ़ने वाले को दोनों अलग-अलग देखने होंगे।

यह मुक़ाबला कभी बराबरी का नहीं रहा

शुक्रवार का नतीजा अपवाद नहीं था।

महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय में इस मैच से पहले भारत और पाकिस्तान 17 बार भिड़े थे। भारत 14 जीता, पाकिस्तान 3।

एशिया कप के टी20 मुक़ाबलों में यह अंतर और बड़ा है। सात मैचों में भारत छह जीता।

एकदिवसीय में तस्वीर और एकतरफ़ा है। पाकिस्तान भारत से एक भी एकदिवसीय मैच नहीं जीता है। रिकॉर्ड 0-12 का है।

इसलिए 55 रन का स्कोर चौंकाने वाला था, पर नतीजा नहीं।

यह असंतुलन अपने आप में एक ख़बर है, और उसे खेल की भाषा में ही समझना चाहिए। भारत में महिला क्रिकेट के पीछे अब एक घरेलू लीग है, केंद्रीय अनुबंध हैं, और आयु-वर्ग का ढाँचा है। पाकिस्तान में यह ढाँचा अभी उस स्तर का नहीं है।

एशिया कप का हिसाब

यह टूर्नामेंट 2004 में शुरू हुआ और 2024 तक इसके नौ संस्करण हो चुके हैं।

इनमें से सात भारत ने जीते हैं। चार उस दौर के जब यह एकदिवसीय प्रारूप में होता था, और तीन टी20 प्रारूप में।

बाक़ी दो में से एक 2018 में बांग्लादेश ने जीता, और एक 2024 में श्रीलंका ने।

2024 का फ़ाइनल 28 जुलाई को दंबुला में हुआ था, और श्रीलंका ने भारत को आठ विकेट से हराकर अपना पहला एशिया कप जीता।

यानी भारत मौजूदा चैंपियन नहीं है, और इस बार का अभियान उसी हार के बाद का है।

इस मैच से पहले ही भारत नॉकआउट में जगह पक्की कर चुका था, क्योंकि उसने अपने पहले दोनों ग्रुप मैच जीते थे। यह उसका ग्रुप में तीसरा मैच था।

आगे क्या

हरमनप्रीत के लिए अगला आँकड़ा अब दूर का है, क्योंकि उनके और दूसरे नंबर के बीच का फ़ासला तीस मैच से ऊपर है।

पर देखने की चीज़ यह नहीं होगी। देखने की चीज़ यह होगी कि जिस सूची में आज एक सहयोगी देश की कप्तान चौथे नंबर पर है, वह सूची पाँच साल बाद कैसी दिखती है।

अगर 2018 का नियम अपना काम कर रहा है, तो उसमें और नाम जुड़ने चाहिए।

और एक बात इस रिकॉर्ड की उम्र के बारे में। जो कप्तान आज दूसरे नंबर पर हैं, यानी श्रीलंका की चमारी अटापट्टू, वे भी अपने करियर के आख़िरी हिस्से में हैं। जो नई कप्तान आएँगी, उन्हें 150 तक पहुँचने में आठ से दस साल लगेंगे, बशर्ते वे उतने साल कप्तान बनी रहें।

महिला क्रिकेट में यह आसान नहीं रहा है। इसीलिए यह आँकड़ा जितना मैचों का है, उतना ही उस भरोसे का भी है जो एक बोर्ड ने आठ साल तक एक ही खिलाड़ी पर रखा।

स्रोतईएसपीएनक्रिकइन्फ़ो, मैच रिपोर्ट, 5 सितंबर 2026, आईसीसी, सभी सदस्यों के टी20 मैचों को अंतरराष्ट्रीय दर्जा, 26 अप्रैल 2018, हरमनप्रीत कौर का करियर विवरण, मारी डायने बिमेनयिमाना का प्रोफ़ाइल, 2025 महिला विश्व कप फ़ाइनल का विवरण, महिला एशिया कप के सभी संस्करण और विजेता, ईएसपीएनक्रिकइन्फ़ो, भारत-पाकिस्तान महिला टी20 आमने-सामने रिकॉर्ड

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