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भारत के सबसे कामयाब खेल एथलेटिक्स में भी एक पदक को सोलह बरस लगे

गुरुवार, 24 सितंबर को जापान के आइची प्रान्त में भारत को एक ही दिन पाँच पदक मिले, इनमें दो एथलेटिक्स के हैं और यह इन खेलों में भारत के पहले हैं। सीमा कुमारी ने महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य जीता, सोलह बरस में इस स्पर्धा का पहला भारतीय पदक। मिश्रित 4x400 मीटर रिले में भारत को चांदी मिली, पर नतीजा कुछ देर यूएई के विरोध के चलते अनौपचारिक रहा। बैडमिंटन, निशानेबाज़ी और वुशु में तीन और पदक आए, और रोइंग में सतनाम सिंह तथा सलमान ख़ान ने भारत को पुरुष युगल स्कल का पहला पदक दिलाया।

कार्डिफ़ इंटरनेशनल एथलेटिक्स स्टेडियम का ट्रैक, फ़रवरी 2014 की तस्वीर; यह आइची का मैदान नहीं, उसी अनुशासन की एक झलक है जिसमें गुरुवार को भारत के दो पदक आए।
तस्वीर: Neil Theasby, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 2.0

क्या ट्रैक ऐंड फ़ील्ड भारत के एशियाई खेलों के रिकॉर्ड की सबसे कमज़ोर कड़ी है? आम धारणा यही कहती है। आँकड़े उलटा कहते हैं। खेल पत्रिका द ब्रिज के मुताबिक़, एशियाई खेलों के पूरे इतिहास में भारत को किसी और खेल ने इतने पदक नहीं दिए जितने एथलेटिक्स ने दिए हैं: 85 सोना, 102 चांदी, 96 कांस्य। 2018 के जकार्ता खेलों में यही भारत का सबसे कामयाब खेल रहा, 20 पदकों के साथ। 2023 के हांगझोऊ खेलों में यह दूसरे नंबर पर आया, 29 पदक और छह सोना, निशानेबाज़ी के 22 पदकों से ज़्यादा, भले निशानेबाज़ी का एक सोना अधिक था।

फिर भी गुरुवार, 24 सितंबर तक महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में भारत का पिछला पदक सोलह बरस पुराना था। उस दिन जापान के आइची प्रान्त में सीमा कुमारी ने कांस्य जीतकर यह इंतज़ार ख़त्म किया। उसी दिन मिश्रित 4x400 मीटर रिले में भारत को चांदी मिली। यह स्पर्धा ख़ुद सिर्फ़ आठ बरस पुरानी है। तीनों बार जब यह खेली गई, भारत पोडियम पर रहा। गुरुवार को बैडमिंटन, निशानेबाज़ी और वुशु में भी एक-एक पदक आया। कुल पाँच पदक, एक दिन में। इनमें से दो एथलेटिक्स के अपने हैं, और वे इन खेलों में भारत के लिए पहले हैं।

सीमा का कांस्य, और सोलह बरस का हिसाब

सीमा कुमारी की दौड़ 32 मिनट 50.05 सेकंड में ख़त्म हुई। यह उन्हें कांस्य तक ले गया। बहरीन की विनफ़्रेड याविए ने 32:39.18 के साथ सोना जीता। जापान की नोज़ोमी तानाका को 32:41.54 पर चांदी मिली। सीमा सोने से 10.87 सेकंड पीछे रहीं। यह आँकड़ा विकिपीडिया के इस स्पर्धा के नतीजा-पन्ने से है, जो तेरह धाविकाओं की पूरी सूची और हर एक का समय दर्ज करता है। उस मैदान में भारत की अकेली धाविका सीमा ही थीं। ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक़ याविए और तानाका आख़िर तक सोने-चांदी के लिए आपस में भिड़ी रहीं, और सीमा पीछा कर रहे बाक़ी खिलाड़ियों से आख़िरी चरण में अलग होकर तीसरे नंबर पर पक्की हुईं।

बारहवें दक्षिण एशियाई खेल, गुवाहाटी 2016: महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ के बाद भारत की जौना मुर्मू; यह सीमा कुमारी की दौड़ नहीं, भारतीय एथलेटिक्स की एक पुरानी तस्वीर है।
तस्वीर: Ministry of Youth Affairs and Sports, विकिमीडिया कॉमन्स GODL-India

पत्र सूचना कार्यालय ने गुरुवार शाम 7:43 बजे बधाई जारी की। विज्ञप्ति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान दर्ज है: "उनके दृढ़ प्रदर्शन से कई वर्षों बाद इस स्पर्धा में भारत को पदक मिला है। यह धैर्य, अनुशासन और वर्षों की कड़ी मेहनत को दर्शाने वाली शानदार उपलब्धि है।" विज्ञप्ति संख्या 2314599 सिर्फ़ पदक की पुष्टि करती है। नतीजा उसमें नहीं है, न ही समय।

"कई वर्षों" का हिसाब सीधे राष्ट्रीय रिकॉर्ड से निकलता है। प्रीजा श्रीधरन ने 21 नवंबर 2010 को गुआंगज़ो एशियाई खेलों में सोना जीतते हुए 31:50.47 का समय बनाया था। यह आज भी भारत का राष्ट्रीय रिकॉर्ड है। तब से 2026 तक, ठीक सोलह बरस। सीमा का अपना निजी सर्वश्रेष्ठ इस राष्ट्रीय रिकॉर्ड से भी क़रीब बारह सेकंड धीमा है: 32:02.43, जो उन्होंने इसी बरस अमेरिका में एक दौड़ में बनाया। गुरुवार का कांस्य उनके निजी सर्वश्रेष्ठ से भी लगभग अड़तालीस सेकंड धीमा था।

पदक फिर भी पदक है।

सीमा कुमारी 25 बरस की हैं, हिमाचल प्रदेश के रेता गाँव से। एशियाई खेलों की महिलाओं की 10,000 मीटर में यह भारत का सिर्फ़ दूसरा पदक है, पहला प्रीजा श्रीधरन का सोना, 2010 में। दो पदक, सोलह बरस के फ़ासले पर।

बहरीन की ही रूथ जेबेट पाँचवें नंबर पर रहीं, विकिपीडिया के नतीजा-पन्ने के मुताबिक़, यानी शीर्ष पाँच में बहरीन के दो नाम थे। कांस्य और चौथे स्थान के बीच का फ़ासला आराम का था। कज़ाख़स्तान की डेज़ी जेपकेमेई चौथे नंबर पर रहीं, 33:03.21 के समय से, सीमा से 13.16 सेकंड पीछे। यानी गुरुवार का कांस्य आख़िरी लम्हे की टक्कर नहीं था। सोने-चांदी की लड़ाई आख़िर तक चली, सीमा का तीसरा स्थान उससे पहले ही तय हो चुका था।

यह एक पदक किसी बड़े रुझान को नहीं बदलता। एथलेटिक्स पहले से भारत का सबसे कामयाब खेल था, गुरुवार से पहले भी। बदला सिर्फ़ इतना कि 10,000 मीटर की जिस पंक्ति में सोलह बरस से भारत का नाम नहीं था, अब वहाँ फिर दर्ज है।

यह "पहला" पदक भारत का है, खेलों का नहीं

गुरुवार का कांस्य और चांदी भारत के लिए इन खेलों के पहले एथलेटिक्स पदक हैं। खेलों के नहीं। आइची-नागोया में एथलेटिक्स 23 सितंबर को ही शुरू हो चुकी थी, और उस पहले दिन पुरुषों-महिलाओं की हाफ़ मैराथन वॉक और पुरुषों की डिस्कस थ्रो के पदक बँट चुके थे। विकिपीडिया के "एथलेटिक्स ऐट द 2026 एशियन गेम्स" पन्ने के मुताबिक़ चीन के शी शेंगजी ने पुरुषों की वॉक में 1:23:32 से सोना जीता; चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, कज़ाख़स्तान और ईरान के खिलाड़ी उस दिन की बाक़ी पदक सूचियों में थे। भारत का नाम उस दिन कहीं नहीं था।

75 सदस्यों का भारतीय एथलेटिक्स दल इन खेलों का सबसे बड़ा एकल-खेल दल है, बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक़, और 23 से 29 सितंबर तक मैदान में है। गुरुवार तक यह प्रतियोगिता का सिर्फ़ दूसरा दिन था। दो दिन, दो पदक, दोनों गुरुवार को, दोनों भारत के अपने खाते में पहले।

इससे यह मान लेना ग़लत होगा कि ट्रैक ऐंड फ़ील्ड भारत के लिए कमज़ोर ज़मीन है। ठीक उलटा सच है, जैसा इस लेख की शुरुआत में द ब्रिज के आँकड़े दिखाते हैं। असली कहानी बड़ी नहीं, संकरी है। कुछ तय स्पर्धाओं में दशकों का सूखा चलता रहा, जबकि बाक़ी एथलेटिक्स भारत का सबसे भरोसेमंद खेल बना रहा।

धारणा शायद सोने की गिनती से बनती है। 2023 के हांगझोऊ खेलों में एथलेटिक्स ने 29 पदक दिए, निशानेबाज़ी ने 22। लेकिन सोना निशानेबाज़ी के सात, एथलेटिक्स के छह। पदक तालिका सोने को पहले गिनती है, कुल संख्या को बाद में। इसी हिसाब से एक खेल याद में "सुनहरा" रहता है, भले दूसरा खेल कुल पदकों में उससे आगे हो।

रिले की चार कड़ियाँ, तीसरा लगातार पदक

गुरुवार शाम मिश्रित 4x400 मीटर रिले का फ़ैसला हुआ। भारतीय चौकड़ी ने 3:14.46 का समय लिया: मनु टीएस ने पहला चरण दौड़ा, एम आर पूवम्मा ने दूसरा, विशाल टीके ने तीसरा, और आख़िरी बैटन विथ्या रामराज ने थामा। फ़्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट और भारत के खिलाड़ियों की विकिपीडिया सूची इसी क्रम की पुष्टि करती हैं; ट्रिब्यून की एक ही रिपोर्ट में पहला और तीसरा चरण उलटे दर्ज हैं, जो बाक़ी स्रोतों से मेल नहीं खाता। हीट में भारत दूसरे नंबर पर रहकर फ़ाइनल में पहुँचा था, 3:16.23 के समय से। बहरीन ने फ़ाइनल में 3:12.87 के खेलों के रिकॉर्ड के साथ सोना जीता। कांस्य वियतनाम को मिला, 3:14.54 पर।

रिले दौड़ में बैटन एक हाथ से दूसरे हाथ जाता हुआ; मिश्रित 4x400 में यही चार बार होता है, और आख़िरी बार विथ्या रामराज के हाथ में आया।
तस्वीर: ms4denmark, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 2.0

यह स्पर्धा ख़ुद पुरानी नहीं है। 2018 के जकार्ता खेलों में पहली बार खेली गई, जहाँ भारत की चौकड़ी, मोहम्मद अनस, एम आर पूवम्मा, हिमा दास और अरोकिया राजीव, शुरू में चांदी पर रही। बाद में बहरीन की केमी अडेकोया 400 मीटर बाधा दौड़ और इसी रिले, दोनों में डोपिंग की दोषी पाई गईं। एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट ने 24 अगस्त 2018 के बाद के उनके सारे नतीजे रद्द किए, और भारत की चांदी सोने में बदल गई, स्क्रॉल की रिपोर्ट के मुताबिक़। पूवम्मा उस टीम में भी थीं। आठ बरस बाद, गुरुवार को, वे फिर मैदान में थीं।

2023 के हांगझोऊ खेलों में भारत को इसी स्पर्धा में चांदी मिली थी, द फ़ेडरल की रिपोर्ट के मुताबिक़। अब 2026 में फिर चांदी। यह स्पर्धा जितनी बार खेली गई, भारत हर बार पोडियम पर रहा: एक सोना जो बाद में मिला, और दो चांदी।

यूएई की अपील से चांदी नहीं बदली

गुरुवार की रिले का नतीजा कुछ देर के लिए अटका रहा। द ब्रिज, द फ़ेडरल और ऑनमनोरमा की उसी शाम की रिपोर्टों के मुताबिक़, यूएई की टीम ने दौड़ के बाद विरोध दर्ज कराया, जिससे नतीजा कुछ समय अनौपचारिक रहा। बाद में यूएई की अयोग्यता की पुष्टि हुई और नतीजा आधिकारिक हो गया। विकिपीडिया के नतीजा-पन्ने पर यूएई की टीम के आगे सिर्फ़ "डीक्यू" दर्ज है, कोई समय नहीं। पदक क्रम नहीं बदला: बहरीन सोना, भारत चांदी, वियतनाम कांस्य।

यूएई का विरोध किस बात पर था, और अयोग्यता किस आधार पर मिली, इसका जवाब पढ़ी गई किसी रिपोर्ट में नहीं है। यह लेख वह जवाब गढ़ेगा नहीं। जो साफ़ है, बस इतना: नतीजे में कोई बदलाव नहीं हुआ।

मिश्रित रिले में ऐसी उठा-पटक कोई नई बात नहीं है। इसी स्पर्धा में 2018 का उदाहरण ऊपर है, जहाँ चांदी महीनों बाद सोना बनी, एक डोप टेस्ट की वजह से पदक तालिका ख़ुद बदल गई। रात नौ बजे जो नतीजा दिखता है, आधी रात को वही रहे, ज़रूरी नहीं। इस बार फ़र्क़ बस इतना रहा कि बदलाव हुआ भी तो दौड़ ख़त्म होने के घंटों भीतर, आधिकारिक पदक तालिका बनने से पहले ही। तीन बार खेली गई एक स्पर्धा, और दो बार पोडियम पर विवाद। यह अकेला संयोग नहीं लगता।

बैडमिंटन में चैंपियन जोड़ी जीती, टीम हार गई

बैडमिंटन में भारत का कांस्य एक दिन पहले, बुधवार 23 सितंबर को तय हुआ था। पत्र सूचना कार्यालय ने बधाई गुरुवार शाम 7:13 बजे भेजी, नतीजे के एक दिन बाद। इचिनोमिया शहर के नगरपालिका जिम्नेज़ियम में भारतीय पुरुष टीम चीन से सेमीफ़ाइनल में 1-3 से हारी।

हार के भीतर एक जीत थी। सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने विश्व चैंपियन जोड़ी लियांग वाइकेंग और वांग चांग को 21-11, 22-20 से हराया, भारत की इकलौती जीत उस मुक़ाबले में। बाक़ी तीनों मुक़ाबले भारत हारा। लक्ष्य सेन विश्व चैंपियन शी युकी से 21-16, 21-18 से हारे। आयुष शेट्टी ली शी फ़ेंग से 21-19, 21-13 से हारे। हरिहरन अमसाकरुणन-एम आर अर्जुन की जोड़ी 21-16, 17-21, 21-9 से हारी।

टीम स्पर्धा में सेमीफ़ाइनल हारने वाली दोनों टीमों को कांस्य मिलता है, फ़ाइनल में जगह के बिना। भारत 2023 के हांगझोऊ खेलों में इसी स्पर्धा में चांदी जीत चुका था। लगातार दूसरी बार टीम पोडियम पर पहुँची, भले इस बार धातु हल्की रही।

एक ही दिन में स्कीट और वुशु के दो पदक

स्कीट की मिश्रित टीम स्पर्धा गुरुवार को ही निपटी। अनंतजीत सिंह नरूका और परीनाज़ धालीवाल ने फ़ाइनल में 44 का स्कोर बनाकर कांस्य जीता। एशियन शूटिंग कॉन्फ़ेडरेशन के आधिकारिक नतीजों के मुताबिक़ चीन के ल्यू च्येनलिन और च्यांग यीथिंग ने सोना जीता, 52 के विश्व रिकॉर्ड के साथ। यह रिकॉर्ड जनवरी 2026 से क़तर के नाम 47 पर था; क़तर ख़ुद फ़ाइनल में सिर्फ़ 18 पर चौथे नंबर पर रहा। दक्षिण कोरिया के ली जोंगजुन और जांग कूकही को 51 पर चांदी मिली। क्वालिफ़िकेशन राउंड में भारत चौथे नंबर पर था, 138 अंकों के साथ, क़तर के 145, कोरिया के 143 और चीन के 140 से पीछे।

यह अनंतजीत और परीनाज़ दोनों के लिए हफ़्ते का दूसरा पदक था। बुधवार, 23 सितंबर को अनंतजीत पुरुषों की टीम स्पर्धा के कांस्य में थे, और परीनाज़ महिलाओं की टीम के कांस्य में। दो दिन में भारत के शूटरों को स्कीट के तीन कांस्य मिले, दो अलग टीमों से, और तीसरा इन्हीं दोनों के साथ से।

वुशु में नाओरेम रोशिबिना देवी महिलाओं के 60 किलोग्राम सांडा के फ़ाइनल में उतरीं और चीन की झांग शियाओयू से 0-2 से हार गईं, दोनों राउंड 5-0 के एकतरफ़ा स्कोर से। यह रोशिबिना का लगातार तीसरा एशियाई खेलों का पदक इसी भार वर्ग में है: 2018 में जकार्ता का कांस्य, 2022 में हांगझोऊ का रजत, और अब आइची-नागोया का रजत। मणिपुर की रोशिबिना 25 बरस की हैं। तीन खेल, तीन पदक, एक भी सोना नहीं।

रोशिबिना का नाम वुशु में नया नहीं है। 2016 में बुल्गारिया के बुर्गास शहर में विश्व जूनियर चैंपियनशिप का रजत उनके नाम है, 48 किलोग्राम भार वर्ग में। 2017 में दक्षिण कोरिया के गुमी शहर में एशियाई जूनियर चैंपियनशिप का सोना भी, उसी भार वर्ग में। सीनियर स्तर पर आकर भार वर्ग बदला, पदक का रंग सोने से रजत और कांस्य के बीच घूमता रहा। जीत अब तक नहीं आई।

डबल स्कल्स में भारत का पहला पदक

रोइंग में सतनाम सिंह और सलमान ख़ान ने पुरुषों की डबल स्कल्स में कांस्य जीता, नागरागावा इंटरनेशनल रेगाटा कोर्स पर 6:13.25 के समय से। चीन के यी शूदी और नी यीदे ने 6:09.77 से सोना लिया। उज़्बेकिस्तान के पावेल सोरिन और मेख़रोजबेक ममतकुलोव को 6:10.49 पर चांदी मिली। भारतीय जोड़ी 1,500 मीटर तक दूसरे नंबर पर रही, आख़िरी 500 मीटर में तीसरे पर खिसक गई। यह पुरुषों की डबल स्कल्स में भारत का पहला एशियाई खेलों का पदक है।

एग्बलेत झील पर 2015 की विश्व रोइंग चैंपियनशिप में डबल स्कल्स की एक हीट; डबल स्कल्स यानी दो नाविक, हर एक के हाथ में दो चप्पू। यह आइची की दौड़ नहीं है।
तस्वीर: Florian Pépellin, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

डबल स्कल्स नाम ही समझाने लायक़ है। इसमें दो खिलाड़ी एक नाव में बैठते हैं, और हर एक अपने दोनों हाथों में एक-एक चप्पू थामे रहता है। यानी हर खिलाड़ी के पास कुल दो चप्पू। यह "स्वीप" रोइंग से अलग है, जिसमें हर खिलाड़ी सिर्फ़ एक चप्पू पकड़ता है, दोनों हाथों से। दौड़ हमेशा 2,000 मीटर की तय दूरी पर होती है, चाहे ओलंपिक हो या एशियाई खेल। दूरी वही रहती है, बस नाव और चप्पू बदल जाते हैं।

सतनाम पंजाब के मानसा ज़िले के फ़त्ता मलोका गाँव से हैं, उम्र 26 बरस। पहले वे राष्ट्रीय स्तर पर हैंडबॉल खेलते थे। क़रीब आठ बरस पहले ओलंपियन स्वर्ण सिंह विर्क से प्रेरित होकर रोइंग में आए। यह उनका दूसरा एशियाई खेलों का पदक है। 2023 के हांगझोऊ खेलों में क्वाड्रपल स्कल्स का कांस्य भी उनके नाम है। सलमान 28 बरस के हैं। वे भारतीय सेना की बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप में 2018 से हैं। इससे पहले वे उबर टैक्सी चलाते थे, पिता की मौत के बाद घर चलाने के लिए। दोनों गुरुवार से पहले क्वाड्रपल स्कल्स दल का हिस्सा थे। खेलों से पहले उन्हें डबल में बदला गया।

गुरुवार रात का पूरा हिसाब

गुरुवार रात 8:14 बजे तक भारत के खाते में 1 सोना, 7 चांदी और 9 कांस्य थे। कुल 17 पदक। यह विकिपीडिया की पदक तालिका पर उस समय तक दर्ज आख़िरी अपडेट है। भारत उसमें पंद्रहवें नंबर पर था।

शीर्ष पर चीन, 80 सोना, 30 चांदी, 20 कांस्य, कुल 130। मेज़बान जापान तीसरे नंबर पर, 20-34-37 के साथ। दक्षिण कोरिया दूसरे पर, सिर्फ़ 10 सोने के बावजूद, 12 चांदी और 28 कांस्य जोड़कर कुल 50 तक पहुँचा। कज़ाख़स्तान चौथे पर, 8-8-9, कुल 25। उज़्बेकिस्तान पाँचवें पर, 6-12-8, कुल 26, सोना कज़ाख़स्तान से कम होने पर भी कुल पदकों में आगे। तालिका इसी तरह गिनी जाती है: सोना पहले, बाक़ी बाद में।

यह तालिका आगे बदलेगी। एथलेटिक्स का कार्यक्रम अभी पाँच दिन और चलना है, 29 सितंबर तक। स्कीट, बैडमिंटन और वुशु की बाक़ी स्पर्धाएँ भी बाक़ी हैं, और रोइंग के कुछ फ़ाइनल भी। जो पाँच पदक गुरुवार को मिले, उनमें से दो ने सोलह और आठ बरस के दो अलग हिसाब पूरे किए। बाक़ी तीन ने अपने-अपने खेल में भारत की मौजूदगी भर दर्ज कराई। गुरुवार का हिसाब बस यहीं तक है।

स्रोतपत्र सूचना कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, 24 सितंबर 2026, शाम 7:43 बजे: सीमा को महिलाओं की 10,000 मीटर में कांस्य पर बधाई, पत्र सूचना कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, 24 सितंबर 2026, शाम 7:13 बजे: पुरुष बैडमिंटन टीम को कांस्य पर बधाई, पत्र सूचना कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, 24 सितंबर 2026, शाम 7:11 बजे: परीनाज़ धालीवाल और अनंतजीत सिंह नरूका को स्कीट मिश्रित टीम कांस्य पर बधाई, पत्र सूचना कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, 24 सितंबर 2026, सुबह 11:19 बजे: नाओरेम रोशिबिना देवी को वुशु सांडा रजत पर बधाई, पत्र सूचना कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, 24 सितंबर 2026, सुबह 9:50 बजे: सतनाम सिंह और सलमान ख़ान को पुरुष युगल स्कल कांस्य पर बधाई, द ट्रिब्यून, 24 सितंबर 2026, शाम 6:47 बजे: सीमा कुमारी का 10,000 मीटर कांस्य, याविए और तानाका की फ़िनिश, विकिपीडिया, महिलाओं की 10,000 मीटर का पूरा नतीजा-पन्ना, तेरह धाविकाओं का समय, विकिपीडिया, भारत के एथलेटिक्स रिकॉर्ड की सूची: 10,000 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड, प्रीजा श्रीधरन, 31:50.47, फ़्री प्रेस जर्नल, 24 सितंबर 2026, शाम 7:01 बजे: मिश्रित रिले की चौकड़ी और चरण-क्रम, द ट्रिब्यून, 24 सितंबर 2026, शाम 7:12 बजे: मिश्रित रिले का समय और बहरीन की जीत, विकिपीडिया, मिश्रित 4x400 मीटर रिले का नतीजा-पन्ना: वियतनाम का कांस्य, यूएई का डीक्यू, द ब्रिज, 24 सितंबर 2026, रात 9:18 बजे: यूएई के विरोध और अयोग्यता की पुष्टि, द फ़ेडरल, 24 सितंबर 2026, रात 8:05 बजे: रिले में भारत की तीसरी लगातार पदक-दर वाली उपस्थिति, ऑनमनोरमा, 24 सितंबर 2026, रात 9:53 बजे: यूएई की अयोग्यता की दोबारा पुष्टि, स्क्रॉल.इन: 2018 जकार्ता खेलों की मिश्रित रिले चांदी, केमी अडेकोया की डोपिंग के बाद सोने में बदली, द ब्रिज: भारत के एशियाई खेलों के इतिहास में खेल-वार पदक, एथलेटिक्स सबसे आगे, विकिपीडिया, भारत का 2026 एशियाई खेलों का पूरा पदक विवरण, तारीख़ों सहित, विकिपीडिया, 2026 एशियाई खेलों की पदक तालिका, अंतिम संपादन 24 सितंबर, 14:44 यूटीसी, एशियन शूटिंग कॉन्फ़ेडरेशन: स्कीट मिश्रित टीम फ़ाइनल के आधिकारिक नतीजे, द ट्रिब्यून, 24 सितंबर 2026, दोपहर 12:32 बजे: स्कीट मिश्रित टीम के अंक और विश्व रिकॉर्ड, द ट्रिब्यून, 24 सितंबर 2026, सुबह 6:37 बजे: रोशिबिना देवी की वुशु फ़ाइनल हार, विकिपीडिया: रोशिबिना देवी का एशियाई खेलों का पदक इतिहास, 2018-2022-2026, द ट्रिब्यून (पंजाब संस्करण), 24 सितंबर 2026, रात 9:53 बजे: डबल स्कल्स का समय और सतनाम का परिचय, द ब्रिज, 24 सितंबर 2026, सुबह 9:59 बजे: सलमान ख़ान और सतनाम सिंह का परिचय, ओलंपिक्स.कॉम: बैडमिंटन सेमीफ़ाइनल के स्कोर, चीन से 1-3 हार

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