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एशियाई खेलों के दल में 503 खिलाड़ी और 150 कोच हैं, खेल मनोवैज्ञानिक तीन

दो सितंबर को खेल मंत्रालय ने आइची-नागोया के लिए 768 लोगों को मंज़ूरी दी। आठ दिन बाद दिल्ली में इक्कीस साल के एक खिलाड़ी ने दस साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। वह यूट्यूब देखकर अकेले अभ्यास करता है, और उस सूची में नहीं है।

जाल से घिरे घेरे के भीतर घूमकर हथौड़ा छोड़ता एक खिलाड़ी, जिसका गोला तार के सिरे पर ऊपर दाहिनी तरफ़ दिख रहा है, जुलाई 2021 की यह तस्वीर चेक गणराज्य की है; भारत का राष्ट्रीय रिकॉर्ड 10 सितंबर की शाम दिल्ली में 71.02 मीटर पर पहुँचा
तस्वीर: Misadolezalkova, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के मुख्य ट्रैक पर गुरुवार, 10 सितंबर की शाम तालियाँ कहीं और बज रही थीं। किनारे के घेरे में इक्कीस साल के निर्भय चौधरी ने हथौड़ा 71.02 मीटर फेंका।

यह पुरुषों के हथौड़ा फेंक का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड था। जो रिकॉर्ड टूटा वह 70.73 मीटर का था, नीरज कुमार ने 29 जून 2016 को हैदराबाद में बनाया था, और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ की अपनी सूची में दस साल से वही दर्ज था।

निर्भय का कोई कोच नहीं है। वे यूट्यूब पर वीडियो देखकर अपना अभ्यास कार्यक्रम ख़ुद बनाते हैं।

उसी शाम उसी घेरे में एशियाई खेलों के लिए चुने गए दोनों थ्रोअर भी फेंक रहे थे। दमनीत सिंह 68.12 मीटर तक गए, प्रवीण कुमार उनसे पीछे रहे। निर्भय आइची-नागोया नहीं जा रहे। भारतीय दल की सूची आठ दिन पहले बंद हो चुकी थी।

दो सितंबर का मंज़ूरी-पत्र

आइची-नागोया जाने वाला भारतीय दल एक चिट्ठी है। युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के खेल विभाग का पत्र संख्या 70-15/2026-गवर्नेंस-1, दिनांक 2 सितंबर 2026, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष के नाम। उस पर निदेशक हरिकुमार एम के दस्तख़त हैं, और उसी के साथ नत्थी तालिकाओं में वह सब है जो दल के बारे में जानने लायक़ है।

पत्र कहता है कि सक्षम प्राधिकारी ने 768 सदस्यों के दल को मंज़ूरी दी है: 503 खिलाड़ी, जिनमें 269 पुरुष और 234 महिलाएँ हैं, 246 टीम अधिकारी और सहयोगी स्टाफ़, और 19 दल-कर्मी। खेलों की संख्या 36 है। खेल 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चलेंगे।

यह दूसरी मंज़ूरी है। पहली 22 अगस्त को निकली थी और उसमें 492 खिलाड़ी थे, 265 पुरुष और 227 महिलाएँ, 35 खेलों में। बीच के ग्यारह दिन में ग्यारह नाम जुड़े और एक खेल जुड़ा। दूसरे पत्र का अनुलग्नक-1 उन ग्यारह को गिनाता है: एथलेटिक्स में छह, जिनमें हथौड़ा फेंक के प्रवीण कुमार, 400 मीटर की किरण पहल और त्रिकूद की आशा इलांगो हैं; मिश्रित मार्शल आर्ट्स में एक; और सर्फ़िंग में चार, जो छत्तीसवाँ खेल है।

पैसा कहाँ से आएगा, यह भी उसी पत्र के पैरा 3 में लिखा है। सरकार पर पड़ने वाला पूरा ख़र्च भारतीय खेल प्राधिकरण उठाएगा, और वह भी राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता की योजना के पैसे से। दरें अनुलग्नक-3 में हैं: खिलाड़ी और टीम अधिकारी के लिए रहने-खाने का 50 डॉलर प्रतिदिन, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू हवाई किराया प्रति व्यक्ति 2 लाख रुपये तक, जेब ख़र्च 50 डॉलर प्रतिदिन, समारोह की पोशाक 20,000 रुपये प्रति व्यक्ति, और बीस दिन का विदेशी बीमा 75,000 रुपये तक।

एक जगह दो सरकारी काग़ज़ आपस में नहीं मिलते। भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने 3 सितंबर को 77 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम की पूरी नाम-वार सूची छापी, 34 पुरुष और 43 महिलाएँ। मंत्रालय का 2 सितंबर का पत्र एथलेटिक्स में 79 खिलाड़ी मंज़ूर करता है, 36 पुरुष और 43 महिलाएँ। महिलाओं की संख्या दोनों जगह एक है, पुरुषों में दो का फ़र्क़ है। दोनों काग़ज़ सार्वजनिक हैं और यह फ़र्क़ किसी तीसरे दस्तावेज़ से मिलता नहीं।

तालिका के बाक़ी ख़ाने: डॉक्टर, फ़िज़ियो, मनोवैज्ञानिक

मंज़ूरी-पत्र की तालिका को आड़ा पढ़ने पर खिलाड़ी दिखते हैं। खड़ा पढ़ने पर वह ढाँचा दिखता है जिसके साथ खिलाड़ी जा रहे हैं। तालिका में अधिकारियों के सात ख़ाने हैं और हर ख़ाने का कुल जोड़ पत्र में छपा है।

कोच, मुख्य कोच और उप-मुख्य कोच मिलाकर 150। चिकित्सा कर्मी और डॉक्टर 24। फ़िज़ियोथेरेपिस्ट 31। मालिशकर्मी 10। टीम मैनेजर, टीम लीडर और तकनीकी विश्लेषक 10। अन्य 36। और खेल मनोवैज्ञानिक तथा रिकवरी विशेषज्ञ के ख़ाने में पूरे दल के लिए चार।

वे चार कौन हैं, यह अनुलग्नक-2 में नाम सहित है। तीरंदाज़ी के साथ खेल मनोवैज्ञानिक गायत्री आदित्य मड़केकर। निशानेबाज़ी के साथ शिवम द्विवेदी और तेजस्वी करणवाल। एथलेटिक्स के साथ रिकवरी विशेषज्ञ असंहा डी सिल्वा। यानी पूरे दल में खेल मनोवैज्ञानिक तीन हैं, और छत्तीस में से तैंतीस खेलों के साथ इस ख़ाने में कोई नहीं।

बाक़ी ख़ाने भी खेल दर खेल पढ़ने लायक़ हैं। एथलेटिक्स सबसे बड़ी टीम है, 79 खिलाड़ी और 31 अधिकारी, कुल 110 लोग। उन 79 खिलाड़ियों के साथ डॉक्टर एक है और फ़िज़ियोथेरेपिस्ट तीन। क्रिकेट की टी20 टीम में 30 खिलाड़ी हैं और 14 कोच। हॉकी में 40 खिलाड़ी और छह कोच। कुश्ती में 16 पहलवान और नौ कोच, जो दस से ज़्यादा खिलाड़ियों वाले किसी भी खेल में सबसे ऊँचा अनुपात है। टेबल टेनिस के दस खिलाड़ियों के साथ चार कोच और दो चिकित्सा कर्मी हैं, फ़िज़ियोथेरेपिस्ट का ख़ाना ख़ाली है।

मेज़ पर लेटे एक खिलाड़ी की पीठ पर काम करता प्रशिक्षक, जून 2015 की यह तस्वीर अमेरिका के वॉरियर गेम्स की है; नागोया जा रहे 503 खिलाड़ियों के साथ 31 फ़िज़ियोथेरेपिस्ट हैं और दस मालिशकर्मी
तस्वीर: Sgt. Christina Oneil, विकिमीडिया कॉमन्स Public domain

कुछ पंक्तियाँ अपने-आप में एक जानकारी हैं। गोल्फ़ में छह खिलाड़ी हैं और छह अधिकारी, और अनुलग्नक-2 के मुताबिक़ वे छहों कैडी हैं; कोच के ख़ाने में शून्य है। घुड़सवारी में आठ खिलाड़ी हैं और बारह अधिकारी, जिनमें सात ग्रूम और एक पशु-चिकित्सक हैं। मिश्रित मार्शल आर्ट्स में दो खिलाड़ी हैं और कोई अधिकारी नहीं।

पत्र का पैरा 6 एक कमी ख़ुद मानता है। उसमें ओलंपिक संघ से कहा गया है कि जिन खेलों की दल-सूची में महिला सहयोगी स्टाफ़ नहीं है, वहाँ मंज़ूर पूल से महिला डॉक्टर, फ़िज़ियोथेरेपिस्ट और मालिशकर्मी की व्यवस्था की जाए। यह वाक्य पूरे पत्र में इकलौता है जो मोटे अक्षरों में छपा है।

जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, गुरुवार की शाम

निर्भय चौधरी के पिता नरेश चौधरी भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं और ख़ुद हथौड़ा फेंक चुके हैं। शुरुआती साल उन्हीं की देखरेख में बीते। उसके बाद निर्भय अकेले हैं। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में, यानी उसी अहाते में जहाँ भारतीय खेल प्राधिकरण का दफ़्तर है, वे इंटरनेट पर उपलब्ध हथौड़ा फेंक के साहित्य और यूरोपीय कोचों के इंस्टाग्राम पर कभी-कभार मिलने वाले सबक़ के सहारे अभ्यास करते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के प्रीतीश राज से उन्होंने कहा, "अब सब कुछ ऑनलाइन मौजूद है। सारा साहित्य, डाइट प्लान, एक्सरसाइज़ सब वहाँ है। पिछले दो साल से मैं उसी को फ़ॉलो करके अपनी योजना बना रहा हूँ।" इसी बातचीत में उन्होंने वह वाक्य कहा जो इस पूरी कहानी की जड़ है: "मैं हमेशा ऐसे कोच के नीचे ट्रेनिंग करना चाहता था जिसके पास अंतरराष्ट्रीय अनुभव हो, और इसीलिए मैं ख़ुद को ख़ुद ट्रेन कर रहा था ताकि ऐसा नतीजा निकले जिससे टॉप स्तर का कोच मिल सके।"

उनकी तकनीक 1988 सियोल ओलंपिक के स्वर्ण विजेता सर्गेई लित्विनोव के वीडियो से बनी है। लित्विनोव के बेटे सर्गेई लित्विनोव जूनियर जर्मनी में अकादमी चलाते हैं। निर्भय ने उन्हें लिखा, जवाब रूसी में आया, उसका अनुवाद कराया गया। सलाह दो थी: हल्के हथौड़े से काम करो और पेल्विक मांसपेशियों पर मेहनत करो। "मैं जर्मनी जाकर उनके साथ ट्रेनिंग करना चाहता था, पर पैसे की वजह से नहीं जा सका।"

ठीक एक साल पहले, 10 सितंबर 2025 को, वे डेंगू के साथ बिस्तर पर थे। परिवार ने खेल में आगे बढ़ने पर दोबारा सोचने को कहा। माँ ने साथ दिया और दक्षिण एशियाई एथलेटिक्स महासंघ के अध्यक्ष ललित भनोट ने डटे रहने को कहा। जिस दीवार से सटी खाट पर वे लेटे थे, उस पर उन्होंने लिख दिया: "70+ National record on 10 September"। रिकॉर्ड ठीक उसी तारीख़ पर आया।

उसी शाम एक और राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटा। महिलाओं के हथौड़ा फेंक में तान्या चौधरी ने 68.35 मीटर फेंका और सरिता सिंह का 1 जून 2017 में पटियाला में बनाया 65.25 मीटर का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। महासंघ की 3 सितंबर वाली सूची में तान्या चौधरी का नाम क्रमांक 62 पर है। वे नागोया जा रही हैं।

दोनों रिकॉर्ड एक ही स्पर्धा में, एक ही शाम, एक ही मैदान पर बने। एक रिकॉर्ड-धारक दल में है और दूसरा नहीं, और इसकी वजह प्रदर्शन नहीं, तारीख़ है। मंज़ूरी-पत्र 2 सितंबर का है, थ्रो 10 सितंबर का। निर्भय ने ख़ुद इस पर शिकायत नहीं की। उन्होंने कहा कि वे इस रिकॉर्ड को छह-सात बार और तोड़ना चाहते हैं, और यह कि एशियाई खेलों का छूटना उन्हें खलता नहीं।

महासंघ की जिस सूची में हथौड़ा फेंक का राष्ट्रीय रिकॉर्ड 70.73 मीटर दर्ज है, वह 24 नवंबर 2024 के बाद अद्यतन नहीं हुई है। उसी सूची में 400 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड 45.21 सेकंड लिखा है, जो 13 जुलाई 2019 को क्लाद्नो में मुहम्मद अनस याहिया ने बनाया था। वह रिकॉर्ड भी अब दो बार टूट चुका है।

कोचिंग पर सरकार की अपनी रिपोर्ट

दिसंबर 2025 में खेल मंत्रालय को एक टास्क फ़ोर्स की रिपोर्ट सौंपी गई, जिसका शीर्षक है "भारत में कोचिंग तंत्र के विकास का एकीकृत ढाँचा"। अध्यक्ष पुलेला गोपीचंद थे। रिपोर्ट मंत्रालय की वेबसाइट पर पीडीएफ़ के तौर पर मौजूद है और 43 पन्नों की है।

उसकी भूमिका पहले पैराग्राफ़ में ही यह लिखती है: "कई सालों से भारत छोटे रास्तों पर निर्भर रहा है, यानी खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजना या विशेषज्ञता की कमी भरने के लिए कुछ समय को विदेशी कोच बुला लेना।" अगला पैराग्राफ़ कहता है कि मज़बूत घरेलू व्यवस्था न होने से हालत यह है कि भारत के पास ज़मीनी, मध्यम और शीर्ष तीनों स्तरों पर पर्याप्त गुणवत्ता वाले कोच नहीं हैं। और आगे: "भारत में ढाँचागत कोच विकास का काम मुश्किल से शुरू ही हुआ है। यह तंत्र बिखरा हुआ, असंगत और संस्थागत मज़बूती के बजाय व्यक्तिगत कोशिश पर टिका हुआ है।"

यह वाक्य निर्भय चौधरी के थ्रो से नौ महीने पहले लिखा गया था।

रिपोर्ट की सिफ़ारिशों में एक राष्ट्रीय कोच प्रत्यायन बोर्ड, कोचों की एक राष्ट्रीय रजिस्ट्री और लाइसेंसिंग बोर्ड, और एक "कोच टॉप्स" कोष है। आख़िरी सुझाव सीधे इसी समस्या पर है: जिस तरह खिलाड़ी टॉप्स में अपनी ट्रेनिंग योजना जमा करते हैं, उसी तरह चुने गए कोच अपनी पेशेवर योजना जमा करें, जिसमें किसी नामी विदेशी कोच या टीम के साथ इंटर्नशिप भी माँगी जा सकती है। यह अभी सिफ़ारिश है, योजना नहीं।

मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 बताती है कि विदेशी कोच रखने के नियम क्या हैं। महासंघ अब खेल प्राधिकरण से सलाह करके ख़ुद विदेशी कोच रख सकते हैं, पर विदेशी कोचों पर होने वाला ख़र्च महासंघ के कुल मंज़ूर बजट के 30 फ़ीसदी से ज़्यादा नहीं हो सकता। इसके साथ एक शर्त और है: महासंघ यह पक्का करेंगे कि विदेशी कोच के कार्यकाल में कम से कम पाँच भारतीय कोच उसके साथ बने रहें, ताकि भारतीय कोच भी तैयार हों और विदेशी कोचों पर निर्भरता घटे। मुख्य कोच का मासिक पारिश्रमिक 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख और बाक़ी कोचों का 75,000 से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है।

जिस टास्क फ़ोर्स ने यह रिपोर्ट लिखी, उसके अध्यक्ष का नाम एशियाई खेलों के दल की अधिकारी-सूची में भी है। अनुलग्नक-2 में क्रमांक 47 पर पुलेला गोपीचंद, कोच, बैडमिंटन।

विशाल टीके और जेसन डॉसन

400 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी इसी साल टूटा, और वहाँ ढाँचा ठीक उल्टा दिखता है। विशाल टीके 44.98 सेकंड के साथ 45 सेकंड से नीचे जाने वाले पहले और अकेले भारतीय हैं। यह समय उन्होंने मई 2026 में राँची के फ़ेडरेशन कप में निकाला। उससे पहले अगस्त 2025 में चेन्नई की अंतर-राज्यीय प्रतियोगिता में 45.12 सेकंड के साथ वे पहली बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ चुके थे।

उनके कोच जमैका के जेसन डॉसन हैं। मंज़ूरी-पत्र के अनुलग्नक-2 में क्रमांक 16 पर उनका पूरा नाम दर्ज है, जेसन अलेक्जेंडर डॉसन, कोच, एथलेटिक्स। वे एथलेटिक्स के उन 20 कोचों में से एक हैं जो नागोया जा रहे हैं।

डॉसन ने इंडियन एक्सप्रेस के निहाल कोशी को बताया कि जब विशाल पहली बार उनके पास आए तो छह फ़ुट दो इंच का वह धावक उन्हें दुबला लगा। "इसीलिए मैं उसे स्टिकमैन कहता था। मैंने विशाल को देखा और कहा, ठीक है मैं तुम्हें कोच करने की कोशिश करूँगा। पर एक एहसान चाहिए। जो खा सकते हो, सब खाओ।" विशाल ने उसी ट्रेनिंग को इन शब्दों में बताया, "मैं अपने कम्फ़र्ट ज़ोन से बाहर हूँ, पर ख़ुशी-ख़ुशी नरक में जी रहा हूँ।"

रास्ता सीधा नहीं था। डॉसन के साथ जुड़ने के बाद पहली दौड़ मार्च 2025 में तिरुवनंतपुरम के इंडियन ओपन में थी, जिसमें विशाल 49.07 सेकंड लेकर सातवें आए। एक महीने बाद कोच्चि के फ़ेडरेशन कप में उन्होंने 46.19 सेकंड के साथ स्वर्ण जीता। "लोगों ने मुझे बुरा महसूस कराया, कहा कि तुम लड़कियों वाला टाइम क्यों दौड़ रहे हो। एक महीने बाद फ़ेड कप जीतकर मैंने सबका मुँह बंद कर दिया।" चेन्नई की उस पहली रिकॉर्ड वाली दौड़ में उनकी बिब के पीछे लिखा था, "मेरे कोच जेसन के लिए।"

भुवनेश्वर में 2017 की एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में बारिश के बीच पुरुषों की 400 मीटर दौड़, जिसमें भारत के मोहम्मद अनस और अरोकिया राजीव आगे हैं; अनस ने दो साल बाद क्लाद्नो में 45.21 सेकंड का वह रिकॉर्ड बनाया जो महासंघ की सूची में अब भी दर्ज है
तस्वीर: Athletics Federation of India, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

डॉसन अपने प्रभावों में जमैका के ग्लेन मिल्स और फ़िट्ज़ कोलमैन का नाम लेते हैं। भारत आने पर उन्हें जो चीज़ चौंकाने वाली लगी वह प्रतिभा की कमी नहीं थी। "जो बात मुझे चौंकाती थी वह यह थी कि यहाँ खिलाड़ी ट्रेनिंग को किस नज़र से देखते हैं। वह एक तरह का प्रतिरोध था, क्योंकि जो भी नया लगे वह असंभव लगता है। जैसे, हमने यह पहले कभी नहीं किया।" विशाल की तकनीक पर उनका पहला काम स्टार्टिंग ब्लॉक नहीं था। "उसके दौड़ने का ढंग और बॉडी लैंग्वेज कुछ भी नहीं था। मैंने कहा, विशाल, तुम्हें हाथों का इस्तेमाल सीखना होगा।" ब्लॉक से निकलने का काम अगले सीज़न के लिए टाल दिया गया है।

10 सितंबर की उसी शाम विशाल ने 400 मीटर 45.36 सेकंड में जीता और महासंघ की रिपोर्ट में दर्ज बयान दिया, "मैं और बेहतर करूँगा और जापान एशियाई खेलों में पदक जीतूँगा।" उस दौड़ में पहले छह धावक 46 सेकंड से नीचे रहे।

सुजीत का 65 किलो और नागोया का रास्ता

22 अगस्त के मंज़ूरी-पत्र की नाम-वार सूची में क्रमांक 470 पर एक ही शब्द है। दिया गया नाम "सुजीत", कुलनाम का ख़ाना ख़ाली, पुरुष, कुश्ती, पुरुष फ़्रीस्टाइल 65 किलो।

यह वही वर्ग है जिसमें 2018 में बजरंग पूनिया ने स्वर्ण जीता था, और वह भारत के किसी पुरुष पहलवान का आख़िरी एशियाई खेल स्वर्ण है। हांगझोऊ में कुश्ती से भारत को छह पदक मिले थे, जिनमें एक भी स्वर्ण नहीं था।

इंडियन एक्सप्रेस के मिहिर वासवदा ने 11 सितंबर को लिखा कि आइची-नागोया की प्रवेश सूची में 65 किलो के मौजूदा विश्व चैंपियन और विश्व नंबर एक, ईरान के रहमान अमूज़ाद का नाम नहीं है। इससे रास्ता आसान नहीं हुआ, सिर्फ़ बदल गया है। जापान अपने ओलंपिक चैंपियन कोतारो कियोओका को उतारेगा, जिन्होंने पेरिस 2024 के फ़ाइनल में उन्हीं अमूज़ाद को 10-3 से हराया था। पेरिस का आधिकारिक ड्रॉ यही स्कोर दर्ज करता है। कियोओका को जापान की घरेलू व्यवस्था से निकलने के लिए पूर्व विश्व और ओलंपिक चैंपियन ताकुतो ओतोगुरो को हराना पड़ा था।

सुजीत का यह साल हारे बिना बीता है। ज़ाग्रेब ओपन और मुहामेत मालो रैंकिंग सीरीज़ के स्वर्ण के बाद उन्होंने बिश्केक में एशियाई चैंपियनशिप जीती, जहाँ जापान की ओर से ओलंपिक चैंपियन नहीं बल्कि 61 किलो से ऊपर आए ताकारा सुदा उतरे थे। एशियाई खेलों में सामना उसी वर्ग के ओलंपिक चैंपियन से हो सकता है, और वह भी उसके अपने देश में।

कुश्ती दल का ढाँचा तालिका में सबसे सघन है। सोलह पहलवानों के साथ नौ कोच, दो फ़िज़ियोथेरेपिस्ट, एक मालिशकर्मी और दो अन्य जा रहे हैं। उन दो अन्य के नाम अनुलग्नक-2 में हैं: कोसेई अकाइशी और गोगी कोगुआश्विली, दोनों हाई परफ़ॉर्मेंस डायरेक्टर। सुजीत की तकनीक की तारीफ़ करने वाले विदेशी कोच का नाम अख़बार ने शाको बेंदिनितिस लिखा है। मंत्रालय की सूची में कुश्ती के नौ कोचों में एक नाम एमज़ारियोस बेंतिनिदिस का है। उनका कहा वासवदा ने छापा है कि थोड़ी और रणनीतिक सलाह और थोड़ी और ताक़त के साथ यह पहलवान लॉस एंजिलिस ओलंपिक में ख़तरनाक होगा।

टेबल टेनिस की मेज़

टेबल टेनिस में जो चीज़ बदलती है वह बल्ला नहीं, मेज़ है। जी साथियान ने इंडियन एक्सप्रेस की शिवानी नाइक से कहा, "मेज़ों में उतना ही बड़ा फ़र्क़ होता है जितना टेनिस में घास और क्ले में।"

भारत की मेज़ें दानेदार, तेज़ और ज़्यादा स्पिन देने वाली हैं, और गर्मी में गेंद और तेज़ आती है। यूरोप की मेज़ें उससे धीमी हैं। सबसे धीमी चीन और जापान की डीएचएस मेज़ें हैं, जिन पर स्पिन का हिस्सा घट जाता है। कोच एस रमन तीन चर गिनाते हैं: गेंद का ऊपर उठना, मेज़ की रगड़ से तय होने वाला स्पिन, और सीधी रफ़्तार। साथियान के मुताबिक़ कोरिया और चीन के अभ्यास हॉल में बारह-तेरह तरह की मेज़ें होती हैं, भारत में तीन-चार, और चेन्नई में दो-तीन।

मनुष शाह इसका असर शरीर पर बताते हैं। धीमी गेंद पर ज़्यादा इंतज़ार करना पड़ता है और ताक़त निचले शरीर से निकालनी पड़ती है, वरना चोट ऊपरी शरीर में आती है। रमन इस पूरी बहस पर एक वाक्य रखते हैं, "आख़िर में बात खिलाड़ी की है। जब तक आप जानते हैं कि मेज़ न आपकी सबसे अच्छी दोस्त है न सबसे बड़ी दुश्मन, आप ठीक हैं।"

टॉप्स का पैसा और खेलो इंडिया का पैसा

टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम, जिसे टॉप्स (TOPS) कहा जाता है, की असली संख्याएँ मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 में हैं। पूरे पेरिस चक्र में, यानी 2021 से 2024 तक, टॉप्स के तहत 489 खिलाड़ियों को सहायता मिली और उन पर कुल 125 करोड़ रुपये ख़र्च हुए। कोर ग्रुप के खिलाड़ी को महीने में 50,000 रुपये जेब ख़र्च मिलता है, डेवलपमेंट ग्रुप के खिलाड़ी को 25,000। पेरिस ओलंपिक में गए सभी 117 खिलाड़ी टॉप्स कोर ग्रुप के थे।

यह पैसा राष्ट्रीय खेल विकास कोष से आता है, और उस कोष की हालत उसी रिपोर्ट में दर्ज है। 31 मार्च 2025 को कोष की पूँजी 91.63 करोड़ रुपये थी। 2024-25 की उपलब्धि के तौर पर रिपोर्ट दो आँकड़े देती है: कंपनियों के सामाजिक दायित्व मद से 70.17 करोड़ रुपये और सरकारी अनुदान से 13.71 करोड़। दूसरा आँकड़ा व्यय बजट में इसी मद के वास्तविक ख़र्च से हूबहू मिलता है। जिस कोष से देश के शीर्ष खिलाड़ियों की तैयारी होती है, उसमें उस साल कंपनियों का पैसा सरकार के पैसे से पाँच गुना था।

ज़मीनी सिरे पर खेलो इंडिया है। 31 मार्च 2025 तक 21 खेलों में 2,845 खिलाड़ी खेलो इंडिया एथलीट के रूप में दर्ज थे। मान्यता प्राप्त अकादमी में अभ्यास करने वाले हर खिलाड़ी पर साल में 6.28 लाख रुपये तक ख़र्च होते हैं, जिसमें 10,000 रुपये महीने का जेब ख़र्च शामिल है। सबसे बड़ी संख्या एथलेटिक्स की है, 235; फिर निशानेबाज़ी 213, हॉकी 190, कुश्ती 164 और टेबल टेनिस 116। खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों की मंज़ूर क्षमता 4,232 खिलाड़ियों की है और उस साल की वास्तविक संख्या 3,733 थी।

गुवाहाटी में 2020 के खेलो इंडिया यूथ गेम्स की पुरुष कलात्मक जिमनास्टिक्स अंडर-17 स्पर्धा के तीन पदक विजेता, जनवरी 2020 की तस्वीर; खेलो इंडिया एथलीटों की खेलवार गिनती में सबसे ऊपर एथलेटिक्स है और जिमनास्टिक्स पहले पाँच में नहीं
तस्वीर: Government of Odisha, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 4.0

बजट की तस्वीर व्यय बजट 2026-27 की माँग संख्या 102 में है। मंत्रालय का कुल आवंटन 4,479.88 करोड़ रुपये है। खेलो इंडिया को 924.35 करोड़ मिले हैं; पिछले साल इसी मद का बजट 1,000 करोड़ था जो संशोधित अनुमान में घटकर 700 करोड़ रह गया। राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता की वह योजना, जिससे यह पूरा दल नागोया जा रहा है और जिसके ब्योरे में विदेशी कोच रखना भी शामिल है, 425 करोड़ रुपये की है। राष्ट्रीय खेल विकास कोष को 15 करोड़ मिले हैं। और इसी बजट में एक नई मद है, खेल सामान निर्माण को बढ़ावा, जिस पर 500 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

पदक जीतने पर मिलने वाली रक़म भी तय है। 31 जनवरी 2025 को संशोधित योजना के तहत एशियाई खेलों के स्वर्ण पर 30 लाख, रजत पर 20 लाख और कांस्य पर 10 लाख रुपये मिलते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में नक़द पुरस्कार के तौर पर 38.55 करोड़ रुपये 425 लोगों को दिए गए, जिनमें राष्ट्रीय खेल पुरस्कार भी शामिल हैं।

हांगझोऊ की गिनती में एक पदक कम

2023 के हांगझोऊ खेलों में भारत ने पहली बार सौ का आँकड़ा पार किया और चौथे नंबर पर रहा। खेलवार ब्योरा बताता है कि पदक कहाँ से आए। एथलेटिक्स से 29, जिनमें छह स्वर्ण, चौदह रजत और नौ कांस्य थे। निशानेबाज़ी से 22, जिनमें सात स्वर्ण। तीरंदाज़ी से नौ, जिनमें पाँच स्वर्ण। स्क्वैश और रोइंग से पाँच-पाँच, कुश्ती से छह, बैडमिंटन से तीन, और टेबल टेनिस से एक।

वह इकलौता टेबल टेनिस पदक महिला युगल का कांस्य था, जो सुतीर्था मुखर्जी और ऐहिका मुखर्जी ने 2 अक्टूबर 2023 को जीता था। 22 अगस्त की मंज़ूरी-सूची में टेबल टेनिस के दस नाम हैं: श्रीजा अकुला, दीया चिताले, सिंड्रेला दास, यशस्विनी घोरपड़े, सुतीर्था मुखर्जी, साथियान ज्ञानसेकरन, पयस जैन, मनुष शाह, मानव ठक्कर और हरमीत देसाई। उस जोड़ी का आधा हिस्सा इस सूची में नहीं है।

कुल गिनती पर एक पेच है। भारत की तालिका 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य, यानी 107 पदक के रूप में दर्ज हुई थी और 8 सितंबर की विदाई समारोह की ख़बरों में भी यही संख्या छपी। टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने 20 मई 2024 को ख़बर दी कि मुक्केबाज़ प्रवीण हुड्डा को अप्रैल 2022 से मार्च 2023 के बीच ठिकाने की जानकारी न देने पर इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने निलंबित किया और विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी के नियमों के तहत उनका 57 किलो का कांस्य वापस ले लिया गया। उस घटाव के बाद हांगझोऊ की गिनती 106 है। सरकार का कोई दस्तावेज़ इस बदली हुई संख्या को दर्ज करता हुआ नहीं मिला।

मंज़ूरी-पत्र का पैरा 7 डोप जाँच की ज़िम्मेदारी राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी, खेल प्राधिकरण और संबंधित महासंघों पर डालता है। उसी पत्र का पैरा 13 कहता है कि पहले विदेशों में कुछ अधिकारी और खिलाड़ी ग़ायब हो चुके हैं, इसलिए महासंघ हर सदस्य की पृष्ठभूमि ठीक से जाँच लें।

2023 के आँकड़े को 2026 की तालिका के सामने रखिए। निशानेबाज़ी ने 22 पदक दिए थे और इस बार 30 खिलाड़ियों के साथ 11 कोच हैं और दल के तीन खेल मनोवैज्ञानिकों में से दो उसी के पास हैं। एथलेटिक्स ने 29 पदक दिए थे और इस बार 79 खिलाड़ियों के साथ एक डॉक्टर और तीन फ़िज़ियोथेरेपिस्ट जा रहे हैं। टेबल टेनिस ने एक पदक दिया था और इस बार उसके दस खिलाड़ियों के साथ कोई फ़िज़ियोथेरेपिस्ट नहीं है।

स्रोतयुवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, खेल विभाग, पत्र सं. 70-15/2026-गवर्नेंस-1, 2 सितंबर 2026: 768 सदस्यीय दल की मंज़ूरी, खेलवार तालिका, अनुलग्नक-1 (जोड़े गए खिलाड़ी), अनुलग्नक-2 (246 टीम अधिकारियों के नाम) और अनुलग्नक-3 (वित्तीय सहायता की दरें), युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, खेल विभाग, पत्र सं. 70-15/2026-गवर्नेंस-1, 22 अगस्त 2026: 492 खिलाड़ियों की पहली मंज़ूरी और अनुलग्नक-1 में नाम-वार सूची, खेल मंत्रालय की वेबसाइट पर मंज़ूरी-पत्र का पन्ना, 10 सितंबर 2026 को अद्यतन, भारत में कोचिंग तंत्र के विकास का एकीकृत ढाँचा, टास्क फ़ोर्स रिपोर्ट, अध्यक्ष पुलेला गोपीचंद, खेल मंत्रालय के लिए तैयार, दिसंबर 2025, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, वार्षिक रिपोर्ट 2024-25: टॉप्स, राष्ट्रीय खेल विकास कोष, खेलो इंडिया, नक़द पुरस्कार और विदेशी कोच से जुड़े नियम, व्यय बजट 2026-27, अनुदान माँगों पर टिप्पणियाँ, माँग संख्या 102 (युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय), वित्त मंत्रालय, फ़रवरी 2026, भारतीय एथलेटिक्स महासंघ, 3 सितंबर 2026: आइची-नागोया के लिए 77 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम की पूरी सूची, भारतीय एथलेटिक्स महासंघ, 10 सितंबर 2026: इंडियन एथलेटिक्स सीरीज़ फ़ाइनल की रिपोर्ट और सभी स्पर्धाओं के नतीजे, भारतीय एथलेटिक्स महासंघ, राष्ट्रीय रिकॉर्ड सूची, 24 नवंबर 2024 तक अद्यतन: हथौड़ा फेंक 70.73 मीटर और 400 मीटर 45.21 सेकंड, इंडियन एक्सप्रेस, प्रीतीश राज, 11 सितंबर 2026: निर्भय चौधरी की तैयारी और उनके बयान, इंडियन एक्सप्रेस, निहाल कोशी, 11 सितंबर 2026: विशाल टीके और जेसन डॉसन के बयान, इंडियन एक्सप्रेस, मिहिर वासवदा, 11 सितंबर 2026: सुजीत के 65 किलो वर्ग की प्रवेश सूची और प्रतिद्वंद्वी, इंडियन एक्सप्रेस, शिवानी नाइक, 11 सितंबर 2026: मेज़ों के फ़र्क़ पर साथियान, एस रमन, मनुष शाह और सुतीर्था मुखर्जी के बयान, हांगझोऊ 2023 में भारत का खेलवार पदक ब्योरा और कुल गिनती, प्रवीण हुड्डा का निलंबन और एशियाई खेलों का पदक वापस लिया जाना, टाइम्स ऑफ़ इंडिया की 20 मई 2024 की रिपोर्ट के हवाले से, पेरिस 2024, पुरुष फ़्रीस्टाइल 65 किलो का पूरा ड्रॉ और फ़ाइनल का स्कोर, बिज़नेस स्टैंडर्ड, 8 सितंबर 2026: भारतीय दल की विदाई और मनसुख मांडविया तथा पीटी उषा के संबोधन

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