मीराबाई चानू का रजत 198 किलो का है, सोने से सत्रह किलो पीछे; भारत के भारोत्तोलन को एशियाई खेलों में अट्ठाईस बरस बाद पदक मिला
बुधवार, 23 सितंबर की सुबह जापान के नागोया सिटी ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री सेंटर में मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किलो भार-वर्ग में रजत जीता, स्नैच में 87 और क्लीन ऐंड जर्क में 111, जोड़ 198 किलो। उत्तर कोरिया की री सोंग-गुम ने तीनों माप में विश्व रिकॉर्ड के साथ 215 किलो का सोना लिया। यह एशियाई खेलों में भारत के भारोत्तोलन का पहला पदक है 1998 के बाद, जब कर्णम मल्लेश्वरी ने बैंकॉक में रजत जीता था।

मीराबाई चानू के पास अब वह पदक भी है जो उनके पास कभी नहीं था। बुधवार, 23 सितंबर की सुबह जापान के नागोया सिटी ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री सेंटर में उन्होंने महिलाओं के 49 किलो भार-वर्ग में रजत जीता। ओलंपिक चांदी, विश्व चैंपियनशिप का सोना और राष्ट्रमंडल खेलों के तीन स्वर्ण उनके नाम पहले से थे। एशियाई खेलों का कोई पदक नहीं था। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बधाई पत्र सूचना कार्यालय की विज्ञप्ति संख्या 2313855 के ज़रिए उसी दिन दोपहर 12 बजकर 47 मिनट पर जारी की, शब्द थे "उनका दृढ़ संकल्प एवं निरंतरता देश को प्रेरित करते रहते हैं।"
फ़ासला भी दर्ज है। उत्तर कोरिया की री सोंग-गुम ने 94 किलो स्नैच और 121 किलो क्लीन ऐंड जर्क से 215 किलो का जोड़ बनाया, तीनों नए विश्व रिकॉर्ड। चानू का जोड़ 198 किलो रहा।
सत्रह किलो का फ़ासला।
भारत के लिए एशियाई खेलों में भारोत्तोलन का पिछला पदक 1998 में आया था, कर्णम मल्लेश्वरी का बैंकॉक में जीता रजत। अट्ठाईस बरस का यह फ़ासला असली है और दस्तावेज़ों में दर्ज है। ईएसपीएन की सुर्ख़ी इस जीत को उनका "सेट" पूरा होना बताती है, यानी वह इकलौता बड़ा मंच भी अब भरा जिस पर पहले कभी पदक नहीं आया। इस दावे का एक हिस्सा जाँच में टिकता नहीं। वह हिस्सा 2018 का है, और नीचे उसका पूरा हिसाब है।
फ़ुकिआगे हॉल का नतीजा: 83-85-87, फिर 107-111
आयोजन समिति की अपनी प्रविष्टि-सूची में चानू का बिब नंबर 42 दर्ज है, वज़न उस दिन 48.85 किलो और जन्मतिथि 8 अगस्त 1994। स्नैच में उन्होंने तीनों प्रयास पार किए, बढ़ते क्रम में: पहला 83 किलो, दूसरा 85, तीसरा 87। तीनों सफल। यह लगातार तीन कामयाब स्नैच किसी भी भारोत्तोलक के लिए दुर्लभ शुरुआत है, क्योंकि ज़्यादातर मुक़ाबलों में कोई न कोई प्रयास छूट जाता है।

क्लीन ऐंड जर्क में उन्होंने 107 किलो से शुरुआत की, सफल रहीं, फिर 111 किलो पर गईं और वह भी पार कर लिया। तीसरा प्रयास उन्होंने लिया ही नहीं। द हिन्दू की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक़ अंतिम जोड़ 198 किलो बना, स्नैच के 87 और क्लीन ऐंड जर्क के 111 का हिसाब। इंडोनेशिया की लुलुक दियाना त्रि विजयाना कांस्य पर रहीं, 191 किलो के जोड़ के साथ। चानू और कांस्य के बीच सात किलो का फ़ासला बचा।
यह जोड़ उनके अपने सर्वश्रेष्ठ से कम है। उनका निजी सर्वश्रेष्ठ और राष्ट्रीय रिकॉर्ड 205 किलो का है, जो पहली बार अप्रैल 2021 में ताशकंद में बना था, 86 किलो स्नैच और 119 किलो क्लीन ऐंड जर्क के साथ, ओलंपिक्स डॉट कॉम की उस दिन की रिपोर्ट के मुताबिक़ तब क्लीन ऐंड जर्क का विश्व रिकॉर्ड भी। फ़रवरी 2026 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उन्होंने वही 205 का जोड़ दोहराया, इस बार 89 स्नैच और 116 क्लीन ऐंड जर्क के साथ, ओलंपिक्स डॉट कॉम की 4 फ़रवरी की रिपोर्ट के अनुसार तीन नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड के दावे के साथ। बुधवार का 198 उस सर्वश्रेष्ठ से सात किलो पीछे है। एशियाई खेलों का दबाव अलग चीज़ है, और आँकड़ा यही बताता है।
सोने के लिए तीन विश्व रिकॉर्ड चाहिए थे
री सोंग-गुम की जीत किसी उलटफेर की गुंजाइश नहीं छोड़ती। कोरिया टाइम्स की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक़ उन्होंने स्नैच में पहला प्रयास 90 किलो पर पार किया, फिर 94 किलो पर गईं और वह भी सफल रहा, पुराने 93 किलो के विश्व चिह्न से एक किलो ऊपर। क्लीन ऐंड जर्क में 116 किलो से शुरुआत की, फिर 121 किलो लिया, पुराने 115 किलो के चिह्न को छह किलो पीछे छोड़ते हुए। जोड़ 215 किलो बना, पुराने विश्व चिह्न से सात किलो ऊपर। तीनों माप में रिकॉर्ड, एक ही दोपहर में।
यह उनका लगातार तीसरा एशियाई खेल स्वर्ण है। कोरिया टाइम्स के मुताबिक़ उन्होंने 2018 के जकार्ता-पालेमबांग खेलों में 48 किलो भार-वर्ग में सोना जीता था, जब वह वर्ग पुरानी श्रेणी-व्यवस्था के तहत मौजूद था। 2023 के हांगझोऊ खेलों में उन्होंने 49 किलो के नए वर्ग में 216 किलो के जोड़ से सोना जीता। बुधवार का 215 किलो, तीनों माप में विश्व रिकॉर्ड के साथ, उसी लकीर की तीसरी कड़ी है। भारत की तुलना में यह किसी और ग्रह का प्रदर्शन जैसा दिखता है, पर हिसाब से भी वैसा ही है: गोल्ड कोस्ट, बर्मिंघम और ग्लासगो के अपने तीन राष्ट्रमंडल स्वर्ण चानू ने जिस दबदबे से जीते थे, री सोंग-गुम का एशियाई खेलों में दबदबा उससे कमतर नहीं।
भार उठाने का हिसाब: तीन मौक़े, और एक जो लिया ही नहीं गया
भारोत्तोलन में हर प्रतियोगी दो हरकतें करता है, स्नैच पहले और क्लीन ऐंड जर्क बाद में, हर एक में तीन मौक़े। हर मौक़े से पहले खिलाड़ी या उसका कोच बताता है कि अगली बार कितना वज़न उठाना है, और वह घोषित वज़न बदला नहीं जा सकता, सिर्फ़ बढ़ाया जा सकता है, सिवाय इसके कि पिछला प्रयास नाकाम रहा हो। तब वही वज़न दोबारा लिया जा सकता है। यह नियम जान-बूझकर सख़्त है। इसके बिना कोई भी खिलाड़ी हल्का वज़न घोषित करके आसान अंक बटोर सकता था। हर हरकत में जो सबसे भारी वज़न सफलतापूर्वक उठा, वही उस हरकत का आधिकारिक अंक बनता है, नाकाम कोशिशों का कोई अंक नहीं जुड़ता और घटता भी नहीं। स्नैच का सबसे अच्छा अंक और क्लीन ऐंड जर्क का सबसे अच्छा अंक जोड़ने से कुल जोड़ बनता है, और तालिका इसी जोड़ से बनती है।

अगर किसी हरकत के तीनों प्रयास नाकाम रहें तो खिलाड़ी का कोई जोड़ बनता ही नहीं, और वह रैंकिंग से बाहर हो जाता है। यही चानू के साथ 2016 के रियो ओलंपिक में हुआ था, जब वे क्लीन ऐंड जर्क के तीनों प्रयासों में क़ानूनी तौर पर वज़न नहीं उठा पाई थीं, फ़र्स्टपोस्ट की उस समय की रिपोर्ट के मुताबिक़, और अंतिम तालिका में उनका कोई स्थान दर्ज नहीं हुआ था। तीसरा प्रयास इसलिए एक जुआ है, हर बार नहीं, पर अक्सर।
बुधवार को चानू ने यह जुआ खेला ही नहीं। दूसरे प्रयास में 111 किलो पार करने के बाद उनका जोड़ 198 पर पहुँच चुका था, सोना उस समय तक नामुमकिन था और कांस्य से बढ़त सात किलो की। तीसरा प्रयास रंग नहीं बदल सकता था, सिर्फ़ जोड़ बढ़ा सकता था। जोखिम उठाने की कोई वजह नहीं बचती जब पदक का रंग पहले से तय हो। तीन बरस पहले हांगझोऊ में स्थिति उलटी थी, और उस उलटी स्थिति में उन्होंने ठीक विपरीत चुनाव किया था, जिसका पूरा ब्यौरा आगे है।
टाई का नियम भी बताने लायक़ है, पर एक चेतावनी के साथ। पुरानी और आमतौर पर दोहराई जाने वाली जानकारी कहती है कि बराबर जोड़ पर हल्के वज़न वाला खिलाड़ी ऊपर रहता है। यह जानकारी अब ग़लत है। अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ के संचालन बोर्ड ने वज़न-आधारित टाई-नियम हटाने का फ़ैसला 26 सितंबर 2016 की बीजिंग बैठक में लिया था, द बारबेल स्पिन की उस समय की रिपोर्ट के मुताबिक़, जिसकी प्रति इंटरनेट आर्काइव में सुरक्षित मिलती है। नया आधार समय बन गया, वज़न नहीं। मौजूदा समझ के अनुसार बराबरी की सूरत में वह खिलाड़ी ऊपर रहता है जिसने वह जोड़ पहले बनाया, यानी जिसे कम प्रयासों की ज़रूरत पड़ी।
यहाँ एक सीमा भी साफ़ बतानी ज़रूरी है। महासंघ की अपनी मौजूदा नियम-पुस्तिका तक इस डेस्क को पहुँच नहीं मिली। वेबसाइट ने बार-बार प्रवेश रोक दिया, हर कोशिश में एक ही चेतावनी के साथ। यह ब्यौरा इसलिए प्राथमिक दस्तावेज़ पर नहीं, ऊपर बताए दो स्रोतों पर टिका है। बुधवार के नतीजे में किसी भी पायदान पर बराबरी नहीं थी। यह नियम इसलिए आज के परिणाम पर लागू ही नहीं हुआ, सिर्फ़ पढ़ने के काम का है। अगली बार दो नाम बराबर जोड़ पर दिखें तो यही सवाल फिर पूछा जाना चाहिए, क्योंकि पुरानी जानकारी दोहराना आसान है और सही जानकारी खोजना मेहनत माँगता है।
अठारह में मैदान से बाहर, तेईस में ज़मीन पर
यह "सेट" वाली कहानी परखने लायक़ है। इसके लिए चानू के तीन पुराने एशियाई खेलों का हिसाब देखना ज़रूरी है। 2014 के इंचियोन खेलों में वे 48 किलो वर्ग में उतरीं, अपना पहला एशियाई खेल, बाईस बरस की उम्र में। स्नैच में उनके तीन प्रयास 70, 73 और 75 किलो के रहे, सभी सफल। क्लीन ऐंड जर्क में 90, 93 और 96 किलो, वह भी तीनों सफल। जोड़ 171 किलो बना। नौवां स्थान। पोडियम से दूर, पर एक भी नाकाम प्रयास नहीं, यह ध्यान रखने लायक़ शुरुआत थी।
2018 के जकार्ता-पालेमबांग खेलों को लेकर आम धारणा यह है कि वे वहाँ उतरीं और नाकाम रहीं। दस्तावेज़ इससे अलग कहानी कहते हैं। स्पोर्ट्सकीड़ा की 7 अगस्त 2018 की रिपोर्ट का शीर्षक ही साफ़ है: विश्व चैंपियन मीराबाई चानू एशियाई खेलों से हट गईं। हिन्दुस्तान टाइम्स और द फ़्री प्रेस जर्नल की उसी तारीख़ की रिपोर्टें, दोनों पीआरइंडर के ज़रिए उपलब्ध, एक ही ब्यौरा देती हैं: राष्ट्रीय कोच विजय शर्मा ने महासंघ को सिफ़ारिश भेजी कि चानू को जकार्ता नहीं भेजा जाए, क्योंकि उनकी पीठ की पुरानी चोट ठीक होने के बाद अभ्यास में दोबारा उभर आई थी। तेईस बरस की चानू उस साल के आख़िर में होने वाली विश्व चैंपियनशिप के लिए फ़िट रहना चाहती थीं, क्योंकि वही चैंपियनशिप टोक्यो ओलंपिक क्वालिफ़िकेशन का पहला मौक़ा था। वे जकार्ता में प्रतियोगिता के मंच पर उतरी ही नहीं। कोई स्नैच नहीं, कोई क्लीन ऐंड जर्क नहीं, कोई नाकामी दर्ज नहीं। सिर्फ़ ग़ैर-मौजूदगी।
फ़र्क़ मामूली नहीं है। "उतरीं और हार गईं" एक बात है। "उतरी ही नहीं" बिलकुल दूसरी। जो कहानी आज चल रही है, वह पहले वाले की मानती है। दस्तावेज़ दूसरे वाले की गवाही देते हैं।
2023 का हांगझोऊ अध्याय इससे भी ज़्यादा दर्दनाक है, क्योंकि वहाँ वे मैदान पर थीं और पदक हाथ से फिसला। 49 किलो वर्ग में उन्होंने स्नैच 83 किलो पर ख़त्म किया, 86 किलो के दो प्रयास नाकाम रहने के बाद। क्लीन ऐंड जर्क में पहला प्रयास 108 किलो पर सफल रहा। इसके बाद उन्होंने 117 किलो का लक्ष्य रखा, वह वज़न जो उन्हें 191 से 200 तक ले जाता और थाईलैंड की थान्याथोन सुकचारोएन के 199 किलो के कांस्य से आगे निकाल देता। दूसरा प्रयास नाकाम रहा। तीसरे प्रयास में, ईएसपीएन की 30 सितंबर 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक़, बार उनकी कॉलरबोन तक पहुँचा और वे वहीं ज़मीन पर गिर पड़ीं, जांघ की मांसपेशी में चोट के साथ। उन्हें स्ट्रेचर पर मैदान से बाहर ले जाया गया। अंतिम स्थान चौथा रहा, जोड़ 191 किलो, कांस्य से आठ किलो पीछे।
तीन एशियाई खेल, तीन अलग कहानियाँ: एक नाकामी, एक ग़ैर-मौजूदगी, एक चोट के साथ हाथ से फिसला पदक। तीनों में कोई पोडियम नहीं। बुधवार का रजत इसीलिए उनके निजी रिकॉर्ड में पहला है, इस एक खेल आयोजन में।
पाँच मंच, और अब हर एक पर एक पदक
बाक़ी मंचों का हिसाब जोड़ने पर "संग्रह" वाली बात टिकती है, बशर्ते 2018 के हिस्से को सही तरीक़े से समझा जाए। ओलंपिक में उनके पास टोक्यो 2020 का रजत है। वहाँ उन्होंने स्नैच 87 किलो पर पूरा किया, 92 किलो पर नाकाम रहने के बाद, और क्लीन ऐंड जर्क 115 किलो पर, 117 किलो का प्रयास चूकने के बाद। जोड़ 202 किलो बना, भारत का भारोत्तोलन में पहला ओलंपिक पदक। सोना चीन की होउ ज़िहुई ले गई थीं, 210 किलो के साथ।

विश्व चैंपियनशिप में 2017 का सोना है, अनाहाइम में 85 स्नैच और 109 क्लीन ऐंड जर्क से बना 194 का जोड़। उसके बाद दो रजत भी आए, एक 2022 में बोगोटा में और एक 2025 में। राष्ट्रमंडल खेलों में तीन स्वर्ण हैं, 2018 गोल्ड कोस्ट से 2026 ग्लासगो तक, हर बार जोड़ अलग। एशियाई चैंपियनशिप में अप्रैल 2021 का कांस्य है, वही जिसमें उन्होंने 205 किलो का तत्कालीन विश्व रिकॉर्ड जोड़ बनाया था। पेरिस 2024 का अपना ओलंपिक इसी फ़ेहरिस्त में नहीं आता, क्योंकि वहाँ पदक नहीं मिला, पर वह भी क़रीबी चूक की उसी लकीर का हिस्सा है। जोड़ 199 किलो बना, 88 स्नैच और 111 क्लीन ऐंड जर्क से, ओलंपेडिया के दर्ज नतीजे के मुताबिक़। थाईलैंड की सुरोदचना खम्बाओ का कांस्य 200 किलो का था। एक किलो का फ़ासला। चौथा स्थान, फिर से।
एशियाई खेल इन पाँचों में इकलौता मंच था जहाँ पोडियम कभी नहीं आया। नौवां स्थान, फिर ग़ैर-मौजूदगी, फिर चौथा स्थान। इस मायने में बुधवार की जीत सचमुच उस ख़ाली जगह को भरती है। पर जो कहानी इसे भरते हुए 2018 को एक नाकामी बताती है, वह अपने आधार में ग़लत है। सही कहानी ज़्यादा दिलचस्प है, क्योंकि इसमें एक बरस का ऐसा फ़ैसला भी है जो कभी मैदान पर आज़माया ही नहीं गया।
अट्ठाईस बरस का फ़ासला चानू की अपनी कहानी से अलग हिसाब है। कर्णम मल्लेश्वरी ने 63 किलो वर्ग में बैंकॉक में जो रजत जीता था, वह भारत के लिए एशियाई खेलों में भारोत्तोलन का आख़िरी पदक था, किसी भी भार-वर्ग में, किसी भी लिंग में। चानू की अपनी तीन कोशिशों के बीच के आठ बरस उसी लंबे सूखे का हिस्सा हैं। बुधवार को वह सूखा ख़त्म हुआ।
दिन का बाक़ी हिसाब: एक सोना, पाँच रजत, छह कांस्य
बुधवार रात 11 बजकर 31 मिनट भारतीय समय पर आधिकारिक नतीजा प्रणाली में भारत के कुल पदक 12 दर्ज थे, एक सोना, पाँच रजत, छह कांस्य। सोने की गिनती से तालिका में यह तेरहवाँ स्थान बनता है, कुल पदकों की गिनती से नौवाँ। इंडिया डॉट कॉम के दिन-भर के ब्यौरे में यही आँकड़ा शाम 4 बजकर 55 मिनट पर भी दर्ज था, यानी सात घंटे तक यह तालिका टिकी रही।
चानू के अलावा बुधवार को दो और पदक आए। महिलाओं की स्कीट टीम, परिनाज़ धालीवाल, माहेश्वरी चौहान और राइज़ा ढिल्लों, ने कांस्य जीता, पत्र सूचना कार्यालय की दोपहर 12 बजकर 50 मिनट की विज्ञप्ति के मुताबिक़। जय मीणा ने पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा में सॉफ़्ट टेनिस का कांस्य जीता, दोपहर 2 बजकर 22 मिनट की विज्ञप्ति के मुताबिक़ भारत के लिए इस खेल का पहला ही एशियाई खेल पदक।
दो नज़दीकी चूक भी उसी दिन दर्ज हैं। महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल टीम चौथे स्थान पर रही, माईखेल की रिपोर्ट के मुताबिक़ वियतनाम के साथ 1719 का जोड़ बराबर होने पर एक्स-काउंट पर कांस्य गँवाकर। पुरुषों की व्यक्तिगत स्कीट में अनंतजीत सिंह नारुका चौथे स्थान पर रहे।
सबसे ऊपर चीन बहुत दूर है, उसी आधिकारिक तालिका में 48 सोने और कुल 78 पदकों के साथ। भारत का एक सोना उसके आगे बौना दिखता है। खेल अब भी जारी हैं, और तालिका अगले दिनों में फिर बदलेगी।
स्रोतपत्र सूचना कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, 23 सितंबर 2026, दोपहर 12:47: मीराबाई चानू को महिलाओं के 49 किलो भारोत्तोलन में रजत पदक पर प्रधानमंत्री की बधाई, पत्र सूचना कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, 23 सितंबर 2026, दोपहर 12:50: महिलाओं की स्कीट टीम, परिनाज़ धालीवाल-माहेश्वरी चौहान-राइज़ा ढिल्लों, कांस्य पदक पर बधाई, पत्र सूचना कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, 23 सितंबर 2026, दोपहर 2:22: जय मीणा को सॉफ़्ट टेनिस के पहले एशियाई खेल पदक पर बधाई, बीसवें एशियाई खेलों की आधिकारिक नतीजा प्रणाली: भारत की भारोत्तोलन प्रविष्टियाँ, महिलाओं के 49 किलो में मीराबाई चानू साइखोम, बिब 42, वज़न 48.85 किलो, जन्म 8 अगस्त 1994; 23 सितंबर 2026 को पढ़ा गया, बीसवें एशियाई खेलों की आधिकारिक नतीजा प्रणाली का पदक तालिका डेटा, बुधवार 23 सितंबर 2026 को रात 11 बजकर 31 मिनट (भारतीय समय) पर पढ़ा गया: भारत के 12 पदक, एक सोना-पाँच रजत-छह कांस्य, बीसवें एशियाई खेलों की आधिकारिक नतीजा प्रणाली: सिर्फ़ भारोत्तोलन की पदक तालिका, 23 सितंबर 2026 को पढ़ी गई, भारत का एक रजत, द हिन्दू, 23 सितंबर 2026: मीराबाई चानू का स्नैच 87 और क्लीन ऐंड जर्क 111, जोड़ 198, री सोंग-गुम से दूसरे स्थान पर, एसबीएस न्यूज़ (कोरिया), 23 सितंबर 2026: री सोंग-गुम के स्नैच 90-94 और क्लीन ऐंड जर्क 116-121 के प्रयास, तीनों विश्व रिकॉर्ड, कोरिया टाइम्स, 23 सितंबर 2026: नागोया सिटी ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री सेंटर में स्पर्धा, री सोंग-गुम का तीसरा लगातार एशियाई खेल स्वर्ण, आइची-नागोया 2026 आयोजन समिति की अपनी वेबसाइट: भारोत्तोलन 23 से 29 सितंबर, नागोया सिटी ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री सेंटर (फ़ुकिआगे हॉल), स्पोर्ट्सकीड़ा, 7 अगस्त 2018: विश्व चैंपियन मीराबाई चानू 2018 के जकार्ता-पालेमबांग एशियाई खेलों से हटीं, कमर की चोट, हिन्दुस्तान टाइम्स (चंडीगढ़), 7 अगस्त 2018, पीआरइंडर के ज़रिए: कोच विजय शर्मा की सिफ़ारिश पर चानू एशियाई खेलों में नहीं उतरेंगी, द फ़्री प्रेस जर्नल, 7 अगस्त 2018, पीआरइंडर के ज़रिए: चानू के जकार्ता-पालेमबांग से हटने की पुष्टि, प्रशिक्षण में चोट दोबारा उभरने का ब्यौरा, ईएसपीएन, 30 सितंबर 2023: हांगझोऊ में चानू का 117 किलो क्लीन ऐंड जर्क पर दूसरी बार गिरना, स्ट्रेचर पर मैदान से बाहर, चौथा स्थान, ओलंपिक्स डॉट कॉम, 17 अप्रैल 2021: ताशकंद में एशियाई चैंपियनशिप का कांस्य, 205 किलो का जोड़, 119 किलो क्लीन ऐंड जर्क का तत्कालीन विश्व रिकॉर्ड, ओलंपिक्स डॉट कॉम, 4 फ़रवरी 2026: राष्ट्रीय चैंपियनशिप में चानू के तीन नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड, 89 स्नैच, 116 क्लीन ऐंड जर्क, 205 का जोड़, द बारबेल स्पिन, 26 सितंबर 2016, इंटरनेट आर्काइव की प्रति: अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ के संचालन बोर्ड का वज़न-आधारित टाई-नियम हटाने का फ़ैसला, बीजिंग बैठक, माईखेल, 23 सितंबर 2026: महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल टीम वियतनाम से एक्स-काउंट पर कांस्य चूकी, दोनों टीमों का जोड़ 1719 बराबर, इंडिया डॉट कॉम, 23 सितंबर 2026, शाम 4:55 बजे तक का पदक तालिका और दिन-भर का ब्यौरा: अनंतजीत सिंह नारुका पुरुष स्कीट में चौथे स्थान पर