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भारतीय ओलंपिक संघ के अपने टेंडर में समारोह की पोशाक 5 से 10 सितंबर के बीच पहुँचानी थी, 19 सितंबर की दोपहर तजिंदरपाल सिंह तूर की पोशाक भारत में पड़ी थी

आइची-नागोया में बीसवें एशियाई खेलों के उद्घाटन समारोह से कुछ घंटे पहले भारत का पुरुष ध्वजवाहक बदल गया। संघ की पूरी सफ़ाई दो वाक्यों की है और कारण के नाम पर उसमें दो शब्द हैं, technical issues।

तजिंदरपाल सिंह तूर 2017 के एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोला फेंक का रजत पदक लेकर, भुवनेश्वर की तस्वीर, राष्ट्रीय रिकॉर्ड 21.77 मीटर बाद में 2023 में बना
तस्वीर: Athletics Federation of India, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

तीन बजे। शनिवार, 19 सितंबर की दोपहर नागोया के हवाई अड्डे पर तजिंदरपाल सिंह तूर की समारोह वाली पोशाक उतरनी थी। उसी शाम उसी शहर के मिज़ुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में बीसवें एशियाई खेलों का उद्घाटन समारोह था, और उसमें तूर को भारतीय दल का झंडा लेकर चलना था। उन्होंने हिसाब लगाया, और भारतीय ओलंपिक संघ को बता दिया कि वे नहीं आ रहे।

पुरुष ध्वजवाहक बदल गया। संघ ने जो बयान जारी किया, द इंडियन एक्सप्रेस ने उसे पूरा छापा है और वह दो वाक्य लंबा है: "तकनीकी कारणों से तजिंदरपाल सिंह तूर भारत के ध्वजवाहक नहीं बन पाएँगे। आज भारत के पुरुष ध्वजवाहक पवन सहरावत होंगे।" अंग्रेज़ी में जो शब्द इस्तेमाल हुआ, वह है technical issues।

उस शाम कबड्डी के पवन सहरावत ने मनु भाकर के साथ भारतीय दल का नेतृत्व किया। द ट्रिब्यून में छपी एएनआई की 19 सितंबर की रिपोर्ट, जिस पर समय शाम 6:57 बजे दर्ज है, कहती है कि बीसवें एशियाई खेल पालोमा मिज़ुहो स्टेडियम में औपचारिक रूप से खुल गए, और भाकर तथा सहरावत ध्वजवाहक के तौर पर दल के आगे चले। आयोजन समिति अपने पन्ने पर इसी स्टेडियम को नागोया सिटी मिज़ुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम लिखती है। समारोह में 45 देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ी थे, जिन्हें 43 खेलों की 469 पदक स्पर्धाओं में उतरना है। झंडा किसी और के हाथ में था।

दिन का हिसाब, तीन बयानों में

जो हुआ, उसके तीन वृत्तांत हैं और तीनों एक-दूसरे से मेल नहीं खाते।

पहला तूर का है। द इंडियन एक्सप्रेस की 19 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक़, जिसके पन्ने पर अद्यतन का समय रात 10:31 बजे दर्ज है, उन्होंने पीटीआई से कहा: "मुझे बताया गया है कि मेरी किट तीन बजे (नागोया) हवाई अड्डे पर पहुँचेगी। हवाई अड्डे से किट लेकर उद्घाटन समारोह स्थल तक समय पर पहुँचना बहुत मुश्किल होगा। इसलिए मैंने आईओए से कह दिया है कि मैं उद्घाटन समारोह में नहीं आ रहा।" इसी रिपोर्ट में उनका दूसरा वाक्य है: "मेरी किट भारत में पड़ी है। एथलेटिक्स टीम में अब तक किसी को उसकी किट नहीं मिली है।" और तीसरा: "आईओए ने मुझे कल बताया कि मैं ध्वजवाहक बन रहा हूँ। वरना मेरे कोच, जो कल यहाँ पहुँच गए थे, वह मेरे लिए उसे उठा लाते।"

यह सब एक खिलाड़ी का एक समाचार एजेंसी को दिया बयान है। इसकी पुष्टि किसी दस्तावेज़ से नहीं होती।

दूसरा वृत्तांत भारतीय एथलेटिक्स महासंघ का है, और वह भी उसी अख़बार में है। महासंघ के एक सूत्र ने, जिसका नाम रिपोर्ट में नहीं है, कहा कि तूर की पोशाक शुक्रवार को भेजी गई थी पर समय पर नहीं पहुँची। उसी सूत्र के शब्द हैं: "हमने कोशिश की कि कम से कम तूर को उद्घाटन समारोह के लिए उसकी समारोह-पोशाक समय पर मिल जाए। पर बहुत देर हो चुकी थी। आईओए को यह बताना चाहिए कि एथलेटिक्स दल को किट क्यों नहीं मिलीं।" महासंघ के एक अधिकारी ने इसी रिपोर्ट में कहा: "हमने एथलेटिक्स टीम के जापान जाने से एक महीना पहले भारतीय ओलंपिक संघ को सूचित कर दिया था। पर बार-बार याद दिलाने के बावजूद आईओए ने तूर समेत ट्रैक और फ़ील्ड के खिलाड़ियों को समारोह-पोशाक नहीं दी।"

तीसरा वृत्तांत संघ का अपना है, और वह दो वाक्यों में ख़त्म हो जाता है। उसमें कोई कारण नहीं है, कोई तारीख़ नहीं है, और महासंघ के आरोप का कोई जवाब नहीं है। भारत के दल प्रमुख सहदेव यादव से इस बारे में संपर्क नहीं हो सका, यह द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है।

तो 19 सितंबर की शाम तक रिकॉर्ड पर यही है। एक खिलाड़ी का बयान, एक महासंघ की शिकायत, और एक संस्था के दो वाक्य।

आईओए के अपने टेंडर की धारा 27

जिस पोशाक की बात हो रही है, उसका एक काग़ज़ मौजूद है। वह भारतीय ओलंपिक संघ की अपनी वेबसाइट पर है।

टेंडर दस्तावेज़ की संदर्भ संख्या IOA/VI-64/2026/3150 है और तारीख़ 17 जुलाई 2026। शीर्षक है, बीसवें एशियाई खेल 2026, आइची-नागोया, जापान में भाग ले रहे भारतीय दल के लिए समारोह-पोशाक की आपूर्ति। पहले ही पन्ने पर लिखा है कि संघ 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इन खेलों के लिए नामी निर्माताओं से मुहरबंद निविदाएँ आमंत्रित करता है। यानी यह पोशाक संघ ख़ुद ख़रीदता है, किसी प्रायोजक से नहीं मँगवाता।

धारा 5 में पोशाक की सूची है: पुरुषों के लिए बंदगला या खुला सूट, कमीज़, महिलाओं के लिए जैकेट, किनारे और पल्लू पर कढ़ाई वाली सिली हुई साड़ी, पुरुषों के जूते और मोज़े, महिलाओं के बंद पंजे वाले फ़्लैट और मोज़े, और आठ मीटर बिना सिला पगड़ी का कपड़ा।

एक बंदगला जैकेट पुतले पर प्रदर्शित, पेरिस के एक संग्रहालय की अक्टूबर 2023 की तस्वीर, टेंडर की धारा 5 में पुरुषों के लिए ऐसी ही बंदगला या खुले सूट की सूची है
तस्वीर: Stefan Ivanovich, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

धारा 27 का शीर्षक है, आपूर्ति की समय-सीमा। उसका पाठ यह है कि सफल निविदाकार आईओए की तय की हुई समय-सीमा के भीतर सारी समारोह-पोशाक बनाकर, पैक करके पहुँचाएगा, और फिर तीन वाक्य: समय ही अनुबंध का सार होगा; बोली को 10 अगस्त 2026 तक अंतिम रूप दिया जाएगा; किट की आपूर्ति 5 से 10 सितंबर 2026 के बीच, यानी 25 से 30 दिन में पूरी। इसके बाद एक और शर्त है, कि इस तारीख़ को पूरा करने का लिखित वचन निविदा के साथ ही बोलीदाता के लेटरहेड पर देना होगा।

यह तारीख़ ख़ुद संघ ने लिखी थी। किसी और ने नहीं।

इसे संघ के ही पिछले टेंडर के साथ रखिए। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों की समारोह-पोशाक का टेंडर, संदर्भ सं. IOA/VI-64/2026/3074, 16 जून 2026 का है। उसकी धारा 27 का शीर्षक वही है और पाठ आधा: सफल निविदाकार आईओए की तय समय-सीमा के भीतर आपूर्ति पूरी करेगा, समय ही अनुबंध का सार होगा। उसमें कोई तारीख़ नहीं है। एक महीने बाद एशियाई खेलों वाले टेंडर में संघ ने उसी धारा में तारीख़ें जोड़ीं, लिखित वचन माँगा, और फिर भी 19 सितंबर को एक खिलाड़ी की पोशाक भारत में थी।

निविदा की समय-सारणी ख़ुद तंग थी। दस्तावेज़ 17 जुलाई का है, निविदा जमा करने और खोलने की तारीख़ 5 अगस्त थी, और बोली 10 अगस्त तक अंतिम होनी थी। फिर 5 अगस्त 2026 को संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से एक संशोधन जारी हुआ, जिसने जमा करने और खोलने, दोनों को 7 अगस्त पर खिसका दिया। 10 अगस्त वाली तारीख़ संशोधन में नहीं छुई गई। जो काम पहले पाँच दिन में होना था, उसके लिए अब तीन दिन थे। आपूर्ति की तारीख़ वहीं रही।

बाक़ी धाराएँ भी काम की हैं। धारा 25 कहती है कि सफल निविदाकार खिलाड़ियों और अधिकारियों की अलग-अलग नाप लेगा, और ग़लत नाप, सिलाई की ख़राबी या फ़िटिंग की गड़बड़ी से जो भी फेरबदल ज़रूरी हो, वह अपने ख़र्च पर करेगा। धारा 29 दैवी आपदा की है, और उसका आख़िरी वाक्य संघ को तीन विकल्प देता है: समय-सीमा बदलना, कहीं और से ख़रीदना, या अनुबंध ख़त्म कर देना। धारा 31 में अंक-विभाजन है, कुल सौ में से डिज़ाइन को 25, कपड़े को 20, नमूनों को 20, अनुभव को 15, और नाप तथा आपूर्ति की योजना को दस। तकनीकी मूल्यांकन में 70 अंक पाने वालों में से सबसे कम क़ीमत वाला जीतता है।

बीस हज़ार रुपये प्रति व्यक्ति

यह पोशाक सरकारी पैसे से बनती है, और उसका भी एक काग़ज़ है।

खेल मंत्रालय के खेल विभाग का पत्र सं. 70-15/2026-गवर्नेंस-1, तारीख़ 2 सितंबर 2026, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष को लिखा गया है। विषय है, बीसवें एशियाई खेल 2026 में भारतीय दल की भागीदारी। पत्र 768 सदस्यों के दल को मंज़ूरी देता है: 503 खिलाड़ी, जिनमें 269 पुरुष और 234 महिलाएँ हैं, 246 टीम अधिकारी और सहयोगी स्टाफ़, और 19 दल-कर्मी, 36 खेलों में। इस दल के ब्योरे और उसके भीतर के असंतुलन हमने 12 सितंबर को अलग से पढ़े थे, और उसी रिपोर्ट में इस पत्र के अनुलग्नक की दरें भी थीं।

उसी अनुलग्नक की पाँचवीं पंक्ति इस कहानी की है। मद है समारोह-पोशाक, आकस्मिक पोशाक और खेल-पोशाक। आईओए का अनुमानित ख़र्च दर्ज है, समारोह-पोशाक 20,000 रुपये प्रति व्यक्ति। बग़ल के ख़ाने में मंत्रालय की वित्तीय सहायता है, वही 20,000 रुपये प्रति व्यक्ति, और वह 22 मई 2025 के परिपत्र सं. 12-2/2020-एसपी.III की शर्तों पर है। उसी पंक्ति में आगे लिखा है कि आकस्मिक पोशाक और खेल-पोशाक प्रायोजक देंगे।

दो पोशाकें हैं, और उनके रास्ते अलग हैं। खेल के मैदान पर पहनने वाली प्रायोजक से आती है। समारोह में पहनने वाली सरकार के पैसे से संघ ख़रीदता है।

अंक-गणित सीधा है। 768 लोगों पर 20,000 रुपये की दर से 1 करोड़ 53 लाख 60 हज़ार रुपये बनते हैं। टेंडर के अनुलग्नक-III में जो सांकेतिक मात्राएँ हैं, वे इससे कम हैं: पुरुषों के 400 सेट, महिलाओं की 250 जैकेट और 250 साड़ियाँ, यानी कुल 650, और पगड़ी का कपड़ा 25 लोगों के लिए। धारा 26 इस अंतर को ढक देती है, क्योंकि वह कहती है कि मात्राएँ सांकेतिक हैं, दल के अंतिम आकार पर निर्भर हैं, और संघ उन्हें दरों में बदलाव किए बिना 25 प्रतिशत तक घटा-बढ़ा सकता है। 650 का सवा गुना 812 होता है, तो 768 उसी दायरे में आ जाता है। टेंडर 17 जुलाई का है और दल की अंतिम मंज़ूरी 2 सितंबर की, इसलिए जुलाई में सही संख्या किसी को पता भी नहीं थी। धारा 26 इसी के लिए है।

ध्वजवाहक कौन तय करता है

संघ के संविधान में इसका जवाब नहीं है। यह अपने-आप में एक तथ्य है।

भारतीय ओलंपिक संघ के संविधान में ध्वजवाहक, दल प्रमुख, समारोह और पोशाक, इनमें से कोई शब्द एक बार भी नहीं आता। ध्वज पर एक अनुच्छेद ज़रूर है, संख्या 33, पर वह संघ के अपने ध्वज, प्रतीक और गीत के बारे में है, किसी समारोह में झंडा उठाने वाले के बारे में नहीं। जो सबसे क़रीब आता है, वह उद्देश्यों की नौवीं मद है: ओलंपिक और आईओसी तथा आईओए के संरक्षण वाले दूसरे खेलों में भारत की भागीदारी से जुड़े सभी मामलों पर संघ का पूरा और संपूर्ण अधिकार, और महाद्वीपीय तथा विश्व स्तर की बहु-खेल प्रतियोगिताओं में अपना दल गठित करने, उसे संगठित करने और उसका नेतृत्व करने का काम। दल संघ का है। उसका झंडा कौन उठाएगा, यह काग़ज़ पर कहीं तय नहीं है।

व्यवहार में यह कैसे होता है, इसका एक नमूना ख़ुद संघ ने दो महीने पहले छोड़ा है। 18 जुलाई 2026 की एक प्रेस विज्ञप्ति में संघ ने बताया कि ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों के 23 जुलाई के उद्घाटन समारोह में मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन ध्वज तथा बैटन लेकर चलेंगी। विज्ञप्ति में संघ की अध्यक्ष पी टी उषा का बयान है: "यह गर्व की बात है कि मीराबाई और लवलीना ओवीओ हाइड्रो में यह सम्मान निभाएँगी। मैं दोनों लड़कियों और पूरे दल को शुभकामनाएँ देती हूँ।" घोषणा शनिवार को हुई, समारोह से पाँच दिन पहले, संघ की अपनी वेबसाइट पर, अध्यक्ष के नाम से।

नागोया में यह रास्ता नहीं चुना गया। डेक्कन क्रॉनिकल में छपी पीटीआई की 18 सितंबर की रिपोर्ट, जिस पर समय शाम 6:55 बजे दर्ज है, कहती है कि दल प्रमुख सहदेव यादव ने कहा, "मनु भाकर ध्वजवाहकों में से एक होंगी", और उसके बाद भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने पुष्टि की कि दूसरे ध्वजवाहक तूर होंगे। द ट्रिब्यून ने उसी दिन, शाम 4:28 बजे के समय के साथ, टीम इंडिया के आधिकारिक एक्स खाते की घोषणा का पाठ छापा, जिसमें दोनों नाम हैं। संघ की वेबसाइट पर इसकी कोई विज्ञप्ति नहीं है।

तारीख़ का फ़र्क़ यहीं दिखता है। ग्लासगो के लिए पाँच दिन, नागोया के लिए एक। तूर का अपना कहना यही है कि उन्हें शुक्रवार को बताया गया, और अगर पहले पता होता तो उनके कोच, जो एक दिन पहले नागोया पहुँच चुके थे, पोशाक ले आते। उसी पीटीआई रिपोर्ट में संघ की ओर से जारी एक वीडियो संदेश में तूर कहते हैं: "मुझे गर्व है कि मैं भारतीय दल के ध्वजवाहकों में से एक रहूँगा। हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह अपने देश का ध्वजवाहक बने। यह सम्मान देने के लिए मैं आईओए का शुक्रिया अदा करता हूँ।"

एक दल, दो शहरों में

19 सितंबर की शाम भारतीय दल एक जगह नहीं था, और यह किसी की चूक नहीं, कार्यक्रम का हिस्सा था।

द इंडियन एक्सप्रेस की उसी रिपोर्ट के मुताबिक़ एथलेटिक्स दल 13 सितंबर से टोक्यो के पास सुकुबा विश्वविद्यालय में अनुकूलन शिविर कर रहा है और उसे नागोया 21 सितंबर को पहुँचना है, एथलेटिक्स की स्पर्धाएँ शुरू होने से दो दिन पहले। यानी उद्घाटन समारोह की शाम तूर और उनके साथी उस शहर में थे ही नहीं जहाँ समारोह था। तूर को अकेले आना था, और पोशाक को अलग से।

2002 के मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन समारोह में खिलाड़ियों की परेड मैदान में, यह नागोया नहीं है पर हर बहु-खेल आयोजन में दल इसी तरह घेरे में उतरता है
तस्वीर: AlasdairW, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

कबड्डी का रास्ता दूसरा था। बिज़नेस स्टैंडर्ड की 15 सितंबर की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय पुरुष कबड्डी टीम का शिविर 5 से 15 सितंबर तक गांधीनगर के भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र में चला, और टीम को 21 सितंबर को जापान के ख़िलाफ़ अपना पहला मुक़ाबला खेलना है। आयोजकों की अपनी परिणाम-प्रणाली में वह मुक़ाबला 21 सितंबर को सुबह 9:30 बजे जापानी समय पर तोकाई सिटीज़न जिमनेज़ियम में दर्ज है। कबड्डी 21 से 26 सितंबर तक है, एथलेटिक्स 23 से 29 तक।

इसलिए 19 सितंबर की शाम नागोया में जो भारतीय खिलाड़ी मौजूद थे, उनमें कबड्डी की टीम थी और एथलेटिक्स की नहीं।

और समारोह खेलों की शुरुआत भी नहीं था। आयोजन समिति की परिणाम-प्रणाली के अपने कार्यक्रम के अनुसार बास्केटबॉल 10 सितंबर को शुरू हो चुका था, फ़ुटबॉल 14 को, आधुनिक पेंटाथलॉन और वॉलीबॉल 16 को, क्रिकेट और टेकबॉल 17 को, हॉकी तथा सॉफ़्ट टेनिस 18 को। क्रिकेट के एक क्वार्टर फ़ाइनल पर हमने 17 सितंबर की सुबह की सूचनाएँ पढ़ी थीं, जो झंडा उठने से दो दिन पहले की हैं। एशियाई ओलंपिक परिषद के रिकॉर्ड में इन खेलों का उद्घाटन 19 सितंबर है और समापन 4 अक्टूबर, और परिषद के अपने पन्ने पर इनका क्रमांक बीस दर्ज है।

तूर का रिकॉर्ड और उसकी तारीख़ें

वर्ल्ड एथलेटिक्स के प्रोफ़ाइल में तजिंदरपाल सिंह तूर का जन्म 13 नवंबर 1994 का है। गोला फेंक में उनका सर्वश्रेष्ठ 21.77 मीटर है, जो राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी है, और वह 19 जून 2023 को भुवनेश्वर के कलिंग स्टेडियम में हुआ था।

एशियाई खेलों में वे दो बार के चैंपियन हैं। जकार्ता में 25 अगस्त 2018 को 20.75 मीटर, और हांगझोऊ में 1 अक्टूबर 2023 को 20.36 मीटर। वर्ल्ड एथलेटिक्स के अपने रिकॉर्ड में हांगझोऊ वाली प्रविष्टि उन्नीसवें एशियाई खेलों के नाम से दर्ज है, इसलिए नागोया के बीसवें होने की गिनती संस्था के अपने काग़ज़ में भी वही है। एशियाई चैंपियनशिप में उन्होंने 2019 में दोहा और 2023 में बैंकॉक में स्वर्ण जीता, 2017 में भुवनेश्वर में रजत। एशियाई इनडोर चैंपियनशिप में 2023 और 2024 में स्वर्ण, और 8 फ़रवरी 2026 को तिआनजिन में रजत, 20.05 मीटर के साथ।

2026 का मौसम उनका उतार-चढ़ाव वाला रहा है। साल का सर्वश्रेष्ठ 21.03 मीटर है, जो 11 अप्रैल 2026 को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में इंडियन एथलेटिक्स सीरीज़-3 में आया। 27 जून को भुवनेश्वर की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में वे 20.27 मीटर के साथ तीसरे रहे। ग्लासगो के राष्ट्रमंडल खेलों में 30 जुलाई 2026 को वे 20.27 मीटर के साथ पाँचवें स्थान पर रहे। 22 अगस्त को भुवनेश्वर में कॉन्टिनेंटल टूर के सिल्वर स्तर के मुक़ाबले में चौथे, 20.03 मीटर। पुरुष गोला फेंक की मौजूदा विश्व रैंकिंग में वे 26वें नंबर पर हैं; उनकी अब तक की सबसे ऊँची रैंकिंग 17वीं रही है, पाँच हफ़्ते के लिए।

जापान जाने से पहले उनका आख़िरी मुक़ाबला दिल्ली में था। महासंघ की अपनी रिपोर्ट के मुताबिक़ इंडियन एथलेटिक्स सीरीज़ फ़ाइनल जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में गुरुवार को हुआ, गोला फेंक में तूर 20.64 मीटर के साथ पहले रहे, समरदीप सिंह गिल 19.59 मीटर के साथ दूसरे। महासंघ का वह पन्ना 10 सितंबर 2026 का है और वर्ल्ड एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में भी इस मुक़ाबले की तारीख़ 10 सितंबर है। द इंडियन एक्सप्रेस की 19 सितंबर की रिपोर्ट इसी प्रतियोगिता को 11 सितंबर का बताती है। दोनों तारीख़ें आमने-सामने हैं और हमने इन्हें मिलाया नहीं।

नागोया में उनकी स्पर्धा 26 सितंबर को है। आयोजकों की परिणाम-प्रणाली में पुरुष गोला फेंक का फ़ाइनल उस दिन रात आठ बजे जापानी समय पर मिज़ुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में दर्ज है, और पदक समारोह उसी रात 10:25 बजे। यानी झंडा उठाने और गोला फेंकने के बीच सात दिन थे।

पवन सहरावत, और नागोया में पहले से मौजूद टीम

जिन्हें कुछ घंटे की सूचना पर आगे किया गया, वे कबड्डी के रेडर हैं और उस शाम नागोया में थे।

पवन सहरावत हांगझोऊ के एशियाई खेलों में भारत के कप्तान थे। ओलंपिक्स डॉट कॉम पर रॉयटर्स के अली असगर नलवाला की मैच रिपोर्ट के मुताबिक़ उस फ़ाइनल में भारत ने ईरान को 33-29 से हराया, जो कबड्डी में भारत के पुरुष वर्ग का आठवाँ एशियाई खेल स्वर्ण था; उस टीम के उपकप्तान सुनील कुमार थे, जो अब कप्तान हैं। उसी रिपोर्ट में सहरावत का बयान दर्ज है: "हमें ईरान को फ़ाइनल में हराने और नौ साल बाद एशियाई खेलों का स्वर्ण वापस लाने का सचमुच गर्व है। हम एक इकाई की तरह खेले और यह हमारे लिए बड़ा पल है।" प्रो कबड्डी लीग के एक मुक़ाबले में सबसे ज़्यादा रेड अंक का रिकॉर्ड, 39, उनके नाम है; यह बिज़नेस स्टैंडर्ड की 15 सितंबर की रिपोर्ट में है, जो उन्हें अर्जुन पुरस्कार विजेता भी लिखती है। खेल मंत्रालय की अर्जुन पुरस्कार सूची में 2023 के लिए कबड्डी के दो नाम हैं, श्री पवन कुमार और सुश्री रितु नेगी।

इंग्लैंड में हुए 2025 कबड्डी विश्व कप में एक रेड मैदान पर, मार्च 2025 की तस्वीर, पवन सहरावत जिस खेल के कप्तान रहे उसका एक अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबला ऐसा दिखता है
तस्वीर: Bearas, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

उसी रिपोर्ट में उनके अपने शब्द हैं: "टीम बहुत आश्वस्त है। हमने साथ में बहुत अभ्यास किया है। जो बारह खिलाड़ी चुने गए हैं, उनका संयोजन शानदार है। हम एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं। सबसे अहम बात यह है कि हम यहाँ एक ही चीज़ के लिए हैं, और वह है स्वर्ण।" इसी रिपोर्ट के मुताबिक़ बारह सदस्यीय टीम के कप्तान सुनील कुमार हैं और सहरावत उसके रेडरों में हैं।

संघ के पास 19 सितंबर की शाम विकल्प कम थे, और यह बात दल के नक़्शे से निकलती है। समारोह उसी दिन था जिस दिन कबड्डी की टीम अपने पहले मुक़ाबले से दो दिन दूर थी और नागोया में मौजूद थी। एथलेटिक्स का दल टोक्यो के पास सुकुबा में था और कार्यक्रम के हिसाब से दो दिन बाद आने वाला था। जिस खिलाड़ी को बदलना था, वह एथलेटिक्स का था। जिसे आगे किया गया, वह उस खेल का था जो शहर में पहले से था। नक़्शा पहले से बना हुआ था।

आईओए की वेबसाइट पर कोई विज्ञप्ति नहीं है

इस कहानी में जितना दर्ज नहीं है, उसे गिन लेना ज़रूरी है।

भारतीय ओलंपिक संघ की वेबसाइट पर ध्वजवाहक बदलने की कोई विज्ञप्ति नहीं है, और उसके एशियाई खेल वाले पन्ने पर ख़बरों का ख़ाना ख़ाली पड़ा है। जो दो वाक्य रिकॉर्ड पर हैं, वे अख़बार के मार्फ़त हैं। महासंघ के इस आरोप का कि उसे एक महीने पहले बताया गया था और बार-बार याद दिलाया गया था, संघ की ओर से कोई जवाब 19 सितंबर तक सामने नहीं आया, और दल प्रमुख से संपर्क नहीं हो सका।

टेंडर किसे मिला, कब मिला, और पोशाक किस दिन भारत से चली, यह किसी सार्वजनिक काग़ज़ में नहीं है। शुक्रवार को भेजे जाने की बात एक अख़बार में एक अनाम सूत्र की है। एथलेटिक्स दल को उसकी पोशाकें बाद में मिलीं या नहीं, यह 19 सितंबर तक ज्ञात नहीं था।

एक बात साफ़ रहनी चाहिए। तूर दल से बाहर नहीं किए गए। उन्होंने ध्वजवाहक के तौर पर समारोह में न आने की सूचना ख़ुद दी, और उनकी स्पर्धा 26 सितंबर को होनी है।

स्रोतद इंडियन एक्सप्रेस, स्पोर्ट्स डेस्क, 19 सितंबर 2026, पन्ने पर दर्ज अद्यतन समय रात 10:31 बजे भारतीय समयानुसार: भारतीय ओलंपिक संघ का दो वाक्य का बयान, तूर के पीटीआई को दिए बयान, एथलेटिक्स महासंघ के सूत्र और अधिकारी के बयान, और यह कि दल प्रमुख सहदेव यादव से संपर्क नहीं हो सका, भारतीय ओलंपिक संघ, टेंडर दस्तावेज़ संदर्भ सं. IOA/VI-64/2026/3150, 17 जुलाई 2026: बीसवें एशियाई खेलों के भारतीय दल की समारोह-पोशाक की आपूर्ति, धारा 25 नाप, धारा 26 मात्रा, धारा 27 आपूर्ति की समय-सीमा, धारा 29 दैवी आपदा, धारा 31 अंक-विभाजन और अनुलग्नक-III की सांकेतिक मात्राएँ, भारतीय ओलंपिक संघ, मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से जारी संशोधन, 5 अगस्त 2026: निविदा जमा करने और खोलने की तारीख़ 5 अगस्त से बढ़ाकर 7 अगस्त 2026, भारतीय ओलंपिक संघ, टेंडर दस्तावेज़ संदर्भ सं. IOA/VI-64/2026/3074, 16 जून 2026: ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों की समारोह-पोशाक, जिसकी धारा 27 में कोई तारीख़ नहीं है, भारतीय ओलंपिक संघ की प्रेस विज्ञप्ति, 18 जुलाई 2026: ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन समारोह के ध्वजवाहक की घोषणा और अध्यक्ष पी टी उषा का बयान, भारतीय ओलंपिक संघ का संविधान: उद्देश्य 9, दल गठित करने और उसका नेतृत्व करने का अधिकार, और अनुच्छेद 33 ध्वज तथा प्रतीक, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, खेल विभाग, पत्र सं. 70-15/2026-गवर्नेंस-1, 2 सितंबर 2026: 768 सदस्यीय दल की मंज़ूरी और अनुलग्नक-II में समारोह-पोशाक के लिए 20,000 रुपये प्रति व्यक्ति की दर, वर्ल्ड एथलेटिक्स का तजिंदरपाल सिंह तूर का प्रोफ़ाइल: जन्मतिथि, 21.77 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड, 2026 का सर्वश्रेष्ठ 21.03 मीटर, विश्व रैंकिंग और दोनों एशियाई खेलों के स्वर्ण, भारतीय एथलेटिक्स महासंघ, 10 सितंबर 2026: इंडियन एथलेटिक्स सीरीज़ फ़ाइनल की रिपोर्ट, जिसमें गोला फेंक में तूर का 20.64 मीटर दर्ज है, एशियाई ओलंपिक परिषद का आधिकारिक रिकॉर्ड: Game No 20, उद्घाटन 19/09/2026, समापन 04/10/2026, 45 राष्ट्रीय ओलंपिक समितियाँ, आइची-नागोया 2026 आयोजन समिति का स्थल पन्ना: उद्घाटन और समापन समारोह तथा एथलेटिक्स इसी स्टेडियम में, स्थल-कार्यक्रम 10 सितंबर 2026 तक का, बिज़नेस स्टैंडर्ड, 15 सितंबर 2026: गांधीनगर शिविर, बारह सदस्यीय कबड्डी दल, कप्तान सुनील कुमार और पवन सहरावत के अपने बयान, ओलंपिक्स डॉट कॉम पर रॉयटर्स के अली असगर नलवाला की मैच रिपोर्ट, हांगझोऊ का कबड्डी फ़ाइनल: भारत 33-29 से विजयी, कप्तान पवन सहरावत का बयान और उपकप्तान सुनील कुमार; इंटरनेट आर्काइव की प्रति से पढ़ी गई, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय की अर्जुन पुरस्कार विजेताओं की सूची: 2023 में कबड्डी के दो नाम, डेक्कन क्रॉनिकल में पीटीआई, 18 सितंबर 2026 शाम 6:55 बजे: ध्वजवाहकों की घोषणा, दल प्रमुख का बयान और तूर का वीडियो संदेश, द ट्रिब्यून, 18 सितंबर 2026 शाम 4:28 बजे: टीम इंडिया के आधिकारिक एक्स खाते की घोषणा का पाठ, द ट्रिब्यून में एएनआई, नागोया, 19 सितंबर 2026 शाम 6:57 बजे: बीसवें एशियाई खेलों का उद्घाटन, पालोमा मिज़ुहो स्टेडियम, और मनु भाकर तथा पवन सहरावत का दल के आगे चलना

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।