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जनगणना का दसवाँ सवाल 'जाति' है और उसका कॉलम ख़ाली है; तमिलनाडु चाहता है कि वहाँ सूची हो
फ़रवरी 2027 में गणक जो जाति बताई जाएगी वही लिख लेगा, किसी सूची से मिलाए बिना। तमिलनाडु विधानसभा ने 8 सितंबर को प्रस्ताव पास किया कि पिछड़े वर्गों के लिए वही तरीक़ा हो जो अनुसूचित जातियों के लिए है: पहले से लदी सूची, ड्रॉप-डाउन से चुनाव। DMK को मतदान से पहले सदन से बाहर किया गया।
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मंत्रालय ने एक ही दिन दो विज्ञप्तियाँ जारी कीं कि छात्रवृत्ति समय पर मिल रही है, और दोनों में एक भी संख्या नहीं है
सामाजिक न्याय मंत्रालय ने 7 सितंबर को अनुसूचित जाति के छात्रों की छात्रवृत्ति पर दो अलग विज्ञप्तियाँ निकालीं। मिलाकर क़रीब दस हज़ार अक्षर। न छात्रों की गिनती, न रक़म, न देरी के दिन।
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समझिए जाति की गिनती परसों से शुरू हो रही है, और खाना खाली छोड़ा गया है जनगणना का दसवाँ सवाल जाति का है। एससी-एसटी के लिए सूची तय है। बाक़ी सबके लिए कोई सूची नहीं, गणक वही लिखेगा जो आप बताएँगे। 2011 में इसी तरीक़े से 46 लाख जातियाँ निकली थीं।