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मैदान

भारत ने कबड्डी के दोनों फ़ाइनल में ईरान को हराया, पुरुष टीम का यह लगातार दूसरा और नौवां एशियाई खेल सोना है

शनिवार, 26 सितंबर को आइची के तोकई सिटिज़न जिमनेज़ियम में भारत की पुरुष कबड्डी टीम ने ईरान को 40-34 से हराकर सोना जीता; कुछ घंटे पहले महिला टीम फ़ाइनल में उसी ईरान को 37-34 से हराकर अपना ख़िताब बचा चुकी थी। उसी दिन तजिंदरपाल सिंह तूर गोला फेंक में 17 सेंटीमीटर से पीछे रहकर रजत पर रुके, और स्क्वॉश में अनाहत सिंह तथा अभय सिंह दोनों फ़ाइनल में पहुँचे, पर एक फ़ाइनल भारत के लिए पहला है, दूसरा दोहराया गया इतिहास।

यह तस्वीर 2016 की एक स्थानीय कबड्डी प्रतियोगिता की है, आइची-नागोया की नहीं; रेडर को पकड़ने की यह कोशिश हर कबड्डी मैच में कुछ ऐसी ही दिखती है।
तस्वीर: Avinashsatamraju, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

आधे समय तक ईरान भारत से एक अंक आगे था, 18-17 से। तभी अर्जुन देशवाल ईरान के सबसे भरोसेमंद डिफ़ेंडर फ़ज़ल अत्राचली को छूकर निकल गए, दस मिनट बचे थे। उस एक रेड ने भारत को ऑल-आउट दिलाया, यानी ईरान के सारे खिलाड़ी एक साथ आउट, और बढ़त पाँच अंकों की हो गई।

ईरान वहाँ से वापस नहीं लौटा।

अंतिम स्कोर 40-34 रहा। शनिवार, 26 सितंबर को आइची के तोकई सिटिज़न जिमनेज़ियम में भारत की पुरुष कबड्डी टीम ने यह फ़ाइनल जीतकर लगातार दूसरा और कुल नौवां एशियाई खेल स्वर्ण अपने नाम किया। भारतीय समय दोपहर सवा तीन बजे तक इसका पूरा नतीजा रिपोर्टों में आ चुका था। दिन का यह दूसरा सोना था। कुछ घंटे पहले महिला टीम भी उसी ईरान को फ़ाइनल में 37-34 से हराकर अपना ख़िताब बचा चुकी थी।

शनिवार को एक और भारतीय क़रीब पहुँचकर चूक गया। तजिंदरपाल सिंह तूर गोला फेंक में रजत पर रहे, सोने से सिर्फ़ 17 सेंटीमीटर पीछे। स्क्वॉश में अनाहत सिंह और अभय सिंह दोनों फ़ाइनल में पहुँच गए। दोनों फ़ाइनल रविवार, 27 सितंबर को हैं। इसलिए पदक का रंग अभी तय नहीं है। पर एक फ़ासला अहम है: इनमें से एक फ़ाइनल भारत के लिए नया है, दूसरा दोहराया गया इतिहास।

यह रिपोर्ट शनिवार रात तक दर्ज आधिकारिक नतीजों और रिपोर्टों पर आधारित है। रविवार को जो तय होगा, वह अगली रिपोर्ट का विषय है।

सेमीफ़ाइनल में 66-28, फ़ाइनल के आख़िरी दस मिनट

भारत यहाँ तक हारे बिना पहुँचा था। पूल-ए में टीम ने जापान, चीनी ताइपे, बांग्लादेश और कोरिया को हराकर शीर्ष स्थान पक्का किया, चारों मैच जीतकर। सेमीफ़ाइनल में थाईलैंड सामने था, और वहाँ अंतर बहुत बड़ा रहा। भारत वह मुक़ाबला 66-28 से जीता, यानी थाईलैंड से दोगुने से भी ज़्यादा अंक।

फ़ाइनल शुरुआत में बिल्कुल अलग तस्वीर थी। कबड्डी में हमलावर टीम का एक खिलाड़ी बारी-बारी से सामने वाली आधी ज़मीन में जाता है, यह रेड कहलाती है, और बिना पकड़े लौटने पर अंक बनता है। दोनों टीमें रेड-दर-रेड बराबरी पर उलझी रहीं। आधे समय पर ईरान 18-17 से आगे था, सिर्फ़ एक अंक का फ़ासला। दूसरे हाफ़ में यह बदला। भारत ने रेड और डिफ़ेंस दोनों में पकड़ मज़बूत की।

अर्जुन देशवाल और देवांक दलाल ने रेड की कमान संभाली। सुमित और जयदीप डिफ़ेंस में जमे रहे। दस मिनट शेष रहते अर्जुन देशवाल ईरान के फ़ज़ल अत्राचली को छूकर निकले। यह रेड भारत को ऑल-आउट तक ले गई, यानी ईरान का पूरा दस्ता एक साथ मैट से बाहर, और उसके बदले मिलने वाले दो अतिरिक्त अंकों ने बढ़त पाँच अंकों तक पहुँचा दी। आख़िरी क्षणों में ईरान ने पूरा ज़ोर लगाया। अस्लम इनामदार ने तभी दो अहम अंक जोड़े और मुक़ाबला भारत के हाथ में रख दिया।

अंत में स्कोर 40-34 पर टिका, भारत की तरफ़। यह भारत का नौवां पुरुष एशियाई खेल कबड्डी स्वर्ण है। पूरा अभियान बिना एक भी हार के पूरा हुआ, चार ग्रुप जीत, एक सेमीफ़ाइनल और यह फ़ाइनल। ईरान के लिए यह दिन का दूसरा कबड्डी फ़ाइनल था जो हाथ से निकला। पहला महिलाओं का था, अब पुरुषों का भी।

भारत का कबड्डी रिकॉर्ड: नौ सोना, बीच में सिर्फ़ एक चूक

पुरुष कबड्डी 1990 से एशियाई खेलों का हिस्सा है, बीजिंग से। उसके बाद हर एक संस्करण में भारत ने सोना जीता: 1990, 1994, 1998, 2002, 2006, 2010, 2014। यह सिलसिला 2018 के जकार्ता खेलों में टूटा, और यहाँ ज़्यादातर रिपोर्टें एक तथ्य ग़लत लिखती हैं। भारत उस बरस फ़ाइनल हारा ही नहीं था। ईरान ने भारत को सेमीफ़ाइनल में ही 27-18 से हरा दिया था, और भारत फ़ाइनल में पहुँचे बिना कांस्य पर सिमट गया। फ़ाइनल में ईरान ने कोरिया को हराया था। इकतीस बरस में भारत की यह इकलौती चूक है, हार भले फ़ाइनल की नहीं, सेमीफ़ाइनल की रही हो।

यह तस्वीर 2018 के जकार्ता-पालेमबांग एशियाई खेलों में ईरान की टीम के एक मुक़ाबले की है, वही ईरान जिसने उस साल सेमीफ़ाइनल में भारत को हराया था।
तस्वीर: Amir Hosseini, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 4.0

2022 के हांगझोऊ खेलों में भारत ने सोना वापस जीता। शनिवार की जीत के साथ यह लगातार दूसरा स्वर्ण बना, और कुल मिलाकर नौवां। नौ ख़िताबों के बीच सिर्फ़ एक बार भारत फ़ाइनल तक भी नहीं पहुँच सका, और उस एक बार के पीछे भी ईरान का ही हाथ था।

पुरुष कबड्डी में भारत ने कभी कोई फ़ाइनल गँवाया नहीं है। 2018 में हार सेमीफ़ाइनल की थी, फ़ाइनल भारत ने खेला ही नहीं। शनिवार से पहले भारत आठ बार फ़ाइनल में उतरा और आठों बार जीता। अब यह नौ में नौ है। महिला कबड्डी का हिसाब जोड़ें तो तस्वीर पूरी होती है। शनिवार की दोनों जीत मिलाकर भारत का यह एशियाई खेलों में कबड्डी का तेरहवां सोना है, पुरुष और महिला दोनों स्पर्धाएँ साथ गिनकर। इंडिया टीवी की रिपोर्ट, जो भारतीय समय शाम 3:38 बजे प्रकाशित हुई और शाम 3:58 बजे अद्यतन हुई, इसी आँकड़े की पुष्टि करती है। पूरे इतिहास में सिर्फ़ ईरान ने भारत को कबड्डी के किसी फ़ाइनल में हराया है, और वह भी सिर्फ़ एक बार, 2018 में, महिलाओं के फ़ाइनल में।

महिलाओं ने ईरान को दूसरी बार हराया, इस बार फ़ाइनल में

पुरुषों के फ़ाइनल से पहले वाले घंटों में महिला टीम मैदान पर उतर चुकी थी। फ़ाइनल में स्कोर 37-34 रहा, भारत के पक्ष में। टीम की कप्तानी पुष्पा राणा कर रही हैं। राइडर पूजा कजला टीम की सबसे भरोसेमंद कड़ी रहीं, पूरे टूर्नामेंट की तरह इस फ़ाइनल में भी। अर्जुन पुरस्कार पा चुकीं पूजा कजला बारह सदस्यों की टीम में हैं। यह जीत भारत का दिन का तीसरा और महिला टीम का ख़िताब बचाने वाला सोना थी।

यह मुक़ाबला ईरान के ख़िलाफ़ भारत की इस टूर्नामेंट की दूसरी जीत थी, पहली नहीं। बुधवार, 23 सितंबर को ग्रुप-ए के अपने दूसरे मैच में भारत और ईरान उसी तोकई सिटिज़न जिमनेज़ियम में भिड़े थे। वह मैच भी भारत जीता। स्कोर था 37-23, भारत के पक्ष में। उस दिन शुरुआत धीमी रही और भारत आधे समय से पहले 9-11 से पीछे था। पूजा कजला की एक दो-अंकों की रेड ने बराबरी दिलाई, और भारत आधे समय तक 19-15 से आगे निकल गया। सेमीफ़ाइनल में नेपाल सामने था। वहाँ भारत ने 48-24 से आसान जीत दर्ज की। ग्रुप चरण की दोनों बाक़ी जीत भी बड़े अंतर की रहीं, बांग्लादेश पर 42-21 से और जापान पर 50-25 से। पूरा अभियान अजेय रहा। ठीक पुरुष टीम की तरह, एक भी हार नहीं।

महिला कबड्डी 2010 से एशियाई खेलों में है। उस पहले संस्करण से 2026 तक कुल पाँच बार यह स्पर्धा खेली गई है, और भारत ने इनमें से चार बार सोना जीता है: 2010, 2014, 2022 और अब 2026। सिर्फ़ 2018 के जकार्ता खेलों में भारत सोना नहीं जीत सका। उस साल भी हरानेवाली टीम ईरान ही थी, फ़ाइनल में 27-24 से, और भारत को रजत से संतोष करना पड़ा था। पुरुषों की तरह वहाँ चूक नहीं हुई, फ़ाइनल खेला गया और हारा गया। एक ही साल में एक ही देश ने भारत की दोनों टीमों को रोका, एक को सेमीफ़ाइनल में, दूसरी को फ़ाइनल में। शनिवार को दोनों हिसाब बराबर हुए।

तूर 17 सेंटीमीटर से पीछे रहे, सोने की हैट्रिक अधूरी

तजिंदरपाल सिंह तूर तीसरे लगातार व्यक्तिगत एशियाई खेल स्वर्ण की तलाश में आइची पहुँचे थे, एक ऐसा रिकॉर्ड जो किसी भारतीय ट्रैक-एंड-फ़ील्ड खिलाड़ी के नाम अब तक नहीं है। फ़ाइनल शुरू होते ही यह मुश्किल दिखने लगा। ईरान के मोहम्मदरज़ा तायबीसे ने अपने ही शुरुआती प्रयास में 20.81 मीटर का थ्रो फेंक दिया, नया गेम्स रिकॉर्ड। तूर एक समय 20.26 मीटर पर तीसरे स्थान पर खिसक गए थे।

पाँचवें प्रयास में तूर ने जवाब दिया। उन्होंने गोला 20.64 मीटर दूर फेंका, यह उनका सत्र का सबसे अच्छा थ्रो था और उन्हें रजत तक ले गया। छठे और आख़िरी प्रयास में इसमें सुधार नहीं हुआ। अंत में तूर तायबीसे से सिर्फ़ 17 सेंटीमीटर पीछे रह गए। सऊदी अरब के मोहम्मद तोलो ने 20.48 मीटर के साथ कांस्य जीता। भारत के करणवीर सिंह दसवें स्थान पर रहे।

यह तस्वीर 1992 के बार्सिलोना पैरालंपिक की है, आइची-नागोया की नहीं; गोला फेंकने की मुद्रा वहाँ भी वैसी ही दिखती है।
तस्वीर: Norman Bailey/Australian Paralympic Committee, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

तायबीसे का थ्रो एक और रिकॉर्ड भी साथ ले गया। यह गेम्स रिकॉर्ड पहले तूर के ही नाम था, 20.75 मीटर, जो उन्होंने 2018 के जकार्ता खेलों में फेंककर बनाया था और उसी थ्रो से सोना भी जीता था। तायबीसे ने उसे छह सेंटीमीटर से पीछे छोड़ दिया। तूर ने 2022 के हांगझोऊ खेलों में 20.36 मीटर के साथ अपना ख़िताब बचाया था, उस साल का थ्रो शनिवार के 20.64 मीटर से भी कम था, फिर भी सोना उसी पर आया था। इस बार मुक़ाबला कहीं कड़ा निकला।

तूर का अपना राष्ट्रीय रिकॉर्ड और निजी सर्वश्रेष्ठ थ्रो अब भी 21.77 मीटर पर खड़ा है, जो उन्होंने 2023 में भुवनेश्वर में फेंका था और उस वक़्त यह एशियाई रिकॉर्ड भी था। शनिवार का थ्रो उस निशान से 1.13 मीटर पीछे रहा। एशियाई खेलों से पहले 2026 के अपने सत्र में तूर ने दिल्ली में हुई इंडियन एथलेटिक्स सीरीज़-3 में 21.03 मीटर फेंका था, 2023 के बाद उनका पहला 21 मीटर पार थ्रो। फ़ॉर्म लौट रही थी, सोना नहीं लौटा। मुक़ाबले के बाद तूर ने कहा कि उन्हें 22 मीटर फेंकने तक चैन नहीं मिलेगा।

स्क्वॉश में एक इतिहास नया है, एक दोहराया गया

अनाहत सिंह सिर्फ़ 18 बरस की हैं और विश्व रैंकिंग में 17वें नंबर पर हैं। शुक्रवार, 25 सितंबर को क्वार्टर फ़ाइनल में उन्होंने तन्वी खन्ना को सीधे गेमों में 3-0 से हराया। शनिवार के सेमीफ़ाइनल में सामने जापान की सातोमी वातानबे थीं, दूसरी वरीयता प्राप्त और विश्व की छठे नंबर की खिलाड़ी। अनाहत दो गेम से पीछे थीं, 9-11 और 11-13 से हारकर। वहाँ से उन्होंने मुक़ाबला पाँच गेम तक खींचा और 3-2 से जीत दर्ज की, बाक़ी तीन गेम 12-10, 11-6 और 11-3 से जीतकर। इस जीत के साथ वे एशियाई खेलों के महिला एकल फ़ाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय बन गईं। मुक़ाबले के बाद अनाहत ने इसे अपने करियर की सबसे अच्छी जीत बताया। जुलाई 2025 में उन्होंने विश्व जूनियर स्क्वॉश चैंपियनशिप में कांस्य जीता था, पंद्रह बरस में भारत का उस चैंपियनशिप में पहला पदक। रविवार को उनके सामने मलेशिया की शिवसंगरी सुब्रमण्यम होंगी, मौजूदा चैंपियन और विश्व की पाँचवें नंबर की खिलाड़ी। एक 18 बरस की खिलाड़ी का सामना अब दुनिया की पाँचवें नंबर की चैंपियन से है।

यह तस्वीर 2009 के कुवैत में हुए पीएसए वर्ल्ड ओपन स्क्वॉश की है, आइची-नागोया की नहीं; शीशे की दीवारों वाला कोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्क्वॉश में ऐसा ही दिखता है।
तस्वीर: Ian Butterworth, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 2.0

अभय सिंह की कहानी अलग तरह की है। दूसरी वरीयता प्राप्त अभय ने शुक्रवार को जापान के रियोनोसुके त्सुकुए को 11-4, 11-3, 11-6 से हराया, फिर शनिवार को पाकिस्तान के मुहम्मद इरफ़ान को सीधे गेमों में हराकर पुरुष एकल फ़ाइनल में जगह बनाई। रविवार दोपहर 12:30 बजे भारतीय समय पर उनका सामना मलेशिया के एनजी ऐन याओ से नागोया के किंजो फ़ुतो एरिना में होगा। यह भारत के लिए स्क्वॉश में पहला पुरुष एकल फ़ाइनल नहीं है। 2023 के हांगझोऊ खेलों में सौरव घोषाल इसी मुक़ाम तक पहुँचे थे, हांगकांग के हेनरी लेउंग को सेमीफ़ाइनल में 3-0 से हराकर, और फ़ाइनल में हारकर रजत जीता था। घोषाल को फ़ाइनल में हराने वाले भी एनजी ऐन याओ ही थे, जो अब अभय के सामने दोबारा खड़े होंगे। उस फ़ाइनल में हारकर भी लेउंग को कांस्य मिला था, क्योंकि स्क्वॉश एकल में दोनों हारने वाले सेमीफ़ाइनलिस्ट को कांस्य मिलता है, तीसरे स्थान का अलग मुक़ाबला नहीं होता। इसी नियम से अनाहत और अभय का पदक शनिवार को ही तय हो गया। रंग भर रविवार तय करेगा। एनजी ऐन याओ 2023 के चैंपियन हैं और रविवार को अपना ख़िताब बचाने उतरेंगे।

भारत के नाम स्क्वॉश में एक एशियाई सोना पहले से दर्ज है। 2023 के हांगझोऊ खेलों में दीपिका पल्लीकल और हरिंदर पाल सिंह संधू ने मिश्रित युगल जीता था, यह उस स्पर्धा का एशियाई खेलों में पहला ही ख़िताब था। शनिवार के दोनों फ़ाइनल के बाद स्क्वॉश में भारत की तस्वीर यह बनती है: मिश्रित युगल में एक सोना पहले से है, पुरुष एकल में एक रजत पहले से है, और अब महिला एकल का पहला फ़ाइनल इंतज़ार में है।

दोनों स्पर्धाओं के विजेता लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक का सीधा कोटा भी पाएँगे, स्क्वॉश जहाँ पहली बार खेला जाएगा। उसी शनिवार को जोश्ना चिनप्पा और वेलावन सेंथिलकुमार मिश्रित युगल के सेमीफ़ाइनल में उतरे। सामने हांगकांग की ली का यी और टैंग मिंग होंग थे, और भारतीय जोड़ी 10-11, 11-2, 10-11 से हार गई। कांस्य पर संतोष करना पड़ा। चालीस बरस की जोश्ना के लिए यह सातवें एशियाई खेलों का छठा पदक था, वेलावन के लिए पहला।

रात पौने ग्यारह बजे तक तीस पदक

समाचार एजेंसी एएनआई ने शनिवार रात 10:49 बजे अपनी रिपोर्ट अद्यतन करते हुए भारत की तालिका दर्ज की: चार सोना, बारह रजत, चौदह कांस्य, कुल तीस पदक। यही आँकड़ा एशियाई खेल 2026 की पदक तालिका में भी दर्ज था, भारत दसवें स्थान पर।

शनिवार का दिन सिर्फ़ कबड्डी और गोला फेंक का नहीं था। सावन बरवाल ने पुरुष मैराथन में रजत जीता, राष्ट्रीय रिकॉर्ड 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड के साथ, जापान के यामाशिता से पीछे रहकर। यह मैराथन में भारत का चौवालीस बरस बाद पहला पदक है। महिलाओं की 50 मीटर राइफ़ल थ्री-पोज़िशन टीम स्पर्धा में आशी चौकसे, तिलोत्तमा सेन और विदर्षा विनोद ने मिलकर 1763-90x अंकों से रजत जीता, चीन के सोने से पीछे।

चीन 107 सोने के साथ तालिका में सबसे ऊपर था, मेज़बान जापान 31 सोने के साथ दूसरे नंबर पर। दक्षिण कोरिया सोलह सोनों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। ईरान, जिसे भारत ने उसी दिन दो बार फ़ाइनल में हराया था, अपने सात सोने के दम पर भारत से ऊपर सातवें स्थान पर बना रहा। हांगकांग भारत से एक पदक पीछे, ग्यारहवें स्थान पर। यह तालिका रात 10:49 बजे तक की है। खेल अभी जारी हैं, इसलिए अगली सुबह तक यह बदल भी सकती है।

स्रोतइंडिया टीवी न्यूज़, 26 सितंबर 2026, दोपहर 3:38 बजे (अद्यतन 3:58 बजे): पुरुष कबड्डी फ़ाइनल, स्कोर और भारत के कुल कबड्डी स्वर्णों की गिनती, द ट्रिब्यून, 26 सितंबर 2026, रात 10:07 बजे: दोनों कबड्डी फ़ाइनल की संयुक्त रिपोर्ट, एएनआई, 26 सितंबर 2026, रात 10:49 बजे: दिन 7 का पदक-तालिका अपडेट, मैराथन और शूटिंग सहित, फ़्री प्रेस जर्नल, 26 सितंबर 2026: तूर की चांदी और पुरुष कबड्डी फ़ाइनल का हाफ़-टाइम स्कोर, डेक्कन क्रॉनिकल, 26 सितंबर 2026, शाम 6:48 बजे: तूर, तायबीसे और गेम्स रिकॉर्ड, न्यूज़ कर्नाटक, 26 सितंबर 2026, शाम 6:55 बजे: तूर की पाँचों कोशिशों का ब्यौरा और तोलो का कांस्य, माइखेल, 26 सितंबर 2026: तूर का 22 मीटर वाला बयान, विकिपीडिया: कबड्डी में एशियाई खेल पदक विजेताओं की पूरी सूची, 1990–2022, पुरुष व महिला दोनों स्पर्धाएँ, ईएसपीएन, अगस्त 2018: 2018 जकार्ता में ईरान की भारत पर सेमीफ़ाइनल जीत, स्कोर 27-18, विकिपीडिया: एशियाई खेल 2026 की लाइव पदक तालिका, ओसीए के क्रम पर आधारित, विकिपीडिया: एशियाई खेल 2026 में स्क्वॉश का पूरा कार्यक्रम, राउंड-दर-राउंड तारीख़ों समेत, ओलंपिक्स डॉट कॉम, 26 सितंबर 2026: अनाहत सिंह की सेमीफ़ाइनल के बाद प्रतिक्रिया, आउटलुक इंडिया, 26 सितंबर 2026: अनाहत सिंह बनाम सातोमी वातानबे सेमीफ़ाइनल, गेम-दर-गेम स्कोर, वर्ल्ड स्क्वॉश, 26 सितंबर 2026: अनाहत सिंह पहली भारतीय महिला फ़ाइनलिस्ट, विश्व रैंकिंग सहित, Inkl, 26 सितंबर 2026: दोनों फ़ाइनल की तारीख़, समय और एलए 2028 कोटा की शर्त, स्पोर्ट्सटाइगर, अक्टूबर 2023: सौरव घोषाल के 2023 हांगझोऊ फ़ाइनल का ब्यौरा, डेक्कन हेराल्ड, अक्टूबर 2023: दीपिका पल्लीकल-हरिंदर पाल सिंह संधू का मिश्रित युगल स्वर्ण, द ट्रिब्यून, 26 सितंबर 2026: जोश्ना चिनप्पा-वेलावन सेंथिलकुमार का मिश्रित युगल कांस्य

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।