विषय
कला
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इत्मीनान
फ़िल्म बनती थी एडिटर की मेज़ पर, नाम छपता था सबसे आख़िर में
मोवीओला, ब्लेड और टेप के दौर में एक कट मतलब एक भौतिक जोड़ था, और उसे खोलना महँगा पड़ता था। फ़िल्मफ़ेयर के अपने छब्बीस बरस के रिकॉर्ड, एक 1951 की सरकारी रिपोर्ट, और एक साफ़ करियर से यह लेख पूछता है कि एडिटर असल में तय क्या करता था।
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देश
बहत्तरवाँ राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार आज दिल्ली से बाहर एकता नगर में, और रिकॉर्ड बताता है कि यह दूसरी बार है, पहली बार 1970 में मद्रास में हुआ था
कई अख़बार आज के समारोह को पुरस्कार के बहत्तर बरसों में पहली बार दिल्ली से बाहर होना बता रहे हैं। उन्हीं अख़बारों की रिपोर्टों में दर्ज मिलता है कि सत्रहवाँ राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार 21 नवंबर 1970 को मद्रास में दिया गया था, दिल्ली में नहीं।
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इत्मीनान
देश ने पहली बार जिस फ़िल्म को सबसे अच्छा कहा, उस समारोह की पुस्तिका में तीन पदक छपे थे और दिए दो गए
10 अक्तूबर 1954 की शाम राष्ट्रपति ने श्यामची आई को पहला स्वर्ण पदक दिया। उसी शाम बँटी उन्नीस पन्ने की सरकारी पुस्तिका आज भी पढ़ी जा सकती है, और वह समारोह की जगह से लेकर छायाकार के नाम तक कई बातें तय करती है जो आज उलटी छपी मिलती हैं।
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इत्मीनान भारत की पहली फ़िल्म कौन-सी थी, और यह सवाल आज तक खुला क्यों है श्री पुंडलिक 1912 में आई, राजा हरिश्चंद्र 1913 में। बहस तारीख़ की नहीं है। बहस इस बात की है कि फ़िल्म किसे कहते हैं, और वह तय कभी हुआ ही नहीं।