विषय
प्रदूषण
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देश
चार शहरों के कचरे के पहाड़, सरकारी आँकड़ों में सिर्फ़ एक ही ख़त्म
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की 21 सितंबर की बैकग्राउंडर गोरखपुर, दिल्ली, नागपुर और रायचूर को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी की चार कामयाबी बताती है। मंत्रालय की अपनी वार्षिक रिपोर्ट और भलस्वा पर बाद की विज्ञप्तियाँ जोड़ने पर पता चलता है कि इनमें से सिर्फ़ गोरखपुर की डंपसाइट पूरी तरह ख़त्म हुई है, और भलस्वा में बायोमाइंड कचरे का एक आँकड़ा मंत्रालय के दो दस्तावेज़ों में आपस में मेल भी नहीं खाता।
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काम की बात
रात दस बजे के बाद शोर की शिकायत में डेसिबल नापने की ज़रूरत नहीं
ध्वनि प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 में चार क्षेत्र हैं और हर क्षेत्र की दिन-रात की अलग सीमा। रात दस से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर पर सीधी रोक है, और साल में पंद्रह रातों की जो छूट राज्य सरकार दे सकती है, उसकी तारीख़ें उसे पहले से घोषित करनी होती हैं। शिकायत किसके पास जाती है, उसमें क्या लिखा होना चाहिए, नाप कौन करता है, और लिखित आदेश आने के बाद पुलिस का अधिकार कैसे बदल जाता है, नीचे उसी क्रम में है।
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समझिए
लखनऊ स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पहले नंबर पर आया, और उसकी हवा राष्ट्रीय मानक से तीन गुना गंदी है
पंद्रहवें स्थान से पहले स्थान पर, और डेढ़ करोड़ का इनाम। सर्वेक्षण के आठ में से ज़्यादातर मानक यह नापते हैं कि शहर ने क्या किया, यह नहीं कि हवा में क्या है।
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समझिए
दिल्ली की हवा में सबसे बड़ा हिस्सा सड़क की धूल का है, और यही वह वाक्य है जिसका सबसे ज़्यादा दुरुपयोग होता है
सत्रह शहरों के अध्ययनों में सड़क की धूल पीएम10 का 20 से 52 फ़ीसदी है। पर पीएम2.5 में वह 8 से 25 फ़ीसदी ही है, और फेफड़ों में गहरे तक वही जाता है। सीएसआईआर-सीआरआरआई ने शुक्रवार को दिल्ली पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को इसी ढाँचे पर प्रशिक्षण दिया।