एफ़िल टावर एक दिन बंद रहा क्योंकि एक भारतीय संगठन के दौरे के लिए महिला कर्मचारियों को हटाया गया; संचालक ने माना कि 'ये शर्तें स्वीकार नहीं होनी चाहिए थीं'
बीएपीएस के सौ लोगों का दल शनिवार को टावर देखने गया था, रविवार को पेरिस के पास उसके मंदिर का उद्घाटन था। सोमवार को कर्मचारी हड़ताल पर चले गए और टावर बंद हुआ। फ़्रांस की समानता मंत्री ने कहा कि फ़्रांस में महिलाओं से ख़ुद को मिटाने को नहीं कहा जाता। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह संगठनों के बीच का मामला है।

सोमवार 7 सितंबर को एफ़िल टावर नहीं खुला।
वजह न मौसम था, न मरम्मत, न सुरक्षा। कर्मचारी हड़ताल पर थे, और हड़ताल की वजह दो दिन पहले का एक दौरा था: गुजरात में मुख्यालय वाले बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था, यानी बीएपीएस, के लगभग सौ लोगों का।
मंगलवार को टावर फिर खुल गया। जो बंद नहीं हुआ, वह बहस है, और उसमें हर पक्ष ने अपने शब्द दर्ज कराए हैं। यह लेख उन्हीं शब्दों का है।
दौरा किस दिन था
यहीं से विरोध शुरू होता है। यूरोन्यूज़ ने दौरे का दिन शनिवार लिखा है और इंडियन एक्सप्रेस ने भी; फ़्रांस 24 और अल जज़ीरा "सप्ताहांत" कहते हैं; अल जज़ीरा शनिवार लिखता है, और उसकी गिनती में वह दिन 6 सितंबर पड़ता है।
कैलेंडर में 5 सितंबर शनिवार है और 6 सितंबर रविवार। मंदिर का उद्घाटन सब स्रोतों में रविवार 6 सितंबर को है। इसलिए दौरा शनिवार 5 सितंबर का बनता है। जहाँ स्रोत 6 लिखते हैं, वह हमारे हिसाब से दिन और तारीख़ का घालमेल है, और हम इसे यहाँ दर्ज करके आगे बढ़ रहे हैं।
दल ने क्या माँगा था
टावर चलाने वाली कंपनी का नाम एसईटीई है, पेरिस नगर की कंपनी। सीएनएन और फ़्रांस 24 दोनों के अनुसार कंपनी ने माना कि दल ने अनुरोध किया था कि दौरा इस तरह व्यवस्थित हो कि "महिलाओं से संपर्क सीमित" रहे।
कंपनी का बयान: "इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था।" और: जो हुआ वह "एसईटीई के मूल्यों और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था।" कंपनी के अध्यक्ष एरियल वाइल ने कहा: "हम यह सामने लाएँगे कि क्या हुआ, और ज़रूरी निष्कर्ष निकालेंगे।"
फ़्रांस-अंफ़ो के अनुसार अनुरोध की भाषा यह थी कि संगठन के "आध्यात्मिक प्रतिनिधि" का दौरा इस तरह व्यवस्थित हो कि महिलाओं से उसका संपर्क सीमित रहे; शर्त पूरे दल के लिए नहीं, उसके प्रमुख के लिए माँगी गई थी। कंपनी का एक वाक्य और है: "कोई प्रोटोकॉल, सांस्कृतिक या धार्मिक विचार पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता के सिद्धांतों से छूट को उचित नहीं ठहरा सकता।" अल जज़ीरा के अनुसार बीएपीएस के साधु कठोर ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं, जिसमें महिलाओं से शारीरिक संपर्क और उनके साथ अकेले होने से बचना शामिल है; संगठन के सार्वजनिक बयानों में इस नियम का ज़िक्र नहीं है।
कर्मचारियों ने क्या देखा
फ़्रांस की सबसे बड़ी यूनियनों में से एक, सीजीटी, ने बयान में उन "काम के निर्देशों" की निंदा की "जिनसे महिला कर्मचारियों को उनके लिंग के आधार पर किनारे किया गया, बदला गया और अदृश्य बनाया गया।"
यूनियन के अनुसार कुछ महिलाओं से "अपनी जगह छोड़ने" को कहा गया और वहाँ "पुरुषों को लगाया गया"; सभी महिला कर्मचारियों को निर्देश था कि वे कुछ इलाक़ों से न गुज़रें। यूनियन प्रतिनिधि डियान डावोइन ने यूरोन्यूज़ से कहा कि महिला कर्मचारियों को "उनके कार्यस्थल से हटाया गया जब दल वहाँ से गुज़र रहा था।"
डावोइन सीजीटी की ओर से कंपनी की कर्मचारी समिति की सचिव हैं; फ़्रांस-अंफ़ो से उन्होंने इसे "महिलाओं का अपमान" कहा। यूरोन्यूज़ और फ़्रांस-अंफ़ो दोनों में यूनियन का बयान ठेकेदार कंपनियों की महिला कर्मचारियों को भी गिनता है: उन्हें भी "अदृश्य" रहने का निर्देश मिला।
किन पदों की महिलाएँ, लिफ़्ट, टिकट या सुरक्षा, यह किसी रिपोर्ट में नहीं है। हड़ताल में कितने कर्मचारी शामिल हुए, यह भी नहीं।
बीएपीएस ने क्या कहा
संगठन ने माफ़ी माँगी: "किसी भी पीड़ा या असुविधा के लिए हम सच्चे दिल से क्षमा चाहते हैं।" और साथ में इनकार: "किसी भी समय किसी को एफ़िल टावर तक पहुँचने से नहीं रोका गया।" अल जज़ीरा के अनुसार संगठन ने कहा कि दौरा इस तरह रखा गया था कि "दूसरों को बाधा या असुविधा न हो।"
दो बातें एक साथ हैं: माफ़ी और इनकार। जो माँगा गया था और जो हुआ, उस पर संगठन का बयान संचालक कंपनी के बयान से अलग नहीं है, सिर्फ़ उसकी व्याख्या अलग है।
बयान का पूरा पाठ आउटलुक ने छापा है: "हमारी जानकारी में किसी भी समय किसी को एफ़िल टावर तक पहुँचने से नहीं रोका गया। फिर भी हम उन सभी से सच्चे दिल से क्षमा चाहते हैं जिन्हें इस स्थिति से ठेस पहुँची हो या असुविधा हुई हो। हम परस्पर सम्मान और दूसरों की सेवा के सार्वभौमिक मूल्यों के प्रति गहराई से प्रतिबद्ध हैं।"
मंगलवार को एसोसिएटेड प्रेस के पास संगठन का दूसरा बयान पहुँचा: टावर के साथ समन्वय "किसी भी समय लिंग पर आधारित अनुरोध के रूप में नहीं था"। संचालक कंपनी का "महिलाओं से संपर्क सीमित" और संगठन का "लिंग पर आधारित नहीं", दोनों वाक्य अब आमने-सामने हैं।
पाँच राजनेता, पाँच वाक्य
पेरिस के समाजवादी मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने एक्स पर लिखा कि टावर प्रबंधन का दल की शर्तें मानना "अस्वीकार्य" है और जाँच होगी।
समानता मंत्री ओरोर बर्जे: "फ़्रांस में हम महिलाओं से ख़ुद को मिटाने को नहीं कहते। कोई सिद्धांत, कोई धर्म गणराज्य के क़ानूनों से ऊपर नहीं है।"
नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्राउन-पिवे: "दूसरों का स्वागत करने का अर्थ कभी अपने मूल्य छोड़ना नहीं होता। फ़्रांस में महिलाएँ सार्वजनिक जीवन में पूरी तरह मौजूद हैं।" और: "मैं यह मानने से इनकार करती हूँ कि विदेशी आगंतुकों की माँगों पर महिलाओं से किनारे हटने को कहा जाए।"
दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन: फ़्रांस कभी स्वीकार नहीं करेगा कि महिलाओं की उपस्थिति "सीमित" की जाए। पूर्व प्रधानमंत्री गैब्रिएल अटाल: "कोई संस्कृति, कोई आस्था, कोई धर्म... महिलाओं को यह नहीं बता सकता कि उनकी जगह क्या है।"
वामपंथी मेयर से दक्षिणपंथी ले पेन तक एक ही वाक्य। फ़्रांस की राजनीति में यह सहमति कम मिलती है।
अध्यक्ष का मंगलवार: "कुछ उत्साही अधिकारी"
मंगलवार 8 सितंबर को एसईटीई के अध्यक्ष एरियल वाइल ने फ़्रांस-अंफ़ो से घटना को "पूरी तरह चौंकाने वाली और अस्वीकार्य" कहा। शर्त किसने मानी, इस पर उनका जवाब: "संचालन के कुछ ज़रा ज़्यादा उत्साही अधिकारियों ने इन निर्देशों को लागू करने को बहुत गंभीरता से ले लिया, उस विवेक के बिना जो यह मानता कि यह अनुचित है।"
जाँच का दायरा एक वाक्य में: "हम तय करेंगे कि किसने वे निर्देश दिए जिनसे एफ़िल टावर का स्वागत-प्रोटोकॉल बदला गया।" नतीजे "आने वाले दिनों में", मक़सद "सबसे बढ़कर यह कि ऐसा फिर कभी न हो।" नाम या पद उन्होंने नहीं बताए।
दो जाँचें, सात दिन
मंगलवार को यूनियनों से मिलने के बाद मेयर ग्रेगोआर ने दो अलग जाँचों की घोषणा की। बेल्जियम के अख़बार ला देर्निएर अर की एएफ़पी-आधारित रिपोर्ट के अनुसार पहली जाँच एसईटीई के भीतर एक बाहरी सलाहकार के ज़रिए होगी। दूसरी पेरिस नगर की अपनी है, जो टावर का 99 फ़ीसदी मालिक है: फ़ैसलों की कौन-सी शृंखला इस "बेतुके, अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य फ़ैसले" तक पहुँची। नगर की जाँच के निष्कर्ष "सात दिन के भीतर" आने हैं।
यूनियन की तरफ़ से एक ठोस माँग भी दर्ज हुई। फ़्रांस-अंफ़ो के अनुसार टावर पर सीजीटी के महासचिव देनी वावासोरी ने कहा कि वीआईपी प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत के नियम तय करने वाला एक समझौता "आने वाले हफ़्तों में" विचार में लिया जाएगा।
बीएपीएस है क्या

संगठन के अपने वृत्तांत और सार्वजनिक संकलनों के अनुसार बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था की स्थापना 1907 में शास्त्रीजी महाराज ने गुजरात के आणंद ज़िले के बोचासन गाँव में की; नाम उसी गाँव से है। यह स्वामीनारायण संप्रदाय की एक शाखा है, जिसकी जड़ें उन्नीसवीं सदी की शुरुआत के गुजरात में हैं।
1950 से 2016 तक इसके प्रमुख प्रमुख स्वामी महाराज रहे, जिनके दौर में यह गुजरात के संगठन से वैश्विक नेटवर्क बना: लंदन के नीसडन में 1995 का मंदिर, दिल्ली का अक्षरधाम 2005 में, न्यू जर्सी के रॉबिंसविल का अक्षरधाम 2023 में, और अबू धाबी का मंदिर, जिसका उद्घाटन फ़रवरी 2024 में प्रधानमंत्री मोदी ने किया। 2016 से महंत स्वामी महाराज प्रमुख हैं, जिन्होंने रविवार को पेरिस का उद्घाटन किया।
पेरिस इस शृंखला की अगली कड़ी था। और इसी शृंखला की वजह से यह विवाद सिर्फ़ एक संगठन का नहीं रह जाता; यह उस मॉडल का है जिसमें प्रवासी हिंदू मंदिर भारत की सरकारी कूटनीति के मंच बनते हैं।
संचालक कंपनी और पेरिस नगर

एसईटीई एफ़िल टावर की संचालक कंपनी है और पेरिस नगर की मिल्कियत है; इसीलिए मेयर ग्रेगोआर का "अस्वीकार्य" और जाँच की घोषणा सिर्फ़ राजनीतिक टिप्पणी नहीं, मालिक का बयान है। कंपनी के अध्यक्ष एरियल वाइल ने कहा कि वे "सामने लाएँगे कि क्या हुआ"; यानी जाँच कंपनी के भीतर भी है और नगर की ओर से भी।
सवाल जिसका जवाब जाँच से आना है: दल का अनुरोध किस स्तर पर पहुँचा और किसने हाँ कहा। कंपनी का बयान "स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था" मानता है कि किसी ने स्वीकार किया था।
कंपनी की अपनी विज्ञप्ति, जो फ़्रांस के मनोरंजन-स्थल संघ स्नेलैक की साइट पर है, एसईटीई को "सार्वजनिक स्थानीय कंपनी" बताती है: 99 फ़ीसदी पेरिस नगर की, 1 फ़ीसदी मेट्रोपोल दु ग्रां पारी की। वाइल ख़ुद निर्वाचित राजनेता हैं: समाजवादी पार्टी के, जुलाई 2020 से पेरिस-सांत्र के मेयर। एसईटीई के अध्यक्ष वे इसी साल 25 जून को चुने गए, जीन-फ़्रांसुआ मार्टिन की जगह; विवाद के समय इस कुर्सी पर उन्हें ढाई महीने भी नहीं हुए थे।
दूसरा छोर: मंदिर

यह विवाद जिस दौरे से निकला, वह एक उत्सव का हिस्सा था। रविवार 6 सितंबर को पेरिस के पूर्व में बुसी-सेंट-जॉर्ज में बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर का उद्घाटन हुआ; संगठन के प्रमुख महंत स्वामी महाराज ने किया। फ़्रांस में यह पहला पारंपरिक शैली में बना हिंदू मंदिर है, और ले पैरिसियन ने इसे यूरोप की मुख्यभूमि का सबसे बड़ा पारंपरिक हिंदू मंदिर लिखा है।
उद्घाटन 13 दिन के "पेरिस मंदिर महोत्सव" का केंद्र है। कार्यक्रमों में सीन नदी पर नौका-यात्रा, बुसी-सेंट-जॉर्ज में पालकी-यात्रा और पेरिस के बीचोबीच नगर-यात्रा थी। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार शनिवार की तीन घंटे की नगर-यात्रा एफ़िल टावर की पृष्ठभूमि में हुई और संगठन के बयान में 42 देशों के लगभग 6,000 लोग उसमें शामिल थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन में वर्चुअल संबोधन में इसे भारत-फ़्रांस सांस्कृतिक संबंधों में "नया मील का पत्थर" कहा।
मंदिर सेन-ए-मार्न ज़िले के बुसी-सेंट-जॉर्ज में "धर्मों और संस्कृतियों की एस्प्लानाद" पर है। भवन लगभग 5,000 वर्ग मीटर का है: एक तहख़ाना, दो मंज़िलें और छत पर बग़ीचा; ऊपर 5 शिखर, 10 गुंबद और 4 छतरियाँ। पत्थर ग्वालियर का बलुआ और इटली, यूनान और गुजरात के अंबाजी का संगमरमर, जिन्हें भारत में स्वयंसेवकों ने तराशा। शिलान्यास 3-4 सितंबर 2022 को हुआ, निर्माण अप्रैल 2024 के अंत से; कनेक्सियन फ़्रांस के अनुसार पूरा ख़र्च दान से आया और बजट सार्वजनिक नहीं किया गया।
उत्सव का नाम संगठन की वेबसाइट पर "फ़ेस्टिवल ऑफ़ कल्चर" है: बुधवार 2 सितंबर से सोमवार 14 सितंबर। संडे ट्रिब्यून में क्रम यों है: महंत स्वामी महाराज शनिवार 29 अगस्त को पहुँचे; गुरुवार 3 सितंबर को सीन पर 11 सजी नौकाएँ, जिनमें गल्फ़ न्यूज़ के अनुसार 5,500 से ज़्यादा लोग थे; शनिवार 5 को एफ़िल टावर से शुरू होकर मध्य पेरिस से गुज़रती नगर-यात्रा, 14 झाँकियाँ; रविवार 6 को उद्घाटन, जहाँ फ़्रांस-अंफ़ो के अनुसार एक विशाल तंबू के नीचे 7,000 लोग थे। एएफ़पी की रिपोर्टें, जो लावनीर में छपीं, नौका-यात्रा को टावर के दौरे वाले शनिवार पर रखती हैं; यह फ़र्क़ हम दर्ज कर रहे हैं।
छप्पन साल
संगठन के अपने वृत्तांत के अनुसार इस मंदिर का विचार 1970 में आया, जब उसके तत्कालीन प्रमुख योगीजी महाराज ओर्ली हवाई अड्डे पर रुके थे। उसके बाद प्रमुख स्वामी महाराज ने इसे आगे बढ़ाया, और महंत स्वामी महाराज के दौर में यह पूरा हुआ।
हवाई अड्डे का नाम स्रोतों में एक नहीं है। द पायनियर के वृत्तांत में तारीख़ 7 जुलाई 1970 और जगह ओर्ली है: योगीजी महाराज विमान में ही रहे, प्रमुख स्वामी महाराज और महंत स्वामी महाराज मूर्ति लेकर उतरे और प्रार्थना की; वाक्य दर्ज है, "एक दिन पेरिस में एक सुंदर मंदिर बनेगा।" विकिपीडिया और हिंदूइज़्म टुडे उसी जुलाई 1970 की घटना को ले बूर्जे हवाई अड्डे पर रखते हैं। हम दोनों नाम दर्ज कर रहे हैं।
छप्पन साल की योजना का उद्घाटन रविवार को हुआ। सोमवार को टावर बंद था। उत्सव और विवाद के बीच 48 घंटे भी नहीं थे।
भारत सरकार का एक वाक्य
मंगलवार 8 सितंबर को नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से इस पर सवाल हुआ। फ़्री प्रेस जर्नल के अनुसार उन्होंने कहा कि सरकार को बीएपीएस के दल के पेरिस दौरे से जुड़ी रिपोर्टों की जानकारी है, और कि पेरिस क्षेत्र में संगठन से जुड़े एक मंदिर का हाल में उद्घाटन हुआ है।
टावर के मामले पर उनका वाक्य: यह "संबंधित संगठनों के बीच का मामला" है। इससे आगे कोई टिप्पणी नहीं।
द वीक, इंडिया टीवी और आउटलुक में मूल अंग्रेज़ी शब्द एक जैसे हैं: "जहाँ तक टावर से जुड़े विशेष मुद्दे की बात है, यह पूरी तरह संबंधित इकाइयों के बीच का मामला है।" प्रधानमंत्री के वीडियो-संबोधन पर भी सवाल हुआ; आउटलुक के अनुसार जायसवाल का जवाब: "ऐसे अवसरों पर प्रधानमंत्री का शुभकामनाएँ देना सामान्य व्यवहार है।" देखे गए भारतीय आउटलेट्स में विदेश मंत्रालय के अलावा किसी दल या संगठन की प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।
यानी भारत ने इसे राजनयिक विवाद बनने से रोका। फ़्रांस की सरकार ने भी भारत का नाम नहीं लिया; उसके सभी बयान अपने संचालक और अपने क़ानून के बारे में हैं।
फिर खुलने की तारीख़ पर भी फ़र्क़
सीएनएन ने टावर के फिर खुलने का दिन मंगलवार 8 सितंबर लिखा है। अल जज़ीरा ने "मंगलवार, 9 सितंबर"। 9 सितंबर बुधवार है। हमारे हिसाब से यह भी दिन-तारीख़ का वही घालमेल है, और टावर मंगलवार को खुला।
छोटी बात है, पर यह उसी सप्ताहांत की है जिसमें सब कुछ दो दिन में हुआ, और जिसमें हर रिपोर्ट किसी दूसरी रिपोर्ट से एक दिन अलग है।
फ़्रांस में यह सवाल इतना तीखा क्यों है
फ़्रांस का 1905 का क़ानून राज्य और धर्म को अलग करता है, और सार्वजनिक संस्थानों में धार्मिक तटस्थता वहाँ की राजनीति का साझा आधार है, जिस पर वाम और दक्षिण दोनों दावा करते हैं। एफ़िल टावर नगर की संपत्ति है, यानी सार्वजनिक संस्थान। इसीलिए एक निजी दल की धार्मिक शर्त पर कर्मचारियों को हटाना वहाँ सिर्फ़ श्रम-विवाद नहीं, गणराज्य के सिद्धांत का सवाल बन गया।
यही वजह है कि मेयर से लेकर ले पेन तक एक ही वाक्य बोला। असहमति इस पर होती कि शर्त मानी जाए या नहीं; यहाँ किसी ने नहीं कहा कि मानी जानी चाहिए थी। बहस इस पर है कि किसने मानी।
टावर फिर खुला, और कर्मचारी लौटे
मंगलवार को टावर सामान्य समय पर खुला। फ़्रांस 24 की फ़्रेंच रिपोर्ट के अनुसार सुबह साढ़े नौ से कुछ पहले आगंतुक सुरक्षा-द्वार से गुज़र रहे थे; अल जज़ीरा के अनुसार वापसी सोमवार को कर्मचारियों और प्रबंधन की बैठक के बाद तय हुई। सीएनएन के अनुसार यूनियन ने हड़ताल एक दिन की रखी थी, और कंपनी के बयान के बाद उसे बढ़ाया नहीं। सीज़न का यह सप्ताह पेरिस के पर्यटन के व्यस्त हफ़्तों में है; एक दिन की बंदी का आर्थिक नुक़सान किसी रिपोर्ट में नहीं है, और हम अनुमान नहीं लगा रहे।
जो लौटा नहीं, वह सवाल है कि अगला ऐसा अनुरोध आए तो कंपनी क्या करेगी। वाइल का "ज़रूरी निष्कर्ष" इसी का जवाब है, और वह अभी नहीं आया।
दिल्ली से देखने पर तीन बातें
तीन बातें।
पहली, बीएपीएस भारत का सबसे बड़ा प्रवासी हिंदू संगठन-नेटवर्कों में से है; अबू धाबी, न्यू जर्सी, लंदन के उसके मंदिर भारत की सरकारी कूटनीति के कार्यक्रमों का हिस्सा रहे हैं। पेरिस का उद्घाटन उसी शृंखला में था, प्रधानमंत्री के वीडियो के साथ। उस शृंखला में पहली बार मेज़बान देश की सरकार का पूरा राजनीतिक वर्ग एक स्वर में आपत्ति कर रहा है।
दूसरी, विदेश मंत्रालय का "संगठनों के बीच" वाला वाक्य ही भारत की स्थिति है: कोई राजनयिक नोट नहीं, कोई तलबी नहीं।
तीसरी, प्रवासी भारतीयों के लिए फ़्रांस के इस हफ़्ते के बयान एक पैमाना हैं: सार्वजनिक संस्थान में आगंतुक की धार्मिक शर्त और कर्मचारी का अधिकार टकराएँ तो फ़्रांस क्या चुनता है। जवाब हर पार्टी ने दिया।
जो सवाल खुले हैं
पेरिस नगर की जाँच का नतीजा। संचालक कंपनी में यह फ़ैसला किसने और किस स्तर पर लिया कि शर्त मानी जाए। हड़ताल में कितने लोग थे और महिलाओं को किन पदों से हटाया गया। और क्या दल का अनुरोध लिखित था।
इनमें से किसी का जवाब मंगलवार शाम तक सार्वजनिक नहीं था। जो सार्वजनिक है, वह इतना है कि एक दिन पेरिस का सबसे देखा जाने वाला स्मारक बंद रहा, और उसके संचालक ने कहा कि ग़लती उसकी थी।
स्रोतफ़्रांस 24, हड़ताल और बयान, 7 सितंबर 2026, सीएनएन, संचालक और बीएपीएस के बयान, यूरोन्यूज़, यूनियन प्रतिनिधि का बयान, विदेश मंत्रालय की ब्रीफ़िंग, 8 सितंबर 2026, बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर, पेरिस, संकलन, फ़्रांस-अंफ़ो, एसईटीई अध्यक्ष एरियल वाइल का साक्षात्कार, 8 सितंबर 2026, फ़्रांस-अंफ़ो, हड़ताल, यूनियन और एसईटीई के बयान, 7 सितंबर 2026, फ़्रांस-अंफ़ो, डियान डावोइन और एसईटीई के शब्द, 7 सितंबर 2026, ला देर्निएर अर (बेल्जियम), पेरिस नगर की दो जाँचें और मेयर के मंगलवार के शब्द, 8 सितंबर 2026, फ़्रांस 24 (फ़्रेंच), टावर के फिर खुलने की रिपोर्ट, 8 सितंबर 2026, लावनीर (बेल्जियम), एएफ़पी की रिपोर्ट: शनिवार की सीन नौका-यात्रा, 8 सितंबर 2026, एसोसिएटेड प्रेस (एबीसी न्यूज़ पर), बीएपीएस का दूसरा बयान, 8 सितंबर 2026, गल्फ़ न्यूज़, सीन नौका-यात्रा की संख्या, 8 सितंबर 2026, अल जज़ीरा, टावर के फिर खुलने की रिपोर्ट, 8 सितंबर 2026, अल जज़ीरा, बीएपीएस पर व्याख्या: साधुओं के ब्रह्मचर्य के नियम, 8 सितंबर 2026, यूरोन्यूज़, फिर खुलने की रिपोर्ट और यूनियन का पूरा बयान, 8 सितंबर 2026, आउटलुक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के पूरे शब्द और बीएपीएस का पूरा बयान, 8 सितंबर 2026, द वीक, विदेश मंत्रालय की ब्रीफ़िंग, 8 सितंबर 2026, इंडिया टीवी, विदेश मंत्रालय की ब्रीफ़िंग, 8 सितंबर 2026, स्नेलैक (फ़्रांस का मनोरंजन-स्थल संघ), एसईटीई की विज्ञप्ति: स्वामित्व और क़ानूनी रूप, ल जुर्नाल दु ग्रां पारी, एरियल वाइल का एसईटीई अध्यक्ष चुना जाना, 25 जून 2026, एरियल वाइल, संकलन: पद और पृष्ठभूमि, संडे ट्रिब्यून (दक्षिण अफ़्रीका, IOL), महोत्सव का क्रम और संख्याएँ, 7 सितंबर 2026, द पायनियर, मंदिर का विवरण और 1970 का ओर्ली वृत्तांत, हिंदूइज़्म टुडे, 1970 का ले बूर्जे वृत्तांत, 6 दिसंबर 2024, आर्ट शारपांतिए (वास्तुकार), निर्माण शुरू होने की सूचना, कनेक्सियन फ़्रांस, मंदिर की योजना और वित्तपोषण, बीएपीएस मंदिर पेरिस की उत्सव-वेबसाइट, 'फ़ेस्टिवल ऑफ़ कल्चर' की तारीख़ें