जिन टैंकरों से दुनिया का कारोबार बंद है, वे आलंग में कट रहे हैं: भारत के क़ानून में 'प्रतिबंधित जहाज़' नाम की कोई श्रेणी नहीं है
अमेरिका ने जनवरी में आइसलैंड के दक्षिण में एक रूसी झंडे वाला टैंकर पकड़ा, अगस्त में उसे दुबई की एक कंपनी को बेच दिया, और वह भावनगर ज़िले के आलंग तट पर कटने आ गया। क्लार्कसन्स रिसर्च के मुताबिक़ 2026 में अब तक 26 प्रतिबंधित जहाज़ कटने के लिए बिके हैं, जिनमें 22 टैंकर हैं।

जनवरी में, आइसलैंड के दक्षिण के पानी में, अमेरिकी तटरक्षक और सैन्य विशेष बलों ने एक टैंकर पर चढ़कर उसे क़ब्ज़े में ले लिया। जहाज़ का नाम एरा था, झंडा रूस का, और उसका पीछा अटलांटिक के आर-पार हफ़्तों चला था। रॉयटर्स की लीसा बर्टलीन ने 10 अगस्त को लिखा कि वेनेज़ुएला के तेल निर्यात रोकने के लिए कैरिबियन में लगाई गई अमेरिकी घेराबंदी से यह जहाज़ एक बार निकल चुका था। उसी महीने कैरिबियन सागर में एक और रूसी झंडे वाला टैंकर पकड़ा गया, जिसका नाम लीलियो है।
अगस्त तक अमेरिकी सरकार दोनों जहाज़ दुबई में मुख्यालय रखने वाली जीएमएस को बेच चुकी थी। क़ीमत नहीं बताई गई। दोनों अब गुजरात के भावनगर ज़िले में आलंग के तट पर हैं, कटने के लिए।
इन जहाज़ों के साथ कारोबार करना दुनिया के एक बड़े हिस्से के लिए ग़ैर-क़ानूनी है। इन्हें ख़रीदना, भारत लाना और काटना ग़ैर-क़ानूनी नहीं है। बीच का पूरा रास्ता दो दस्तावेज़ों में लिखा है: पोत पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019 और इस साल जनवरी में राजपत्र में छपे पोत पुनर्चक्रण विनियम, 2026। दोनों को शुरू से आख़िर तक पढ़ जाइए, पाबंदी शब्द एक बार नहीं आता।
क्लार्कसन्स रिसर्च के 26 जहाज़ और 58 फ़ीसदी का हिसाब
शिपिंग की पत्रिका स्प्लैश 247 में सैम चेंबर्स ने 17 अगस्त को लिखा कि क्लार्कसन्स रिसर्च के आँकड़ों के मुताबिक़ 2026 में अब तक 26 प्रतिबंधित जहाज़ कटने के लिए बिक चुके हैं, जिनका कुल वज़न 21 लाख डेडवेट टन है। इनमें 22 टैंकर हैं, 18 लाख डेडवेट टन के। यही 22 जहाज़ इस साल की कुल दर्ज टैंकर तोड़-फोड़ सौदों का 58 फ़ीसदी हैं।
58 फ़ीसदी किस चीज़ का हिस्सा है, यह ध्यान से पढ़ने लायक़ है। स्प्लैश की रिपोर्ट में इस साल कुल टैंकर तोड़-फोड़ 27 लाख डेडवेट टन बताई गई है। 27 लाख में 18 लाख का हिस्सा दो-तिहाई बैठता है, 58 फ़ीसदी नहीं। यानी 58 का आँकड़ा वज़न का नहीं, सौदों की गिनती का है। 22 को 0.58 से भाग दीजिए तो इस साल के कुल टैंकर तोड़-फोड़ सौदे क़रीब 38 निकलते हैं।
पूरी दुनिया में इस साल अब तक 64 लाख डेडवेट टन के जहाज़ कटने के लिए बिके हैं, जो पिछले साल की इसी अवधि से 14 फ़ीसदी कम है। बल्क कैरियर 21 लाख डेडवेट टन हैं, जो साल भर में 34 फ़ीसदी गिरे हैं। कंटेनर जहाज़ों की तोड़-फोड़ क़रीब 25,000 टीईयू पर है। छह पुराने भाप टरबाइन वाले एलएनजी जहाज़ भी बिके हैं।
इन दो आँकड़ों को साथ रखने पर तीसरा निकलता है। इस साल कटने के लिए बिके कुल 64 लाख डेडवेट टन में से 21 लाख डेडवेट टन प्रतिबंधित जहाज़ों का है, यानी हर तीन में से लगभग एक टन। तोड़-फोड़ का बाज़ार ऐतिहासिक रूप से सुस्त चल रहा है, और उसी सुस्त बाज़ार में पाबंदियों की मार झेल रहे जहाज़ों का हिस्सा इतना बड़ा हो गया है।
यह गिनती सौदों की है, आमद की नहीं। क्लार्कसन्स की संख्या यह नहीं बताती कि इनमें से कितने जहाज़ किस तट पर लगे। भारतीय अख़बारों और वेबसाइटों ने अगस्त के तीसरे हफ़्ते में यही 26 और 58 के आँकड़े छापे, ज़्यादातर ने स्रोत का नाम लिए बिना।
एरा और लीलियो: जनवरी की ज़ब्ती, अगस्त की बिक्री
रॉयटर्स की रिपोर्ट में दोनों जहाज़ों के पुराने नाम भी दर्ज हैं। एरा पहले मरीनेरा था, और उससे पहले बेला 1। लीलियो पहले गैलीलियो था, और उससे पहले वेरोनिका। द हिंदू ने 12 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में इसी जहाज़ को मरीनेरा नाम से लिखा, यानी बिक्री के वक़्त का नहीं, उससे पिछला नाम। एक ही पतवार के तीन नाम और दो अख़बारों में दो अलग नाम, यह अपने आप में इस कारोबार की एक पहचान है।

वाशिंगटन का कहना है कि एरा वेनेज़ुएला और ईरान, दोनों जगहों से प्रतिबंधित तेल ढो चुका है। रॉयटर्स के मुताबिक़ वेनेज़ुएला में सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका ने कुल दस तक तेल टैंकर ज़ब्त किए। जीएमएस के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अनिल शर्मा ने रॉयटर्स से कहा कि बिक्री की इजाज़त देने वाला अदालती आदेश मौजूद था, लेकिन पेच यह था कि उन्हें ठीक-ठीक पता नहीं था कि पहले इन जहाज़ों का मालिक कौन था।
यह वाक्य आगे की पूरी क़ानूनी कहानी की जड़ है, और उस पर हम लौटेंगे।
आलंग पहुँचने वाला यह अकेला मामला नहीं है। द हिंदू ने लिखा कि लॉयड्स लिस्ट ने 4 सितंबर को ख़बर दी कि डबल इन नाम का एक गैस जहाज़, जिस पर ईरानी माल ढोने के लिए अमेरिकी पाबंदी लगी थी, मालिकाना एक कवच कंपनी को हस्तांतरित होने के बाद आलंग में बीच पर लग गया। ओएफ़एसी की अपनी सूची में यह जहाज़ मौजूद है: डबल इन, आईएमओ संख्या 8917807, 1992 में बना, सान मारीनो का झंडा, ईरान से जुड़े कार्यकारी आदेश 13902 के तहत नामित। द हिंदू ने इसे बहुत बड़ा गैस वाहक लिखा है, जबकि ओएफ़एसी की फ़ाइल में इसकी श्रेणी एलपीजी टैंकर दर्ज है।
फ़रवरी में ब्लूमबर्ग के वेइलुन सून ने जीकैप्टन पर छपी रिपोर्ट में लिखा कि एक महीने से कम में तीन प्रतिबंधित टैंकर आलंग पहुँचे: 1993 में बना सुएज़मैक्स वुडचिप, 27 साल पुराना ग्लोबल स्टार और 29 साल पुराना अफ़्रामैक्स बोधि। उसी रिपोर्ट में दर्ज है कि 2025 में आलंग को रिकॉर्ड 15 अमेरिकी प्रतिबंधित जहाज़ मिले, जिनकी अनुमानित बिक्री क़ीमत 11 करोड़ डॉलर से ज़्यादा थी, और दुनिया भर में ऐसे 963 डार्क फ़्लीट टैंकर हैं जिनकी औसत उम्र 21 साल है।
द हिंदू ने लिखा कि अमेरिका ने हज़ार से ज़्यादा जहाज़ों पर पाबंदी लगाई है। ओएफ़एसी की जो फ़ाइल 13 सितंबर को उतारी गई, उसमें कुल 19,389 प्रविष्टियाँ हैं और उनमें 1,540 जहाज़ हैं। इनमें 441 कच्चे तेल के टैंकर हैं, 83 एलपीजी टैंकर और 20 एलएनजी वाहक। कार्यक्रमवार देखें तो सबसे ज़्यादा 324 जहाज़ ईरान के कार्यकारी आदेश 13902 के तहत हैं और 243 रूस के 14024 के तहत।
मंज़ूरी की कतार: राष्ट्रीय प्राधिकरण, सक्षम प्राधिकारी और पंद्रह दिन की चुप्पी
पोत पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019 संसद का 2019 का 49वाँ अधिनियम है। इसकी धारा 3 के तहत केंद्र सरकार भारत सरकार में संयुक्त सचिव से नीचे के दर्जे के नहीं, एक अधिकारी को राष्ट्रीय प्राधिकरण नामित करती है, जो देश में पोत पुनर्चक्रण की सारी गतिविधियों का प्रशासन, पर्यवेक्षण और निगरानी करता है। धारा 4 के तहत सक्षम प्राधिकारी नामित होता है, जो अपने भौगोलिक इलाक़े में काम देखता है।
राष्ट्रीय प्राधिकरण का काम पोत परिवहन महानिदेशालय के पास है, जो अब समुद्रीय प्रशासन महानिदेशालय के नाम से चलता है। इस वक़्त इसके महानिदेशक श्याम जगन्नाथन हैं। विभाग के अपने परिचय पन्ने पर वैधानिक शक्तियाँ आज भी व्यापारिक पोत परिवहन अधिनियम, 1958 की धारा 7 के तहत पोत परिवहन महानिदेशक में निहित बताई गई हैं, यानी दफ़्तर का नाम बदला है और वैधानिक पद का नाम पुराना ही दर्ज है। आलंग के लिए सक्षम प्राधिकारी गुजरात मैरिटाइम बोर्ड है। द हिंदू ने इस महानिदेशालय का नाम अंग्रेज़ी में डायरेक्टर जनरल ऑफ़ मैरिटाइम अफ़ेयर्स लिखा है, जबकि विभाग की अपनी वेबसाइट पर वह मैरिटाइम एडमिनिस्ट्रेशन है।
क़ानून की कतार इस तरह बनती है। धारा 16 के तहत जहाज़ का मालिक राष्ट्रीय प्राधिकरण से पुनर्चक्रण के लिए तैयार होने का प्रमाणपत्र माँगता है, जो सर्वेक्षण के बाद जारी होता है और तीन महीने चलता है। धारा 17 के तहत कोई भी जहाज़ बिना पोत पुनर्चक्रण योजना के नहीं कटेगा, और उस योजना को सक्षम प्राधिकारी मंज़ूर करेगा। धारा 18 कहती है कि सक्षम प्राधिकारी की लिखित इजाज़त के बिना कोई जहाज़ नहीं कटेगा। धारा 20 के तहत यह इजाज़त जहाज़ के भौतिक निरीक्षण के बाद ही मिलेगी।
इसी क़ानून में दो उपधाराएँ हैं जो चुप्पी को मंज़ूरी में बदल देती हैं। धारा 17 की उपधारा 3 कहती है कि अगर सक्षम प्राधिकारी योजना जमा होने के पंद्रह दिन के भीतर अपना फ़ैसला नहीं बताता, तो योजना मंज़ूर मानी जाएगी। धारा 20 की उपधारा 2 कहती है कि अगर आवेदन मिलने के पंद्रह दिन के भीतर इजाज़त पर फ़ैसला नहीं बताया गया, तो इजाज़त दी गई मानी जाएगी। विनियम, 2026 में इसका एक नाम भी है, मौन स्वीकृति, और विनियम 20 के तहत सक्षम प्राधिकारी को ऐसे हर मामले की रिपोर्ट ऊपर भेजनी होती है।
सज़ा का ढाँचा धारा 31 से 35 में है। बिना मंज़ूर योजना के या बिना इजाज़त के जहाज़ काटने पर एक साल तक की क़ैद या दस लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों। जिस उल्लंघन के लिए अलग से सज़ा तय नहीं है, उस पर धारा 32 के तहत तीन महीने तक की क़ैद या दो लाख रुपये तक जुर्माना, और उल्लंघन जारी रहने पर हर दिन पाँच हज़ार रुपये और। धारा 35 के मुताबिक़ इस अधिनियम के अपराध ग़ैर-संज्ञेय, ज़मानती और शमनीय हैं।
पूरे अधिनियम में प्रतिबंध, पाबंदी, संयुक्त राष्ट्र या किसी विदेशी नामित सूची का ज़िक्र कहीं नहीं है। द हिंदू ने लिखा कि आधिकारिक तौर पर भारत सरकार अमेरिकी और यूरोपीय पाबंदियों को नहीं मानती, सिर्फ़ संयुक्त राष्ट्र की मानती है। क़ानून का पाठ उसी रुख़ के अनुरूप है।
पाँचवीं अनुसूची: मालिकाना का सबूत और भार-मुक्ति प्रमाणपत्र
पोत पुनर्चक्रण विनियम, 2026 सा.का.नि. 19(अ) के रूप में 2 जनवरी 2026 को बने और सोमवार, 12 जनवरी को राजपत्र में छपते ही लागू हो गए। इन्हें राष्ट्रीय प्राधिकरण ने अधिनियम की धारा 43 के तहत, केंद्र सरकार की पूर्व मंज़ूरी से बनाया। इनकी पाँचवीं अनुसूची का शीर्षक ही पूरी प्रक्रिया है: लंगर, पुनर्चक्रण, बीचिंग, प्रदूषण-मुक्ति, गैस-मुक्ति और कटाई की इजाज़त पाने की प्रक्रिया।
भारत के किसी भी बंदरगाह पर पहुँचने से कम से कम तीन दिन पहले जहाज़ को समुद्री बचाव समन्वय केंद्र को बताना होता है कि वह किस यार्ड जा रहा है, उस इलाक़े के निर्देशांक क्या हैं, लंगर पर कितने दिन रुकेगा, और यह घोषणा करनी होती है कि यह उसकी आख़िरी यात्रा है और वह कटने जा रहा है। यही सूचना तीन दिन पहले राज्य मैरिटाइम बोर्ड और सक्षम प्राधिकारी को भी जानी होती है।
पहुँचने पर काग़ज़ों का पुलिंदा बंदरगाह प्राधिकरण, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सीमा शुल्क विभाग के पास जाता है, और विनियम कहते हैं कि इस जाँच में दस्तावेज़ों की असलियत भी देखी जाएगी। सूची में जहाज़ का नाम, आईएमओ संख्या, झंडा, कॉल साइन, कप्तान का नाम और उसकी राष्ट्रीयता, चालक दल की सूची, समर्थक दस्तावेज़ों के साथ जीआरटी या एनआरटी या एलडीटी, पिछले बंदरगाह की निकासी, और मालिकाना का सबूत शामिल है।
इसी सूची में एक शर्त और है। जहाज़ मालिक को लिखित रूप में यह वचन देना होता है कि लंगर डालने की तारीख़ से सात दिन के भीतर वह भार-मुक्ति प्रमाणपत्र जमा करेगा, और विनियम साफ़ कहते हैं कि प्रवेश या बीचिंग की इजाज़त राज्य मैरिटाइम बोर्ड या बंदरगाह प्राधिकरण उसी प्रमाणपत्र के आने पर आगे बढ़ाएगा।

पाँचवीं अनुसूची का पैराग्राफ़ 2(5) सबसे छोटा और सबसे तीखा है। जमा किया गया कोई भी दस्तावेज़ अविश्वसनीय लगे, या नक़ली निकले, या उसमें कोई तात्विक तथ्य छिपाया गया हो, तो जहाज़ मालिक को लंगर डालने, प्रवेश करने, बीच पर लगने और कटाई शुरू करने, इनमें से किसी की इजाज़त नहीं मिलेगी।
जहाज़ पर चढ़ने के वक़्त मूल रूप में जो काग़ज़ माँगे जाते हैं, उनमें पंजीयन प्रमाणपत्र, तीसरे पक्ष की देनदारी और तेल प्रदूषण क्षति का वैध बीमा प्रमाणपत्र, कप्तान, अधिकारियों और नाविकों के योग्यता प्रमाणपत्र, ख़तरनाक सामग्री की सूची का प्रमाणपत्र, गैसों की मौजूदा सूची, रेडियोधर्मी सामग्री की सूची, ऊँचे समुद्र में गिट्टी पानी बदलने की पुष्टि, और वर्गीकरण संस्था का नाम शामिल हैं।
यहीं पकड़ बनती है। भारतीय क़ानून प्रतिबंधित जहाज़ के लिए कोई अलग शर्त नहीं रखता, पर वह मालिकाने और बीमे के काग़ज़ माँगता है, और प्रतिबंधित जहाज़ ठीक इन्हीं दो जगहों पर सबसे कमज़ोर होता है। पाबंदी लगते ही सुरक्षा और क्षतिपूर्ति क्लब का बीमा टूट जाता है, और मालिकाना कवच कंपनियों की कतार में चला जाता है। जीएमएस के प्रमुख ने रॉयटर्स से जो कहा था कि उन्हें पिछले मालिक का ठीक पता नहीं, वह इसी काग़ज़ की बात है।
भुगतान रुपये में होता है, बैंक इस कतार में नहीं आता
अमेरिकी पाबंदी जहाज़ मालिक और उससे जुड़ी कंपनियों को मुख्यधारा की वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर देती है। द हिंदू ने लिखा कि भारतीय बैंक और वित्तीय कंपनियाँ ऐसी इकाइयों से जुड़ा कोई लेन-देन नहीं लेतीं।
अख़बार ने उद्योग के सूत्रों के हवाले से यह भी लिखा कि कड़ी में आम तौर पर एक भारतीय कंपनी होती है, इसलिए पुनर्चक्रण का तात्कालिक लेन-देन रुपये में निपटता है, और पैसा आगे हॉन्गकॉन्ग डॉलर, डिजिटल मुद्राओं और रुपया-रूबल विनिमय जैसे रास्तों से प्रतिबंधित कंपनियों तक पहुँच सकता है। यह किसी दस्तावेज़ से निकली बात नहीं है, न ही किसी नियामक ने इसकी पुष्टि की है। एनजीओ शिपब्रेकिंग प्लेटफ़ॉर्म ने 2 फ़रवरी 2026 को जारी अपनी सालाना सूची में इससे मिलती-जुलती बात लिखी थी, कि कुछ जहाज़ नक़दी, क्रिप्टो और विदेशी मुद्राओं के सहारे भारतीय यार्डों तक पहुँचाए जाते हैं। दोनों ब्योरे एक-दूसरे से मेल खाते हैं और दोनों के पीछे कोई सार्वजनिक दस्तावेज़ नहीं है।
पाबंदी लगाने वाले देश इस कारोबार के ख़िलाफ़ नहीं हैं। द हिंदू को अमेरिकी वित्त विभाग के एक अधिकारी ने ईमेल में लिखा कि प्रतिबंधित जहाज़ों को पानी से हटाने के ज़िम्मेदार रास्ते निकालने की उनकी प्रतिबद्धता है और वे हर मामले को अलग से देखते हैं। यूरोपीय संघ भी अपने प्रतिबंधित रूसी तेल ढोने वाले जहाज़ों को तोड़ने की इजाज़त मामला-दर-मामला देने पर विचार कर रहा है।
इजाज़तों की गिनती एक महीने में बदली है। स्प्लैश 247 ने 17 अगस्त को लिखा कि जीएमएस को अमेरिकी वित्त विभाग से चार प्रतिबंधित जहाज़ों को तोड़ने के लाइसेंस मिले हैं। द हिंदू ने 12 सितंबर को यह संख्या छह बताई, और यह भी कि पहली मंज़ूरी में सात महीने लगे और बाद वाली जल्दी आईं। अनिल शर्मा के मुताबिक़ अमेरिकी सरकार ऐसी मंज़ूरी तब देती है जब पैसा उसी काम में न जा रहा हो जिस पर उसे आपत्ति है, मसलन पाबंदी से पहले किसी ग़ैर-प्रतिबंधित बैंक से लिया गया क़र्ज़ चुकाने में या चालक दल की बक़ाया तनख़्वाह देने में। जीएमएस का कहना है कि काम लायक़ लाइसेंस व्यवस्था बने तो साल में सौ से ज़्यादा डार्क फ़्लीट जहाज़ हटाए जा सकते हैं।
एरा और लीलियो किस दाम पर बिके, यह सार्वजनिक नहीं है। रॉयटर्स ने लिखा कि क़ीमत नहीं बताई गई।
आलंग में मज़दूरों की गिनती पर जीएमबी के दो जवाब
गुजरात मैरिटाइम बोर्ड की वेबसाइट पर आलंग-सोसिया के पन्ने पर लिखा है कि यार्ड क़रीब 15,000 लोगों को सीधा और क़रीब पाँच लाख को अप्रत्यक्ष रोज़गार देता है।
उसी बोर्ड की मास्टर प्लान रिपोर्ट में दूसरा आँकड़ा है। आलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग यार्ड की क्षमता वृद्धि और विस्तार की अंतिम मास्टर प्लान रिपोर्ट, संस्करण 02, 23 फ़रवरी 2026, के अनुलग्नक I में चटगाँव, तुर्की के आलियागा और आलंग की तुलना है। आलंग के ख़ाने में मज़दूरों की संख्या इस तरह दर्ज है: चरम पर 40,000 तक, वर्तमान में क़रीब 3,500। दोनों दस्तावेज़ एक ही बोर्ड के हैं और कोई दूसरे का हवाला नहीं देता।

इसी अनुलग्नक में लिखा है कि आलंग के मज़दूर उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा से आए प्रवासी हैं। आगे की योजना में बोर्ड 2027 तक 90 लाख एलडीटी की क्षमता पर 22,000 से 24,000 मज़दूर और 2038 तक 1.13 करोड़ एलडीटी पर 28,000 से 29,000 मज़दूर आँकता है, और पूरे विस्तार के बाद का आँकड़ा 53,339 रखता है।
दुर्घटनाओं के ख़ाने में जो लिखा है, वह इस पूरी रिपोर्ट की सबसे साफ़ लाइन है। 2009 से 2018 के लिए चटगाँव के सामने 249 या उससे ज़्यादा मौतें और 1,028 या उससे ज़्यादा गंभीर चोटें दर्ज हैं। आलियागा के सामने कई मौतें लिखा है। आलंग के सामने लिखा है: कोई हालिया सरकारी गिनती नहीं, सुरक्षा की पुरानी चिंताएँ दर्ज हैं। सक्षम प्राधिकारी की अपनी परामर्श रिपोर्ट यह दर्ज कर रही है कि उसके पास अपने यार्ड की मौजूदा दुर्घटना गिनती नहीं है।
रिपोर्ट का कर्तव्य फिर भी क़ानून में है। विनियम, 2026 के विनियम 21 के तहत पुनर्चक्रणकर्ता को किसी भी दुर्घटना, आग, विस्फोट या प्रदूषण की लिखित सूचना 24 घंटे के भीतर सक्षम प्राधिकारी को देनी होती है, और किसी मज़दूर की मौत पर पुलिस और मृतक के नज़दीकी रिश्तेदार को भी बताना होता है। विनियम 20 के तहत दुर्घटनाएँ, व्यावसायिक बीमारियाँ और हर 31 जनवरी तक साल भर में कटे जहाज़ों की सूची भेजनी होती है।
मज़दूरी की कोई दर अधिनियम, नियम या विनियम में तय नहीं है, और मास्टर प्लान में भी नहीं है। जो तय है वह मुआवज़ा है। विनियम, 2026 की दूसरी अनुसूची के मुताबिक़ पुनर्चक्रण के दौरान गंभीर शारीरिक चोट पर तीन लाख रुपये, आंशिक अपंगता पर छह लाख, पूर्ण अपंगता पर बारह लाख, मौत पर दस लाख, और एस्बेस्टॉसिस या कैंसर जैसी व्यावसायिक बीमारी पर दस लाख रुपये का बीमा कवर रखना अनिवार्य है।
काम के घंटे पहली अनुसूची में हैं। कटाई सिर्फ़ प्राकृतिक रोशनी में होगी, पश्चिमी तट पर मार्च से अक्टूबर तक सुबह सात से शाम सात बजे तक और नवंबर से फ़रवरी तक सुबह सात से शाम छह बजे तक। साप्ताहिक और दैनिक घंटे, विश्राम, ओवरटाइम और उसकी मज़दूरी कारख़ाना अधिनियम, 1948 के अध्याय छह के हिसाब से चलेंगे। लदान, उतराई और सफ़ाई रात नौ बजे तक हो सकती है। मास्टर प्लान में दर्ज है कि आलंग में भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी का 35 बिस्तरों का मुफ़्त अस्पताल है, जिसके विशेषज्ञ डॉक्टर हफ़्ते में कम से कम एक बार आते हैं और स्थायी रूप से तैनात नहीं हैं, जबकि यह अस्पताल पूरी औद्योगिक पट्टी को देखता है जहाँ मज़दूरों की संख्या 30,000 तक जाती है।
प्लॉट की संख्या हर दस्तावेज़ में बदल जाती है
जीएमबी की वेबसाइट कहती है कि दस किलोमीटर लंबे तट पर 153 प्लॉट विकसित हैं। बोर्ड की मास्टर प्लान रिपोर्ट अपने मुख्य पाठ में 150 प्लॉट बताती है, जिनमें 128 इस्तेमाल में हैं। उसी रिपोर्ट का अनुलग्नक I क़रीब 153 प्लॉट और 124 सक्रिय बताता है।
समुद्रीय प्रशासन महानिदेशालय का पोत पुनर्चक्रण यार्ड डेटाबेस, जो 4 अगस्त 2026 का है, 53 यार्ड गिनाता है। हर एक के सामने हॉन्गकॉन्ग कन्वेंशन की अनुपालन स्थिति एचकेसी लिस्टेड दर्ज है, प्रमाणपत्र संख्या और वैधता की तारीख़ के साथ, और ज़्यादातर के लिए मान्यता प्राप्त संगठन जापान की निप्पॉन कैजी क्योकाई है।
व्यापार पत्रिकाओं में जो बात दोहराई जाती है कि आलंग के सौ से ज़्यादा प्लॉट के पास अनुपालन प्रमाणपत्र हैं, वह इस राष्ट्रीय डेटाबेस की 53 से मेल नहीं खाती। वर्गीकरण संस्था का अनुपालन विवरण और महानिदेशालय के डेटाबेस की प्रविष्टि, दोनों अलग चीज़ें हैं, और सार्वजनिक रूप से कोई दस्तावेज़ इन दो गिनतियों का मिलान नहीं करता।
कटे जहाज़ का लोहा और 35 लाख टन का आँकड़ा
हॉन्गकॉन्ग कन्वेंशन 26 जून 2025 से लागू है। उसका अनुच्छेद 17 लागू होने की तीन शर्तें एक साथ रखता है: कम से कम पंद्रह देश उस पर हस्ताक्षर या अनुसमर्थन करें, उन देशों के व्यापारिक बेड़े मिलकर दुनिया के सकल टन भार का कम से कम 40 फ़ीसदी हों, और पिछले दस साल में उनकी सालाना पुनर्चक्रण क्षमता मिलाकर उन्हीं देशों के व्यापारिक टन भार का कम से कम तीन फ़ीसदी हो। तीनों पूरी होने के 24 महीने बाद कन्वेंशन लागू होता है।
कटा हुआ लोहा यार्ड से बाहर कहाँ जाता है, इसका नक़्शा मास्टर प्लान के भूमि-उपयोग अध्याय में है। बोर्ड ने इसके लिए एक अलग क्षेत्र रखा है, औद्योगिक-बी यानी आईज़ेड6, जिसका नाम ही स्क्रैप बाज़ार है। इसमें स्क्रैप का भंडारण और जहाज़ से निकले सामान की बिक्री होती है, और आलंग से त्रापज के बीच की मुख्य सड़क पर चलने वाला सारा व्यापार इसी क्षेत्र में गिना गया है। यार्ड से लगी सहायक गतिविधियों में रिपोर्ट ऑक्सीजन और एसिटिलीन संयंत्र, गलाने की इकाइयाँ और इस्पात रोलिंग मिलें गिनाती है।
कितना लोहा निकलता है, इस पर भी बोर्ड के दो दस्तावेज़ दो आँकड़े देते हैं। वेबसाइट कहती है कि आलंग हर साल क़रीब 45 लाख टन दोबारा रोल होने लायक़ इस्पात देता है। मास्टर प्लान कहती है कि यार्ड सालाना 35 लाख टन तक ऐसा इस्पात देता है। मास्टर प्लान में 45 लाख का आँकड़ा भी है, पर वह एलडीटी में सालाना क्षमता का है, उत्पादन का नहीं, और एलडीटी और इस्पात का टन एक इकाई नहीं हैं। पत्र सूचना कार्यालय की अगस्त 2026 की सामग्री 35 लाख टन के साथ जाती है, यानी वेबसाइट के ख़िलाफ़ और मास्टर प्लान के साथ।
बाक़ी संख्याएँ बोर्ड के दस्तावेज़ में एक जगह हैं। आलंग में अब तक 8,681 जहाज़ बीच पर लगाए जा चुके हैं, जिनसे कुल 6.9 करोड़ एलडीटी निकला। मौजूदा सालाना क्षमता 45 लाख एलडीटी है, जिसे 2027 तक 90 लाख और 2038 के बाद 1.13 करोड़ एलडीटी तक ले जाने की योजना है। वित्त वर्ष 2023-24 में यार्ड ने 125 जहाज़ काटे, जो मास्टर प्लान के मुताबिक़ सोलह साल का निचला आँकड़ा था।
आलंग की प्लेट किस दाम पर बिकती है, और यह इस्पात भारत के कुल उत्पादन का कितना हिस्सा है, यह इन दस्तावेज़ों में से किसी में दर्ज नहीं है। अधिनियम, नियम, विनियम, यार्ड डेटाबेस और मास्टर प्लान, पाँचों में एलडीटी, प्लॉट, मंज़ूरी और मुआवज़े की संख्याएँ हैं और बाज़ार भाव एक बार नहीं।
स्रोतपोत पुनर्चक्रण अधिनियम, 2019 (2019 का 49) का पूरा पाठ, सोलह पन्ने: धारा 3 और 4 में दोनों प्राधिकरण, धारा 16, 17, 18 और 20 में मंज़ूरी की प्रक्रिया, धारा 31 से 35 में सज़ा, पोत पुनर्चक्रण विनियम, 2026, सा.का.नि. 19(अ), राष्ट्रीय प्राधिकरण, 2 जनवरी 2026, भारत का राजपत्र असाधारण भाग II खंड 3 उप-खंड (i), संख्या 19, 12 जनवरी 2026, पोत पुनर्चक्रण नियम, 2021, सा.का.नि. 20, पत्तन पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, 26 फ़रवरी 2021, राजपत्र में 27 फ़रवरी 2021, गुजरात मैरिटाइम बोर्ड, आलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग यार्ड की क्षमता वृद्धि और विस्तार की मास्टर प्लानिंग, अंतिम मास्टर प्लान रिपोर्ट, संस्करण 02, 23 फ़रवरी 2026: अनुलग्नक I में चटगाँव, आलियागा और आलंग की तुलना, समुद्रीय प्रशासन महानिदेशालय, पोत पुनर्चक्रण यार्ड डेटाबेस, 4 अगस्त 2026, 53 पन्ने: हर यार्ड की एचकेसी अनुपालन स्थिति, प्रमाणपत्र संख्या और मान्यता प्राप्त संगठन, जहाज़ों के सुरक्षित और पर्यावरण के लिहाज़ से ठीक पुनर्चक्रण पर हॉन्गकॉन्ग अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन, 2009, का पाठ: अनुच्छेद 17 में लागू होने की तीन शर्तें, गुजरात मैरिटाइम बोर्ड की वेबसाइट, आलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग यार्ड का पन्ना, 13 सितंबर 2026 को पढ़ा गया: प्लॉट, रोज़गार, ज्वार और 1982 से 2019 तक के आँकड़े, समुद्रीय प्रशासन महानिदेशालय, इंजीनियरिंग विंग का पोत पुनर्चक्रण पन्ना और दस्तावेज़ सूची, 13 सितंबर 2026 को पढ़ा गया, समुद्रीय प्रशासन महानिदेशालय का परिचय पन्ना: विभाग की भूमिका, और व्यापारिक पोत परिवहन अधिनियम, 1958 की धारा 7 के तहत महानिदेशक की वैधानिक शक्तियाँ, अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी परिसंपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफ़एसी) की विशेष रूप से नामित व्यक्तियों की सूची, 13 सितंबर 2026 को उतारी गई फ़ाइल: 19,389 प्रविष्टियाँ, जिनमें 1,540 जहाज़, द हिंदू, एम. कल्याणरामन, 12 सितंबर 2026, रात 10:19: प्रतिबंधित जहाज़ आलंग कैसे पहुँच रहे हैं, जीएमएस के अनिल शर्मा और अमेरिकी वित्त विभाग के अधिकारी के बयान, स्प्लैश 247, सैम चेंबर्स, 17 अगस्त 2026: क्लार्कसन्स रिसर्च के हवाले से 26 प्रतिबंधित जहाज़, 22 टैंकर और इस साल की कुल तोड़-फोड़ के आँकड़े, मरीनलिंक पर रॉयटर्स, लीसा बर्टलीन, 10 अगस्त 2026: अमेरिका ने ज़ब्त किए दो टैंकर कबाड़ के लिए बेचे, एरा और लीलियो के पुराने नाम और ज़ब्ती की जगहें, जीकैप्टन पर ब्लूमबर्ग, वेइलुन सून, 13 फ़रवरी 2026: एक महीने में आलंग पहुँचे तीन प्रतिबंधित टैंकर, और 2025 में आए 15 जहाज़ों का आँकड़ा, एनजीओ शिपब्रेकिंग प्लेटफ़ॉर्म, 2 फ़रवरी 2026: 2025 में दुनिया भर में तोड़े गए जहाज़ों की सालाना सूची, दक्षिण एशिया में मौतों और घायलों की गिनती