रूस के कच्चे तेल से वडीनार में बना 1.20 लाख टन पेट्रोल अगस्त में रूस लौटा
सेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक़ अगस्त में रूस ने 1.72 लाख टन पेट्रोलियम उत्पाद मँगाए, जो उसका अब तक का सबसे बड़ा आयात है। सत्तर फ़ीसदी भारत से आया, और पूरा का पूरा गुजरात में नायरा एनर्जी की वडीनार रिफ़ाइनरी से। पीटीआई ने यह रिपोर्ट रविवार, 13 सितंबर को दी।

अगस्त में रूस ने 1.72 लाख टन पेट्रोलियम उत्पाद बाहर से मँगाए। यह उसका अब तक का सबसे बड़ा ऐसा आयात है, और उसमें 70 फ़ीसदी भारत से आया: 1.20 लाख टन पेट्रोल, क़ीमत 7.8 करोड़ यूरो, यानी 11 सितंबर की यूरोपीय केंद्रीय बैंक की संदर्भ दर पर क़रीब 864 करोड़ रुपये। पूरी की पूरी यह खेप गुजरात के वडीनार में नायरा एनर्जी की रिफ़ाइनरी से लदी।
उस पेट्रोल का कच्चा माल भी रूसी था। सेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की जिस मासिक रिपोर्ट से ये आँकड़े आए हैं, उसमें दर्ज है कि वडीनार ने 2026 के पहले आठ महीनों में जो भी कच्चा तेल लिया, वह सारा रूस से आया। 2025 में यह हिस्सा 81 फ़ीसदी था। पीटीआई ने रिपोर्ट के आधार पर यह ख़बर रविवार, 13 सितंबर को जारी की।
भारत के पाठक के लिए इसकी अहमियत यहाँ है। देश की दूसरी सबसे बड़ी निजी रिफ़ाइनरी, जिसके 6,750 से ज़्यादा पंप सड़कों पर हैं, अब एक ऐसे व्यापार के बीच में खड़ी है जिस पर यूरोपीय संघ की पाबंदी है और ब्रिटेन की भी, जबकि भारत सरकार की दर्ज स्थिति यह है कि वह किसी एकतरफ़ा प्रतिबंध को नहीं मानती।
1.72 लाख टन, और उससे पहले महीने का औसत पाँच हज़ार टन से कम
रूस पेट्रोलियम उत्पाद ख़रीदता नहीं रहा है, बेचता रहा है। सीआरईए की गणना में 2023 से 2025 के बीच रूस का समुद्री रास्ते से उत्पाद आयात हर महीने औसतन पाँच हज़ार टन से नीचे रहा, और उन 36 महीनों में से तेरह महीने ऐसे थे जब एक भी खेप किसी रूसी बंदरगाह पर नहीं उतरी।
अगस्त 2026 में वह आँकड़ा 1.72 लाख टन पर पहुँचा, कुल क़ीमत 11.4 करोड़ यूरो यानी क़रीब 1,263 करोड़ रुपये। रिपोर्ट इसे दो तरह से नापती है: पूर्ण हमले के बाद के किसी भी महीने के मुक़ाबले सात गुना से ज़्यादा, और पूरे 2025 में हुए आयात के मुक़ाबले तीन गुना।
दोनों दावों का जोड़ अपनी जगह मिलता है। सात गुना का मतलब है कि पिछला मासिक रिकॉर्ड 24,600 टन से नीचे था। तीन गुना का मतलब है कि 2025 का पूरे साल का आयात क़रीब 57,000 टन रहा होगा, जो महीने के हिसाब से 4,800 टन बैठता है और रिपोर्ट के अपने ही "पाँच हज़ार टन से कम" वाले वाक्य से मेल खाता है। जो रिपोर्ट में नहीं है, वह महीने-दर-महीने की पूरी तालिका है। पिछला रिकॉर्ड किस महीने का था और ठीक कितना था, सीआरईए ने नहीं लिखा, इसलिए वह संख्या निकाली हुई है, दर्ज की हुई नहीं।
जो चीज़ इस आयात को बाक़ी से अलग करती है, वह उसकी बनावट है। अगस्त में रूस के कुल उत्पाद आयात का 74 फ़ीसदी पेट्रोल था। 2023 से 2025 के बीच यह हिस्सा छह फ़ीसदी था। रूस के पेट्रोल आयात का 94 फ़ीसदी अकेले भारत से आया।
बाक़ी दो आपूर्तिकर्ता छोटे हैं और उनकी दिशा उलटी है। दक्षिण कोरिया ने उल्सान बंदरगाह से 18,000 टन भेजा, ज़्यादातर गैसऑयल, जो जुलाई के पिछले रिकॉर्ड से 41 फ़ीसदी ऊपर और तीन साल के मासिक औसत का आठ गुना है; यह माल मगादान और मोखोवाया जैसे प्रशांत तट के बंदरगाहों पर उतरता है, जहाँ दूसरे रास्ते से पहुँचना मुश्किल है। मिस्र ने अल-दख़ीला से 25,000 टन डीज़ल भेजा, क़ीमत 1.6 करोड़ यूरो यानी क़रीब 177 करोड़ रुपये, जो सेंट पीटर्सबर्ग में उतरा।
यूक्रेन के ड्रोन और रूस की बंद पड़ी रिफ़ाइनरियाँ
इस पूरे उलटफेर की वजह रूस की अपनी रिफ़ाइनरियों की हालत है। ब्लूमबर्ग ने 3 अगस्त को ईए एनालिटिक्स के आँकड़ों के हवाले से बताया कि जुलाई में रूसी रिफ़ाइनरियों ने रोज़ाना अनुमानित 36 लाख बैरल कच्चा तेल पकाया, जो मई 2002 के बाद का सबसे निचला स्तर है और मौसमी सामान्य से लगभग एक-तिहाई कम। 2020 से 2025 तक साल के इसी हिस्से में यह आँकड़ा 53 से 56 लाख बैरल रोज़ाना के बीच रहता था।
गिनती अलग-अलग एजेंसियों की अलग है, पर दिशा एक है। ब्लूमबर्ग की गणना में जुलाई में अठारह रूसी रिफ़ाइनरियाँ निशाना बनीं, जिनमें ओम्स्क भी थी, देश की सबसे बड़ी और यूक्रेन की सरहद से 2,500 किलोमीटर से ज़्यादा दूर; पिछला मासिक रिकॉर्ड मई का था, सत्रह। तेल ढाँचे पर कुल हमले जुलाई में तीस रहे, मई के बत्तीस के बाद दूसरे नंबर पर। वोर्टेक्सा ने जुलाई और अगस्त, दोनों महीनों को जोड़कर रिफ़ाइनरियों पर बत्तीस हमले गिने, यानी औसतन हर दूसरे दिन एक। एसोसिएटेड प्रेस की गिनती मार्च से शुरू होती है और रिफ़ाइनरी, डिपो, टर्मिनल तथा दूसरे ऊर्जा ठिकानों को मिलाकर पचास से ज़्यादा हमलों तक पहुँचती है; काला सागर के तुआप्से पर चार बार।
बंदरगाहों पर असर सीआरईए के आँकड़ों में दिखता है। तुआप्से, जो पूर्ण हमले से पहले रूस का चौथा सबसे बड़ा उत्पाद निर्यात बंदरगाह था, लगातार तीसरे महीने एक भी खेप नहीं लाद सका। नोवोरोसिस्क पर कच्चे तेल की लदान अगस्त में पिछले महीने से 58 फ़ीसदी गिरी और नौ दिन लगातार रुकी रही, जो पूर्ण हमले के बाद उस बंदरगाह पर दर्ज सबसे लंबा ठहराव है।
रूस की सरकार ने इसका जवाब निर्यात बंद करके दिया। 30 जुलाई को उसने पेट्रोल और डीज़ल के निर्यात पर रोक 1 अगस्त 2026 से 31 जनवरी 2027 तक बढ़ा दी; विमान ईंधन पर रोक एक अलग आदेश से लगी है, जो नवंबर में ख़त्म होती है। छूटें रखी गईं: सितंबर से रिफ़ाइनरियाँ, खुदरा विक्रेता नहीं, डीज़ल और जहाज़ी ईंधन बाहर भेज सकती हैं, और अंतर-सरकारी समझौतों तथा मानवीय खेपों पर रोक लागू नहीं होती। 27 जुलाई तक रूस में पेट्रोल का राष्ट्रीय औसत भाव 77.89 रूबल प्रति लीटर था, साल की शुरुआत से 19 फ़ीसदी ऊपर। कई इलाक़ों में और रूस के क़ब्ज़े वाले क्राइमिया में राशनिंग चल रही है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जून के आख़िर में मंत्रियों की बैठक में कमी को स्वीकार किया और उसे "गंभीर नहीं" तथा "अस्थायी" बताया।

वडीनार से बेलोए मोरे तक, मिस्र के पास जहाज़ बदलकर
वडीनार कच्छ की खाड़ी पर है और रोज़ चार लाख बैरल कच्चा तेल पका सकता है, यानी साल में दो करोड़ टन। यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी एक-जगह रिफ़ाइनरी है।
वहाँ से रूस पहुँचने का रास्ता सीधा नहीं है। सीआरईए के मुताबिक़ हर खेप मिस्र के दमियात लाइटरिंग ज़ोन में एक जहाज़ से दूसरे जहाज़ में उतारी गई, और उसके बाद बेलोए मोरे पर जाकर खाली हुई। बेलोए मोरे रूसी में श्वेत सागर को कहते हैं; वह रूस के आर्कटिक तट पर है, बारेंट्स सागर के नीचे। कच्छ की खाड़ी से वहाँ तक जाने के लिए जहाज़ को स्वेज़ नहर, भूमध्य सागर, जिब्राल्टर, अटलांटिक और नॉर्वे का समुद्र पार करना पड़ता है।

इस सफ़र में कितना वक़्त लगता है, इसका एक नाप मौजूद है। ब्लूमबर्ग ने केप्लर के जहाज़-ट्रैकिंग आँकड़ों के हवाले से बताया कि रूसी झंडे वाले टैंकर 'साइक्लोन' ने मध्य जून में वडीनार से 42,000 टन पेट्रोल लादा और मिस्र के तट के पास छाया-बेड़े के जहाज़ों की एक कड़ी का इस्तेमाल किया; पहली खेप 5 अगस्त, बुधवार को एक रूसी बंदरगाह पर उतरी। लदान से उतराई तक क़रीब सात हफ़्ते।
जहाज़ों का ब्योरा भी रिपोर्ट में है। छह जहाज़ इस काम में लगे, हर एक प्रतिबंधित सूची में, और उनमें से चार पिछले दो बरस में किसी न किसी वक़्त झूठे झंडे के नीचे चल चुके हैं।
एक और जहाज़ का काग़ज़ जुलाई में सामने आया था। रॉयटर्स ने 2 जुलाई को एक टैंकर का चालान देखा, जिसमें कैमरून के झंडे वाला 'अग्नि' वडीनार से पेट्रोल लेकर 20 जून को फ़ुजैरा के लिए रवाना हुआ दर्ज था। एलएसईजी के जहाज़-आँकड़े उसी दिन बता रहे थे कि जहाज़ फ़ुजैरा से आगे निकल चुका है और स्वेज़ में उत्तर की तरफ़ बढ़ रहा है। काग़ज़ पर लिखी मंज़िल और असल रास्ता अलग थे।
जहाज़ मिस्र के पास ही क्यों बदले जाते हैं, इसका कारण सीआरईए ने नहीं लिखा।
650 यूरो प्रति टन, और ढुलाई का पूरा ख़र्च रूस के खाते में
क़ीमत को टन पर बाँटें तो आँकड़ा साफ़ बैठता है। 1.20 लाख टन पर 7.8 करोड़ यूरो का मतलब है 650 यूरो प्रति टन, यानी 11 सितंबर की संदर्भ दर पर क़रीब 72,000 रुपये प्रति टन।
इसे लीटर में समझना हो तो एक साफ़-साफ़ अनुमान लगाया जा सकता है। बीपी की रूपांतरण तालिका में एक टन पेट्रोल 8.35 बैरल के बराबर है, और एक बैरल में 158.99 लीटर। उस हिसाब से एक टन में क़रीब 1,328 लीटर आते हैं और यह क़ीमत 54 रुपये प्रति लीटर के आसपास बैठती है। यह जहाज़ पर चढ़ते वक़्त का दाम है, दोनों देशों के कर, ढुलाई, बीमा और मुनाफ़ा इसमें नहीं।
उसी 8.35 के हिसाब से 1.20 लाख टन क़रीब दस लाख बैरल होता है।
ढुलाई का ख़र्च रूस के खाते में जाता है, और सीआरईए की रिपोर्ट इसी पर ज़ोर देती है: पश्चिमी भारत से श्वेत सागर तक का भाड़ा, मिस्र के पास जहाज़ बदलने की क़वायद और बीमे की क़ीमत, तीनों ऐसे ख़र्च हैं जो रूस को उठाने ही नहीं पड़ते अगर उसकी अपनी रिफ़ाइनरियाँ चल रही होतीं।
पैमाना समझने के लिए एक तुलना काम की है। अगस्त में रूस के समुद्री उत्पाद निर्यात से होने वाली आमदनी जुलाई के मुक़ाबले 32 फ़ीसदी गिरकर 7.8 करोड़ यूरो रोज़ाना पर आ गई, जो पूर्ण हमले के बाद का सबसे निचला स्तर है। वडीनार से पूरे महीने में जितना पेट्रोल ख़रीदा गया, उसकी क़ीमत उसी एक दिन की कुल निर्यात आमदनी के बराबर है। दूसरी तरफ़ दाम रूस के पक्ष में रहे: अगस्त में यूराल्स का औसत भाव 23 फ़ीसदी चढ़कर 69.90 डॉलर प्रति बैरल हुआ, जो जी-7 और यूरोपीय संघ की 44.10 डॉलर की मूल्य सीमा से ऊपर है।
भारत की अगस्त की अपनी खपत के आगे यह खेप
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल की अगस्त 2026 की फ़्लैश रिपोर्ट में भारत की अपनी पेट्रोल खपत 3,824 हज़ार टन दर्ज है, पिछले अगस्त के 3,544 हज़ार टन से 7.88 फ़ीसदी ऊपर। रूस भेजा गया 1.20 लाख टन उसका 3.1 फ़ीसदी है, यानी देश में क़रीब एक दिन का पेट्रोल।
पीपीएसी की आयात-निर्यात तालिका में इस साल भारत से पेट्रोल का निर्यात अप्रैल में 887, मई में 910, जून में 974 और जुलाई में 1,283 हज़ार टन रहा। जून से जुलाई में यह 32 फ़ीसदी उछला, और वही हफ़्ते हैं जिनमें वडीनार से खेपें चलीं। सभी उत्पादों को मिलाकर जुलाई का निर्यात 54.50 लाख टन था, जिसका लगभग हर चौथा हिस्सा पेट्रोल का।
आगे वह तालिका चुप है। वह उत्पादवार है, देशवार नहीं, इसलिए उसमें कहीं नहीं लिखा कि कौन सा माल किस देश गया। आँकड़े अस्थायी हैं, जून और जुलाई के लिए डीजीसीआईएस के आँकड़ों को अनुपात में बाँटकर रखा गया है, और अगस्त का महीना उसमें अभी डाला ही नहीं गया। भारत के अपने सरकारी आँकड़े इस खेप की न पुष्टि करते हैं, न खंडन।
यूरोपीय संघ की पाबंदी का पाठ और उसकी हद
"यूरोपीय संघ की पाबंदी" एक ढीला वाक्यांश है। असल दस्तावेज़ यूरोपीय संघ की परिषद का क्रियान्वयन विनियम (ईयू) 2025/1476 है, जो 18 जुलाई 2025 को अपनाया गया और 19 जुलाई को आधिकारिक जर्नल में छपा। उसकी धारा 2 कहती है कि विनियम प्रकाशन के दिन से लागू होगा, यानी कोई समेटने की मोहलत नहीं दी गई।

उस विनियम के अनुलग्नक में प्रविष्टि संख्या 639 नायरा एनर्जी लिमिटेड की है। पता मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स का दर्ज है, पंजीकरण की तारीख़ 11 सितंबर 1989, और कॉर्पोरेट पहचान संख्या भी। कारण वाले ख़ाने में लिखा है कि यह भारत में स्थापित इकाई है, वडीनार में एक अहम रिफ़ाइनरी चलाती है, वह रिफ़ाइनरी रूसी सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ़्त के 49 फ़ीसदी स्वामित्व में है और रूसी कच्चे तेल की बड़ी शोधक है; और यह कि ऊर्जा क्षेत्र रूसी सरकार को बड़ी आमदनी देता है। कंपनी और सीआरईए, दोनों हिस्सेदारी 49.13 फ़ीसदी बताते हैं; यूरोपीय संघ के पाठ में वही आँकड़ा गोल करके 49 लिखा है।
यह प्रविष्टि विनियम (ईयू) संख्या 269/2014 के अनुलग्नक एक में जुड़ती है। उस विनियम की धारा 2 दो काम करती है: सूचीबद्ध इकाई की सारी पूँजी और आर्थिक संसाधन जमा कर दिए जाते हैं, और किसी को भी उसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पूँजी या संसाधन उपलब्ध कराने की मनाही है।
पर उसकी असली सीमा धारा 17 में है, और वही इस कहानी का क़ानूनी केंद्र है। वह विनियम पाँच जगह लागू होता है: यूरोपीय संघ के भूभाग और वायुक्षेत्र में; किसी सदस्य देश के अधिकार क्षेत्र वाले जहाज़ या विमान पर; किसी भी सदस्य देश के नागरिक पर, चाहे वह कहीं भी हो; किसी सदस्य देश के क़ानून के तहत बनी किसी कंपनी या संस्था पर; और किसी भी कंपनी पर उस कारोबार के लिए जो पूरा या आंशिक रूप से संघ के भीतर हुआ हो।
भारत में पंजीकृत एक कंपनी, भारतीय बंदरगाह पर लदान, मिस्र के समुद्र में जहाज़ बदलना, रूसी बंदरगाह पर उतराई और एक रूसी ख़रीदार — यह पूरी कड़ी इन पाँचों में से किसी में नहीं आती, जब तक बीच में कोई यूरोपीय बैंक, बीमा कंपनी, जहाज़ या व्यापारी न हो। पाबंदी वहाँ काटती है जहाँ यूरोपीय संघ का अधिकार चलता है।
उसी संघ की दूसरी पाबंदी का हाल भी रिपोर्ट में है। रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के आयात पर यूरोपीय संघ की रोक 21 जनवरी 2026 से लागू है। इसके बावजूद अगस्त में रूसी कच्चा तेल पकाने वाली रिफ़ाइनरियों से चली बीस खेपें यूरोपीय बंदरगाहों पर उतरीं, जुलाई की अठारह से दो ज़्यादा: नौ तुर्किये से, सात भारत से और चार जॉर्जिया से। इटली और साइप्रस ने पाँच-पाँच लीं। ब्रिटेन ने नायरा को 15 अक्टूबर 2025 को अपनी सूची में डाला और स्विट्ज़रलैंड ने 12 अगस्त 2025 को।
भारत के अपने क़ायदे में इस सौदे पर रोक नहीं
भारत सरकार की स्थिति इस पर पुरानी और दर्ज है। यूरोपीय संघ का अठारहवाँ पाबंदी पैकेज जिस दिन आया, उसी दिन, शुक्रवार 18 जुलाई 2025 को, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों पर कहा कि भारत किसी भी एकतरफ़ा प्रतिबंध को नहीं मानता। आकाशवाणी समाचार ने अगली सुबह उनके शब्द इस तरह दर्ज किए: भारत एक ज़िम्मेदार पक्ष है और अपनी क़ानूनी बाध्यताओं के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है; नागरिकों की बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने के लिए ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि ज़िम्मेदारी है; और ऊर्जा व्यापार में दोहरे मानदंड नहीं होने चाहिए।
निर्यात के नियम की तरफ़ से भी कोई दीवार नहीं है। पेट्रोल भारत से बाहर भेजने पर कोई प्रतिबंध नहीं है; जो चीज़ बदलती रहती है, वह उस पर लगने वाला निर्यात शुल्क है। यह शुल्क जुलाई 2022 में लगा था, दो साल बाद हटा, और मार्च 2026 में तब दोबारा लगा जब ईरान पर अमेरिकी-इज़रायली हमले के बाद तेल के दाम उछले। सरकार इसे हर पंद्रह दिन पर अंतरराष्ट्रीय भावों के हिसाब से बदलती है। 15 अगस्त 2026 से पेट्रोल के निर्यात पर यह शुल्क 3.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया; उसी आदेश में डीज़ल 25.50 से 24 रुपये और विमान ईंधन 22 से 19.50 रुपये प्रति लीटर हुआ।
जो खेपें जून और जुलाई में वडीनार से चलीं, वे उस दौर की हैं जब पेट्रोल पर यह शुल्क शून्य नहीं था। भारतीय क़ायदा इस व्यापार से जिस एक जगह टकराता है, वह कर का पन्ना है, रोक का नहीं।
रोक जहाँ पड़ी, वह बाज़ार की तरफ़ से पड़ी। रॉयटर्स की जुलाई वाली रिपोर्ट में दर्ज है कि यूरोपीय पाबंदी के बाद दूसरे आपूर्तिकर्ताओं के पीछे हट जाने से वडीनार सिर्फ़ रूसी तेल पका रहा है। और यूरोपीय संघ की 21 जनवरी 2026 से लागू दूसरी रोक के बाद उस तेल से बना माल यूरोप के बंदरगाहों पर नहीं उतर सकता। जो दरवाज़े खुले रह जाते हैं, वे पाबंदी न मानने वाले बाज़ारों के हैं, और अगस्त में उनमें से एक ख़रीदार ख़ुद रूस था।
बिक्री सीधी हुई या बिचौलियों के रास्ते: दो अलग जवाब
सीआरईए की रिपोर्ट का वाक्य साफ़ है: वडीनार से लदा सारा पेट्रोल नायरा एनर्जी ने बेचा और रोसनेफ़्त ने ख़रीदा। रिपोर्ट इसी से अपना सबसे तीखा वाक्य निकालती है, कि रूस एक ऐसी रिफ़ाइनरी को पैसा दे रहा है जिसमें उसका अपना हिस्सा है, अपना ही कच्चा तेल पकवाने के लिए, और फिर उस ईंधन को आधी दुनिया घुमाकर वापस मँगा रहा है।
दो महीने पहले की रिपोर्टिंग इससे अलग बात कहती है। रॉयटर्स ने 2 जुलाई को मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो सूत्रों के हवाले से लिखा कि नायरा का बनाया पेट्रोल रूस को बिचौलियों के ज़रिये बेचा गया। उसी ख़बर में यह भी है कि यूरोपीय पाबंदी के बाद ग्राहकों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ भुगतान उलझ जाने की वजह से नायरा कच्चा तेल मँगाने और ईंधन भेजने, दोनों के लिए व्यापारियों पर निर्भर है। नायरा ने रॉयटर्स के ईमेल का जवाब नहीं दिया।
उसी दिन पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पत्रकारों से कहा कि भारतीय कंपनियाँ रूस को ईंधन नहीं बेच रहीं, पर यह "संभव" है कि रूस ने भारतीय मूल का ईंधन व्यापारियों से ख़रीदा हो। सौदे की कड़ी में नायरा और रोसनेफ़्त के बीच कोई तीसरा था या नहीं, इसका जवाब दोनों रिपोर्टों में अलग है, और यहाँ दोनों दर्ज हैं।
मात्रा पर भी दो आँकड़े आमने-सामने हैं। वोर्टेक्सा की रिपोर्ट के हवाले से आईएएनएस ने 30 अगस्त को लिखा कि अगस्त में रूस का समुद्री पेट्रोल आयात रिकॉर्ड 4.70 लाख टन रहा। सीआरईए के आँकड़ों से वही संख्या क़रीब 1.27 लाख टन निकलती है, यानी 1.72 लाख का 74 फ़ीसदी। फ़र्क़ लगभग चौगुना है। दोनों जहाज़-ट्रैकिंग पर टिकी हैं, और दोनों में से कोई यह नहीं बताती कि उसने ठीक-ठीक क्या गिना; इतना ज़रूर है कि आईएएनएस की ख़बर महीना ख़त्म होने से एक दिन पहले छपी थी।
भारत वाला हिस्सा दोनों में मिल जाता है। आईएएनएस ने दो महीनों में भारत से क़रीब दस लाख बैरल बताया; सीआरईए का 1.20 लाख टन बीपी की तालिका पर दस लाख बैरल ही बैठता है, फ़र्क़ सिर्फ़ इतना कि एक गिनती लदान की है और दूसरी उतराई की, और जून-जुलाई में लदा माल अगस्त में उतरा। तुर्किये पर भी यही बात लागू होती है: आईएएनएस उसे अगस्त का आपूर्तिकर्ता बताता है, सीआरईए कहता है कि तुर्किये की पहली खेपें सितंबर में पहुँचीं, मेर्सिन से अगस्त में चली 98,000 टन की तीन खेपें, क़रीब 753 करोड़ रुपये की, जिनमें से एक लुकऑयल ने ख़रीदी। आईएएनएस मोरक्को का नाम भी लेता है; सीआरईए की सूची में मोरक्को है ही नहीं।
नायरा और रोसनेफ़्त के अपने बयान
नायरा एनर्जी ने सूचीबद्ध होने के तीन दिन बाद, सोमवार 21 जुलाई 2025 को, एक बयान जारी किया था। उसमें कंपनी ने यूरोपीय संघ के क़दम को "अधिकार का अनुचित विस्तार" कहा, "जो अंतरराष्ट्रीय क़ानून और भारत की संप्रभुता, दोनों को अनदेखा करता है"। कंपनी ने कहा कि पाबंदी का आधार "निराधार दावों पर टिका" है, ख़ासकर तब जब यूरोपीय संघ के कई सदस्य देश दूसरे रास्तों से रूसी ऊर्जा लेते रहते हैं और साथ ही "एक भारतीय संपत्ति को कोसकर और उस पर पाबंदी लगाकर ऊँचा नैतिक धरातल" ले लेते हैं।
उसी बयान में कंपनी ने अपने आँकड़े रखे: वडीनार की सालाना क्षमता दो करोड़ टन, 6,750 से ज़्यादा पेट्रोल पंप, भारत की कुल शोधन क्षमता का क़रीब आठ फ़ीसदी, ईंधन खुदरा नेटवर्क का सात फ़ीसदी, देश की पॉलीप्रोपिलीन क्षमता का आठ फ़ीसदी, और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 55,000 से ज़्यादा लोगों का रोज़गार। कंपनी ने 70,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के दीर्घकालिक निवेश की योजना दोहराई, अगस्त 2017 के बाद 14,000 करोड़ रुपये लगा चुकने की बात कही, और जोड़ा कि वह पूरी तरह भारतीय क़ानून और कर अधिकार क्षेत्र में चलती है तथा इस अवधि में 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा कर दे चुकी है। ये सब कंपनी के अपने बताए आँकड़े हैं।
रोसनेफ़्त ने एक दिन पहले, 20 जुलाई 2025 को, अपना बयान दिया। उसने यूरोपीय क़दम को ग़ैर-क़ानूनी और "अंतरराष्ट्रीय क़ानून तथा एक संप्रभु राष्ट्र के आर्थिक हितों का खुला उल्लंघन" कहा। उसी बयान में रोसनेफ़्त ने यह भी कहा कि वह नायरा की नियंत्रक हिस्सेदार नहीं है और कंपनी को एक स्वतंत्र निदेशक मंडल चलाता है। सीआरईए का वाक्य, कि रूस "एक ऐसी रिफ़ाइनरी को पैसा दे रहा है जिसमें उसका अपना हिस्सा है", और रोसनेफ़्त का यह दावा एक ही मालिकाने को दो तरह पढ़ते हैं।
मालिकाना ख़ुद बँटा हुआ है। रोसनेफ़्त सिंगापुर के पास 49.13 फ़ीसदी हिस्सा है और केसानी एंटरप्राइज़ेज़ के पास उतना ही, जो रूस की यूनाइटेड कैपिटल पार्टनर्स और मारेतेरा ग्रुप होल्डिंग की बनाई एक विशेष इकाई है। बाक़ी थोड़े से शेयर उन छोटे निवेशकों के पास हैं जिन्होंने एस्सार के ज़माने में ख़रीदे थे।
अगस्त की खेपों पर नायरा ने अब तक सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है।
स्रोतसेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए): रूस के जीवाश्म ईंधन निर्यात और प्रतिबंधों का मासिक विश्लेषण, अगस्त 2026 — आयात की मात्रा, क़ीमत, जहाज़, बंदरगाह और वडीनार का ब्योरा, पीटीआई, 13 सितंबर 2026: सीआरईए की रिपोर्ट पर समाचार एजेंसी की ख़बर, यूराल्स का भाव और रूस के निर्यात राजस्व के आँकड़ों समेत, यूरोपीय संघ की परिषद का क्रियान्वयन विनियम (ईयू) 2025/1476, 18 जुलाई 2025, आधिकारिक जर्नल में 19 जुलाई 2025 — अनुलग्नक में प्रविष्टि 639: नायरा एनर्जी लिमिटेड, पता, सीआईएन और सूचीबद्ध करने का कारण, यूरोपीय संघ की परिषद का विनियम (ईयू) संख्या 269/2014, समेकित पाठ: धारा 2 (संपत्ति की रोक) और धारा 17 (लागू होने का दायरा), पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय: तेल और गैस पर फ़्लैश रिपोर्ट, अगस्त 2026 — पेट्रोल, डीज़ल, एटीएफ़ और एलपीजी की मासिक खपत, पीपीएसी: पेट्रोलियम आयात-निर्यात तालिका, वित्त वर्ष 2026-27, स्रोत तेल कंपनियाँ और डीजीसीआईएस — उत्पादवार मासिक निर्यात, 13 सितंबर 2026 को पढ़ी गई, आकाशवाणी समाचार, 19 जुलाई 2025: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का एकतरफ़ा प्रतिबंधों पर बयान, रॉयटर्स, बिज़नेस स्टैंडर्ड में 15 अगस्त 2026: पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 3.50 रुपये से घटाकर शून्य, डीज़ल 25.5 से 24 रुपये, एटीएफ़ 22 से 19.5 रुपये, रॉयटर्स, 2 जुलाई 2026: नायरा का पेट्रोल बिचौलियों के ज़रिये रूस को बिका, हरदीप सिंह पुरी का बयान, और 'अग्नि' जहाज़ का चालान, अल जज़ीरा, 3 जुलाई 2026: नायरा का इतिहास, हिस्सेदारी, एसोसिएटेड प्रेस की हमलों की गिनती और पुतिन का बयान, द मॉस्को टाइम्स, 12 अगस्त 2026, ब्लूमबर्ग और केप्लर के हवाले से: 'साइक्लोन' जहाज़ ने मध्य जून में वडीनार से 42,000 टन पेट्रोल लादा, पहली खेप 5 अगस्त को उतरी, द मॉस्को टाइम्स, 3 अगस्त 2026, ब्लूमबर्ग और ईए एनालिटिक्स के हवाले से: जुलाई में रूसी रिफ़ाइनिंग 36 लाख बैरल रोज़ाना, मई 2002 के बाद सबसे कम, द मॉस्को टाइम्स, 30 जुलाई 2026: रूस ने पेट्रोल और डीज़ल के निर्यात पर रोक 1 अगस्त 2026 से 31 जनवरी 2027 तक बढ़ाई, और उसमें रखी गई छूटें, आईएएनएस, 30 अगस्त 2026, वोर्टेक्सा की रिपोर्ट के हवाले से: रूस का अगस्त में समुद्री पेट्रोल आयात 4.70 लाख टन, और दो महीनों में भारत से क़रीब दस लाख बैरल, एनर्जी वॉच, 21 जुलाई 2025: नायरा एनर्जी के बयान का पूरा ब्योरा, कंपनी के अपने आँकड़े, और रोसनेफ़्त का 20 जुलाई का जवाब, यूरोपीय केंद्रीय बैंक की दैनिक संदर्भ दरें: 11 सितंबर 2026 को एक यूरो = 110.7675 रुपये, बीपी स्टैटिस्टिकल रिव्यू की अनुमानित रूपांतरण तालिका: एक टन पेट्रोल में 8.35 बैरल