आम बहस आज से, ब्राज़ील के लूला पहला भाषण देंगे; परंपरा 1955 से है, पर 1983 और 1984 में टूट चुकी है
न्यूयॉर्क में मंगलवार सुबह नौ बजे, यानी भारत में आज शाम साढ़े छह बजे, संयुक्त राष्ट्र महासभा के इक्यासीवें सत्र की सालाना आम बहस खुलती है। यह रिपोर्ट न्यूयॉर्क के समयानुसार रात एक बजे के बाद, बहस खुलने से क़रीब आठ घंटे पहले, दोबारा जाँचकर फ़ाइल की गई है।

फ़ाइल होने के वक़्त तक कुछ नहीं हुआ था
यह रिपोर्ट न्यूयॉर्क में रात के एक बजकर सत्रह मिनट पर दोबारा जाँचकर फ़ाइल हो रही है। वहाँ 22 सितंबर को अभी सवा घंटे से कुछ ऊपर बीता है। भारत में उस वक़्त सुबह दस बजकर सैंतालीस मिनट हो रहे थे। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इक्यासीवें सत्र की सालाना आम बहस उसी दिन खुलती है, मंगलवार सुबह नौ बजे, न्यूयॉर्क के जनरल असेंबली हॉल में। भारत में उस वक़्त शाम के साढ़े छह बज रहे होंगे। दोनों घड़ियों के बीच अब भी क़रीब आठ घंटे बचे हैं। इस रिपोर्ट में जो दर्ज है, वह उसी खिड़की से पहले का हाल है। कोई भाषण अभी पढ़ा नहीं गया। कोई पोडियम अभी छुआ नहीं गया। हॉल अभी ख़ाली है।
संयुक्त राष्ट्र की अपनी वेबसाइट gadebate.un.org बहस के वक्ताओं की सूची लगातार अपडेट करती है। उसका एक हिस्सा अंग्रेज़ी में यही कहता है: आगे कौन बोलेगा। अभी उसके नीचे पंद्रह नाम दर्ज हैं। पहला नाम महासचिव एंतोनियो गुतारेस का है। वह संगठन के काम पर अपनी सालाना रिपोर्ट पेश करेंगे। दूसरा नाम इक्यासीवें सत्र के अध्यक्ष डॉ. ख़लीलुर रहमान का है, जो बहस खोलने का भाषण देंगे। तीसरा नाम ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा का है। चौथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का। इसके बाद जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय, तुर्की के रेचेप तैयप एर्दोआन, किर्गिज़स्तान के राष्ट्रपति सद्यर झापारोव और क़तर के अमीर शेख़ तमीम बिन हमद अल थानी की बारी है। फिर लिथुआनिया, पेरू, चिली, फ़्रांस, फ़िनलैंड, लक्ज़मबर्ग और अंगोला के प्रमुख आते हैं। सूची यहीं ख़त्म होती है। यह पूरी सूची तभी पढ़ी गई जब यह रिपोर्ट लिखी जा रही थी। यानी जब यह लिखा गया, इनमें से किसी ने मुँह नहीं खोला था।
महासभा के अपने पन्नों के मुताबिक़ बहस 22 से 26 सितंबर तक चलेगी। फिर एक बैठक 28 सितंबर को अलग से होगी। यह तारीख़ें दो जगह दर्ज हैं: संयुक्त राष्ट्र की GA81 मीटिंग्स पेज पर, और प्रतिनिधियों के लिए जारी सूचना-पत्र A/INF/81/4 में। इस दस्तावेज़ का पूरा नाम है "उच्चस्तरीय बैठकों और महासभा के इक्यासीवें सत्र की आम बहस के प्रबंधों पर सूचना-पत्र।" यही काग़ज़ इस साल की बहस का विषय भी तय करता है। विषय है: "भरोसे की बहाली, बदलाव का प्रबंधन: एक संयुक्त राष्ट्र जो सबके लिए काम करे।" यह पंक्ति gadebate.un.org के मुखपृष्ठ पर दर्ज है। सत्र ख़ुद 8 सितंबर 2026 को ही खुल चुका है, दस्तावेज़ A/INF/81/1 के हवाले से।
ब्राज़ील पहले बोलता है, 1955 से, दो अपवादों के साथ
ब्राज़ील पहले क्यों बोलता है? इसका जवाब संयुक्त राष्ट्र की अपनी आम बहस वेबसाइट के "अक्सर पूछे जाने वाले सवाल" पन्ने पर दर्ज है। वहाँ लिखा है कि महासभा के दसवें सत्र से, यानी 1955 से, ब्राज़ील पहले बोलता आया है। उसका प्रतिनिधित्व किसी भी स्तर पर क्यों न हो, फ़र्क़ नहीं पड़ता। इस परंपरा में सिर्फ़ दो बार बदलाव हुआ: 1983 और 1984 में। बाक़ी हर साल, इकहत्तर बरस से, यही क्रम रहा है। यह किसी लिखित नियम की धारा नहीं है। संयुक्त राष्ट्र अपनी वेबसाइट पर इसे "established practice" कहता है। यह एक स्थापित परिपाटी है, किसी गिनती वाले नियम का हवाला नहीं।
मेज़बान देश अमेरिका दूसरे नंबर पर बोलता है। यहाँ भी प्रतिनिधित्व के स्तर की परवाह नहीं की जाती, कुछ अपवादों के साथ। बाक़ी सारे सदस्य देशों का क्रम तीन बातों से तय होता है: प्रतिनिधित्व का स्तर यानी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मंत्री; देश की अपनी प्राथमिकता; और भौगोलिक संतुलन। सिर्फ़ तीन ग़ैर-सदस्य पक्षों को आम बहस में बोलने की इजाज़त है: होली सी यानी वैटिकन, फ़लस्तीन राज्य, और यूरोपीय संघ। इनकी बारी भी उसी नियम से तय होती है। अलग सूची नहीं बनती। यह पूरी व्यवस्था हर साल दोहराई जाती है, बिना किसी नई मंज़ूरी के।
आज सुबह जो पंद्रह नाम "आगे कौन बोलेगा" में दर्ज हैं, वे इसी क्रम की एक ताज़ा तस्वीर हैं। पहले महासचिव, फिर अध्यक्ष का अपना भाषण, फिर ब्राज़ील, फिर अमेरिका। इसके बाद प्रतिनिधित्व-स्तर से तय बाक़ी देश आते हैं। लातिन पोस्ट ने 21 सितंबर को लिखा कि आज सुबह के सत्र में जॉर्डन, तुर्की, किर्गिज़स्तान, क़तर, लिथुआनिया, पेरू, चिली और फ़्रांस के नेता भी बोलेंगे। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र की अपनी सूची से पूरी तरह मेल खाती है।

सूची कैसे बनती है, अध्यक्ष की भूमिका क्या है
इक्यासीवें सत्र के अध्यक्ष डॉ. ख़लीलुर रहमान बांग्लादेश के विदेश मंत्री हैं। उन्हें 2 जून 2026 को इस पद के लिए चुना गया। यह महासभा अध्यक्ष के अपने कार्यालय की वेबसाइट पर दर्ज है। उनका कामकाजी जीवन तीस बरस से ज़्यादा संयुक्त राष्ट्र के भीतर बीता है, न्यूयॉर्क में बांग्लादेश के मिशन से लेकर सचिवालय और व्यापार व विकास सम्मेलन यानी अंकटाड तक। बहस कब खुलेगी, यह हर साल बदलता है। यह महासभा के अपने नियम-प्रक्रिया की धारा 1 के तहत तय है। इसी सत्र के लिए सचिवालय ने अलग से एक नोट जारी किया, A/INF/81/1, जिसमें तारीख़ें दर्ज हैं। बहस ख़ुद कितने दिन चल सकती है, यह नियम-प्रक्रिया और प्रस्ताव A/RES/57/301 से तय होता है: बिना रुके नौ कामकाजी दिन तक। व्यवहार में छह दिन में ही सारे वक्ता निपट जाते हैं। इस बार का कार्यक्रम भी छह दिन का है। हर प्रतिनिधिमंडल के पास औपचारिक परिचय-पत्र भी होने चाहिए। नियम-प्रक्रिया की धारा 27 के मुताबिक़ यह परिचय-पत्र राष्ट्राध्यक्ष, सरकार-प्रमुख या विदेश मंत्री के दस्तख़त से महासचिव को भेजे जाते हैं। धारा 25 के तहत हर देश पाँच प्रतिनिधि और पाँच वैकल्पिक प्रतिनिधि तक नामित कर सकता है, साथ में जितने सलाहकार चाहे उतने। यह ब्यौरा भी उसी डेलिगेट्स हैंडबुक में दर्ज है। यह पूरा डिजिटल तंत्र महासभा एवं सम्मेलन प्रबंधन विभाग चलाता है, जिसने बाक़ी कई सेवाएं भी उसी एक पोर्टल के भीतर समेट दी हैं।
विषय कैसे चुना जाता है, इसका भी एक तय रास्ता है। अगले अध्यक्ष चुने जाने के फ़ौरन बाद, अगस्त की शुरुआत तक, वह हर सदस्य देश को एक चिट्ठी भेजते हैं। उसी चिट्ठी में अगले साल की बहस का विषय दर्ज होता है। यह जानकारी भी संयुक्त राष्ट्र के अपने सवाल-जवाब पन्ने पर लिखी है। बोलने की सूची में नाम कैसे चढ़ता है? हर स्थायी मिशन का एक फ़ोकल पॉइंट होता है। वह महासभा की "ई-स्पीकर्स" प्रणाली में, ई-डेलीगेट पोर्टल के ज़रिए, अपने देश का नाम दर्ज कराता है। यह पोर्टल पासवर्ड से सुरक्षित है। किसे इसमें पहुँच मिले, यह हर मिशन का अपना "एक्सेस एडमिनिस्ट्रेटर" तय करता है, न कि संयुक्त राष्ट्र सचिवालय। सूची पर सवाल-जवाब के लिए एक नाम तय है: महासभा मामलों की शाखा के कार्लोस गालिंदो। उनका ईमेल संयुक्त राष्ट्र के अपने डेलिगेट्स हैंडबुक में दर्ज है। मई के अंत में महासचिव की तरफ़ से एक नोट वर्बल भेजा जाता है, जिसमें बताया जाता है कि सूची खुल चुकी है। इसके बाद हर देश अपनी बारी ख़ुद बुक कराता है। कोई केंद्रीय समिति नाम तय नहीं करती। कोई एक दफ़्तर पूरी सूची नहीं बदल सकता।

अध्यक्ष की भूमिका शुरुआत में तीन चरणों में बँटी है। पहले अध्यक्ष सभा को बुलाते हैं। फिर महासचिव संगठन के काम पर अपनी सालाना रिपोर्ट पेश करते हैं। यह तकनीकी तौर पर आम बहस का हिस्सा नहीं मानी जाती। इसके बाद अध्यक्ष ख़ुद बहस खोलने का भाषण देते हैं। तभी पहला असली वक्ता, यानी ब्राज़ील, बुलाया जाता है।
भाषण की सीमा, जवाब का हक़, बहिर्गमन का तरीक़ा
आम बहस को "बहस" कहा जाता है। पर संयुक्त राष्ट्र की अपनी परिभाषा में यह किसी संवाद या तर्क-वितर्क का नाम नहीं है। हर भाषण के लिए पंद्रह मिनट की एक सीमा है। यह सीमा स्वैच्छिक है, बाध्यकारी नहीं। बैठकें आम तौर पर सुबह नौ से दोपहर पौने तीन बजे तक चलती हैं, फिर दोपहर तीन से रात नौ बजे तक। मगर जब तक तय सारे वक्ता निपट नहीं जाते, बैठक बंद नहीं होती। इसी वजह से सुबह का सत्र अक्सर दोपहर के खाने में घुस जाता है। शाम का सत्र देर रात तक खिंच जाता है। हर वक्ता के बाद तुरंत जवाब देने का कोई प्रावधान नहीं है। कोई किसी को टोक नहीं सकता।
जवाब का अधिकार फिर भी मौजूद है। बस उसका रास्ता अलग है। अगर कोई देश किसी दूसरे के भाषण से असहमत है, तो वह पहले महासचिव को एक लिखित पत्र भेज सकता है। महासचिव वह पत्र बाक़ी सभी सदस्य देशों में बाँट देते हैं। मौखिक जवाब का भी रास्ता है, पर वह दिन ख़त्म होने के बाद ही मिलता है। हर दिन हर देश के लिए यह दो बार से ज़्यादा नहीं हो सकता: पहली बार दस मिनट, दूसरी बार सिर्फ़ पाँच मिनट। असहमति जताने का सबसे सीधा तरीक़ा शब्दों में नहीं है। कोई प्रतिनिधिमंडल, या प्रतिनिधिमंडलों का समूह, किसी भाषण के बीच एक साथ उठकर हॉल से बाहर चला जाए, तो यह भी असहमति दर्ज कराने की मान्य परिपाटी मानी जाती है। यह भी उतना औपचारिक माना जाता है जितना कोई लिखित पत्र।
आम जनता के लिए हॉल के दरवाज़े बंद रहते हैं। अंदर सिर्फ़ प्रतिनिधिमंडल, सचिवालय का स्टाफ़, मान्यता-प्राप्त मीडिया और यूएन का पास रखने वाले लोग जा सकते हैं। बाक़ी सबके लिए संयुक्त राष्ट्र अपनी वेबसाइट पर हर भाषण का सीधा प्रसारण करता है। 2009 से अब तक का पूरा रिकॉर्ड वहीं सुरक्षित है।
चुनाव से बारह दिन पहले लूला की चेतावनी
जब लूला आज बोलेंगे, तो यह भाषण किसी ख़ालीपन में नहीं आएगा। रियो टाइम्स ऑनलाइन ने 21 सितंबर को रिपोर्ट किया कि लूला ट्रंप को मंच से एक चेतावनी देने की तैयारी में हैं। चेतावनी यह कि वह ब्राज़ील के 4 अक्तूबर के चुनाव में दख़ल न दें। आज से ठीक बारह दिन बाद ब्राज़ील में पहले दौर का मतदान है। उसी रिपोर्ट के मुताबिक़ ट्रंप ने लूला के प्रतिद्वंद्वी फ़्लाविओ बोलसोनारो और उनके पिता, पूर्व राष्ट्रपति जाइर बोलसोनारो, दोनों का खुलकर समर्थन किया है। ब्राज़ील के विदेश मंत्रालय में बहुपक्षीय राजनीतिक मामलों के सचिव कार्लोस बिकाल्हो कोज़ेंदे ने उसी रिपोर्ट को बताया कि कोई द्विपक्षीय बैठक फ़िलहाल तय नहीं है। दोनों न्यूयॉर्क में आमने-सामने आ सकते हैं। बैठक की मेज़ पर नहीं।
लातिन पोस्ट ने भी 21 सितंबर को लिखा कि आज सुबह नौ बजे लूला मंच पर पहले आएँगे। ट्रंप उसके क़रीब पंद्रह मिनट बाद आएँगे। ब्राज़ील के घरेलू हालात इस मंच से सीधे जुड़े हैं। उसी हफ़्ते के एक सर्वे में फ़्लाविओ बोलसोनारो दूसरे दौर में 44 फ़ीसदी पर दिखे। यह आँकड़ा ग़लती की गुंजाइश के भीतर है। एटलस-इंटेल और ब्लूमबर्ग के साझा सर्वे में बोलसोनारो थोड़ा आगे दिखे: 47.2 बनाम 46.8। दोनों सर्वे एक ही हफ़्ते के हैं। दोनों अलग नतीजे देते हैं। यह फ़र्क़ किसी एक सर्वे की ग़लती नहीं है। बस दो अलग तरीक़ों का नतीजा है, और दोनों नतीजे यहाँ दर्ज हैं।
इस हफ़्ते की शुरुआत लूला के लिए एक दिन पहले ही हो चुकी थी। न्यूज़ इंडिया टाइम्स में छपी रॉयटर्स की 21 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक़ लूला ने सोमवार को अपने न्यूयॉर्क आवास पर एक मुलाक़ात की। यह आवास संयुक्त राष्ट्र में ब्राज़ील के मिशन का दफ़्तर भी है। उन्होंने यह मुलाक़ात न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान मामदानी से की। यह अमेरिकी महाद्वीप की वामपंथी राजनीति के दो बड़े नामों की पहली सीधी बातचीत थी। दोनों ने बढ़ती महँगाई पर बात की, यह लूला ने ख़ुद पत्रकारों को बताया। मुलाक़ात के आख़िर में दोनों ने एक-दूसरे को फ़ुटबॉल जर्सी भेंट कीं।
गुतारेस की आख़िरी आम बहस, उत्तराधिकार की दौड़ शुरू
आज की आम बहस गुतारेस के महासचिव-काल की आख़िरी आम बहस है। उनका दूसरा और आख़िरी कार्यकाल इसी साल 31 दिसंबर को ख़त्म होता है। अगले महासचिव को चुनने का काम पहले ही शुरू हो चुका है। इसका काग़ज़ी ट्रेल साफ़ है। महासभा ने 5 सितंबर 2025 को प्रस्ताव 79/327 पास किया। यह चार्टर के अनुच्छेद 97 के तहत अगले महासचिव को चुनने और नियुक्त करने का तरीक़ा तय करता है। महासभा और सुरक्षा परिषद के अध्यक्षों की साझा चिट्ठी 25 नवंबर 2025 को सदस्य देशों को भेजी गई। यह दस्तावेज़ A/80/544-S/2025/765 के तौर पर दर्ज है। यहीं से नामांकन माँगने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हुई।
अस्सीवें सत्र की अध्यक्ष आनालेना बेयरबॉक ने यह प्रक्रिया अपने सत्र के आख़िर तक संभाली, यानी 8 सितंबर 2026 तक। 4 सितंबर 2026 की अपनी चिट्ठी में, दस्तावेज़ A/80/823, उन्होंने अपने अनुभव लिखे। फिर यह ज़िम्मेदारी डॉ. ख़लीलुर रहमान को सौंप दी। पासब्लू की दमिलोला बांजो ने 20 सितंबर 2026 को लिखा कि ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशंस के उपाध्यक्ष पेद्रो अब्रामोवाय के मुताबिक़ मौजूदा उम्मीदवार एक "trap" यानी जाल में फँस चुके हैं। उनकी दलील सीधी है: उम्मीदवार अपने प्रचार में संगठन का ढाँचा और नौकरशाही घटाने की बहस को इतनी जगह दे रहे हैं कि असली सवाल पीछे छूट रहा है। असली सवाल यह कि संयुक्त राष्ट्र दुनिया की सबसे मुश्किल समस्याएँ सुलझाने लायक़ कैसे बने।
पासब्लू के अपने चुनाव-ट्रैकर पर आठ नाम दर्ज हैं: इवोन आ-बाकी, मिशेल बाशेले, मारिया फ़र्नांदा एस्पिनोसा, राफ़ाएल ग्रॉसी, रेबेका ग्रिन्स्पन, ओलारा ओतुनू, कैरोलिन रॉड्रिगेज़-बिर्केट और मैकी साल। इस चुनाव का साया आज की बहस पर रहेगा, भले भाषणों में इसका सीधा ज़िक्र न आए। एक दशक तक जो कुर्सी गुतारेस के पास रही, उसका पहला फ़ैसला इसी सत्र में आना तय है। नया महासचिव 1 जनवरी 2027 से पद संभालेगा।
जयशंकर की अगुआई, संबोधन छब्बीस को
भारत की तरफ़ से इस हफ़्ते की अगुआई प्रधानमंत्री नहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे। रिपब्लिक वर्ल्ड ने 20 सितंबर 2026 को लिखा कि विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। विज्ञप्ति के मुताबिक़ जयशंकर उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान भारत के प्रतिनिधिमंडल की अगुआई करेंगे। वह ख़ुद 26 सितंबर को महासभा के उच्चस्तरीय सत्र को संबोधित करेंगे। द फ़्री प्रेस जर्नल ने भी 20 सितंबर को यही तारीख़ दर्ज की। न्यूयॉर्क पहुँचने के बाद जयशंकर के हफ़्ते में कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें तय हैं। उनका अपना भाषण अभी छह दिन दूर है। यह रिपोर्ट उस दिन से पहले फ़ाइल हो रही है। इसलिए उस भाषण में क्या कहा जाएगा, इसका अंदाज़ा यहाँ नहीं लगाया जा रहा। जब वह दिन आएगा, तब वही रिपोर्ट होगी।
जयशंकर के इस हफ़्ते की एक कड़ी सुरक्षा परिषद की सीट का दावा भी है। द फ़्री प्रेस जर्नल ने आईएएनएस के हवाले से 14 जुलाई 2026 को रिपोर्ट किया था कि जयशंकर ने एक दिन पहले, सोमवार 13 जुलाई को, भारत की उम्मीदवारी एक छह-सूत्री घोषणापत्र के साथ शुरू की थी। इसका नाम "शांति" रखा गया। यह अंग्रेज़ी में एक संक्षिप्त रूप भी है: नियमों, भरोसे और सत्यनिष्ठा के ज़रिए समग्र प्रगति सुनिश्चित करना, यानी "Securing Holistic Advancement through Norms, Trust [and] Integrity"। भारत एशिया-प्रशांत की ग़ैर-स्थायी सीट के लिए अगले साल चुनाव लड़ेगा। कार्यकाल 2028 से शुरू होगा। यह उम्मीदवारी और आज की आम बहस एक ही हफ़्ते में हैं, पर दोनों अलग कड़ियाँ हैं: एक चुनावी प्रचार है, दूसरी सालाना रस्म।

पश्चिम एशिया और आगे जो अभी पता नहीं
एक सवाल अभी खुला है: पश्चिम एशिया में सात महीने से चल रही जंग आज की बहस के पहले दिन कितनी जगह लेगी। गुतारेस और रहमान के उद्घाटन भाषण अभी पढ़े नहीं गए हैं। इसलिए इसका जवाब अभी नहीं दिया जा सकता। जब वे बोलेंगे, तभी पता चलेगा कि ईरान पर पश्चिमी हमलों या होर्मुज़ जलडमरूमध्य का ज़िक्र उद्घाटन के दिन आता है, या बाद के दिनों तक टलता है। यह रिपोर्ट सिर्फ़ वह दर्ज करती है जो अभी काग़ज़ पर है। अनुमान नहीं।
विदेश मंत्रालय की जिस विज्ञप्ति का हवाला रिपब्लिक वर्ल्ड ने दिया, उसे इस डेस्क ने ख़ुद खोलकर नहीं पढ़ा। भरोसा नामी अख़बारों की रिपोर्टिंग पर किया गया है, मंत्रालय के अपने दस्तावेज़ पर नहीं। जयशंकर के छह-सूत्री घोषणापत्र के बाक़ी पाँच सूत्र अभी तक किसी स्वतंत्र स्रोत से इस डेस्क के सामने नहीं आए। और न्यूयॉर्क में अभी रात के एक बजकर सत्रह मिनट ही हुए हैं। जब सूरज वहाँ निकलेगा, हॉल भरेगा, और पहला नाम पुकारा जाएगा। तब इस रिपोर्ट में जो "आगे" लिखा है, वह "हो चुका" बन जाएगा।
तब तक के लिए यहीं रुकना ठीक है।
स्रोतसंयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक आम बहस वेबसाइट: विषय और वक्ताओं की जीवंत सूची, 22 सितंबर 2026 को रात 00:14 EDT पर पहली बार और रात 01:17 EDT पर दोबारा पढ़ी गई; 'आगे कौन बोलेगा' की सूची दोनों बार एक जैसी थी, वही वेबसाइट, अक्सर पूछे जाने वाले सवाल पन्ना, प्रश्न 3, 4, 6, 7, 8 और 9, संयुक्त राष्ट्र महासभा: इक्यासीवें सत्र की उच्चस्तरीय बैठकों की अनंतिम अनुसूची, दस्तावेज़ A/INF/81/1 और A/INF/81/4 का हवाला, संयुक्त राष्ट्र: इक्यासीवें सत्र का डेलिगेट्स हैंडबुक, पृष्ठ 29-30 (बोलने की सूची, ई-स्पीकर्स, ई-डेलीगेट पोर्टल), महासभा अध्यक्ष का कार्यालय: डॉ. ख़लीलुर रहमान की जीवनी, 2 जून 2026 को अध्यक्ष चुने जाने की तारीख़ सहित, संयुक्त राष्ट्र: अगले महासचिव के चुनाव की प्रक्रिया पर आधिकारिक पन्ना, प्रस्ताव 79/327 और दस्तावेज़ A/80/823 का हवाला, पासब्लू, दमिलोला बांजो की रिपोर्ट, 20 सितंबर 2026, रियो टाइम्स ऑनलाइन, 21 सितंबर 2026, लातिन पोस्ट, 21 सितंबर 2026, न्यूज़ इंडिया टाइम्स, रॉयटर्स की रिपोर्ट (बाइलाइन मार्सेलो टेइशेइरा), 21 सितंबर 2026, रिपब्लिक वर्ल्ड, 20 सितंबर 2026, विदेश मंत्रालय की रविवार की विज्ञप्ति के हवाले से, द फ़्री प्रेस जर्नल (आईएएनएस की रिपोर्ट), 14 जुलाई 2026