मॉस्को की कपोत्न्या रिफ़ाइनरी पर 20 सितंबर की रात: रूस का दावा 1,110 ड्रोन गिराने का है, यूक्रेन ने छोड़े गए ड्रोन की कोई संख्या नहीं दी
रूस में संसदीय चुनाव की गिनती वाली रात, क्रेमलिन से क़रीब 15 किलोमीटर दूर गैज़प्रोमनेफ़्त-मॉस्को रिफ़ाइनरी पर ड्रोन पहुँचे। यूक्रेन के जनरल स्टाफ़ के मुताबिक़ तीन इकाइयाँ मारी गईं, जिनमें एवीटी-6 प्राथमिक प्रसंस्करण इकाई भी है। हर आँकड़ा किसी एक पक्ष का दावा है और दूसरे पक्ष ने उसकी पुष्टि नहीं की, इसलिए यहाँ हर संख्या के साथ उसका कहने वाला दर्ज है।

कपोत्न्या का संयंत्र, और उस रात के दो हिसाब
शनिवार और रविवार के बीच की रात मॉस्को के दक्षिण-पूर्वी कोने में, कपोत्न्या इलाक़े की रिफ़ाइनरी पर ड्रोन पहुँचे। संयंत्र का नाम गैज़प्रोमनेफ़्त-मॉस्को रिफ़ाइनरी है, और क्रेमलिन से उसकी दूरी क़रीब 15 किलोमीटर है। यूक्रेन के जनरल स्टाफ़ ने कहा कि तीन इकाइयों पर मार पड़ी: एवीटी-6 प्राथमिक प्रसंस्करण इकाई, एक एकीकृत तेल शोधन इकाई और एक आइसोमराइज़ेशन इकाई। यह ब्योरा लीगा.नेट और कीव पोस्ट ने 20 सितंबर को छापा। मॉस्को के मेयर सेर्गेई सोब्यानिन ने इतना ही कहा कि कई ड्रोन संयंत्र के अहाते तक पहुँचे और एक रिहाइशी इमारत पर गिरा।
इसके आगे दोनों हिसाब कहीं नहीं मिलते।
रूसी रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति में एक ही संख्या है। इंटरफ़ैक्स ने उसे 20 सितंबर को सुबह 9:41 बजे छापा और रिया नोवोस्ती ने 9:34 पर: रात भर में हवाई सुरक्षा ने 1,110 यूक्रेनी विमान-प्रकार के ड्रोन मार गिराए। वेदोमोस्ती ने उसी दिन वही आँकड़ा छापा। इलाक़ों की सूची में सत्रह नाम हैं: बेलगोरोद, ब्रियांस्क, कुर्स्क, रियाज़ान, तुला, कलुगा, व्लादीमिर, निज़्नी नोवगोरोद, तांबोव, वोरोनेज़, लिपेत्स्क, स्मोलेंस्क, ओर्योल, रोस्तोव, वोल्गोग्राद, सारातोव और समारा। साथ में क्रास्नोदार, मॉस्को क्षेत्र, क्राइमिया और काला सागर। उसी मंत्रालय की चौबीस घंटे वाली सूची में आँकड़ा बड़ा है। ईएडेली ने उसे उसी दिन 11:35 बजे छापा: आठ निर्देशित हवाई बम, चार हिमार्स रॉकेट, लंबी दूरी की आठ फ़्लेमिंगो क्रूज़ मिसाइलें और 1,951 विमान-प्रकार के ड्रोन।
एक ग़लतफ़हमी दिन भर घूमती रही। अल जज़ीरा के एक वीडियो का शीर्षक था कि मॉस्को पर एक हज़ार से ज़्यादा यूक्रेनी ड्रोन ने हमला किया। 1,110 किसी के छोड़े हुए ड्रोन की गिनती नहीं है। वह रूस के रक्षा मंत्रालय का अपना दावा है कि उसने कितने गिराए। यूक्रेन के जनरल स्टाफ़ ने छोड़े गए ड्रोन की कोई कुल संख्या नहीं छापी, और डेस्क को ऐसी कोई संख्या नहीं मिली।
सोब्यानिन का हिसाब तीसरा है। उन्होंने सुबह लिखा कि शनिवार से अब तक सभी रक्षा पंक्तियों पर 1,600 से ज़्यादा ड्रोन गिराए गए, जिनमें से क़रीब 450 मॉस्को की तरफ़ आ रहे थे। वेदोमोस्ती की रिपोर्ट में चौथी संख्या है: 20 सितंबर की रात मॉस्को के नज़दीक 338 ड्रोन गिराए गए। घटाकर देखिए तो अंतर 112 का बैठता है। वह शनिवार की रात का हो सकता है, पर डेस्क ने इसकी पुष्टि नहीं की। रूसी रक्षा मंत्रालय का कोई पन्ना और सोब्यानिन की कोई पोस्ट डेस्क ने सीधे नहीं पढ़ी; सब कुछ रूसी और यूक्रेनी मीडिया के रास्ते आया है। पोस्ट किस मंच पर थी, इस पर भी स्रोत बँटे हैं: उरा.रू कहता है मैक्स, रॉयटर्स कहता है टेलीग्राम।
ईएलओयू-एवीटी-6: नाम में ही इकाई का आकार लिखा है
जिस इकाई का नाम रविवार को दुनिया भर के अख़बारों में छपा, उसके नाम में ही उसका आकार दर्ज है। पूरा नाम ईएलओयू-एवीटी-6 है। आख़िरी अंक इकाई की सालाना क्षमता बताता है, यानी 60 लाख टन कच्चा तेल। यह रूसी तकनीकी संदर्भों में दर्ज है। तातनेफ़्त के तानेको संयंत्र की इसी नाम वाली इकाई की क्षमता भी 60 लाख टन सालाना है।
नाम के बाक़ी हिस्से भी काम बताते हैं। ईएलओयू माने विद्युत-विलवणीकरण इकाई। कच्चे तेल में नमक और पानी होता है, जिसे 25 हज़ार वोल्ट के बीच से गुज़ारकर अलग किया जाता है। एवीटी माने वायुमंडलीय-निर्वात नलिका। यहाँ साफ़ किया हुआ तेल एक ऊँचे स्तंभ में गरम होकर अपनी परतों में बँट जाता है: पेट्रोल की परत, केरोसिन की, डीज़ल की, और नीचे बचा हुआ भारी मज़ूत। मज़ूत फिर निर्वात स्तंभ में जाता है, जहाँ 0.07 मेगापास्कल से कम निरपेक्ष दबाव पर उससे आगे काम आने लायक़ अंश निकाले जाते हैं; तली में जो बचता है वह डामर की इकाई में जाता है। यह ब्योरा संयंत्र की अपनी वेबसाइट के "उद्यम के बारे में" खंड से आया है।

इसके बाद साफ़ हो जाता है कि एवीटी क्यों मारा जाता है। बाक़ी हर इकाई इसी के निकाले हुए अंशों पर चलती है। यह बंद हो तो आगे कोई इकाई कुछ नहीं बना सकती, क्योंकि उनके पास कच्चा माल पहुँचेगा ही नहीं। रिफ़ॉर्मिंग पेट्रोल के अंश की ऑक्टेन संख्या बढ़ाती है। आइसोमराइज़ेशन, जो 20 सितंबर को निशाना बनी बताई गई, 35 वायुमंडल तक दबाव और 160 से 380 डिग्री सेल्सियस पर चलती है, और उसमें शाखादार शृंखला वाले हाइड्रोकार्बन बनते हैं। क्रैकिंग में भारी अणु तोड़े जाते हैं।
एक इकाई ऐसी है जिसका नाम इस पूरी कहानी को भारत के खेतों तक ले जाता है। हाइड्रोट्रीटिंग, यानी हाइड्रोजन से सफ़ाई, 280 से 340 डिग्री सेल्सियस पर होती है। इसमें पेट्रोल, केरोसिन और डीज़ल के अंशों से गंधक तथा नाइट्रोजन के यौगिक और ऑक्सीजन निकाल दिए जाते हैं। वह निकली हुई गंधक कहीं ग़ायब नहीं होती। उसे संयंत्र की गंधक इकाई में इकट्ठा करके बेचा जाता है, और मॉस्को रिफ़ाइनरी के उत्पादों की सूची में गंधक उसी तरह दर्ज है जैसे पेट्रोल और डीज़ल। 2010 से 2015 के आधुनिकीकरण में इसी इकाई का पुनर्निर्माण हुआ था।
एक आख़िरी बात, जो जून की ख़बरें पढ़ते वक़्त काम आती है। संयंत्र की इकाइयाँ दो छल्लों में बँटी हैं। हर छल्ले में इतनी इकाइयाँ हैं कि वह अकेले तेल पका सके। हर दो साल में एक छल्ला मरम्मत के लिए बंद होता है और दूसरा चलता रहता है, ताकि कारख़ाना कभी पूरा न रुके। दोनों छल्ले एक साथ बैठ जाएँ, तो कुछ नहीं बचता।
ग्यारह, 11.6 या बारह: मशीन का आकार तीन जगह तीन तरह लिखा है
संयंत्र कितना बड़ा है, यह इस पर टिका है कि आप किससे पूछें और किस चीज़ का नाप माँगें।
मालिक कंपनी के अपने पन्ने का 10 जून 2015 का संग्रहित संस्करण कहता है कि संयंत्र की स्थापित क्षमता 1 करोड़ 21 लाख 50 हज़ार टन सालाना है। उसी पन्ने के बाद के संस्करण के हवाले से रूसी विकिपीडिया लिखता है कि मौजूदा स्थापित क्षमता 1 करोड़ 10 लाख टन सालाना है। यूक्रेन के जनरल स्टाफ़ ने 20 सितंबर को क्षमता क़रीब 1 करोड़ 20 लाख टन बताई। उक्रइनफ़ॉर्म ने उसी दिन 1 करोड़ 10 लाख टन छापा। रॉयटर्स ने जून में उद्योग सूत्रों के हवाले से जो संख्या दी, वह क्षमता है ही नहीं: उसके मुताबिक़ संयंत्र ने 2024 में 1 करोड़ 16 लाख टन तेल पकाया और उससे 29 लाख टन पेट्रोल तथा 32 लाख टन डीज़ल बनाया।
इन्हें एक-दूसरे का खंडन मानने से पहले घटाकर देखिए। 1 करोड़ 21 लाख 50 हज़ार टन एक पुराना नामपट्ट है, 1 करोड़ 10 लाख टन बाद का, और 1 करोड़ 16 लाख टन किसी एक साल की असल खपत। असल खपत का नामपट्ट से ऊपर निकल जाना अपने आप में दर्ज करने लायक़ है, और डेस्क इसे सुलझाकर नहीं लिख रहा। संयंत्र का अपना 2018 का आँकड़ा भी मौजूद है: 1 करोड़ 10 लाख टन तेल, हल्के उत्पादों की उपज 60 फ़ीसदी, ऊँचे ऑक्टेन वाला यूरो-5 पेट्रोल 22.3 लाख टन और डीज़ल 21.6 लाख टन।
हिस्सेदारी का आँकड़ा भी तीन टुकड़ों में है। तीनों अलग चीज़ों का नाप हैं। कंपनी के अपने पन्ने के हवाले से राजधानी के ईंधन बाज़ार में संयंत्र का कुल हिस्सा 35 फ़ीसदी है। मॉस्को की पेट्रोल ज़रूरत का 40 फ़ीसदी और डीज़ल का 50 फ़ीसदी यही पूरा करता है, और शहर के हवाई अड्डों का यह मुख्य ईंधन आपूर्तिकर्ता है। उक्रइनफ़ॉर्म ने 20 सितंबर को इसे मॉस्को के ईंधन बाज़ार का क़रीब 40 फ़ीसदी लिखा, जो पेट्रोल वाले आँकड़े को पूरे बाज़ार पर चढ़ा देता है। कीव पोस्ट ने राजधानी की ईंधन ज़रूरत का 40 फ़ीसदी और बड़े मॉस्को क्षेत्र के पेट्रोल तथा विमान केरोसिन का 70 फ़ीसदी लिखा।
यह क्षमता का आँकड़ा है, आपूर्ति के नुक़सान का नहीं। दोनों को एक मानकर कोई गणित नहीं बनता।
जून में दोनों प्रमुख इकाइयाँ बैठ चुकी थीं
20 सितंबर की मार इस संयंत्र पर पहली नहीं थी, और यही वह हिस्सा है जो तार-सेवा की कॉपी में सबसे कम मिलता है।
16 जून 2026 को इसी एवीटी-6 पर हमला हुआ था। द मॉस्को टाइम्स ने 24 जून को रॉयटर्स के हवाले से छापा कि वह इकाई संयंत्र की 53 फ़ीसदी क्षमता संभालती है। 18 जून को दूसरी मार पड़ी और नई यूरो+ इकाई घायल हुई, जो बाक़ी 47 फ़ीसदी है। मरम्मत में कम से कम आधा साल लगने की बात रॉयटर्स ने एक उद्योग सूत्र के हवाले से लिखी। घटाकर देखिए तो 60 लाख टन की एवीटी-6, 1 करोड़ 16 लाख टन की सालाना खपत के आगे क़रीब 52 फ़ीसदी बैठती है। 53 फ़ीसदी वाला आँकड़ा उसी इकाई की बात कर रहा है।
इसके बाद की कड़ी अधूरी है। 1 सितंबर 2026 को एक और हमले के बाद यूरो+ में आग लगी और रॉयटर्स के सूत्रों के मुताबिक़ वह इकाई फिर रोक दी गई; उन्हीं सूत्रों ने कहा कि पाँच-छह दिन की मरम्मत के बाद वह चल सकती है। इससे इतना निकलता है कि जून और सितंबर के बीच संयंत्र का कुछ हिस्सा दोबारा चला था। कितना चला, किस दर पर चला, और 20 सितंबर की रात वह चालू था या नहीं, इसका जवाब किसी दस्तावेज़ में नहीं है। यूक्रेन की विशेष अभियान कमान के मुताबिक़ इस साल यह तीसरी बार है जब कारख़ाना मारा गया।
नुक़सान का कोई आकलन सार्वजनिक नहीं है। गैज़प्रोम नेफ़्त ने 20 सितंबर को उत्पादन का कोई आँकड़ा नहीं दिया, न किसी रूसी अधिकारी ने। इंटरफ़ैक्स ने इतना दर्ज किया कि मेयर ने आगे कुछ नहीं बताया। रॉयटर्स के अपने गवाह मॉस्को में धमाके सुनने और संयंत्र की जगह से धुआँ उठते देखने की बात कहते हैं, इससे आगे कुछ नहीं।
मरने वालों की गिनती दिन भर बदलती रही
रविवार सुबह की पहली ख़बरों में दो मौतें थीं। दिन ढलते-ढलते तीन हो गईं। दोनों संख्याएँ एक ही अफ़सर की हैं।
मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया कि तड़के के हमलों में दो लोग मारे गए और एक ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ा। इंटरफ़ैक्स ने 20 सितंबर को उनका ब्योरा छापा, जिसमें मॉस्को क्षेत्र के 17 ज़िलों में 249 ड्रोन गिराए जाने की बात है। रामेंस्की ज़िले के सोफ़्यिनो में एक ड्रोन तीन मंज़िला रिहाइशी इमारत पर गिरा; वहाँ एक महिला मारी गईं और पाँच लोग ज़ख़्मी हुए। ओरेखोवो-ज़ुयेवो ज़िले में एक और मौत हुई। कुल 20 लोगों को इलाज की ज़रूरत पड़ी और उनमें से 15 अस्पताल में भर्ती हुए।
एक ब्योरा वोरोब्योव ने नाम के साथ दिया। सोफ़्यिनो के हमले में 15 बरस की एज़ोज़ा ज़ख़्मी हुईं और रोशाल बाल चिकित्सा केंद्र में भर्ती हैं। उनकी माँ हमले में मारी गईं और पिता अस्पताल में चल बसे। एज़ोज़ा और उनका 19 बरस का भाई अब माँ-बाप के बिना हैं, और गवर्नर के मुताबिक़ उनकी संरक्षकता का मामला तय हो रहा है। यह उन्होंने मैक्स पर लिखा, ऐसा इंटरफ़ैक्स ने दर्ज किया।
ज़ख़्मियों की गिनती पर स्रोत बँटे हुए हैं। कीव पोस्ट ने 20 सितंबर को शाम 5:01 बजे वोरोब्योव के हवाले से कम से कम दो मौतें और छह ज़ख़्मी लिखे। इंटरफ़ैक्स की गिनती उसी गवर्नर के हवाले से 20 है। सबसे मुमकिन वजह वक़्त है, क्योंकि आँकड़ा दिन भर बढ़ता रहा। डेस्क ने इसकी पुष्टि नहीं की। सोब्यानिन ने कहा कि मॉस्को शहर में कोई मौत नहीं हुई, और शहर तथा क्षेत्र का यही फ़र्क़ शायद अलग-अलग संख्याओं की जड़ है। रॉयटर्स के मुताबिक़ रामेंस्कोए में 21 मंज़िला इमारत से 400 लोग निकाले गए, जिनमें 70 बच्चे थे।
गिनती बदलने का निशान दो अख़बारों के अपने पतों में छपा रह गया। द मॉस्को टाइम्स के पन्ने का यूआरएल दो मौतें कहता है और उसी पन्ने का शीर्षक तीन। अल जज़ीरा के पते में भी दो है और शीर्षक में कम से कम तीन। दोनों ने शीर्षक सुधारा और पता वैसा ही छोड़ दिया।
चुनाव की रात होने का दावा, और उसकी हद
सोब्यानिन ने हमले का मक़सद भी बताया। ईएडेली ने 20 सितंबर को सुबह 7:57 बजे उनके शब्द छापे: "अभूतपूर्व हमला साफ़ तौर पर चुनाव में ख़लल डालने के मक़सद से रचा गया था। दुश्मन को इसमें कामयाबी नहीं मिली।" अल जज़ीरा ने इसी वाक्य का अंग्रेज़ी अनुवाद छापा।
मतदान तीन दिन चला था, 18 से 20 सितंबर तक, और रविवार आख़िरी दिन था। गिनती भी उसी रात शुरू हुई।
दावे का बाक़ी हिस्सा जाँचा नहीं जा सकता। यूक्रेन की तरफ़ से किसी बयान में चुनाव का ज़िक्र नहीं है। जनरल स्टाफ़ ने हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा का अपना अविच्छेद्य अधिकार बताया और मक़सद रूस की सैन्य तथा आर्थिक ताक़त घटाना बताया। समय का मेल किसी इरादे का सबूत नहीं होता। अल जज़ीरा के मॉस्को संवाददाता दमित्री मेदवेदेंको ने रविवार को इतना ही कहा कि साढ़े चार साल में उन्होंने इतनी बड़ी संख्याएँ नहीं देखीं, और असर किस तरफ़ जाएगा यह देखना बाक़ी है।
गंधक: रिफ़ाइनरी की वह पैदावार जो खेत तक जाती है
भारत के पाठक के लिए इस रात का सबसे सीधा सिरा पेट्रोल नहीं है। वह गंधक है।
कच्चे तेल में गंधक होती है। साफ़ ईंधन बनाने का मतलब ही यह है कि हाइड्रोट्रीटिंग में उसे निकाला जाए, और निकाली हुई गंधक रिफ़ाइनरी का बिकने वाला उप-उत्पाद बन जाती है। आगे की कड़ी सीधी है: गंधक से सल्फ़्यूरिक एसिड, सल्फ़्यूरिक एसिड से फ़ॉस्फ़ोरिक एसिड, और फ़ॉस्फ़ोरिक एसिड से डीएपी तथा दूसरी फ़ॉस्फ़ेट वाली खादें। इस कड़ी का अनुपात बताने वाला कोई सरकारी दस्तावेज़ नहीं मिला, इसलिए यहाँ सिर्फ़ क्रम दर्ज है।
एक पेचीदगी छोड़ देना बेईमानी होगी। रूस की ज़्यादातर गंधक रिफ़ाइनरियों में नहीं बनती। वह गैस प्रसंस्करण संयंत्रों से आती है, जिनमें गैज़प्रोम का आस्त्राख़ान संयंत्र अकेले देश की पैदावार का बड़ा हिस्सा देता आया है। मॉस्को रिफ़ाइनरी का बैठ जाना रूस की गंधक आपूर्ति का पूरा हिसाब नहीं बदलता। बदलाव उससे बड़ा है, और रूसी सरकार के अपने आदेशों में दर्ज है।
1 नवंबर 2025 को रूसी सरकार ने संकल्प संख्या 1730 से तरल, दानेदार और ढेलेदार गंधक के निर्यात पर अस्थायी रोक लगाई। सरकार के अपने पन्ने पर कारण यही है कि घरेलू आपूर्ति स्थिर रहे, खाद का उत्पादन बना रहे और देश की खाद्य सुरक्षा बची रहे। रोक 31 दिसंबर 2025 तक थी। 31 मार्च 2026 को संकल्प संख्या 350 से उसे 30 जून 2026 तक बढ़ाया गया, इस छूट के साथ कि निचले दर्जे की गंधक मंत्रालय की पुष्टि पर बिना रोक भेजी जा सकती है। फिर 25 जून 2026 के संकल्प संख्या 785 ने उसे 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया। तीनों आदेशों में यूरेशियाई आर्थिक संघ के सदस्य देशों, अबख़ाज़िया और दक्षिण ओसेतिया को छूट है। मानवीय मदद, अंतरराष्ट्रीय पारगमन और स्पित्सबर्गन के रूसी संगठन भी छूट में हैं।
पैमाना अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की सूची में है। फ़रवरी 2026 की उस सूची के मुताबिक़ 2025 में दुनिया का अनुमानित गंधक उत्पादन 8 करोड़ 40 लाख टन रहा। इसमें रूस 75 लाख टन, सऊदी अरब 72 लाख, संयुक्त अरब अमीरात 63 लाख, क़ज़ाख़िस्तान 48 लाख और भारत 37 लाख टन। रूस, सऊदी अरब, अमीरात, क़तर, कुवैत और ईरान मिलकर दुनिया के उत्पादन का क़रीब एक-तिहाई हैं। कॉमेरसांत ने 14 सितंबर 2026 को छापा कि रूस का गंधक निर्यात 2024 में 74.3 फ़ीसदी गिरकर 10.4 लाख टन रह गया।
भारत का गंधक का चालान: मात्रा 4 फ़ीसदी घटी, बिल 150 फ़ीसदी बढ़ा
यहाँ अटकल की ज़रूरत नहीं है। वाणिज्य विभाग के डेटा बैंक में एचएस 2503 के तहत गंधक का आयात साल-दर-साल और देश-दर-देश दर्ज है, 7 अगस्त 2026 तक अद्यतन।
2024-25 में भारत ने 21.95 लाख टन गंधक मँगाई, जिस पर 2,750 करोड़ रुपये लगे। 2025-26 में मात्रा घटकर 21.14 लाख टन रह गई और बिल 6,877 करोड़ रुपये हो गया। मात्रा 4 फ़ीसदी घटी। बिल 150 फ़ीसदी बढ़ा। प्रति टन भाव 147 डॉलर से 367 डॉलर हो गया। मौजूदा साल में यह और तेज़ है: अप्रैल से जुलाई 2026 तक 3.73 लाख टन गंधक आई, पिछले साल की इसी अवधि के 8.08 लाख टन से 54 फ़ीसदी कम, और ख़र्च फिर भी 7 फ़ीसदी ज़्यादा।

आपूर्तिकर्ताओं की सूची जोखिम की जगह बताती है। 2025-26 में संयुक्त अरब अमीरात से 34.4 फ़ीसदी गंधक आई, ओमान से 23.9, सऊदी अरब से 8, क़तर से 7.9 और कुवैत से 5.5 फ़ीसदी। खाड़ी के देश मिलकर 79.8 फ़ीसदी हैं। क़तर से आपूर्ति एक ही साल में 63.6 फ़ीसदी गिरी, 4.60 लाख टन से 1.67 लाख टन।
एक आँकड़ा सीधी कहानी के ख़िलाफ़ जाता है। 2024-25 में रूस से भारत को एक टन गंधक नहीं आई। 2025-26 में 1.47 लाख टन आई, यानी कुल आयात का 7 फ़ीसदी, उसी बरस जब रूस अपने यहाँ से गंधक का निर्यात रोक रहा था। क़ज़ाख़िस्तान, जो दुनिया के बड़े उत्पादकों में है, भारत की सूची में दोनों बरस नदारद है। भारत ख़ुद भी गंधक बेचता है: 2025-26 में 8.45 लाख टन बाहर गई। भारतीय रिफ़ाइनरियाँ उसी हाइड्रोट्रीटिंग से गंधक निकालती हैं, जबकि खाद के कारख़ाने बाहर से ख़रीदते हैं।
असर जिस चीज़ पर दिखता है, वह डीएपी है। इसी डेटा बैंक में 2024-25 का डीएपी आयात 45.60 लाख टन और 23,349 करोड़ रुपये दर्ज है; 2025-26 में 63.67 लाख टन और 42,770 करोड़ रुपये। यहाँ एक टकराव है। उर्वरक विभाग के आँकड़े पर टिकी जो संख्या चल रही है, वह उसी साल के लिए 61.94 लाख टन कहती है, और डेस्क विभाग के उस दस्तावेज़ तक नहीं पहुँच सका। आधार अलग है, और यह सुलझाकर नहीं लिखा जा रहा। 8 अप्रैल 2026 को कैबिनेट ने ख़रीफ़ 2026 के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी की दरें मंज़ूर कीं, 41,533.81 करोड़ रुपये की, जो पिछली ख़रीफ़ से क़रीब 4,317 करोड़ रुपये ज़्यादा हैं। पत्र सूचना कार्यालय की विज्ञप्ति में कारण भी गिनाए गए हैं। उनमें यूरिया, डीएपी और एमओपी के साथ गंधक का नाम है।
जिस अख़बारी रिपोर्ट से यह सिरा उठा, उस पर दो बातें। द इंडियन एक्सप्रेस में हरीश दामोदरन की रिपोर्ट 20 सितंबर की रात 10 बजे छपी, और उसमें एक भी दस्तावेज़ का नाम नहीं है; भाव के सारे आँकड़े या तो रिपोर्टर के अपने हैं या एक बेनाम उद्योग अधिकारी के। उसमें कपोत्न्या की रिफ़ाइनरी का ज़िक्र नहीं है। वह रूस की रिफ़ाइनरियों पर हमलों और पश्चिम एशिया के ऊर्जा ढाँचे की बात आम तौर पर करती है। कपोत्न्या और गंधक के बीच की कड़ी यहाँ तंत्र के आधार पर जोड़ी गई है, किसी रिपोर्ट के दावे पर नहीं।
ब्रेंट नहीं हिला, रूबल वाला भाव हिला
ऐसी ख़बर के साथ एक अटकल अपने आप चली आती है, तेल के दाम की। इस बार वह उलटी बैठती है।
20 सितंबर रविवार था और बाज़ार बंद थे। उससे पहले का आख़िरी भाव शुक्रवार, 18 सितंबर का है। सीएनबीसी के मुताबिक़ ब्रेंट उस दिन 0.9 फ़ीसदी गिरकर 103.87 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई 1.6 फ़ीसदी गिरकर 100.30 डॉलर पर। यह लगातार तीसरा सत्र था जिसमें दाम गिरे, क्योंकि सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन बंद होने का असर शुरुआती डर से कम निकला।
तंत्र समझने लायक़ है। मॉस्को की रिफ़ाइनरी कच्चा तेल निकालती नहीं, पकाती है। उस पर मार पड़ने से दुनिया के बाज़ार में कच्चे तेल की आपूर्ति घटती नहीं; जो तेल पक नहीं पाता वह कच्चे रूप में बाहर जाने के लिए बच जाता है। जो चीज़ घटती है वह रूस के अंदर तैयार ईंधन है, और उसका भाव रूबल में लगता है।
वहाँ का हिसाब अलग तरह से हिला है। सेंट पीटर्सबर्ग की जिंस एक्सचेंज पर एआई-92 पेट्रोल 2 सितंबर 2026 को 75,477 रूबल प्रति टन पर पहुँचकर अपना रिकॉर्ड तोड़ चुका था। फिर 8 सितंबर को रॉयटर्स ने उलटी बात दर्ज की: किल्लत के बावजूद एक्सचेंज पर भाव गिर रहे हैं, क्योंकि डिलीवरी की तारीख़ें इतनी अनिश्चित हो गई हैं कि ख़रीदार बोली ही नहीं लगा रहे। उन दिनों एआई-92 का औसत भाव दो हज़ार रूबल प्रति टन से ज़्यादा गिरा और एक सत्र की बिक्री 11 फ़ीसदी घटी। सरकार ने 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 के लिए एक्सचेंज पर अनिवार्य बिक्री का हिस्सा 15 फ़ीसदी से घटाकर 10 फ़ीसदी कर दिया है। लंदन की स्क्रीन पर इसमें से कुछ नहीं दिखता। क़तार पेट्रोल पंप पर लगती है।

ज़ेलेंस्की ने दस हथियारों के नाम गिनाए
राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने रविवार को हमले की पुष्टि की और इस्तेमाल हुए हथियारों के नाम गिनाए: एफ़पी-1, आरज़ेड-100, एमआईसीएच-2000, पाल्यानित्स्या, वेंदेता, ल्यूती, बार्स, फ़्लेमिंगो, सिचनेवी और पेलिकन। उनका बयान सोशल मीडिया पर था। अलग-अलग अख़बारों ने उसका अंग्रेज़ी अनुवाद अलग-अलग शब्दों में छापा, इसलिए यहाँ उसे भाव में दिया जा रहा है: मॉस्को क्षेत्र में रात भर यूक्रेन की लंबी दूरी की जवाबी कार्रवाई का असर साफ़ दिखा, और तेल उद्योग तथा रसद के अहम ठिकाने मारे गए, जो युद्ध चलाने वाले अरबों डॉलर हैं।
इस सूची के ज़्यादातर नामों के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत कम तय है। पेलिकन नाम रविवार से पहले कभी सामने नहीं आया था। कीव पोस्ट ने लिखा कि इसे फ़ायर पॉइंट की एफ़पी-7 बैलिस्टिक मिसाइल से जोड़ा जा रहा है, पर यह तय नहीं कि दोनों एक हैं। रेडियो एनवी के सैन्य विश्लेषक वसील पेख़्नो ने उसी रिपोर्ट में कहा कि एफ़पी-7 की डिज़ाइन रेंज 200 से 350 किलोमीटर है, जबकि मॉस्को सरहद से क़रीब 450 से 500 किलोमीटर दूर है।
एक ब्योरा यहाँ सुधारने लायक़ है। फ़ायर पॉइंट ने जो दावा किया, वह रिफ़ाइनरी का नहीं था। कीव पोस्ट के मुताबिक़ कंपनी ने कहा कि उसके एफ़पी-1 ड्रोन ने रामेंस्की ज़िले के सोफ़्यिनो में मॉडर्न वेयरहाउस टेक्नोलॉजीज़ के गोदाम परिसर तबाह किए। रिफ़ाइनरी वाला ब्योरा जनरल स्टाफ़ से आया, जिसके मुताबिक़ यूक्रेनी सुरक्षा सेवा के अल्फ़ा विशेष अभियान केंद्र के लंबी दूरी के ड्रोन 500 किलोमीटर से ज़्यादा उड़कर पहुँचे। रूस के रक्षा मंत्रालय ने उसी चौबीस घंटे में आठ फ़्लेमिंगो क्रूज़ मिसाइलें गिराने का दावा किया। इन दोनों दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।
स्रोतइंटरफ़ैक्स, 20 सितंबर 2026, सुबह 9:41 (मॉस्को): रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा कि रात भर में 1,110 यूक्रेनी विमान-प्रकार के ड्रोन गिराए गए, रिया नोवोस्ती, 20 सितंबर 2026, सुबह 9:34: वही दावा, साथ में उन इलाक़ों की पूरी सूची जहाँ ड्रोन गिराए जाने की बात कही गई, वेदोमोस्ती, 20 सितंबर 2026, आसिया सुल्तानोवा: रक्षा मंत्रालय के 1,110 वाले दावे के साथ यह कि 20 सितंबर की रात मॉस्को के नज़दीक 338 ड्रोन गिराए गए, ईएडेली, 20 सितंबर 2026, सुबह 7:57: मेयर सेर्गेई सोब्यानिन के शब्द, 1,600 और 450 वाले आँकड़े, और चुनाव में ख़लल का दावा, ईएडेली, 20 सितंबर 2026, 11:35: रूसी रक्षा मंत्रालय की चौबीस घंटे वाली सूची, 1,951 ड्रोन और आठ फ़्लेमिंगो क्रूज़ मिसाइलें, उरा.रू, 20 सितंबर 2026, सुबह 5:47: सोब्यानिन की रात भर की क्रमिक पोस्टों का हिसाब, और यह कि उन्होंने मैक्स पर लिखा, इंटरफ़ैक्स, 20 सितंबर 2026: गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव का ब्योरा, 249 ड्रोन, 17 ज़िले, सोफ़्यिनो की इमारत, 20 ज़ख़्मी और 15 भर्ती, द मॉस्को टाइम्स (रॉयटर्स की कॉपी), 20 सितंबर 2026, सुबह 10:35: तीन मौतें, रामेंस्कोए में 400 लोगों की निकासी; पन्ने के यूआरएल में अब भी 'दो' दर्ज है, अल जज़ीरा, 20 सितंबर 2026: कम से कम तीन मौतें, सोब्यानिन और ज़ेलेंस्की के बयानों का अंग्रेज़ी अनुवाद, यूक्रेनी वायुसेना के 138 और 101 वाले आँकड़े, कीव पोस्ट, 20 सितंबर 2026, शाम 5:01 (कीव): जनरल स्टाफ़ का ब्योरा, अल्फ़ा केंद्र के ड्रोन, पेलिकन और एफ़पी-7 पर वसील पेख़्नो का आकलन, फ़ायर पॉइंट का सोफ़्यिनो वाला दावा, लीगा.नेट, 20 सितंबर 2026: जनरल स्टाफ़ के मुताबिक़ एवीटी-6, एकीकृत शोधन इकाई और आइसोमराइज़ेशन इकाई पर मार, और क्षमता क़रीब 1 करोड़ 20 लाख टन, उक्रइनफ़ॉर्म, 20 सितंबर 2026: क्षमता 1 करोड़ 10 लाख टन और 'मॉस्को के ईंधन बाज़ार का क़रीब 40 फ़ीसदी' वाला वाक्य, द मॉस्को टाइम्स (रॉयटर्स), 24 जून 2026: 16 और 18 जून के हमले, 53 और 47 फ़ीसदी वाला बँटवारा, 2024 में 1 करोड़ 16 लाख टन की खपत, और कम से कम आधे साल की मरम्मत, गैज़प्रोमनेफ़्त-मॉस्को रिफ़ाइनरी की अपनी वेबसाइट का 'उद्यम के बारे में' पन्ना, 10 जून 2015 का संग्रहित संस्करण: स्थापित क्षमता 1 करोड़ 21 लाख 50 हज़ार टन, 2013 में 1 करोड़ 8 लाख टन की खपत, रूसी विकिपीडिया का मॉस्को रिफ़ाइनरी वाला पन्ना, जो क्षमता, हिस्सेदारी, उत्पाद सूची और तकनीकी क्रम के लिए संयंत्र की अपनी वेबसाइट के 'उद्यम के बारे में' खंड का हवाला देता है, प्रोएनपीज़ेड, रूसी तेल शोधन का तकनीकी संदर्भ: ईएलओयू-एवीटी-6 का पूरा अर्थ और यह कि नाम का आख़िरी अंक 60 लाख टन सालाना क्षमता बताता है, रूसी सरकार, संकल्प संख्या 350, 31 मार्च 2026: गंधक निर्यात पर रोक 30 जून 2026 तक, और यह दर्ज कि मूल रोक 1 नवंबर 2025 से लागू है, रूसी सरकार, संकल्प संख्या 1730, 1 नवंबर 2025: तरल, दानेदार और ढेलेदार गंधक के निर्यात पर पहली अस्थायी रोक और उसकी छूटें, रूसी सरकार, संकल्प संख्या 785, 25 जून 2026: वही रोक 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई गई (सिर्फ़ रूसी संस्करण उपलब्ध), वाणिज्य विभाग, डीजीसीआईऐंडएस का निर्यात-आयात डेटा बैंक: एचएस 2503 के तहत गंधक का आयात, देशवार मात्रा और मूल्य, 7 अगस्त 2026 तक अद्यतन, पत्र सूचना कार्यालय, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, 8 अप्रैल 2026, शाम 4:38: ख़रीफ़ 2026 के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी दरों को मंज़ूरी, 41,533.81 करोड़ रुपये, कारण में गंधक का नाम, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, मिनरल कमोडिटी समरीज़ 2026, गंधक अध्याय, फ़रवरी 2026: 2025 का अनुमानित विश्व उत्पादन और देशवार आँकड़े, द इंडियन एक्सप्रेस, हरीश दामोदरन, 20 सितंबर 2026 रात 10:00: भारत की गंधक की समस्या पर रिपोर्ट, जिसमें कोई दस्तावेज़ नाम से नहीं है और मॉस्को रिफ़ाइनरी का ज़िक्र नहीं है, कॉमेरसांत, 14 सितंबर 2026, दोपहर 4:13: सल्फ़्यूरिक एसिड के निर्यात पर 31 दिसंबर 2026 तक रोक, और 2024 में रूस का गंधक निर्यात 74.3 फ़ीसदी गिरकर 10.4 लाख टन रह जाने का आँकड़ा, सीएनबीसी, 18 सितंबर 2026: ब्रेंट 103.87 डॉलर और डब्ल्यूटीआई 100.30 डॉलर पर बंद, लगातार तीसरे सत्र की गिरावट, द मॉस्को टाइम्स का रूसी संस्करण (रॉयटर्स), 8 सितंबर 2026: किल्लत के बावजूद एसपीबीएमटीएसबी पर पेट्रोल के भाव गिरने और अनिवार्य बिक्री का हिस्सा घटाने की रिपोर्ट