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हॉकी इंडिया के सचिव पर लगे आरोपों की जाँच आईओए की समिति करेगी, ख़र्च हॉकी इंडिया उठाएगा

भारतीय ओलंपिक संघ ने चार सदस्यों की समिति बनाई है, जो पूर्व कप्तान असुंता लकड़ा के आरोपों की जाँच करेगी। आरोप हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह पर हैं, जिन्हें उन्होंने ख़ारिज किया है। आईओए की चिट्ठी में समिति के ख़र्च की ज़िम्मेदारी हॉकी इंडिया पर डाली गई है और सहयोग के लिए 'अनुरोध' किया गया है। रिपोर्ट कब तक आनी है, यह किसी रिपोर्ट में दर्ज नहीं।

लुधियाना के पंजाब कृषि विश्वविद्यालय का ख़ाली हॉकी टर्फ़। यह तस्वीर 2017 की है
तस्वीर: Jagmit Singh Brar, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

जाँच का ख़र्च हॉकी इंडिया उठाएगा।

भारतीय ओलंपिक संघ ने चार सदस्यों की जो स्वतंत्र समिति बनाई है, उसे हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह पर लगे उत्पीड़न और धमकाने के आरोपों की जाँच करनी है। फ़्री प्रेस जर्नल और द ट्रिब्यून ने आईओए की चिट्ठी के हवाले से लिखा है कि समिति के मानदेय, यात्रा, आवास और आनुषंगिक ख़र्च हॉकी इंडिया वहन करेगा। जिस महासंघ के पदाधिकारी पर आरोप हैं, बिल उसी के पते पर जाएगा।

आरोप लगाने वाली भी उसी बोर्ड में हैं। असुंता लकड़ा भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान हैं और हॉकी इंडिया के कार्यकारी बोर्ड में चार खिलाड़ी प्रतिनिधियों में से एक।

आरोप अभी आरोप हैं। लेटेस्टली के मुताबिक़ सिंह और झारखंड के जिन कोच से यह मामला शुरू हुआ, दोनों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।

समिति में कौन-कौन

समिति की अध्यक्ष सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश दीपा शर्मा हैं। तीन सदस्य हैं: पूर्व एथलीट वंदना राव, पूर्व भारतीय महिला हॉकी कप्तान ममता खरब और वकील सितवत नबी। विकिपीडिया के मुताबिक़ वंदना राव 1984 और 1988 के ओलंपिक में 4x400 मीटर रिले में भारत के लिए दौड़ीं और 1987 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला। ममता खरब ने 2002 के मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों के फ़ाइनल में विजयी गोल किया था, जिससे भारत को 32 साल बाद इस खेल में स्वर्ण मिला। किसी रिपोर्ट में यह दर्ज नहीं कि दीपा शर्मा किस उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त हुईं।

झारखंड से शुरू हुई शिकायत

बादल भरी शाम में एक ख़ाली हॉकी मैदान। यह तस्वीर दिल्ली की है, अगस्त 2025 की, रांची की नहीं
तस्वीर: Aryadip Dey13, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

रांची के एकलव्य हॉकी अकादमी से यह मामला निकला। आउटलुक की 11 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक़ लकड़ा ने झारखंड सरकार के सामने वहाँ के कोच सुधीर गोला पर युवा खिलाड़ियों के कथित यौन उत्पीड़न की शिकायत रखी थी। उसी रिपोर्ट में छपी लकड़ा की चिट्ठी कहती है कि आरोप सार्वजनिक होने और झारखंड सरकार से निलंबित होने के बाद भी वे अकादमी के छात्रावास में घुसे, युवा खिलाड़ियों को इकट्ठा कर उन्हें शिकायतें वापस लेने के लिए कथित रूप से डराया। चिट्ठी खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण, आईओए अध्यक्ष पीटी उषा और टॉप्स को भेजी गई थी।

नौ मिनट की एक कॉल का दावा

द ट्रिब्यून की 17 जुलाई की रिपोर्ट में लकड़ा के हवाले से एक फ़ोन कॉल का ब्योरा है: 9 मई की शाम, क़रीब सात से आठ बजे के बीच, अवधि लगभग नौ मिनट। आउटलुक के मुताबिक़ लकड़ा का कहना है कि उस कॉल में सिंह ने उन्हें "अपनी हद में रहने" के लिए कहा। सिंह ने इससे इनकार किया। उसी रिपोर्ट में उनके शब्द हैं: "मैंने किसी को धमकी नहीं दी। हॉकी इंडिया के चुनाव से पहले हमें बदनाम करने की सोची-समझी साज़िश है।" कॉल का कोई रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं हुआ।

जवाब में आया कारण बताओ नोटिस

द ट्रिब्यून के मुताबिक़ हॉकी इंडिया की नैतिकता समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राघवेंद्र कुमार ने लकड़ा को कारण बताओ नोटिस भेजा। यह नोटिस खिलाड़ी अलबेला रानी टोप्पो की दो शिकायतों पर था, तारीख़ें 5 अप्रैल 2026 और 9 जुलाई 2026। टोप्पो का आरोप है कि लकड़ा ने रेलवे में उनका करियर ख़त्म करने और राष्ट्रीय टीम में चयन रोकने की धमकी दी। लकड़ा को 30 जुलाई तक जवाब देने को कहा गया, इस चेतावनी के साथ कि जवाब न आने पर कार्यवाही उनके बिना आगे बढ़ेगी। लकड़ा ने इसे "लगातार डराने और बदले की कार्रवाई" बताया।

नोटिस देने वाली समिति में दो ही नाम

हॉकी इंडिया की वेबसाइट पर 31 मार्च 2026 से प्रभावी समितियों की सूची छपी है। उसमें नैतिकता समिति के सिर्फ़ दो सदस्य दर्ज हैं: अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राघवेंद्र कुमार और विधिक सदस्य न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) योगेंद्र सिंह। कोरम भी दो रखा गया है, यानी किसी एक की अनुपस्थिति में कार्यवाही रुक जाएगी। महासंघ की बाक़ी समितियों में कोरम तीन से पाँच तक है। नैतिकता समिति अकेली है जिसमें कोई पदाधिकारी या खिलाड़ी प्रतिनिधि नहीं, सिर्फ़ दो सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं।

एक ही बोर्ड, दोनों पक्ष

चेन्नई के मेयर राधाकृष्णन हॉकी स्टेडियम का फाटक, जिस पर स्टेडियम का नाम लिखा है। यह तस्वीर 2023 की है
तस्वीर: சத்திரத்தான், विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

हॉकी इंडिया के कार्यकारी बोर्ड पृष्ठ पर अध्यक्ष दिलीप कुमार तिर्की, महासचिव भोला नाथ सिंह और कोषाध्यक्ष शेखर जे मनोहरन तीनों के आगे "23 सितंबर 2022 से अब तक" लिखा है। बोर्ड का कार्यकाल 2022 से 2026 दर्ज है। उसी पृष्ठ पर चार खिलाड़ी प्रतिनिधियों के नाम हैं: डॉ. आर. पी. सिंह, सरदार सिंह, असुंता लकड़ा और जोयदीप कौर। इसी पृष्ठ के मुताबिक़ 25 मई से 23 सितंबर 2022 तक हॉकी इंडिया प्रशासकों की समिति के अधीन था, यानी मौजूदा बोर्ड उस दौर के ठीक बाद चुना गया।

पाँच समितियों में दोनों साथ बैठते हैं

समितियों की उसी सूची को पढ़ने पर एक बात निकलती है जो किसी ख़बर में नहीं आई। लकड़ा और सिंह हॉकी इंडिया की कम से कम पाँच समितियों में साथ हैं: हॉकी इंडिया लीग संचालन समिति, उच्च प्रदर्शन एवं विकास समिति, हॉकी फ़ाइव्स समिति, आयु धोखाधड़ी रोकथाम समिति और ज़मीनी विकास समिति। इनमें आयु धोखाधड़ी रोकथाम समिति के अध्यक्ष भोला नाथ सिंह हैं और लकड़ा उसकी सदस्य। कार्यकारी बोर्ड को जोड़ लें तो महासंघ के छह निकायों में दोनों एक ही मेज़ पर बैठते हैं, जबकि एक की शिकायत दूसरे के ख़िलाफ़ आईओए की समिति के सामने है।

अनुशासन समिति की अध्यक्षता

उसी सूची में एक और नाम-पद जुड़ाव है। "हॉकी इंडिया अनुशासन समिति (खिलाड़ी, सदस्य एवं पदाधिकारी)" के अध्यक्ष भोला नाथ सिंह हैं। सदस्य जी. हर्ष वर्धन और गुरप्रीत कौर हैं, संयोजक कमांडर आर. के. श्रीवास्तव, और ज़रूरत पड़ने पर विधिक सलाहकार। कोरम दो है। यानी जिस अधिकारी पर एक खिलाड़ी प्रतिनिधि ने आरोप लगाए हैं, वही महासंघ के उस निकाय के अध्यक्ष हैं जो खिलाड़ियों, सदस्यों और पदाधिकारियों के अनुशासनात्मक मामले देखता है। सिंह घरेलू टूर्नामेंट आयोजन समिति के भी अध्यक्ष हैं और भ्रष्टाचार निरोधक समिति के सदस्य।

शिकायत निवारण समिति में शिकायतकर्ता

दूसरी तरफ़ का चित्र भी वेबसाइट पर ही है। "हॉकी इंडिया/हॉकी इंडिया लीग खिलाड़ी विवाद एवं शिकायत निवारण समिति" के अध्यक्ष डॉ. आर. पी. सिंह हैं, और उसकी दो सदस्य असुंता लकड़ा तथा जोयदीप कौर हैं। कोरम दो। यह वही निकाय है जिसके पास खिलाड़ियों की शिकायतें जानी हैं। लकड़ा खिलाड़ी आयोग की भी सदस्य हैं, जिसकी संयोजक जोयदीप कौर हैं और अध्यक्ष डॉ. आर. पी. सिंह। इन निकायों में वही चार-पाँच नाम घूमते हैं, जो एक बीस-पदों वाले बोर्ड में स्वाभाविक है और जाँच के लिहाज़ से मुश्किल।

आंतरिक शिकायत समिति और उसका क़ानून

कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 की धारा 4 हर नियोक्ता को लिखित आदेश से आंतरिक शिकायत समिति बनाने को कहती है। पीठासीन अधिकारी वरिष्ठ स्तर पर कार्यरत महिला होगी, कम से कम दो सदस्य कर्मचारियों में से होंगे, और एक सदस्य बाहर से आएगा। नामित सदस्यों में आधी महिलाएँ होनी चाहिए। हॉकी इंडिया की सूची में यह समिति दर्ज है: अध्यक्ष जोयदीप कौर, संयोजक रंजीत गिल, सदस्य डॉ. आर. पी. सिंह, वी. सुनील कुमार, वैशाली राठौर और बाहरी सदस्य डॉ. सुदर्शन पाठक। छह में चार महिलाएँ, कोरम तीन। संरचना कागज़ पर पूरी दिखती है, पर अध्यक्ष जोयदीप कौर ख़ुद कार्यकारी बोर्ड में खिलाड़ी प्रतिनिधि हैं, यानी दोनों पक्षों की बोर्ड-सहयोगी।

तिर्की ने भीतरी जाँच से इनकार क्यों किया

न्यूज़ड्रम की 16 जुलाई की रिपोर्ट में तिर्की का वह ईमेल दर्ज है जो उन्होंने खेल मंत्रालय को भेजा। उसमें उन्होंने माँग की कि मामला हॉकी इंडिया की आंतरिक शिकायत समिति के बजाय किसी बाहरी समिति के पास जाए, क्योंकि शिकायतकर्ता और जिन पर आरोप है, दोनों कार्यकारी बोर्ड के सदस्य हैं और भीतरी जाँच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकता है। महासंघ के अध्यक्ष का अपने ही महासंघ की क़ानूनी रूप से गठित समिति को मामला न देने की सिफ़ारिश करना असामान्य है। आउटलुक में तिर्की का बयान छपा कि वे दोनों पक्षों से बात करेंगे और महिलाओं की गरिमा उनकी प्राथमिकता है।

2022 का केरल फ़ैसला और सदस्यता का सवाल

इस उलझन की एक क़ानूनी पृष्ठभूमि है। वीमेन इन सिनेमा कलेक्टिव बनाम केरल राज्य में केरल उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश एस. मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी. चाली की पीठ ने 17 मार्च 2022 को तय किया कि किसी उद्योग का संगठन तब तक आंतरिक शिकायत समिति बनाने को बाध्य नहीं, जब तक वह ख़ुद दस या ज़्यादा कर्मचारी न रखता हो। जिन प्रतिष्ठानों में समिति नहीं है, वहाँ की महिलाएँ धारा 6 के तहत बनी स्थानीय समिति में सीधे शिकायत कर सकती हैं। फ़ैसले ने नियोक्ता-कर्मचारी रिश्ते और सदस्यता के रिश्ते में फ़र्क़ किया।

हॉकी इंडिया के अपने कर्मचारी

महासंघ के आरटीआई पृष्ठ पर उसके अधिकारियों और कर्मचारियों की अलग सूची है: मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलेना नॉर्मन, महानिदेशक कमांडर आर. के. श्रीवास्तव, निदेशक बी. एन. भूषण और रंजीत गिल, प्रतियोगिता एवं हॉकी विकास निदेशक विक्रम सिंह, तथा प्रोटोकॉल, प्रशासन, समन्वय, वित्त और मीडिया के अधिकारी। ग्यारह से ज़्यादा नाम हैं। इसी पृष्ठ पर दर्ज है कि हॉकी इंडिया सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत है और उसका दफ़्तर मथुरा रोड, मोहन को-ऑपरेटिव इंडस्ट्रियल एस्टेट, नई दिल्ली में है। कार्यकारी बोर्ड इस कर्मचारी सूची से अलग दिखाया गया है।

मंत्रालय ने क्या कहा

जुलाई 2026 में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने आईओए से स्वतंत्र समिति बनाने को कहा। द ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि मंत्रालय ने जाँच निकाय के "निष्पक्ष, न्यायसंगत और पारदर्शी" होने की शर्त रखी और हॉकी इंडिया से जवाब भी माँगा। न्यूज़ड्रम ने मंत्रालय के एक सूत्र के शब्द छापे कि आईओए को तटस्थ समिति बनाने का निर्देश दिया गया है। मंत्रालय की ओर से इस मामले पर कोई प्रेस विज्ञप्ति सार्वजनिक नहीं हुई; जो सामने आया, सूत्रों और चिट्ठियों के रास्ते आया।

चिट्ठी में 'अनुरोध' शब्द

आईओए की जो पंक्ति फ़्री प्रेस जर्नल में उद्धृत हुई है, उसमें शब्द चुना हुआ है: हॉकी इंडिया से "अनुरोध" किया जाता है कि वह समिति को पूरा सहयोग दे और सभी प्रासंगिक दस्तावेज़, सूचनाएँ तथा अन्य ज़रूरी मदद समय से उपलब्ध कराए। निर्देश नहीं, अनुरोध। हॉकी इंडिया की वेबसाइट कहती है कि वह अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ, भारतीय ओलंपिक संघ और एशियाई हॉकी महासंघ से संबद्ध है, और खेल मंत्रालय ने उसे 28 फ़रवरी 2014 के पत्र संख्या एफ़.नंबर 32-14/2013-एसपी-III से राष्ट्रीय खेल महासंघ की मान्यता दी। संबद्धता का यही रिश्ता आईओए के दख़ल का आधार है।

समयसीमा दर्ज नहीं

द ट्रिब्यून ने साफ़ लिखा है कि समिति की रिपोर्ट के लिए कोई समयसीमा नहीं बताई गई और हॉकी इंडिया का कोई औपचारिक बयान भी नहीं आया। न जाँच का दायरा सार्वजनिक हुआ, न यह कि समिति गवाहों को बुला सकती है या नहीं, न यह कि रिपोर्ट किसे सौंपी जाएगी। खिलाड़ी प्रतिनिधि के तौर पर लकड़ा का बोर्ड-कार्यकाल 2026 में ख़त्म हो रहा है, यानी जाँच लंबी खिंची तो नतीजा आने से पहले वह बोर्ड ही नहीं रहेगा जिसके भीतर यह विवाद खड़ा हुआ।

2023 में एक हफ़्ते में दो समितियाँ

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों के धरने का स्थल। यह तस्वीर 6 मई 2023 की है, यानी उन दो समितियों के बनने के महीनों बाद की
तस्वीर: Satdeep Gill, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

तुलना के लिए तीन साल पीछे का एक मामला है, जिसे बराबर बताए बिना पढ़ा जाना चाहिए। भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष पर पहलवानों के आरोपों के बाद, ईएसपीएन की 20 जनवरी 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक़, आईओए ने सात सदस्यों की समिति बनाई थी: एम. सी. मैरी कॉम, योगेश्वर दत्त, डोला बनर्जी, सहदेव यादव, अलकनंदा अशोक और दो वकील। तीन दिन बाद खेल मंत्रालय ने मैरी कॉम की अध्यक्षता में पाँच सदस्यों की अलग निगरानी समिति बनाई और एक महीने में रिपोर्ट माँगी। इस बार समिति एक है, और महीना कोई तय नहीं।

अब एक क़ानून भी है

2023 और 2026 के बीच एक बड़ा फ़र्क़ है। राष्ट्रीय खेल अधिशासन अधिनियम 2025 अब मौजूद है। दिल्ली उच्च न्यायालय के 12 फ़रवरी 2026 के आदेश में न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने दर्ज किया कि 31 दिसंबर 2025 की अधिसूचना से अधिनियम के प्रावधान 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हुए, और सरकार ने 28 जनवरी 2026 को नियम अधिसूचित किए। यह क़ानून 2011 की राष्ट्रीय खेल संहिता की तदर्थ व्यवस्था की जगह लेता है। कर्नाटक जूडो एसोसिएशन के उस मामले में अदालत ने कहा कि संविधान और चुनाव अब अधिसूचित प्रावधानों के अनुरूप होने चाहिए।

धारा 4 की शर्तें

अधिनियम की धारा 4 क्या माँगती है, यह दिल्ली उच्च न्यायालय के 2 सितंबर 2026 के एक आदेश में दर्ज है। ऑल इंडिया कैरम फ़ेडरेशन बनाम भारत संघ में मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने लिखा कि धारा 4 अनिवार्य अनुपालन तय करती है: खिलाड़ी समिति का गठन, नैतिकता समिति का गठन, कार्यकारी बोर्ड में खिलाड़ियों की मौजूदगी, और आयु, कार्यकाल तथा बोर्ड के आकार की सीमाओं का पालन। यानी नैतिकता समिति अब महासंघ की मर्ज़ी नहीं, क़ानूनी शर्त है, और उसी तरह खिलाड़ी प्रतिनिधित्व भी।

पंद्रह की सीमा, बीस पद

कर्नाटक जूडो के आदेश में यह भी दर्ज है कि अधिनियम के तहत कार्यकारी समिति में सदस्यों की संख्या पंद्रह से ज़्यादा नहीं होगी, और नियमों में कार्यकारी समिति में 25 फ़ीसदी खिलाड़ी प्रतिनिधित्व की बात है। हॉकी इंडिया की वेबसाइट पर छपा बोर्ड इससे मेल नहीं खाता। अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष के अलावा दो उपाध्यक्ष, दो सह-उपाध्यक्ष, दो संयुक्त सचिव, दो सह-संयुक्त सचिव, पाँच कार्यकारी सदस्य और चार खिलाड़ी प्रतिनिधि। जोड़ बीस बैठता है, और खिलाड़ी प्रतिनिधि बीस फ़ीसदी। पृष्ठ पर लिखा है कि यह सूची 30 अप्रैल 2025 की स्थिति है।

नियम 18 और छह महीने की मोहलत

उसी 2 सितंबर के आदेश में पीठ ने राष्ट्रीय खेल अधिशासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम 2026 के नियम 18 का हवाला दिया: हर राष्ट्रीय खेल महासंघ को छह महीने के भीतर अपने उपनियम अधिनियम के अनुरूप करने होंगे। अदालत ने कैरम महासंघ के बारे में कहा कि मान्यता पर विचार से पहले उसे अधिनियम के अनुरूप होना पड़ेगा। नियम 28 जनवरी 2026 को अधिसूचित हुए थे। हॉकी इंडिया के उपनियम इस बीच संशोधित हुए या नहीं, यह उसकी वेबसाइट के सार्वजनिक पृष्ठों से नहीं खुलता।

सुरक्षित खेल नीति का ख़ाका अधूरा

अधिनियम हर राष्ट्रीय खेल निकाय से सुरक्षित खेल नीति और आचार संहिता बनवाता है, यह लॉयड लॉ कॉलेज के विश्लेषण में दर्ज है। नीति का मक़सद महिलाओं, नाबालिगों और कमज़ोर प्रतिभागियों की सुरक्षा है। एसपीआरएफ़ के विश्लेषण में इसी पर आपत्ति है: नीति बनाने का आदेश है, उसका ख़ाका नहीं; और अधिनियम महासंघ, राज्य तथा ज़िला स्तर पर विस्तृत शिकायत निवारण तंत्र अनिवार्य नहीं करता, जबकि खिलाड़ी सबसे पहले उन्हीं भीतरी निकायों तक पहुँचते हैं। यही ख़ालीपन यहाँ दिखता है, जहाँ रास्ता क़ानून से नहीं, मंत्रालय की चिट्ठी से निकला।

आरटीआई के दायरे में महासंघ

हॉकी इंडिया के आरटीआई पृष्ठ पर लिखा है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 7 जनवरी 2010 को उसे सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत लोक प्राधिकरण घोषित किया, जिसके बाद आरटीआई प्रकोष्ठ बना। रंजीत गिल केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी हैं, कमांडर आर. के. श्रीवास्तव अपीलीय अधिकारी। लॉयड लॉ कॉलेज के विश्लेषण के मुताबिक़ नया अधिनियम मान्यता प्राप्त महासंघों को स्पष्ट रूप से आरटीआई के अधीन लोक प्राधिकरण बताता है। यानी दस्तावेज़ माँगने का एक क़ानूनी रास्ता पहले से खुला है, चाहे समिति रिपोर्ट सार्वजनिक करे या न करे।

2023 का एक पुराना आरोप

भोला नाथ सिंह पर लगा यह पहला आरोप नहीं है। द ट्रिब्यून की 26 नवंबर 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक़ तेलंगाना हॉकी इकाई के अध्यक्ष सरल तलवार ने कहा था कि राज्य के चुनाव कराने की अनुमति के बदले उनसे 25 लाख रुपये कथित रूप से माँगे गए, और 3 नवंबर की एक मुलाक़ात में सोचने के लिए सात दिन दिए गए। तेलंगाना हॉकी के चुनाव अप्रैल 2023 से लंबित थे। सिंह ने तब आरोप को निराधार बताया और कहा कि उन्होंने कभी किसी से 25 पैसे नहीं लिए। उस आरोप पर किसी जाँच का नतीजा सार्वजनिक नहीं हुआ।

तीन नाम, दो-दो वर्तनियाँ

एक ही मामले में स्रोत नामों पर एकमत नहीं हैं। झारखंड के कोच को फ़्री प्रेस जर्नल, लेटेस्टली और द ट्रिब्यून की सितंबर वाली रिपोर्ट "सुधीर गोल्ला" लिखती हैं, जबकि आउटलुक और द ट्रिब्यून की जुलाई वाली रिपोर्ट "सुधीर गोला"। समिति की सदस्य को फ़्री प्रेस जर्नल "ममता खरब" और द ट्रिब्यून तथा लेटेस्टली "ममता खराब" लिखते हैं। महासचिव का नाम हॉकी इंडिया की वेबसाइट और ट्रिब्यून में "भोला नाथ सिंह" है, आउटलुक में "भोलानाथ सिंह"। जिन पर जाँच बैठी है, उनके नाम की वर्तनी तक अभी एक नहीं हुई।

स्रोतफ़्री प्रेस जर्नल, आईओए की जाँच समिति के गठन की ख़बर और चिट्ठी के उद्धरण, 9 सितंबर 2026, द ट्रिब्यून, समिति के गठन और ख़र्च की रिपोर्ट, 9 सितंबर 2026, लेटेस्टली, समिति के गठन और दोनों पक्षों के इनकार की रिपोर्ट, 9 सितंबर 2026, द ट्रिब्यून, नैतिकता समिति के कारण बताओ नोटिस और लकड़ा की चिट्ठी पर रिपोर्ट, 17 जुलाई 2026, द ट्रिब्यून, खेल मंत्रालय के निर्देश पर सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट, 17 जुलाई 2026, आउटलुक इंडिया, लकड़ा की चिट्ठी, सिंह का इनकार और तिर्की का बयान, 11 जुलाई 2026, न्यूज़ड्रम, मंत्रालय के निर्देश और तिर्की के ईमेल पर रिपोर्ट, 16 जुलाई 2026, द ट्रिब्यून, तेलंगाना हॉकी अध्यक्ष के पुराने आरोप और सिंह का खंडन, 26 नवंबर 2023, हॉकी इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट, कार्यकारी बोर्ड और पदाधिकारियों की सूची, हॉकी इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट, 31 मार्च 2026 से प्रभावी समितियों की सूची, हॉकी इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट, आरटीआई प्रकोष्ठ और कर्मचारियों की सूची, इंडियन कानून, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013 की धारा 4 का पाठ, केरल उच्च न्यायालय, वीमेन इन सिनेमा कलेक्टिव बनाम केरल राज्य, 17 मार्च 2022, दिल्ली उच्च न्यायालय, ऑल इंडिया कैरम फ़ेडरेशन बनाम भारत संघ, 2 सितंबर 2026, दिल्ली उच्च न्यायालय, कर्नाटक जूडो एसोसिएशन बनाम जूडो फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया, 12 फ़रवरी 2026, लॉयड लॉ कॉलेज का विश्लेषण, राष्ट्रीय खेल अधिशासन अधिनियम 2025 के प्रावधान, एसपीआरएफ़ का विश्लेषण, अधिनियम में शिकायत तंत्र की कमियों पर, ईएसपीएन, आईओए की सात सदस्यीय समिति पर रिपोर्ट, 20 जनवरी 2023, ईएसपीएन, खेल मंत्रालय की निगरानी समिति और एक महीने की समयसीमा, 23 जनवरी 2023, विकिपीडिया, ममता खरब का खेल रिकॉर्ड, विकिपीडिया, वंदना राव का खेल रिकॉर्ड

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।