विषय
मानवाधिकार
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समझिए
ट्रांसजेंडर पहचान का क़ानून बदला, सुप्रीम कोर्ट ने कहा: पुराने अधिकार सुरक्षित रहेंगे
3 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट की तीन-जजों की बेंच ने मौखिक तौर पर कहा कि ट्रांसजेंडर पहचान क़ानून में हुआ बदलाव पहले दिए गए अधिकार नहीं छीन सकता, पर कोई लिखित आदेश नहीं दिया। यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई में आई जो मार्च 2026 के संशोधन को चुनौती देती है, जिसने स्वयं-अनुभूत लैंगिक पहचान का अधिकार क़ानून से हटाकर उसकी जगह मेडिकल बोर्ड की सिफ़ारिश ज़रूरी कर दी है।
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देश
तमिलनाडु ने क़ानून-व्यवस्था विभाग को सूचना अधिकार क़ानून से बाहर किया, जिस धारा से यह हुआ वह सिर्फ़ ख़ुफ़िया और सुरक्षा संगठनों के लिए है
इक्कीस सितंबर को जारी जी.ओ. संख्या 57 में एक ही वाक्य है: राज्यपाल ने लोक (क़ानून-व्यवस्था) विभाग को धारा 24(4) के तहत 'ख़ुफ़िया और सुरक्षा संगठन' घोषित कर दिया है। ठीक तीन महीने पहले सुप्रीम कोर्ट उसी धारा पर मध्य प्रदेश की एक अधिसूचना रद्द कर चुका है, यह कहते हुए कि दर्जा अधिकार क्षेत्र से तय होता है, नाम से नहीं।
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दुनिया
कैप डाओ पर हमले में भारतीय नाविक की मौत, हथियार पर तीन अलग दावे
23 सितंबर की दोपहर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में मालवाहक जहाज़ एमवी कैप डाओ पर हमला हुआ, जिसमें उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी नाविक सूरज यादव की मौत हो गई। यूकेएमटीओ की चेतावनी संख्या 142-26 इसे 'अज्ञात प्रक्षेप्य' का हमला बताती है, नाविकों के संगठन एफ़एसयूआई ने दो टॉरपीडो की बात कही, और एक रिपोर्ट में इसे मिसाइल हमला लिखा गया; किसी सरकारी, यूकेएमटीओ या ध्वज-राष्ट्र दस्तावेज़ ने अब तक हमलावर का नाम नहीं लिया है।
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देश
केंद्र ने कर्नाटक हाई कोर्ट से कहा, कर छूट में 'जीवनसाथी' का दायरा बढ़ा तो क़रीब 159 क़ानून नहीं चल पाएँगे
शनिवार, 19 सितंबर को जस्टिस बी एम श्याम प्रसाद की एकल पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बहस की। मामला 14.41 ग्राम के एक सोने के कड़े से शुरू हुआ था और अब आयकर क़ानून के एक परंतुक पर टिका है। अदालत ने कुछ तय नहीं किया। अगली तारीख़ 9 अक्टूबर है।
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देश
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने गोलपाड़ा की तोड़-फोड़ को ग़ैर-क़ानूनी नहीं ठहराया, सवाल 13 अक्टूबर के लिए रख दिया
गोलपाड़ा के मटिया राजस्व सर्कल के अंचल अधिकारी ने 5 सितंबर 2026 को नोटिस जारी किए जिनमें मकान मालिकों से कहा गया था कि अपने घर 24 घंटे में ख़ुद गिरा लें। 7 सितंबर की सुबह, अँधेरा रहते, घर गिरा दिए गए। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उसी दिन और फिर 11 सितंबर को दो अंतरिम आदेश दिए, दोनों में 'प्रथम दृष्टया' लिखकर, और असली सवाल 13 अक्टूबर के लिए टाल दिया।
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काम की बात
मुक़दमा लंबित हो तो पासपोर्ट अदालत की लिखित अनुमति और एक वचन-पत्र पर मिलता है
पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 6(2)(f) उसी पर लागू होती है जिसका मामला किसी आपराधिक अदालत के सामने लंबित है। 25 अगस्त 1993 की अधिसूचना उससे छूट देती है, बशर्ते आप उसी अदालत का आदेश और सादे काग़ज़ पर लिखा वचन-पत्र साथ लगाएँ। सिर्फ़ एफ़आईआर दर्ज हो और जाँच चल रही हो, तो विदेश मंत्रालय की अपनी हिदायत कहती है कि यह धारा लगती ही नहीं।
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इत्मीनान
क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट 31 अगस्त 1952 को हटा और पंजाब का अगला क़ानून उसी दिन लागू हो गया
1871 के जिस क़ानून ने पूरी बिरादरियों को जन्म से अपराधी मान लिया था, उसकी अधिसूचनाएँ 31 अगस्त 1952 को ख़त्म हुईं और इन समुदायों को 'विमुक्त' नाम मिला। चौहत्तर साल बाद उस ढाँचे का कितना हिस्सा दूसरे नाम से चल रहा है, यह पंजाब के 1952 के आदतन अपराधी क़ानून में और सुप्रीम कोर्ट की गिनाई तेरह राज्यों की सूची में दर्ज है।
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देश
एक मुक़दमे में बरी, दूसरे में मुक़दमा चल रहा: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गोंडा का ज़िला-बदर आदेश रद्द किया
गुरुवार, 10 सितंबर को जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने गोंडा के ज़िलाधिकारी का वह आदेश रद्द कर दिया जिसमें ज़ाहिद अली को 'गुंडा' घोषित करके छह महीने के लिए ज़िले से बाहर किया गया था। फ़ैसले में लिखा है कि अदालतें बार-बार टोक चुकी हैं, फिर भी राज्य गुंडा एक्ट को दमन के औज़ार की तरह इस्तेमाल करने पर लगातार बना हुआ है, और यह मामला उसी दुरुपयोग की चमकती मिसाल है।
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समझिए
दिल्ली हवाई अड्डे पर 63 सोशल मीडिया हैंडल के ख़िलाफ़ एफ़आईआर हुई, पर किन धाराओं में, यह अब तक सार्वजनिक नहीं
डायल ने 9 सितंबर को दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की घोषणा की। कंपनी के बयान में जो अंग्रेज़ी शब्द है, 'public mischief', वह भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 का शीर्षक है; उसकी पहली उपधारा असंज्ञेय है, और मानहानि पर पुलिस अपने आप मुक़दमा चला ही नहीं सकती। हवाई अड्डे ने 4 सितंबर को ख़ुद जो परामर्श जारी किया था, उसमें उड़ानों के विलंब और डायवर्जन दर्ज हैं।
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मैदान
हॉकी इंडिया के सचिव पर लगे आरोपों की जाँच आईओए की समिति करेगी, ख़र्च हॉकी इंडिया उठाएगा
भारतीय ओलंपिक संघ ने चार सदस्यों की समिति बनाई है, जो पूर्व कप्तान असुंता लकड़ा के आरोपों की जाँच करेगी। आरोप हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह पर हैं, जिन्हें उन्होंने ख़ारिज किया है। आईओए की चिट्ठी में समिति के ख़र्च की ज़िम्मेदारी हॉकी इंडिया पर डाली गई है और सहयोग के लिए 'अनुरोध' किया गया है। रिपोर्ट कब तक आनी है, यह किसी रिपोर्ट में दर्ज नहीं।
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देश
गरियाबंद के अधूरे पुल पर आयोग की विज्ञप्ति छह साल की देरी गिनाती है, विभाग का इंजीनियर तीन साल
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मैनपुर ब्लॉक में बच्चों के नदी पार करने पर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है। उसकी विज्ञप्ति में पुल क़रीब छह साल से निर्माणाधीन है। उसी 3 सितंबर को छपी एक दूसरी रिपोर्ट में विभाग का इंजीनियर काम की शुरुआत सितंबर 2023 बताता है और जून 2025 तक दिए गए विस्तार का ज़िक्र करता है।
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देश
किलोकरी में एक संगीतकार शोर की शिकायत करने नीचे उतरा और ज़िंदा नहीं लौटा; बारह साल पहले बनी समिति का क़ानून आज भी नहीं बना है
चोंगथम विक्रम सिंह की मौत के बाद आठ गिरफ़्तारियाँ हुईं और मंत्री ने आठ-नौ दिन में चार्जशीट का भरोसा दिया। पुलिस कहती है कि नस्लीय मक़सद साबित नहीं हुआ। 2014 में निदो तानियम की मौत के बाद जो समिति बनी थी, उसकी सबसे बड़ी सिफ़ारिश आज तक संसद में नहीं पहुँची।
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देश
अदालत ने उसे राहत के लिए न्यायाधिकरण भेजा था, और वह बांग्लादेश में धकेल दी गई
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार को मुमताज़ बेगम को दो लाख रुपये देने का आदेश दिया है। यह पहली बार है जब किसी अदालत ने किसी को सीमा पार धकेलने पर राज्य पर ख़र्च डाला हो।
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काम की बात
नशे की लत है और पुलिस का डर भी: क़ानून में एक धारा है जो इलाज कराने पर मुक़दमे से बचाती है
एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64ए कहती है कि जो व्यक्ति ख़ुद इलाज के लिए आगे आता है, उस पर कम मात्रा वाले मामले में मुक़दमा नहीं चलेगा। शर्त एक है, और उसे न जानने पर यह छूट वापस ली जा सकती है।
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देश
बार काउंसिल ने एक पूरे बैच को वकील बनने से रोक दिया था, और सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यह अधिकार आया कहाँ से
अधिवक्ता अधिनियम 1961 में वह धारा है ही नहीं। तीन जजों की पीठ ने कहा कि बार काउंसिल का अनुशासन तब शुरू होता है जब कोई वकील बन जाए, उससे पहले नहीं। जिन जजों ने यह कहा, उनमें वही मुख्य न्यायाधीश थे जिनके विरोध से यह सब शुरू हुआ था।
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देश ढाई महीने में 3,800 से ज़्यादा बच्चे मज़दूरी से छुड़ाए गए, और 575 मुक़दमे दर्ज हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का अखिल भारतीय अभियान 12 जून से 31 अगस्त तक चला। दोनों आँकड़े आयोग के अपने हैं और दोनों एक ही विज्ञप्ति में हैं।
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समझिए जेल में बंद हर चार में से तीन लोगों पर मुक़दमा अभी चल ही रहा है, दो में से तीन नहीं एनसीआरबी की ताज़ा कारागार रिपोर्ट कहती है कि 72.6 फ़ीसदी क़ैदी विचाराधीन हैं। जो आँकड़ा हर जगह दोहराया जाता है, दो-तिहाई वाला, वह 2005 का है।