भारत पन्ना
हर बुधवार

सियासतनामा

हर बुधवार — सत्ता असल में चलती कैसे थी। इतिहास, क़िस्सागोई नहीं।

5 कड़ियाँ · इत्मीनान में छपती है
  1. जून 1966जिस हफ़्ते की तारीख़ पर ख़ुद एक समकालीन दस्तावेज़ आपस में सहमत नहीं है रुपया एक झटके में 4.7619 से 7.50 प्रति डॉलर हुआ, 6 जून 1966 को, और एक अमेरिकी दस्तावेज़ ख़ुद अपनी दी हुई तारीख़ पर बँटा हुआ हैअमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व बोर्ड की अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट, 27 जुलाई 1966 की, इसी घटना की तारीख़ एक जगह 5 जून लिखती है और दो जगह 6 जून, एक ही दस्तावेज़ में। भारतीय रिज़र्व बैंक की अपनी आधिकारिक इतिहास-पुस्तक और उस हफ़्ते की लोकसभा-राज्यसभा बहस का पूरा पाठ यह लेख खोल नहीं सका; जो खुला और जो नहीं खुला, दोनों दर्ज हैं।13 मिनट · बुधवार, 23 सितंबर
  2. 1951जिस साल एक समान संहिता बनाने की पहली कोशिश टूटकर बिखर गई 139 धाराओं का हिंदू कोड बिल चार साल में चार धाराएँ ही पार कर सका, और उसे काटकर छोटा करने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री का थाअंबेडकर के अपने इस्तीफ़ा-बयान में हिंदू कोड पाँचवें नंबर पर है। उससे पहले वे क़ानून मंत्रालय को 'ख़ाली साबुन की डिबिया' कहते हैं, अनुसूचित जातियों की हालत गिनाते हैं, विदेश नीति पर सवाल उठाते हैं और मंत्रिमंडल की समितियों को 'लोहे के परदे के पीछे' बताते हैं। वह बयान लोकसभा में पढ़ा भी नहीं जा सका।17 मिनट · बुधवार, 16 सितंबर
  3. 1983–88जब एक आयोग ने पूछा कि राज्यपाल किसका आदमी है सरकारिया आयोग ने 1988 में अनुच्छेद 356 पर जो लगाम माँगी थी, वह सरकार ने नहीं, 1994 में सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों ने लगाई; और उसकी अंतर-राज्य परिषद 36 साल में बारह बार से ज़्यादा नहीं बैठी'सरकारिया आयोग' नाम के दो आयोग हुए। 7 सितंबर को तमिलनाडु विधानसभा में जिसका हवाला दिया गया, वह 1976 की जाँच है; केंद्र-राज्य संबंधों वाला आयोग 1983 में बना और उसकी 247 सिफ़ारिशों में से सरकार 180 को 'स्वीकृत' गिनती है। हमने आयोग के अपने अध्याय, 1990 का राष्ट्रपति-आदेश, परिषद की अपनी बैठक-सूची और लोकसभा का उत्तर पढ़कर मिलाया कि क्या सिफ़ारिश हुआ था और क्या हुआ।17 मिनट · बुधवार, 9 सितंबर
  4. 1951–52जिन आठ महीनों में भारत ने पहली बार वोट डाला पहला आम चुनाव: हर उम्मीदवार का अपना मतपेटी थी, और वोटर को कुछ लिखना नहीं थासुकुमार सेन की अपनी रिपोर्ट कहती है कि देश में साक्षरता सिर्फ़ 16.6 फ़ीसदी थी, इसलिए मतपत्र पर नाम छापने का कोई मतलब नहीं था। जो तरीक़ा निकाला गया, उसमें पचीस लाख से ज़्यादा पेटियाँ लगीं।10 मिनट · बुधवार, 2 सितंबर
  5. 1947–49जिस आँकड़े पर पूरी कहानी टिकी है, वह एक भाषण की अटकल है 565 रियासतों वाला आँकड़ा सरकार का नहीं है, और उनमें से 327 रियासतें थीं ही नहींयह संख्या माउंटबेटन ने 25 जुलाई 1947 के भाषण में 'लगभग' कहकर बोली थी। सरकार के अपने श्वेत पत्र में वह एक ही बार छपी है, उसी भाषण के हवाले में। विभाग का अपना आँकड़ा 552 है।7 मिनट · शनिवार, 29 अगस्त

आगे किसकी बारी

तय है, बदल भी सकता है। हर बुधवार को एक।

  1. 11949: भाषा पर वह वोट
  2. 21947–50: नेहरू और पटेल
  3. 31950–52: राष्ट्रपति बनाम प्रधानमंत्री
  4. 41948–56: हिंदू कोड बिल और अंबेडकर

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।

यह सिलसिला इत्मीनान डेस्क से आता है। बाक़ी सिलसिले यहाँ।