विषय
आवास
-
देश
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने गोलपाड़ा की तोड़-फोड़ को ग़ैर-क़ानूनी नहीं ठहराया, सवाल 13 अक्टूबर के लिए रख दिया
गोलपाड़ा के मटिया राजस्व सर्कल के अंचल अधिकारी ने 5 सितंबर 2026 को नोटिस जारी किए जिनमें मकान मालिकों से कहा गया था कि अपने घर 24 घंटे में ख़ुद गिरा लें। 7 सितंबर की सुबह, अँधेरा रहते, घर गिरा दिए गए। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उसी दिन और फिर 11 सितंबर को दो अंतरिम आदेश दिए, दोनों में 'प्रथम दृष्टया' लिखकर, और असली सवाल 13 अक्टूबर के लिए टाल दिया।
-
देश
दिल्ली का पीजी लाइसेंस 90 दिन में बनना है, पर 'लॉजिंग हाउस' का लाइसेंस 1957 के क़ानून में पहले से लिखा है
सत्य निकेतन में एक निजी छात्रावास गिरने के बाद दिल्ली सरकार का मसौदा विधेयक हर पीजी इमारत से 90 दिन में नगर निगम के ज़ोनल अधिकारी का लाइसेंस माँगता है। दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की ग्यारहवीं अनुसूची में 'लॉजिंग हाउस रखना' उन्हीं कामों में गिना गया है जो बिना लाइसेंस नहीं हो सकते। पीजी को नियम के दायरे में लाने की कोशिशें 1993 से चल रही हैं।
-
काम की बात
पीजी का अपना कोई लाइसेंस नहीं होता, इसलिए कमरा लेने से पहले जो काग़ज़ माँगने हैं वे इमारत के हैं, और माँगने का एक क्रम है
दिल्ली नगर निगम पीजी का लाइसेंस जारी नहीं करता, इसलिए पूछताछ इमारत से शुरू होती है: मंज़ूर नक़्शा, फ़ॉर्म H का अग्नि-सुरक्षा प्रमाणपत्र और उसके साथ हर साल का फ़ॉर्म K। बेंगलुरु और गुरुग्राम के नियम बताते हैं कि और क्या माँगा जा सकता है। हर क़दम के साथ वह क़ानून, जिससे वह क़दम निकलता है, और वह जगह भी जहाँ कोई क़ानून नहीं है।
-
देश
सत्य निकेतन की उस इमारत पर कोई क़ानून नहीं चलता था, और यह 1993 से सबको पता है
दिल्ली में पीजी न होटल है, न छात्रावास, न गेस्टहाउस। नगर निगम उसका लाइसेंस नहीं देता। तैंतीस साल में छह बार 'योजना' बनी। 6 सितंबर को एक इमारत ढही, सात छात्र मारे गए, और अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को भी पीछे कर दिया है।
-
समझिए
जेएनयू अपने आधे से ज़्यादा छात्रों को कमरा देता है, डीयू सौ में एक को
दिल्ली विश्वविद्यालय के अपने दाख़िले के मुताबिक़ उसके यहाँ सात लाख छात्र हैं और साढ़े तीन लाख बाहर से आए हैं। उसके हॉस्टलों में सात हज़ार बिस्तर हैं। जिन्हें बिस्तर मिलता है वे साल का तेरह हज़ार देते हैं, जिन्हें नहीं मिलता वे महीने का चौदह हज़ार।