विषय
जम्मू-कश्मीर
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काम की बात
पचास रुपये की अर्ज़ी पर सरकारी कर्मचारी का सेवा-विवाद कैट सुनता है, नियम में छह महीने की समय-सीमा दर्ज है
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी कैट में मूल आवेदन की फ़ीस 50 रुपये है, और यही रक़म 1987 के गजट, कैट के ई-फ़ाइलिंग मैनुअल और इस विज्ञप्ति, तीनों में दर्ज है। प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1985 की धारा 20 कहती है कि पहले विभाग में प्रतिवेदन दो, धारा 21 कहती है कि उसके बाद एक साल के भीतर अर्ज़ी लगे, और धारा 23 कहती है कि वकील रखना ज़रूरी नहीं। कैट (प्रक्रिया) नियम, 1987 का नियम 14(2) कहता है कि हर आवेदन रजिस्ट्रेशन से छह महीने के भीतर, जहाँ तक हो सके, सुना और तय किया जाए।
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समझिए
हाई कोर्टों में अगस्त की 42 नियुक्तियों के बाद ख़ाली कुर्सियाँ 341 से घटकर 304 हुईं
1 जुलाई और 1 अगस्त 2026, न्याय विभाग की दोनों मासिक सूचियों में एक ही संख्या दर्ज है: 1,122 स्वीकृत पद, 781 कार्यरत जज, 341 ख़ाली कुर्सियाँ। 1 सितंबर की सूची में ख़ाली पद 304 हैं। बीच में 7, 20 और 27 अगस्त की छह अधिसूचनाएँ हैं।
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दुनिया
ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणापत्र के 140 पैराग्राफ़ में यूक्रेन एक बार नहीं आता
शनिवार, 12 सितंबर को भारत मंडपम में अठारहवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाया। प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर चढ़े उसके पूरे पाठ को पढ़कर और जुलाई 2025 के रियो घोषणापत्र के सामने रखकर देखने पर तीन चीज़ें निकलती हैं: यूक्रेन का ज़िक्र ग़ायब है, आतंकवाद वाला पैराग्राफ़ लगभग पूरा रियो से उठाया हुआ है, और ईरान पर रियो में जो निंदा दर्ज थी वह इस बार नहीं लिखी गई।
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समझिए
ज़रूरी खनिजों के लिए बाहर खदानें, घर में ब्लॉक बिना ख़रीदार लौट रहे हैं
शुक्रवार को दिल्ली में खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि भारत ऑस्ट्रेलिया और चिली में लिथियम ब्लॉक लेने की बात कर रहा है और अर्जेंटीना में पाँच और चाहता है। उसी दिन देश के भीतर आठवें दौर की नीलामी खुली हुई थी, जिसकी बोली 21 सितंबर को बंद होगी।
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समझिए
लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371(K) का प्रस्ताव रखा गया है, पर विधानसभा के बिना विधायी अधिकार किसके पास होगा यह अभी लिखा नहीं गया
9 सितंबर को नई दिल्ली में गृह मंत्रालय ने लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सामने अनुच्छेद 371 में एक नया खंड रखा। इसमें न राज्य का दर्जा है, न छठी अनुसूची, न विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश। जिस मसौदे की उम्मीद थी वह नहीं मिला।