विषय
मुंबई
-
पैसा
एम्बैसी डेवलपमेंट्स ने जुहू के पूरे टावर के लिए 711 करोड़ का समझौता ज्ञापन दाख़िल किया, बिक्री अभी पंजीकृत नहीं हुई
मंगलवार, 22 सितंबर की सुबह 6:58 बजे कंपनी सचिव विकास खंडेलवाल के दस्तख़त से एम्बैसी डेवलपमेंट्स ने बीएसई और एनएसई को बताया कि जुहू के एम्बैसी टेराज़ा प्रोजेक्ट का एक पूरा जी+7 टावर एंजेल वन के संस्थापक दिनेश ठक्कर को लगभग 711 करोड़ रुपये में बेचने का समझौता ज्ञापन हुआ है। विज्ञप्ति ख़ुद इसे समझौता ज्ञापन बताती है, पूरी बिक्री नहीं, और रजिस्ट्री की कोई तारीख़ दर्ज नहीं है।
-
पैसा
टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति शुरू से शून्य बताई, आधार अनुच्छेद 121
रविवार, 20 सितंबर 2026 को टाटा संस की सबसे बड़ी हिस्सेदार ने अपनी वेबसाइट पर विज्ञप्ति डालकर कहा कि 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में पास हुआ प्रस्ताव क़ानून की नज़र में शुरू से शून्य है। पूरी दलील कंपनी के संविधान के एक वाक्य पर टिकी है, और उस वाक्य के दो पाठ आमने-सामने हैं।
-
पैसा
एनएसई के निर्गम में खुदरा के हिस्से के 1,22,41,221 शेयरों पर दूसरे दिन शाम तक कोई बोली नहीं थी
शुक्रवार, 18 सितंबर को शाम सात बजे एनएसई की अपनी बोली-फ़ीड पर खुदरा श्रेणी 0.72 गुना भरी दिखती है। बाक़ी तीनों श्रेणियाँ भर चुकी थीं। जिस 1,785 रुपये के ऊपरी भाव पर यह बोली लगी, वह उन्हीं दामों से नीचे है जिन पर बेचने वाले शेयरधारक पिछले साल भर एनएसई के शेयर ख़रीदते-बेचते रहे।
-
पैसा
सिरिंज पर 516 फ़ीसदी का औसत व्यापार मार्जिन एनपीपीए ने 2018 में ख़ुद नापा था, आदेश आठ साल में नहीं आया
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषध प्रशासन ने केंद्र को लिखा है कि 11.05 रुपये में अस्पताल तक पहुँचे एक ड्रिप सेट पर 325 रुपये की एमआरपी छपी है। राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने ठीक यही हिसाब सिरिंज और सुइयों पर 1 मार्च 2018 के अपने दफ़्तरी ज्ञापन में छापा था, हितधारकों से राय माँगी थी, और उसके बाद इन तीनों में से किसी पर कोई मूल्य आदेश जारी नहीं किया।
-
पैसा
बाज़ार चलाने वाला एनएसई ख़ुद बीएसई पर सूचीबद्ध होगा, 17 सितंबर को आईपीओ खुलेगा
10 सितंबर 2026 के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में 12,64,36,650 शेयर बिकने की बात दर्ज है और तारीख़ें भी। भाव दर्ज नहीं है। पुराने शेयर बेचने वाले 23 शेयरधारक हैं और कंपनी को इस बिक्री से एक रुपया नहीं मिलेगा।
-
पैसा
बैंक ऑफ़ इंडिया आज 120 साल का हुआ, और उसका सबसे मशहूर दावा जाँच में नहीं टिकता
बैंक की अपनी वेबसाइट कहती है कि यह पूरी तरह भारतीयों के स्वामित्व और प्रबंधन वाला पहला बैंक था। अवध कमर्शियल बैंक 1881 का है और पंजाब नेशनल बैंक 1894 का। दोनों पहले हैं।