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बाज़ार चलाने वाला एनएसई ख़ुद बीएसई पर सूचीबद्ध होगा, 17 सितंबर को आईपीओ खुलेगा

10 सितंबर 2026 के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में 12,64,36,650 शेयर बिकने की बात दर्ज है और तारीख़ें भी। भाव दर्ज नहीं है। पुराने शेयर बेचने वाले 23 शेयरधारक हैं और कंपनी को इस बिक्री से एक रुपया नहीं मिलेगा।

मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में एनएसई का भवन एक्सचेंज प्लाज़ा, अप्रैल 2021 की तस्वीर; इसी कंपनी का रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस 10 सितंबर 2026 को कंपनी रजिस्ट्रार के पास गया
तस्वीर: 312user, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया लिमिटेड का रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस 10 सितंबर 2026 की तारीख़ का है, और 11 सितंबर को वह सेबी की वेबसाइट पर आ गया। 668 पन्नों के इस दस्तावेज़ में तारीख़ें दर्ज हैं। बोली गुरुवार, 17 सितंबर को खुलेगी और सोमवार, 21 सितंबर को बंद होगी। एंकर निवेशकों की बोली उससे एक दिन पहले, बुधवार 16 सितंबर को होगी और उसी दिन बंद भी हो जाएगी।

शेयरों की संख्या भी दर्ज है। 12,64,36,650 शेयर, हर एक का अंकित मूल्य एक रुपया। इनमें से एक भी नया शेयर नहीं है।

भाव दर्ज नहीं है। प्रॉस्पेक्टस में जहाँ-जहाँ क़ीमत आनी थी, वहाँ एक काला गोला छपा है।

प्रॉस्पेक्टस में दर्ज तारीख़ें, शेयर और दो अख़बारों के आँकड़े

दस्तावेज़ के पहले पन्ने पर निर्गम का प्रकार एक शब्द में लिखा है: ऑफ़र फ़ॉर सेल। उसके बगल वाले ख़ाने में, जहाँ नए शेयरों का आकार आना था, लिखा है कि यह लागू नहीं होता। पूरा निर्गम पुराने शेयरधारकों की बिक्री है। कंपनी के ख़ज़ाने में इससे कुछ नहीं जाएगा।

यह बात प्रॉस्पेक्टस में जोखिम संख्या 33 के तौर पर अलग से दर्ज है: निर्गम का पैसा, ख़र्च काटकर, हर बेचने वाले शेयरधारक को उसके हिस्से के मुताबिक़ मिलेगा। एक और जगह इसी का व्यावहारिक असर लिखा है। सार्वजनिक निर्गम में जुटी रक़म कहाँ ख़र्च हुई, यह देखने के लिए कंपनियों को निगरानी एजेंसी रखनी पड़ती है। एनएसई को नहीं रखनी पड़ी, क्योंकि निगरानी के लिए कोई रक़म ही नहीं आ रही।

12,64,36,650 शेयर कंपनी की कुल पूँजी का 5.11 फ़ीसदी हैं। एनएसई के कुल 247.5 करोड़ शेयर हैं, और बिक्री के बाद भी इतने ही रहेंगे।

भाव का सवाल इससे अलग रास्ते से तय होता है। प्रॉस्पेक्टस ख़ुद कहता है कि मूल्य दायरा, कर्मचारियों को मिलने वाली छूट और बोली की न्यूनतम इकाई बोली खुलने से कम से कम दो कार्य दिवस पहले अख़बारों में छपेंगे, फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस के सभी संस्करणों में, जनसत्ता के सभी संस्करणों में और नवशक्ति के मुंबई संस्करण में।

इंडियन एक्सप्रेस ने 11 सितंबर को लिखा कि दायरा 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर है। उसी दिन द हिंदू ने लिखा कि निर्गम 22,569 करोड़ रुपये का है। ये दोनों आँकड़े एक-दूसरे को काटते नहीं, एक ही आँकड़ा हैं। 12,64,36,650 को 1,785 से गुणा करने पर 22,568.94 करोड़ रुपये आते हैं। यानी 22,569 करोड़ रुपये दायरे के ऊपरी सिरे पर निर्गम का आकार है। निचले सिरे 1,700 रुपये पर वही निर्गम 21,494.23 करोड़ रुपये का बैठता है। सेबी के पास जमा दस्तावेज़ में इनमें से कोई आँकड़ा नहीं है; उसमें सिर्फ़ शेयरों की संख्या है।

आकार के लिहाज़ से यह दूसरा सबसे बड़ा निर्गम बनेगा

ऊपरी सिरे का 22,569 करोड़ रुपये भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम नहीं है।

ह्युंडई मोटर इंडिया लिमिटेड का प्रॉस्पेक्टस 17 अक्टूबर 2024 का है और सेबी की वेबसाइट पर मौजूद है। उसमें निर्गम का आकार 27,855.68 करोड़ रुपये दर्ज है, 14,21,94,700 शेयर, हर एक का अंकित मूल्य दस रुपये। वह भी पूरी तरह पुराने शेयरों की बिक्री थी।

भारतीय जीवन बीमा निगम का प्रॉस्पेक्टस 12 मई 2022 का है। उसमें 22,13,74,920 शेयर और 20,557.23 करोड़ रुपये दर्ज हैं। बेचने वाले एक ही थे, भारत के राष्ट्रपति, वित्त मंत्रालय के ज़रिए, और उनके शेयरों की भारित औसत लागत 16 पैसे प्रति शेयर प्रमाणित की गई थी।

एनएसई का निर्गम इन दोनों के बीच बैठता है। तीनों में एक बात साझा है: जिस संस्था का नाम प्रॉस्पेक्टस के मुखपृष्ठ पर है, उसे इस पूरी क़वायद से कुछ नहीं मिला। ह्युंडई का एक प्रवर्तक था, ह्युंडई मोटर कंपनी, और जीवन बीमा निगम का प्रवर्तक सरकार थी। एनएसई का कोई प्रवर्तक नहीं है, इसलिए उसके यहाँ बेचने वाले 23 अलग-अलग शेयरधारक हैं।

एक और बात इस निर्गम के साथ चलती है। प्रॉस्पेक्टस के प्रदर्शन सूचकांकों में दर्ज है कि 2025-26 में एनएसई के मुख्य मंच पर 108 सार्वजनिक निर्गम सूचीबद्ध हुए। जिस मंच पर देश की ज़्यादातर कंपनियाँ सूचीबद्ध होती हैं, उसके अपने शेयर उस पर नहीं चलेंगे।

एनएसई की मिल्कियत और सेबी की हदबंदी

एनएसई का कोई प्रवर्तक नहीं है। यह बात 2016 के मसौदे में भी दर्ज थी और 2026 के प्रॉस्पेक्टस में भी: कंपनी का कोई पहचाना जा सकने वाला प्रवर्तक नहीं है।

8 सितंबर 2026 की लाभार्थी स्थिति के हिसाब से कंपनी में 2,31,378 शेयरधारक हैं। इनमें 2,27,999 को सूचीबद्धता नियमों की भाषा में जनता कहा जाता है और उनके पास 1,67,05,55,049 शेयर यानी 67.50 फ़ीसदी पूँजी है। बाक़ी 80,44,44,951 शेयर, यानी 32.50 फ़ीसदी, 3,379 ऐसे धारकों के पास हैं जिन्हें दस्तावेज़ एक अलग ख़ाने में रखता है: ट्रेडिंग सदस्य और उनके सहयोगी। यानी वही ट्रेडिंग फ़र्में और उनसे जुड़ी इकाइयाँ, जिनका कारोबार इसी एक्सचेंज पर होता है और जिनकी निगरानी भी यही एक्सचेंज करता है।

यह इत्तेफ़ाक़ नहीं, नियम की बनाई हुई सीमा है। प्रॉस्पेक्टस जोखिम संख्या 53 में सेबी की स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन नियमावली, 2018 की शर्तें गिनाता है। एक्सचेंज की कम से कम 51 फ़ीसदी पूँजी जनता के पास होनी चाहिए। ट्रेडिंग सदस्य और उनके सहयोगी मिलकर किसी भी समय 49 फ़ीसदी से ज़्यादा नहीं रख सकते। भारत में रहने वाला कोई व्यक्ति 5 फ़ीसदी से ज़्यादा नहीं रख सकता, और यह सीमा 15 फ़ीसदी तभी होती है जब धारक कोई लोक वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनी, डिपॉज़िटरी, बैंक या ख़ुद कोई स्टॉक एक्सचेंज हो। 5 फ़ीसदी से ऊपर हर ख़रीद के लिए सेबी की पूर्व मंज़ूरी चाहिए। विदेश में रहने वालों के लिए भी यही 5 और 15 का ढाँचा है, और सबका जोड़ 49 फ़ीसदी से ऊपर नहीं जा सकता। 2 फ़ीसदी से ज़्यादा रखने वाले हर शेयरधारक को नियमावली की परिभाषा में उपयुक्त और उचित होना पड़ता है।

मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में सेबी भवन, अक्टूबर 2006 की तस्वीर; 51, 49, 15 और 5 फ़ीसदी वाली हदें इसी नियामक की 2018 की नियमावली से आती हैं
तस्वीर: Jimmy vikas, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

इन सीमाओं पर नज़र रखने के लिए एक्सचेंज को एक नामित डिपॉज़िटरी रखनी होती है। एनएसई ने सीडीएसएल को रखा है।

30 जून 2026 को ट्रेडिंग सदस्यों के पास 35.17 फ़ीसदी पूँजी थी और विदेशी धारकों के पास 27.72 फ़ीसदी। दोनों सीमा के भीतर हैं। इसी तारीख़ के आसपास 1,233 सार्वजनिक शेयरधारकों ने अपने 8,26,72,504 शेयर गिरवी रखे हुए थे।

बेचने वाले 23 हैं: 20 कंपनियाँ और तीन व्यक्ति। सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय स्टेट बैंक का है, जो अपने 7,98,47,050 शेयरों में से ठीक पाँचवाँ हिस्सा, 1,59,69,410 शेयर बेच रहा है। उसके बाद कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरिशस), एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरिशस), न्यू इंडिया एश्योरेंस, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, बैंक ऑफ़ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन, जीआईसी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस हैं। कंपनी के किसी निदेशक या वरिष्ठ प्रबंधन के पास एक भी शेयर नहीं है।

पहली फ़ाइल 2016 की है

एनएसई का पहला मसौदा प्रॉस्पेक्टस 28 दिसंबर 2016 की तारीख़ का है और 30 दिसंबर 2016 को सेबी के पास दर्ज हुआ। वह आज भी सेबी की वेबसाइट पर पड़ा है, 565 पन्नों का।

उस मसौदे में 11,14,11,970 शेयर बेचने की बात थी, और मुखपृष्ठ पर लिखा था कि यह निर्गम के बाद की चुकता पूँजी का 22.5 फ़ीसदी होगा। तब कंपनी की पूँजी 49.5 करोड़ शेयरों की थी। 4 नवंबर 2024 को एक के बदले चार के अनुपात में बोनस शेयर बाँटे गए, 1,98,00,00,000 नए शेयर, और पूँजी 247.5 करोड़ शेयरों की हो गई। आज की पूँजी पर 22.5 फ़ीसदी का मतलब लगभग 55.69 करोड़ शेयर होता। इस बार 12.64 करोड़ शेयर बिक रहे हैं।

बीच में क्या हुआ, यह भी सेबी के ही काग़ज़ों में है। पहले मसौदे के पाँच महीने बाद, 22 मई 2017 को, सेबी का पहला कारण बताओ नोटिस आया। फिर 3 जुलाई 2018 को दूसरा और 31 जुलाई 2018 को एक पूरक नोटिस। 30 अप्रैल 2019 को सेबी के पूर्णकालिक सदस्य के तीन आदेश आए, और उनमें से एक ने एनएसई पर छह महीने तक प्रतिभूति बाज़ार में उतरने की रोक लगा दी। प्रॉस्पेक्टस ख़ुद इस रोक का हवाला उस जोखिम के नीचे देता है जहाँ वह मंज़ूरियों में देरी की बात करता है।

देरी सिर्फ़ मुक़दमे की नहीं थी। दस्तावेज़ दर्ज करता है कि अशोक चावला के 11 जनवरी 2019 को हटने के बाद अध्यक्ष का पद 8 फ़रवरी से 5 दिसंबर 2019 तक ख़ाली रहा। फिर गिरीश चंद्र चतुर्वेदी का कार्यकाल 27 नवंबर 2023 को ख़त्म हुआ और अगली नियुक्ति 9 सितंबर 2025 को हुई, यानी 651 दिन का ख़ालीपन। प्रॉस्पेक्टस बताता है कि ऐसी चूक पर प्रतिभूति संविदा अधिनियम की धारा 23एच और सेबी अधिनियम की धारा 15एचबी के तहत एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

सूचीबद्ध होने की मंज़ूरी 30 जनवरी 2026 को आई। प्रॉस्पेक्टस में उस पत्र का क्रमांक तक दर्ज है, और लिखा है कि मंज़ूरी उसमें गिनाई गई तमाम शर्तों के अधीन है। नया मसौदा 17 जून 2026 को दाख़िल हुआ, बीएसई की सैद्धांतिक मंज़ूरी 20 जुलाई 2026 को मिली, और रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस 10 सितंबर 2026 को कंपनी रजिस्ट्रार के पास गया। पहली फ़ाइल और इस फ़ाइल के बीच नौ साल आठ महीने पड़े हैं।

को-लोकेशन मामले का समझौता और सुप्रीम कोर्ट में बची अपील

को-लोकेशन का मतलब सीधा है। ट्रेडिंग सदस्य अपने सर्वर एक्सचेंज के डेटा सेंटर के भीतर या उसके पास रख देते हैं, ताकि उनका ऑर्डर कम दूरी तय करे और कुछ सूक्ष्म क्षणों पहले पहुँचे। आरोप यह था कि एनएसई की व्यवस्था में कुछ सदस्यों को टिक-बाय-टिक आँकड़ों तक औरों से पहले पहुँच मिल जाती थी, और दूसरे मामले में यह कि ग़ैर-इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को परिसर में फ़ाइबर बिछाने दिया गया, जिसे दस्तावेज़ डार्क फ़ाइबर कहता है।

एक डेटा सेंटर में रैक पर कसे सर्वर और उनके पीछे दौड़ती केबलें, अगस्त 2023 की यह तस्वीर एनएसई की नहीं है; को-लोकेशन में ट्रेडिंग सदस्य अपने सर्वर ऐसे ही रैक में एक्सचेंज के डेटा सेंटर के भीतर रखते हैं
तस्वीर: Btrs, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

30 अप्रैल 2019 के आदेशों में को-लोकेशन वाले आदेश ने एनएसई से 624.89 करोड़ रुपये वापस करने को कहा, साथ में 1 अप्रैल 2014 से 12 फ़ीसदी सालाना ब्याज, और छह महीने की बाज़ार-रोक। डार्क फ़ाइबर वाले आदेश में 62.58 करोड़ रुपये जमा करने थे, 11 सितंबर 2015 से उसी दर पर ब्याज के साथ। तीसरा आदेश शासन और हितों के टकराव पर था और उसमें केवल ग़ैर-मौद्रिक निर्देश थे। अधिनिर्णय अधिकारी के अलग आदेश बाद में आए: को-लोकेशन पर 10 फ़रवरी 2021 को एक करोड़, डार्क फ़ाइबर पर 28 जून 2022 को सात करोड़, शासन पर 30 जून 2022 को एक करोड़।

अपील में यह सब पलट गया। प्रतिभूति अपीलीय अधिकरण ने 23 जनवरी 2023 को ग़ैर-मौद्रिक निर्देश बरक़रार रखे, पर वसूली का निर्देश रद्द कर दिया और उसकी जगह एनएसई को निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण कोष में 100 करोड़ रुपये जमा करने को कहा, यह दर्ज करते हुए कि एनएसई ने समुचित सावधानी नहीं बरती। 12 जुलाई 2023 को अधिकरण ने को-लोकेशन वाला अधिनिर्णय आदेश रद्द किया, 9 अगस्त 2023 को डार्क फ़ाइबर की वसूली पलटी और 14 दिसंबर 2023 को डार्क फ़ाइबर वाला अधिनिर्णय आदेश भी रद्द कर दिया।

सेबी दोनों मामलों में सुप्रीम कोर्ट गया। अदालत ने 20 मार्च 2023 के अंतरिम आदेश में सेबी से कहा कि वह एनएसई को 300 करोड़ रुपये लौटाए, और 17 अक्टूबर 2023 को डार्क फ़ाइबर मामले में 31 करोड़ रुपये लौटाने को कहा। शासन वाले मामले में एनएसई ने 24 जुलाई 2024 को अपनी अपीलें वापस ले लीं और 29 जुलाई 2024 को ब्याज सहित एक करोड़ रुपये चुका दिए।

फिर समझौते का रास्ता खुला। 20 जून 2025 को एनएसई ने दोनों मामलों के लिए 1,387.39 करोड़ रुपये की दो अर्ज़ियाँ दीं। 13 मार्च 2026 को उसने संशोधित शर्तें दीं, 1,491.21 करोड़ रुपये की। इसके लिए 2025-26 में 1,391.21 करोड़ रुपये का प्रावधान अन्य ख़र्चों में डाला गया, जो 2022-23 में किए गए 100 करोड़ रुपये के प्रावधान के ऊपर था। 30 जुलाई 2026 को सेबी ने ईमेल से शर्तें सैद्धांतिक रूप से मंज़ूर कीं और 714.74 करोड़ रुपये की माँग रखी, उन 776.47 करोड़ रुपये के अलावा जो पहले ही उसके पास जमा थे। निदेशक मंडल ने उसी दिन भुगतान मंज़ूर किया और अगले दिन, 31 जुलाई 2026 को, रक़म चली गई।

17 और 18 अगस्त 2026 को एनएसई और सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ियाँ लगाईं कि अपीलें निपटा दी जाएँ। 3 सितंबर 2026 को अदालत ने डार्क फ़ाइबर वाली अपीलें निपटा दीं। को-लोकेशन वाली अपीलों पर सुनवाई अब भी बाक़ी है, और प्रॉस्पेक्टस लिखता है कि उनका नतीजा अनिश्चित है।

जिस सुविधा पर यह पूरा मुक़दमा खड़ा था, उसका कारोबार इस दौरान दोगुना हो गया। 2023-24 के आख़िर में एनएसई के पास 934 रैक थे, 2025-26 के आख़िर में 1,680 और 30 जून 2026 को 1,868। रैक से 2025-26 में 205.18 करोड़ रुपये आए और कनेक्टिविटी से 1,128.79 करोड़ रुपये।

सेबी के साथ यह अकेला समझौता नहीं है। मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति में देरी और ट्रेडिंग एक्सेस पॉइंट में एन्क्रिप्शन न होने के मामले में 4 अक्टूबर 2024 का समझौता 643.05 करोड़ रुपये में हुआ, जिसे चेन्नई फ़ाइनेंशियल मार्केट्स एंड अकाउंटेबिलिटी ने मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी है। फ़रवरी 2021 की तकनीकी ख़राबी और कारोबार रुकने के मामले में 49.77 करोड़ रुपये चुकाए गए। आनंद सुब्रमण्यन की नियुक्ति वाले मामले में 11 फ़रवरी 2022 के आदेश में दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगा, छह महीने तक कोई नया उत्पाद न लाने का निर्देश मिला, और 1.54 करोड़ रुपये का अतिरिक्त अवकाश नक़दीकरण तथा 2.83 करोड़ रुपये का स्थगित बोनस ज़ब्त कर एनएसई के निवेशक संरक्षण कोष न्यास में डालना पड़ा।

एनएसई बीएसई पर सूचीबद्ध होगा

प्रॉस्पेक्टस के जोखिम संख्या 69 के भीतर एक वाक्य इसकी वजह बताता है: एनएसई केवल बीएसई पर सूचीबद्ध होगा, क्योंकि स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन नियमावली किसी एक्सचेंज को अपने ही मंच पर सूचीबद्ध होने की इजाज़त नहीं देती। निर्गम के लिए नामित स्टॉक एक्सचेंज भी बीएसई ही है।

मुंबई में बीएसई का भवन फ़िरोज़ जीजीभॉय टावर्स, जून 2015 की तस्वीर; एनएसई के शेयर इसी एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होंगे, अपने मंच पर नहीं
तस्वीर: Karthikndr, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

नौ साल पहले यही काम उलटी दिशा में हो चुका है। बीएसई लिमिटेड का प्रॉस्पेक्टस 28 जनवरी 2017 का है और उसमें साफ़ लिखा है कि उसके शेयर एनएसई पर सूचीबद्ध होंगे, और सैद्धांतिक मंज़ूरी एनएसई के 7 अक्टूबर 2016 के पत्र से मिली थी। बीएसई ने 1,54,27,197 शेयर 806 रुपये के भाव पर बेचे, कुल 1,243.43 करोड़ रुपये, जो निर्गम के बाद की पूँजी का 28.26 फ़ीसदी था। वह भी पूरी तरह पुराने शेयरों की बिक्री थी और उसका भी कोई प्रवर्तक नहीं था। बोली 23 जनवरी 2017 को खुली और 25 जनवरी को बंद हुई।

अपने ही मंच पर सूचीबद्ध होने की रोक अकेला इंतज़ाम नहीं है। यही नियमावली हर एक्सचेंज से कहती है कि वह अपने काम को तीन खड़ी कतारों में बाँटे: महत्वपूर्ण संचालन; नियामक, अनुपालन, जोखिम प्रबंधन और निवेशक शिकायतें; और बाक़ी सब, जिसमें कारोबार बढ़ाना आता है। पहली दो कतारों को संसाधनों में पहले हक़ मिलेगा, और उनके तथा कारोबारी कतार के बीच एक दीवार खड़ी रहेगी। प्रॉस्पेक्टस इस दीवार का व्यावहारिक असर गिनाता है। एनएसई अपने ट्रेडिंग सदस्यों को मात्रा के आधार पर छूट या किसी तरह का तरजीही भाव नहीं दे सकता। वह ऐसे उत्पाद नहीं ला सकता जो सिर्फ़ सट्टे के लिए हों, जैसे कुछ दूसरे देशों के एक्सचेंज पूर्वानुमान बाज़ार चलाते हैं। और उसे निगरानी तथा जाँच वाले विभागों को पूरा पैसा देना होगा, जो हिसाब की किताब में ख़र्च के खाते हैं और कमाई के नहीं।

दुनिया में कितने एक्सचेंज सूचीबद्ध हैं, इसका एक जवाब इसी दस्तावेज़ में है। तुलना के लिए वह उन एक्सचेंज समूहों की सूची बनाता है जो मार्च 2026 तक सूचीबद्ध थे और जिनकी सालाना आमदनी एक अरब डॉलर से ऊपर थी: आईसीई, एलएसईजी, नैस्डैक, डॉयचे बोर्स, सीएमई ग्रुप, सीबीओई, एचकेईएक्स, बी3, यूरोनेक्स्ट, एमआईएएक्स, टीएमएक्स, जेपीएक्स और एसजीएक्स। भारत से इसी कतार में बीएसई और एमसीएक्स रखे गए हैं। इनमें से कौन अपने ही मंच पर कारोबार करता है, यह दस्तावेज़ नहीं बताता, और यह लेख इस पर कोई दावा नहीं कर रहा।

एक छोटा ब्योरा दस्तावेज़ के भीतर पड़ा है। एनएसई अपने भाव को सही ठहराने के लिए बीएसई से तुलना करता है, और बीएसई के शेयर का जो बंद भाव इस तुलना में इस्तेमाल हुआ है, वह 9 सितंबर 2026 को एनएसई की अपनी वेबसाइट से लिया गया है।

मूल्यांकन का पैमाना और पिछले साल के सौदे

2025-26 में एनएसई की प्रति शेयर कमाई 41.62 रुपये रही। 1,785 रुपये पर भाव इस कमाई का 42.89 गुना बैठता है और 1,700 रुपये पर 40.85 गुना। प्रॉस्पेक्टस ने तुलना के लिए अकेली सूचीबद्ध कंपनी बीएसई को चुना है, जिसका यही अनुपात 54.28 गुना दर्ज है।

पूरी कंपनी का मूल्य ऊपरी सिरे पर लगभग 4.42 लाख करोड़ रुपये और निचले सिरे पर लगभग 4.21 लाख करोड़ रुपये बैठता है। 30 जून 2026 को प्रति शेयर बही मूल्य 142.40 रुपये था। कंपनी पर कोई क़र्ज़ नहीं है और उसके पास 68,198 करोड़ रुपये का ख़ज़ाना निवेश में पड़ा है। 2025-26 के लिए 35 रुपये प्रति शेयर लाभांश बँटा, जिसमें दस रुपये एकमुश्त विशेष लाभांश था; कुल 8,662.5 करोड़ रुपये। ऊपरी सिरे के भाव पर यह लगभग 1.96 फ़ीसदी बैठता है, यानी 1,785 रुपये लगाने वाले को साल भर में 35 रुपये।

आँकड़ों की दिशा एक तरफ़ नहीं है। 2025-26 में परिचालन से आमदनी 16,601.31 करोड़ रुपये रही, जो 2024-25 के 17,140.68 करोड़ रुपये से कम है। मुनाफ़ा 10,302.06 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 12,187.69 करोड़ रुपये से 15.47 फ़ीसदी कम है। शुद्ध संपत्ति पर प्रतिफल 45.14 से गिरकर 33.21 फ़ीसदी रह गया। इसका एक हिस्सा समझौते का प्रावधान है, और दस्तावेज़ ख़ुद उसे हटाकर एक सामान्यीकृत आँकड़ा देता है: कर-पूर्व मुनाफ़ा 14,120.71 करोड़ रुपये, जो पिछले साल के सामान्यीकृत 14,914.10 करोड़ रुपये से फिर भी कम बैठता है।

सबसे सीधा पैमाना बेचने वालों के अपने सौदों में है। मनियन एंड राव, सनदी लेखाकार, ने 10 सितंबर 2026 के प्रमाणपत्र में दर्ज किया है कि पिछले एक साल में इन्हीं शेयरधारकों ने एनएसई के शेयर औसतन 1,954.51 रुपये पर लिए-दिए, और सौदों का दायरा 1,860 से 2,015 रुपये रहा। अठारह महीने का औसत 1,795.70 रुपये है और तीन साल का 1,247.92 रुपये। यानी निर्गम का ऊपरी भाव पिछले एक साल के भारित औसत से 8.67 फ़ीसदी नीचे है, और उस साल के पूरे दायरे से भी नीचे।

बेचने वालों की अपनी लागत का ब्योरा उसी पन्ने पर है। स्टेट बैंक के शेयरों की भारित औसत लागत 80 पैसे है। न्यू इंडिया, ओरिएंटल और नेशनल इंश्योरेंस की 32 पैसे, एसबीआई कैपिटल की 38 पैसे, स्टॉक होल्डिंग की 46 पैसे, यूनाइटेड इंडिया की 50 पैसे, बैंक ऑफ़ बड़ौदा की 54 पैसे। जीआईसी की 5.26 रुपये, इंडियन बैंक की 18.06 रुपये, अरांडा की 62.38 रुपये, कनाडा पेंशन प्लान की 324.13 रुपये, महागोनी की 564.84 रुपये और बी-इन एट एसआरएल की 1,030 रुपये। ऊपरी भाव पर स्टेट बैंक के 1,59,69,410 शेयर लगभग 2,850 करोड़ रुपये लाएँगे; उसी हिसाब से उन शेयरों की लागत लगभग 1.28 करोड़ रुपये बैठती है।

तीन व्यक्तिगत विक्रेता भी हैं और उनकी हिस्सेदारी नौ हज़ार शेयरों की है। राजीव बोल्ला की लागत 660.02 रुपये है, शेख़ समदानी बाशा की 640 रुपये, और महेश गुप्ता की 1,826.85 रुपये। गुप्ता 500 शेयर बेच रहे हैं। उनकी लागत निर्गम के ऊपरी भाव से ऊपर है।

छोटे निवेशक का हिस्सा और आमदनी का इकलौता खंभा

बँटवारा नियमों से तय है। शुद्ध निर्गम का 50 फ़ीसदी से ज़्यादा योग्य संस्थागत ख़रीदारों को नहीं जा सकता। 15 फ़ीसदी से कम ग़ैर-संस्थागत बोलीदाताओं को नहीं मिलेगा, और 35 फ़ीसदी से कम खुदरा निवेशकों को नहीं। कर्मचारियों के लिए 70 करोड़ रुपये तक अलग रखे गए हैं, जिसमें छूट भी मिलेगी और एक कर्मचारी छूट काटकर दो लाख रुपये से ज़्यादा की बोली नहीं लगा सकता। ऊपरी भाव पर खुदरा हिस्से का फ़र्श लगभग 7,875 करोड़ रुपये बैठता है। बोली की न्यूनतम इकाई मूल्य दायरे के साथ ही घोषित होगी।

पैसा इनमें से किसी के पास से कंपनी में नहीं जाएगा। वह 23 बेचने वालों के खातों में जाएगा।

जोखिम का असली ठिकाना आमदनी के ढाँचे में है। 2025-26 में परिचालन आमदनी का 78.65 फ़ीसदी लेन-देन शुल्क से आया, और अकेले विकल्प सौदों से 9,997.57 करोड़ रुपये, जो कुल आमदनी का 60.22 फ़ीसदी है। इसी खंभे पर पिछले दो साल में सबसे ज़्यादा चोट पड़ी है। प्रीमियम कारोबार के हिसाब से इक्विटी विकल्प में एनएसई का हिस्सा 2023-24 में 96.86 फ़ीसदी था, 2024-25 में 87.43, 2025-26 में 74.71, और 30 जून 2026 को ख़त्म तिमाही में 68.48 फ़ीसदी रह गया।

इसकी वजहें दस्तावेज़ गिनाता है। सेबी के अक्टूबर 2024 के ढाँचे ने 20 नवंबर 2024 से हर एक्सचेंज को सिर्फ़ एक बेंचमार्क सूचकांक पर साप्ताहिक अनुबंध देने दिया। मई 2025 के ढाँचे ने हर एक्सचेंज के लिए हफ़्ते में एक ही समाप्ति दिन तय किया, और 1 सितंबर 2025 से एनएसई के अनुबंध मंगलवार को तथा बीएसई के गुरुवार को ख़त्म होने लगे। अप्रैल 2026 से प्रतिभूति लेन-देन कर भी बढ़ा: वायदा बिक्री पर 0.02 से 0.05 फ़ीसदी, विकल्प बेचने पर 0.10 से 0.15 फ़ीसदी, और विकल्प के इस्तेमाल पर 0.125 से 0.15 फ़ीसदी।

ग्राहक भी थोड़े से हैं। जून 2026 वाली तिमाही में ऊपर के दस ट्रेडिंग सदस्यों से परिचालन आमदनी का 47 फ़ीसदी आया और ऊपर के पाँच से 31.06 फ़ीसदी। मुक़दमों का हिसाब अलग है: कंपनी की तरफ़ से 24 आपराधिक और पाँच बड़े दीवानी मामले चल रहे हैं जिनमें 4,039.57 करोड़ रुपये फँसे हैं, और कंपनी के ख़िलाफ़ 17 आपराधिक, 44 कर, छह नियामक कार्रवाइयाँ और 19 बड़े दीवानी मामले हैं जिनमें 2,584.28 करोड़ रुपये।

दस्तावेज़ के प्रबंधन वाले हिस्से में दो पंक्तियाँ पाद-टिप्पणी में हैं। सूचीबद्धता और निवेशक अनुपालन के मुख्य नियामक अधिकारी अंकित शर्मा 17 सितंबर 2026 से कंपनी में नहीं रहेंगे, और निर्गमकर्ता संबंधों के कार्यकारी उपाध्यक्ष हरीश आहूजा 18 सितंबर से नहीं। ये वही दो दिन हैं जिनमें बोली खुल रही है।

को-लोकेशन वाली अपीलें उस दिन भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहेंगी।

स्रोतसेबी, फ़ाइलिंग 11 सितंबर 2026: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया लिमिटेड का रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस, 10 सितंबर 2026, 668 पन्ने, सेबी: एनएसई का संक्षिप्त प्रॉस्पेक्टस, 10 सितंबर 2026, जिसमें निर्गम का आकार, बेचने वाले शेयरधारक और अधिग्रहण लागत का प्रमाणपत्र दर्ज है, सेबी, फ़ाइलिंग 30 दिसंबर 2016: एनएसई का पहला मसौदा रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस, 28 दिसंबर 2016 की तारीख़ का, सेबी, फ़ाइलिंग 6 फ़रवरी 2017: बीएसई लिमिटेड का प्रॉस्पेक्टस, 28 जनवरी 2017, जिसमें एनएसई पर सूचीबद्ध होने की शर्तें दर्ज हैं, सेबी, फ़ाइलिंग 18 अक्टूबर 2024: ह्युंडई मोटर इंडिया लिमिटेड का प्रॉस्पेक्टस, 17 अक्टूबर 2024, निर्गम का आकार 27,855.68 करोड़ रुपये, सेबी, फ़ाइलिंग 12 मई 2022: भारतीय जीवन बीमा निगम का प्रॉस्पेक्टस, निर्गम का आकार 20,557.23 करोड़ रुपये, इंडियन एक्सप्रेस, 11 सितंबर 2026: मूल्य दायरा 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर, द हिंदू, 11 सितंबर 2026: निर्गम का आकार 22,569 करोड़ रुपये, और यह कि इसमें कोई नया शेयर नहीं है

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।