एनएसई के निर्गम में खुदरा के हिस्से के 1,22,41,221 शेयरों पर दूसरे दिन शाम तक कोई बोली नहीं थी
शुक्रवार, 18 सितंबर को शाम सात बजे एनएसई की अपनी बोली-फ़ीड पर खुदरा श्रेणी 0.72 गुना भरी दिखती है। बाक़ी तीनों श्रेणियाँ भर चुकी थीं। जिस 1,785 रुपये के ऊपरी भाव पर यह बोली लगी, वह उन्हीं दामों से नीचे है जिन पर बेचने वाले शेयरधारक पिछले साल भर एनएसई के शेयर ख़रीदते-बेचते रहे।

एनएसई का शेयर ख़रीदने के लिए सबसे छोटी बोली आठ शेयरों की थी, ऊपरी भाव पर 14,280 रुपये की। ऐसे छोटे ख़रीदारों के लिए निर्गम में 4,41,01,125 शेयर अलग रखे गए थे। शुक्रवार, 18 सितंबर को शाम सात बजे, जब उस दिन की बोली की खिड़की बंद हुई, उनमें से 3,18,59,904 पर बोली आ चुकी थी। बाक़ी 1,22,41,221 शेयर ख़ाली थे, और ऊपरी भाव पर उनकी क़ीमत 2,185 करोड़ रुपये बनती है।
खुदरा श्रेणी 0.72 गुना भरी थी। बाक़ी तीनों भर चुकी थीं।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की अपनी बोली-फ़ीड पर वक़्त भी दर्ज है: 18-Sep-2026 19:00:00। इस अंक की सुबह सात बजे की मोहर से वह बारह घंटे आगे का है, इसलिए तारीख़ के साथ घड़ी भी पढ़नी होगी।
बोली 17 सितंबर को खुली थी और सोमवार, 21 सितंबर को बंद होनी है। 18 सितंबर उसका दूसरा दिन था। निर्गम की अनुसूचित समय-सारणी में उस दिन कुछ भी तय नहीं था।
खुदरा के हिस्से में 4,41,01,125 शेयर थे, बोली 3,18,59,904 पर आई
एनएसई की फ़ीड हर श्रेणी का हिसाब अलग देती है। शाम सात बजे की मोहर वाले पन्ने पर चार मुख्य पंक्तियाँ हैं। संस्थागत ख़रीदारों के लिए रखे 2,52,07,867 शेयरों पर 3,85,66,944 की बोली थी, यानी 1.53 गुना। ग़ैर-संस्थागत श्रेणी के 1,89,00,483 शेयरों पर 3,17,55,040 की, यानी 1.68 गुना। कर्मचारियों के 4,33,436 शेयरों पर 6,61,768 की, फिर 1.53 गुना।
चार में से तीन श्रेणियाँ भर चुकी थीं। खुदरा नहीं भरी।
| श्रेणी | आरक्षित शेयर | बोली मिली | गुना |
|---|---|---|---|
| संस्थागत ख़रीदार (एंकर छोड़कर) | 2,52,07,867 | 3,85,66,944 | 1.53 |
| ग़ैर-संस्थागत, 10 लाख रुपये से ऊपर | 1,26,00,322 | 2,02,16,976 | 1.60 |
| ग़ैर-संस्थागत, 2 से 10 लाख रुपये | 63,00,161 | 1,15,38,064 | 1.83 |
| खुदरा | 4,41,01,125 | 3,18,59,904 | 0.72 |
| कर्मचारी | 4,33,436 | 6,61,768 | 1.53 |
| कुल | 8,86,42,911 | 10,28,43,656 | 1.16 |
संस्थागत बोली के भीतर का बँटवारा भी फ़ीड में है। घरेलू बैंकों, वित्तीय संस्थाओं और बीमा कंपनियों की बोली 2,54,87,760 शेयरों की थी, यानी पूरी संस्थागत माँग का 66 फ़ीसदी। विदेशी संस्थागत निवेशकों की 54,85,616 शेयरों की। म्यूचुअल फ़ंडों की 28,03,248 की, जबकि एंकर किताब में उन्हें दो दिन पहले 1,39,77,524 शेयर मिल चुके थे।
ग़ैर-संस्थागत श्रेणी के भीतर दो उप-श्रेणियाँ हैं, और उनका फ़र्क़ बताने लायक़ है। दस लाख रुपये से बड़ी बोलियों वाला हिस्सा 1.60 गुना भरा। दो से दस लाख रुपये वाला हिस्सा 1.83 गुना। छोटी बोली वाली उप-श्रेणी बड़ी वाली से आगे रही, और यही वह सिरा है जिससे खुदरा की दो लाख रुपये की छत सटी हुई है। छत के ठीक ऊपर माँग थी। छत के नीचे नहीं थी।
कुल जोड़ 8,86,42,911 शेयरों पर 10,28,43,656 की बोली का है, यानी 1.16 गुना। खुदरा का 0.72 उसी तालिका की एक पंक्ति है, और वह अकेली पंक्ति है जो एक से नीचे है।
आरक्षित हिस्सा, एंकर का हिस्सा और गुना का हिसाब
गुना दो संख्याओं का भाग है, और दोनों को नाम से जानना ज़रूरी है। ऊपर वाली संख्या उस श्रेणी को मिली बोली है। नीचे वाली संख्या उस श्रेणी के लिए आरक्षित शेयर हैं, पूरा निर्गम नहीं।
निर्गम 12,64,36,650 शेयरों का है, हर शेयर का अंकित मूल्य एक रुपया। इसमें से कर्मचारियों के लिए 4,33,436 शेयर अलग रखे गए। बचे 12,60,03,214 शेयर, जिन्हें प्रॉस्पेक्टस नेट ऑफ़र कहता है। आवरण पृष्ठ की शर्त यह है कि नेट ऑफ़र का आधे से ज़्यादा संस्थागत ख़रीदारों को नहीं जाएगा, ग़ैर-संस्थागत को कम से कम 15 फ़ीसदी मिलेगा और खुदरा को कम से कम 35 फ़ीसदी। खुदरा का हिस्सा इसलिए छत नहीं, फ़र्श है। 12,60,03,214 का 35 फ़ीसदी 4,41,01,125 बनता है, और फ़ीड की खुदरा पंक्ति में यही संख्या दर्ज है।
पूरे निर्गम पर नापें तो यह 34.88 फ़ीसदी बैठता है, क्योंकि कर्मचारियों का हिस्सा पहले निकल चुका होता है।
संस्थागत पंक्ति में जो 2,52,07,867 लिखा है, वह नेट ऑफ़र का आधा नहीं है। आधा 6,30,01,607 होता। फ़र्क़ एंकर निवेशकों का है। 16 सितंबर को एनएसई के निदेशक मंडल ने अपने प्रबंधकों की सलाह से 3,77,93,739 शेयर एंकर निवेशकों को दे दिए थे, बोली खुलने से एक दिन पहले। वे शेयर बँट चुके थे, इसलिए बोली की तालिका में न ऊपर गिने जाते हैं, न नीचे।
इसका असर सीधा है। जिस 1.16 गुना को निर्गम का कुल आँकड़ा कहा जाता है, वह 12,64,36,650 पर नहीं, 8,86,42,911 पर नपा है। एंकर का हिस्सा पूरे निर्गम का 29.89 फ़ीसदी था और वह 1,785 रुपये पर पहले ही तय हो चुका था।
खुदरा की अपनी सीमाएँ भी दस्तावेज़ में दर्ज हैं। एक लॉट आठ शेयरों का, और बोली आठ के गुणकों में। कोई भी खुदरा निवेशक दो लाख रुपये से ज़्यादा की बोली नहीं लगा सकता, यानी ऊपरी भाव पर ज़्यादा से ज़्यादा 112 शेयर, 1,99,920 रुपये के। इस छत को मानकर गिनें तो 4,41,01,125 शेयर भरने के लिए क़रीब 3.94 लाख अधिकतम आकार की अर्ज़ियाँ चाहिए थीं। सबसे छोटे लॉट पर वही हिस्सा 55 लाख से ज़्यादा अर्ज़ियाँ माँगता।

भाव कंपनी ने तय किया, सेबी ने नहीं
रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस 10 सितंबर 2026 का है और उसमें भाव लिखा ही नहीं है। जहाँ-जहाँ क़ीमत आनी थी, वहाँ काला गोला छपा है। आवरण पृष्ठ पर बड़े अक्षरों में शर्त दर्ज है कि मूल्य दायरा, कर्मचारी छूट और न्यूनतम लॉट कंपनी तय करेगी, अपने बुक रनिंग लीड मैनेजरों की सलाह से।
उसी वाक्य में यह भी दर्ज है कि भाव कहाँ छपेगा। फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस के सभी संस्करणों में, जनसत्ता के सभी संस्करणों में, और नवशक्ति के मुंबई संस्करण में, बोली खुलने से कम से कम दो कामकाजी दिन पहले। यह सेबी की आईसीडीआर नियमावली की शर्त है। भाव किसी नियामक ने तय नहीं किया।

दायरे को बदला भी जा सकता था, और उसकी क़ीमत भी दस्तावेज़ में लिखी है। मूल्य दायरे में कोई संशोधन होता तो बोली की अवधि कम से कम तीन कामकाजी दिन और बढ़ती, कुल दस कामकाजी दिनों की सीमा के भीतर। संशोधन नहीं हुआ।
दायरा 1,700 से 1,785 रुपये का रखा गया, और इंडियन एक्सप्रेस ने 11 सितंबर को यही आँकड़ा छापा। कर्मचारियों के लिए 170 रुपये प्रति शेयर की छूट रखी गई। यह आँकड़ा दो दस्तावेज़ों से जुड़ता है: प्रॉस्पेक्टस कहता है कि कर्मचारियों का आरक्षित हिस्सा 70 करोड़ रुपये तक का होगा, और एनएसई की फ़ीड कहती है कि उसमें 4,33,436 शेयर हैं। 70 करोड़ को 4,33,436 से भाग दें तो 1,615 रुपये आता है, जो 1,785 में से 170 घटाने पर बनता है।
एंकर निवेशकों का भाव इससे पहले तय हुआ। 16 सितंबर के पत्र में, जो एनएसई ने बीएसई के सूचीबद्धता विभाग को भेजा, लिखा है कि 189 एंकर निवेशकों को 3,77,93,739 शेयर 1,785 रुपये प्रति शेयर पर दिए गए, कुल 67,46,18,24,115 रुपये के। यानी 6,746 करोड़ रुपये, ऊपरी भाव पर। प्रॉस्पेक्टस की शर्त है कि एंकर निवेशक अपनी बोली न वापस ले सकते हैं, न घटा सकते हैं, और अगर अंतिम भाव एंकर भाव से नीचे बैठा तो आवंटन फिर भी ऊँचे भाव पर ही होगा। निर्गम का लगभग तीस फ़ीसदी हिस्सा बोली खुलने से पहले ही छत पर बँध चुका था।
बेचने वालों के अपने सौदे 1,860 से 2,015 रुपये के बीच हुए
एनएसई सूचीबद्ध नहीं है, पर उसके शेयर बिना सूचीबद्धता के भी हाथ बदलते रहे हैं। सेबी की नियमावली इसी वजह से प्रॉस्पेक्टस से माँगती है कि बेचने वाले शेयरधारकों ने बीते तीन साल, अठारह महीने और एक साल में जिन दामों पर शेयर लिए, उनका भारित औसत छापा जाए। यह तालिका दस्तावेज़ के पन्ना 119 पर है और मैनियन एंड राव, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (एफ़आरएन 001983S) के 10 सितंबर 2026 के प्रमाणपत्र पर टिकी है।
| अवधि | अधिग्रहण की भारित औसत लागत | सौदों का दायरा |
|---|---|---|
| पिछला एक साल | 1,954.51 रुपये | 1,860 से 2,015 रुपये |
| पिछले 18 महीने | 1,795.70 रुपये | 1,485 से 2,260 रुपये |
| पिछले तीन साल | 1,247.92 रुपये | 564.84 से 2,260 रुपये |
पहली पंक्ति ही पूरा मामला है। पिछले एक साल में इन सौदों का सबसे नीचे का भाव 1,860 रुपये था। निर्गम का ऊपरी भाव 1,785 रुपये है। छत उस पूरे दायरे के नीचे बैठी है, सबसे सस्ते सौदे से भी 4.03 फ़ीसदी नीचे, और साल की भारित औसत लागत 1,954.51 रुपये से 8.67 फ़ीसदी नीचे। निचला भाव 1,700 रुपये उसी औसत से 13.02 फ़ीसदी नीचे है। अठारह महीने की औसत लागत 1,795.70 रुपये भी छत से 10.70 रुपये ऊपर है।
तीन साल वाली पंक्ति को पढ़ते वक़्त एक बात ध्यान में रखनी होगी। तालिका की अपनी टिप्पणी कहती है कि 4 नवंबर 2024 के निदेशक मंडल प्रस्ताव के तहत हर एक शेयर पर चार बोनस शेयर जारी हुए, रिकॉर्ड तारीख़ 2 नवंबर 2024। बोनस को हिसाब से बाहर रखा गया है, पर उससे पहले के सौदों के भाव बोनस के हिसाब से समायोजित करके लिखे गए हैं। 564.84 रुपये का सबसे निचला सिरा इसी समायोजन के बाद का है।
ये औसत हवा में नहीं हैं। प्रॉस्पेक्टस इनके पीछे के पाँच सौदे तारीख़ और नाम के साथ छापता है, क्योंकि बड़े सौदे न होने पर नियम आख़िरी पाँच सौदे माँगता है। 21 जनवरी 2026 को टीए एशिया पैसिफ़िक ऐक्विज़िशंस ने स्पार्क पीडब्ल्यूएम प्राइवेट लिमिटेड को 1,50,000 शेयर 1,960 रुपये पर बेचे। 27 फ़रवरी को उन्हीं दोनों के बीच 3,25,000 शेयर 1,970 रुपये पर। 21 अप्रैल को महेश गुप्ता ने स्टेकहब इन्फ़ोटेक को 300 शेयर 1,889.50 रुपये पर दिए। 19 मई को 3,20,000 शेयर 1,950 रुपये पर और 18 जून को 3,00,000 शेयर 1,940 रुपये पर, फिर उन्हीं दोनों के बीच। पाँचों को जोड़कर 10,95,300 शेयर बनते हैं, 214.08 करोड़ रुपये के, और भारित औसत 1,954.55 रुपये।
इन्हीं सौदों के सामने बेचने वालों की असल लागत रखी जाए तो तस्वीर दूसरी तरफ़ से दिखती है। तेईस बेचने वाले शेयरधारकों में बीस कंपनियाँ हैं और तीन व्यक्ति। भारतीय स्टेट बैंक के पास मौजूद शेयरों की भारित औसत लागत 80 पैसे प्रति शेयर है। न्यू इंडिया एश्योरेंस की 32 पैसे, ओरिएंटल इंश्योरेंस और नैशनल इंश्योरेंस की भी 32 पैसे, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की 38 पैसे, बैंक ऑफ़ बड़ौदा की 54 पैसे। ये आँकड़े 8 सितंबर 2026 की लाभार्थी स्थिति रिपोर्ट पर आधारित हैं। 1,785 रुपये पर बेचने का मतलब स्टेट बैंक के लिए लागत का क़रीब 2,231 गुना है और न्यू इंडिया एश्योरेंस के लिए क़रीब 5,578 गुना।

तेईस में से एक नाम दूसरी तरफ़ खड़ा है। महेश गुप्ता के 1,000 शेयरों की भारित औसत लागत 1,826.85 रुपये दर्ज है, जो निर्गम की छत से ऊपर है।
यह तुलना सूचीबद्ध भाव की नहीं है, और इसे सूचीबद्ध भाव समझना ग़लत होगा। 18 सितंबर को एनएसई का कोई सूचीबद्ध भाव था ही नहीं। प्रॉस्पेक्टस की अनुसूचित समय-सारणी में कारोबार की शुरुआत गुरुवार, 24 सितंबर के आसपास बीएसई पर होनी है। जो तुलना यहाँ हो सकती है, वह निर्गम के भाव और उन दामों की है जिन पर यही बेचने वाले अब तक सौदे करते रहे।
लगभग पूरी बोली ऊपरी भाव पर ही लगी
एनएसई अपने पन्ने पर हर एक रुपये के भाव पर जमा माँग भी छापता है। 18 सितंबर की शाम की मोहर वाली श्रृंखला कहती है कि 1,700 रुपये और उससे ऊपर कुल 10,30,89,496 शेयरों की बोली थी। 1,750 रुपये पर वही जोड़ 10,28,96,584 है। 1,785 रुपये पर 10,27,15,944।
दोनों सिरों का फ़र्क़ 3,73,552 शेयर है।
पूरी किताब का 0.36 फ़ीसदी।
जिन्होंने बोली लगाई, उन्होंने लगभग पूरी छत पर लगाई। दायरे के नीचे के सिरे पर भीड़ नहीं थी। खुदरा में तस्वीर और साफ़ है: 3,18,59,904 शेयरों की बोली में से 2,87,01,160 कट-ऑफ़ पर थीं, यानी 90.09 फ़ीसदी। कट-ऑफ़ का अर्थ है कि बोली लगाने वाला अंतिम भाव जो भी तय हो, वही देने को तैयार है। बाक़ी 31,58,744 शेयरों पर ही किसी ने अपना भाव लिखा। कर्मचारियों में भी यही रुझान है, 6,61,768 में से 5,03,432 कट-ऑफ़ पर। फ़ीड में कट-ऑफ़ की पंक्ति सिर्फ़ इन्हीं दो श्रेणियों के नीचे है; संस्थागत और ग़ैर-संस्थागत बोलियों के लिए ऐसी कोई पंक्ति है ही नहीं।
चेतावनी इसी पन्ने पर एनएसई ने ख़ुद छाप रखी है। माँग-वक्र के साथ लिखा है कि वह बोलियों की स्थिति दिखाता है, निर्गम की सदस्यता ज़रूरी नहीं। वक्र का कुल 10,30,89,496 है, जबकि श्रेणीवार तालिका का कुल 10,28,43,656। फ़र्क़ 2,45,840 शेयरों का है, और वक्र के साथ यह भी लिखा है कि वह हर घंटे अपडेट होता है।
एक ही वेबसाइट पर दो आँकड़े: 1.16 और 0.60
एनएसई की तीनों सार्वजनिक फ़ीडें एक साथ पढ़ी गईं। श्रेणीवार तालिका 1.1602 गुना देती है, मोहर के साथ। सक्रिय निर्गमों की सूची और निर्गम-ब्योरा 0.6040 गुना देते हैं, बिना किसी मोहर के।
दोनों का हर एक ही है, 8,86,42,911। अंश अलग है। बड़ी रीडिंग में 10,28,43,656 बोलियाँ गिनी गई हैं, छोटी में 5,35,44,600।
छोटी रीडिंग में हर श्रेणी दूसरी दिखती है। संस्थागत ख़रीदार 0.23 गुना, यानी 57,43,240 शेयरों की बोली। ग़ैर-संस्थागत 1.30 गुना। खुदरा 0.51 गुना, 2,27,06,520 शेयर। कर्मचारी 1.05 गुना। जो आँकड़ा बिना मोहर के मिलता है, वह ज़्यादा ख़ाली किताब दिखाता है।
यह छोटी संख्या कहीं और भी दर्ज है। एनएसई के माँग-वक्र की उस श्रृंखला का कुल भी ठीक 5,35,44,600 है जिसके नोट में कोष्ठक लगाकर "(NSE)" लिखा हुआ है, और जिसकी पंक्तियों पर मोहर है 18-Sep-2026 19:00:13। उस श्रृंखला का कट-ऑफ़ जोड़ 2,07,93,216 है। छोटी रीडिंग की खुदरा और कर्मचारी पंक्तियों के कट-ऑफ़ आँकड़े जोड़ने पर भी वही 2,07,93,216 आता है। दोनों रीडिंग एक ही मिनट की हैं, और छोटी वाली पूरी किताब नहीं गिनती।
एनएसई अपने पन्ने पर यह अंतर कहीं नहीं लिखता। इसकी स्वतंत्र जाँच भी नहीं हो सकी: बीएसई का एपीआई पता दूसरी जगह भेज देता है और उसका पन्ना जावास्क्रिप्ट का ख़ोल परोसता है, इसलिए बोली के सारे आँकड़े एनएसई की अपनी फ़ीड पर टिके हैं।
ख़ाली रह गया हिस्सा दूसरी श्रेणियों में जा सकता है
बोली का गुना और आवंटन एक चीज़ नहीं हैं, और 18 सितंबर की शाम तक कोई आवंटन हुआ ही नहीं था। प्रॉस्पेक्टस इस पर अलग से शर्त लिखता है। ग़ैर-संस्थागत या खुदरा हिस्से में जो कमी रह जाए, वह किसी दूसरी श्रेणी या श्रेणियों के मेल से, आनुपातिक आधार पर पूरी की जा सकती है। यह फ़ैसला कंपनी करेगी, अपने प्रबंधकों और नामित स्टॉक एक्सचेंज की सलाह से।
इस निर्गम का नामित स्टॉक एक्सचेंज बीएसई है, क्योंकि एनएसई वहीं सूचीबद्ध हो रहा है। खुदरा के जो शेयर बिना बोली के बचेंगे, उन्हें किस श्रेणी में भेजना है, यह एनएसई को बीएसई की सलाह से तय करना होगा।
उलटी दिशा में यह छूट नहीं है। संस्थागत हिस्से में कमी रह जाए तो उसे किसी और श्रेणी से भरने की इजाज़त नहीं है, यह शर्त उसी पैराग्राफ़ में लिखी है।
आवंटन का तरीक़ा भी अलग-अलग है। खुदरा में हर सफल बोली लगाने वाले को कम से कम एक लॉट मिलना चाहिए, बशर्ते उस श्रेणी में शेयर बचे हों, और उसके बाद बचा हुआ आनुपातिक रूप से बँटता है। जब कोई श्रेणी पूरी नहीं भरती, उसमें आनुपातिक कटौती का सवाल ही नहीं उठता। समय-सारणी कहती है कि आवंटन का आधार मंगलवार, 22 सितंबर के आसपास नामित स्टॉक एक्सचेंज के साथ तय होगा, शेयर 23 सितंबर के आसपास डीमैट खातों में जाएँगे, और कारोबार 24 सितंबर के आसपास शुरू होगा।
जिनका पैसा बैंक खाते में रुका रहेगा, उनके लिए भी शर्त लिखी है। बोली बंद होने के दो कामकाजी दिन बाद तक रक़म न खुले तो बोली लगाने वाले को हर दिन 100 रुपये या बोली की रक़म का 15 फ़ीसदी सालाना, जो ज़्यादा हो, मुआवज़े के तौर पर मिलेगा।
एक तारीख़ पर दो दस्तावेज़ आपस में नहीं मिलते। प्रॉस्पेक्टस और संक्षिप्त प्रॉस्पेक्टस दोनों कहते हैं कि यूपीआई मैंडेट की आख़िरी घड़ी बोली बंद होने के दिन शाम पाँच बजे है। एनएसई अपने निर्गम-सूचना पन्ने पर 21 सितंबर के लिए शाम सात बजे लिखता है और उसे नया समय बताता है। दोनों प्राथमिक दस्तावेज़ हैं और दोनों अलग समय देते हैं।
एंकर का पूरा हिसाब, और 12 सितंबर की अपनी रिपोर्ट से क्या बदला
एंकर वाले पत्र में सिर्फ़ जोड़ नहीं, उसका बँटवारा भी है। नियम कहता है कि एंकर हिस्से का कम से कम 40 फ़ीसदी आरक्षित रहेगा: 33.33 फ़ीसदी घरेलू म्यूचुअल फ़ंडों के लिए और 6.67 फ़ीसदी जीवन बीमा कंपनियों और पेंशन फ़ंडों के लिए, बशर्ते वे एंकर भाव पर या उससे ऊपर बोली लगाएँ। 3,77,93,739 शेयरों में से 1,39,77,524 शेयर 29 घरेलू म्यूचुअल फ़ंडों को गए, जिन्होंने कुल 98 योजनाओं से अर्ज़ी दी थी। यह एंकर हिस्से का 36.98 फ़ीसदी है। जीवन बीमा और पेंशन फ़ंडों की 27 इकाइयों को 60,60,744 शेयर मिले, यानी 16.04 फ़ीसदी।
दोनों ने अपना आरक्षित हिस्सा भरा और उससे आगे भी लिया। मिलाकर एंकर किताब का 53.02 फ़ीसदी घरेलू संस्थाओं के पास गया। पत्र की पहली पंक्ति भारतीय जीवन बीमा निगम की है, 22,42,584 शेयरों के साथ।
12 सितंबर को हमने इसी निर्गम पर लिखा था। तब प्रॉस्पेक्टस चार दिन पुराना था और भाव तय नहीं हुआ था। उसके बाद तीन चीज़ें बदलीं: 11 सितंबर को दायरा छपा, 16 सितंबर को एंकर किताब बनी, और 17 सितंबर को बोली खुली। जो नहीं बदला, वह भी पढ़ने लायक़ है। निर्गम अब भी पूरी तरह पुराने शेयरों की बिक्री है और कंपनी को इससे एक रुपया नहीं मिलेगा; प्रॉस्पेक्टस का जोखिम संख्या 33 इसी शीर्षक से दर्ज है। बिक्री अब भी कंपनी की पूँजी का 5.11 फ़ीसदी है। मुक़दमों की स्थिति भी वही है जो हमने तब लिखी थी: सुप्रीम कोर्ट ने 3 सितंबर 2026 को डार्क फ़ाइबर वाली अपीलें निपटा दीं और को-लोकेशन वाली अर्ज़ियाँ अब भी सुनवाई के इंतज़ार में हैं।
इस पूरे हिसाब के बग़ल में यह तारीख़ भी रखी जानी चाहिए। निदेशक मंडल ने 5 मई 2026 को 2025-26 के लिए 35 रुपये प्रति शेयर का अंतिम लाभांश सुझाया था, जिसमें 10 रुपये का एकमुश्त विशेष लाभांश शामिल है। कुल 8,662.5 करोड़ रुपये। शेयरधारकों ने उसे 24 अगस्त 2026 की सालाना आम बैठक में मंज़ूर किया, बोली खुलने से चौबीस दिन पहले।
प्रॉस्पेक्टस की आख़िरी तुलना भी दस्तावेज़ की अपनी है। 2025-26 में एनएसई की बुनियादी प्रति शेयर आय 41.62 रुपये रही और उसकी शुद्ध संपत्ति पर आमदनी 33.21 फ़ीसदी। दस्तावेज़ उसका इकलौता सूचीबद्ध समकक्ष बीएसई लिमिटेड को बताता है, जिसकी प्रति शेयर आय 60.61 रुपये है, शुद्ध संपत्ति पर आमदनी 45 फ़ीसदी, और मूल्य-आय अनुपात 54.28 गुना, 9 सितंबर 2026 के बंद भाव पर। 1,785 रुपये पर एनएसई का वही अनुपात 42.89 गुना बैठता है और 1,700 रुपये पर 40.85 गुना। दस्तावेज़ ने बीएसई का भाव जहाँ से लिया, वह एनएसई की अपनी वेबसाइट है।
स्रोतनेशनल स्टॉक एक्सचेंज, श्रेणीवार बोली फ़ीड, मोहर '18-Sep-2026 19:00:00': क्यूआईबी 1.53, ग़ैर-संस्थागत 1.68, खुदरा 0.72, कर्मचारी 1.53, कुल 1.16 गुना, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, निर्गम का पूरा ब्योरा और माँग-वक्र: मूल्य दायरा, लॉट, कर्मचारी छूट, एंकर हिस्सा 3,77,93,739 शेयर, और 18-Sep-2026 19:00:13 की मोहर वाली एनएसई-श्रृंखला, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, सक्रिय निर्गमों की सूची: एनएसई के लिए 0.6040 गुना, जिस पर कोई समय-मोहर दर्ज नहीं है, सेबी की फ़ाइलिंग: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया लिमिटेड का रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस, 10 सितंबर 2026, 668 पन्ने, रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस की मूल पीडीएफ़: आवरण पृष्ठ पर मूल्य दायरा तय करने का अधिकार, पन्ना 119 की अधिग्रहण-लागत तालिका, पन्ना 147 के पाँच सौदे, जोखिम 33, और अनुसूचित समय-सारणी, सेबी: एनएसई का संक्षिप्त प्रॉस्पेक्टस, 10 सितंबर 2026, जिसमें 23 बेचने वाले शेयरधारकों की अधिग्रहण लागत मैनियन एंड राव, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (एफ़आरएन 001983S) के 10 सितंबर 2026 के प्रमाणपत्र से दर्ज है, एनएसई का 16 सितंबर 2026 का पत्र बीएसई के सूचीबद्धता विभाग को: 189 एंकर निवेशकों को 3,77,93,739 शेयर 1,785 रुपये पर, कुल 67,46,18,24,115 रुपये, इंडियन एक्सप्रेस, 11 सितंबर 2026: मूल्य दायरा 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर