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सोशल मीडिया
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नेस्ले के तीन शिशु उत्पादों पर एफ़एसएसएआई के तीन न्यायनिर्णयन मामले, आदेश अभी सार्वजनिक नहीं
शुक्रवार, 18 सितंबर को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने नेस्ले इंडिया के तीन शिशु उत्पादों पर कार्रवाई की जानकारी अपने सोशल मीडिया खातों पर दी। नेस्ले इंडिया ने उसी शाम बीएसई और एनएसई को चिट्ठी भेजकर ख़बर को 'factually incorrect' बताया। दोनों के बीच जो प्रक्रिया है, उसे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम का दसवाँ अध्याय न्यायनिर्णयन कहता है, और उसका एक भी काग़ज़ अभी सामने नहीं है।
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केरल के मुख्यमंत्री का एआई वीडियो भारत में रोका गया, किस आधार पर यह अब तक किसी ने नहीं बताया
त्रिशूर की एक कंपनी के बनाए व्यंग्य वीडियो को 1 करोड़ 78 लाख लोग देख चुके थे। रविवार, 13 सितंबर को मेटा ने उसे भारत में बंद कर दिया और बनाने वाले को एक वाक्य का संदेश भेजा, जिसमें भारत सरकार की सूचना का ज़िक्र है और कारण का नहीं। भारत में किसी की पोस्ट रुकने पर उसे क़ानूनन कितना जानने को मिलता है, यह दो अलग प्रक्रियाओं और एक अदालती फ़ैसले में लिखा है।
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सहयोग पोर्टल का पूरा झगड़ा धारा 79(3)(b) की एक पंक्ति पर टिका है
X कॉर्प ने गुजरात हाई कोर्ट में दाख़िल हलफ़नामे में गृह मंत्रालय पर आरोप लगाया है कि वह 'बैकडोर' से ऐसा आदेश चाहता है जो कंपनी को सहयोग पोर्टल से जोड़ दे। इंडियन एक्सप्रेस ने यह 11 सितंबर को छापा। जड़ में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की दो अलग धाराएँ हैं, और दोनों में से एक के साथ कोई लिखी हुई प्रक्रिया नहीं जुड़ी है।
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दिल्ली हवाई अड्डे पर 63 सोशल मीडिया हैंडल के ख़िलाफ़ एफ़आईआर हुई, पर किन धाराओं में, यह अब तक सार्वजनिक नहीं
डायल ने 9 सितंबर को दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की घोषणा की। कंपनी के बयान में जो अंग्रेज़ी शब्द है, 'public mischief', वह भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 का शीर्षक है; उसकी पहली उपधारा असंज्ञेय है, और मानहानि पर पुलिस अपने आप मुक़दमा चला ही नहीं सकती। हवाई अड्डे ने 4 सितंबर को ख़ुद जो परामर्श जारी किया था, उसमें उड़ानों के विलंब और डायवर्जन दर्ज हैं।
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देश
बाल आयोग ने मेटा इंडिया के प्रमुख को बुलाया है; सवाल यह है कि 99 रुपये का विज्ञापन इंस्टाग्राम की जाँच से निकला कैसे
बीबीसी की जाँच में इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण की सामग्री बेचने वाले 30 पेड विज्ञापन मिले, जो टेलीग्राम चैनलों तक ले जाते थे। जुलाई में सरकार ने नोटिस दिया, आयोग ने भी। 9 सितंबर को मेटा इंडिया के प्रबंध निदेशक को आयोग के सामने पेश होना है। आयोग के पास दीवानी अदालत की शक्तियाँ हैं, और यह लेख बताता है कि उनका मतलब क्या है।