अरब सागर की टक्कर पर भारत ने 1991 के जिस समझौते के 'अनुच्छेद 10' का हवाला दिया, उस समझौते में अनुच्छेद एक भी नहीं है
विदेश मंत्रालय ने बुधवार, 16 सितंबर को पाकिस्तान के प्रभारी राजदूत को तलब कर कहा कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज़ का आचरण अप्रैल 1991 के समझौते के 'Article 10' का सीधा उल्लंघन था। उस समझौते का दस्तख़त-शुदा पाठ मंत्रालय अपनी ही वेबसाइट पर रखता है: चार पन्ने, पंद्रह नंबरदार पैराग्राफ़, और कोई अनुच्छेद नहीं। तीन समुद्री मील की दूरी वाली शर्त पैराग्राफ़ 10 में है।

किसी समझौते के "अनुच्छेद 10" के सीधे उल्लंघन का आरोप उस सूरत में क्या साबित करता है, जब उस समझौते में अनुच्छेद एक भी नहीं है?
भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार, 16 सितंबर को नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी राजदूत को तलब किया। अरब सागर में दोनों देशों की नौसेनाओं के जहाज़ टकराए थे। मंत्रालय ने उसी दिन जो विज्ञप्ति जारी की, उसमें दर्ज है कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज़ का आचरण अप्रैल 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते के "Article 10" का "direct contravention" था।
उस समझौते का दस्तख़त-शुदा पाठ विदेश मंत्रालय अपनी ही वेबसाइट पर रखता है। टाइप किए हुए चार पन्नों का स्कैन है, नीचे दोनों विदेश सचिवों के हस्ताक्षर हैं, और उसमें पंद्रह नंबरदार पैराग्राफ़ हैं। अनुच्छेद एक भी नहीं। तीन समुद्री मील की दूरी वाली जिस शर्त की बात भारत कर रहा है, वह पैराग्राफ़ 10 है।
विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति और उसके चार पैराग्राफ़
विज्ञप्ति का शीर्षक तलबी की ख़बर देता है और घटना की नहीं: "Charge d'Affaires of the High Commission for the Islamic Republic of Pakistan in New Delhi summoned to the Ministry of External Affairs"। नीचे तारीख़ 16 सितंबर 2026 है और जगह नई दिल्ली। पूरा पाठ चार नंबरदार पैराग्राफ़ का है।
पहला पैराग्राफ़ कहता है कि प्रभारी राजदूत को मंत्रालय में बुलाकर "a strong protest was lodged with him over the unacceptable and unprofessional conduct of Pakistani naval units at sea that led to a collision with a unit of the Indian Navy"। दूसरे में वह वाक्य है जिस पर यह पूरी रिपोर्ट टिकी है: "While the incident, which took place in international waters, did not cause any major damage, the conduct of the Pakistani naval ship was in direct contravention of Article 10 of the Agreement between India and Pakistan on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troops Movements of April 1991."
तीसरे पैराग्राफ़ में पाकिस्तानी राजनयिक से कहा गया कि वे अपनी सरकार तक यह बात पहुँचाएँ कि सभी सैन्य इकाइयाँ "due care" बरतें और दोनों पक्षों के बीच मौजूद समझौतों के प्रावधानों का सम्मान करें। चौथे में एक जानकारी है जो भारतीय रिपोर्टिंग में कम दिखी: इस्लामाबाद में तैनात भारत के अपने प्रभारी राजदूत को भी निर्देश दिया गया कि वे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में इसी तरह का विरोध दर्ज कराएँ। यानी विरोध दो जगह दर्ज हुआ, एक ही दिन।
दोनों देशों में इस वक़्त उच्चायुक्त नहीं हैं, प्रभारी राजदूत हैं। यह बात भारत की अपनी विज्ञप्ति के पहले और चौथे पैराग्राफ़ से ही निकल आती है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने 16 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में इसे 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाए जाने के बाद राजनयिक संबंध घटाए जाने से जोड़ा है।
अब उस विज्ञप्ति में जो नहीं है। घटना की तारीख़ नहीं है। समय नहीं है। किसी जहाज़ का नाम नहीं है, न पाकिस्तान के, न भारत के। कोई अक्षांश-देशांतर नहीं, कोई दूरी नहीं, कोई तट नहीं। "तीन समुद्री मील" शब्द उसमें कहीं नहीं आते, हालाँकि यही वह शर्त है जिसका ज़िक्र भारत कर रहा है। मंत्रालय ने नंबर दिया है, प्रावधान की इबारत नहीं। पत्र सूचना कार्यालय पर इस घटना से जुड़ी कोई विज्ञप्ति नहीं है, और भारतीय नौसेना की अपनी वेबसाइट पर 19 सितंबर तक इसका कोई ज़िक्र नहीं था।
एक छोटी बात और, जो इसी काग़ज़ में है। विदेश मंत्रालय ने समझौते का नाम "Troops Movements" लिखा है। दस्तख़त-शुदा पाठ के शीर्षक में शब्द "TROOP MOVEMENTS" है।
1991 का दस्तावेज़: पंद्रह नंबरदार पैराग्राफ़ और तीन समुद्री मील
पूरा नाम यह है: "AGREEMENT BETWEEN INDIA AND PAKISTAN ON ADVANCE NOTICE ON MILITARY EXERCISES, MANOEUVRES AND TROOP MOVEMENTS"। फ़ाइल विदेश मंत्रालय के अपने सर्वर पर Portal/LegalTreatiesDoc/PAB1220.pdf पते पर पड़ी है। यह टाइपराइटर पर बने पन्नों का स्कैन है, जिस पर दोनों विदेश सचिवों के छोटे-छोटे हस्ताक्षर हर पन्ने के कोने में पड़े हैं। कोई साफ़-सुथरी छपी प्रति नहीं।
शुरुआत एक प्रस्तावना से होती है। उसमें लिखा है कि दोनों देश सरकारी स्तर पर अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैन्य टुकड़ियों की आवाजाही की अग्रिम सूचना का ढाँचा बनाना ज़रूरी समझते हैं, ताकि "any crisis situation arising due to misreading of the other side's intentions" को रोका जा सके। इसके बाद एक पंक्ति आती है, "Therefore, the Governments of India and Pakistan jointly decide that :-"। और उसके नीचे 1 से 15 तक नंबरदार पैराग्राफ़ चलते हैं।
पंद्रहवाँ पैराग्राफ़ पूरा इतना ही है: "Done at New Delhi on this sixth day of April, 1991."। उसके नीचे दो दस्तख़त हैं। बाईं ओर मुचकुंद दुबे, विदेश सचिव, भारत गणराज्य की सरकार की ओर से। दाईं ओर शहरयार एम. ख़ान, विदेश सचिव, इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान की सरकार की ओर से।

पैराग्राफ़ 10 तीसरे पन्ने के आख़िर में है और एक वाक्य का है: "The Naval ships and submarines belonging to the other country are not to close less than three Nautical Miles (NMs) from each other so as to avoid any accident while operating in international waters."। सीधी हिंदी में, दोनों देशों के नौसैनिक जहाज़ और पनडुब्बियाँ अंतरराष्ट्रीय जल में काम करते हुए एक-दूसरे के तीन समुद्री मील के भीतर न आएँ, ताकि कोई दुर्घटना न हो। तीन समुद्री मील यानी 5.556 किलोमीटर, क्योंकि एक समुद्री मील 1.852 किलोमीटर होता है।
इस वाक्य की बनावट ख़ुद ढीली है। "belonging to the other country" और "from each other" एक ही वाक्य में हैं, तो व्याकरण के हिसाब से यह पढ़ने में साफ़ नहीं कि किसके जहाज़ किससे दूर रहें। असर में शर्त आपसी है, और दोनों सरकारें इसे आपसी ही मानकर चलती हैं।
जो बात इस पैराग्राफ़ को इस झगड़े के लिए अहम बनाती है, वह यह है कि यह अपने आप में खड़ा है। यह किसी सूचित अभ्यास से नहीं जुड़ा। यह जहाज़ों की गिनती पर निर्भर नहीं। यह किसी अग्रिम सूचना की शर्त के साथ नहीं बँधा। जहाँ भी दोनों देशों के नौसैनिक जहाज़ अंतरराष्ट्रीय जल में हों, तीन मील की दूरी की बात लागू होती है। इस मामले में सीधे उठाया जा सकने वाला प्रावधान यही अकेला है। भारत ने उठाया भी यही है, बस नाम ग़लत लेकर।
चौदहवाँ पैराग्राफ़ एक और बात कहता है जिस पर दोनों सरकारें चुप हैं: "This Agreement is subject to ratification. It shall come into force with effect from the date on which the Instruments of Ratification are exchanged."। अनुसमर्थन के दस्तावेज़ कब बदले गए, इसकी कोई तारीख़ इस रिपोर्ट के लिए नहीं मिल सकी। इसलिए यह रिपोर्ट यह नहीं कहती कि समझौता लागू है। दर्ज इतना है कि दोनों सरकारें इसे बाध्यकारी मानकर चल रही हैं और एक-दूसरे पर इसके उल्लंघन का आरोप लगा रही हैं। यह अलग वाक्य है।
एक बात और, जो आख़िरी हिस्से में काम आएगी। विदेश मंत्रालय का अपना भारतीय संधि डेटाबेस इन दोनों 1991 के समझौतों को सूचीबद्ध नहीं करता, जबकि दोनों की पीडीएफ़ उसी मंत्रालय के सर्वर पर पड़ी हैं।
उसी दिन के दूसरे समझौते में अनुच्छेद 10 मौजूद है
6 अप्रैल 1991 को नई दिल्ली में दो समझौतों पर दस्तख़त हुए थे, और दूसरा हवा से जुड़ा है: "AGREEMENT BETWEEN INDIA AND PAKISTAN ON PREVENTION OF AIR SPACE VIOLATIONS AND FOR PERMITTING OVER FLIGHTS AND LANDINGS BY MILITARY AIRCRAFT"। यह भी मंत्रालय के सर्वर पर है, PAB1221.pdf के नाम से, छह पन्नों में।
यही वह समझौता है जो अनुच्छेदों में बँटा है। इसमें अनुच्छेद 1 से अनुच्छेद 10 तक हैं, और उसके बाद परिशिष्ट "ए" में ग्यारह नंबरदार शर्तें। अनुच्छेद 8 पुराने समझ-बूझों को रद्द करता है। अनुच्छेद 9 अनुसमर्थन की वही शर्त रखता है।
और अनुच्छेद 10 पूरा इतना है: "Done at New Delhi on this Sixth day of April 1991."
यानी अप्रैल 1991 के इस जोड़े में "अनुच्छेद 10" मौजूद है। वह हवाई समझौते में है, और वह तारीख़ और जगह बताने वाली पंक्ति है। जहाज़ों पर उस समझौते में कुछ नहीं है। समुद्र उसमें सिर्फ़ एक जगह छूता है, अनुच्छेद 2(क) में, जहाँ लिखा है कि पूर्व अनुमति के बिना कोई विमान दूसरे देश के राज्यक्षेत्रीय समुद्र के ऊपर के हवाई क्षेत्र में नहीं जाएगा।
समुद्र पर समझौते की हद: पैराग्राफ़ 1(ख), 6(ख) और 12
यह समझौता नौसेनाओं को ढकता है, इसमें कोई शक नहीं। पैराग्राफ़ 1 की पहली ही पंक्ति तीनों सेनाओं को बाँधती है: "Their Land, Naval and Air Forces will avoid holding major military manoeuvres and exercises in close proximity to each other."। इसके बाद वही पैराग्राफ़ यह तय करता है कि "बड़ा" अभ्यास किसे माना जाएगा, और ज़मीन, समुद्र और हवा के लिए अलग-अलग पैमाने देता है।
नौसेना का पैमाना उप-पैराग्राफ़ 1(ख) में है: "Any exercise involving six or more ships of destroyer/frigate size and above, exercising in company and crossing into the other's Exclusive Economic Zone (EEZ)."। इसमें तीन शर्तें एक साथ लगती हैं। पहली, विध्वंसक या फ़्रिगेट आकार के या उससे बड़े छह या उससे ज़्यादा जहाज़ हों। दूसरी, वे साथ-साथ अभ्यास कर रहे हों। तीसरी, वे दूसरे देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र में घुस रहे हों। एक भी छूटे तो यह परिभाषा लागू नहीं होती।
पैराग्राफ़ 6 बताता है कि बड़े अभ्यास की कौन-सी जानकारी दूसरे पक्ष को देनी है, और उसका उप-पैराग्राफ़ (ख) समुद्र के लिए ख़ास है: "General area of the exercise on land, air and sea. In respect of air and sea exercises, these will be defined in latitude and longitude."। नीचे एक परंतुक है कि बड़े हवाई और नौसैनिक अभ्यासों के मामले में सिर्फ़ (क) से (ग) तक की जानकारी देनी होगी। (ख) उसी दायरे में आता है। यानी समझौता जहाँ लागू होता है, वहाँ वह ख़ुद अक्षांश और देशांतर माँगता है। इस पूरे मामले में किसी सरकार ने एक भी निर्देशांक जारी नहीं किया है।
पैराग्राफ़ 9 दोनों देशों को यह हक़ देता है कि वे अभ्यास कर रहे देश से उसकी बनावट, विस्तार, दिशा और अवधि पर समय रहते स्पष्टीकरण माँग सकें। पैराग्राफ़ 12 विमानों पर है: "Aircraft of either country will refrain from buzzing surface units and platforms of the other country in international waters."। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के बयान में भारतीय जहाज़ पर तैनात एक हेलिकॉप्टर का ज़िक्र है। पाकिस्तान ने पैराग्राफ़ 12 का नाम नहीं लिया, न कोई और नंबर।
और अब वह हिस्सा जो इस समझौते में है ही नहीं। इसमें कहीं यह नहीं लिखा कि अभ्यास से बाहर, रोज़मर्रा की तैनाती में, दो युद्धपोत आमने-सामने आ जाएँ तो क्या करें। रेडियो पर बात करने की कोई प्रक्रिया नहीं। घटना के बाद रिपोर्ट करने का कोई ढाँचा नहीं। जाँच का कोई तरीक़ा नहीं, विवाद निपटाने का कोई खंड नहीं, कोई संयुक्त समिति नहीं। पैराग्राफ़ 8 में एक हॉट लाइन का ज़िक्र है, और वह एक देश के सेना मुख्यालय से दूसरे देश के सेना मुख्यालय तक जाती है। नौसेना से नौसेना की कोई सीधी लाइन इस काग़ज़ में नहीं है।
पाकिस्तान की विज्ञप्ति संख्या 246/2026
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने उसी 16 सितंबर को इस्लामाबाद से विज्ञप्ति जारी की, संख्या 246/2026, शीर्षक "Pakistan Lodges Strong Protest Over Indian Naval Provocation in its Exclusive Economic Zone"। यह पाठ इस मशीन से mofa.gov.pk पर सीधे नहीं खुलता। नीचे जो कुछ है, वह इंटरनेट आर्काइव में 17 सितंबर 2026 को लिए गए उसी सरकारी पन्ने के स्नैपशॉट से पढ़ा गया है, किसी और की दोहराई हुई नक़ल से नहीं।
पहली पंक्ति में तारीख़ है: विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के प्रभारी राजदूत को तलब कर "a highly provocative and unacceptable action by a vessel of the Indian Navy in the Pakistan's Exclusive Economic Zone (EEZ) on 15 September 2026" पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत की विज्ञप्ति में कोई तारीख़ नहीं है। पाकिस्तान की में है।
दूसरा पैराग्राफ़ घटना का पाकिस्तानी विवरण देता है: "While the Pakistan Navy was undertaking its biennial exercise SEASPARK-26, the Indian vessel carried out aggressive maneuvers in dangerously close proximity of Pakistani naval ship, resulting in contact between the two vessels."। इसी पैराग्राफ़ में आरोप है कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय क़ानून का और "the bilateral agreement on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troop Movements, 1991" का गंभीर उल्लंघन थी। पाकिस्तान ने समझौते का नाम लिया है। नंबर कोई नहीं दिया।
तीसरे पैराग्राफ़ में एक पंक्ति है जो आगे काम आएगी। भारतीय पक्ष से कहा गया कि वह अंतरराष्ट्रीय क़ानून और द्विपक्षीय समझौतों का सख़्ती से पालन करे, "particularly those aimed at preventing incidents at sea"। इसके बाद वही आईना: पाकिस्तान का कहना है कि नई दिल्ली में उसका अपना प्रभारी राजदूत भारत के विदेश मंत्रालय में यही माँग दर्ज कराएगा। दोनों सरकारों ने एक-दूसरे के प्रभारी राजदूत तलब किए और दोनों ने अपने-अपने प्रभारी राजदूत को जवाबी विरोध के लिए भेजा।

इस विज्ञप्ति में भी किसी जहाज़ का नाम नहीं है। न भारतीय, न पाकिस्तानी। आईएनएस कोलकाता और पीएनएस हुनैन के नाम विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर ख़ान के उस लंबे बयान से आते हैं जो 16 सितंबर को जियो, एआरवाई, नुक़्ता और डेली पाकिस्तान ने छापा। उस बयान के मुताबिक़ सी स्पार्क 26 अभ्यास 1 सितंबर से पाकिस्तान के विशेष आर्थिक क्षेत्र में चल रहा था; 7 सितंबर से आईएनएस कोलकाता और उस पर तैनात एक हेलिकॉप्टर बार-बार अभ्यास वाले इलाक़े में घुसने की कोशिश कर रहे थे; और 15 सितंबर को आईएनएस कोलकाता ने अचानक रास्ता बदलकर पीएनएस हुनैन को टक्कर मारी। नुक़्ता ने विदेश कार्यालय के शब्द इस तरह छापे: "Despite efforts by PNS Hunain to avoid the collision, a rubbing incident occurred between the two vessels"। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारतीय जहाज़ इसके बाद रफ़्तार बढ़ाकर इलाक़े से निकल गया, और यह कोई रूटीन तैनाती नहीं थी।
दोनों सरकारों के बयानों के बाद स्वतंत्र रूप से तय तथ्य
दोनों काग़ज़ मिलाकर पढ़ें तो साझा ज़मीन बहुत छोटी है। एक टक्कर हुई, यह दोनों मानते हैं। 16 सितंबर को दोनों ने एक-दूसरे के प्रभारी राजदूत तलब किए, यह भी दोनों के काग़ज़ों में है। और दोनों ने एक ही 1991 के समझौते का हवाला एक-दूसरे के ख़िलाफ़ दिया है। इससे आगे दोनों बयान एक-दूसरे को काटते हैं।
किसने किसके सामने रास्ता काटा, इस पर दोनों सीधे उलटी बात कहते हैं और किसी के पास कोई सबूत नहीं है। नुक़सान पर तीन अलग विवरण हैं। भारत की विज्ञप्ति कहती है कि घटना से "any major damage" नहीं हुआ, और यह नहीं बताती कि किस जहाज़ को। पाकिस्तान की विज्ञप्ति सिर्फ़ "contact" कहती है, और प्रवक्ता के बयान में "rubbing incident"।
तीसरा विवरण भारतीय अख़बारों में है। वे आपस में भी एक जैसे नहीं हैं। द हिंदू में सौरभ त्रिवेदी ने 17 सितंबर को रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखा कि पीएनएस हुनैन (एफ़-273) को नुक़सान हुआ और वह बंदरगाह लौट गया, जबकि भारतीय जहाज़ को "minor damage" हुआ और वह अपने मिशन पर बना रहा। द इंडियन एक्सप्रेस की उसी सुबह की व्याख्या में लिखा है कि पीएनएस हुनैन को नुक़सान हुआ, "while no damage was reported to the Indian vessel"। एक ही सुबह, दो अख़बार, और भारतीय जहाज़ को नुक़सान हुआ या नहीं, इस पर दोनों अलग।
यह फ़र्क़ इसलिए भी दर्ज करना ज़रूरी है कि द इंडियन एक्सप्रेस की व्याख्या तेज़ रफ़्तार, असुरक्षित युद्धाभ्यास और "about 120 nautical miles" की दूरी को विदेश मंत्रालय के नाम पर दर्ज करती है। मंत्रालय के प्रकाशित काग़ज़ में इनमें से एक भी बात नहीं है। द हिंदू ने इन्हीं ब्योरों को रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का बताया है। सूत्र और प्रकाशित विज्ञप्ति दो अलग चीज़ें हैं।
सबसे बड़ा फ़ासला दो शब्दों के बीच है। भारत कहता है यह "international waters" में हुआ। पाकिस्तान कहता है यह उसके "Exclusive Economic Zone" में हुआ। ये दोनों एक ही पानी का वर्णन हो सकते हैं। विशेष आर्थिक क्षेत्र तट से 200 समुद्री मील तक जाता है और वह राज्यक्षेत्रीय समुद्र नहीं है, जो 12 समुद्री मील पर ख़त्म हो जाता है। इसका फ़ैसला करने का कोई ज़रिया इस वक़्त सार्वजनिक रूप से मौजूद नहीं है। दोनों में से किसी सरकार ने एक निर्देशांक, एक तस्वीर, एक रडार या एआईएस का निशान जारी नहीं किया। न किसी ने हताहत होने की बात कही है।
पैराग्राफ़ 5(ख) की तीस दिन की सूचना
समझौते में एक शर्त और है जिसका नाम किसी सरकार ने नहीं लिया। पैराग्राफ़ 5 कहता है कि बड़े अभ्यासों का कार्यक्रम राजनयिक माध्यम से लिखित रूप में दूसरे पक्ष को पहले भेजा जाएगा, और फिर चार श्रेणियों की समय-सीमा देता है। हवाई अभ्यास के लिए पंद्रह दिन। कोर स्तर के लिए साठ। सेना स्तर के लिए नब्बे।
और उप-पैराग्राफ़ 5(ख) के लिए तीस दिन, जिसका विवरण यह है: "Divisional level exercise, and major Naval exercises involving six or more ships of destroyer/frigate size and above, exercising in company and crossing into the other's EEZ."। नौसैनिक अभ्यास के लिए तीस दिन की यह लिखित सूचना तभी बनती है जब वही तीनों शर्तें पूरी हों जो पैराग्राफ़ 1(ख) में हैं, और उनमें आख़िरी शर्त दूसरे देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र में घुसने की है।
पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के अपने बयान के हिसाब से सी स्पार्क 26 पाकिस्तान के अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र में चल रहा था। उस विवरण को मान लें तो घुसने वाली शर्त पूरी नहीं होती और तीस दिन की सूचना बनती ही नहीं। लेकिन यह भी तय नहीं है। किसी सरकार ने यह नहीं बताया कि अभ्यास में कितने जहाज़ साथ थे, किस आकार के थे, या इलाक़ा अक्षांश-देशांतर में कहाँ था। इनके बिना सीमा का सवाल खुला रहता है।
पैराग्राफ़ 7 में एक और समय-सीमा है: अभ्यास का इलाक़ा या जहाज़ों की बनावट बदले तो नौसैनिक अभ्यासों के लिए पंद्रह दिन पहले बताना होगा। दोनों सरकारों ने न पैराग्राफ़ 5 उठाया, न पैराग्राफ़ 7, न सूचना का सवाल। भारत ने सिर्फ़ तीन मील वाली शर्त उठाई, और उसे एक ऐसे नंबर से पुकारा जो उस दस्तावेज़ में है ही नहीं।
समुद्र में दोनों नौसेनाओं पर लागू बहुपक्षीय क़ानून
इस समझौते से बाहर दो बड़ी संधियाँ हैं। दोनों देश उनके पक्षकार हैं। पहली समुद्र में टक्कर रोकने के अंतरराष्ट्रीय नियमों की संधि है, जिसे कोलरेग 1972 कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन का अपना दस्तावेज़ "Status of IMO Treaties" इसका ब्योरा पन्ना 109 से 113 तक रखता है: भारत ने 30 मई 1973 को दस्तख़त किए और उसके लिए यह 15 जुलाई 1977 को लागू हुई, और पाकिस्तान 14 दिसंबर 1977 को इसमें शामिल हुआ, उसी दिन से उस पर लागू।

यह रिपोर्ट कोलरेग के किसी नियम का पाठ उद्धृत नहीं करती। पक्षकार होने की पुष्टि हो गई है। नियमों की मूल इबारत इस रिपोर्ट के लिए नहीं मिल सकी, और जो पढ़ा नहीं गया वह यहाँ उद्धरण-चिह्नों में नहीं जाएगा।
दूसरी संधि संयुक्त राष्ट्र समुद्री क़ानून संधि है, यानी यूएनक्लॉस। संयुक्त राष्ट्र के समुद्री क़ानून प्रभाग की कालक्रमानुसार सूची में भारत की तारीख़ 29 जून 1995 है और पाकिस्तान की 26 फ़रवरी 1997। यही संधि राज्यक्षेत्रीय समुद्र की 12 समुद्री मील और विशेष आर्थिक क्षेत्र की 200 समुद्री मील की हदें तय करती है। इन्हीं हदों के चलते दिल्ली और इस्लामाबाद के दो अलग शब्द एक ही पानी पर चिपक सकते हैं।
ऊपर संधि डेटाबेस का ज़िक्र आ चुका है। समुद्री दुर्घटनाओं की रोकथाम पर भारत और पाकिस्तान के बीच कोई अलग द्विपक्षीय समझौता विदेश मंत्रालय की सूची में नहीं मिलता, किसी भी साल का नहीं। पर वही सूची इन दोनों 1991 के समझौतों को भी नहीं दिखाती, जबकि उनकी पीडीएफ़ उसी मंत्रालय के सर्वर पर से इस रिपोर्ट के लिए उतारी गई हैं। इसलिए सही वाक्य यह है कि ऐसा कोई समझौता मंत्रालय की सूची में दर्ज नहीं है। उसके अस्तित्व में न होने का सबूत यह सूची नहीं है।
और इसी जगह पाकिस्तान की विज्ञप्ति की वह पंक्ति लौट आती है, जिसमें भारत से "bilateral agreements, particularly those aimed at preventing incidents at sea" का पालन करने को कहा गया है। बहुवचन में, बिना किसी समझौते का नाम लिए, बिना किसी साल के। इस पूरे झगड़े में दोनों सरकारों ने मिलकर जिस एक द्विपक्षीय दस्तावेज़ का नाम लिया है, वह 1991 के चार टाइप किए हुए पन्ने हैं। भारत ने उसे एक ऐसे नंबर से पुकारा जो उसमें नहीं है, पाकिस्तान ने बिना नंबर के। दोनों में से किसी ने अब तक यह नहीं बताया कि उसका अपना जहाज़ कौन-सा था।
स्रोतविदेश मंत्रालय, भारत सरकार: सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैन्य टुकड़ियों की आवाजाही की अग्रिम सूचना पर भारत-पाकिस्तान समझौता, 6 अप्रैल 1991, दस्तख़त-शुदा पाठ, चार पन्ने, पंद्रह पैराग्राफ़, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार: हवाई क्षेत्र के उल्लंघन की रोकथाम और सैन्य विमानों की उड़ान-लैंडिंग पर भारत-पाकिस्तान समझौता, 6 अप्रैल 1991, दस्तख़त-शुदा पाठ, छह पन्ने, अनुच्छेद 1 से 10 और परिशिष्ट 'ए', विदेश मंत्रालय, भारत सरकार, 16 सितंबर 2026: नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी राजदूत की तलबी पर विज्ञप्ति, चार नंबरदार पैराग्राफ़, पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय, इस्लामाबाद, 16 सितंबर 2026, विज्ञप्ति संख्या 246/2026: इंटरनेट आर्काइव में 17 सितंबर 2026 को लिया गया mofa.gov.pk का स्नैपशॉट, पूरा मूल पाठ, द हिंदू, सौरभ त्रिवेदी, 17 सितंबर 2026: रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से पीएनएस हुनैन (एफ़-273) और दोनों जहाज़ों के नुक़सान का ब्योरा, द इंडियन एक्सप्रेस, एक्सप्लेन्ड डेस्क, 17 सितंबर 2026: वह व्याख्या जिसमें तेज़ रफ़्तार, ओमान की खाड़ी से 120 समुद्री मील और नुक़सान का ब्योरा विदेश मंत्रालय के नाम पर दर्ज है, जियो न्यूज़, 16 सितंबर 2026: पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर ख़ान के बयान की रिपोर्ट, नुक़्ता, आमिर अब्बासी, 16 सितंबर 2026: विदेश कार्यालय के हवाले से 'rubbing incident' वाला उद्धरण और 1 तथा 7 सितंबर की तारीख़ें, एआरवाई न्यूज़, लाइक़ उर रहमान, 16 सितंबर 2026: सी स्पार्क 26 अभ्यास और हेलिकॉप्टर से जुड़े दावों का ब्योरा, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून, 16 सितंबर 2026: विज्ञप्ति संख्या 246/2026 का पाठ और 2019 में राजनयिक संबंध घटाए जाने का संदर्भ, अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन, 'Status of IMO Treaties', 2026 संस्करण, पन्ना 109 से 113: कोलरेग 1972 पर भारत और पाकिस्तान की स्थिति, संयुक्त राष्ट्र, समुद्री मामलों और समुद्री क़ानून का प्रभाग: यूएनक्लॉस की पुष्टि करने वाले देशों की कालक्रमानुसार सूची