मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न में सीडीयू को 49,629 वोट मिले, पाँच फ़ीसदी की रेखा 50,766 पर खिंची थी — 1,138 वोट की इस दूरी ने उसे 71 सदस्यों वाले सदन से बाहर कर दिया
रविवार, 20 सितंबर को जर्मनी के दो प्रदेशों में वोट पड़े, एक में नहीं — मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न और बर्लिन। सोमवार, 21 सितंबर को जर्मन समय से रात 12 बजकर 1 मिनट पर मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न के लांडटाग का अस्थायी नतीजा प्रदेश के निर्वाचन अधिकारी की अपनी वेबसाइट पर चढ़ा। उसमें चांसलर फ़्रीडरिष मेर्त्स की पार्टी सीडीयू के नाम दूसरे वोट का आँकड़ा 49,629 है, हिस्सा 4.89 फ़ीसदी, और सीटों के ख़ाने में एक डैश।

रविवार रात 9 बजकर 40 मिनट पर, बर्लिन में सीडीयू के मुख्यालय कोनराड-आडेनाउअर-हाउस से चांसलर फ़्रीडरिष मेर्त्स की गाड़ी निकली। उस वक़्त मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न के अनुमानों में उनकी पार्टी 5.0 पर थी। कुछ ही मिनट बाद पट्टी 4.9 पर जाकर रुकी। यह ब्योरा समाचार एजेंसी डीपीए की उस रिपोर्ट का है जो टी-ऑनलाइन पर सोमवार, 21 सितंबर को रात 1 बजकर 46 मिनट पर अद्यतन हुई।
उससे दो घंटे बाद का काग़ज़ ज़्यादा ठंडा है। सोमवार को जर्मन समय से रात 12 बजकर 1 मिनट पर प्रदेश के निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर जो अस्थायी नतीजा चढ़ा, उसमें सीडीयू के दूसरे वोट 49,629 हैं और सीटों के ख़ाने में सिर्फ़ एक डैश। 71 सदस्यों के सदन में एक भी नहीं।
और रविवार को वोट एक प्रदेश में नहीं, दो में पड़े थे। दूसरा बर्लिन था, जहाँ नतीजा बिलकुल उलटी दिशा में गया।
सोमवार रात 12 बजकर 1 मिनट पर चढ़ा सरकारी काग़ज़
दस्तावेज़ का नाम सीधा है। "डेयर लांडेसवाल्लाइटर मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न", यानी प्रदेश के निर्वाचन अधिकारी, जिनका नाम डॉ. क्रिस्टियान बोडन है। शीर्षक पर तीन पंक्तियाँ हैं: 20 सितंबर 2026 का लांडटाग चुनाव, "फ़ोरलॉयफ़िगेस एर्गेब्निस" यानी अस्थायी नतीजा, और प्रदेश का नाम। 36 निर्वाचन क्षेत्रों की जो सीएसवी फ़ाइल इसी सर्वर पर पड़ी है, उस पर मुहर है: 21.09.2026 00:01:10।
गिनती इस तरह है। मतदाता सूची में 13,11,294 नाम थे, वोट 10,24,251 लोगों ने डाला, यानी 78.1 फ़ीसदी। दूसरे वोट में से 8,928 अवैध निकले और 10,15,323 वैध। सीटें इन्हीं वैध दूसरे वोटों से बँटती हैं।

| दल | दूसरे वोट | हिस्सा | सीटें |
|---|---|---|---|
| एएफ़डी | 3,88,026 | 38.22% | 32 |
| एसपीडी | 3,60,393 | 35.50% | 29 |
| डी लिंके | 66,388 | 6.54% | 5 |
| ग्रीन | 57,587 | 5.67% | 5 |
| सीडीयू | 49,629 | 4.89% | 0 |
| बीएसडब्ल्यू | 49,036 | 4.83% | 0 |
| एफ़डीपी | 10,415 | 1.03% | 0 |
एएफ़डी के 38.22 फ़ीसदी को लेकर एक ग़लती चल रही है। यह पार्टी का जर्मनी में अब तक का सबसे बड़ा प्रादेशिक नतीजा नहीं है, और उससे बड़ा नतीजा इसी महीने आ चुका था। ज़ाक्सन-अनहाल्ट में 6 सितंबर 2026 को हुए चुनाव में एएफ़डी को 5,76,037 दूसरे वोट मिले, यानी 43.79 फ़ीसदी। यह आँकड़ा उस प्रदेश के सांख्यिकी कार्यालय की अपनी सीएसवी फ़ाइल का है, जिसमें कुल वैध दूसरे वोट 13,15,315 दर्ज हैं और मतदान 77.8 फ़ीसदी। 38.22 इस प्रदेश का रिकॉर्ड है, देश का नहीं।
शोध डेस्क ने शनिवार-रविवार को इन्हीं दोनों जर्मन सरकारी वेबसाइटों तक पहुँचने की कोशिश की थी और नाकाम रही थी। सोमवार सुबह दोनों खुलीं। इसलिए नीचे की हर संख्या निर्वाचन अधिकारी की अपनी फ़ाइल से है, किसी अख़बार या विशेषज्ञ संकलन से नहीं। यह अस्थायी नतीजा है, और अंतिम नतीजा अभी घोषित नहीं हुआ।
§58 की पहली पंक्ति, और 1,138 वोट की दूरी
रेखा किसी परंपरा से नहीं खिंची। वह प्रदेश के अपने क़ानून में लिखी है: "गेज़ेत्स ऊबर डी वाहलेन इम लांड मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न", संक्षेप में एलकेडब्ल्यूजी एम-फ़ाउ, जो 16 दिसंबर 2010 का है और जिसमें आख़िरी संशोधन 14 मई 2024 के क़ानून के अनुच्छेद 4 से हुआ। इसकी धारा 58 का पहला वाक्य यही रेखा है। हिंदी अनुवाद: "लांडटाग की सीटें प्रदेश-सूचियों पर बाँटते समय केवल उन पार्टियों पर विचार होगा जिन्हें डाले गए वैध वोटों का कम से कम पाँच फ़ीसदी मिला हो।"
अब वही वाक्य संख्याओं में। 10,15,323 का पाँच फ़ीसदी 50,766.15 होता है। सीडीयू के पास 49,629 थे। फ़र्क़ 1,137.15 वोट का है, यानी 1,138 वोट और मिल जाते तो पार्टी रेखा के ऊपर होती। रविवार को वोट डालने वाले 10,24,251 लोगों में यह 0.11 फ़ीसदी है।

यह गिनती एक शर्त पर टिकी है। वह शर्त यह कि 1,138 वोट किसी और पार्टी से खिसककर आएँ, जिससे कुल वैध वोट वही रहें। अगर इतने लोग घर बैठे होते और निकलकर वोट डालते, तो हर नया वोट अंश में भी जुड़ता और हर में भी। उस सूरत में पार्टी को 1,197 नए वोट चाहिए होते। दोनों रास्ते बारह सौ के आसपास ख़त्म होते हैं।
धारा 58 में दो पेच और हैं जो इसी हिसाब को बनाते हैं। उपधारा 2 कहती है कि अगर किसी मतदाता का पहला वोट ऐसे विजेता को गया हो जो निर्दलीय है या जिसकी पार्टी की कोई प्रदेश-सूची मंज़ूर नहीं हुई, तो उसका दूसरा वोट बँटवारे में नहीं गिना जाएगा। उपधारा 4 उस पार्टी की रक्षा करती है जिसे आधे से ज़्यादा वोट मिले हों पर आधी से ज़्यादा सीटें न मिल रही हों। रविवार को दोनों स्थितियाँ नहीं बनीं।
रेखा पूरे प्रदेश पर एक है, और यही इसका पूरा असर है। धारा 54(2) प्रदेश को 36 निर्वाचन क्षेत्रों में बाँटती है और धारा 53 हर मतदाता को दो वोट देती है: पहला अपने क्षेत्र के उम्मीदवार के लिए, दूसरा प्रदेश-सूची के लिए। सदन में कितने सदस्य होंगे, यह क़ानून नहीं, प्रदेश के संविधान का अनुच्छेद 20(2) तय करता है। मौजूदा संख्या 71 है।
जो पुस्तिका यह सब एक जगह रखती है, वह भी सरकारी है। प्रदेश के गृह एवं निर्माण मंत्रालय ने मई 2026 में 3,500 प्रतियाँ छापीं; भूमिका मंत्री क्रिस्टियान पेगल की है और उस पर "श्वेरीन, मई 2026" लिखा है। उसी पुस्तिका में क़ानून का पूरा पाठ भी है और हिसाब की व्याख्या भी।
हेयर/नीमाइअर: 71 कुर्सियाँ बाँटने का सरकारी हिसाब
तरीक़े का नाम पुस्तिका ख़ुद देती है: "प्रोपोर्ट्सिओनालफ़ेरफ़ारन हेयर/नीमाइअर" (Hare/Niemeyer)। भारत में इसे कोई नहीं जानता, इसलिए इसे खोलकर देखना ज़रूरी है। यह सबसे पुराने अनुपाती तरीक़ों में है और इसका पहला क़दम भाग देना है, गुणा नहीं। प्रदेश के नगर निकाय चुनाव भी इसी से बँटते हैं।
धारा 58(3) का नुस्ख़ा तीन टुकड़ों में है। बची हुई कुल सीटों को पार्टी के दूसरे वोटों से गुणा करो। उसे उन सब सूचियों के दूसरे वोटों के जोड़ से भाग दो जो रेखा पार कर चुकी हैं। जो पूर्णांक निकले, उतनी सीटें पहले दौर में मिल जाती हैं; जो सीटें तब भी बची रहें, वे दशमलव के बाद के सबसे बड़े हिस्सों के क्रम में बँटती हैं। दो पार्टियों के दशमलव बराबर हों तो निर्वाचन अधिकारी पर्ची निकालते हैं।
रविवार के नतीजे में रेखा चार पार्टियों ने पार की। उनके दूसरे वोटों का जोड़ 8,72,394 है। अब वही हिसाब:

| दल | 71 × वोट ÷ 8,72,394 | पूर्णांक | दशमलव से | कुल |
|---|---|---|---|---|
| एएफ़डी | 31.5796 | 31 | +1 | 32 |
| एसपीडी | 29.3307 | 29 | 0 | 29 |
| डी लिंके | 5.4030 | 5 | 0 | 5 |
| ग्रीन | 4.6867 | 4 | +1 | 5 |
| जोड़ | 69 | 2 | 71 |
पहले दौर में 69 सीटें बँटीं और दो बचीं। सबसे बड़े दशमलव ग्रीन (.6867) और एएफ़डी (.5796) के थे, सो वे दोनों सीटें इन्हीं दो को गईं। अंतिम आँकड़ा 32, 29, 5 और 5। यह बिलकुल वही है जो निर्वाचन अधिकारी के अपने सीट-पत्र पर छपा है, और यह मिलान इसलिए ज़रूरी था कि आगे की पूरी गणना इसी सूत्र पर खड़ी है।
इसके बाद धारा 58(5) एक घटाव कराती है। जो सीटें पार्टी ने सीधे निर्वाचन क्षेत्रों में जीतीं, वे इसी कुल में से कटती हैं। एएफ़डी ने 36 में से 22 क्षेत्र जीते, एसपीडी ने 14। इसलिए सूची से एएफ़डी को 10 और एसपीडी को 15 सीटें मिलीं। सरकारी सीट-पत्र पर यही दो संख्याएँ हैं।
सदन 71 का ही रहा। इस बार न कोई ओवरहांग सीट बनी न समायोजन सीट। धारा 58(6) कहती है कि क्षेत्रों में जीती सीटें पार्टी के पास रहती हैं चाहे वे उसके अनुपात से ज़्यादा हों, और तब बाक़ी सूचियों को समायोजन सीटें देकर अनुपात बराबर किया जाता है। 2021 में यही हुआ था: तीन ओवरहांग और पाँच समायोजन सीटें बनीं और सदन 79 का हो गया। इस बार आठ कुर्सियाँ कम हैं।
वह छूट जो सीडीयू के काम नहीं आई
क़ानून में रेखा के नीचे वालों के लिए एक ही दरवाज़ा खुला रहता है। पुस्तिका उसे साफ़ लिखती है: अगर किसी पार्टी ने निर्वाचन क्षेत्र में सीट जीत ली हो, पर पाँच फ़ीसदी की शर्त के कारण वह सूची-बँटवारे में न गिनी जाए, तो उस क्षेत्र में चुना गया व्यक्ति अपनी सीट रखता है।
सीडीयू ने 36 में से एक भी क्षेत्र नहीं जीता। उसका सबसे अच्छा पहला वोट फ़ोरपोमर्न-रुइगन II – श्ट्राल्ज़ुंड III में था, 10.79 फ़ीसदी। वहाँ भी एएफ़डी को 10,079 और एसपीडी को 5,995 पहले वोट मिले, सीडीयू को 2,285। 2021 में पार्टी के पास एक प्रत्यक्ष सीट थी।
इस बार वह दरवाज़ा भी बंद था। छह निर्दलीय भी मैदान में थे, जिन्हें 99 से लेकर 1,232 तक पहले वोट मिले। उनमें से भी कोई नहीं जीता।
एक ब्योरा और, जो सीट-पत्र के बग़ल वाले ख़ाने में है। पूरे प्रदेश में सीडीयू को पहले वोट 63,212 मिले, यानी 6.2 फ़ीसदी, दूसरे वोट से 13,583 ज़्यादा। जिस वोट से सीट बचाई जा सकती थी, उसमें पार्टी बेहतर थी। पर उस वोट से सीट तभी बचती जब कहीं पहला नंबर आता।
5.01 फ़ीसदी पर सदन की शक्ल
यह अनुमान नहीं है। यह छपे हुए नतीजे पर वही सरकारी सूत्र दोबारा चलाना है, इस बार सीडीयू को हिसाब के भीतर रखकर। सवाल यही है कि रेखा ने अकेले क्या किया।
पाँचों पार्टियों के दूसरे वोटों का जोड़ 9,22,023 बनता है। धारा 58(3) का वही हिसाब अब यह देता है:
| दल | अभी | 5.01 फ़ीसदी पर | अंतर |
|---|---|---|---|
| एएफ़डी | 32 | 30 | −2 |
| एसपीडी | 29 | 28 | −1 |
| डी लिंके | 5 | 5 | 0 |
| ग्रीन | 5 | 4 | −1 |
| सीडीयू | 0 | 4 | +4 |
चार सीटें सीडीयू के पास जातीं और वे चारों बाक़ियों से आतीं। एएफ़डी दो खोती, एसपीडी एक, ग्रीन एक। डेस्क ने यह गणना दो तरह से चलाई: एक बार सीडीयू के असली 49,629 वोटों के साथ, एक बार 50,767 वोटों के साथ, जो ठीक 5.0001 फ़ीसदी बनते हैं। सीट-तालिका दोनों बार यही निकली। बहुमत दोनों सूरतों में 36 का ही है।
और यहाँ एक आँकड़ा है जो किसी तार-कॉपी में नहीं दिखा। सीडीयू ने 36 में से 17 निर्वाचन क्षेत्रों में पाँच फ़ीसदी से ज़्यादा दूसरे वोट लिए। सबसे ऊपर श्वेरीन I है, 6.48 फ़ीसदी; सबसे नीचे रोश्टॉक II, 3.44 फ़ीसदी। और क्षेत्र 13, यानी मेक्लेनबुर्गिशे ज़ेनप्लाटे I – फ़ोरपोमर्न-ग्राइफ़्सवाल्ड I, में उसका हिस्सा ठीक 5.01 फ़ीसदी था। इसी क्षेत्र में एएफ़डी का दूसरा वोट पूरे प्रदेश में सबसे ऊँचा रहा, 51.68 फ़ीसदी।
सत्रह क्षेत्रों में रेखा के ऊपर, प्रदेश में नीचे। रेखा प्रदेश की है, क्षेत्र की नहीं, और धारा 58 में उसे क्षेत्रवार पढ़ने की कोई गुंजाइश नहीं है।
1,42,929 वोट पाँच फ़ीसदी की रेखा से नीचे रह गए
सीडीयू अकेली नहीं थी। रेखा से नीचे रहने वाली पंद्रह पार्टियों के दूसरे वोट जोड़ें तो 1,42,929 बनते हैं, यानी वैध दूसरे वोटों का 14.08 फ़ीसदी। हर सातवाँ वोट किसी को सदन में नहीं भेज पाया।
इनमें सबसे बड़े दो नाम आपस में बहुत पास हैं। सीडीयू 49,629 पर और बीएसडब्ल्यू 49,036 पर, फ़र्क़ 593 वोट का। दोनों की सीटें शून्य हैं। बीएसडब्ल्यू का उलटा हाल है: उसे पहले वोट 40,497 मिले और दूसरे वोट उससे 8,539 ज़्यादा। सीडीयू पहले वोट में आगे थी, बीएसडब्ल्यू दूसरे में।
तीसरे नंबर पर टीयरशुत्स्पार्टाई है, 11,131 वोट, और उसके बाद एफ़डीपी, 10,415। पाँच बरस पहले एफ़डीपी के पास 52,963 वोट और पाँच सीटें थीं।
बाक़ी सूची छोटी होती जाती है: हांडवेर्कर पार्टाई डॉयचलांड 4,798, फ़्राए वेलर 3,823, डी पार्टाई 2,760, टीम फ़्राईहाइट 2,545, पिराटन 2,003, फ़ोल्ट 1,909, डब्ल्यूएलडी 1,249, ओएडीपी 981, पीडीएफ़ 940, बुइंडनिस सी 892, केपीडी 818। इनके अलावा 8,928 दूसरे वोट अवैध पाए गए।
रेखा किसलिए है, यह न धारा 58 बताती है न मंत्रालय की पुस्तिका। दोनों सिर्फ़ यह बताते हैं कि वह कैसे चलती है। पुस्तिका में तो पूरा उदाहरण भी काल्पनिक पार्टियों A से E तक का है, जिसमें E को 30,000 वोट मिलते हैं और उसका नाम हिसाब से हट जाता है। दस्तावेज़ की यह चुप्पी अपने आप में एक तथ्य है।
एक ही सरकारी तालिका में, 1990 से अब तक
निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर 1990 से हर लांडटाग चुनाव के अंतिम नतीजे एक ही तालिका में हैं। उसमें सीडीयू की पंक्ति इस तरह चलती है: 1990 में 38.3, 1994 में 37.7, 1998 में 30.2, 2002 में 31.4, 2006 में 28.8, 2011 में 23.0, 2016 में 19.0, 2021 में 13.3। और अब 4.89।
पहले चुनाव में पार्टी सबसे बड़ी थी। 14 अक्तूबर 1990 को उसे 3,40,134 वोट मिले थे। रविवार को 49,629 मिले। पिछली बार से तुलना और तीखी है: 2021 में सीडीयू के 1,21,583 दूसरे वोट थे और सदन में 12 सीटें, जिनमें एक प्रत्यक्ष, ग्यारह सूची से और उनमें दो समायोजन सीटें थीं। पाँच साल में वोट 71,954 घटे, यानी 59.2 फ़ीसदी। और यह तब हुआ जब वोट डालने वाले 95,444 बढ़ गए थे।
उसी तालिका में दूसरी पंक्ति एएफ़डी की है। वह 2016 में शुरू होती है। तब 20.8 फ़ीसदी, फिर 2021 में 16.7 फ़ीसदी और 14 सीटें, और अब 38.22 फ़ीसदी और 32 सीटें। पाँच साल में उसके वोट 1,52,775 से बढ़कर 3,88,026 हुए।
मतदान का आँकड़ा भी इसी तालिका में है। 2021 में 70.8 फ़ीसदी, इस बार 78.1 फ़ीसदी। यह 1998 के बाद का सबसे ऊँचा है, पर सबसे ऊँचा नहीं। 27 सितंबर 1998 को 79.4 फ़ीसदी वोट पड़े थे। क्षेत्रवार फैलाव चौड़ा है। सबसे कम रोश्टॉक II में 72.5 फ़ीसदी, सबसे ज़्यादा लांडक्राइस रोश्टॉक II में 84.8 फ़ीसदी।
डीपीए की रिपोर्ट सीडीयू के दस सबसे ख़राब प्रादेशिक नतीजों की सूची भी देती है। उसमें पहले नंबर पर यही 4.9 फ़ीसदी है, दूसरे पर 1951 का ब्रेमन 9.0 फ़ीसदी, तीसरे पर 2020 का हैम्बर्ग 11.2 फ़ीसदी, और नौवें पर इसी 6 सितंबर का ज़ाक्सन-अनहाल्ट 17.2 फ़ीसदी। सूची उसी रिपोर्ट की है।
सोमवार सुबह 6 बजे जर्मन समय पर सीडीयू की अपनी वेबसाइट पर नतीजे पर कोई बयान नहीं था। मुखपृष्ठ पर मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न के लिए वोट माँगने वाला चुनावी पन्ना अब भी लगा था।
उसी रविवार बर्लिन में, उसी रेखा की दूसरी तरफ़
बर्लिन का अस्थायी नतीजा तीन घंटे बाद आया। वहाँ के निर्वाचन अधिकारी के पन्ने पर मुहर है: 21 सितंबर, 3 बजकर 33 मिनट 56 सेकंड। मतदाता 24,87,318, वोट डालने वाले 18,46,170, यानी 74.2 फ़ीसदी, पिछली बार से 11.3 अंक ऊपर। वैध दूसरे वोट 18,24,514।
यहाँ पहला नंबर डी लिंके का है: 4,68,060 वोट, 25.7 फ़ीसदी, 13.4 अंक की बढ़त, 47 सीटें। सीडीयू 3,42,516 वोट यानी 18.8 फ़ीसदी पर दूसरे नंबर पर है और 9.5 अंक नीचे गिरी है; उसे 34 सीटें मिलीं। एएफ़डी 16.3 फ़ीसदी और 29 सीटें, ग्रीन 14.3 फ़ीसदी और 26, एसपीडी 12.1 फ़ीसदी और 22। सदन 158 सदस्यों का है।
सीटों की एक दूसरी तालिका भी घूम रही थी, जिसका जोड़ 130 बैठता है। 130 आबगेओर्डनेटेनहाउस का आधार आकार है। जो संख्या यहाँ छापी जा रही है, वह निर्वाचन अधिकारी के अपने पन्ने पर दर्ज 158 है, और यह इसलिए है कि वही प्राथमिक दस्तावेज़ है। 2023 में यह सदन 159 का था।
रेखा यहाँ भी वही काम कर रही है, बस दूसरी दिशा से। बीएसडब्ल्यू 4.7 फ़ीसदी पर है और सीटें शून्य; उसे 5,185 वोट कम पड़े। एफ़डीपी 2.5 फ़ीसदी पर है और 2.1 अंक नीचे गिरी है, यानी पिछली बार भी वह रेखा के नीचे ही थी। टीयरशुत्स्पार्टाई 2.1 पर है, फ़ोल्ट 2.1 पर। सब मिलाकर 2,35,698 वोट, यानी 12.92 फ़ीसदी, बिना किसी सीट के रह गए। बर्लिन का अपना चुनाव क़ानून सोमवार सुबह इस मशीन से नहीं खुला। इसलिए वहाँ की रेखा का धारा-हवाला इस लेख में नहीं है, और नतीजे की तालिका जो दिखाती है वही दर्ज है।
जो अभी तय नहीं है, और भारत से इसका रिश्ता
दोनों नतीजे अस्थायी हैं। प्रदेश के चुनाव नियमों की धारा 37 कहती है कि प्रदेश निर्वाचन समिति चुनाव के दस दिन के भीतर बैठेगी और अंतिम नतीजा तय करेगी, यानी 30 सितंबर तक। उसी धारा की उपधारा 2 उस समिति को यह अधिकार देती है कि वह मतदान दलों के निष्कर्ष सुधार सके और डाले गए वोटों की वैधता पर अलग फ़ैसला भी दे सके। सोमवार दोपहर के लिए दो कार्यक्रम तय थे। निर्वाचन अधिकारी की प्रेस वार्ता जर्मन समय से 12:30 बजे, यानी भारतीय समय से शाम 4 बजे। और टी-ऑनलाइन के मुताबिक़ सीडीयू की अपनी प्रेस वार्ता क़रीब 1:30 बजे, जिसमें मेर्त्स के साथ प्रदेश अध्यक्ष डानिएल पेटर्स और बर्लिन के मुख्य उम्मीदवार श्टेफ़ान एफ़र्स शामिल होते।
सरकार बनाने का गणित अलग चीज़ है। 71 में बहुमत 36 का है। एसपीडी, डी लिंके और ग्रीन मिलकर 39 पर पहुँचते हैं; एसपीडी और डी लिंके 34 पर रुकते हैं, एसपीडी और ग्रीन भी 34 पर। एएफ़डी अकेले 32 पर है। गणित के हिसाब से एएफ़डी के साथ बनने वाले कुछ जोड़ भी 36 पार करते हैं, और इसे साफ़ कहना चाहिए: क़ानून या प्रदेश के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी जोड़ को रोकता हो। कौन किससे बात करेगा, यह पार्टियों की अपनी घोषित नीति का मामला है। सीडीयू की वेबसाइट पर 20 अक्तूबर 2025 का एक पन्ना है जिसमें पार्टी अध्यक्ष ने एएफ़डी के साथ सहयोग से इनकार किया; उनके शब्द थे, अनुवाद में, कि दोनों को सिर्फ़ ब्योरे अलग नहीं करते, बुनियादी सवाल और बुनियादी राजनीतिक मान्यताएँ अलग करती हैं। श्वेरीन का गणित इस नीति से नहीं बदलता, क्योंकि इस सदन में सीडीयू है ही नहीं। प्रदेश की मुख्यमंत्री मानुएला श्वेज़िग हैं, यह प्रदेश सरकार के अपने पोर्टल से पुष्ट है।
रविवार रात मेर्त्स ने कोनराड-आडेनाउअर-हाउस में जो कहा, वह जर्मन में था। अनुवाद में: "यह एक आपदा है।" उन्होंने यह भी कहा कि वे देश को आगे ले जाना चाहते हैं, और यह कि वे डटे रहेंगे, सीडीयू के पार्टी अध्यक्ष के तौर पर और सबसे बढ़कर अपने देश के चांसलर के तौर पर। ये अनुवाद हैं, मूल शब्द नहीं। वे पद पर हैं, यह इस लेख के लिखे जाने के दिन संघीय सरकार की चांसलर वेबसाइट से और भारत सरकार की जनवरी की विज्ञप्ति से पुष्ट किया गया।
भारत का सिरा भारत सरकार के अपने दस्तावेज़ों से निकलता है। यही चांसलर 12 और 13 जनवरी 2026 को दिल्ली में थे, 23 जर्मन उद्योगपतियों के साथ। प्रधानमंत्री कार्यालय की विज्ञप्ति, जो 12 जनवरी को दोपहर 3:50 बजे जारी हुई, उस संयुक्त वक्तव्य को दर्ज करती है: 2024 में भारत–जर्मनी का वस्तु और सेवा व्यापार 50 अरब डॉलर पार कर गया, जो भारत के पूरे यूरोपीय संघ व्यापार का 25 फ़ीसदी से ज़्यादा है। उसी वक्तव्य में दोनों नेताओं ने आने वाले शिखर सम्मेलन में भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता पूरी होने का समर्थन किया। वह घोषणा 27 जनवरी 2026 को हुई। वाणिज्य मंत्रालय की विज्ञप्ति के मुताबिक़ 2024-25 में भारत का यूरोपीय संघ के साथ वस्तु व्यापार 11.5 लाख करोड़ रुपये यानी 136.54 अरब डॉलर था। समझौते की अपनी शुल्क-तालिकाएँ अब भी "लागू होने की तारीख़" को भविष्य के रूप में लिखती हैं।
इसी यात्रा में स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती पर एक आशय-घोषणा पर दस्तख़त हुए, जो जर्मनी के संघीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बीच है। विदेश मंत्रालय के संधि-संग्रह में रखी उसकी प्रति 5 दिसंबर 2022 को नई दिल्ली में हुए प्रवासन और गतिशीलता समझौते का हवाला देती है, और कहती है कि यह दो साल के लिए लागू होगी और उसके बाद अपने आप बढ़ती रहेगी। दोनों काग़ज़ उसी सरकार के हैं जिसकी पार्टी रविवार को एक प्रदेश के सदन से बाहर हो गई।
और वह बाहर होना अभी काग़ज़ पर अस्थायी है। फ़र्क़ 1,138 वोट का है।
स्रोतडेयर लांडेसवाल्लाइटर मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न: 20 सितंबर 2026 के लांडटाग चुनाव का प्रदेश-स्तरीय अस्थायी नतीजा (Vorläufiges Ergebnis), 21 सितंबर 2026 को सुबह पढ़ा गया, डेयर लांडेसवाल्लाइटर मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न: सीटों का सरकारी ब्योरा — 36 प्रत्यक्ष और 35 सूची सीटें, कोई ओवरहांग या समायोजन सीट नहीं, डेयर लांडेसवाल्लाइटर मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न: 36 निर्वाचन क्षेत्रों का सीएसवी, जिसकी अपनी मुहर '21.09.2026 00:01:10' है, मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न का गृह एवं निर्माण मंत्रालय, मई 2026: 'लांडटागवाहलेन उंड कोमुनालवाहलेन इन एम-फ़ाउ' — सीट-बँटवारे की सरकारी व्याख्या, एलकेडब्ल्यूजी एम-फ़ाउ और चुनाव नियमों का पूरा पाठ, डेयर लांडेसवाल्लाइटर मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न: 1990 से अब तक के लांडटाग चुनावों के अंतिम नतीजों की सरकारी तालिका, डेयर लांडेसवाल्लाइटरिन मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न: 26 सितंबर 2021 के चुनाव का अंतिम सीट-ब्योरा — 79 सीटें, तीन ओवरहांग और पाँच समायोजन सीटों सहित, डेयर लांडेसवाल्लाइटर फ़ुअर बर्लिन / आम्ट फ़ुअर श्टाटिस्टिक बर्लिन-ब्रांडेनबुर्ग: बीसवें आबगेओर्डनेटेनहाउस के चुनाव का अस्थायी नतीजा, मुहर 21.09.2026, 03:33:56, श्टाटिस्टिशेस लांडेसआम्ट ज़ाक्सन-अनहाल्ट: 6 सितंबर 2026 के लांडटाग चुनाव का अस्थायी नतीजा, सीएसवी फ़ाइल — एएफ़डी 5,76,037 वोट यानी 43.79 फ़ीसदी, टी-ऑनलाइन, समाचार एजेंसी डीपीए की रिपोर्ट, 21 सितंबर 2026 को रात 1:46 बजे अद्यतन: रविवार रात मेर्त्स का बयान, सोमवार की बैठकों का कार्यक्रम और सीडीयू के दस सबसे ख़राब प्रादेशिक नतीजों की सूची, जर्मन संघीय सरकार के प्रेस एवं सूचना कार्यालय की चांसलर वेबसाइट, 21 सितंबर 2026 को पढ़ी गई: पद पर फ़्रीडरिष मेर्त्स, सीडीयू की अपनी वेबसाइट, 20 अक्तूबर 2025: एएफ़डी के साथ सहयोग पर पार्टी अध्यक्ष का बयान, मेक्लेनबुर्ग-फ़ोरपोमर्न सरकार का अपना पोर्टल: मुख्यमंत्री मानुएला श्वेज़िग का परिचय पृष्ठ, पत्र सूचना कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, 12 जनवरी 2026, दोपहर 3:50: भारत–जर्मनी संयुक्त वक्तव्य, चांसलर मेर्त्स की 12–13 जनवरी की भारत यात्रा, पत्र सूचना कार्यालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, 27 जनवरी 2026, दोपहर 2:16: भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता पूरी होने की घोषणा और व्यापार के आँकड़े, विदेश मंत्रालय का संधि-संग्रह: जर्मनी के संघीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बीच ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप पर आशय-घोषणा, जिसमें 5 दिसंबर 2022 के प्रवासन और गतिशीलता समझौते का हवाला है