न्यूयॉर्क में मंगलवार को गुतारेस, लूला और ट्रंप बोले; एक की आख़िरी आम बहस, दूसरे की ग़ज़ा-क्यूबा पर सीधी बात, तीसरे का ईरान पर फ़ैसला अभी बाक़ी
संयुक्त राष्ट्र महासभा के इक्यासीवें सत्र की आम बहस मंगलवार सुबह न्यूयॉर्क में खुली, और महासचिव एंतोनियो गुतारेस, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तय क्रम में बोले। यह रिपोर्ट किसी एजेंसी के सारांश से नहीं, gadebate.un.org पर मौजूद भाषणों के पाठ, प्रतिलेख और संयुक्त राष्ट्र की अपनी मीटिंग्स कवरेज सीधे पढ़कर लिखी गई है।

मंगलवार सुबह न्यूयॉर्क में गुतारेस, लूला और ट्रंप बोले
मंगलवार सुबह न्यूयॉर्क में ठीक नौ बजे संयुक्त राष्ट्र महासभा के इक्यासीवें सत्र की आम बहस खुली। हॉल भर चुका था। यह इस साइट की 22 सितंबर की पिछली रिपोर्ट के काम की अगली कड़ी है। वह रिपोर्ट बहस खुलने से आठ घंटे पहले फ़ाइल हुई थी। उसने बताया था कि बोलने की सूची कैसे बनती है, ब्राज़ील 1955 से पहले क्यों बोलता है, और अध्यक्ष के उद्घाटन-क्रम में क्या-क्या आता है। वह मशीनरी यहाँ दोबारा नहीं बताई जा रही। यहाँ सिर्फ़ यह दर्ज है कि पोडियम पर पहुँचकर तीन लोगों ने असल में क्या कहा: महासचिव एंतोनियो गुतारेस, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला, और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप।
क्रम वही निकला जो रात की सूची में दर्ज था। पहले गुतारेस बोले। फिर अध्यक्ष डॉ. ख़लीलुर रहमान ने बहस खोलने का भाषण दिया। इसके बाद लूला मंच पर आए, और लगभग पंद्रह मिनट बाद ट्रंप। मंगलवार दोपहर तक gadebate.un.org की सूची में चारों नाम "Previously" यानी हो-चुका वाले खाने में जा चुके थे।
लिखने से पहले एक जाँच ज़रूरी थी। बहस खुलने से पहले ब्राज़ील, अमेरिका, तुर्की और फ़्रांस, चारों के पन्नों पर एक जैसा वाक्य दिखता था: भाषण का प्रतिलेख जल्द आएगा। शब्द हर देश के लिए हूबहू वही थे। यह किसी के बोल चुकने का सबूत नहीं था। यह सिर्फ़ एक ख़ाली साँचा था, जो हर पन्ने पर पहले से बैठा था। इसलिए बहस बीतने के बाद हर पन्ना दोबारा खोला गया। देखना यह था कि उसमें असली शब्द आए या नहीं। गुतारेस के पन्ने पर अब भाषण का पूरा लिखित पाठ मौजूद है, पीडीएफ़ में, 21 पन्नों का। नाम है unsg_en.pdf। ब्राज़ील और अमेरिका के पन्नों पर लिखित पाठ मंगलवार शाम तक नहीं चढ़ा था। पर दोनों जगह भाषण का स्वचालित प्रतिलेख डाउनलोड होता है। संयुक्त राष्ट्र की अपनी मीटिंग्स कवरेज भी पूरी मौजूद है। संयुक्त राष्ट्र ख़ुद लिखता है कि यह प्रतिलेख स्वचालित है, ग़लतियाँ हो सकती हैं, और यह कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं। जहाँ प्रतिलेख और मीटिंग्स कवरेज एक ही वाक्य दर्ज करते हैं, वहाँ दोहरी पुष्टि मानी गई है। press.un.org को सीधे खोलने की कोशिशें बार-बार नाकाम रहीं, ब्राउज़र से भी, कमांड लाइन से भी। हर बार जवाब वही आया: 404। उसी मीटिंग्स कवरेज का पूरा पाठ gadebate.un.org के हर वक्ता-पन्ने पर हूबहू छपा मिला। इसलिए वहीं से पढ़ा गया।
गुतारेस: सत्ता की चार परीक्षाएँ, आख़िरी आम बहस से
गुतारेस के भाषण का पहला वाक्य उनके लिखित पाठ के पहले पन्ने पर दर्ज है: "The faultlines in our world are widening." अगला वाक्य उतना ही छोटा है: "Cracks have become canyons." यानी दुनिया की दरारें अब खाइयाँ बन चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने एक बात साफ़ कर दी। युद्ध, असमानता, जलवायु संकट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ये अलग-अलग समस्याएँ नहीं हैं। उनके अपने शब्दों में ये "chapters of the same story, the story of power" हैं। सत्ता तीन तरह से बदल रही है, उन्होंने कहा। देशों के बीच नए आर्थिक-तकनीकी केंद्र उभर रहे हैं। सरकारों से निजी कंपनियों और व्यक्तियों की ओर सत्ता खिसक रही है। और इंसान अपनी सत्ता मशीनों को सौंप रहे हैं।
इसी से उन्होंने अपनी सालाना रिपोर्ट की रीढ़ बताई: सत्ता की चार परीक्षाएँ। युद्ध और शांति, असमानता, जलवायु संकट, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता। यह उनकी आख़िरी आम बहस है। कार्यकाल 31 दिसंबर को ख़त्म होता है। भाषण के आख़िर में उन्होंने ख़ुद कहा कि दफ़्तर में बचे "100 days" में भी वह यही सोच लेकर चलेंगे। यह चौखाना अगले छह दिनों के बाक़ी भाषणों को परखने का एक तरीक़ा भी बन जाता है, भले कोई नेता इसका सीधा हवाला न दे।

पहली परीक्षा, युद्ध और शांति पर, उनके शब्द तीखे थे। मध्य पूर्व के तथाकथित संघर्ष-विराम, उन्होंने कहा, "little more than lesser fires" रहे हैं। छोटी आग बुझाकर बड़ी आग बुझी मान ली गई। पश्चिमी तट में इसराइली बस्तियों के विस्तार पर उनका शब्द था "bulldozing": यह विस्तार शांति की राह को कुचल रहा है, और जातीय सफ़ाई की आशंका खड़ी करता है। रूस के यूक्रेन पर हमले को उन्होंने चार्टर का खुला उल्लंघन बताया। सूडान और म्यांमार का ज़िक्र भी आया। दोनों को उन्होंने ऐसे युद्ध बताया जिन पर दुनिया की नज़र से ओझल होने का ख़तरा है। सुरक्षा परिषद पर उनकी बात सबसे सीधी थी: "A 21st century Security Council without permanent African representation is unjust and indefensible।" अफ़्रीक़ा को स्थायी सीट नहीं मिली है। गुतारेस के लिए यह अन्याय है।
दूसरी परीक्षा, असमानता पर, एक ऐलान था। संयुक्त राष्ट्र ने अपने इतिहास में पहली बार वरिष्ठ नेतृत्व, मुख्यालय और पेशेवर स्टाफ़, तीनों स्तरों पर लैंगिक बराबरी हासिल की है। इस पर उनका वाक्य याद रखने लायक़ है: "Equality is not a dream. It is a decision।" क़र्ज़ राहत और आईएमएफ़ के विशेष आहरण अधिकारों में ग़रीब देशों की बड़ी हिस्सेदारी की माँग भी इसी परीक्षा का हिस्सा थी। तीसरी परीक्षा, जलवायु संकट, संख्याओं में आई। 1.5 डिग्री की सीमा टूटना अब लगभग तय है, उन्होंने कहा। रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से पाँच बड़ी पश्चिमी तेल कंपनियों ने क़रीब आधा खरब डॉलर कमाया। विकासशील देशों के जलवायु-अनुकूलन कोष में सिर्फ़ 34 अरब डॉलर हैं। यह फ़ासला उन्होंने ख़ुद गिनाया।
चौथी परीक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पर उनका वाक्य था: "The danger is not technology. The danger is technology without accountability।" उन्होंने शीत युद्ध का हवाला दिया। उस दौर में भी दो प्रतिद्वंद्वी शक्तियों ने साझा जोखिम टालने के लिए साझा तंत्र बनाए थे, उन्होंने कहा, और आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता को भी वैसी ही स्पष्टता और तात्कालिकता चाहिए। आगे उन्होंने कहा: "killer robots must have no place in our future।" भाषण का आख़िरी वाक्य भी उतना ही सीधा था: "The greatest power is not the power to dominate. It is the power to build a future that works for everyone।"
लूला: ग़ज़ा से क्यूबा तक, और "हमें विमानवाहक पोत नहीं चाहिए"
लूला का भाषण गुतारेस से कहीं ज़्यादा टकराव वाला था। संयुक्त राष्ट्र की मीटिंग्स कवरेज ने जो हेडलाइन बनाई, वह लहजा ख़ुद बता देती है: "Brazil not in backyard of world's biggest military Power, says President।" उन्होंने कहा कि संगठन युद्ध मिटाने के अपने सबसे बड़े मक़सद में नाकाम हो रहा है। उसकी साख़ इतनी कभी नहीं गिरी थी। सुरक्षा परिषद पर उनका वाक्य था: "We are all held hostage by the inaction of the Security Council।" परिषद की निष्क्रियता के आगे हम सब बंधक हैं, यही उनका आरोप था। उन्होंने याद दिलाया कि ब्राज़ील ने 1946 के पहले सत्र से ही वीटो अधिकार का विरोध किया है।

ग़ज़ा पर उनके शब्द कड़े थे। उन्होंने कहा: "Generations of Palestinians will carry the pain and trauma left by the genocide of women and children perpetrated by the Netanyahu government in Gaza।" यह लूला का अपना शब्द है, नरसंहार। यह सीधे नेतन्याहू सरकार पर बाँधा गया है। पश्चिमी तट की बस्तियों पर उनका वाक्य था कि वे दो-राष्ट्र समाधान को "increasingly unviable" बना रही हैं। लगातार अव्यावहारिक, यानी। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर उनका वाक्य था कि वह व्यापार का ज़रूरी रास्ता होने की जगह "a battleground" बन चुका है। रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने कहा: "We all know that there will be no winners on the battlefield. Diplomacy is the only option।"
अपने ही महाद्वीप पर उन्होंने एक बात मानी। दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताक़त की भौगोलिक नज़दीकी लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों के लिए एक हक़ीक़त है। यह ख़ासकर तब, जब वर्चस्व की पुरानी ख़्वाहिशें लौट रही हों। पर उन्होंने साफ़ कहा: "Brazil does not fit in anyone's backyard।" संगठित अपराध पर उन्होंने एक प्रस्ताव का ज़िक्र किया: "the spirit of the proposal that I personally handed to the US President।" इसके फ़ौरन बाद उन्होंने जोड़ा: "We do not need aircraft carriers guarding our waters।" हमें हथियार और पैसे का बहाव रोकना है। विमानवाहक पोत नहीं चाहिए। क्यूबा पर उनके शब्द अलग थे: "In Cuba, the world watches in horror as collective punishment is imposed on 10 million people by an illegal economic and energy embargo।" दस करोड़ लोगों पर सामूहिक सज़ा, उन्होंने इसे यही कहा। भ्रष्टाचार पर उनका वाक्य छोटा और सपाट था: "The fight against corruption shall remain relentless. No matter who it hurts. No one is above the law।" जलवायु पर उन्होंने अमेज़न में वनों की कटाई को ग्यारह साल के निचले स्तर पर लाने का दावा किया। बड़ी तकनीकी कंपनियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नियमन टालना, उन्होंने कहा, "an unforgivable historical omission" है। एक अक्षम्य ऐतिहासिक चूक, यानी।
पिछली शाम जो अंदाज़ा लगाया गया था, मंच पर वैसा नहीं आया
इस डेस्क की अपनी 21 सितंबर की रिपोर्ट ने रियो टाइम्स ऑनलाइन के हवाले से लिखा था कि लूला मंच से ट्रंप को नाम लेकर चेतावनी देने की तैयारी में हैं, ख़ासकर ब्राज़ील के 4 अक्तूबर चुनाव में दख़ल न देने की। मंगलवार को पढ़े गए प्रतिलेख में लोकतंत्र और चुनाव वाला हिस्सा मौजूद है। पर उसमें ट्रंप, अमेरिका या किसी और देश का नाम कहीं नहीं आता। लूला का असल वाक्य था: "We will not allow the enemies of democracy, whether domestic or foreign, to undermine popular will. Brazilian democracy belongs to Brazilians. Brazil continues to be a sovereign country. Nobody, nobody will turn us away from this path।" दुश्मन "घरेलू या विदेशी", दोनों के लिए एक ही जवाब। पर कोई नाम नहीं।
यही पैटर्न भाषण में दूसरी जगह भी दिखा। सैन्य ताक़त की नज़दीकी वाले हिस्से में भी उन्होंने "the world's greatest military power" कहा। अमेरिका शब्द इस्तेमाल किए बग़ैर। संगठित अपराध के प्रस्ताव में उन्होंने "the US President" कहा। नाम लेकर नहीं। एक अनुमान और एक असल भाषण के बीच का यह फ़र्क़ ख़ुद एक तथ्य है। इसे दर्ज करना ठीक है। पहले की रिपोर्टिंग ग़लत नहीं थी, और लूला ने इशारा भी किया। बस जो कहा गया, वह परोक्ष था। जो अंदाज़ा लगाया गया था, वह प्रत्यक्ष।
ट्रंप: ईरान को "मिटा दूँ" या सौदा, फ़ैसला चुनाव के बाद
ट्रंप का भाषण क़रीब 38 मिनट का था। सबसे ज़्यादा जगह ईरान को मिली। उन्होंने ईरान को "the number one sponsor of terror" बताया। 51 साल से यह "fanatical" शासन ख़ून-ख़राबे से चल रहा है, उन्होंने कहा। उन्होंने दावा किया कि "Operation Midnight Hammer" ने ईरान का परमाणु कार्यक्रम "beneath mountains of rubble" दबा दिया। "Operation Epic Fury" के बाद ईरान की नौसेना के सभी 159 जहाज़ समंदर की तली में हैं, यह भी उनका दावा है। "They were the bully of the Middle East," उन्होंने कहा, "but they are the bully no more।" यह उनका अपना दावा था।

इसके बाद जो एक वाक्य आया, वह इस साल की आम बहस का सबसे तीखा हिस्सा है। "I have a big decision to make. Will a deal be made with Iran that lets them rebuild and create a far greater country than it ever was before?...Or do I annihilate the Islamic Republic and do it quickly, never giving them a chance to kill and destroy people and countries again? Do I drive them into hell with no chance of survival and no hope of future greatness or generations?" या तो ईरान को फिर बनने का मौक़ा मिले। या उसे मिटाकर नरक में धकेल दिया जाए। इसके फ़ौरन बाद उन्होंने जोड़ा: "But I believe we'll make a deal right after the election, because it doesn't make sense for them not to।" कौन-सा चुनाव, यह उन्होंने ख़ुद अगले वाक्य में साफ़ किया। अमेरिका का अपना मध्यावधि चुनाव, जिसमें वह ख़ुद उम्मीदवार नहीं हैं। ईरान की नौवहन-रोधी कार्रवाइयों पर उन्होंने सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव का शुक्रिया अदा किया। और दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से हाल में "more than 1 billion barrels of oil" बाहर निकाला है। हर दिन-रात "22, 25, 30, 32 and 37 ships" वहाँ से निकाले जा रहे हैं, उन्होंने कहा।
होर्मुज़ का नाम लूला और ट्रंप, दोनों ने लिया, गुतारेस ने नहीं
इसी सुबह के तीन भाषणों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य का ज़िक्र ढूँढना एक जाँच थी, अनुमान नहीं।
नतीजा साफ़ निकला। लूला और ट्रंप, दोनों ने इसका नाम लिया। गुतारेस ने अपने 21 पन्नों में एक बार भी नहीं। लूला के लिए यह जलडमरूमध्य व्यापार के रास्ते से "a battleground" बन जाने का उदाहरण था। ट्रंप के लिए यह अपनी नौसेना की कामयाबी गिनाने का मौक़ा था, बैरल और जहाज़ों की गिनती के साथ। गुतारेस ने मध्य पूर्व, यूक्रेन, सूडान और म्यांमार का नाम लिया। ईरान या होर्मुज़ का नहीं।
पश्चिम एशिया का यह सात महीने पुराना युद्ध इस साल की आम बहस में मंगलवार को पहली बार पहुँचा। इसकी अपनी मशीनरी इस साइट पहले ही रिपोर्टों में दर्ज कर चुकी है: होर्मुज़ में रुके जहाज़ों पर एक रिपोर्ट, और इस युद्ध के सात महीने पूरे होने पर ब्रिटेन की भूमिका कहाँ तक है, इस पर एक और। वह ब्यौरा यहाँ दोहराया नहीं जा रहा। जो नया है, वह सिर्फ़ इतना है। यह जंग अब तक आम बहस के भाषणों में नहीं आई थी। मंगलवार को दो नेताओं की ज़ुबान पर आ गई।
मेलानिया की तारीफ़, ग्रीनलैंड में दो नए ठिकाने, क्यूबा पर उलटा रुख़
ईरान के अलावा ट्रंप के भाषण में कुछ और घोषणाएँ थीं। उन्होंने प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप का ज़िक्र किया। उन्होंने "the extraordinary work" किया है, उन्होंने कहा, "many displaced Ukrainian and Russian children" को उनके परिवारों तक वापस पहुँचाने का। मेलानिया इतिहास में पहली प्रथम महिला हैं जिन्होंने सुरक्षा परिषद की किसी बैठक की अध्यक्षता की, उन्होंने यह भी जोड़ा। ग्रीनलैंड पर उन्होंने कहा कि अमेरिका वहाँ "a large military presence" खड़ा करेगा। "two very major military bases" बनाए जाएँगे। डेनमार्क के साथ यह समझौता उसी दिन दस्तख़त होने वाला था। संयुक्त राष्ट्र के भीतर उन्होंने अपने काम को "the most sweeping U.N. reforms in history" बताया। 2026 में संगठन का बजट पहली बार 15 फ़ीसदी घटा। नौकरशाही से 4,000 से ज़्यादा पद ख़त्म हुए। "There is no global government," उन्होंने कहा, "and while I'm president, there will be no global taxes।" अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत को उन्होंने "rogue institution" बताया। उसके सभी सदस्य देशों से हटने को कहा।
क्यूबा पर ट्रंप का रुख़ लूला से बिल्कुल उलट था। यह फ़र्क़ किसी अनुमान का नहीं। यह उसी मंगलवार सुबह के दो भाषणों का है। लूला ने क्यूबा पर पाबंदी को "illegal" और "collective punishment" बताया था। ट्रंप ने कहा कि वहाँ का साम्यवादी शासन "under great pressure" है। "an absolutely failed state" है। "it will fall," उन्होंने कहा। विदेश मंत्री मार्को रुबियो क्यूबा के साथ बातचीत में लगे हैं, उन्होंने बताया। अपना वाक्य उन्होंने इस तरह ख़त्म किया: "Communism will never be coming to America, but freedom will be coming to Cuba, and safety and security will be coming to Mexico।" यह दोनों नेताओं का एक ही मसले पर, एक ही मंच से, कुछ घंटों के फ़ासले पर दिया गया परस्पर विरोधी रुख़ है। किसका आकलन सही है, यह इस रिपोर्ट का विषय नहीं। दोनों पक्ष यहाँ अपने-अपने शब्दों में दर्ज हैं।
जो अभी नहीं पता, और आगे क्या बचा है
तीनों भाषणों के पाठ में कहीं ब्राज़ील या लूला का ज़िक्र ढूँढा गया। ट्रंप के 38 मिनट में यह नाम एक बार भी नहीं आया, यह एक सीधी खोज से मिला तथ्य है, अनुमान नहीं। जॉर्डन, तुर्की, किर्गिज़स्तान, क़तर, लिथुआनिया, पेरू, चिली और फ़्रांस के नेताओं ने मंगलवार को जो कहा, वह इस रिपोर्ट के दायरे से बाहर है। उसमें भारत या पश्चिम एशिया से जुड़ी कोई बात है या नहीं, यह अभी जाँचा नहीं गया। हॉल में तालियाँ बजीं या कोई प्रतिनिधिमंडल बाहर निकला, इसकी कोई पुष्टि इस डेस्क को नहीं मिली। इसलिए ऐसा कोई ब्यौरा यहाँ नहीं जोड़ा गया।
भारत की तरफ़ से विदेश मंत्री एस. जयशंकर का अपना संबोधन अब भी चार दिन दूर है, 26 सितंबर को। अगले महासचिव को चुनने की प्रक्रिया इन भाषणों में सीधे ज़िक्र में नहीं आई। इसका काग़ज़ी ट्रेल इस साइट की पिछली रिपोर्ट में दर्ज है। पर गुतारेस के अपने शब्दों में यह ज़रूर मौजूद रही: उन्होंने अपने बचे "100 days" का हवाला दिया, यह जताने के लिए कि यह कुर्सी जल्द ख़ाली होने वाली है। बहस मंगलवार से शनिवार, 26 सितंबर तक चलेगी। फिर एक आख़िरी बैठक 28 सितंबर को होगी। बाक़ी लगभग एक सौ तीस भाषण अभी बाक़ी हैं। हर एक पर वही तरीक़ा लागू होगा जो यहाँ अपनाया गया: पहले पन्ना खोलकर देखना कि शब्द असली हैं, फिर उन्हें पढ़ना।
स्रोतgadebate.un.org: महासचिव गुतारेस का पन्ना, जिसमें भाषण का लिखित पाठ (PDF), स्वचालित प्रतिलेख और संयुक्त राष्ट्र की मीटिंग्स कवरेज तीनों मौजूद हैं, 22-23 सितंबर 2026 को पढ़ा गया, संयुक्त राष्ट्र: गुतारेस के भाषण का लिखित पाठ, 'THE SECRETARY-GENERAL — ADDRESS TO THE GENERAL ASSEMBLY, New York, 22 September 2026', 21 पन्ने, पहला पन्ना सीधे पढ़ा गया, gadebate.un.org: ब्राज़ील/लूला का पन्ना, स्वचालित प्रतिलेख और मीटिंग्स कवरेज दोनों पढ़े गए; लिखित पाठ इस पन्ने पर 23 सितंबर तक नहीं चढ़ा था, gadebate.un.org: अमेरिका/ट्रंप का पन्ना, स्वचालित प्रतिलेख और मीटिंग्स कवरेज दोनों पढ़े गए; लिखित पाठ इस पन्ने पर 23 सितंबर तक नहीं चढ़ा था, gadebate.un.org: 22 सितंबर के सत्र की वक्ता-सूची, यह पुष्टि करने के लिए कि गुतारेस, रहमान, लूला और ट्रंप के बाद चारों भाषण 'Previously' सूची में दर्ज हो चुके थे, भारत पन्ना, 22 सितंबर 2026 — इसी डेस्क की अपनी पिछली रिपोर्ट, जो बहस खुलने से आठ घंटे पहले फ़ाइल हुई थी