विषय
किसान
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देश
महाराष्ट्र में 265 तालुकों में सूखे जैसी स्थिति घोषित, गंभीर या सामान्य की श्रेणी अभी तय नहीं
शनिवार को जारी सरकारी आदेश पर तारीख़ 25 सितंबर लिखी है, पर उस पर चढ़ा डिजिटल दस्तख़त 26 सितंबर की सुबह का है। द हिंदू ने लिखा 265 तालुके, इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा राज्य का 75 फ़ीसदी हिस्सा, बिज़नेस स्टैंडर्ड ने आदेश के हवाले से 74 फ़ीसदी। आदेश ख़ुद न कोई प्रतिशत लिखता है, न राज्य के कुल तालुकों की गिनती। वह सिर्फ़ इतना कहता है कि 'Trigger-1' नाम की पहली जाँच पास हुई है, सूखे की तीव्रता अभी तय नहीं हुई है, और फ़सल के नुक़सान का मुआवज़ा एक अलग आदेश से बाद में आएगा।
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काम की बात
सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क शून्य हुआ, सोयाबीन-पाम पर पांच फ़ीसदी
24 सितंबर से कच्चे सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क शून्य और सोयाबीन-पाम पर पांच फ़ीसदी है, पर पीआईबी की घोषणा और सीबीआईसी की असली अधिसूचना एक चीज़ नहीं। कृषि उपकर और सामाजिक कल्याण अधिभार जोड़ने पर कुल शुल्क साढ़े सोलह फ़ीसदी से घटकर साढ़े पांच या ग्यारह फ़ीसदी बैठता है, और एक लीटर पर इसका मतलब है आयातक के लिए साढ़े छह से साढ़े तेरह रुपये तक की गिरावट। पर गोदाम में पड़ा तेल पुराने शुल्क पर ही आयात हुआ है, और यह छूट टिन तक कब पहुंचेगी, इसकी कोई तारीख़ किसी ने नहीं बताई।
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देश
कर्नाटक में हर किसान को ढाई हज़ार का ऐलान, सरकारी आदेश अभी जारी नहीं
गुरुवार रात विधानसभा में उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने हर सूखा-प्रभावित किसान को ढाई हज़ार रुपये और कर्ज़ पर बारह महीने की मोहलत का ऐलान किया। दो असली सरकारी आदेश मिलते हैं, दोनों ताल्लुक़ों की सूखा-घोषणा के हैं, दोनों में ढाई हज़ार रुपये का कोई ज़िक्र नहीं। उधर महाराष्ट्र सूखा घोषित करने से पहले अक्तूबर का इंतज़ार कर रहा है, क्योंकि केंद्र की नियमावली का हिसाब मॉनसून सीज़न ख़त्म हुए बिना पूरा नहीं होता।
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पैसा
न्यूज़ीलैंड बीस अक्तूबर से भारत के हर निर्यात पर शुल्क शून्य करेगा, बदले में भारत अपनी सिर्फ़ सत्तर फ़ीसदी शुल्क लाइनें खोल रहा है
वाणिज्य मंत्रालय की 21 सितंबर की विज्ञप्ति में यह दावा चार बार दर्ज है कि हर शुल्क लाइन पर, पहले ही दिन से, भारत के निर्यात पर न्यूज़ीलैंड में शुल्क शून्य होगा। दावा सच निकलता है, मगर विज्ञप्ति यह नहीं बताती कि भारत की अपनी रियायत सिर्फ़ सत्तर फ़ीसदी शुल्क लाइनों तक है, जिसमें से एक तिहाई से ज़्यादा दस बरस में पूरी होगी।
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समझिए
बंगाल की खाड़ी का अवदाब शाम साढ़े पांच बजे पुरी से 310 किलोमीटर दूर दर्ज था, दोपहर की विज्ञप्ति में वह अवदाब था ही नहीं
सोमवार, 21 सितंबर की दोपहर 2 बजे और 2:05 बजे मौसम विभाग की अंग्रेज़ी और हिंदी विज्ञप्तियों में बंगाल की खाड़ी के सिस्टम को 'वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया' लिखा गया, यह नाम ख़ुद चक्रवात चेतावनी प्रभाग की अपनी शब्दावली पुस्तिका में कहीं दर्ज नहीं है। उसी रात साढ़े नौ बजे जारी राष्ट्रीय बुलेटिन नंबर 1 में लिखा मिला कि शाम साढ़े पांच बजे तक यह सिस्टम पुरी से 310 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व अवदाब बन चुका था। उसी दोपहर की विज्ञप्ति में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कुछ और हिस्सों से लौट जाने की घोषणा भी है, दो दिन की ख़ामोशी के बाद।
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दुनिया
मॉस्को की कपोत्न्या रिफ़ाइनरी पर 20 सितंबर की रात: रूस का दावा 1,110 ड्रोन गिराने का है, यूक्रेन ने छोड़े गए ड्रोन की कोई संख्या नहीं दी
रूस में संसदीय चुनाव की गिनती वाली रात, क्रेमलिन से क़रीब 15 किलोमीटर दूर गैज़प्रोमनेफ़्त-मॉस्को रिफ़ाइनरी पर ड्रोन पहुँचे। यूक्रेन के जनरल स्टाफ़ के मुताबिक़ तीन इकाइयाँ मारी गईं, जिनमें एवीटी-6 प्राथमिक प्रसंस्करण इकाई भी है। हर आँकड़ा किसी एक पक्ष का दावा है और दूसरे पक्ष ने उसकी पुष्टि नहीं की, इसलिए यहाँ हर संख्या के साथ उसका कहने वाला दर्ज है।
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देश
मौसम विभाग की दोपहर 1:40 बजे की विज्ञप्ति में मछुआरों के लिए उसी शाम की समय-सीमा है
रविवार, 20 सितंबर की इस विज्ञप्ति में मछुआरों के लिए चार पंक्तियां हैं। तीन बताती हैं कि समुद्र के किन हिस्सों में किन तारीख़ों तक नहीं जाना। चौथी कहती है कि जो समुद्र में हैं, वे उसी शाम तक तट पर लौट आएं। उसी दस्तावेज़ में दर्ज है कि बंगाल की खाड़ी का निम्न दाब क्षेत्र 23 सितंबर की सुबह के आसपास उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटों के पास पहुंच सकता है।
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देश
मॉनसून 19 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से लौटा, और उस दिन के 695.6 मिलीमीटर मौसम विभाग की किसी विज्ञप्ति में दर्ज नहीं हैं
शनिवार, 19 सितंबर 2026 को भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दोपहर 2:20 बजे अंग्रेज़ी में और 2:25 बजे हिंदी में जो विज्ञप्ति जारी की, उसमें लिखा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से लौट गया है, जबकि उसकी सामान्य वापसी की तारीख़ 17 सितंबर थी। उसी दस्तावेज़ में अगला सिस्टम भी दर्ज है — उसी शाम उत्तरी अंडमान सागर पर बनने वाला निम्न दाब क्षेत्र। और उस दिन हर जगह छपा मौसम का हिसाब, 695.6 मिलीमीटर, उन सत्ताईस पन्नों में कहीं नहीं है।
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समझिए
पंजाब की भूजल दर 152.22 फ़ीसदी पर आई, और पानी पिछली बार से ज़्यादा निकला
सोमवार, 31 अगस्त को चंडीगढ़ के पंजाब भवन में जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि दशकों में पहली बार राज्य के भूजल की हालत सुधरी है: खिंचाई की दर 164 से घटकर 152.22 फ़ीसदी, अति-दोहित ब्लॉक 117 से 110, सुरक्षित ब्लॉक 17 से 20। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के अपने 2025 के आकलन में पंजाब से निकाला गया पानी 26.27 अरब घनमीटर था। 2026 के आकलन में वह 26.32 है।
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समझिए
कोयला मंत्रालय का 114 फ़ीसदी और सीईए की उसी 11 सितंबर की रिपोर्ट का 19 फ़ीसदी, दोनों पंजाब के बिजलीघरों के आँकड़े हैं
रविवार दोपहर कोयला मंत्रालय ने विज्ञप्ति निकालकर कहा कि पंजाब में बिजली कम बनने की वजह कोयले की कमी नहीं है, और 11 सितंबर को पीएसपीसीएल के संयंत्रों में भंडार मानक ज़रूरत का क़रीब 114 फ़ीसदी था। उसी 11 सितंबर की केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की दैनिक कोयला रिपोर्ट में पंजाब के दो निजी बिजलीघर संकटग्रस्त सूची में दर्ज हैं, भंडार 19 और 22 फ़ीसदी। दोनों आँकड़े सरकार के अपने हैं और अलग-अलग संयंत्रों के हैं।
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देश
बीज अधिनियम 1966 में पहला जुर्माना पाँच सौ रुपये है और नए मसौदे में तीस लाख तक, 10 सितंबर को किसान संगठनों से राय ली जाएगी
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 10 सितंबर को अपराह्न 4 बजे कृषि भवन में किसान संगठनों के साथ नए सीड एक्ट के मसौदे पर बैठेंगे। जिस अधिनियम की जगह यह मसौदा लेगा, उसमें पहली बार पकड़े जाने पर जुर्माना पाँच सौ रुपये तक है। पर उसी के साथ चलने वाले 1983 के आदेश में सज़ा तीन महीने से सात साल तक की है, यानी नए मसौदे की तीन साल की अधिकतम क़ैद से ज़्यादा।
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समझिए
कोयला गैसीकरण योजना को पहले दौर में सात आवेदन मिले, तीन एक ही समूह के; सरकार के अपने दस्तावेज़ 25 परियोजनाएँ गिनते हैं
कोयला मंत्रालय ने 37,500 करोड़ रुपये की योजना के पहले दौर को 'जबरदस्त प्रतिक्रिया' कहा है। सात आवेदनों में तीन अदानी एंटरप्राइजेज के हैं और दो सरकारी कंपनियों के। कैबिनेट की विज्ञप्ति 25 परियोजनाओं का अनुमान देती है, और तीन दिन पहले मंत्रालय उन ख़बरों का खंडन कर रहा था कि किसी ने आवेदन ही नहीं किया।
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समझिए
गुजरात में खेत का सबसे छोटा क़ानूनी टुकड़ा अब 10 गुंठा है, और अध्यादेश का अपना बयान खेत की नहीं, शहर के किनारे की ज़मीन के काग़ज़ की बात करता है
14 जुलाई से पूरे गुजरात में खेती की ज़मीन का मानक क्षेत्र 1,012 वर्ग मीटर है; पहले यह ज़मीन की क़िस्म के हिसाब से 20 गुंठा से 3 एकड़ तक था। उसी अध्यादेश ने 1948 से मार्च 2026 तक के क़ानून-विरुद्ध सौदे बिना जुर्माने के नियमित कर दिए। राजपत्र का कारण-कथन विकास योजना और ग़ैर-खेती अनुमति की बात करता है; अख़बार में छपा राजस्व अधिकारी का उदाहरण तीन बेटों का है।
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देश
भागलपुर में गंगा 2021 के रिकॉर्ड से ऊपर है और भागलपुर की अपनी बारिश 61 फ़ीसदी कम; एक ही मानसून ने बिहार को डुबोया और कर्नाटक को सुखाया
बिहार में 34 लाख लोग बाढ़ में हैं, जबकि राज्य के अपने आसमान से सामान्य से बहुत कम पानी गिरा। पानी नेपाल से आया, उस हिमनद से जो 26 अगस्त को लांगतांग लिरुंग पर ढहा। कर्नाटक में 31 में से 30 ज़िले सूखे हैं और 126 तालुक सूखाग्रस्त होने वाले हैं। बुंदेलखंड में खेत-तालाब ख़ाली हैं।
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पैसा
आंध्र के झींगा किसान तीस सितंबर की मियाद दे रहे हैं, और उनका बाज़ार अमेरिका में शुल्क के नीचे दबा है
फ़ीड एक सौ नौ रुपये किलो है और उसमें और बढ़ोतरी की तैयारी है। किसानों की माँग है कि उसे बीस हज़ार रुपये प्रति टन सस्ता कराया जाए, वरना वे तालाब ख़ाली छोड़ देंगे।
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देश
जैव विविधता समितियाँ 2.76 लाख हैं, मंत्रालय की हिंदी विज्ञप्ति में 27.6 लाख छपीं
चंडीगढ़ में राज्य जैव विविधता बोर्डों की 16वीं राष्ट्रीय बैठक हुई। पर्यावरण मंत्री ने इन समितियों को काम करने लायक़ बनाने की बात कही। उसी विज्ञप्ति में उनकी गिनती दस गुना ज़्यादा लिखी है।
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दुनिया त्रिपुरा से यूरोप गया जैविक चावल अठारह टन है, यानी एक ट्रक भर एपीडा की विज्ञप्ति कहती है कि किसानों को घरेलू भाव से चालीस फ़ीसदी तक ज़्यादा मिलने की उम्मीद है। जिस बाज़ार में यह खेप गई है, वहाँ भारतीय चावल की खेपें पिछले पाँच साल में दो सौ से ज़्यादा बार रोकी जा चुकी हैं।
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समझिए 81 करोड़ लोग भूखे हैं, यह इस आँकड़े का मतलब नहीं है, और यही सबसे ज़्यादा दोहराया जाता है राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम गाँव की 75 फ़ीसदी और शहर की 50 फ़ीसदी आबादी तक जाता है। यह ऊपरी सीमा है, गिनती नहीं। और यह सीमा 2011-12 की आबादी पर बैठाई गई थी।
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पैसा प्याज़ की दो रेलगाड़ियाँ और तीस ट्रक चले, और अब तक 669 टन बिका है उपभोक्ता मामले विभाग की विज्ञप्ति दोनों संख्याएँ साथ छापती है। हिलाया गया माल लगभग 2,290 टन है, बिका हुआ 669 टन, और उसमें भी एक-तिहाई मंडी के भाव पर थोक में गया।
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पैसा चीनी की स्टॉक सीमा छह हफ़्ते में आधी करनी पड़ी, और गिरावट का कोई अंक नहीं दिया गया 1 अगस्त को व्यापारियों पर 4,000 क्विंटल की सीमा लगी थी। 15 सितंबर से वह 2,000 रह जाएगी। उसी विज्ञप्ति में मिल भाव में बीस फ़ीसदी गिरावट का दावा है, बिना यह बताए कि भाव पहले क्या था।
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देश सोन नदी का बँटवारा हो गया, और गृह मंत्रालय की विज्ञप्ति में एक भी संख्या नहीं है बिहार और झारखंड के बीच समझौता हुआ। सरकार के अपने दस्तावेज़ में यह नहीं लिखा कि किसे कितना पानी मिला। जो आँकड़े चल रहे हैं वे समारोह में कही गई बातों से आए हैं।
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पैसा उर्वरक सब्सिडी किसान के खाते में नहीं जाती, वह कंपनी को जाती है यूरिया की 45 किलो की बोरी पर किसान 242 रुपये देता है। सरकार के अपने हिसाब से वह बोरी लगभग 2,200 रुपये की पड़ती है। बाक़ी रक़म कंपनी को मिलती है, और किसान को उसका आँकड़ा कभी नहीं बताया जाता।
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देश जैव-विविधता का यह पैसा किसी किसान या गाँव तक नहीं पहुँचा, और विज्ञप्ति ख़ुद यही कहती है राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण ने 5.68 करोड़ रुपये जारी किए। यह रक़म बीज कंपनियों से भिंडी, खीरे और तरबूज़ की क़िस्मों के बदले वसूली गई थी। सामग्री बाज़ार और व्यापारियों से ली गई थी, इसलिए उसका सिरा किसी गाँव से नहीं जुड़ सका।
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पैसा प्याज़ और सीएनजी दोनों चढ़े, पर घर के बजट में फ़र्क़ 124 रुपये का है दिल्ली में सीएनजी 29 अगस्त की सुबह ₹3.89 महँगी हुई। प्याज़ साल भर में 70 फ़ीसदी ऊपर है। एक परिवार पर असल बोझ कितना बैठता है, यह सरकार के अपने सर्वे से निकाला जा सकता है।