रियाध पर हौथी हमले का दावा शनिवार तड़के आया, सऊदी अरब में भारतीयों की गिनती विदेश मंत्रालय के अपने दो दस्तावेज़ों में अलग-अलग है
19 सितंबर, शनिवार तड़के रियाध के किंग ख़ालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास धुएँ का गुबार उठा। हौथी विद्रोहियों ने यनबू में अरामको की एक सुविधा पर हमले का दावा किया; सऊदी-नीत गठबंधन ने कहा कि रियाध पर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल हवा में ही मार गिराई गई। कौन सही है, यह किसी तीसरे स्रोत से पुष्ट नहीं हुआ।

रियाध के ऊपर शनिवार, 19 सितंबर की सुबह जो धुआँ उठा, वह सऊदी अरब की राजधानी में इस लड़ाई का पहला निशान था।
रात भर पहले सऊदी असैनिक सुरक्षा ने रियाध और अल-ख़र्ज में हवाई ख़तरे की चेतावनी वाले फ़ोन अलर्ट भेजे थे। सुबह उसने "सब सामान्य" का संदेश दिया। इसी बीच रॉयटर्स के एक पत्रकार ने रियाध के ओलाया इलाक़े में धमाकों जैसी आवाज़ें सुनीं, और बाद में हवाई अड्डे के पास कई लोगों ने काले धुएँ का एक बड़ा गुबार देखा। यह सब *द इंडियन एक्सप्रेस* ने रॉयटर्स के हवाले से 19 सितंबर को छापा, रात 7:15 बजे। यह डेस्क ने अख़बार के पन्ने का raw मेटा-डेटा ख़ुद पढ़कर यह तारीख़ पक्की की, किसी सारांश से नहीं।
सऊदी अरब में क़रीब 26 लाख भारतीय रहते हैं। यह विदेश मंत्रालय की अपनी एक तालिका का आँकड़ा है। मंत्रालय के ही एक दूसरे दस्तावेज़ में यही गिनती लगभग 27 लाख बैठती है, और दोनों में से किसी में यह नहीं लिखा कि आँकड़ा किस साल का है। यह लेख उन्हीं भारतीयों, उस देश से जुड़े तेल, और उस सुबह के तीन आपस में न मिलते बयानों का हिसाब है।
रात के अलर्ट से सुबह के धुएँ तक
राहत का यह एलान ज़्यादा देर नहीं टिका। शनिवार सुबह जो धुआँ उठा, वह हवाई अड्डे की तेल-भंडारण वाली जगह के पास से आ रहा था। रॉयटर्स के वीडियो और तस्वीरों में हाईवे और मुख्य टर्मिनल आगे दिखते हैं, और पीछे आग की लपटें, तेल के टैंकों जैसी किसी चीज़ के पास। यह भी *द इंडियन एक्सप्रेस* की उसी रिपोर्ट में है।
अख़बार ने सऊदी सरकार के मीडिया कार्यालय से धुएँ और रात के अलर्ट के बारे में सवाल पूछे थे। जवाब नहीं आया। रॉयटर्स ने यह बात ख़ुद लिखी: "The Saudi government's media office did not immediately respond to questions about the smoke or the overnight alerts, according to Reuters." चुप्पी भी एक तथ्य है। इसे यहाँ दर्ज करना ठीक है, भरना नहीं।
अल जज़ीरा ने 19 सितंबर को इतना और जोड़ा। इस साल अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद रियाध में कुछ अलर्ट आए थे। पर हौथियों से जुड़ी इस लड़ाई में जुलाई से जो बढ़त बनी है, उसमें राजधानी के लिए यह चेतावनी पहली थी। कोई हताहत नहीं, कोई नुक़सान दर्ज नहीं। यह बात भी सऊदी अधिकारियों की तरफ़ से ही आई, 19 सितंबर को, और ऐसोसिएटेड प्रेस के हवाले से एनबीसी न्यूज़ और एनपीआर दोनों ने यही लिखा।
किसने क्या दागा, किसने क्या रोका
सऊदी-नीत गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने शनिवार को एक्स पर लिखा कि हौथियों ने रियाध की तरफ़ एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी, और तड़के ही उसे रोककर नष्ट कर दिया गया। यह अल जज़ीरा ने 19 सितंबर को छापा। अल-मालिकी के मुताबिक़ हौथियों ने बीशा, ताइफ़, फ़रासान और यनबू में भी असैनिक ढाँचे को निशाना बनाने की कोशिश की, और हर बार हवाई सुरक्षा ने उन्हें नाकाम किया।
ऐसोसिएटेड प्रेस ने काहिरा से भेजी अपनी रिपोर्ट में यही घटना बताई, कुछ ज़्यादा ब्यौरे के साथ। यह रिपोर्ट एनबीसी न्यूज़ और एनपीआर, दोनों ने 19 सितंबर को हूबहू छापी। गठबंधन के बयान में यनबू का ज़िक्र "civilian infrastructure" के तौर पर था, अरामको की किसी सुविधा के तौर पर नहीं, और उसे भी नाकाम बताया गया, बिना आगे कोई तफ़सील दिए।
हौथी सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल यहया सारी का बयान इससे अलग है। उनके मुताबिक़ दो अलग "special military operations" हुए: एक रियाध की "sensitive sites" पर, दूसरा यनबू में ख़ुद अरामको की एक सुविधा पर, जिसमें "massive fires" लगीं। हथियार भी उन्होंने गिनाए: क्रूज़ मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन। एपी ने साफ़ लिखा कि वह इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका। अरामको ने एपी के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया।
तो यनबू को लेकर एक जगह के बारे में तीन अलग बातें हैं। गठबंधन कहता है, कोशिश हुई और नाकाम हुई। हौथी कहते हैं, हमला हुआ और उसमें आग लगी। अरामको कुछ नहीं कहता। तीनों को यहाँ बराबर जगह मिलनी चाहिए। किसी तीसरे स्रोत ने अब तक किसी एक को सही नहीं ठहराया।
पूरी सुबह में जो एक बात हर तरफ़ से एक जैसी आई, वह यह कि कोई हताहत नहीं हुआ। सऊदी अधिकारियों ने कोई मौत या नुक़सान दर्ज नहीं किया। यह बात ख़ुद एपी की रिपोर्ट में है। रॉयटर्स की तस्वीरों में दिखी आग की लपटें और यह दावा, दोनों साथ खड़े हो सकते हैं।
जुलाई से यहाँ तक का हिसाब
हौथी यमन के उत्तर में ज़ैदी शिया बहुल इलाक़ों से उठा एक सशस्त्र आंदोलन है। वह 2014 से यमन की राजधानी सना पर क़ाबिज़ है, और सऊदी अरब की अगुआई वाले गठबंधन से एक दशक से लड़ रहा है। ईरान का साथ उसे मिलता रहा है। जुलाई 2026 में हौथियों ने रियाध के ख़िलाफ़ समुद्री नाकेबंदी का एलान किया, और लाल सागर में सऊदी जहाज़ों को निशाना बनाना शुरू किया।
इसके बाद बढ़त तेज़ हुई। एपी की 19-20 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक़ हौथी लड़ाकों ने "over a week ago" यमन के मोखा बंदरगाह और बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के कुछ द्वीपों पर क़ब्ज़ा किया, जिससे गुज़रते जहाज़ों पर उनकी निगरानी बेहतर हुई, हालाँकि हौथियों का दावा है कि वे सिर्फ़ सऊदी जहाज़ों को निशाना बनाते हैं। बुधवार, 16 सितंबर को सऊदी अरब ने कहा कि हौथियों ने मक्का पर एक ड्रोन से हमले की कोशिश की। उसे रोक लिया गया। मक्का की सुरक्षा को सऊदी अरब ने "red line" बताया; हौथियों ने इससे साफ़ इनकार किया। अगले ही दिन, गुरुवार 17 सितंबर को, सऊदी असैनिक सुरक्षा के मुताबिक़ एक रोके गए ड्रोन का मलबा गिरने से सऊदी अरब में रह रहे एक यमनी नागरिक की मौत हो गई। इस लड़ाई की यह पहली नागरिक मौत थी, एपी की रिपोर्ट में दर्ज।
शुक्रवार, 18 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने एक प्रेस वक्तव्य में हौथी हमलों की "कड़े शब्दों में" निंदा की, ख़ासकर नागरिक और ऊर्जा ढाँचे पर हमलों की, जिनमें महिलाओं और बच्चों समेत नागरिक घायल हुए। यह डेस्क संयुक्त राष्ट्र की अपनी वेबसाइट पर मूल वक्तव्य नहीं खोज सका; यह अंश यूएनआई इंडिया और *सऊदी गज़ट* की 19 सितंबर की रिपोर्टों से है। उन्हीं रिपोर्टों के मुताबिक़ परिषद ने संयुक्त राष्ट्र की मानवीय एजेंसी ओसीएचए के हवाले से सितंबर की शुरुआत से यमन में क़रीब 1,25,000 लोगों के विस्थापन पर चिंता जताई, हौथियों से फ़ौरन हमले रोकने को कहा, और सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन दोहराया।

शनिवार को ही प्रतिक्रियाएँ और आईं। जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने हमलों को "blatant violation" बताया, प्रवक्ता फ़ुआद अल-मजाली के हवाले से, और सऊदी अरब के साथ "absolute solidarity" जताई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस और खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासिम अल-बुदैवी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर हमलों की निंदा की। अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकियों के लिए यात्रा चेतावनी दोहराई, और क्षेत्र के ग्यारह अमेरिकी दूतावासों ने यात्रा में रुकावट की आशंका जताई। यह सब अल जज़ीरा की 19 सितंबर की रिपोर्ट में दर्ज है। सना सेंटर थिंक टैंक की यास्मीन अल-इरयानी ने उसी रिपोर्ट में कहा कि समय और तेज़ी, दोनों हौथी ही तय कर रहे हैं: "it seems that the Houthis are the ones in control." यमन के अंदर भी लड़ाई तेज़ हुई है। मारिब, तईज़, लहज, अल-जौफ़ और अल-बैदा में झड़पें 2022 के संघर्ष-विराम के बाद की सबसे भारी झड़पें मानी जा रही हैं।
मंत्रालय के दो काग़ज़ों में दो अलग आँकड़े
विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर "Population of Overseas Indians" नाम की एक तालिका है, जिसमें हर देश के आगे एनआरआई और पीआईओ की अलग-अलग गिनती है। सऊदी अरब की लाइन में लिखा है: एनआरआई 25,92,166, पीआईओ 2,781, कुल 25,94,947। यह इस लेख के शीर्षक वाला आँकड़ा है। तालिका में कहीं कोई तारीख़ नहीं: न आँकड़े किस साल के हैं, न यह पन्ना कब बना। दुनिया भर के लिए इसी तालिका का जोड़ 3,21,00,340 है, और पड़ोस के संयुक्त अरब अमीरात के आगे 34,25,144, यानी सऊदी अरब से भी ज़्यादा भारतीय अकेले यूएई में हैं। यमन के आगे, जहाँ से यह हमला हुआ, सिर्फ़ 10,500 दर्ज हैं।
मंत्रालय का एक दूसरा दस्तावेज़, "India-Saudi Arabia Bilateral Brief", एक अलग गिनती देता है। इसकी फ़ाइल अप्रैल 2025 में बनी थी। इसके पैराग्राफ़ 16 में लिखा है: "The Indian community in Saudi Arabia numbers at approximately 2.7 million." पचीस लाख चौरानवे हज़ार सैंतालीस और सत्ताईस लाख के बीच लगभग साढ़े चार लाख का फ़ासला है, और मंत्रालय के ही दो काग़ज़ इसे अलग-अलग बताते हैं। इस लेख ने दोनों को बराबर दर्ज किया है। किसी एक को सही मानने का आधार किसी तीसरे दस्तावेज़ में नहीं मिला।
यही ब्रीफ़ बताता है कि यह समुदाय "a living bridge between the two countries" है। जनवरी 2025 में भुवनेश्वर में सऊदी अरब में रहने वाले डॉ. सैयद अनवर ख़ुर्शीद को प्रवासी भारतीय सम्मान मिला। ब्रीफ़ इसे समुदाय के योगदान की मिसाल के तौर पर दर्ज करता है। रोज़गार के लिए जाने वालों को लेकर भारत और सऊदी अरब के बीच घरेलू कामगारों का समझौता 2014 में और सामान्य श्रेणी के कामगारों का समझौता 2016 में हुआ था। हज यात्रा भी इसी रिश्ते का हिस्सा है; भारत का 2023 का हज कोटा 1,75,025 तीर्थयात्रियों का था, वही ब्रीफ़ बताता है।
दूतावास ख़ुद क्या कह रहा है, यह अलग सवाल है। रियाध में भारतीय दूतावास की वेबसाइट पर "Public Advisories" खंड में जो सबसे नया परामर्श दर्ज है, वह 28 फ़रवरी 2026 का है, इस हमले से लगभग सात महीने पहले। उसमें लिखा है कि सऊदी अरब में मौजूद सभी भारतीय नागरिक सतर्क रहें, वहाँ के सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करें, और स्थानीय प्रशासन व दूतावास की सलाह मानें; दूतावास और जेद्दा का वाणिज्य दूतावास सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। इस डेस्क ने 21 सितंबर को यह पन्ना खोलकर देखा। सितंबर की कोई नई प्रविष्टि वहाँ नहीं मिली।

यनबू वही जगह है जहाँ पाइपलाइन ख़त्म होती है
विदेश मंत्रालय के उसी द्विपक्षीय ब्रीफ़ के मुताबिक़, वित्त वर्ष 2023-24 में सऊदी अरब भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्तिकर्ता था। उस साल भारत ने वहाँ से 33.35 मिलियन टन कच्चा तेल ख़रीदा, जो भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 14.3 प्रतिशत था। एलपीजी में भी सऊदी अरब उसी साल तीसरे नंबर पर था, 18.2 प्रतिशत हिस्से के साथ। यह आँकड़ा वित्त वर्ष 2023-24 का है, 2026 का नहीं, और ब्रीफ़ ख़ुद इससे नई गिनती नहीं देता। यह अंतर यहाँ लिखा जाना ज़रूरी है।
सऊदी अरब का जो कच्चा तेल पूरब से पश्चिम तक जाता है, उसका रास्ता एक ही पाइपलाइन से तय होता है: 1,200 किलोमीटर लंबी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन, जो अब्क़ैक़ के तेल क्षेत्र से चलकर लाल सागर के यनबू बंदरगाह पर ख़त्म होती है। यह अल जज़ीरा ने 12 सितंबर को लिखा। शुक्रवार, 11 सितंबर को इस पाइपलाइन पर ड्रोन हमला हुआ, रियाध और मदीना इलाक़ों में, जिससे चोटें और नुक़सान हुआ। यह बात ख़ुद सऊदी विदेश मंत्रालय के बयान में है, जो सऊदी प्रेस एजेंसी ने 12 सितंबर को जारी किया। मंत्रालय ने हमले के लिए इराक़ से उड़े "several drones" को ज़िम्मेदार बताया, और कहा कि इराक़ के प्रधानमंत्री के अनुरोध पर फ़िलहाल जवाबी कार्रवाई नहीं होगी। पाइपलाइन को सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने "precaution" के तौर पर बंद कर दिया, अल जज़ीरा के मुताबिक़। न सऊदी अरब ने, न इराक़ ने, हमलावर गुट का नाम लिया।

तो जब हौथी 19 सितंबर को यनबू में अरामको की सुविधा पर हमले का दावा करते हैं, वह उसी शहर की बात है जहाँ आठ दिन पहले से एक बड़ी पाइपलाइन पहले ही बंद पड़ी है, भले हमलावर अलग हों और दावे अपुष्ट। रक्षा विश्लेषक वोल्फ़गांग पुस्ताई ने अल जज़ीरा से कहा कि पाइपलाइन पर हमला ईरान-समर्थित किसी गुट का काम लगता है, और इसका मक़सद सऊदी अरब पर यमन से हटने का दबाव बढ़ाना है: "this certainly sharpens Iran's own blockade over the Strait of Hormuz."
क़ीमत में इसका असर पहले ही दिख चुका है। पेट्रोलियम प्लानिंग ऐंड एनालिसिस सेल के अपने मूल्य-पत्रक के मुताबिक़ भारतीय बास्केट का भाव 17 सितंबर को 125.14 डॉलर प्रति बैरल था, और सितंबर का अब तक का औसत 113.91 डॉलर। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन की ब्रेंट शृंखला में 11 सितंबर वाले हफ़्ते का औसत 111.83 डॉलर था, और अगस्त का पूरा महीना 91.08 डॉलर पर बंद हुआ। भारत जो भाव चुका रहा है, वह बेंचमार्क से लगातार ऊपर है। यह फ़ासला हफ़्ते-दर-हफ़्ते बना हुआ है।
मक्का समझौता और भारत का जवाब
7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने मक्का में एक रक्षा समझौते पर दस्तख़त किए। यह समझौता उसी पाकिस्तान-सऊदी अरब सामरिक रक्षा समझौते पर खड़ा है जो 17 सितंबर 2025 को हुआ था। समझौते की एक शर्त यह है कि तीनों में से किसी एक पर हमला सबके ख़िलाफ़ हमला माना जाएगा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने 17 सितंबर को कहा कि पाकिस्तान मक्का समझौते के तहत अपनी ज़िम्मेदारी निभाने को तैयार है। पाकिस्तान ने अपना पक्ष यहीं साफ़ कर दिया।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस समझौते पर कहा कि भारत इससे "aware" है और इसके असर का अध्ययन करेगा, राष्ट्रीय सुरक्षा और इलाक़े की स्थिरता, दोनों नज़रिए से। *द ट्रिब्यून* की रिपोर्ट के मुताबिक़ जायसवाल ने यह उम्मीद भी जताई कि सऊदी अरब भारत के साथ अपने साझा हितों को ध्यान में रखेगा। यह बयान इसी अख़बार में दर्ज है; इस लेख ने समझौते का मूल पाठ नहीं पढ़ा। समझौता काग़ज़ पर मौजूद है। रियाध पर हमला हो चुका है। अब तक इसके तहत कुछ हरकत में नहीं आया।
होर्मुज़ पहले से बंद है, यही रास्ता बचा था
*द इंडियन एक्सप्रेस* ने 19 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में लिखा कि हौथियों के हमले लाल सागर के उस रास्ते को ख़तरे में डालते हैं जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद रहते हुए ख़ाड़ी के निर्यात के लिए "main alternative" बचा है। यह बड़ा दावा है, और भारत के लिए इसके नतीजे बड़े हैं। इसे किसी और स्रोत से जाँचना ज़रूरी था।
अल जज़ीरा ने 27 अगस्त 2026 को लिखा कि अमेरिका-इसराइल-ईरान युद्ध के छह महीने में होर्मुज़ से गुज़रने वाले जहाज़ों की तादाद रोज़ाना सौ से घटकर सिर्फ़ पाँच रह गई है। क़रीब 80 प्रतिशत वैश्विक व्यापार समुद्री जहाज़ों से होता है, यह संयुक्त राष्ट्र की व्यापार व विकास एजेंसी अंकटाड का आँकड़ा है, अल जज़ीरा के हवाले से। गिब्सन शिपब्रोकर्स के रिचर्ड मैथ्यूज़ ने अल जज़ीरा से कहा: "there is no alternative maritime route. There are some pipelines, but there's no alternative." उसी अख़बार ने 12 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में लिखा कि होर्मुज़ मार्च से ही इस तरह बंद है। तो इंडियन एक्सप्रेस का दावा स्वतंत्र रूप से सही ठहरता है, भले उसके अपने शब्द "blockaded" अल जज़ीरा के शब्दों से थोड़े अलग हों।
पश्चिम की तरफ़ जाने के सऊदी अरब के पास जो दो रास्ते बचे थे, वे अब दोनों दबाव में हैं। पाइपलाइन 11 सितंबर से बंद है। लाल सागर में हौथियों की पकड़ बाब अल-मंडब तक पहुँच चुकी है। भारत जो कच्चा तेल और एलपीजी सऊदी अरब से लेता है, वह इन्हीं दो रास्तों से आता या टलता है। आगे क्या होगा, यह इस लेख के दायरे से बाहर है। दोनों रास्ते एक साथ दबाव में होने की मिसाल हाल के बरसों में कम मिलती है।
स्रोतद इंडियन एक्सप्रेस, 19 सितंबर 2026, शाम 7:15 बजे प्रकाशित (raw HTML मेटा से पढ़ी गई तारीख़): रॉयटर्स के हवाले से रियाध हवाई अड्डे के पास धुएँ, रात के अलर्ट और सऊदी सरकार की चुप्पी की रिपोर्ट, अल जज़ीरा, 19 सितंबर 2026: गठबंधन प्रवक्ता तुर्की अल-मालिकी का एक्स पोस्ट, हौथी दावा, यूएन महासचिव-जीसीसी-जॉर्डन की प्रतिक्रिया, ट्रंप का कैंप डेविड से लौटना, एनबीसी न्यूज़, 19 सितंबर 2026, ऐसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट: गठबंधन की पुष्टि, यहया सारी का बयान, अरामको की चुप्पी, अमेरिका से हवाई-सुरक्षा मदद का अनुरोध, एनपीआर, 19 सितंबर 2026, वही ऐसोसिएटेड प्रेस रिपोर्ट: बुधवार को मक्का पर हमले की कोशिश, गुरुवार को पहली नागरिक मौत, विदेश मंत्रालय, 'Population of Overseas Indians' तालिका: सऊदी अरब 25,94,947 (एनआरआई 25,92,166, पीआईओ 2,781), यूएई 34,25,144, यमन 10,500, विश्व कुल 3,21,00,340; तालिका में कहीं कोई तारीख़ दर्ज नहीं, विदेश मंत्रालय, 'India-Saudi Arabia Bilateral Brief', फ़ाइल अप्रैल 2025 में बनी: पैराग्राफ़ 9 में ऊर्जा-व्यापार के आँकड़े (वित्त वर्ष 2023-24), पैराग्राफ़ 16 में समुदाय 'approximately 2.7 million', भारतीय दूतावास, रियाध, 'Advisory for India Nationals', 28 फ़रवरी 2026; यह डेस्क 21 सितंबर 2026 को पन्ना देखकर आया, सितंबर की कोई नई प्रविष्टि वहाँ नहीं मिली, सऊदी प्रेस एजेंसी का बयान, रियाध, 12 सितंबर 2026 (spa.gov.sa सीधे नहीं खुला, ग्लोबलसिक्योरिटी.ऑर्ग की प्रति से पढ़ा गया): विदेश मंत्रालय ने पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन पर हमले के लिए इराक़ से उड़े ड्रोन बताए, अल जज़ीरा, 12 सितंबर 2026: पाइपलाइन का भूगोल (अब्क़ैक़ से यनबू, 1,200 किलोमीटर), ऊर्जा मंत्रालय का 'precaution' वाला बयान, विश्लेषक वोल्फ़गांग पुस्ताई की राय, अल जज़ीरा, 27 अगस्त 2026: होर्मुज़ से गुज़रते जहाज़ों में 95 प्रतिशत गिरावट, अंकटाड और गिब्सन शिपब्रोकर्स के आँकड़े व उद्धरण, पेट्रोलियम प्लानिंग ऐंड एनालिसिस सेल, भारतीय बास्केट मूल्य-पत्रक, 18.09.2026 को चढ़ाया गया: 17.09.2026 का भाव 125.14 डॉलर, सितंबर का अब तक औसत 113.91 डॉलर (हमारी 18 सितंबर की रिपोर्ट में पहले सत्यापित), अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन, यूरोप ब्रेंट स्पॉट प्राइस साप्ताहिक शृंखला: 11 सितंबर 2026 वाले हफ़्ते का औसत 111.83 डॉलर, अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन, वही शृंखला मासिक: अगस्त 2026 का औसत 91.08 डॉलर, द ट्रिब्यून: विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का मक्का समझौते पर बयान, भारत के 'aware' होने और असर के अध्ययन की बात