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कचरा बीनने वालों को पहचान पत्र मिले, और उसी योजना में सफ़ाईकर्मियों के रक्त समूह भी दर्ज हो रहे हैं

नजफगढ़ ज़ोन के 300 से ज़्यादा श्रमिकों को नमस्ते कार्ड और आयुष्मान कार्ड बाँटे गए। योजना का पूरा नाम मशीनीकृत स्वच्छता से जुड़ा है, कचरा बीनने से नहीं।

कचरा बीनने वालों को पहचान पत्र मिले, और उसी योजना में सफ़ाईकर्मियों के रक्त समूह भी दर्ज हो रहे हैं

मटियाला के एमसीडी सामुदायिक भवन में गुरुवार को तीन सौ से ज़्यादा लोग जमा हुए।

वे सब नजफगढ़ ज़ोन में कचरा बीनने का काम करते हैं। उन्हें दो कार्ड मिले। एक नमस्ते कार्ड, दूसरा आयुष्मान कार्ड।

केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

कार्ड से क्या बदलता है

कचरा बीनने वाले का काम किसी काग़ज़ पर दर्ज नहीं होता।

न नियुक्ति पत्र, न हाज़िरी रजिस्टर, न पहचान। वह सुबह निकलता है, दिन भर कचरे से काम की चीज़ें छाँटता है, और शाम को कबाड़ी को बेच देता है।

इसलिए वह किसी योजना की सूची में नहीं आता।

नमस्ते कार्ड इसी को बदलने के लिए है। वह कहता है कि यह आदमी यह काम करता है, और इसी बुनियाद पर उसे बाक़ी योजनाओं तक पहुँचाया जा सकता है। आयुष्मान कार्ड उसी कड़ी की अगली चीज़ है।

एक रीसाइक्लिंग इकाई में पानी के ड्रम से निकालकर छाने जा रहे प्लास्टिक के टुकड़े। तस्वीर 2009 की है और उसमें जगह दर्ज नहीं है
तस्वीर: सेन्योरहोर्स्ट यानसेन, फ़्लिकर CC BY 2.0

योजना का नाम पढ़िए

नमस्ते का पूरा नाम है, राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र कार्य।

इस नाम में कचरा बीनने वालों का कोई ज़िक्र नहीं है।

यह योजना उन लोगों के लिए बनी थी जो सीवर और सेप्टिक टैंक में उतरते हैं। उसका मक़सद यह था कि यह काम आदमी के हाथ से हटकर मशीन पर जाए, और जब तक न जाए तब तक करने वाले को सुरक्षा उपकरण और बीमा मिले।

कचरा बीनने वाले उसमें बाद में जोड़े गए।

दोनों काम अलग हैं। एक में आदमी ज़हरीली गैस वाले गड्ढे में उतरता है। दूसरे में वह खुले में कचरे से काँच, धातु और प्लास्टिक छाँटता है। ख़तरे अलग हैं, और ज़रूरतें भी।

और वह वाक्य जो सब कुछ बता देता है

एक दिन पहले पश्चिम बंगाल से जो विज्ञप्ति आई, उसमें एक पंक्ति है जिसे दोबारा पढ़ना चाहिए।

राज्य ने 7,630 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों का प्रोफ़ाइल पूरा कर लिया है। उन्हें सुरक्षा किट बाँटी गई हैं। 124 नगरपालिकाओं और तीन छावनी बोर्डों में जागरूकता कार्यशालाएँ हुई हैं।

और सफ़ाईकर्मियों के रक्त समूह इकट्ठा करके एक आपातकालीन डेटाबेस बनाया गया है, ताकि गंभीर परिस्थितियों में समय पर मदद पहुँचाई जा सके।

रक्त समूह पहले से दर्ज इसलिए किए जाते हैं कि हादसा होने पर ख़ून ढूँढ़ने में वक़्त न लगे।

यह किसी दफ़्तर की नौकरी में नहीं किया जाता।

दुर्गापुर में क्या शुरू हुआ

उसी दिन दुर्गापुर नगर निगम के सफ़ाईकर्मियों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण का पहला बैच शुरू हुआ।

तकनीकी सहयोग सीएसआईआर के केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान का है। राष्ट्रीय सफ़ाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम और राज्य शहरी विकास एजेंसी भी इसमें हैं।

कार्यक्रम में कर्मचारियों को पहचान पत्र भी बाँटे गए।

जो हमें नहीं मिला

देश भर में कितने कचरा बीनने वाले अब तक गिने जा चुके हैं और कितनों के पास कार्ड है, यह संख्या इन दोनों विज्ञप्तियों में नहीं है।

सामाजिक न्याय मंत्रालय की वेबसाइट इस मशीन से नहीं खुल रही, इसलिए हम वहाँ का ताज़ा आँकड़ा नहीं देख सके। जो नहीं देखा, वह यहाँ नहीं लिखा जा रहा।

स्रोतसामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, विज्ञप्ति, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, पश्चिम बंगाल में नमस्ते प्रशिक्षण की विज्ञप्ति, 3 सितंबर 2026

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।