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लफ़्ज़ों का सफ़र

दफ़्तर, दस्तूर, दस्तावेज़: तीनों एक जैसे लगते हैं, रिश्ता सिर्फ़ एक में निकला

तीनों शब्द 'दस्त' यानी हाथ से जुड़े बताए जाते हैं। शब्दकोश खोलने पर तीन में से एक ही टिकता है। बाक़ी दो की जड़ें अलग जगहों पर हैं, और एक तो यूनानी है।

दफ़्तर, दस्तूर, दस्तावेज़: तीनों एक जैसे लगते हैं, रिश्ता सिर्फ़ एक में निकला

दफ़्तर, दस्तूर, दस्तावेज़।

तीनों एक ही आवाज़ से शुरू होते हैं, तीनों काग़ज़ और काम की दुनिया के शब्द हैं, और तीनों के बारे में यह बात आम है कि ये एक ही जड़ से निकले हैं। वह जड़ बताई जाती है फ़ारसी का दस्त, यानी हाथ।

यह सिलसिला इसी सवाल पर बना है कि क्या ऐसी बातें जाँचने पर टिकती हैं। इसका पहला नियम यही है: दो शब्दों का एक जैसा सुनाई देना उनके रिश्ते का सबूत नहीं है।

तो शब्दकोश खोले गए। तीन में से एक टिका।

दस्तावेज़: यह सचमुच हाथ वाला शब्द है

प्लैट्स के 1884 के शब्दकोश में दस्तावेज़ की अपनी अलग प्रविष्टि है ही नहीं। वह दस्त के नीचे दर्ज है, यानी शब्दकोश ख़ुद उसे दस्त का जोड़ मानता है।

स्टाइनगास के फ़ारसी कोश में आवेज़ अलग से दर्ज है, अर्थ के साथ: लटकी हुई कोई चीज़। और आवेख़्तन का अर्थ है लटकाना।

तो शब्द बना दस्त और आवेज़ से। हाथ, और उससे लटकी हुई चीज़।

पर असली मज़ा अर्थों के क्रम में है। स्टाइनगास दस्तावेज़ का पहला अर्थ "काग़ज़" नहीं देते। पहला अर्थ है पकड़, मज़बूत पकड़। दूसरा अर्थ इससे भी अच्छा है: वह छोटी भेंट जो कोई छोटा आदमी किसी बड़े आदमी के पास जाते समय साथ ले जाता है, ताकि ख़ाली हाथ न पहुँचे।

काग़ज़ वाला अर्थ इसके बाद आता है। यानी दस्तावेज़ पहले वह चीज़ थी जो आप हाथ में लेकर पहुँचते हैं, और बाद में वह काग़ज़ बन गया जो आपका दावा साबित करता है।

सबूत इसलिए सबूत है कि वह हाथ में है।

एक बात ईमानदारी से दर्ज कर देनी चाहिए। प्लैट्स आवेज़ को लटकने के बजाय बाँधने के अर्थ में पढ़ते हैं, और शब्द का अर्थ लिखते हैं "जो हाथों को बाँधे"। दोनों कोश इस पर सहमत हैं कि शब्द किन दो टुकड़ों से बना है, और दूसरे टुकड़े की तस्वीर पर थोड़ा अलग खड़े हैं।

दफ़्तर: यह शब्द यूनान से आया है

यहाँ रिश्ता पूरी तरह टूट जाता है।

एनसाइक्लोपीडिया ईरानिका, जो ईरानी भाषाओं का सबसे बड़ा संदर्भ-ग्रंथ है, दफ़्तर की प्रविष्टि की पहली ही पंक्ति में लिखता है कि मध्य फ़ारसी का दफ़्तर यूनानी दिफ़्थेरा से आया है, जिसका अर्थ था तैयार किया हुआ चमड़ा। कोई "शायद" नहीं, कोई सवालिया निशान नहीं।

प्लैट्स ने चालीस साल पहले, अलग से, यही लिखा था। उनकी दफ़्तर वाली प्रविष्टि में यूनानी शब्द διφθερα छपा है। पूरे प्लैट्स में यह यूनानी शब्द सिर्फ़ इसी एक जगह आता है।

और यूनानी कोश इसकी पुष्टि तीसरी तरफ़ से करता है। लिडेल-स्कॉट-जोन्स में दिफ़्थेरा का अर्थ है तैयार चमड़ा, ख़ासकर वह चमड़ा जिस पर लिखा जाता था। उसी प्रविष्टि में एक प्रयोग दर्ज है जिसका अर्थ है "शाही दिफ़्थेरा", और वह फ़ारस के शाही अभिलेखों के लिए इस्तेमाल होता था।

यानी चमड़ा, फिर उस चमड़े पर बना बही-खाता, फिर वह बँधी हुई किताब जिसमें हिसाब रहता है, और आख़िर में वह कमरा जहाँ ये किताबें रखी जाती हैं।

यह आख़िरी क़दम दो शब्दकोशों के बीच होता दिखता है। स्टाइनगास दफ़्तर के दस से ज़्यादा अर्थ देते हैं, किताब, बही, सूची, रजिस्टर, पर उनमें इमारत वाला अर्थ नहीं है। प्लैट्स, जो भारत के लिए लिख रहे थे, "एक दफ़्तर, कारोबार की जगह" भी दर्ज करते हैं।

दस्त इस पूरी कहानी में कहीं नहीं है। किसी एक कोश में नहीं।

दस्तूर: यहाँ दो प्राधिकरण आपस में लड़ रहे हैं

अब वह हिस्सा जिसकी उम्मीद नहीं थी।

प्लैट्स दस्तूर को साफ़-साफ़ दस्त से बनाते हैं, दस्त और ऊर जोड़कर, यानी "हाथ में रखने वाला"।

ईरानिका इससे असहमत है। उसकी दस्तूर वाली प्रविष्टि एक पुराना ईरानी रूप गढ़ती है और उसके पहले टुकड़े को अवेस्ता के उस शब्द से जोड़ती है जिसका अर्थ है सिद्धांत, शिक्षा। जड़ का अर्थ है सिखाना। और ईरानिका अपने ही इस अनुमान के आगे सवालिया निशान लगाता है, तथा आठ विद्वानों के हवाले गिनाता है, जो इस बात का संकेत है कि मामला तय नहीं है।

अर्थों का इतिहास भी इसी तरफ़ झुकता है। ईरानिका के मुताबिक़ सासानी दौर में इस शब्द का मुख्य अर्थ था अधिकार रखने वाला, और यह ज़्यादातर धार्मिक अधिकारियों के लिए इस्तेमाल होता था। स्टाइनगास आज भी इसका एक अर्थ "पारसियों का प्रधान पुरोहित" दर्ज करते हैं।

आज उसी शब्द का अर्थ है नियम, क़ायदा, और भाषा के नियमों को फ़ारसी में दस्तूर-ए-ज़बान कहते हैं।

यह सिलसिला इस झगड़े का फ़ैसला नहीं करेगा। जो कहा जा रहा है वह इतना है कि "दस्तूर यानी हाथ" वाली आसान कहानी अब टिकती नहीं दिखती।

और तीनों एक जैसे लगते क्यों हैं

इसका जवाब है, और वह अटकल नहीं है।

पुरानी ईरानी भाषाओं में दो अलग-अलग शब्द थे जिनका आपस में कोई रिश्ता नहीं था। एक का अर्थ था हाथ, अवेस्ता में वह ज़स्ता है, संस्कृत का हस्त उसी का भाई है। दूसरे का अर्थ था सिद्धांत या शिक्षा, और अवेस्ता में वह द से शुरू होता है।

अवेस्ता इन दोनों को पहले ही अक्षर से अलग रखती है। फ़ारसी नहीं रखती। फ़ारसी में दोनों दस्त बन जाते हैं।

इसीलिए दस्तावेज़ और दस्तूर सगे लगते हैं। वे सगे नहीं हैं, वे हमशक्ल हैं। और दफ़्तर तो उसी मोहल्ले में यूनान से आकर बस गया था।

तीन शब्द, तीन जड़ें, एक जैसी आवाज़।

इस सिलसिले का नियम

शुरू में लिखा था कि एक जैसा सुनाई देना रिश्ते का सबूत नहीं है।

यह लेख उस नियम की मिसाल इसलिए बना कि सवाल हमारे अपने काग़ज़ों में लिखा था, और जाँचने पर आधा ग़लत निकला। तीन में से दो की जड़ें वहाँ नहीं थीं जहाँ हमने मान रखा था।

एक आख़िरी बात, जो हिंदी वालों को पहचानी लगेगी। दस्तूरी का अर्थ प्लैट्स ने 1884 में यह दर्ज किया था: वह रक़म जो नौकर को उसके मालिक के लिए ख़रीदारी करते वक़्त दुकानदार से मिल जाती है। रुपये में एक-दो पैसे।

वह अर्थ आज भी चल रहा है, और उसी नाम से।

स्रोतप्लैट्स, उर्दू-हिंदी-अंग्रेज़ी शब्दकोश (1884), स्टाइनगास, फ़ारसी-अंग्रेज़ी शब्दकोश (1892), एनसाइक्लोपीडिया ईरानिका, 'दफ़्तर', एनसाइक्लोपीडिया ईरानिका, 'दस्तूर', लिडेल-स्कॉट-जोन्स, यूनानी-अंग्रेज़ी कोश

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