विषय
इतिहास
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इत्मीनान
फ़िल्म बनती थी एडिटर की मेज़ पर, नाम छपता था सबसे आख़िर में
मोवीओला, ब्लेड और टेप के दौर में एक कट मतलब एक भौतिक जोड़ था, और उसे खोलना महँगा पड़ता था। फ़िल्मफ़ेयर के अपने छब्बीस बरस के रिकॉर्ड, एक 1951 की सरकारी रिपोर्ट, और एक साफ़ करियर से यह लेख पूछता है कि एडिटर असल में तय क्या करता था।
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इत्मीनान
समोसा 1334 में भारत पहुँच चुका था, आलू की बारी सदियों बाद आई
इब्न बतूता के सफ़रनामे में मुल्तान से दिल्ली जाते हुए एक शाही भोज का ब्यौरा है, जिसमें मेवे और मसाले भरी एक तिकोनी पेस्ट्री परोसी गई, जिसे कोश फ़ारसी शब्द बताते हैं। आलू उस मेज़ पर नहीं था, क्योंकि वह पौधा तब अमरीका के बाहर कहीं उगता ही नहीं था।
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इत्मीनान
रुपया एक झटके में 4.7619 से 7.50 प्रति डॉलर हुआ, 6 जून 1966 को, और एक अमेरिकी दस्तावेज़ ख़ुद अपनी दी हुई तारीख़ पर बँटा हुआ है
अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व बोर्ड की अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट, 27 जुलाई 1966 की, इसी घटना की तारीख़ एक जगह 5 जून लिखती है और दो जगह 6 जून, एक ही दस्तावेज़ में। भारतीय रिज़र्व बैंक की अपनी आधिकारिक इतिहास-पुस्तक और उस हफ़्ते की लोकसभा-राज्यसभा बहस का पूरा पाठ यह लेख खोल नहीं सका; जो खुला और जो नहीं खुला, दोनों दर्ज हैं।
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देश
बहत्तरवाँ राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार आज दिल्ली से बाहर एकता नगर में, और रिकॉर्ड बताता है कि यह दूसरी बार है, पहली बार 1970 में मद्रास में हुआ था
कई अख़बार आज के समारोह को पुरस्कार के बहत्तर बरसों में पहली बार दिल्ली से बाहर होना बता रहे हैं। उन्हीं अख़बारों की रिपोर्टों में दर्ज मिलता है कि सत्रहवाँ राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार 21 नवंबर 1970 को मद्रास में दिया गया था, दिल्ली में नहीं।
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इत्मीनान
शरतचंद्र ने हिंदी में कभी कुछ नहीं लिखा, और हिंदी के पाठकों ने उन्हें अपना बना लिया
पंद्रह सितंबर को उनकी डेढ़ सौवीं जयंती पर प्रधानमंत्री ने श्रद्धांजलि दी। देवदास और श्रीकांत के जिन हिंदी अनुवादों ने बंगाल के बाहर उनका पाठक बनाया, उनके प्रकाशक या अनुवादक का नाम किसी पुष्ट स्रोत में दर्ज नहीं मिला।
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इत्मीनान
देश ने पहली बार जिस फ़िल्म को सबसे अच्छा कहा, उस समारोह की पुस्तिका में तीन पदक छपे थे और दिए दो गए
10 अक्तूबर 1954 की शाम राष्ट्रपति ने श्यामची आई को पहला स्वर्ण पदक दिया। उसी शाम बँटी उन्नीस पन्ने की सरकारी पुस्तिका आज भी पढ़ी जा सकती है, और वह समारोह की जगह से लेकर छायाकार के नाम तक कई बातें तय करती है जो आज उलटी छपी मिलती हैं।
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इत्मीनान
हिंदी का शतरंज और अंग्रेज़ी का चेस एक शब्द नहीं हैं, और यह बात ऑक्सफ़र्ड कोश के 1893 वाले खंड में छपी है
चतुरंग से शतरंज तक की कड़ी कोशों में सचमुच दर्ज है। पर अंग्रेज़ी का chess उस कड़ी से नहीं निकला। वह फ़ारसी के शाह से बना है, पुरानी फ़्रांसीसी के रास्ते। शतरंज वाला नाम यूरोप में सिर्फ़ स्पेनी और पुर्तगाली में बचा।
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इत्मीनान
139 धाराओं का हिंदू कोड बिल चार साल में चार धाराएँ ही पार कर सका, और उसे काटकर छोटा करने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री का था
अंबेडकर के अपने इस्तीफ़ा-बयान में हिंदू कोड पाँचवें नंबर पर है। उससे पहले वे क़ानून मंत्रालय को 'ख़ाली साबुन की डिबिया' कहते हैं, अनुसूचित जातियों की हालत गिनाते हैं, विदेश नीति पर सवाल उठाते हैं और मंत्रिमंडल की समितियों को 'लोहे के परदे के पीछे' बताते हैं। वह बयान लोकसभा में पढ़ा भी नहीं जा सका।
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इत्मीनान
क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट 31 अगस्त 1952 को हटा और पंजाब का अगला क़ानून उसी दिन लागू हो गया
1871 के जिस क़ानून ने पूरी बिरादरियों को जन्म से अपराधी मान लिया था, उसकी अधिसूचनाएँ 31 अगस्त 1952 को ख़त्म हुईं और इन समुदायों को 'विमुक्त' नाम मिला। चौहत्तर साल बाद उस ढाँचे का कितना हिस्सा दूसरे नाम से चल रहा है, यह पंजाब के 1952 के आदतन अपराधी क़ानून में और सुप्रीम कोर्ट की गिनाई तेरह राज्यों की सूची में दर्ज है।
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इत्मीनान
झाँसी के एक तार बाबू ने इलाहाबाद के दफ़्तर से तय किया कि हिंदी गद्य किस शक्ल में लिखा जाएगा
महावीर प्रसाद द्विवेदी ने जनवरी 1903 से दिसंबर 1920 तक 'सरस्वती' का संपादन किया। भेजी हुई रचनाएँ वे बिना पूछे सुधार देते थे। नवंबर 1905 के एक लेख में उनका लिखा एक शब्द डेढ़ साल की सार्वजनिक लड़ाई की जड़ बना।
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इत्मीनान
साठ शब्दों के प्रस्ताव से शुरू हुई जंग आज भी अमेरिकी क़ानून में है
18 सितंबर 2001 को अमेरिकी राष्ट्रपति ने जिस संयुक्त प्रस्ताव पर दस्तख़त किए, उसमें फ़ौज भेजने का अधिकार देने वाला वाक्य साठ शब्दों का है। उसमें न किसी देश का नाम है, न ख़त्म होने की कोई तारीख़। पच्चीस साल बाद वह प्रस्ताव वहीं है, और उसी तारीख़ का 1906 वाला रिकॉर्ड भी वह नहीं कहता जो उसके नाम पर दोहराया जाता है।
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इत्मीनान
अदालत का मतलब इमारत नहीं है, वह एक काम का नाम है, और वह काम बराबरी करना है
मुंसिफ़ का मतलब है आधा करने वाला। वकील का मतलब है जिसे सौंपा गया हो। तीनों शब्द अरबी की तीन अलग जड़ों से आए हैं और तीनों इंसाफ़ की तीन अलग तस्वीरें खींचते हैं।
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देश
कर्नाटक ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के दो अंतरे तय किए, जबकि 2026 के क़ानून में कहीं नहीं लिखा कि राष्ट्रगीत कितने अंतरों का है
8 सितंबर को मंत्रिमंडल के फ़ैसले के बाद कर्नाटक ने आदेश निकाला कि राज्य के कार्यक्रमों में पहले दो अंतरे गाए जाएँगे। केंद्र का 6 फ़रवरी 2026 का निर्देश छहों अंतरे माँगता है। अगस्त में बना नया क़ानून 'राष्ट्रगीत' शब्द का इस्तेमाल करता है, पर उसे परिभाषित कहीं नहीं करता।
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इत्मीनान
जिस गृह मंत्री के कार्यकाल में भारत का नक्शा भाषा के आधार पर बदला, संविधान सभा की भाषा-बहस के तीनों दिन उसका अपना कोई भाषण दर्ज नहीं है
गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितंबर 1887 को अल्मोड़ा ज़िले के खूँट गाँव में हुआ। उनके नाम के साथ दो काम जुड़े हैं: राज्यों का भाषाई पुनर्गठन और हिंदी को राजभाषा बनाने का अभियान। हमने संविधान सभा की चार बहसें, राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट का एक वाक्य और कुली-बेगार आंदोलन पर इतिहासकार शेखर पाठक का लेखा पढ़कर देखा कि रिकॉर्ड में क्या है और क्या नहीं।
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इत्मीनान
सरकारिया आयोग ने 1988 में अनुच्छेद 356 पर जो लगाम माँगी थी, वह सरकार ने नहीं, 1994 में सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों ने लगाई; और उसकी अंतर-राज्य परिषद 36 साल में बारह बार से ज़्यादा नहीं बैठी
'सरकारिया आयोग' नाम के दो आयोग हुए। 7 सितंबर को तमिलनाडु विधानसभा में जिसका हवाला दिया गया, वह 1976 की जाँच है; केंद्र-राज्य संबंधों वाला आयोग 1983 में बना और उसकी 247 सिफ़ारिशों में से सरकार 180 को 'स्वीकृत' गिनती है। हमने आयोग के अपने अध्याय, 1990 का राष्ट्रपति-आदेश, परिषद की अपनी बैठक-सूची और लोकसभा का उत्तर पढ़कर मिलाया कि क्या सिफ़ारिश हुआ था और क्या हुआ।
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दुनिया
एएफ़डी को 43.8 फ़ीसदी वोट मिले और वह फिर भी सरकार नहीं बना पा रही
जर्मनी के सैक्सनी-अनहाल्ट राज्य में धुर-दक्षिणपंथी पार्टी का वोट पाँच साल में दोगुने से ज़्यादा हो गया। बहुमत फिर भी नहीं मिला, और कोई दल उसके साथ जाने को तैयार नहीं।
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दुनिया
केन्या ने टाटा को झील छोड़ने को कहा है, और वह कारख़ाना 1911 से चल रहा है
राष्ट्रपति विलियम रुतो ने इसे सौ साल पुरानी दोहन की व्यवस्था कहा। टाटा केमिकल्स वहाँ 2005 में आई थी, एक ब्रिटिश कंपनी ख़रीदकर। खनन 1911 में शुरू हुआ था।
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इत्मीनान
भंग पीने वाले एक काल्पनिक आदमी ने वायसराय को चिट्ठियाँ लिखीं, और वह आज ग्यारहवीं में पढ़ाई जाती हैं
बालमुकुंद गुप्त ने 1903 से 1905 के बीच भारतमित्र में लॉर्ड कर्जन के नाम खुली चिट्ठियाँ छापीं। लिखने वाला वे नहीं थे, शिवशंभु नाम का एक किरदार था। यह चतुराई मज़ाक़ की भी थी और बचाव की भी।
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इत्मीनान
नवाब राय की किताब जलाई गई, और धनपत राय को नया नाम लेना पड़ा
प्रेमचंद ने पहले उर्दू में लिखा, फिर हिंदी में। एक ही उपन्यास के दोनों रूपों को साथ रखकर पढ़िए तो पता चलता है कि बदलाव सिर्फ़ लिपि का नहीं था।
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इत्मीनान
7 सितंबर 1931: गांधी अकेले लंदन गए, और जिस सरकार से बात करनी थी वह ख़ुद बिखर रही थी
दूसरा गोलमेज़ सम्मेलन आज ठीक 95 साल पहले शुरू हुआ। कराची अधिवेशन के प्रस्ताव के बाद गांधी कांग्रेस के इकलौते प्रतिनिधि के रूप में गए थे। सम्मेलन के दो हफ़्ते बाद ब्रिटेन ने स्वर्ण मानक छोड़ दिया।
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पैसा
बैंक ऑफ़ इंडिया आज 120 साल का हुआ, और उसका सबसे मशहूर दावा जाँच में नहीं टिकता
बैंक की अपनी वेबसाइट कहती है कि यह पूरी तरह भारतीयों के स्वामित्व और प्रबंधन वाला पहला बैंक था। अवध कमर्शियल बैंक 1881 का है और पंजाब नेशनल बैंक 1894 का। दोनों पहले हैं।
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इत्मीनान
एक ही गाना दो देशों का हो गया, और दोनों फ़िल्मों में मुख्य बच्चा एक ही अभिनेता था
जागृति 1954 में आई और भारत में स्कूल-मास्टर की सबसे बड़ी फ़िल्म बन गई। दो साल बाद लाहौर में बेदारी आई, जो उसकी लगभग दृश्य-दर-दृश्य नक़ल थी। दर्शकों ने पकड़ लिया और सेंसर बोर्ड ने उसे रोक दिया।
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इत्मीनान
मोइरांग में तिरंगा फहराने के लिए जो जगह चुनी गई, वह इसलिए चुनी गई कि वहाँ राजाओं का राजतिलक होता था
14 अप्रैल 1944 की शाम, आज़ाद हिंद फ़ौज के बहादुर ग्रुप के कर्नल शौकत अली मलिक ने मोइरांग कांगला पर झंडा फहराया। सामने क़रीब चालीस स्थानीय लोग थे। उनमें से एक बाद में मणिपुर के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने।
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देश
पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद सोमवार को अपनी अट्ठाईसवीं बैठक करेगी, और वह पहली बैठक से सत्तर साल बाद हो रही है
नेहरू ने 1956 में यह सुझाव तब दिया था जब भाषा के आधार पर राज्यों के बँटवारे की कड़वाहट चरम पर थी। मक़सद था कि राज्यों में मिलकर काम करने की आदत बने। परिषदें सलाहकार हैं, उनके फ़ैसले बाध्यकारी नहीं।
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इत्मीनान श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स सौ साल का हुआ, पर उसका यह नाम सिर्फ़ पचहत्तर साल पुराना है प्रधानमंत्री शिक्षक दिवस की शाम शताब्दी समारोह में बोलेंगे। सरकारी विज्ञप्ति कहती है कि सर श्री राम ने 1926 में कॉलेज की स्थापना की। कॉलेज का अपना इतिहास अलग तारीख़ें देता है।
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इत्मीनान
राधाकृष्णन गणित पढ़ना चाहते थे, दर्शन उन्होंने इसलिए लिया कि चचेरे भाई की पुरानी किताबें मिल गईं
5 सितंबर उनका जन्मदिन है। जिस आदमी के नाम पर शिक्षक दिवस है, उसने विषय चुना नहीं था, विषय उसे मिल गया था। और उसके नाम पर एक मुक़दमा भी है जिसका ज़िक्र इस दिन कभी नहीं होता।
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इत्मीनान सिर और सर एक ही शब्द के दो रास्ते हैं, और हिंदी दोनों को साथ रखती है सरकार, सरदार, सरहद, सरपंच। चारों के आगे वही फ़ारसी सर बैठा है जिसका मतलब सिर होता है। और हिंदी का अपना सिर उसी जड़ से आया है, बस दूसरे रास्ते से।
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इत्मीनान पहला आम चुनाव: हर उम्मीदवार का अपना मतपेटी थी, और वोटर को कुछ लिखना नहीं था सुकुमार सेन की अपनी रिपोर्ट कहती है कि देश में साक्षरता सिर्फ़ 16.6 फ़ीसदी थी, इसलिए मतपत्र पर नाम छापने का कोई मतलब नहीं था। जो तरीक़ा निकाला गया, उसमें पचीस लाख से ज़्यादा पेटियाँ लगीं।
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दुनिया सरकारी विज्ञप्ति में शास्त्री की मृत्यु का साल ग़लत छपा है, और हिंदी वाली में भी वही ग़लती है पीआईबी की विज्ञप्ति कहती है कि ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री का निधन 1965 में हुआ था। वे 11 जनवरी 1966 को गए थे। उसी विज्ञप्ति में इसे साठवीं बरसी भी कहा गया है, जो 1965 से नहीं बनती।
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इत्मीनान भारत की पहली फ़िल्म कौन-सी थी, और यह सवाल आज तक खुला क्यों है श्री पुंडलिक 1912 में आई, राजा हरिश्चंद्र 1913 में। बहस तारीख़ की नहीं है। बहस इस बात की है कि फ़िल्म किसे कहते हैं, और वह तय कभी हुआ ही नहीं।
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इत्मीनान दफ़्तर, दस्तूर, दस्तावेज़: तीनों एक जैसे लगते हैं, रिश्ता सिर्फ़ एक में निकला तीनों शब्द 'दस्त' यानी हाथ से जुड़े बताए जाते हैं। शब्दकोश खोलने पर तीन में से एक ही टिकता है। बाक़ी दो की जड़ें अलग जगहों पर हैं, और एक तो यूनानी है।
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इत्मीनान 565 रियासतों वाला आँकड़ा सरकार का नहीं है, और उनमें से 327 रियासतें थीं ही नहीं यह संख्या माउंटबेटन ने 25 जुलाई 1947 के भाषण में 'लगभग' कहकर बोली थी। सरकार के अपने श्वेत पत्र में वह एक ही बार छपी है, उसी भाषण के हवाले में। विभाग का अपना आँकड़ा 552 है।
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इत्मीनान कबीर तीन जगह बचे हैं, और सबसे नई पोथी उसी पंथ की है जो उनके नाम से चलता है गुरु ग्रंथ साहिब 1604 का है और उसकी मूल प्रति आज भी मौजूद है। बीजक की कोई पांडुलिपि 1800 से पहले की नहीं मिली। कबीरपंथ का अपना ग्रंथ तीनों में सबसे देर का लिखा हुआ है।