शुद्ध प्रत्यक्ष कर वसूली 12.96 फ़ीसदी बढ़ी, रिफ़ंड की पूरी बढ़त का 84 फ़ीसदी ग़ैर-कॉरपोरेट करदाताओं को गया
आयकर विभाग की एक पन्ने की शीट में 17 सितंबर तक के आँकड़े हैं। सकल वसूली 15.19 फ़ीसदी बढ़ी, रिफ़ंड 29.19 फ़ीसदी, और शुद्ध वसूली 12.96 फ़ीसदी। रिफ़ंड की उस बढ़त को खोलिए तो कॉरपोरेट हिस्सा 6.24 फ़ीसदी बढ़ा है और ग़ैर-कॉरपोरेट 104.29 फ़ीसदी, यानी दोगुने से ज़्यादा। शीट पर न कोई विज्ञप्ति संख्या है, न हस्ताक्षर, न एक भी वाक्य की टिप्पणी।

1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच आयकर विभाग ने ग़ैर-कॉरपोरेट करदाताओं को 81,439.39 करोड़ रुपये रिफ़ंड लौटाए हैं। पिछले साल इसी तारीख़ तक यह रक़म 39,865.54 करोड़ रुपये थी। दोगुने से ज़्यादा। यह पैसा कंपनियों के पास नहीं गया, व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों, साझेदारी फ़र्मों और व्यक्तियों के संघों के खातों में गया है।
शुक्रवार, 18 सितंबर को जो आँकड़ा ख़बरों में था, वह दूसरा था। शुद्ध प्रत्यक्ष कर वसूली 12,12,410.71 करोड़ रुपये, 12.96 फ़ीसदी की बढ़त। वह आँकड़ा सही है और उसी काग़ज़ से आया है। उसी काग़ज़ की एक और पंक्ति यह बताती है कि रिफ़ंड में जो 49,716.44 करोड़ रुपये जुड़े, उनमें से 41,573.85 करोड़ अकेले इसी एक मद के हैं।
एक पन्ना, दो टेबल, कोई हस्ताक्षर नहीं
जिस दस्तावेज़ से ये सब आँकड़े आए हैं, उसका नाम है *Direct Tax Collections for F.Y. 2026-27 (as on 17.09.2026)*। वह आयकर विभाग की वेबसाइट पर पड़ी एक पन्ने की पीडीएफ़ है। उस पर कोई विज्ञप्ति संख्या नहीं है। किसी अधिकारी का नाम या हस्ताक्षर नहीं है। कोई साथ का बयान, कोई व्याख्या, कोई एक वाक्य की टिप्पणी नहीं है। पूरे पन्ने पर दो तालिकाएँ हैं, नीचे एक पंक्ति लिखी है, 'Source: TINMIS', और एक फ़ुटनोट है।
पहली तालिका तीन पंक्तियों में पूरा साल समेट देती है।
| रुपये करोड़ में | 17.09.2025 तक | 17.09.2026 तक | बढ़त |
|---|---|---|---|
| सकल वसूली | 12,43,582.45 | 14,32,437.43 | 15.19% |
| रिफ़ंड | 1,70,310.28 | 2,20,026.72 | 29.19% |
| शुद्ध वसूली | 10,73,272.17 | 12,12,410.71 | 12.96% |
सकल वसूली वह है जो ख़ज़ाने में आई। रिफ़ंड वह है जो करदाताओं को वापस गया, क्योंकि उनसे साल भर में देनदारी से ज़्यादा कट चुका था। शुद्ध वसूली इन दोनों का अंतर है, और सरकार के हाथ में असल में वही बचता है।
तालिका इन तीनों पंक्तियों को आगे चार खानों में तोड़ती है: कॉरपोरेट कर, ग़ैर-कॉरपोरेट कर, एसटीटी और अन्य कर। शुद्ध वसूली में कंपनियों का हिस्सा 5,55,967.80 करोड़ रुपये है और 19.48 फ़ीसदी बढ़ा है। ग़ैर-कॉरपोरेट हिस्सा 6,16,228.75 करोड़ है और 6.00 फ़ीसदी बढ़ा है। एसटीटी यानी शेयर सौदों पर लगने वाला प्रतिभूति लेनदेन कर 40,214.36 करोड़ है और 52.87 फ़ीसदी ऊपर है। चौथा खाना शून्य से नीचे चला गया है। अन्य करों में इस साल शुद्ध वसूली 0.20 करोड़ रुपये ऋणात्मक है, जबकि पिछले साल इसी तारीख़ तक 280.51 करोड़ थी।
12.96 का हिसाब सीधा है। इस साल की शुद्ध वसूली पिछले साल से 1,39,138.54 करोड़ रुपये ज़्यादा है, और उसे पिछले साल के 10,73,272.17 करोड़ से भाग देने पर 12.963 फ़ीसदी आता है। 13 फ़ीसदी के लिए 1,39,525.38 करोड़ चाहिए था। यानी 386.84 करोड़ और। बिज़नेस टुडे की ख़बर, जो 18 सितंबर की शाम 4:15 बजे अपडेट हुई, शीर्षक में 13 फ़ीसदी लिखती है और अपने ही पाठ में 12.96 फ़ीसदी। दोनों एक ही अंक हैं, एक पूर्णांक तक गोल किया हुआ।
एक बात जो इस शीट में नहीं है, विभाग की दूसरी शीटों में है। 31 मार्च 2026 वाली सालाना शीट अपने आँकड़ों के आगे दो तारे लगाकर लिखती है कि ये अनंतिम हैं, और अपना स्रोत Pr.CCA (CBDT) बताती है। 17 सितंबर वाली शीट न अनंतिम कहती है, न किसी लेखा नियंत्रक का नाम देती है। उसका इकलौता हवाला TINMIS है, और उस संक्षिप्त नाम का विस्तार शीट पर कहीं नहीं छपा।
49,716 करोड़ की बढ़त में 41,574 करोड़ अकेले ग़ैर-कॉरपोरेट
रिफ़ंड की पंक्ति तालिका में चार खानों में बँटी है, और असली ख़बर उसी बँटवारे में है।
| रिफ़ंड, रुपये करोड़ में | 17.09.2025 तक | 17.09.2026 तक | बढ़त |
|---|---|---|---|
| कॉरपोरेट कर | 1,30,428.11 | 1,38,570.01 | 6.24% |
| ग़ैर-कॉरपोरेट कर | 39,865.54 | 81,439.39 | 104.29% |
| एसटीटी | 0.00 | 0.00 | लागू नहीं |
| अन्य कर | 16.63 | 17.32 | 4.15% |
| कुल | 1,70,310.28 | 2,20,026.72 | 29.19% |
कंपनियों को लौटी रक़म 8,141.90 करोड़ रुपये बढ़ी। ग़ैर-कॉरपोरेट करदाताओं को लौटी रक़म 41,573.85 करोड़ बढ़ी। कुल बढ़त 49,716.44 करोड़ रुपये की है, और उसका 83.62 फ़ीसदी इसी दूसरी पंक्ति से आता है। कंपनियों का हिस्सा 16.38 फ़ीसदी है।
अनुपात में देखिए तो तस्वीर और साफ़ होती है। पिछले साल कॉरपोरेट करदाताओं से जो सकल रक़म आई, उसका 21.89 फ़ीसदी उन्हें लौटा दिया गया था; इस साल 19.95 फ़ीसदी लौटा है। कंपनियों के लिए यह अनुपात घटा है। ग़ैर-कॉरपोरेट करदाताओं के लिए वही अनुपात 6.42 फ़ीसदी से बढ़कर 11.67 फ़ीसदी हो गया है, यानी लगभग दोगुना। पूरे प्रत्यक्ष कर पर रिफ़ंड का बोझ 13.70 फ़ीसदी से बढ़कर 15.36 फ़ीसदी हुआ है।
इसी बँटवारे से यह भी खुलता है कि ग़ैर-कॉरपोरेट शुद्ध वसूली सिर्फ़ 6.00 फ़ीसदी क्यों बढ़ी। इस मद में सकल वसूली 6,21,240.29 से बढ़कर 6,97,668.14 करोड़ रुपये हुई है, यानी 12.30 फ़ीसदी की बढ़त, जो अपने आप में बुरी नहीं है। रिफ़ंड उससे क़रीब साढ़े आठ गुनी रफ़्तार से बढ़े। सकल में जो 76,427.85 करोड़ रुपये जुड़े, उनका 54 फ़ीसदी बढ़े हुए रिफ़ंड में वापस चला गया। कंपनियों के खाने में उल्टा हुआ: सकल 16.58 फ़ीसदी बढ़ा, रिफ़ंड 6.24 फ़ीसदी, और शुद्ध 19.48 फ़ीसदी, जो सकल की बढ़त से भी ऊपर है।
इस एक मद का असर कितना है, यह एक काल्पनिक गणना से नापा जा सकता है, और उसे काल्पनिक कहकर ही पढ़ा जाना चाहिए। मान लीजिए ग़ैर-कॉरपोरेट रिफ़ंड पिछले साल वाले 39,865.54 करोड़ पर ही टिके रहते और बाक़ी सब वैसा ही रहता। तब शुद्ध वसूली 12,53,984.56 करोड़ रुपये होती और बढ़त 16.84 फ़ीसदी दिखती, 12.96 नहीं। फ़र्क़ पौने चार अंक का है। यह अनुमान नहीं है, सिर्फ़ एक घटाव है, और यह बताता है कि इस साल की सुर्ख़ी का आकार कहाँ तय हुआ।
रिफ़ंड वसूली में कमी नहीं है। वह वह पैसा है जो पहले ही सरकार के पास पहुँच चुका था और जिसे लौटाना क़ानूनी ज़िम्मेदारी है। पर वह लौटने पर घर के खाते में जाता है, और 81,439.39 करोड़ रुपये साढ़े पाँच महीनों में उन्हीं खातों में गए हैं।

'ग़ैर-कॉरपोरेट' की परिभाषा शीट के अपने फ़ुटनोट में है
शीट के दोनों हिस्सों के नीचे एक ही फ़ुटनोट दोहराया गया है, और वह इस श्रेणी को गिनाकर बताता है: व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार, फ़र्म, व्यक्तियों के संघ, व्यक्तियों के निकाय, स्थानीय निकाय और कृत्रिम विधिक व्यक्ति।
फ़ुटनोट सात तरह के करदाता गिनाता है। ख़बरों में दो गिनाए गए। बिज़नेस टुडे ने इसे व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों का कर बताया। यह अधूरा है। साझेदारी फ़र्म कारोबार है, और व्यक्तियों का संघ भी कारोबारी ढाँचा है। दोनों वेतनभोगी नहीं हैं। इसलिए यह मान लेना ग़लत होगा कि बढ़ा हुआ ग़ैर-कॉरपोरेट रिफ़ंड पूरा का पूरा वेतनभोगी मध्यवर्ग का है। शीट यह नहीं बताती कि इन 81,439.39 करोड़ में से कितना किस उपश्रेणी का है। वह बँटवारा दस्तावेज़ में है ही नहीं।
यही फ़ुटनोट पन्ने की दूसरी तालिका के नीचे भी ज्यों का त्यों दोहराया गया है, जहाँ अग्रिम कर के आँकड़े हैं। उस तालिका में इसी श्रेणी का अग्रिम कर 9.24 फ़ीसदी बढ़ा है। जमा 9.24 की रफ़्तार से बढ़ रहा है, वापसी 104.29 की। शीट ये दोनों आँकड़े एक ही पन्ने पर छापती है और उन्हें जोड़कर कुछ नहीं कहती।
13 जुलाई की शीट और दो महीने का हिसाब
विभाग इसी तरह की शीट साल में कई बार डालता है, और इस वित्त वर्ष की 13 जुलाई 2026 वाली शीट वेबसाइट पर मौजूद है। उसमें उस तारीख़ तक शुद्ध वसूली 6,51,189.81 करोड़ रुपये थी और बढ़त 16.40 फ़ीसदी। सकल वसूली 7,73,681.68 करोड़ थी, 16.11 फ़ीसदी ऊपर, और रिफ़ंड 1,22,491.87 करोड़, 14.57 फ़ीसदी ऊपर। उस दिन रिफ़ंड सकल वसूली से धीमे बढ़ रहे थे, और इसीलिए शुद्ध बढ़त सकल बढ़त से ऊपर बैठी थी। दो महीने में यह क्रम उलट गया।
16.40 और 12.96 आपस में टकराते नहीं हैं। दोनों 1 अप्रैल से जोड़े गए संचयी आँकड़े हैं, बस अंतिम तारीख़ अलग है। दो महीने और जुड़ने पर संचयी दर बदल जाती है, और वह बदलना अपने आप में ख़बर नहीं। ख़बर यह है कि इन दो महीनों में अलग से क्या हुआ, और वह जानने के लिए दोनों शीटों का घटाव करना पड़ता है।
| 13 जुलाई से 17 सितंबर के बीच जुड़ा, रुपये करोड़ में | 2025 | 2026 | बढ़त |
|---|---|---|---|
| सकल वसूली | 5,77,245.25 | 6,58,755.75 | 14.12% |
| रिफ़ंड | 63,397.80 | 97,534.85 | 53.85% |
| शुद्ध वसूली | 5,13,847.45 | 5,61,220.90 | 9.22% |
इन 66 दिनों में सकल वसूली पिछले साल के इसी दौर से 14.12 फ़ीसदी ज़्यादा जुड़ी, रिफ़ंड 53.85 फ़ीसदी ज़्यादा निकले, और शुद्ध वसूली सिर्फ़ 9.22 फ़ीसदी ज़्यादा बची। अकेले ग़ैर-कॉरपोरेट रिफ़ंड इस खिड़की में 54,106.82 करोड़ रुपये निकले, जबकि पिछले साल इसी खिड़की में 26,181.33 करोड़ निकले थे। यह 2.07 गुना है।
एक और बात, जो अकेली 17 सितंबर की शीट से नहीं दिखती। 13 जुलाई की शीट पर ग़ैर-कॉरपोरेट रिफ़ंड पहले ही 13,684.21 से बढ़कर 27,332.57 करोड़ हो चुके थे, यानी 99.74 फ़ीसदी ऊपर। उसी तारीख़ पर कॉरपोरेट रिफ़ंड सिर्फ़ 2.06 फ़ीसदी ऊपर थे। दोगुना होने की यह रफ़्तार अगस्त-सितंबर में शुरू नहीं हुई। वह अप्रैल से चल रही थी, रिटर्न भरने की आख़िरी तारीख़ आने से भी पहले। साल के अब तक के 81,439.39 करोड़ रुपये में से 66 फ़ीसदी 13 जुलाई के बाद निकले हैं। बाक़ी 34 फ़ीसदी उससे पहले के साढ़े तीन महीनों में निकल चुके थे, और तब भी वे पिछले साल के दोगुने थे।
15 सितंबर की किस्त और धारा 408 की तालिका
17 सितंबर की तारीख़ इस शीट में संयोग से नहीं चुनी गई। उससे दो दिन पहले, 15 सितंबर को, अग्रिम कर की दूसरी किस्त देय थी। अग्रिम कर वह है जो साल ख़त्म होने से पहले, कमाई के साथ-साथ, चार किस्तों में जमा करना होता है।

इसका नियम आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 408 की तालिका में है। वह तालिका चार पंक्तियों की है: 15 जून तक कुल अग्रिम कर का कम से कम 15 फ़ीसदी, 15 सितंबर तक 45 फ़ीसदी, 15 दिसंबर तक 75 फ़ीसदी और 15 मार्च तक पूरा। हर किस्त में पिछली किस्तों में जमा रक़म घटाई जाती है। किस्तों की यह तालिका धारा 404 में नहीं है। वह धारा सिर्फ़ इतना तय करती है कि अग्रिम कर तब देना है जब उस साल देय रक़म 10,000 रुपये या उससे ऊपर हो। धारा 403 की उपधारा (3) भारत में रहने वाले उस व्यक्ति को इससे बाहर रखती है जिसकी कोई कारोबारी या पेशेवर आय नहीं है और जो साल के किसी भी समय साठ बरस या उससे ऊपर का हो।
तालिका के साथ दो और धाराएँ चलती हैं। धारा 406 की उपधारा (2) करदाता को छूट देती है कि अगर उसका अपना अनुमान बदल जाए तो वह बची हुई किस्तों की रक़म घटा-बढ़ा ले। धारा 408 की उपधारा (2) उन करदाताओं को अलग रखती है जो अनुमानित आधार पर मुनाफ़ा दिखाते हैं; उन्हें पूरी रक़म एक साथ 15 मार्च तक देनी होती है। और धारा 409 कहती है कि तय तारीख़ पर किस्त न देने वाला व्यक्ति चूककर्ता माना जाएगा।
17 सितंबर तक अग्रिम कर 5,21,940.72 करोड़ रुपये आया है, पिछले साल इसी तारीख़ तक 4,49,256.41 करोड़ आया था। बढ़त 16.18 फ़ीसदी। इसमें कंपनियों का हिस्सा 4,16,083.59 करोड़ है और 18.09 फ़ीसदी बढ़ा है, ग़ैर-कॉरपोरेट हिस्सा 1,05,856.69 करोड़ है और 9.24 फ़ीसदी बढ़ा है। कुल सकल वसूली का 36.44 फ़ीसदी अकेला अग्रिम कर है। पिछले साल इसी तारीख़ पर यह अनुपात 36.13 फ़ीसदी था, यानी लगभग वही। शुद्ध वसूली से नापें तो अग्रिम कर उसका 43.05 फ़ीसदी बैठता है।
इस दूसरी तालिका में एक छोटी गड़बड़ है। उसके दो खाने जोड़ने पर 5,21,940.28 करोड़ बनते हैं, पर कुल 5,21,940.72 छपा है। फ़र्क़ 44 लाख रुपये का है। पिछले साल के खाने में यही फ़र्क़ 77 लाख रुपये का है। तालिका में कॉरपोरेट और ग़ैर-कॉरपोरेट, दो ही खाने हैं, और इन 44 लाख का कोई तीसरा खाना शीट पर नहीं है।
बजट के 26,97,000 करोड़ में से 44.95 फ़ीसदी
साल भर के लिए सरकार ने अपने लिए क्या लक्ष्य रखा है, यह प्राप्ति बजट 2026-2027 के कर राजस्व विवरण में है। निगम कर का बजट अनुमान 12,31,000 करोड़ रुपये है और आय पर कर का 14,66,000 करोड़, जिसमें एसटीटी यानी शेयर सौदों पर लगने वाले प्रतिभूति लेनदेन कर के 73,700 करोड़ शामिल हैं। दोनों जोड़कर 26,97,000 करोड़ रुपये। 17 सितंबर तक की शुद्ध वसूली इसका 44.95 फ़ीसदी है।
यहाँ उसी दस्तावेज़ के भीतर एक टकराव है। विवरण की तालिका आय पर कर का बजट अनुमान 14,66,000 करोड़ लिखती है, और उसी विवरण के साथ छपी व्याख्यात्मक टिप्पणी संख्या 2 उसी मद के लिए 14,56,000 करोड़ लिखती है। तालिका के अपने उप-खाने जोड़ने पर 14,66,000 बनता है: वसूली 12,60,000, अधिभार 79,000, स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर 53,000, एसटीटी 73,700 और अन्य प्राप्तियाँ 300। टिप्पणी वाले आँकड़े पर चलें तो कुल प्रत्यक्ष कर लक्ष्य 26,87,000 करोड़ होगा और अब तक की वसूली 45.12 फ़ीसदी। दोनों आँकड़े सरकार के एक ही दस्तावेज़ में हैं और आपस में 10,000 करोड़ रुपये दूर खड़े हैं।
अलग-अलग नापें तो निगम कर अपने 12,31,000 करोड़ के अनुमान का 45.16 फ़ीसदी छू चुका है, और आय पर कर वाला खाना अपने 14,66,000 करोड़ का 44.78 फ़ीसदी। शीट का चौथा खाना इस तुलना में आता ही नहीं। उसकी 'अन्य कर' श्रेणी बजट की किसी एक पंक्ति से मेल नहीं खाती: 2024-25 के लिए शीट इस खाने में 3,341 करोड़ रुपये दिखाती है और प्राप्ति बजट उसी साल के लिए 3.45 करोड़। दोनों को आमने-सामने रखना ग़लत होगा। शीट के अपने आँकड़ों में इस खाने की सकल वसूली 297.14 करोड़ से गिरकर 17.12 करोड़ रह गई है, और रिफ़ंड उससे ज़्यादा, 17.32 करोड़ निकले हैं। इसीलिए खाता ऋणात्मक है।
साढ़े पाँच महीने बीत चुके हैं। 1 अप्रैल से 17 सितंबर तक 170 दिन होते हैं, यानी साल का 46.58 फ़ीसदी। पर वसूली दिनों के हिसाब से नहीं चलती, धारा 408 की किस्तों के हिसाब से चलती है, और उस तालिका में 15 दिसंबर तक 75 फ़ीसदी और 15 मार्च तक पूरी रक़म जमा होनी है। इसलिए इस तारीख़ पर लक्ष्य का 45 फ़ीसदी के आसपास होना पीछे रहना नहीं है। पिछले साल इसी 17 सितंबर को शुद्ध वसूली 10,73,272.17 करोड़ थी और उस साल का बजट अनुमान 25,20,000 करोड़, यानी 42.59 फ़ीसदी। इस लिहाज़ से यह साल पिछले साल से 2.36 अंक आगे है।
पिछला पूरा साल: ग़ैर-कॉरपोरेट शुद्ध वसूली 0.04 फ़ीसदी बढ़ी थी
इस साल के रिफ़ंड को समझने के लिए पिछले साल की पूरी तस्वीर देखनी पड़ती है, और वह 31 मार्च 2026 वाली शीट में है। उसके मुताबिक़ 2025-26 में सकल वसूली 28,11,936 करोड़ रुपये रही, 4.03 फ़ीसदी की बढ़त। रिफ़ंड 4,71,531 करोड़ रहे। शुद्ध वसूली 23,40,406 करोड़ रुपये, 5.12 फ़ीसदी ऊपर। ये सब आँकड़े शीट पर अनंतिम बताए गए हैं। जो रिफ़ंड इस साल 29.19 फ़ीसदी बढ़े हैं, वे पिछले पूरे साल में घटे थे: 4,76,732 करोड़ से गिरकर 4,71,531 करोड़, यानी 5,201 करोड़ रुपये कम।
असली बात इसके भीतर है। उन बारह महीनों में कॉरपोरेट शुद्ध वसूली 9,86,767 से बढ़कर 10,99,166 करोड़ हुई, 11.39 फ़ीसदी। ग़ैर-कॉरपोरेट शुद्ध वसूली 11,82,972 से बढ़कर 11,83,405 करोड़ हुई। बढ़त 433 करोड़ रुपये की, यानी 0.04 फ़ीसदी। पूरा साल, और लगभग शून्य। एसटीटी उसी साल 53,296 से बढ़कर 57,522 करोड़ हुआ, 7.93 फ़ीसदी।
इसकी वजह सरकार के अपने काग़ज़ों में दर्ज है। बजट 2025-26 में नई कर व्यवस्था की स्लैब बदली गई थीं और 12 लाख रुपये तक की आय पर कर शून्य कर दिया गया था; वेतनभोगी के लिए 75,000 की मानक कटौती जोड़कर यह सीमा 12.75 लाख बनती है। यह 1 फ़रवरी 2025 की पीआईबी विज्ञप्ति में वित्त मंत्री के हवाले से दर्ज है। उसी बजट के भाषण का पैराग्राफ़ 161 कहता है कि इन प्रस्तावों से प्रत्यक्ष करों में क़रीब 1 लाख करोड़ रुपये और अप्रत्यक्ष करों में 2,600 करोड़ रुपये का राजस्व छोड़ा जाएगा।
सरकार ने इसे साल के बीच में मान भी लिया था। प्राप्ति बजट के अपने खाने बताते हैं कि आय पर कर का अनुमान 14,38,000 करोड़ से घटाकर 13,12,000 करोड़ किया गया, 1,26,000 करोड़ की कटौती; उसी समय निगम कर का अनुमान 10,82,000 से बढ़ाकर 11,09,000 करोड़ किया गया। पुनरीक्षित अनुमानों को जोड़ने पर 24,21,000 करोड़ बनता है, और 31 मार्च की शीट पर अनंतिम शुद्ध वसूली 23,40,406 करोड़ है। दोनों के बीच 80,594 करोड़ रुपये का फ़ासला है।
नया क़ानून, पुरानी नीति, और भरने की बदली हुई तारीख़
एक और वजह है जिससे इस साल के आँकड़े पिछले साल के आँकड़ों से सीधे तुलनीय नहीं हैं, और वह क़ानून की है। आयकर अधिनियम, 2025 इसी 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ है और उसने 1961 के अधिनियम की जगह ली है। विधेयक 12 अगस्त 2025 को संसद से पारित हुआ, 21 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिली, और आयकर नियम, 2026 केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 20 मार्च 2026 को अधिसूचित किए। 1 अप्रैल 2026 की पीआईबी विज्ञप्ति कहती है कि यह भाषा, ढाँचे और प्रस्तुति को सरल बनाता है, अंतर्निहित कर नीति को बदले बिना। उसी विज्ञप्ति में यह भी है कि नए फ़ॉर्म अधिसूचित हो चुके हैं और उन्हें सरल तथा मानक बनाया गया है। दरों पर उसमें एक शब्द नहीं है। शब्दावली ज़रूर बदली है: जिसे 1961 के क़ानून में 'पिछला वर्ष' कहा जाता था, नए क़ानून में वह 'कर वर्ष' है।

इसलिए 12.96 फ़ीसदी किसी क़ानूनी बदलाव की पैदाइश नहीं है। पर यह पहला साल है जो नए क़ानून के नीचे चल रहा है। और प्राप्ति बजट 2026-2027, यानी इसी चालू साल का दस्तावेज़, अपनी व्याख्यात्मक टिप्पणियों में निगम कर और आय पर कर, दोनों को आज भी 1961 के अधिनियम के तहत लगने वाला कर बताता है।
रिफ़ंड की तुलना पर एक और सावधानी बनती है, और वह तारीख़ों की है। नए अधिनियम की धारा 263 की तालिका पाँच पंक्तियों की है। आख़िरी पंक्ति, यानी 'कोई अन्य निर्धारिती', के लिए तारीख़ 31 जुलाई है। जिन खातों की लेखा-परीक्षा ज़रूरी है उनके लिए 31 अक्टूबर, और धारा 172 वाली रिपोर्ट देने वालों के लिए 30 नवंबर। इसलिए रिफ़ंड का प्रवाह जुलाई पर ख़त्म नहीं होता, वह साल के आख़िरी हिस्से तक खिंचता है। पिछले साल वह तारीख़ बढ़ाई गई थी। बोर्ड ने 27 मई 2025 के परिपत्र संख्या 06/2025 से निर्धारण वर्ष 2025-26 के लिए इसे 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर 2025 किया, और फिर एक दिन और बढ़ाकर 16 सितंबर। दूसरी बढ़ोतरी की सूचना आकाशवाणी समाचार ने 16 सितंबर 2025 को दी, किसी परिपत्र संख्या के बिना। इस बार ऐसा कोई परिपत्र विभाग के समाचार पन्ने पर दर्ज नहीं है। फ़ॉर्म ज़रूर देर से खुले। उसी पन्ने के मुताबिक़ निर्धारण वर्ष 2026-27 का आईटीआर-5 ऑनलाइन 5 अगस्त 2026 को शुरू हुआ, आईटीआर-7 11 अगस्त को और आईटीआर-6 18 अगस्त को। दोनों साल एक ही तारीख़ पर नापे गए हैं, पर रिटर्न भरने का चक्र दोनों में एक जगह नहीं था, और रिफ़ंड रिटर्न के प्रसंस्करण के बाद ही निकलते हैं। दिशा साफ़ है। पिछले साल 17 सितंबर की गिनती आख़िरी तारीख़ के अगले ही दिन हुई थी, यानी प्रसंस्करण और रिफ़ंड निकलने का लगभग कोई समय उसमें शामिल नहीं था। इस बार वही गिनती 31 जुलाई के अड़तालीस दिन बाद हुई है। इतने भर से इस साल का रिफ़ंड आँकड़ा इसी तारीख़ पर ऊँचा दिखेगा, और कितना ऊँचा, यह शीट से नहीं निकलता। 13 जुलाई का आँकड़ा इतना ज़रूर बताता है कि तारीख़ का यह अंतर अकेली वजह नहीं हो सकती, क्योंकि उस दिन तक दोनों साल की आख़िरी तारीख़ें आई ही नहीं थीं और रिफ़ंड फिर भी दोगुने थे।
और इसी पर इस दस्तावेज़ की सबसे बड़ी चुप्पी टिकी है। शीट में यह कहीं नहीं है कि सकल वसूली में कितना टीडीएस से आया, यानी वेतन और ब्याज जैसी आमदनी पर स्रोत पर ही कटे कर से, कितना स्व-निर्धारण कर से और कितना नियमित निर्धारण से। रिफ़ंड किस निर्धारण वर्ष के हैं, यह भी दर्ज नहीं है। ग़ैर-कॉरपोरेट रिफ़ंड दोगुने क्यों हुए, इस पर विभाग ने एक शब्द नहीं छापा। जो छपा है, वह दो तालिकाएँ हैं और एक फ़ुटनोट।
स्रोतआयकर विभाग: Direct Tax Collections for F.Y. 2026-27 (as on 17.09.2026), एक पन्ने की डेटा शीट, दो तालिकाएँ, स्रोत TINMIS, कोई विज्ञप्ति संख्या नहीं, आयकर विभाग: Direct Tax Collections for F.Y. 2026-27 (as on 13.07.2026), इसी वित्त वर्ष की पिछली शीट, आयकर विभाग: Direct Tax Collections for F.Y. 2025-26 as on 31.03.2026, स्रोत Pr.CCA (CBDT), आँकड़े अनंतिम बताए गए हैं, प्राप्ति बजट 2026-2027, कर राजस्व विवरण: निगम कर और आय पर कर के बजट अनुमान, पुनरीक्षित अनुमान और व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ, बजट भाषण 2025-26, पैराग्राफ़ 161: प्रत्यक्ष करों में क़रीब 1 लाख करोड़ और अप्रत्यक्ष करों में 2,600 करोड़ का राजस्व छोड़ा जाना, भारत का राजपत्र, असाधारण: आयकर अधिनियम, 2025 का मूल पाठ, धाराएँ 263, 403, 404, 405, 406 और 408, पत्र सूचना कार्यालय, वित्त मंत्रालय, 1 अप्रैल 2026, रात 8:37: आयकर अधिनियम 2025 आज से लागू, पत्र सूचना कार्यालय, वित्त मंत्रालय, 1 फ़रवरी 2025, दोपहर 1:28: नई कर व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई आयकर नहीं, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, परिपत्र संख्या 06/2025, 27 मई 2025: निर्धारण वर्ष 2025-26 के लिए रिटर्न भरने की तारीख़ 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 सितंबर 2025, बिज़नेस टुडे, 18 सितंबर 2026, शाम 4:15 बजे अद्यतन: शीर्षक में 13 फ़ीसदी, मूल पाठ में 12.96 फ़ीसदी, और ग़ैर-कॉरपोरेट कर की व्याख्या, आकाशवाणी समाचार, 16 सितंबर 2025: निर्धारण वर्ष 2025-26 के रिटर्न की तारीख़ एक दिन और बढ़ाकर 16 सितंबर, परिपत्र संख्या का उल्लेख नहीं, आयकर विभाग का समाचार पन्ना, 21 सितंबर 2026 को पढ़ा गया: निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए रिटर्न की तारीख़ बढ़ाने वाला कोई परिपत्र दर्ज नहीं