रक्षा मंत्रालय ने बीडीएल के साथ 160 सैट-साव के लिए 810.79 करोड़ रुपये का अनुबंध किया, स्वदेशी सामग्री 60 फ़ीसदी रखी गई जो इस श्रेणी की न्यूनतम शर्त से दस अंक ज़्यादा है
बुधवार, 23 सितंबर को हुए इस अनुबंध की पुष्टि भारत डायनेमिक्स ने ख़ुद शेयर बाज़ार को दी सूचना में 86 मिनट बाद की, लगभग उन्हीं शब्दों में जो पत्र सूचना कार्यालय की विज्ञप्ति में थे। असली सवाल रक़म का नहीं निकला, 60 फ़ीसदी स्वदेशी सामग्री के आँकड़े का निकला: डिफ़ेंस एक्विज़िशन प्रोसीजर 2020 में 'बाय (इंडियन-आईडीडीएम)' श्रेणी की शर्त सिर्फ़ 50 फ़ीसदी है, और 60 फ़ीसदी उस मसौदे का आँकड़ा है जो अभी नियम नहीं बना है।

भारत डायनेमिक्स लिमिटेड को रक्षा मंत्रालय से जो ठेका बुधवार, 23 सितंबर को मिला, उसकी रक़म पत्र सूचना कार्यालय की विज्ञप्ति में 810.79 करोड़ रुपये लिखी है। कंपनी ख़ुद शेयर बाज़ार को क्या बताती है, क्या वह इससे मेल खाता है? और विज्ञप्ति में दर्ज 60 फ़ीसदी स्वदेशी सामग्री, वह इस श्रेणी की शर्त है या उससे ज़्यादा? दोनों सवालों के जवाब दस्तावेज़ों में मिले।
रक्षा मंत्रालय ने भारत डायनेमिक्स के साथ भारतीय वायुसेना के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफ़ील्ड वेपन, यानी सैट-साव, और उनसे जुड़े उपकरणों की ख़रीद का अनुबंध किया है, 'बाय (इंडियन-इंडिजिनसली डिज़ाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफ़ैक्चर्ड)' यानी 'बाय (इंडियन-आईडीडीएम)' श्रेणी के तहत। दस्तख़त बुधवार को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हुए। विज्ञप्ति की सुर्खी में यही रक़म गोल करके 811 करोड़ रुपये लिखी गई है, एक मामूली गोलाई जो हिसाब में कोई गड़बड़ी नहीं दिखाती।
पहले सवाल का जवाब मिल गया। भारत डायनेमिक्स ने बुधवार शाम को नैशनल स्टॉक एक्सचेंज और बीएसई, दोनों को सूचना भेजी। दोनों दस्तावेज़ों की तुलना नीचे है, आंकड़े-दर-आंकड़ा, और उसके बाद दूसरा सवाल।
दो दस्तावेज़, छियासी मिनट का फ़ासला, एक जैसा शब्द
भारत डायनेमिक्स की सूचना नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के पास शाम 6 बजकर 11 मिनट पर दर्ज हुई। कंपनी सचिव एन. नागराज ने इस पर 6 बजकर 3 मिनट पर दस्तख़त किए थे। पत्र सूचना कार्यालय की विज्ञप्ति शाम 4 बजकर 45 मिनट की थी। दोनों के बीच का फ़ासला महज़ छियासी मिनट का है।

सेबी के लिस्टिंग दायित्व और प्रकटीकरण नियम, यानी एलओडीआर, 2015 की धारा 30 किसी भी सूचीबद्ध कंपनी को बाध्य करती है कि बाज़ार को असर डालने वाली सूचना तुरंत दी जाए। भारत डायनेमिक्स ने अपनी फ़ाइलिंग में यही धारा गिनाई है। फ़ाइलिंग का प्रारूप विज्ञप्ति से अलग है, एक तालिका है जिसमें नौ खाने हैं: ठेका देने वाली संस्था, शर्तें, रक़म, निष्पादन की अवधि, प्रवर्तक समूह की किसी दिलचस्पी का ब्योरा। भरा गया विवरण लगभग वही है जो अंग्रेज़ी विज्ञप्ति में छपा था। दोनों दस्तावेज़ों में वर्णन एक ही अंग्रेज़ी वाक्य में है: "SAT-SAAW is an air-to-ground precision guided glide bomb which can be launched from platforms like Jaguar, Hawk & Su-30 MKI, and has the capability to neutralise enemy airfields from a long stand-off range"। यह वाक्य पीआईबी की अंग्रेज़ी विज्ञप्ति में भी है और भारत डायनेमिक्स की फ़ाइलिंग में भी, शब्द-दर-शब्द।
रक़म भी वही है, 810.79 करोड़ रुपये। आपूर्ति की समयसीमा भी वही, 2027-28 से 2028-29। स्वदेशी सामग्री का आँकड़ा भी वही, 60 फ़ीसदी। दो अलग दस्तावेज़, दो अलग नियामकों के लिए, एक ही दोपहर में तैयार हुए। एक अंक भी इधर से उधर नहीं हुआ।
फ़ाइलिंग में कंपनी की अपनी पहचान भी दर्ज है, जो अनुबंध की ख़बर से अलग एक तथ्य है। भारत डायनेमिक्स ख़ुद को अपने पत्र के शीर्षलेख में "A Govt. of India Enterprise, Ministry of Defence" लिखती है। सरकारी स्वामित्व किसी सूचीबद्ध कंपनी को सेबी के नियमों से छूट नहीं देता, यह फ़ाइलिंग ख़ुद उसका सबूत है। कॉर्पोरेट पहचान संख्या L24292TG1970GOI001353 में 1970 अंक कंपनी के गठन का साल बताता है। पंजीकृत दफ़्तर हैदराबाद के कांचनबाग़ में है, कॉर्पोरेट दफ़्तर नानकरामगुडा में। फ़ाइलिंग यह भी दर्ज करती है कि इस ठेके में प्रवर्तक समूह की कोई दिलचस्पी नहीं है और यह किसी संबंधित-पक्ष लेन-देन के दायरे में नहीं आता। यह मुक़ाबला जिस अंतर की तलाश में शुरू हुआ था, वह अंतर नहीं मिला।
अंतर कहीं और मिला, बीडीएल या पीआईबी में नहीं। एक शेयर बाज़ार पोर्टल, अपस्टॉक्स, ने बुधवार रात 7 बजकर 17 मिनट पर छपी अपनी रिपोर्ट की सुर्खी में इसे 802 करोड़ रुपये लिखा और मुख्य पंक्ति में 801.79 करोड़ रुपये, अपना स्रोत पीआईबी बताते हुए। यह पीआईबी की रक़म नहीं है। 810 का 801 बनना अंकों के पलटने जैसा दिखता है। सही आँकड़ा दो सरकारी दस्तावेज़ों में एक जैसा दर्ज था। तीसरी जगह, एक निजी पोर्टल पर, वह बदल गया।
स्वदेशी सामग्री की शर्त 50 फ़ीसदी है, ठेके में 60 फ़ीसदी रखी गई
डिफ़ेंस एक्विज़िशन प्रोसीजर, यानी डीएपी, 2020 के अध्याय एक में ख़रीद की पाँच श्रेणियाँ गिनाई गई हैं। सबसे ऊपर 'बाय (इंडियन-आईडीडीएम)' है, ठीक वह श्रेणी जिसके तहत बुधवार का करार हुआ। दस्तावेज़ का पैराग्राफ़ 8 इसे यूँ परिभाषित करता है: किसी भारतीय वेंडर से ऐसे उत्पादों की ख़रीद जो स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित किए गए हों। शर्त साफ़ लिखी है: "minimum of 50% Indigenous Content (IC) on cost basis of the base contract price i.e. total contract price less taxes and duties"। पचास फ़ीसदी, साठ नहीं। स्वदेशी सामग्री का यह हिसाब कुल ठेके पर नहीं, कर और शुल्क घटाकर बचे "बेस कॉन्ट्रैक्ट प्राइस" पर लगता है, यह शर्त भी उसी पैराग्राफ़ में है।
पैराग्राफ़ 9 अगली श्रेणी की बात करता है, 'बाय (इंडियन)', जिसमें स्वदेशी डिज़ाइन ज़रूरी नहीं। उसकी शर्त 60 फ़ीसदी स्वदेशी सामग्री की है। यानी जिस श्रेणी में डिज़ाइन भारत का होने की गारंटी तक नहीं माँगी जाती, उसकी माँग असल में ऊँची है, आईडीडीएम से दस अंक ज़्यादा। सैट-साव के ठेके में स्वदेशी सामग्री 60 फ़ीसदी दर्ज है। यह आँकड़ा अपनी ख़ुद की श्रेणी की शर्त से दस अंक ऊपर है। यह ठीक उतना है जितना उस दूसरी, कम माँग वाली श्रेणी में चाहिए। श्रेणियों का यह क्रम इत्तफ़ाक़ नहीं है। डीएपी 2020 डिज़ाइन को हथियार से ऊपर रखता है, विनिर्माण को अकेले नहीं।
एक और दस्तावेज़ इस कहानी में आता है। पत्र सूचना कार्यालय ने 13 फ़रवरी 2026 को शाम 7 बजकर 46 मिनट पर एक विज्ञप्ति जारी की, डीएपी 2026 के मसौदे की। उसमें साफ़ लिखा है कि 'बाय (इंडियन-आईडीडीएम)' श्रेणी में स्वदेशी सामग्री की शर्त 50 से बढ़ाकर 60 फ़ीसदी की जाएगी, प्रोत्साहन के साथ। विज्ञप्ति का अपना वाक्य है: "The draft DAP 2026 has been uploaded on the official MoD website seeking suggestions and comments from all stakeholders"। तीन शब्द यहाँ अहम हैं: मसौदा, वेबसाइट, टिप्पणियाँ। यह नियम नहीं है। उसी विज्ञप्ति में यह भी है कि श्रेणियों की गिनती पाँच से घटाकर चार की जाएगी, डीएपी 2020 के मुक़ाबले एक और प्रस्तावित बदलाव।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 जुलाई 2026 को 'रिपब्लिक फ़ोर्सेज़ फ़र्स्ट कॉन्क्लेव' में अंग्रेज़ी में कहा: "This year we are introducing a new DAP, Defence Acquisition Procedure"। जुलाई में भी यह भविष्य काल में था। बुधवार शाम तक इस डेस्क को डीएपी 2026 के अंतिम रूप से अधिसूचित होने का कोई दस्तावेज़ नहीं मिला। खोज उसी शाम की गई।
साठ फ़ीसदी की जो रक़म आज के करार में लिखी है, वह अभी लागू नियम से ऊपर है। वह उस मसौदे की रक़म से मेल खाती है जो अभी नियम नहीं बना है।
जगुआर, हॉक, सुखोई-30 और 2029 तक की डिलीवरी
विज्ञप्ति ख़ुद सैट-साव को यूँ बताती है: हवा से ज़मीन पर मार करने वाला सटीक निर्देशित ग्लाइड बम, जिसे जगुआर, हॉक और सुखोई-30 एमकेआई से दागा जा सकता है। ये तीन बिल्कुल अलग विमान हैं। जगुआर सत्तर के दशक के डिज़ाइन का है। हॉक मूलतः प्रशिक्षण विमान है। सुखोई-30 एमकेआई आधुनिक बहु-भूमिका लड़ाकू है। तीनों पर एक ही हथियार का काम करना अपने आप में इंजीनियरिंग की माँग है।

आपूर्ति 2027-28 और 2028-29 के बीच होनी है। पहला हथियार डेढ़ साल से पहले वायुसेना तक नहीं पहुँचेगा। डीआरडीओ ने सैट-साव को स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और विकसित किया है। तीन उप-प्रणालियों का स्वदेशीकरण साथ-साथ होगा: इनिशियल मेजरमेंट यूनिट, लॉन्ग इम्पैक्ट डिले फ़्यूज़, और ट्विन स्टोर कैरियर। विज्ञप्ति इनमें से किसी का काम नहीं समझाती, नाम भर गिनाती है। "उनसे जुड़े उपकरण" वाक्यांश भी बिना ब्योरे के है, यह उपकरण अलग से गिने गए हैं या रक़म में शामिल, विज्ञप्ति यह नहीं बताती।
एक बात ग़ौर करने लायक़ है। हथियार के नाम में "सैटेलाइट" शब्द है, मगर पूरी विज्ञप्ति में इसके बाद यह शब्द दोबारा कहीं नहीं आता। कोई जीपीएस नहीं, कोई नाविक प्रणाली नहीं, कोई गाइडेंस सिस्टम का नाम नहीं। सिर्फ़ "लंबी स्टैंड-ऑफ रेंज" और दुश्मन के एयरफ़ील्ड को "तबाह करने की क्षमता", बिना किसी संख्या के। नाम एक दावा करता है।
मज़मून उसे समझाता नहीं।
साव से सैट-साव तक: 2021 की विज्ञप्ति में आँकड़े, 2026 की विज्ञप्ति में सिर्फ़ एक शब्द
पुराने साव की कहानी एक दूसरी विज्ञप्ति में दर्ज है, पाँच साल पुरानी। 22 जनवरी 2021 को दोपहर 1 बजकर 22 मिनट पर पत्र सूचना कार्यालय ने बताया था कि डीआरडीओ ने ओडिशा तट पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के हॉक-आई विमान से साव का "कैप्टिव एंड रिलीज़" परीक्षण किया, 21 जनवरी को। यह साव का नौवाँ सफल परीक्षण था। बालासोर के इंटरिम टेस्ट रेंज पर लगे टेलीमेट्री और ट्रैकिंग सिस्टम ने पूरे मिशन की निगरानी की, विज्ञप्ति यही बताती है।

विज्ञप्ति हथियार को "125 Kg class smart weapon" बताती है, जो रडार, बंकर, टैक्सी ट्रैक और रनवे जैसे ज़मीनी ठिकानों पर "up to a range of 100 kms" मार कर सकता है। यह हथियार पहले जगुआर से भी दागा जा चुका था। डिज़ाइन डीआरडीओ की रिसर्च सेंटर इमारत, हैदराबाद, ने किया।
यह 100 किलोमीटर का आँकड़ा साव का है, सैट-साव का नहीं। बुधवार की विज्ञप्ति सैट-साव के लिए कोई संख्या नहीं देती, न रेंज की, न सटीकता की। यह फ़र्क़ मामूली नहीं है।
इंटरनेट पर एक और सेट के आँकड़े मिलते हैं: 90 से 100 किलोमीटर रेंज, इन-जीपीएस से 7 मीटर से कम की चूक, सीकर के साथ 3 मीटर से कम, वज़न 125 किलो, लंबाई 1.85 मीटर। यह पता लगाना ज़रूरी था कि ये आँकड़े कहाँ से आते हैं। जवाब भारत डायनेमिक्स की अपनी वेबसाइट पर मिला, कंपनी के साव उत्पाद पन्ने पर। वहाँ साव को "long range, standoff, precision air-to-surface weapon" बताया गया है, जो लड़ाकू विमानों से दागे जाने पर ज़मीनी ठिकानों को निशाना बना सकता है। रेंज और सटीकता भी वहीं दर्ज हैं: "Range: upto 90-100 km based on release conditions" और "Accuracy < 7m with (IN-GPS) & < 3m with Seeker"। यह पन्ना किसी सरकारी दस्तावेज़ का हिस्सा नहीं है। यह वेंडर का अपना विवरण है, अपने उत्पाद के बारे में। इसमें सैट-साव या सैटेलाइट गाइडेंस का ज़िक्र तक नहीं है।
रेंज या सटीकता किसी वेंडर के ब्रोशर से नहीं ली जाती, यह इस डेस्क की नीति है। इसलिए ऊपर लिखे 90-100 किलोमीटर, 7 मीटर, 3 मीटर के आँकड़े इस लेख में इस्तेमाल नहीं हुए हैं। सैट-साव के लिए कोई सरकारी रेंज या सटीकता का आँकड़ा नहीं मिला। इसलिए यह लेख वह आँकड़ा नहीं देता।
भारत डायनेमिक्स की अपनी वेबसाइट पर यह हथियार अब भी नहीं है
भारत डायनेमिक्स के मुखपृष्ठ पर पाँच उत्पाद दिखते हैं: यूनिफ़ाइड लॉन्चर, मिलान-2टी, कोंकुर्स-एम, इनवार और नाग, यानी टैंक-रोधी मिसाइलों का परिवार। साव या सैट-साव इस सूची में नहीं है। साव का अपना पन्ना वेबसाइट पर मौजूद है, बस मुखपृष्ठ की चुनी हुई सूची में नहीं।
बुधवार को 810.79 करोड़ रुपये का ठेका मिलने के कुछ घंटों बाद भी कंपनी की अपनी वेबसाइट पर सैट-साव शब्द कहीं दर्ज नहीं हुआ था। यह जाँच 23 सितंबर की रात की गई, इसके बाद पन्ना बदल भी सकता है। यह देरी का सबूत नहीं है। अनुबंध पहले ही दस्तख़त हो चुका है।
कंपनी की डिजिटल मौजूदगी और उसकी बैलेंस शीट पर आने वाला ऑर्डर, दोनों अलग रफ़्तार से चलते हैं। निवेशक और आम पाठक, दोनों इसी वेबसाइट को कंपनी का सार्वजनिक चेहरा मानकर देखते हैं। नियामकों को दी गई सूचना कहीं ज़्यादा तेज़ी से बनती है, क्योंकि उसकी समयसीमा सेबी तय करता है। वेबसाइट किसी नियम की पाबंद नहीं है।
हर हथियार क़रीब पाँच करोड़ रुपये का, बजट में इसकी जगह
810.79 करोड़ रुपये को 160 से भाग दें तो एक हथियार की क़ीमत क़रीब 5.07 करोड़ रुपये बैठती है। यह सिर्फ़ हथियार की क़ीमत है। इससे जुड़े उपकरण अलग से गिने गए हैं या नहीं, विज्ञप्ति नहीं बताती।
इस रक़म को बड़े पैमाने पर रखकर देखें। रक्षा मंत्रालय की 17 जून 2026 की विज्ञप्ति के मुताबिक़, स्वदेशी रक्षा उत्पादन 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचा, अब तक का सबसे ऊँचा आँकड़ा। 2026-27 का पूरा रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये है। सैट-साव का ठेका इस बजट का क़रीब 0.1 फ़ीसदी है, और एक साल के स्वदेशी उत्पादन का क़रीब 0.46 फ़ीसदी।
यह छोटी रक़म एक बड़ी और बढ़ती हुई तस्वीर के भीतर बैठती है। रक्षा उत्पादन 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ हुआ, वही विज्ञप्ति बताती है। निर्यात 686 करोड़ से बढ़कर 38,424 करोड़ हुआ, 80 से ज़्यादा देशों तक। सैट-साव का ठेका इसी बढ़ते ग्राफ़ का एक बिंदु है, न पहला, न आख़िरी।
आपूर्ति 2027-28 में शुरू होगी। तब तक दोनों दस्तावेज़ों के पन्नों पर लिखे शब्द एक जैसे रहेंगे, यह जाँचा जा चुका है। असली परीक्षण उस दिन होगा जब पहला हथियार वायुसेना के हाथ में पहुँचेगा।
स्रोतपत्र सूचना कार्यालय, रक्षा मंत्रालय, 23 सितंबर 2026, शाम 4:45 — हिंदी विज्ञप्ति, 160 सैट-साव के अनुबंध की घोषणा, पत्र सूचना कार्यालय, रक्षा मंत्रालय, 23 सितंबर 2026, शाम 4:45 — वही विज्ञप्ति, अंग्रेज़ी संस्करण, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, संदर्भ बीडीएल/सीएस/2026/एसई-49, 23 सितंबर 2026 — नैशनल स्टॉक एक्सचेंज और बीएसई को सेबी (एलओडीआर) नियम 2015 की धारा 30 के तहत भेजी गई सूचना, कंपनी सचिव एन. नागराज के दस्तख़त सहित, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज, कॉर्पोरेट अनाउंसमेंट सूची, बीडीएल — दाख़िल होने का समय 23 सितंबर 2026, शाम 6:11:38 दर्ज, रक्षा मंत्रालय, डिफ़ेंस एक्विज़िशन प्रोसीजर (डीएपी) 2020, 30 सितंबर 2020 से प्रभावी — अध्याय एक, पैराग्राफ़ 8-9, अधिग्रहण श्रेणियों की परिभाषा, पत्र सूचना कार्यालय, रक्षा मंत्रालय, 13 फ़रवरी 2026, शाम 7:46 — डीएपी 2026 के मसौदे की घोषणा, 'बाय (इंडियन-आईडीडीएम)' की स्वदेशी सामग्री शर्त 50 से 60 फ़ीसदी करने का प्रस्ताव, रिपब्लिक वर्ल्ड, 18 जुलाई 2026 — रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का 'रिपब्लिक फ़ोर्सेज़ फ़र्स्ट कॉन्क्लेव' में नए डीएपी पर बयान, पत्र सूचना कार्यालय, रक्षा मंत्रालय, 22 जनवरी 2021, दोपहर 1:22 — साव के हॉक-आई से नौवें सफल परीक्षण की विज्ञप्ति, पत्र सूचना कार्यालय, रक्षा मंत्रालय, 17 जून 2026, सुबह 11:43 — 'द डिफ़ेंस डिकेड', रक्षा बजट, स्वदेशी उत्पादन और निर्यात के दस साल के आँकड़े, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, कंपनी की अपनी वेबसाइट पर साव उत्पाद पन्ना — वेंडर विवरण, सरकारी दस्तावेज़ नहीं, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, मुखपृष्ठ — कंपनी के चुनिंदा उत्पादों की सूची, 23 सितंबर 2026 को देखी गई, अपस्टॉक्स, 23 सितंबर 2026, रात 7:17 — अभा रावेरकर की रिपोर्ट, जिसमें रक़म 801.79 करोड़ रुपये छपी