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सीएनजी, हाइब्रिड और बिजली की कारें मिलकर पहली बार पेट्रोल से आगे निकलीं; साल भर का धक्का सीएनजी का था, अगस्त की आख़िरी छलाँग हाइब्रिड की, और बिजली का हिस्सा उस महीने घटा

डीलरों की संस्था फ़ाडा की अगस्त की तालिका में पेट्रोल कारों का हिस्सा 40.85 फ़ीसदी है और सीएनजी, हाइब्रिड व ईवी का जोड़ 41.95। एक साल पहले पेट्रोल 11 अंक आगे था। साल भर के 6.69 अंक के उलटफेर में 3.81 अकेले सीएनजी के हैं, और जुलाई से अगस्त की आख़िरी छलाँग हाइब्रिड ने लगाई; बिजली की कारों का हिस्सा उस एक महीने में 7.90 से घटकर 7.63 रह गया।

हैदराबाद के बेगमपेट में बिजली की कारों का एक चार्जिंग स्टेशन। फ़ाडा की अगस्त की तालिका में बिजली की कारों का हिस्सा 7.63 फ़ीसदी है, जुलाई के 7.90 से कम; पेट्रोल को पीछे छोड़ने वाला जोड़ सीएनजी और हाइब्रिड के साथ बना।
तस्वीर: iMahesh, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस की 7 सितंबर की विज्ञप्ति के पाँचवें-छठे पन्ने पर, एक चार्ट के नीचे, पाँच कतारों की एक छोटी तालिका है। पेट्रोल/एथनॉल 40.85 फ़ीसदी। डीज़ल 17.21। सीएनजी/एलपीजी 25.28। हाइब्रिड 9.04। ईवी 7.63।

नीचे की तीन कतारें जोड़िए: 41.95। पहली कतार से 1.10 अंक ज़्यादा।

इतना ही है वह फ़ासला जिसे संस्था के अध्यक्ष साई गिरिधर ने अपने बयान में "भारत के इतिहास में पहली बार" कहा है। अगस्त 2026 में देश भर में जितनी कारें पंजीकृत हुईं, उनमें सीएनजी, हाइब्रिड और बिजली की कारों का जोड़ पेट्रोल कारों से आगे निकल गया। डीलरों की यह संस्था, जिसे फ़ाडा कहा जाता है, हर महीने सड़क परिवहन मंत्रालय के 'वाहन' पोर्टल पर दर्ज पंजीकरण गिनकर यह आँकड़ा जारी करती है।

सवाल यह है कि पलटा दिया किसने। जवाब उसी तालिका की कतारों में है, और वह उस सुर्ख़ी से थोड़ा अलग है जो 7 और 8 सितंबर को छपी।

तालिका की पाँच कतारें, तीन महीने

फ़ाडा की तालिका में हर ईंधन के सामने तीन महीनों के आँकड़े हैं: अगस्त 2026, जुलाई 2026 और अगस्त 2025। पेट्रोल/एथनॉल: 40.85, 41.68, 46.37। डीज़ल: 17.21, 17.73, 18.37। सीएनजी/एलपीजी: 25.28, 24.67, 21.47। हाइब्रिड: 9.04, 8.02, 7.96। ईवी: 7.63, 7.90, 5.83।

तीनों वैकल्पिक ईंधनों का जोड़ इस तरह बनता है: अगस्त 2025 में 35.26, जुलाई 2026 में 40.59, अगस्त 2026 में 41.95। पेट्रोल की बढ़त 11.11 अंक से घटकर जुलाई में 1.09 अंक रह गई थी। अगस्त में वह उलट गई।

एक बात विज्ञप्ति ख़ुद जोड़ती है, और वह सुर्ख़ियों में कम दिखी: अकेले ईंधन के तौर पर पेट्रोल अब भी सबसे बड़ा है। 40.85 के सामने सीएनजी 25.28 पर है, हाइब्रिड 9.04 पर, ईवी 7.63 पर। जो पेट्रोल से आगे निकला है, वह तीन ईंधनों का जोड़ है, कोई एक ईंधन नहीं।

साल भर में कौन कितना खिसका

अगस्त 2025 से अगस्त 2026 के बीच सीएनजी का हिस्सा 3.81 अंक बढ़ा, ईवी का 1.80 और हाइब्रिड का 1.08। पेट्रोल 5.52 अंक गिरा, डीज़ल 1.16। यही गणित डेक्कन क्रॉनिकल में छपी पीटीआई की रिपोर्ट में भी है।

वैकल्पिक ईंधनों की कुल बढ़त 6.69 अंक की है। उसमें 3.81 अकेले सीएनजी के हैं, आधे से ज़्यादा। ईवी और हाइब्रिड मिलकर 2.88।

साल भर के हिसाब से जवाब साफ़ है: पलटा सीएनजी ने दिया। बिजली की कारों की चर्चा सबसे ज़्यादा होती है, पर तालिका में उनका हिस्सा 7.63 है, सीएनजी के एक-तिहाई से भी कम। पेट्रोल ने 5.52 अंक खोए; सीएनजी ने 3.81 पाए।

जुलाई से अगस्त: आख़िरी छलाँग हाइब्रिड की, बिजली पीछे हटी

जुलाई और अगस्त के बीच का एक महीना तस्वीर बदल देता है। इस महीने में हाइब्रिड 8.02 से 9.04 पर गया, 1.02 अंक की छलाँग, जो उसकी साल भर की 1.08 अंक की बढ़त का लगभग पूरा हिस्सा है। सीएनजी 24.67 से 25.28 पर गया, 0.61 अंक ऊपर। और ईवी 7.90 से 7.63 पर आ गया, 0.27 अंक नीचे।

पेट्रोल इसी महीने में 0.83 अंक गिरा। जुलाई में जो 1.09 अंक का फ़ासला बचा था, उसे अगस्त में हाइब्रिड और सीएनजी ने पाटा; बिजली की कारों ने उस महीने फ़ासला बढ़ाया, घटाया नहीं।

सिर्फ़ कारें नहीं, कुल बिजली के वाहन भी जुलाई से कम रहे। सभी श्रेणियाँ मिलाकर जुलाई में 3,27,901 बिजली के वाहन पंजीकृत हुए थे, जिसे फ़ाडा ने किसी भी महीने का सबसे ऊँचा आँकड़ा बताया था; अगस्त में 2,98,448।

"पेट्रोल को बिजली ने पछाड़ा" वाला वाक्य इस तालिका से नहीं निकलता।

कहने वाला कौन है

साई गिरिधर 1 सितंबर 2026 को फ़ाडा के 38वें अध्यक्ष बने हैं, 2026-28 के कार्यकाल के लिए। फ़ैसला संस्था की 62वीं वार्षिक आम सभा के तुरंत बाद हुई 323वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में हुआ। वे जयपुर की सैशा मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं, जिसके पास स्कोडा, वॉल्वो कार्स, जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर और एमजी सेलेक्ट की डीलरशिप हैं। इस कारोबार में उन्हें 30 साल से ज़्यादा हुए; शुरुआत 1995 में जयपुर में देवू मोटर्स की डीलरशिप से हुई थी।

जुलाई के आँकड़ों पर 6 अगस्त को जो बयान आया था, उसमें वे उपाध्यक्ष के तौर पर बोले थे; तब अध्यक्ष सी.एस. विघ्नेश्वर थे। अगस्त का बयान अध्यक्ष के तौर पर उनका पहला मासिक बयान है।

फ़ाडा 1964 में बनी थी। अपनी गिनती में उसके 15,000 से ज़्यादा डीलरशिप और 30,000 से ज़्यादा आउटलेट हैं, जहाँ लगभग 50 लाख लोग काम करते हैं। जो आँकड़ा वह जारी करती है, वह उसके अपने सदस्यों के कारोबार का है, और डीलरों की माँगें, जैसे कंपनियों से माल कम भेजने की, उसी विज्ञप्ति में साथ चलती हैं।

पिछले साल का आँकड़ा दो तरह से छपा है

अगस्त 2025 में पेट्रोल का हिस्सा फ़ाडा की मौजूदा तालिका में 46.37 फ़ीसदी है और वैकल्पिक ईंधनों का जोड़ 35.26। डेक्कन क्रॉनिकल में छपी पीटीआई की रिपोर्ट यही आँकड़े देती है, और साल भर के बदलाव भी इन्हीं से निकाले गए हैं।

हंस इंडिया के सार में, और ऑटोपंडित्ज़ नाम की वेबसाइट की तालिका में, वही महीना अलग दिखता है: पेट्रोल 46.89, वैकल्पिक 34.98। ऑटोपंडित्ज़ का पूरा टूटा हुआ आँकड़ा यह है: सीएनजी 21.47, हाइब्रिड 8.13, ईवी 5.38। सीएनजी दोनों जगह एक ही है; फ़र्क़ हाइब्रिड, ईवी और पेट्रोल की कतारों में है।

किसी रिपोर्ट ने यह फ़र्क़ समझाया नहीं है। फ़ाडा की विज्ञप्ति भी नहीं कहती कि पिछले साल के आँकड़े बदले गए हैं, या क्यों। गिरिधर के "लगभग ग्यारह अंक" वाले वाक्य से 46.37 वाली श्रृंखला मेल खाती है, जिसमें फ़ासला 11.11 बनता है; दूसरी श्रृंखला में वह 11.91 होता। यह लेख फ़ाडा की मौजूदा तालिका के आँकड़े इस्तेमाल करता है और दूसरी श्रृंखला को यहाँ दर्ज कर रहा है।

डीलर दो वजहें गिनाते हैं

फ़ाडा की विज्ञप्ति में बदलाव की वजह डीलरों के हवाले से दो वाक्यांशों में है: "रनिंग-कॉस्ट इकोनॉमिक्स", मतलब गाड़ी चलाने का ख़र्च, और "ई20 बदलाव को लेकर उपभोक्ताओं की जारी हिचक", जो विज्ञप्ति के अनुसार पेट्रोल ख़रीदारों को सीएनजी, हाइब्रिड और ईवी की ओर धकेल रही है। ई20 वह पेट्रोल है जिसमें 20 फ़ीसदी एथनॉल मिला होता है।

यह हिचक नई नहीं है। जुलाई के आँकड़ों वाली 6 अगस्त की विज्ञप्ति में भी यही वाक्य था, और उसके साथ एक माँग भी: कार कंपनियों को "ई20 ईंधन बदलाव पर उपभोक्ताओं से साफ़ और भरोसेमंद संवाद" करना होगा, तभी हिचकते पेट्रोल ख़रीदार शोरूम में सौदा करेंगे। अगस्त की विज्ञप्ति में यह नहीं लिखा कि ऐसा संवाद हुआ।

विज्ञप्ति यह भी नहीं बताती कि ख़रीदार ई20 से किस बात पर हिचकते हैं, और न यह कि सीएनजी या हाइब्रिड चलाने में पेट्रोल से कितना कम ख़र्च आता है। दोनों दावे डीलरों के अनुभव के हैं, किसी गणना के नहीं।

यह 'खुदरा' है, कारख़ाने से निकला माल नहीं

फ़ाडा जिसे खुदरा बिक्री कहती है, वह असल में पंजीकरण है: वे गाड़ियाँ जिनका नंबर किसी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, यानी आरटीओ, में दर्ज हुआ। विज्ञप्ति के अंत में लिखा है कि अगस्त के आँकड़े 4 सितंबर 2026 तक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ मिलकर देश के 1,469 में से 1,467 आरटीओ से जुटाए गए हैं। तेलंगाना के तिपहिया, व्यावसायिक वाहन और ट्रैक्टर के आँकड़े इस महीने उपलब्ध नहीं थे।

कंपनियाँ जिस बिक्री की गिनती करती हैं, वह डीलर को भेजा गया, यानी बिल किया गया माल है; फ़ाडा की अपनी भाषा में "डिस्पैच"। दोनों संख्याओं के बीच का फ़ासला उसी भाषा में झलकता है: जुलाई में उसने लिखा कि डिस्पैच खुदरा से आगे चल रहे हैं, और अगस्त में कंपनियों से कहा कि वे "सख़्ती से खुदरा के हिसाब से बिल करें"। ग्राहक की गिनती और कारख़ाने की गिनती एक नहीं होती, और शोरूम में खड़ा माल उन दोनों के बीच का अंतर है।

निवर्तमान अध्यक्ष सी.एस. विघ्नेश्वर ने 1 सितंबर को कार्यभार सौंपते हुए इसे यों कहा: खुदरा आँकड़ा, जो कभी फ़ाडा की एक दलील भर था, आज वह संख्या है जिससे यह उद्योग योजना बनाता है।

शोरूम में 38 से 40 दिन का माल

मदुरै (तमिलनाडु) में मट्टुथावनी के पास एक कार शोरूम। फ़ाडा के अनुसार अगस्त के अंत में देश के कार डीलरों के पास औसतन 38 से 40 दिन की बिक्री जितना माल खड़ा था; सुझाया हुआ पैमाना 21 दिन है।
तस्वीर: Nileshantony92, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

अगस्त के अंत में देश के कार डीलरों के पास औसतन 38 से 40 दिन की बिक्री जितनी गाड़ियाँ खड़ी थीं। फ़ाडा का सुझाया हुआ पैमाना 21 दिन है। जुलाई के अंत में यह 33 से 35 दिन था, और जून से जुलाई के बीच सिर्फ़ एक दिन बढ़ा था; अगस्त में एक साथ पाँच दिन बढ़ गया।

इनवेंटरी के दिन का मतलब सीधा है: अगर आज से एक भी नई गाड़ी न आए, तो मौजूदा स्टॉक मौजूदा रफ़्तार से कितने दिन चलेगा। 38 दिन का मतलब है कि डीलर के पास सवा महीने की बिक्री खड़ी है, और उस पर उसकी पूँजी लगी है।

56 फ़ीसदी कार डीलरों ने कहा कि उनके पास जुलाई से ज़्यादा माल है। जुलाई की विज्ञप्ति में एक और आँकड़ा था: लगभग एक-चौथाई कार डीलरों के पास ऐसा स्टॉक था जिसका 25 फ़ीसदी से ज़्यादा हिस्सा पुराना पड़ चुका था। इसीलिए अगस्त की विज्ञप्ति में माँग है कि त्योहारी स्टॉकिंग के इस मौसम में कंपनियाँ उतना ही माल भेजें जितना बिक रहा है, ताकि "डीलर की पूँजी पुराने पड़ते माल में न फँसे"।

चार लाख की पहली अगस्त

अगस्त 2026 में 4,02,398 कारें पंजीकृत हुईं। अगस्त 2025 में 3,46,468 थीं; बढ़त 16.14 फ़ीसदी। किसी अगस्त में यह आँकड़ा पहली बार चार लाख के पार गया है। जुलाई में 4,16,555 थीं, तो महीने-दर-महीने 3.40 फ़ीसदी की गिरावट भी है।

सभी श्रेणियाँ मिलाकर 24,23,201 वाहन पंजीकृत हुए, पिछले अगस्त के 20,62,038 से 17.51 फ़ीसदी ज़्यादा; फ़ाडा इसे 'वाहन' श्रृंखला का सबसे बड़ा अगस्त कहती है। पर जुलाई 25,91,138 वाहनों के साथ रिकॉर्ड महीना था, और अगस्त उससे 6.48 फ़ीसदी नीचे है। गिरावट की वजह विज्ञप्ति में मानसून की सुस्ती और त्योहारों का कैलेंडर है: गणेश चतुर्थी और ओणम की ख़रीद का बचा हिस्सा इस साल सितंबर में खिसक गया।

अप्रैल से अगस्त तक, इस वित्त वर्ष के पाँच महीनों में, 21,02,265 कारें पंजीकृत हुई हैं, पिछले साल की इसी अवधि के 17,20,309 से 22.20 फ़ीसदी ज़्यादा। सभी वाहनों का पाँच महीने का जोड़ 1,29,37,299 है, 18.47 फ़ीसदी की बढ़त।

कमज़ोर आधार की चेतावनी, ख़ुद फ़ाडा की

गिरिधर का बयान अपनी ही सुर्ख़ी को "अनुशासन से पढ़ने" को कहता है। साल-दर-साल बढ़त का बड़ा हिस्सा अगस्त 2025 के कमज़ोर आधार पर टिका है, जब ख़रीदार जीएसटी 2.0 की दर-कटौती के इंतज़ार में ख़रीद टाल रहे थे। और डीलरों ने बताया है कि त्योहारों की शुरुआत उनकी अपनी उम्मीद से कमज़ोर रही।

जीएसटी की वह कटौती 22 सितंबर 2025 से लागू हुई थी, जिसमें छोटी कारों पर दर 28 से घटकर 18 फ़ीसदी हुई। इसका असर तुलना पर दोनों तरफ़ पड़ता है: अगस्त-सितंबर 2025 का आधार नीचा है, तो अक्टूबर-नवंबर 2025 का आधार ऊँचा, क्योंकि तब कटौती के बाद त्योहारी ख़रीद उमड़ी थी। विज्ञप्ति के शब्दों में, आने वाली तिमाही का असली संकेत "शोरूम में रूपांतरण होगा, साल-दर-साल की सुर्ख़ियाँ नहीं"।

यह चेतावनी गिनती के बारे में है। ईंधन के हिस्से की तालिका पर विज्ञप्ति ऐसी कोई चेतावनी नहीं देती।

गाँव 24.99, शहर 10.93

गाँवों के आरटीओ में कार पंजीकरण अगस्त 2025 के मुक़ाबले 24.99 फ़ीसदी बढ़े; शहरी आरटीओ में 10.93 फ़ीसदी। फ़ाडा गाँव और शहर का यह बँटवारा आरटीओ के आधार पर करती है, ख़रीदार के पते से नहीं; तालिका का शीर्षक ही "शहरी और ग्रामीण आरटीओ के आधार पर" है।

हर श्रेणी में यही तस्वीर है। कुल वाहन: ग्रामीण 19.79 फ़ीसदी ऊपर, शहरी 15.17। दोपहिया: 20.25 बनाम 19.07। व्यावसायिक वाहन: 16.33 बनाम 12.79। तिपहिया गाँवों में 23.95 फ़ीसदी बढ़े और शहरों में 6.95 फ़ीसदी घटे।

जुलाई से अगस्त की गिरावट में भी फ़र्क़ है: शहरी कार पंजीकरण 4.33 फ़ीसदी गिरे, ग्रामीण सिर्फ़ 1.96।

एक ही श्रेणी इस तस्वीर से बाहर है, और वह खेती से सबसे सीधे जुड़ी है।

ट्रैक्टर: एक महीने में चौथाई कम

खेत जोतता एक ट्रैक्टर। अगस्त में 87,977 ट्रैक्टर पंजीकृत हुए, जुलाई से 25.03 फ़ीसदी कम; फ़ाडा इसे मानसून की कमी का सबसे साफ़ संकेत कहती है।
तस्वीर: abhiriksh, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

अगस्त में 87,977 ट्रैक्टर पंजीकृत हुए। पिछले अगस्त में 87,244 थे; बढ़त 0.84 फ़ीसदी, जिसे विज्ञप्ति "असल में सपाट" कहती है। जुलाई में 1,17,349 थे; एक महीने में 25.03 फ़ीसदी की गिरावट।

जुलाई का आँकड़ा इसलिए ऊँचा था कि तब पिछड़ी हुई ख़रीफ़ बुवाई की भरपाई चल रही थी; ट्रैक्टर जुलाई में साल-दर-साल 28.10 फ़ीसदी बढ़े थे। 6 अगस्त की विज्ञप्ति में ही लिखा था कि ख़रीफ़ की बुवाई पिछले साल से लगभग 4.7 फ़ीसदी पीछे है और अगस्त में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। अगस्त में कमी और बढ़ी।

अगस्त तक देश भर की बारिश की कमी लगभग 13 फ़ीसदी हो गई, और 14 राज्य कम बारिश वाले रहे। ग्रामीण आरटीओ में ट्रैक्टर पंजीकरण जुलाई से 24.43 फ़ीसदी गिरे, शहरी में 27.64; साल-दर-साल गाँवों में 3.09 फ़ीसदी की बढ़त है और शहरों में 8.32 की गिरावट। ट्रैक्टर की ख़रीद का 82.1 फ़ीसदी गाँवों के आरटीओ से आता है। कंपनियों में महिंद्रा 20,703 ट्रैक्टरों के साथ सबसे ऊपर है और उसका स्वराज डिवीज़न 15,914 के साथ दूसरे नंबर पर; फिर इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स 11,818 और टैफ़े 10,780।

'बारिश के नक़्शे' से अलग होती माँग

गिरिधर के बयान का एक हिस्सा ट्रैक्टर की गिरावट और कार की बढ़त को एक साथ पढ़ता है। उनके शब्दों में, ग्रामीण माँग मानसून से "अलग होने लगी है": खेती की आमदनी से जुड़ा हिस्सा नरम पड़ा, पर गाँव की ग़ैर-खेती अर्थव्यवस्था, रोज़ी-रोटी के लिए आवाजाही, माल की ढुलाई और निर्माण, रफ़्तार पकड़ती रही। जिस उद्योग को ग्रामीण भारत को "बारिश के नक़्शे से पढ़ने" की आदत रही है, उसके लिए वे इसे इस वित्त वर्ष का "शांत संरचनात्मक संकेत" कहते हैं।

विज्ञप्ति एक बात और जोड़ती है: रबी की फ़सल के लिए जलाशयों का भंडार फिर भर गया है, इसलिए त्योहारी माँग का आधार बारिश के नक़्शे से ज़्यादा चौड़ा है।

पर वह यह नहीं बताती कि कम बारिश वाले 14 राज्य कौन से हैं, और न यह कि गाँवों में कार पंजीकरण की 24.99 फ़ीसदी की बढ़त किन राज्यों से आई। राज्यवार कोई तालिका विज्ञप्ति में नहीं है।

बिजली: कारों में 7.63 फ़ीसदी, सब वाहनों में 12.3

तिरुवनंतपुरम में केरल सरकार के सचिवालय के चार्जिंग पॉइंट पर एक बिजली की कार। अगस्त में सभी श्रेणियाँ मिलाकर 2,98,448 बिजली के वाहन पंजीकृत हुए, जुलाई के 3,27,901 से कम।
तस्वीर: Shagil Kannur, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

सभी श्रेणियाँ मिलाकर अगस्त में 2,98,448 बिजली के वाहन पंजीकृत हुए, पिछले अगस्त से 52.9 फ़ीसदी ज़्यादा; कुल वाहनों में उनकी पैठ 12.3 फ़ीसदी रही, एक साल पहले 9.5 थी। फ़ाडा इसे बिजली के वाहनों का "सबसे बड़ा अगस्त" कहती है, पर यह जुलाई के 3,27,901 से नीचे है।

श्रेणीवार तस्वीर एक-सी नहीं है। दोपहिया में बिजली का हिस्सा 10.68 फ़ीसदी हुआ, पिछले अगस्त के 7.66 से ऊपर; विज्ञप्ति के अनुसार किसी ग़ैर-त्योहारी महीने में यह पहली बार 10 के पार गया। तिपहिया में 65.30 फ़ीसदी, जिसके बारे में विज्ञप्ति लिखती है कि यह श्रेणी "अब संरचनात्मक रूप से बिजली की" है। व्यावसायिक वाहनों में 5.18 फ़ीसदी, पिछले साल के 2.06 से ढाई गुना, और यह अब तक का सबसे ऊँचा मासिक आँकड़ा है।

कारों में ही बिजली पीछे हटी: जुलाई के 7.90 से 7.63। विज्ञप्ति इस गिरावट की कोई वजह नहीं देती। नीति के नाम पर वह केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना और राज्यों की नीतियों का ज़िक्र करती है, जो उसके शब्दों में बिजली की ओर बदलाव को तेज़ कर रही हैं।

हाइब्रिड: सबसे छोटी कतार, अगस्त में सबसे तेज़ चाल

हाइब्रिड कारें, जिनमें पेट्रोल इंजन के साथ बैटरी और मोटर भी होती है, तालिका की सबसे छोटी वैकल्पिक कतार हैं; पर उनकी चाल बाक़ी दोनों से अलग है। अगस्त 2025 में 7.96, जुलाई 2026 में 8.02: ग्यारह महीनों में बस 0.06 अंक की बढ़त। फिर अगस्त 2026 में 9.04।

ऑटोपंडित्ज़ का विश्लेषण हाइब्रिड के लिए टोयोटा और होंडा का नाम लेता है और मारुति सुज़ुकी के हाइब्रिड विस्तार का ज़िक्र करता है। फ़ाडा की विज्ञप्ति ईंधन और कंपनी को एक साथ नहीं बाँटती, इसलिए उससे यह नहीं निकलता कि अगस्त के 9.04 में किस कंपनी की कितनी हाइब्रिड कारें हैं।

कंपनियों की अलग तालिका में टोयोटा किर्लोस्कर के 24,856 पंजीकरण हैं, हिस्सा 6.18 फ़ीसदी, पिछले अगस्त के 7.97 से कम; होंडा कार्स के 4,968, हिस्सा 1.23 फ़ीसदी। हाइब्रिड का हिस्सा बढ़ा और इन दो कंपनियों का घटा: दोनों आँकड़े एक ही विज्ञप्ति में हैं, और उनके बीच का रिश्ता विज्ञप्ति नहीं खोलती। यह भी नहीं लिखा है कि 'हाइब्रिड' की कतार में कौन-कौन सी तकनीक गिनी गई है।

सीएनजी: हर चौथी कार से ज़्यादा

सीएनजी का हिस्सा 21.47 से 24.67 और फिर 25.28 पर पहुँचा है। अगस्त में पंजीकृत हर चार कारों में एक से ज़्यादा सीएनजी की थी। तालिका में इस कतार का नाम "सीएनजी/एलपीजी" है; एलपीजी कारें भी इसी में गिनी जाती हैं और विज्ञप्ति दोनों को अलग नहीं करती।

कंपनियों की तालिका में मारुति सुज़ुकी ने अगस्त में 1,65,200 कारें पंजीकृत कराईं, हिस्सा 41.05 फ़ीसदी, पिछले अगस्त के 38.82 से ऊपर। टाटा मोटर्स 57,841 पर 14.37 फ़ीसदी, पिछले साल 11.88। महिंद्रा 50,245 पर 12.49, हुंडई 46,987 पर 11.68, किआ 23,371 पर 5.81। जिन दो कंपनियों का हिस्सा साल भर में सबसे ज़्यादा बढ़ा, मारुति और टाटा, ऑटोपंडित्ज़ उन्हीं दोनों को सीएनजी के बड़े विक्रेताओं में गिनता है, हुंडई और किआ के साथ; टाटा को बिजली की कारों में भी।

दोपहिया में सीएनजी का हिस्सा 0.08 फ़ीसदी है और ट्रैक्टर में शून्य। यह ईंधन कारों, तिपहिया (21.50 फ़ीसदी) और व्यावसायिक वाहनों (12.87 फ़ीसदी) का है।

पेट्रोल का देश अब भी दोपहिया है

अगस्त के 24,23,201 वाहनों में 17,14,610 दोपहिया थे, कारें 4,02,398। दोपहिया की ईंधन तालिका में पेट्रोल/एथनॉल 89.23 फ़ीसदी है, बिजली 10.68 और सीएनजी 0.08। पेट्रोल का यह हिस्सा पिछले अगस्त के 92.10 से घटा ज़रूर है, पर यहाँ पेट्रोल और बाक़ी सबके बीच 78 अंक से ज़्यादा का फ़ासला है।

बाक़ी श्रेणियाँ डीज़ल की हैं। व्यावसायिक वाहनों में डीज़ल 78.77 फ़ीसदी, सीएनजी 12.87, बिजली 5.18, पेट्रोल 3.15। ट्रैक्टर में डीज़ल 99.99। तिपहिया अकेली श्रेणी है जहाँ बिजली सबसे ऊपर है: 65.30, फिर सीएनजी 21.50 और डीज़ल 12.89।

तो "पेट्रोल से आगे" वाली बात 24 लाख में से सिर्फ़ 4 लाख वाहनों की है। कारों की।

सितंबर के लिए डीलर कम आश्वस्त

फ़ाडा हर महीने अपने सदस्यों का ऑनलाइन सर्वे करती है। सितंबर के लिए 67.09 फ़ीसदी डीलर बढ़त की उम्मीद करते हैं, 27.35 सपाट बाज़ार की और 5.56 गिरावट की। अगस्त के लिए यही आँकड़ा 74.30 फ़ीसदी था। 43.59 फ़ीसदी डीलरों का कहना है कि त्योहारी बुकिंग की कतार बनने लगी है।

चिंता के दो नाम विज्ञप्ति में हैं: बारिश की कमी, जो गाँवों से आने वाली पूछताछ पर असर डाल रही है, और कंपनियों की 1 सितंबर से लागू क़ीमत-बढ़ोतरी का नया दौर। सर्वे में नक़दी की स्थिति को 41.03 फ़ीसदी डीलर अच्छी, 47.44 सामान्य और 11.54 ख़राब बताते हैं; कुल मिज़ाज 40.60 अच्छा, 51.28 सामान्य, 8.12 ख़राब। सितंबर के लिए विज्ञप्ति का अपना शब्द "सतर्क आशावाद" है।

तीन महीने: 81.62 फ़ीसदी को बढ़त की उम्मीद

सितंबर से नवंबर की तिमाही के लिए 81.62 फ़ीसदी डीलर बढ़त की उम्मीद रखते हैं, 17.09 सपाट की और 1.28 गिरावट की। एक महीना पहले, अगस्त-अक्टूबर के लिए, यह 87.85 फ़ीसदी था। साल के त्योहारों का बड़ा हिस्सा इसी खिड़की में है: गणेश चतुर्थी और नवरात्रि से धनतेरस और दिवाली तक, जो इस साल नवंबर में पड़ रही हैं।

जोखिम भी डीलरों ने ख़ुद क्रम में रखे हैं। सबसे बड़ा, 29.06 फ़ीसदी के लिए, यह कि त्योहारी माँग उम्मीद से कम निकले; 17.52 फ़ीसदी के लिए सामान्य से कम मानसून का ग्रामीण माँग पर असर; 11.11 फ़ीसदी के लिए क़ीमतों की और बढ़ोतरी। अक्टूबर और नवंबर की तुलना पिछले साल की जीएसटी-कटौती वाली त्योहारी उछाल से होगी, जो विज्ञप्ति के शब्दों में "असामान्य रूप से ऊँचा" आधार है।

जो ख़रीदार शोरूम में खड़ा है, उसके सामने की संख्याएँ

इस त्योहारी मौसम में कार चुनने वाले के लिए विज्ञप्ति में सलाह नहीं है, आँकड़े हैं। जीएसटी 2.0 के एक साल बाद, उसके शब्दों में, सस्ते होने के फ़ायदे का "बड़ा हिस्सा अब भी उपभोक्ता के पास है", छोटी कारों, रोज़मर्रा के दोपहिया और व्यावसायिक वाहनों में; पर लागत बढ़ने से हुई लगातार क़ीमत-बढ़ोतरियों ने वह गुंजाइश घटा दी है, और "गुंजाइश सीमित है और घट रही है"। 1 सितंबर से क़ीमतों का एक और दौर लागू है।

दूसरी संख्या 38 से 40 दिन की है। डीलरों के पास सवा महीने का माल है और उनकी संस्था कंपनियों से माल रोकने को कह रही है। विज्ञप्ति में छूट या ऑफ़र का कोई ज़िक्र नहीं है; उसका शब्द "रूपांतरण" है, मतलब पूछताछ का सौदे में बदलना।

तीसरी बात ई20 की है। जुलाई में फ़ाडा ने कंपनियों से ख़रीदारों को साफ़ जानकारी देने को कहा था; अगस्त में उसने दर्ज किया कि हिचक जारी है। और चौथी: ईंधन की यह तालिका पूरे देश की है। किसी एक शहर में सीएनजी या चार्जिंग की सुविधा कैसी है, यह इस तालिका से नहीं पढ़ा जा सकता; राज्य या शहर का कोई बँटवारा विज्ञप्ति में नहीं है।

विज्ञप्ति में जो नहीं है

तालिका बताती है कि किस ईंधन की कितनी कारें पंजीकृत हुईं; यह नहीं कि किस मॉडल की, किस क़ीमत की, किस राज्य में। चलाने के ख़र्च का जो तर्क डीलर देते हैं, उसके लिए विज्ञप्ति में कोई गणना नहीं है। 'हाइब्रिड' में कौन-सी तकनीक गिनी गई और 'सीएनजी/एलपीजी' में एलपीजी कितनी है, यह भी नहीं लिखा। पिछले साल के दो अलग आँकड़ों का फ़र्क़ न फ़ाडा ने समझाया है, न उन अख़बारों ने जिन्होंने उन्हें छापा।

और जिन 1,469 आरटीओ से यह तालिका बननी थी, उनमें से दो के आँकड़े 4 सितंबर तक नहीं पहुँचे थे; कौन से दो, यह नहीं लिखा। तेलंगाना की कमी, विज्ञप्ति के अनुसार, तिपहिया, व्यावसायिक वाहन और ट्रैक्टर तक सीमित है।

स्रोतफ़ाडा की विज्ञप्ति, अगस्त 2026 के वाहन खुदरा आँकड़े और ईंधनवार तालिका, 7 सितंबर 2026, फ़ाडा की विज्ञप्ति, जुलाई 2026 के वाहन खुदरा आँकड़े, 6 अगस्त 2026, फ़ाडा की विज्ञप्ति, साई गिरिधर का 38वें अध्यक्ष के रूप में कार्यभार, 1 सितंबर 2026, डेक्कन क्रॉनिकल में पीटीआई की रिपोर्ट, ईंधन-हिस्से की साल-दर-साल तुलना, 7 सितंबर 2026, हंस इंडिया, फ़ाडा के आँकड़ों का सार, 8 सितंबर 2026, द ट्रिब्यून में एएनआई की रिपोर्ट, गिरिधर के बयान और 14 राज्यों में बारिश की कमी, 7 सितंबर 2026, ओडिशा पोस्ट में पीटीआई की रिपोर्ट, श्रेणीवार पिछले साल के आँकड़े, 7 सितंबर 2026, ऑटोपंडित्ज़, अगस्त 2025 की दूसरी श्रृंखला और कंपनीवार ईंधन-विश्लेषण, सितंबर 2026, खेतीगाड़ी, अगस्त 2026 की ट्रैक्टर खुदरा रिपोर्ट, 7 सितंबर 2026

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