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अगस्त की थोक महँगाई 9.92 फ़ीसदी है और खुदरा 4.82, क्योंकि एक सूचकांक बॉटलिंग प्लांट पर क़ीमत नापता है और दूसरा पेट्रोल पंप पर

सोमवार, 14 सितंबर को भारत ने अगस्त 2026 के दो महँगाई आँकड़े जारी किए। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग का थोक मूल्य सूचकांक 110.8 पर है और उसकी सालाना दर 9.92 फ़ीसदी, जो जुलाई में 9.78 थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 108.74 पर है और उसकी दर 4.82 फ़ीसदी, जो जुलाई में 4.45 थी। एक ही महीने के ये दो आँकड़े आपस में टकराते नहीं हैं। दोनों क़ीमत को दो अलग जगहों पर पकड़ते हैं, और उन दो जगहों के बीच जो कुछ जुड़ता है वह एक सूचकांक के अंदर है और दूसरे के बाहर।

महाराष्ट्र में भारत पेट्रोलियम के एक खुदरा आउटलेट का रोशन दाम-पट्ट, जिस पर पेट्रोल 106.05 और डीज़ल 92.60 रुपये प्रति लीटर लिखा है, अप्रैल 2024 की तस्वीर। खुदरा सूचकांक ईंधन की क़ीमत इसी बिंदु पर उठाता है
तस्वीर: Ganesh Dhamodkar, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 4.0

दिल्ली के किसी भी पेट्रोल पंप पर 15 अगस्त 2026 को पेट्रोल 102.12 रुपये लीटर था। ठीक एक साल पहले, 15 अगस्त 2025 को, वही पेट्रोल 94.77 रुपये का था। बारह महीने में 7.35 रुपये की बढ़ोतरी, यानी 7.76 फ़ीसदी। यह आँकड़ा पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ की उस दैनिक तालिका से निकलता है जो चारों महानगरों की क़ीमत 16 जून 2017 से रोज़ दर्ज करती आ रही है।

उसी अगस्त के लिए सरकार की एक दूसरी विज्ञप्ति कहती है कि खनिज तेल 38.48 फ़ीसदी महँगे हुए।

दोनों आँकड़े सही हैं, और दोनों सरकार के अपने हैं। पहला उस क़ीमत का है जो आप पंप पर चुकाते हैं। दूसरा उस क़ीमत का जो तेल कंपनी के डिपो से माल निकलते वक़्त दर्ज होती है, टैक्स लगने से पहले। इन दो जगहों के बीच जो कुछ क़ीमत में जुड़ता है, वह एक सूचकांक के भीतर है और दूसरे के बाहर। सोमवार, 14 सितंबर को जारी हुए अगस्त के दो महँगाई आँकड़ों का पूरा फ़ासला इसी तरह के फ़र्क़ों से बना है।

दो विज्ञप्तियाँ, एक ही अगस्त

थोक वाली विज्ञप्ति दोपहर 12 बजे खुली। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के आर्थिक सलाहकार कार्यालय ने बताया कि अगस्त 2026 में सभी वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक 110.8 रहा, जो जुलाई में 110.0 था, और सालाना थोक महँगाई 9.92 फ़ीसदी, जो जुलाई में 9.78 फ़ीसदी थी। यह अनंतिम अनुमान है और 84.4 फ़ीसदी भारित प्रतिक्रिया दर पर बना है। उसी विज्ञप्ति में जून का अंतिम आँकड़ा भी है, जो 110.2 से संशोधित होकर 110.3 हो गया और जिसकी महँगाई दर 9.87 से बढ़कर 9.97 फ़ीसदी पढ़ी गई।

खुदरा वाली विज्ञप्ति शाम 4 बजे आई। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बताया कि अगस्त 2026 में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 108.74 रहा, जुलाई में 107.95 था, और सालाना खुदरा महँगाई 4.82 फ़ीसदी, जो जुलाई में 4.45 फ़ीसदी थी। ग्रामीण दर 5.23 और शहरी 4.31। अगस्त में ग्रामीण और शहरी, दोनों बाज़ारों में प्रतिक्रिया दर 100 फ़ीसदी रही।

9.92 को 4.82 से भाग दीजिए तो 2.06 आता है। दोनों सूचकांकों के आधार वर्ष भी अलग हैं: थोक का 2022-23 और खुदरा का 2024। यह दो नापों का झगड़ा नहीं है। दो अलग चीज़ों की नाप है।

थोक की क़ीमत बॉटलिंग प्लांट पर नापी जाती है, खुदरा की पेट्रोल पंप पर

आर्थिक सलाहकार कार्यालय का पद्धति-नोट खंड 6 में साफ़ लिखता है कि थोक मूल्य सूचकांक के लिए आधारभूत क़ीमत (बेसिक प्राइस) ली जाती है। उसी पन्ने की पाद-टिप्पणी में आधारभूत क़ीमत की परिभाषा है: वह रक़म जो उत्पादक को एक इकाई के बदले मिलती है, उस इकाई के उत्पादन या बिक्री पर देय कर घटाकर और उस पर मिलने वाली सब्सिडी जोड़कर। कर का मतलब यहाँ जीएसटी है, और वह घटा दिया जाता है।

नोट यह भी बताता है कि किस चीज़ की क़ीमत कहाँ से उठाई जाती है। विनिर्मित उत्पादों की एक्स-फ़ैक्ट्री क़ीमत, यानी कारख़ाने के गेट पर। खनिजों की एक्स-माइन, यानी खदान के मुहाने पर। खनिज तेलों की एक्स-स्टोरेज या एक्स-बॉटलिंग, यानी भंडारण या बॉटलिंग संयंत्र से माल निकलते वक़्त। और कृषि जिंसों की मंडी क़ीमत। न्यूनतम समर्थन मूल्य को अलग रखा गया है, इस तर्क के साथ कि वह एक काल्पनिक क़ीमत है और उसका असर मंडी भाव में पहले से दिख जाता है।

तमिलनाडु में सेलम जंक्शन के पास पटरियों के उस पार पेट्रोलियम उत्पादों के दो भंडारण टैंक, मई 2023 की तस्वीर। यह वह सिरा है जहाँ से माल निकलते वक़्त थोक वाली क़ीमत दर्ज होती है
तस्वीर: Nkb 21, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक इसके उलट सिरे पर खड़ा है। वह उन क़ीमतों से बनता है जो घर वाक़ई चुकाते हैं। अगस्त की विज्ञप्ति के मुताबिक़ ये क़ीमतें 1,407 शहरी बाज़ारों और 1,465 गाँवों से जुटाई गईं, और फ़ील्ड स्टाफ़ ने इन्हें ख़ुद जाकर दर्ज किया। सीपीआई 2024 शृंखला के सरकारी प्रश्नोत्तर में प्रश्न 32 बताता है कि पेट्रोल, डीज़ल, एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की क़ीमतें पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ के खुदरा बिक्री मूल्य से ली जाती हैं। विज्ञप्ति के अंत में यह भी दर्ज है कि इन ईंधनों के लिए संदर्भ तिथि हर महीने की 15 तारीख़ है। इसी प्रश्नोत्तर में लिखा है कि 2024 शृंखला में क़ीमतें काग़ज़ के बजाय टैबलेट पर दर्ज होती हैं, और 25 लाख से ज़्यादा आबादी वाले बारह शहरों में बारह ऑनलाइन बाज़ार भी जोड़े गए हैं जिनकी क़ीमतें हफ़्तावार ली जाती हैं। हवाई किराया, मोबाइल के प्रीपेड तथा पोस्टपेड प्लान और ओटीटी की सदस्यता सीधे कंपनियों की वेबसाइट से उठाई जाती है, और रेल किराया तथा डाक शुल्क संबंधित मंत्रालयों के प्रशासनिक आँकड़ों से।

आर्थिक सलाहकार कार्यालय ने यही सवाल ख़ुद से पूछा है। उसके प्रश्नोत्तर का प्रश्न 31 है, थोक और खुदरा सूचकांकों में फ़ासला किससे बनता है, और उसका पहला जवाब यही है: थोक सूचकांक लेन-देन के पहले चरण पर थोक बिक्री की औसत क़ीमत का बदलाव दिखाता है, जबकि खुदरा सूचकांक उपभोक्ता के चुकाए भाव का। इन दोनों बिंदुओं के बीच जो कुछ जुड़ता है, उत्पाद शुल्क, राज्य का वैट, ढुलाई, डीलर का कमीशन, दुकान का मार्जिन और जीएसटी, वह सब खुदरा सूचकांक के अंदर है और थोक सूचकांक के बाहर।

पेट्रोल पर 11.90 रुपये का शुल्क, और 561 दिन तक न हिलने वाली क़ीमत

थोक सूचकांक में ईंधन और बिजली समूह का भार 14.11 फ़ीसदी है और अगस्त में उसकी सालाना दर 22.93 फ़ीसदी रही, जो जुलाई में 20.05 थी। इस समूह के भीतर खनिज तेल का भार 8.19 फ़ीसदी है और उसकी दर 38.48 फ़ीसदी। कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस 34.41 फ़ीसदी पर है।

अब वही बारह महीने पंप पर। दिल्ली में 15 अगस्त 2025 को पेट्रोल 94.77 रुपये लीटर था और 15 अगस्त 2026 को 102.12, यानी 7.76 फ़ीसदी ज़्यादा। डीज़ल 87.67 से 95.20 हुआ, यानी 8.59 फ़ीसदी। खुदरा सूचकांक में निजी वाहन चलाने के ख़र्च वाले समूह की दर 7.40 फ़ीसदी दर्ज है। एक ही जिंस, एक ही साल, और दो आँकड़े जिनमें पाँच गुने का अंतर है।

इसका एक हिस्सा पीपीएसी की अपनी शुल्क तालिका में लिखा है, जो 27 मार्च 2026 को चढ़ाई गई थी। पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क चार हिस्सों में लगता है: मूल उत्पाद शुल्क 1.40 रुपये प्रति लीटर, विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 3 रुपये, कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर 2.50 रुपये और सड़क तथा अवसंरचना उपकर 5 रुपये। जोड़ 11.90 रुपये प्रति लीटर। डीज़ल पर तीन हिस्से हैं, 1.80 रुपये, 4 रुपये और 2 रुपये, जोड़ 7.80 रुपये प्रति लीटर। चारों में से एक भी प्रतिशत में नहीं है। सब प्रति लीटर रुपये में तय हैं।

एक ऐसी रक़म, जो भाव बढ़ने पर भी उतनी ही रहती है, पंप की क़ीमत को नीचे से टेक देती है और ऊपर की फ़ीसदी को दबा देती है। रिफ़ाइनरी के बाहर की क़ीमत अगर 38 फ़ीसदी चढ़े और उसके ऊपर 11.90 रुपये की एक न हिलने वाली रक़म बैठी हो, तो पंप का भाव उतने फ़ीसदी नहीं चढ़ सकता।

दूसरा हिस्सा तारीख़ों में है। पीपीएसी की दैनिक तालिका दिखाती है कि दिल्ली में पेट्रोल 30 अक्टूबर 2024 को 94.77 रुपये पर पहुँचा और उसी भाव पर जमा रह गया। अगली बार वह 15 मई 2026 को हिला। बीच में पूरे 561 दिन हैं जिनमें क़ीमत एक पैसा नहीं बदली। फिर ग्यारह दिन में चार बार बदली: 15 मई को 97.77, 19 मई को 98.64, 23 मई को 99.51 और 25 मई को 102.12। डीज़ल उन्हीं चार तारीख़ों पर 87.67 से 90.67, 91.58, 92.49 और 95.20 हुआ। उसके बाद 14 सितंबर 2026 तक क़ीमत फिर स्थिर है।

बिजली पर दोनों सूचकांक उलटी दिशा में जा रहे हैं। थोक सूचकांक में बिजली समूह का भार 4.46 फ़ीसदी है और अगस्त में उसकी दर शून्य से 1.73 फ़ीसदी नीचे, यानी थोक बिजली सस्ती हुई। खुदरा सूचकांक में बिजली, गैस और अन्य ईंधन समूह का भार 5.36 फ़ीसदी है और उसकी दर 3.09 फ़ीसदी ऊपर। कोयला और लिग्नाइट थोक में 1.57 फ़ीसदी पर है।

थोक की पूरी कहानी एक गुणा से खुल जाती है। सभी वस्तुओं का सूचकांक अगस्त 2025 में 100.8 था और अगस्त 2026 में 110.8, यानी दस अंक ऊपर। ईंधन और बिजली समूह 88.1 से 108.3 पर गया, 20.2 अंक, और उसे 14.11 फ़ीसदी के भार से गुणा कीजिए तो 2.85 अंक निकलते हैं। दस में से 2.85, यानी थोक महँगाई का 28 फ़ीसदी से ज़्यादा अकेले इस एक समूह से आया। अकेले खनिज तेल का हिस्सा 2.70 अंक बैठता है, जो कुल बढ़त का क़रीब 27 फ़ीसदी है, और टोकरी में उसका भार सिर्फ़ 8.19 फ़ीसदी है।

थोक का भार उत्पादन से बनता है, खुदरा का घर के ख़र्च से

दोनों सूचकांकों में किसी चीज़ का भार तय करने का तरीक़ा अलग है, और यह अपने आप में एक बड़ा फ़ासला बनाता है।

थोक सूचकांक के भार 2022-23 के सकल उत्पादन मूल्य से बने हैं, जो राष्ट्रीय लेखा से आता है। पद्धति-नोट बताता है कि पुरानी 2011-12 शृंखला में भार शुद्ध व्यापारित मूल्य पर बने थे, यानी उत्पादन मूल्य में शुद्ध आयात जोड़कर, और उसे बदलने की वजह आईएमएफ़ का सुझाव था कि उत्पादक को मिलने वाली आधारभूत क़ीमत से मेल खाने वाली रक़म उत्पादन का मूल्य है। इसी फेरबदल में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस प्राथमिक वस्तुओं से निकलकर ईंधन और बिजली में चले गए, और ईंधन तथा बिजली का भार 13.15 से बढ़कर 14.11 हो गया। विनिर्मित उत्पादों का भार 64.23 से घटकर 63.13 रह गया।

खुदरा सूचकांक के भार घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 से बने हैं, यानी इस बात से कि परिवारों ने अपना पैसा किस चीज़ पर ख़र्च किया।

यह फ़र्क़ तालिकाओं में खुलकर दिखता है। थोक खाद्य सूचकांक का भार 24.99 फ़ीसदी है, जिसमें प्राथमिक वस्तुओं वाले खाद्य पदार्थ और विनिर्मित खाद्य उत्पाद दोनों हैं। खुदरा टोकरी में अकेले 'भोजन' समूह का भार 34.78 फ़ीसदी है। यह तुलना आर्थिक सलाहकार कार्यालय अपने प्रश्नोत्तर में ख़ुद करता है और वही 34.77 का आँकड़ा देता है। अगस्त में थोक खाद्य महँगाई 7.05 फ़ीसदी थी, जो जुलाई में 6.65 थी, और खुदरा खाद्य 5.95 फ़ीसदी, जो जुलाई में 5.52 थी। खाने पर भी थोक आगे है।

पंजाब की एक अनाज मंडी में अनाज की बोरियाँ ट्रक पर लादी जा रही हैं और फ़र्श पर बिखरा अनाज पड़ा है, अक्टूबर 2023 की तस्वीर। थोक टोकरी का खाद्य हिस्सा ऐसी ही मंडियों में बने भाव से बनता है
तस्वीर: Geet Arts, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

विनिर्मित उत्पाद थोक टोकरी का 63.13 फ़ीसदी हैं और अगस्त में उनकी दर 8.37 फ़ीसदी रही, जो जुलाई की 8.29 से ऊपर है। उसी गुणा से उनका हिस्सा 5.30 अंक बैठता है, यानी थोक महँगाई का 53 फ़ीसदी। इनमें रसायन 14.30 फ़ीसदी पर हैं, कपड़ा 12.63 पर, आधार धातुएँ 10.88 पर और खाद्य उत्पादों का विनिर्माण 9.65 पर। ये वे चीज़ें हैं जो कारख़ाने ख़रीदते हैं, घर नहीं।

दूसरी तरफ़ खुदरा टोकरी में एक ऐसी मद है जिसका थोक सूचकांक में कोई जोड़ नहीं। आवास के लिए चुकाया गया वास्तविक किराया अकेले 10.88 फ़ीसदी भार रखता है। मकान का किराया किसी कारख़ाने के गेट से नहीं निकलता, इसलिए थोक सूचकांक उसे नाप ही नहीं सकता।

खुदरा शृंखला ख़ुद नई है। सरकारी प्रश्नोत्तर के मुताबिक़ 2024 आधार की पिछड़ी शृंखला 12 फ़रवरी 2026 को प्रकाशित हुई, और 14 सितंबर की विज्ञप्ति का चौथा अनुलग्नक सूचकांक जनवरी 2025 से देता है पर महँगाई दर सिर्फ़ जनवरी 2026 से। उस स्तंभ में आठ आँकड़े हैं: 2.74, 3.21, 3.40, 3.48, 3.93, 4.38, 4.45 और 4.82। अगस्त का 4.82 इस शृंखला का अब तक का सबसे ऊँचा आँकड़ा है, और शृंखला आठ महीने पुरानी है। उससे पीछे का हिसाब पुरानी 2012 शृंखला से 0.5267 के जोड़-गुणांक से जोड़कर बनाया गया है। इसी नवीनीकरण में खाद्य और पेय मंडल का भार 42.62 से घटकर 36.75 फ़ीसदी रह गया, और यह गिरावट घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 के नतीजों से आई है।

सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक सात सेवाओं तक सीमित है

खुदरा टोकरी में 358 भारित मदें हैं। इनमें 308 वस्तुएँ हैं और 50 सेवाएँ। थोक टोकरी में सेवाओं की गिनती शून्य है। आर्थिक सलाहकार कार्यालय अपने प्रश्नोत्तर के प्रश्न 31 में इसे फ़ासले की चौथी वजह के रूप में गिनाता है और नाम लेकर लिखता है कि आवास, शिक्षा, चिकित्सा और मनोरंजन जैसी सेवाएँ थोक टोकरी का हिस्सा नहीं हैं।

अगस्त में यही सेवाएँ खुदरा आँकड़े के दोनों सिरों पर खड़ी थीं। रेस्तरां और आवास सेवाओं की दर 8.38 फ़ीसदी रही, जिसमें खाद्य एवं पेय परोसने की सेवाएँ अकेले 8.41 फ़ीसदी पर थीं। शिक्षा सेवाएँ 3.73 फ़ीसदी पर, यात्री परिवहन सेवाएँ 3.39 पर, सूचना एवं संचार सेवाएँ 1.76 पर और स्वास्थ्य पूरा मंडल 1.34 फ़ीसदी पर, जो अगस्त की सबसे धीमी दर है।

सेवाओं के लिए भारत के पास एक अलग सूचकांक है, और उसकी हालत बताती है कि यह खाई क्यों नहीं भरी। सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक तिमाही आता है, इसका आधार वर्ष भी 2022-23 है, और 24 अगस्त 2026 को इसकी 2026-27 की पहली तिमाही के अनंतिम अनुमान जारी हुए। इसमें सिर्फ़ सात सेवाएँ हैं: बैंकिंग, प्रतिभूति लेन-देन, बीमा, पेंशन कोष प्रबंधन, रेलवे, हवाई यात्री और दूरसंचार। विज्ञप्ति ख़ुद कहती है कि इन सेवाओं को कोई भार नहीं दिया गया है, क्योंकि ये पूरे सेवा क्षेत्र को नहीं ढकतीं। पहली तिमाही में हवाई यात्री सेवा का सूचकांक एक तिमाही में 106.9 से 126.4 पर पहुँच गया, दूरसंचार 112.2 पर ठहरा रहा और प्रतिभूति लेन-देन 89.9 पर, यानी आधार वर्ष से नीचे। बाक़ी सेवाएँ अगले चरण में आएँगी, और पद्धति-नोट के मुताबिक़ उसके लिए जीएसटीएन से जुटाए गए आँकड़ों का सहारा लिया जाएगा।

खुदरा सूचकांक में भी एक पूरा मंडल ग़ायब है। 14 सितंबर की विज्ञप्ति की मंडलवार तालिका 01 से शुरू होकर 11 पर पहुँचती है और फिर सीधे 13 पर चली जाती है। सीपीआई 2024 शृंखला कोइकॉप 2018 ढाँचे पर बनी है, जिसमें तेरह मंडल हैं, और मंडल 12 वित्तीय तथा बीमा सेवाओं का है। विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट में दर्ज है कि भारत की टोकरी में इस मंडल का कोई भार नहीं है, इसलिए मंडल 1 से 11 और मंडल 13 प्रकाशित होंगे, और एक पाद-टिप्पणी बताएगी कि मंडल 12 को छोड़ा गया है। विज्ञप्ति में वह पाद-टिप्पणी नहीं है।

गहने टोकरी का 1.39 फ़ीसदी हैं और अगस्त की खुदरा महँगाई का लगभग पंद्रहवाँ हिस्सा

खुदरा तालिका का सबसे ऊँचा आँकड़ा मंडल 13 का है, व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और विविध वस्तुएँ एवं सेवाएँ। इसका सूचकांक 124.92 है और दर 15.17 फ़ीसदी। टोकरी में इसका भार 5.04 फ़ीसदी है।

पर यह पूरा मंडल महँगा नहीं हुआ। इसके भीतर व्यक्तिगत देखभाल समूह की दर सिर्फ़ 2.17 फ़ीसदी है और अन्य सेवाओं की 1.84। जो चीज़ पूरे मंडल को खींच रही है वह 'अन्य व्यक्तिगत सामान' समूह है, जिसका सूचकांक 173.99 है और दर 44.56 फ़ीसदी। टोकरी में उसका भार 1.39 फ़ीसदी है।

विज्ञप्ति की मदवार तालिका में वह समूह खुल जाता है। चाँदी के आभूषण, भार 0.3127, दर 107.11 फ़ीसदी, जो जुलाई में 109.89 थी। सोने, हीरे और प्लैटिनम के आभूषण, भार 0.6230, दर 35.53 फ़ीसदी, जो जुलाई में 32.98 थी। अगस्त में सबसे ज़्यादा महँगी पाँच मदों की सूची में ये दोनों हैं।

चाँदी की एक जोड़ी पायल, दुकान के हरे धागे से बँधी हुई, तमिलनाडु के यरकौड में सितंबर 2024 में ली गई तस्वीर। टोकरी की जिस डेढ़ फ़ीसदी से भी कम जगह की बात यहाँ चल रही है, उसमें यही चीज़ें रखी हैं
तस्वीर: Yercaud-elango, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 4.0

गिनती इस तरह बैठती है। खुदरा सूचकांक अगस्त 2025 में 103.74 था और अगस्त 2026 में 108.74, यानी ठीक पाँच अंक की बढ़त, जो 4.82 फ़ीसदी बनती है। 'अन्य व्यक्तिगत सामान' समूह का सूचकांक 120.36 से 173.99 पर गया, 53.63 अंक, और उसे 1.39 फ़ीसदी के भार से गुणा कीजिए तो 0.75 अंक निकलते हैं। पाँच में से 0.75, यानी अगस्त की पूरी खुदरा महँगाई का लगभग पंद्रहवाँ हिस्सा टोकरी की उस डेढ़ फ़ीसदी से भी कम जगह से आया जिसमें गहने रखे हैं। तुलना के लिए, पूरे खाद्य और पेय मंडल का हिस्सा 2.17 अंक है, यानी 43 फ़ीसदी, और उसका भार 36.75 फ़ीसदी है।

रिज़र्व बैंक इस मद को अलग करके देखने लगा है। गवर्नर संजय मल्होत्रा के 5 अगस्त के वक्तव्य में दर्ज है कि मई और जून में खाद्य तथा ईंधन को छोड़कर मूल महँगाई 3.9 फ़ीसदी थी, और बहुमूल्य धातुओं को भी छोड़ दें तो वह 2.3 से 2.5 फ़ीसदी के बीच थी। समिति ने 2026-27 के लिए मूल महँगाई का अनुमान 4.3 फ़ीसदी रखा है, और गवर्नर ने कहा कि बहुमूल्य धातुओं को छोड़कर निकलने वाली दर चौथी तिमाही तक मूल महँगाई के बराबर आ जाएगी। थोक सूचकांक में गहने 'अन्य विनिर्माण' समूह में आते हैं, जिसका भार 2.04 फ़ीसदी है, सूचकांक 152.0 और दर 20.44 फ़ीसदी, और जुलाई में उसी समूह की दर 22.46 फ़ीसदी थी।

गाँव में 5.23 फ़ीसदी, शहर में 4.31, तेलंगाना में 6.27

खुदरा आँकड़े का ग्रामीण और शहरी बँटवारा अगस्त में 0.92 अंक चौड़ा था। गाँव में दर 5.23 फ़ीसदी, शहर में 4.31। जुलाई में यह फ़र्क़ 0.88 अंक का था, गाँव 4.84 और शहर 3.96। खाने पर भी यही ढलान है: ग्रामीण खाद्य महँगाई 6.13 फ़ीसदी, शहरी 5.64।

इसकी एक वजह टोकरी की बनावट है। विशेषज्ञ समूह की भार-तालिका के मुताबिक़ पूरे देश की टोकरी में ग्रामीण हिस्सा 55.42 फ़ीसदी है और शहरी 44.58। ग्रामीण टोकरी के भीतर खाद्य और पेय मंडल का भार 41.98 फ़ीसदी बैठता है और शहरी टोकरी के भीतर 30.25; सीपीआई 2024 के सरकारी प्रश्नोत्तर में भी यही दोनों आँकड़े दर्ज हैं। जिस घर के ख़र्च का दो-पाँचवाँ हिस्सा खाने पर जाता हो, उसके लिए खाने की क़ीमत ही महँगाई है।

अगस्त की सबसे ज़्यादा महँगी पाँच मदों में से तीन रसोई से आईं। प्याज 48.27 फ़ीसदी महँगा हुआ, जो जुलाई में 22.54 पर था। लहसुन 43.60 फ़ीसदी पर और अदरक 73.82 पर। दूसरी तरफ़ टमाटर 31.09 फ़ीसदी सस्ता हुआ और आलू 13.14 फ़ीसदी। मोटर कार और जीप 6.72 फ़ीसदी सस्ती हुईं, और वाहनों की ख़रीद वाले पूरे समूह की दर शून्य से 4.38 फ़ीसदी नीचे रही।

राज्यों की तालिका में तेलंगाना 6.27 फ़ीसदी पर सबसे ऊपर है, उसके बाद दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव 6.22 पर, तमिलनाडु 5.92 पर, पुदुचेरी 5.85 पर और मध्य प्रदेश 5.55 पर। सबसे नीचे मिज़ोरम 2.35 फ़ीसदी पर है, दिल्ली 2.61 पर और मेघालय 2.74 पर। एक ही देश के भीतर सबसे ऊँची और सबसे नीची दर में लगभग चार अंक का फ़ासला है।

ईंधन की क़ीमत यहाँ लौटकर आती है। रिज़र्व बैंक के गवर्नर ने 5 अगस्त को जून की बढ़त पर बोलते हुए कहा था कि उसमें खाद्य और ईंधन के साथ ईंधन से प्रेरित कुछ श्रेणियाँ भी थीं, और उन्होंने रेस्तरां सेवाओं का नाम लिया था। अगस्त में उन्हीं सेवाओं की दर 8.38 फ़ीसदी है। द हिंदू की 14 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक़ कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने उसी दिन कहा कि सीएमआईई के आँकड़ों में महँगाई-समायोजित मज़दूरी अप्रैल से लगातार गिर रही है और 5.7 फ़ीसदी गिर चुकी है। यह आँकड़ा सीएमआईई की अपनी सार्वजनिक शृंखला में नहीं मिला, इसलिए यहाँ वह अख़बार और तारीख़ के हवाले से एक राजनीतिक दावे के रूप में दर्ज है, प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं।

धारा 45ZA, चार फ़ीसदी का लक्ष्य और 5 अक्टूबर की बैठक

रिज़र्व बैंक के अपने मौद्रिक नीति ढाँचे वाले पन्ने पर लिखा है कि भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45ZA के तहत केंद्र सरकार, रिज़र्व बैंक से परामर्श करके, हर पाँच साल में महँगाई का लक्ष्य तय करती है, उसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के रूप में तय करती है, और राजपत्र में अधिसूचित करती है। उसी पन्ने पर यह भी दर्ज है कि 25 मार्च 2026 को हुई दूसरी समीक्षा में सरकार ने वही लक्ष्य बनाए रखा: 4 फ़ीसदी, ऊपरी सहनशीलता सीमा 6 फ़ीसदी और निचली 2 फ़ीसदी, 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक।

थोक मूल्य सूचकांक इस ढाँचे में कहीं नहीं है। आर्थिक सलाहकार कार्यालय अपने प्रश्नोत्तर के प्रश्न 32 में उसके उपयोग गिनाता है: जीडीपी और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के लिए अपस्फ़ीतिकारक, कारोबारी अनुबंधों में क़ीमत-सूचीकरण, और थोक स्तर पर महँगाई की वह चेतावनी जो खुदरा भाव तक पहुँचने से पहले मिल जाए। ब्याज दर तय करने की सूची में वह शामिल नहीं है।

मौद्रिक नीति समिति की बासठवीं बैठक 3 से 5 अगस्त तक चली। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर 5.25 फ़ीसदी पर बनाए रखी और तटस्थ रुख़ जारी रखा। समिति ने 2026-27 के लिए खुदरा महँगाई का अनुमान 5.0 फ़ीसदी रखा, दूसरी तिमाही के लिए 4.7, तीसरी के लिए 5.9 और चौथी के लिए 5.5। गवर्नर ने यह भी कहा कि जून में खुदरा दर 4.4 फ़ीसदी पर पहुँचने से पहले वह लगातार सोलह महीने लक्ष्य से नीचे रही थी।

जुलाई का 4.45 और अगस्त का 4.82 जोड़कर आधा कीजिए तो 4.64 आता है, जो दूसरी तिमाही के 4.7 के अनुमान से थोड़ा नीचे है। तिमाही सितंबर के आँकड़े से पूरी होगी। रिज़र्व बैंक के उसी पन्ने पर दर्ज है कि सरकार ने 'लक्ष्य हासिल करने में विफलता' की परिभाषा भी अधिसूचित की है, और वह लगातार तीन तिमाहियों तक औसत महँगाई का ऊपरी सहनशीलता सीमा से ऊपर रहना है, यानी 6 फ़ीसदी से ऊपर, और रिज़र्व बैंक का अपना सबसे ऊँचा तिमाही अनुमान 5.9 फ़ीसदी है।

तारीख़ों का क्रम यहाँ मायने रखता है। मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 5, 6 और 7 अक्टूबर को है। सितंबर का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 12 अक्टूबर को आएगा और सितंबर का थोक मूल्य सूचकांक 14 अक्टूबर को। समिति जिस महीने के आँकड़े पर बैठेगी, वह अगस्त ही होगा।

स्रोतवाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग, आर्थिक सलाहकार कार्यालय: अगस्त 2026 के लिए थोक मूल्य सूचकांक, आउटपुट पीपीआई और परीक्षण इनपुट पीपीआई के अनंतिम अनुमान, 14 सितंबर 2026, उन्नीस पन्ने, अनुलग्नक एक से चार तक भार-तालिका सहित, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय: अगस्त 2026 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (आधार वर्ष 2024=100) की प्रेस विज्ञप्ति, 14 सितंबर 2026 शाम 4 बजे, चार अनुलग्नक, पत्र सूचना कार्यालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, 14 सितंबर 2026: अगस्त 2026 के लिए थोक मूल्य सूचकांक (आधार वर्ष 2022-23) के अनंतिम अनुमान, आर्थिक सलाहकार कार्यालय: डब्ल्यूपीआई और पीपीआई की पद्धति पर संक्षिप्त नोट, चालीस पन्ने, खंड 3 कवरेज, खंड 4 भार-तालिका, खंड 6 क़ीमत का प्रकार, आर्थिक सलाहकार कार्यालय: थोक मूल्य सूचकांक पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न, बीस पन्ने, प्रश्न 31 थोक और खुदरा के अंतर पर और प्रश्न 32 डब्ल्यूपीआई के उपयोग पर, आर्थिक सलाहकार कार्यालय: सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक (आधार वर्ष 2022-23), वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अनंतिम अनुमान, 24 अगस्त 2026, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के व्यापक नवीनीकरण पर विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट, अनुलग्नक 5.3क मंडलवार भार और 5.3ख समूहवार भार, तथा मंडल 12 को छोड़ने की सिफ़ारिश, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय: सीपीआई 2024 शृंखला पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न, सात पन्ने, प्रश्न 32 ईंधन क़ीमतों के स्रोत पर और प्रश्न 39 भार-परिवर्तन पर, पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ: चार महानगरों में पेट्रोल और डीज़ल का दैनिक खुदरा बिक्री मूल्य, 16 जून 2017 से 14 सितंबर 2026 तक, पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ: प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क तालिका, 27 मार्च 2026 को चढ़ाई गई, भारतीय रिज़र्व बैंक: गवर्नर संजय मल्होत्रा का वक्तव्य, 5 अगस्त 2026, मुद्रास्फीति और वृद्धि के अनुमानों सहित, भारतीय रिज़र्व बैंक: मौद्रिक नीति समिति की 3 से 5 अगस्त 2026 की बासठवीं बैठक का कार्यवृत्त, आरबीआई अधिनियम की धारा 45ZL के तहत, 19 अगस्त 2026, भारतीय रिज़र्व बैंक: मौद्रिक नीति ढाँचा, धारा 45ZA के तहत 25 मार्च 2026 की दूसरी समीक्षा और 2026-31 के लक्ष्य का विवरण, द हिंदू, 14 सितंबर 2026: थोक महँगाई पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया, और जयराम रमेश के हवाले से सीएमआईई के मज़दूरी आँकड़े का दावा, बिज़नेस स्टैंडर्ड, 14 सितंबर 2026: नई सीपीआई शृंखला में अब तक का सबसे ऊँचा खुदरा आँकड़ा, द इंडियन एक्सप्रेस, 14 सितंबर 2026: अगस्त के दोनों आँकड़े और अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक

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