इस्पात मंत्रालय की विज्ञप्ति सकारात्मक वृद्धि की है, और उसी में लिखा है कि भारत शुद्ध आयातक रहा
अप्रैल से अगस्त तक तैयार इस्पात का उत्पादन 3.8 फ़ीसदी बढ़ा। इसी अवधि में आयात मात्रा में 29.5 फ़ीसदी और रुपये में 38.3 फ़ीसदी बढ़ा।
इस्पात मंत्रालय की मासिक विज्ञप्ति का शीर्षक है कि अप्रैल से अगस्त 2026 तक भारत के इस्पात क्षेत्र में सकारात्मक वृद्धि की प्रवृत्ति जारी है।
उसी विज्ञप्ति में, आयात-निर्यात वाली तालिका के ठीक ऊपर, एक वाक्य है।
अप्रैल से अगस्त 2026 की अवधि में मात्रा के हिसाब से भारत तैयार इस्पात का शुद्ध आयातक रहा।
आँकड़े क्या हैं
पाँच महीनों में तैयार इस्पात का आयात 34.87 लाख टन रहा। पिछले साल इन्हीं महीनों में 26.93 लाख टन था। यानी 29.5 फ़ीसदी ज़्यादा।
निर्यात 29.86 लाख टन रहा, पिछले साल के 22.26 लाख टन के मुक़ाबले। यानी 34.1 फ़ीसदी ज़्यादा।
दोनों बढ़े हैं, पर आयात निर्यात से लगभग 5 लाख टन ऊपर रहा।
रुपये में फ़र्क़ और चौड़ा है। आयात पर 36,193.9 करोड़ रुपये गए और निर्यात से 23,646.6 करोड़ आए। यानी लगभग 12,547 करोड़ रुपये का अंतर, जो हमारी अपनी गणना है।
आयात का मूल्य 38.3 फ़ीसदी बढ़ा जबकि मात्रा 29.5 फ़ीसदी। इसका मतलब है कि जो इस्पात आ रहा है वह पहले से महँगा भी है।

उत्पादन का हाल
पाँच महीनों के आँकड़े ठीक दिखते हैं। क्रूड स्टील 1.8 फ़ीसदी बढ़ा, हॉट मेटल 1.9 फ़ीसदी, तैयार इस्पात 3.8 फ़ीसदी।
अकेले अगस्त का महीना अलग तस्वीर देता है।
क्रूड स्टील का उत्पादन अगस्त 2026 में 1.41 करोड़ टन रहा, और अगस्त 2025 में भी 1.41 करोड़ टन। वृद्धि 0.1 फ़ीसदी ऋणात्मक है।
हॉट मेटल 1.1 फ़ीसदी घटा। तैयार इस्पात सिर्फ़ 0.3 फ़ीसदी बढ़ा।
खपत उत्पादन से तेज़ चल रही है। पाँच महीनों में तैयार इस्पात की खपत 7.0 फ़ीसदी बढ़ी, जबकि उत्पादन 3.8 फ़ीसदी। यह अंतर वहीं जाता है जहाँ आयात वाली पंक्ति है।
उद्योग की शक्ल
विज्ञप्ति एक तालिका देती है जो पूरे उद्योग का ढाँचा दिखा देती है।
देश की सालाना क्रूड स्टील क्षमता 22.28 करोड़ टन है। इसमें शीर्ष सात उत्पादकों के पास 11.74 करोड़ टन है, यानी लगभग आधी। बाक़ी 10.54 करोड़ टन सैकड़ों छोटे और मझोले संयंत्रों में बँटी है।
शीर्ष सात हैं सेल, आरआईएनएल, एनएसएल, टाटा स्टील समूह, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन, जिंदल स्टेनलेस और जेएसपीएल, तथा जेएसडब्ल्यू समूह।
सार्वजनिक क्षेत्र का हिस्सा क्षमता में 13.9 फ़ीसदी है और तैयार इस्पात के उत्पादन में 13.5 फ़ीसदी। हॉट मेटल में यह 30 फ़ीसदी तक जाता है।
एक और बात इसी तालिका में छिपी है। शीर्ष सात हॉट मेटल का 3.72 करोड़ टन बनाते हैं और बाक़ी सारे उत्पादक मिलकर सिर्फ़ 28 लाख टन। यानी अयस्क से लोहा बनाने का काम लगभग पूरा का पूरा बड़े संयंत्रों में होता है। छोटे संयंत्र ज़्यादातर स्क्रैप और अधबने माल से काम चलाते हैं।
भाव, जो उलटी दिशा में चले
अब वह हिस्सा जो घर बनाने वाले और छोटे कारख़ाने वाले से जुड़ता है।
कच्चे माल के भाव गिरे हैं। एनएमडीसी का बैला लंप अयस्क जून में 5,700 रुपये प्रति टन था, अगस्त में 5,250 रह गया। फ़ाइन्स 4,850 से 4,500 पर आए। एमओआईएल का मैंगनीज़ अयस्क 19,505 से घटकर 17,603 हुआ, यानी एक महीने में 5 फ़ीसदी कम।
तैयार माल के भाव उस दिशा में नहीं गए।
सालभर में जीपी शीट 17.7 फ़ीसदी महँगी हुई, एचआर कॉइल 15.5 फ़ीसदी, सीआर कॉइल 13.3 फ़ीसदी।
और टीएमटी सरिया, जो मकान बनाने में लगता है, सिर्फ़ 5.8 फ़ीसदी। जुलाई में तो वह 56,698 रुपये प्रति टन तक गिर गया था और अगस्त में 58,002 पर लौटा।
तो एक ही उद्योग के भीतर दो अलग बाज़ार चल रहे हैं। चादर और कॉइल, जो कारख़ाने ख़रीदते हैं, तेज़ी से चढ़े। सरिया, जो घर ख़रीदता है, धीमे।
विज्ञप्ति के नोट में लिखा है कि ये भाव जीएसटी सहित हैं और कोलकाता, दिल्ली, मुंबई तथा चेन्नई के औसत हैं।
और जो तालिका आख़िर में है
विज्ञप्ति तीन बाहरी सूचकांक भी छापती है।
निफ़्टी मेटल इंडेक्स सालभर में 41.7 फ़ीसदी ऊपर है। बाल्टिक ड्राई इंडेक्स, जो समुद्री माल-भाड़े का पैमाना है, 47.5 फ़ीसदी ऊपर।
और विनिर्माण का पीएमआई 52.8 पर है, जो सालभर पहले से 11 फ़ीसदी नीचे है। जून में यह 54.2 था, जुलाई में 53.5, अगस्त में 52.8। लगातार तीन महीने गिरावट।
पचास से ऊपर रहना विस्तार माना जाता है, इसलिए यह अब भी विस्तार में है। पर दिशा नीचे की है।
एक बात दर्ज कर देनी चाहिए। ये आँकड़े संयुक्त संयंत्र समिति के अनंतिम आँकड़े हैं, और विज्ञप्ति ख़ुद उन्हें अनंतिम कहती है। आगे इनमें बदलाव हो सकता है।
स्रोतइस्पात मंत्रालय, विज्ञप्ति, अप्रैल-अगस्त 2026, संयुक्त संयंत्र समिति के अनंतिम आँकड़े, अगस्त 2026