विषय
जीडीपी
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समझिए
बजट के हर सौ रुपये में ब्याज का हिस्सा बीस है या छब्बीस, दोनों आंकड़े एक ही दस्तावेज़ में छपे हैं
बजट के सार 2026-2027 के पहले पन्ने की तालिका से ब्याज भुगतान 2026-27 के बजट अनुमान में कुल ख़र्च का 26.3 फ़ीसदी बैठता है। उसी दस्तावेज़ के तीसरे पन्ने के चार्ट में यही रक़म 20 लिखी है। फ़र्क़ राज्यों का हिस्सा जोड़ने-घटाने का है, और दस्तावेज़ ख़ुद यह अपनी टिप्पणी में बताता है।
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पैसा
एक जापानी एजेंसी ने भारत को 'A-' दिया है; सुर्ख़ी कहती है 35 साल बाद, वही लेख कहता है 1988 के बाद, और 1988 से 2026 अड़तीस साल होते हैं
जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने 2 सितंबर को भारत की रेटिंग BBB+ से A- की, बिना माँगे और बिना फ़ीस के। तीन बड़ी एजेंसियाँ, एसऐंडपी, मूडीज़ और फ़िच, भारत को अब भी 'कचरा' दर्जे से एक या दो पायदान ऊपर रखती हैं। रेटिंग नापती क्या है, चौथी एजेंसी ऊपर क्यों गई, और पिछली 'A' असल में कब गई थी: दस्तावेज़ों से गिनती।
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पैसा
जीडीपी पर जो सबसे बड़ा आरोप लगा, वह दो अलग शृंखलाओं की तुलना पर टिका था
पूर्व वित्त सचिव ने कहा कि असली वृद्धि 2.6 फ़ीसदी है, 7.8 नहीं। जिन दो संख्याओं से उन्होंने यह निकाला, वे दो अलग आधार वर्षों की हैं। पर उनका एक दूसरा सवाल अब भी खुला है।
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दुनिया सरकार की विज्ञप्ति एक ही वाक्य में भारत की जीडीपी 4 ट्रिलियन और 20 ट्रिलियन डॉलर बताती है पीयूष गोयल ने मुंबई में बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर बात की। विज्ञप्ति में दोनों आँकड़ों को पीपीपी कहा गया है, जबकि वे दो अलग पैमाने हैं।
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पैसा इस्पात मंत्रालय की विज्ञप्ति सकारात्मक वृद्धि की है, और उसी में लिखा है कि भारत शुद्ध आयातक रहा अप्रैल से अगस्त तक तैयार इस्पात का उत्पादन 3.8 फ़ीसदी बढ़ा। इसी अवधि में आयात मात्रा में 29.5 फ़ीसदी और रुपये में 38.3 फ़ीसदी बढ़ा।
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समझिए मंत्रालय ने बताया कि वही तिमाही चार बार अलग-अलग छपी है, और हमारा एक हिसाब ग़लत निकला सांख्यिकी मंत्रालय ने जीडीपी अनुमानों पर अतिरिक्त जानकारी जारी की है। उसमें अप्रैल-जून 2025 की नॉमिनल जीडीपी के चारों आँकड़े एक जगह हैं। उसी जवाब से हमारे 1 सितंबर वाले लेख की एक गणना ग़लत साबित होती है।
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पैसा रेटिंग बढ़ाने वाली चार एजेंसियों की सूची सरकार ने ख़ुद दी है, और उनमें दो जापानी हैं जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की रेटिंग बीबीबी+ से बढ़ाकर ए− कर दी। वित्त मंत्रालय की विज्ञप्ति पिछले एक साल के उन्नयन गिनाती है, और उस सूची में मूडीज़ और फ़िच नहीं हैं।
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समझिए इस बार वृद्धि 7.8 फ़ीसदी है, और पिछले साल इसी तिमाही के लिए भी यही आँकड़ा छपा था सांख्यिकी मंत्रालय की आज की विज्ञप्ति में लिखा है कि पिछले साल की पहली तिमाही 6.9 फ़ीसदी बढ़ी थी। नवंबर 2025 की विज्ञप्ति में उसी तिमाही के लिए 7.8 दर्ज है। बीच में आधार वर्ष बदल गया।
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पैसा औद्योगिक उत्पादन 6.7 फ़ीसदी बढ़ा, पर यह आँकड़ा अभी बदलेगा सुर्ख़ियों में इसे सुस्ती कहा जा रहा है। तुलना जिस जून के आँकड़े से हो रही है, वह ख़ुद 7.3 से बदलकर 8.8 फ़ीसदी हो चुका है।