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रेटिंग बढ़ाने वाली चार एजेंसियों की सूची सरकार ने ख़ुद दी है, और उनमें दो जापानी हैं

जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की रेटिंग बीबीबी+ से बढ़ाकर ए− कर दी। वित्त मंत्रालय की विज्ञप्ति पिछले एक साल के उन्नयन गिनाती है, और उस सूची में मूडीज़ और फ़िच नहीं हैं।

रेटिंग बढ़ाने वाली चार एजेंसियों की सूची सरकार ने ख़ुद दी है, और उनमें दो जापानी हैं

जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग एक पायदान बढ़ा दी है। वह बीबीबी+ से ए− हो गई है और आउटलुक स्थिर रखा गया है।

एजेंसी ने भारत की कंट्री सीलिंग भी एक पायदान बढ़ाकर 'ए' कर दी है। कंट्री सीलिंग वह ऊपरी सीमा होती है जिससे ऊपर उस देश की कंपनियों को आमतौर पर रेटिंग नहीं मिलती, इसलिए उसका बढ़ना कंपनियों के लिए विदेश से सस्ता क़र्ज़ जुटाना आसान करता है।

वित्त मंत्रालय ने इसका स्वागत किया है।

सूची, जो विज्ञप्ति ने ख़ुद दी

विज्ञप्ति के आख़िरी हिस्से में पिछले एक साल के उन्नयन गिनाए गए हैं।

मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस ने मई 2025 में रेटिंग बढ़ाई। एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स ने अगस्त 2025 में। रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इंफ़ॉर्मेशन, जापान ने सितंबर 2025 में। और अब जेसीआर ने।

चार नाम हैं, और उनमें दो जापानी एजेंसियाँ हैं।

मूडीज़ और फ़िच इस सूची में नहीं हैं। तीन बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों में से एक, एस एंड पी, सूची में है।

इससे यह नहीं निकलता कि मूडीज़ या फ़िच ने कुछ किया या नहीं किया। हमने उनकी अपनी कार्रवाई नहीं जाँची। जो निकलता है वह इतना है कि सरकार की अपनी सूची में वे नहीं हैं।

जो जेसीआर ने गिनाया

एजेंसी के हवाले से विज्ञप्ति कहती है कि मज़बूत निजी उपभोग और सार्वजनिक निवेश से अर्थव्यवस्था में ऊँची विकास दर बनी हुई है।

राजकोषीय पक्ष पर उसका कहना है कि केंद्र का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2025 में 4.7 फ़ीसदी से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 4.4 फ़ीसदी रहा, जबकि पूँजीगत व्यय ऊँचा बना रहा।

वित्तीय व्यवस्था पर उसने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, सरकार के पूँजी निवेश और रिज़र्व बैंक की निगरानी का ज़िक्र किया है। बाहरी पक्ष पर सेवाओं के अधिशेष से नियंत्रित चालू खाता घाटा, और अल्पकालिक विदेशी क़र्ज़ से कहीं ज़्यादा विदेशी मुद्रा भंडार।

एक आँकड़ा जो दूसरे दस्तावेज़ से मेल नहीं खाता

विज्ञप्ति में लिखा है कि वित्त वर्ष 2026 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8 फ़ीसदी पर मज़बूत बनी रही, और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भी 7.8 फ़ीसदी दर्ज हुई।

सांख्यिकी मंत्रालय के 5 जून 2026 वाले प्रेस नोट में उस पूरे साल की वास्तविक वृद्धि 7.7 फ़ीसदी दर्ज है।

फ़र्क़ एक दहाई प्रतिशत अंक का है, और दोनों सरकारी दस्तावेज़ हैं।

यह गोल करने से आया हो सकता है, या जेसीआर के अपने शब्द हो सकते हैं जिन्हें मंत्रालय दोहरा रहा है। हमने न जेसीआर का मूल बयान देखा है और न इस विज्ञप्ति का अंग्रेज़ी पाठ, इसलिए इससे आगे कुछ नहीं कहा जा रहा।

इतना ज़रूर है कि 7.8 वही संख्या है जो इस हफ़्ते दो अलग वजहों से चर्चा में रही, और जिसके बारे में सांख्यिकी मंत्रालय को मंगलवार को अलग से सफ़ाई देनी पड़ी।

स्रोतवित्त मंत्रालय, विज्ञप्ति, एमओएसपीआई, प्रेस नोट, अनंतिम अनुमान 2025-26

रोज़ सुबह 7 बजे, बीते दिन का अंक — एक मेल।