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प्याज़ की दो रेलगाड़ियाँ और तीस ट्रक चले, और अब तक 669 टन बिका है

उपभोक्ता मामले विभाग की विज्ञप्ति दोनों संख्याएँ साथ छापती है। हिलाया गया माल लगभग 2,290 टन है, बिका हुआ 669 टन, और उसमें भी एक-तिहाई मंडी के भाव पर थोक में गया।

प्याज़ की दो रेलगाड़ियाँ और तीस ट्रक चले, और अब तक 669 टन बिका है

नासिक से चली दो रेलगाड़ियों को कांदा एक्सप्रेस नाम दिया गया है।

पहली 27 अगस्त की देर रात दिल्ली पहुँची, 450 मीट्रिक टन प्याज़ लेकर। उसमें से 140 टन वाराणसी, लखनऊ, चंडीगढ़ और अमृतसर भेजा गया, बाक़ी 310 टन दिल्ली और उसके आसपास रहा।

दूसरी 31 अगस्त को चेन्नई पहुँची, 840 टन लेकर। तमिलनाडु सरकार उसे राशन दुकानों से बाँटने की योजना बना रही है, प्रति कार्ड एक किलो।

इनके अलावा लगभग 1,000 टन सड़क से भेजा जा रहा है, तीस से ज़्यादा ट्रकों में, उन्नीस शहरों तक।

जोड़ लें तो लगभग 2,290 टन।

और बिका कितना

उसी विज्ञप्ति में, कुछ पैराग्राफ़ नीचे, एक और संख्या है।

अब तक लगभग 669 मीट्रिक टन प्याज़ बिका है।

उसमें 223 टन ई-नैम पोर्टल और उस जैसे ऑनलाइन मंचों से थोक में गया, और विज्ञप्ति साफ़ लिखती है कि वह मौजूदा मंडी क़ीमतों पर गया। बाक़ी 446 टन खुदरा केंद्रों से बिका।

दोनों जोड़ने पर ठीक 669 बनते हैं।

2,290 बनाम 669टन में, भेजा गया प्याज़ और अब तक बिका प्याज़

इसे पढ़ने का सही तरीक़ा

एक बात पहले साफ़ कर देनी चाहिए। दूसरी रेलगाड़ी 31 अगस्त को चेन्नई पहुँची और यह विज्ञप्ति 1 सितंबर की है। यानी वे 840 टन अभी बँटे ही नहीं होंगे। इससे यह नहीं निकलता कि माल पड़ा हुआ है।

जो निकलता है वह इतना है कि विज्ञप्ति दोनों संख्याएँ एक ही काग़ज़ पर छापती है और उनके बीच का फ़ासला ख़ुद नहीं समझाती।

दूसरी बात उस 223 टन की है। वह थोक में, मंडी के चालू भाव पर गया। यानी वह हिस्सा उपभोक्ता तक सस्ता प्याज़ पहुँचाने वाला रास्ता नहीं था। जो रास्ता उसके लिए बना है, खुदरा केंद्र, उससे 446 टन गया।

हमारी अपनी गणना में यह हिलाए गए कुल माल का लगभग पाँचवाँ हिस्सा है।

दुकान पर भाव

सरकारी आउटलेट पर प्याज़ ₹35 प्रति किलो के भाव से बेचा जा रहा है। ये आउटलेट एनसीसीएफ, नेफ़ेड और केंद्रीय भंडार के हैं, और कुछ मोबाइल वैन भी हैं।

यह बाज़ार का भाव नहीं है, सरकारी दुकान का तय भाव है। दोनों एक चीज़ नहीं होते।

हमने 29 अगस्त के अंक में दर्ज किया था कि प्याज़ का अखिल भारतीय खुदरा भाव ₹48.50 प्रति किलो था। वह उस तारीख़ का आँकड़ा है। आज बाज़ार में क्या भाव चल रहा है, यह हम इस लेख के लिए जाँच नहीं सके, इसलिए वह नहीं लिखा जा रहा।

विज्ञप्ति कहती है कि वाराणसी, अमृतसर, दिल्ली और आसपास के बाज़ारों में बिक्री शुरू होने के अगले दिन से ही क़ीमतें गिरीं। कितनी गिरीं, यह नहीं लिखा।

किसानों वाला आँकड़ा

विज्ञप्ति में एक और संख्या है। लगभग 3,400 किसानों को सीधे ₹210 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।

हमारी अपनी गणना में यह प्रति किसान लगभग ₹6.18 लाख बैठता है।

यह औसत है, और औसत बँटवारा छिपा लेता है। कुछ किसानों को इससे बहुत ज़्यादा मिला होगा और बहुतों को बहुत कम। विज्ञप्ति यह भी नहीं बताती कि यह रक़म कितने समय की ख़रीद की है, न यह कि बफ़र स्टॉक कुल कितना बड़ा है।

इसलिए इससे प्रति किलो ख़रीद भाव निकालना मुमकिन नहीं है, और हम वह नहीं निकाल रहे।

जो अगली बार देखना है

बफ़र स्टॉक का काम दो तरफ़ चलता है। किसान से ख़रीदते वक़्त भाव गिरने से रोकना, और उपभोक्ता तक छोड़ते वक़्त भाव चढ़ने से रोकना।

पहली तरफ़ का आँकड़ा विज्ञप्ति में है, ₹210 करोड़ और 3,400 किसान।

दूसरी तरफ़ का आँकड़ा 446 टन है।

स्रोतउपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, विज्ञप्ति, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, चीनी पर विज्ञप्ति

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