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कांग्रेस
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मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का रास्ता जज वाला, बाक़ी आयुक्तों का बिल्कुल अलग
6 अप्रैल 2026 को लोकसभा और राज्यसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के दो नोटिस बिना कोई वजह बताए ठुकरा दिए थे, आज़ाद भारत में किसी बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ यह पहला औपचारिक प्रयास था। पाँच महीने बाद कांग्रेस और वाम दल एक नई कोशिश की तैयारी में हैं। संविधान का अनुच्छेद 324(5) मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी सुरक्षा देता है, पर उसी अनुच्छेद का अगला हिस्सा बाक़ी निर्वाचन आयुक्तों को महज़ मुख्य आयुक्त की सिफ़ारिश पर हटाने लायक़ बना देता है। यह लेख उसी प्रक्रिया, उसकी शर्तों और अब तक के इतिहास को खोलता है।
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देश
राजस्थान के 10,235 पार्षदों में 2,273 निर्दलीय, 143 निकायों में अध्यक्ष का फ़ैसला पार्षदों के गुप्त मतदान पर
राज्य निर्वाचन आयोग की अपनी तालिका में 309 नगरीय निकायों के 10,244 वार्डों में से 10,235 का परिणाम दर्ज है: भाजपा 4,179, कांग्रेस 3,613, निर्दलीय 2,273, आरएलपी 63, आप 42, माकपा 38, बसपा 19 और भारत आदिवासी पार्टी 8। गिनती के दिन छपी संख्याएँ इनसे छोटी हैं, क्योंकि वे गिनती चलते हुए की हैं। अध्यक्ष और महापौर सोमवार, 21 सितंबर को इन्हीं पार्षदों के गुप्त मतदान से चुने जाएँगे।
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देश
कांग्रेस ने सत्रावसान की 29 दिन की देरी को रिकॉर्ड कहा, राज्यसभा के अपने दस्तावेज़ में 71 दिन का अंतराल दर्ज है
मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ था। शुक्रवार को उस स्थगन के 29 दिन पूरे हो गए और सत्रावसान का आदेश अब भी नहीं निकला। राज्यसभा सचिवालय की अपनी पुस्तक में इससे लंबी चार देरियाँ दर्ज हैं, और चारों में सदन दोबारा बुलाया गया था।
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देश
कर्नाटक ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के दो अंतरे तय किए, जबकि 2026 के क़ानून में कहीं नहीं लिखा कि राष्ट्रगीत कितने अंतरों का है
8 सितंबर को मंत्रिमंडल के फ़ैसले के बाद कर्नाटक ने आदेश निकाला कि राज्य के कार्यक्रमों में पहले दो अंतरे गाए जाएँगे। केंद्र का 6 फ़रवरी 2026 का निर्देश छहों अंतरे माँगता है। अगस्त में बना नया क़ानून 'राष्ट्रगीत' शब्द का इस्तेमाल करता है, पर उसे परिभाषित कहीं नहीं करता।
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तेलंगाना विधानसभा ने बीआरएस के 22 विधायक निलंबित किए, सूची में एक नाम उस सदस्य का भी जो सदन में मौजूद नहीं था
9 सितंबर को विधायी कार्य मंत्री डी. श्रीधर बाबू का प्रस्ताव पारित होते ही मुख्य विपक्षी दल की पूरी उपस्थित बेंच सत्र के बाक़ी हिस्से के लिए बाहर हो गई। सत्र 11 सितंबर को ख़त्म हो रहा है, यानी निलंबन तीन बैठकों का है। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में महाराष्ट्र के 12 विधायकों के मामले में तय किया था कि सत्र से आगे का निलंबन अवैध है, और सत्र तक का निलंबन सदन के अधिकार में आता है।
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मानसून सत्र पच्चीस दिन से बंद नहीं हुआ, और इसका मतलब यह है कि अध्यक्ष कभी भी सदन बुला सकते हैं
कांग्रेस कह रही है सत्र इसलिए खुला रखा गया है ताकि परिसीमन विधेयक दोबारा लाया जा सके। सत्रावसान आम तौर पर तीन-चार दिन में होता है। 2015 में यह अट्ठाईस दिन बाद हुआ था।