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राजस्थान के 10,235 पार्षदों में 2,273 निर्दलीय, 143 निकायों में अध्यक्ष का फ़ैसला पार्षदों के गुप्त मतदान पर

राज्य निर्वाचन आयोग की अपनी तालिका में 309 नगरीय निकायों के 10,244 वार्डों में से 10,235 का परिणाम दर्ज है: भाजपा 4,179, कांग्रेस 3,613, निर्दलीय 2,273, आरएलपी 63, आप 42, माकपा 38, बसपा 19 और भारत आदिवासी पार्टी 8। गिनती के दिन छपी संख्याएँ इनसे छोटी हैं, क्योंकि वे गिनती चलते हुए की हैं। अध्यक्ष और महापौर सोमवार, 21 सितंबर को इन्हीं पार्षदों के गुप्त मतदान से चुने जाएँगे।

मतगणना केंद्र में क्रम से लगी मेज़ें और हर मेज़ पर चिपका उसका नंबर, यह तस्वीर 16 मई 2014 को नई दिल्ली की है; राजस्थान के 309 निकायों के 10,244 वार्डों की गिनती सोमवार सुबह इसी तरह मेज़-दर-मेज़ हुई
तस्वीर: Election Commission of India, विकिमीडिया कॉमन्स GODL-India

राजस्थान के 309 नगरीय निकायों की गिनती सोमवार, 14 सितंबर को सुबह हुई। राज्य निर्वाचन आयोग की अपनी परिणाम-तालिका में अब 10,235 पार्षद दर्ज हैं, और उनमें 2,273 किसी दल के नहीं हैं। यह हर साढ़े चार में से एक हुआ।

उसी तालिका से एक दूसरा आँकड़ा निकलता है, जो अख़बारों में नहीं छपा। 309 में से 143 निकाय ऐसे हैं जहाँ किसी एक दल के पार्षद आधे से ज़्यादा नहीं हैं। इन सबका अध्यक्ष या महापौर सोमवार, 21 सितंबर को चुना जाएगा, और चुनने वाले यही नए पार्षद हैं। मतदान गुप्त होगा, मतपत्र छह महीने बाद नष्ट कर दिए जाएँगे, और जो जीतेगा उसके ख़िलाफ़ दो साल तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकेगा।

अध्यक्ष पद के नामांकन बुधवार, 16 सितंबर को बंद हो रहे हैं।

आयोग की अपनी सूची: 10,244 वार्ड और नौ ख़ाली ख़ाने

राज्य निर्वाचन आयोग अपनी वेबसाइट पर निकायवार दलवार परिणाम रखता है। 15 सितंबर की तड़के 12:05 बजे उस पर 309 पंक्तियाँ थीं और नीचे एक कुल योग: कुल वार्ड 10,244, भाजपा 4,179, कांग्रेस 3,613, निर्दलीय 2,273, आरएलपी 63, आप 42, माकपा 38, बसपा 19 और भारत आदिवासी पार्टी 8। एनपीपी का ख़ाना शून्य है।

इन सबको जोड़ने पर 10,235 आता है, यानी नौ वार्ड ऐसे हैं जिनके सामने कोई दल दर्ज नहीं है। वे नौ चार निकायों में हैं: जयपुर नगर निगम में चार, कोटा नगर निगम में तीन, जोधपुर नगर निगम में एक और कोटा ज़िले की सुकेत नगर पालिका में एक। ईटीवी भारत के गिनती-दिवस के लाइव ब्लॉग के मुताबिक़ जयपुर में ईवीएम की गड़बड़ी के चलते सात वार्डों के नतीजे रोके गए थे और शाम तक उनमें से तीन घोषित हुए। बाक़ी चार आयोग की तालिका में अब भी ख़ाली हैं।

आयोग का ही एक और काग़ज़ इससे एक अंक अलग बैठता है। 19 अगस्त को जारी प्रेस-नोट, क्रमांक एफ.4(1)(1)/नपा/रानिआ/2026/6722, कहता है कि 2025 में 2011 की जनगणना के आधार पर हुए परिसीमन के बाद 309 निकायों में वार्डों की संख्या 10,245 है, जो 2019 के 196 निकायों के 7,500 वार्डों से 36.6 फ़ीसदी ज़्यादा है। परिणाम-तालिका और उम्मीदवार-तालिका, दोनों 10,244 कहती हैं। एक वार्ड का यह फ़र्क़ आयोग के दस्तावेज़ों के भीतर का है और इस रिपोर्ट में हल नहीं हुआ।

गिनती के दिन छपी संख्याएँ इनसे छोटी हैं, और होनी ही थीं। इंडिया न्यूज़ ने 14 सितंबर को दोपहर 3:11 बजे जो हिसाब दिया, वह दोपहर एक बजे तक का था: भाजपा 3,181 वार्ड, कांग्रेस 2,875 और निर्दलीय 1,656, कुल 7,712 वार्ड घोषित। सुबह और दोपहर के बीच चली सूचियाँ इससे भी कम थीं। हर ऐसा आँकड़ा उसी घड़ी तक का जोड़ है, पूरा नतीजा नहीं।

मतदान दो चरणों में हुआ था, बुधवार 9 सितंबर को 162 निकायों में और शुक्रवार 11 सितंबर को 147 में। आयोग निकायवार मतदान प्रतिशत छापता है, राज्य का एक जोड़ नहीं। उसकी सूची में सबसे ऊँचा आँकड़ा प्रतापगढ़ की अरनोद नगर पालिका का है, 91.98 फ़ीसदी, और सबसे नीचा सिरोही नगर परिषद का, 62.16।

38,813 उम्मीदवारों में 18,694 किसी दल के नहीं थे

आयोग दलवार और स्त्री-पुरुष उम्मीदवारों की गिनती भी रखता है। दोनों चरणों को जोड़ें तो 10,244 वार्डों के लिए 38,813 लोगों ने पर्चा भरकर मैदान में रहने तक का रास्ता तय किया। इनमें 14,408 महिलाएँ थीं, यानी 37.1 फ़ीसदी, और महिलाओं के लिए आरक्षित वार्ड 3,372 थे।

हर वार्ड पर औसतन 3.79 उम्मीदवार। 2019 में 49 निकायों के 2,105 वार्डों पर 7,942 उम्मीदवार थे, यानी 3.77 प्रति वार्ड। भीड़ उतनी ही है।

बदलाव भीड़ की बनावट में है। 38,813 में से 18,694 उम्मीदवार किसी दल के नहीं थे, यानी 48.2 फ़ीसदी। भाजपा ने 9,273 उम्मीदवार उतारे और कांग्रेस ने 9,007, यानी दोनों ने क़रीब एक-एक हज़ार वार्ड ऐसे छोड़े जहाँ उनका कोई उम्मीदवार नहीं था। आरएलपी के 947, आप के 311, बसपा के 298, माकपा के 185 और भारत आदिवासी पार्टी के 98 उम्मीदवार थे।

जीत की दर इसके ठीक उलट चलती है। भाजपा के हर 100 उम्मीदवारों में 45 जीते, कांग्रेस के 40, और निर्दलीयों के 12। माकपा की दर सबसे ऊँची है, 20.5 फ़ीसदी, पर वह 185 उम्मीदवारों पर है।

अब वोट। आयोग की दलवार मत-तालिका में सभी दलों और नोटा के मिलाकर 1,06,16,434 वोट दर्ज हैं। इसमें भाजपा के 37,35,567, कांग्रेस के 36,35,952 और निर्दलीयों के 29,06,787 हैं। हिस्सेदारी में यह 35.19, 34.25 और 27.38 फ़ीसदी बैठता है। प्रेस-नोट के मुताबिक़ इन 309 निकायों की मतदाता सूची में 1,44,03,853 नाम थे, तो गिने गए वोट उसका 73.71 फ़ीसदी हुए।

सीटों में हिस्सेदारी इससे अलग है: भाजपा 40.83 फ़ीसदी, कांग्रेस 35.30 और निर्दलीय 22.21। भाजपा को हर सीट 894 वोट में पड़ी, कांग्रेस को 1,006 में, निर्दलीयों को 1,279 में।

आयोग की पिछली दो सांख्यिकीय रिपोर्टें इसी अनुपात का पुराना नाप देती हैं। नवंबर 2019 में 49 निकायों के 2,105 वार्डों पर निर्दलीयों को 27.72 फ़ीसदी वोट मिले थे और 385 सीटें, यानी 18.29 फ़ीसदी। जनवरी 2021 में, जब एक नगर निगम, नौ परिषद और 81 पालिकाओं के 3,060 वार्डों पर चुनाव हुआ, निर्दलीयों को 654 सीटें मिलीं, यानी 21.37 फ़ीसदी; भाजपा को 1,149 और कांग्रेस को 1,194।

यह सिलसिला 18.29, फिर 21.37, फिर 22.21 का है। हर बार निकायों का समूह अलग था, इसलिए संख्याएँ नहीं, हिस्से ही तुलना लायक़ हैं। निर्दलीयों को वोट 2019 जितने ही मिले, 27 फ़ीसदी के आसपास। सीटें उससे ज़्यादा मिलीं।

143 निकायों में किसी एक दल के पार्षद आधे से कम हैं

आयोग की तालिका में हर निकाय की अपनी पंक्ति है, इसलिए यह गिना जा सकता है कि कहाँ किसके पास कितना है। 309 में से 145 निकायों में भाजपा अकेली सबसे बड़ी है, 100 में कांग्रेस, और 45 में निर्दलीय। आप एक निकाय में सबसे बड़ी है और माकपा एक में। बचे सत्रह निकायों में सबसे ऊपर बराबरी है: दस में भाजपा और कांग्रेस, चार में कांग्रेस और निर्दलीय, तीन में भाजपा और निर्दलीय। इन सत्रह में सबसे बड़ा जोधपुर नगर निगम है, जहाँ 100 वार्डों में भाजपा 44, कांग्रेस 44, निर्दलीय 10 और आरएलपी 1 है।

बहुमत की गिनती अलग तस्वीर देती है। 143 निकाय ऐसे हैं जहाँ किसी एक दल या ख़ाने के पास आधे से ज़्यादा पार्षद नहीं हैं। यह कुल का 46 फ़ीसदी है। दस नगर निगमों में से चार, 47 नगर परिषदों में से 22 और 252 नगर पालिकाओं में से 117।

नगर निगम के सभा कक्ष में कुर्सी के सामने अर्धवृत्त में लगी पार्षदों की बेंचें, यह तस्वीर 3 अक्तूबर 2006 को मदुरै नगर निगम में ली गई थी; राजस्थान के 143 निकायों में ऐसे ही कमरों की आधी बेंचें भी किसी एक दल के पास नहीं हैं
तस्वीर: எஸ்ஸார், विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

इन 143 में से 85 ऐसे हैं जहाँ सबसे बड़ा ख़ाना बहुमत से सिर्फ़ एक या दो सीट दूर रह गया। 141 में कम से कम एक निर्दलीय पार्षद है। निर्दलीयों के कुल 2,273 पार्षदों में से 1,124, यानी लगभग आधे, इन्हीं 143 निकायों में बैठे हैं। बीस निकाय ऐसे हैं जो बहुमत के बिना हैं और जिनमें निर्दलीय ही सबसे बड़ा ख़ाना हैं।

इसका उलटा भी सूची में है। 32 निकाय ऐसे हैं जहाँ अकेले निर्दलीय आधे से ऊपर हैं, और वहाँ किसी सौदेबाज़ी की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। सबसे बड़ा भरतपुर नगर निगम है, जहाँ 65 वार्डों में से 36 निर्दलीयों के हैं और बहुमत का आँकड़ा 33 है। बाक़ी इकतीस में करौली ज़िले की हिंडौन सिटी नगर परिषद है, जहाँ 60 में से 39; डीडवाना-कुचामन की मकराना नगर परिषद, 60 में से 36; हनुमानगढ़ नगर परिषद, 60 में से 34; और खैरथल-तिजारा की तिजारा नगर परिषद, जहाँ 35 में से 31।

दूसरी तरफ़ 21 निकाय ऐसे भी हैं जहाँ एक भी निर्दलीय नहीं जीता।

भरतपुर और डीग की गिनती

निर्दलीयों के 2,273 पार्षद राज्य भर में बराबर नहीं बँटे हैं। आयोग की तालिका को ज़िलेवार जोड़ने पर एक पट्टी साफ़ दिखती है।

भरतपुर ज़िले के सात निकायों के 235 वार्डों में से 152 निर्दलीयों के हैं, यानी 64.7 फ़ीसदी। भाजपा को वहाँ 66, कांग्रेस को 15, बसपा और आरएलपी को एक-एक। पंजाब केसरी ने 14 सितंबर को ज़िले का यही ब्योरा छापा था, और आयोग की तालिका से वह अंक-दर-अंक मिलता है। पड़ोस के डीग ज़िले में 180 वार्डों में से 110 निर्दलीयों के हैं। इसके बाद हनुमानगढ़ 45.9 फ़ीसदी पर, करौली 42.4 पर और खैरथल-तिजारा 42.2 पर।

भरतपुर की एक बाज़ारू सड़क, दुकानें, ऊँट गाड़ी और साइकिल रिक्शे, यह तस्वीर 20 मई 2009 की है; इसी शहर के नगर निगम के 65 में से 36 वार्ड किसी दल के नहीं हैं
तस्वीर: Diego Tirira from Quito, Ecuador, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 2.0

दूसरा सिरा दक्षिण में है। डूंगरपुर के 75 वार्डों में से एक निर्दलीय, उदयपुर के 190 में से चार, झालावाड़ के 240 में से नौ, सलूंबर के 25 में से एक और प्रतापगढ़ के 105 में से पाँच।

अलग-अलग निकायों में यह और तीखा है। झुंझुनूं की पिलानी नगर पालिका के 35 में से 30 वार्ड निर्दलीयों के हैं; वहाँ निर्दलीयों को 16,231 वोट मिले और भाजपा को 1,331। तिजारा नगर परिषद में 35 में से 31, वोट 15,569 बनाम भाजपा के 3,078। भरतपुर की भुसावर नगर पालिका में 25 में से 22 और वैर नगर पालिका में 25 में से 20। गंगानगर की सादुलशहर नगर पालिका में 25 में से 22।

भरतपुर नगर निगम में निर्दलीयों को 87,253 वोट मिले, भाजपा को 37,509 और कांग्रेस को 26,048। यह वह निकाय है जहाँ बिना किसी दल के लड़े लोग मिलकर अकेले बहुमत के पार हैं।

दस नगर निगमों का हिसाब

आयोग के प्रेस-नोट के मुताबिक़ इस बार 309 निकायों में 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाएँ हैं। 2019 की रिपोर्ट में राज्य के कुल 196 निकायों की गिनती 10 निगम, 34 परिषद और 152 पालिका थी। निगमों की संख्या वही है, बाक़ी सब बढ़ा है।

दस निगमों के 855 वार्डों में निर्दलीयों की हिस्सेदारी 15.4 फ़ीसदी है, जो 47 नगर परिषदों के 24.3 और 252 नगर पालिकाओं के 22.3 से कम है।

आयोग की तालिका में निगम इस तरह बैठते हैं। जयपुर: 150 वार्ड, भाजपा 78, कांग्रेस 53, निर्दलीय 15। कोटा: 100 में भाजपा 55, कांग्रेस 38, निर्दलीय 4। उदयपुर: 80 में भाजपा 53, कांग्रेस 23, निर्दलीय 3, माकपा 1। भीलवाड़ा: 70 में भाजपा 45, निर्दलीय 15, कांग्रेस 10। बीकानेर: 80 में कांग्रेस 42, भाजपा 27, निर्दलीय 10, आरएलपी 1। अजमेर: 80 में कांग्रेस 37, भाजपा 32, निर्दलीय 11। अलवर: 65 में भाजपा 28, कांग्रेस 23, निर्दलीय 13, बसपा 1। पाली: 65 में कांग्रेस 29, भाजपा 21, निर्दलीय 15। जोधपुर: 100 में भाजपा और कांग्रेस 44-44। भरतपुर: 65 में निर्दलीय 36।

इनमें से चार निगमों में किसी के पास आधे से ज़्यादा नहीं हैं: अजमेर, अलवर, जोधपुर और पाली।

जयपुर का आँकड़ा अलग से पढ़ने लायक़ है। वहाँ कांग्रेस को 5,65,848 वोट मिले और भाजपा को 5,52,713, यानी कांग्रेस 13,135 वोट आगे रही। सीटें भाजपा को 78 मिलीं और कांग्रेस को 53। जोधपुर में भी कांग्रेस के वोट ज़्यादा हैं, 2,14,542 बनाम 2,00,260, और सीटें बराबर हैं।

निगमों में मतदान भी कम हुआ। आयोग की निकायवार सूची में जयपुर 63.55 फ़ीसदी पर है, भीलवाड़ा 63.84 पर, अजमेर 65.48 पर और अलवर 65.72 पर। जयपुर नगर निगम में नोटा को 27,099 वोट मिले, जो वहाँ आप, बसपा, माकपा और आरएलपी के कुल वोट से ज़्यादा हैं।

अध्यक्ष कैसे चुना जाता है: नियम 78 और 21 सितंबर की बैठक

राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 43(1) कहती है कि हर नगर निगम में महापौर, हर नगर परिषद में सभापति और हर नगर पालिका में अध्यक्ष होगा, जो "विहित रीति से" चुना जाएगा। अधिनियम ख़ुद यह नहीं बताता कि चुनने वाला कौन है। वह काम नियमों पर छोड़ा गया है।

वह रीति राजस्थान नगरपालिका (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 78 में है, और यह नियम 16 अक्टूबर 2019 की अधिसूचना से बदला गया था। उससे नौ महीने पहले, 31 जनवरी 2019 की अधिसूचना से, अध्यक्ष के चुनाव वाला पूरा अध्याय बदला जा चुका था। एक ही बरस में दो बार। उसी 31 जनवरी वाली अधिसूचना ने नियम 90 से 94 तक हटा दिए, जिनमें पहले उपाध्यक्ष, सभापति, उपसभापति, महापौर और उपमहापौर के लिए अलग-अलग प्रक्रियाएँ थीं; आयोग की पुस्तिका में उनकी जगह अब ख़ाली कोष्ठक में सिर्फ़ शीर्षक छपे हैं।

नियम 78(1) का वाक्य छोटा है: नगरपालिका के अध्यक्ष का पद "नगरपालिका के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने गए व्यक्ति" से भरा जाएगा। साथ लगा स्पष्टीकरण कहता है कि "निर्वाचित सदस्य" का मतलब वार्ड से चुना गया सदस्य है।

इसके बाद वाला उप-नियम अकसर नहीं पढ़ा जाता। 78(2) कहता है कि अध्यक्ष बनने के लिए वही योग्यता चाहिए जो पार्षद बनने के लिए है, और 78(3) कहता है कि निर्वाचित सदस्य "भी" चुना जा सकता है। यानी अध्यक्ष का पार्षद होना ज़रूरी नहीं है। जो पार्षद बनने योग्य हो, वह अध्यक्ष बन सकता है, चाहे उसने चुनाव लड़ा ही न हो। उपाध्यक्ष के लिए यह छूट नहीं है: नियम 79(1) उसे "निर्वाचित सदस्यों में से" चुना गया सदस्य कहता है। नियम 78(4) सांसद, विधायक और पंचायती राज संस्था के सदस्य या अध्यक्ष को बाहर रखता है।

पर्चा तब तक वैध नहीं होता जब तक कोई निर्वाचित सदस्य उस पर प्रस्तावक के तौर पर दस्तख़त न कर दे। ज़मानत राशि पद के हिसाब से है: महापौर के लिए 30,000 रुपये, और महिला तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के उम्मीदवार के लिए 15,000; सभापति के लिए 20,000 और 10,000; अध्यक्ष के लिए 10,000 और 5,000।

तारीख़ें आयोग के 19 अगस्त वाले प्रेस-नोट में हैं और वे नियम 78(6) से निकलती हैं। लोक सूचना मंगलवार, 15 सितंबर। नामांकन की अंतिम तारीख़ बुधवार, 16 सितंबर। संवीक्षा गुरुवार, 17 सितंबर। नाम वापसी शुक्रवार, 18 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक, और चुनाव चिह्न उसके तुरंत बाद। मतदान सोमवार, 21 सितंबर को सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक, और गिनती उसी वक़्त। उपाध्यक्ष अगले दिन, मंगलवार 22 सितंबर को, उसी बैठक-प्रारूप में चुने जाएँगे।

यह मतदान नगरपालिका के दफ़्तर में एक बैठक में होता है। नियम 78(6)(xi) के मुताबिक़ हर उम्मीदवार उस बैठक में बैठ सकता है, चाहे वह पार्षद हो या न हो, पर वोट सिर्फ़ निर्वाचित सदस्य डालेंगे। रिटर्निंग अधिकारी मतदान का समय बढ़ा सकता है, और अगर पद पर बैठे सारे सदस्य वोट डाल चुके हों तो वक़्त से पहले बंद भी कर सकता है। नियम 96 इस बैठक को नगरपालिका की पहली बैठक क़रार देता है।

मतदान गुप्त है। नियम 85(2) कहता है कि दो या ज़्यादा उम्मीदवार हों तो चुनाव गुप्त मतपत्र से होगा, और नियम 86(1) रिटर्निंग अधिकारी पर मतपत्र की गोपनीयता का इंतज़ाम करने की ज़िम्मेदारी डालता है। मतपत्र पर पहचान का कोई निशान या दस्तख़त हो तो वह अवैध हो जाता है। नियम 89(2) के मुताबिक़ ये मतपत्र ज़िला नगरपालिका निर्वाचन अधिकारी के पास छह महीने रखे जाते हैं और फिर, अदालत का आदेश न हो तो, नष्ट कर दिए जाते हैं; बीच में कोई उन्हें खोल नहीं सकता।

गिनती शुरू होने से पहले मेज़ पर छाँटे जा रहे काग़ज़ के मतपत्रों के लिफ़ाफ़े, यह तस्वीर 16 मई 2014 को चेन्नई की है; 21 सितंबर की बैठक का वोट मशीन पर नहीं, ऐसे ही काग़ज़ पर पड़ेगा और छह महीने बाद नष्ट कर दिया जाएगा
तस्वीर: Election Commission of India, विकिमीडिया कॉमन्स GODL-India

नियम 87(5) का वाक्य भी छोटा है: सबसे ज़्यादा वोट पाने वाला निर्वाचित घोषित होगा। आधे से ज़्यादा की शर्त कहीं नहीं है। 44 पार्षदों वाला दल 100 सदस्यों की बैठक में भी अध्यक्ष बनवा सकता है, बशर्ते बाक़ी वोट बँट जाएँ। बराबरी हो जाए तो नियम 87(4) रिटर्निंग अधिकारी से पर्ची निकलवाता है, और जिस पर पर्ची गिरे उसे एक अतिरिक्त वोट मिला मान लिया जाता है।

जो 21 सितंबर को जीतेगा, उसे हटाना दो साल तक नहीं हो सकता। अधिनियम की धारा 53, जो 2017 के दूसरे संशोधन अधिनियम से 18 मई 2017 को बदली गई थी, कहती है कि अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के पद सँभालने के दो साल के भीतर अविश्वास का नोटिस नहीं दिया जा सकता, और प्रस्ताव एक बार गिर जाए तो अगले दो साल तक दोबारा नहीं आ सकता।

पार्षद के लिए दल बदलने पर कोई सज़ा इस क़ानून में नहीं है। अधिनियम की धारा 39 में सदस्य को हटाने के जो आधार गिनाए गए हैं, उनमें दल बदलना नहीं है। संविधान की दसवीं अनुसूची, जो दल-बदल पर लागू होती है, "सदन" के सदस्य की बात करती है, और नगरपालिका सदन नहीं है। पार्षद किसी के चुनाव चिह्न पर जीता हो, 21 सितंबर की गुप्त पर्ची पर उसका वोट उसका अपना है।

तीन वार्ड जो ख़बर बने, और आयोग की सूची की हद

गिनती के दिन तीन वार्ड ख़बर बन गए, तीनों बहुत छोटी संख्याओं की वजह से।

भरतपुर ज़िले की नदबई नगर पालिका के वार्ड 6 में निर्दलीय जगदीश प्रसाद को 151 वोट मिले और भाजपा के रामशरण को 150। पंजाब केसरी ने 14 सितंबर को आईएएनएस के हवाले से यह अंतर छापा। आयोग की तालिका में नदबई की पूरी पंक्ति यह है: 35 वार्ड, निर्दलीय 25, भाजपा 10, और निर्दलीयों के 15,409 वोट बनाम भाजपा के 3,990।

डीडवाना-कुचामन ज़िले की परबतसर नगर पालिका के वार्ड 13 में भाजपा के कैलाशचंद को कुल एक वोट मिला। द सूत्र और प्रभासाक्षी, दोनों ने 14 सितंबर को लिखा कि वह वार्ड कांग्रेस की हिना ख़ानम ने 376 वोट लेकर जीता, और कैलाशचंद को मिला वह इकलौता वोट उनका अपना नहीं था, क्योंकि वे उस वार्ड के मतदाता ही नहीं थे। आयोग की तालिका में परबतसर की पंक्ति में 25 वार्ड हैं, भाजपा 13 और कांग्रेस 12, और निर्दलीयों का ख़ाना ख़ाली है।

बालोतरा ज़िले की सिंधरी नगर पालिका के वार्ड 3 में आरएलपी के ओमप्रकाश को शून्य वोट दर्ज हुए। आज तक ने 14 सितंबर की रात 10:06 बजे लिखा कि वह वार्ड कांग्रेस के भंवरा राम ने 133 वोट लेकर जीता और भाजपा के खेमा राम को 93 मिले। ओमप्रकाश ने उसी रिपोर्ट में कहा कि उन्होंने ख़ुद को वोट दिया था और उनके घर के दस वोट थे, और उन्होंने गिनती पर सवाल उठाया। यह उनका कहना है। आयोग की तालिका में सिंधरी की पंक्ति इतनी बताती है कि 20 वार्डों में भाजपा 12, कांग्रेस 5 और निर्दलीय 3, और आरएलपी को पूरी पालिका में 41 वोट मिले।

आयोग सार्वजनिक रूप से निकाय से नीचे नहीं जाता। दलवार सीटें, दलवार वोट, निकायवार मतदान प्रतिशत, उम्मीदवारों की गिनती, सब निकाय के स्तर तक हैं। वार्ड-दर-वार्ड कौन कितने वोट से जीता, यह उसकी इन तालिकाओं में नहीं है, इसलिए ऊपर के तीनों वार्डों के आँकड़े अख़बारों के हैं और आयोग के काग़ज़ से मिलाए नहीं जा सके।

आप के 42 पार्षद, माकपा के 38

छोटे दलों की पूरी कमाई कुछ शहरों में सिमटी हुई है।

आम आदमी पार्टी के 42 पार्षदों में 31 अकेले बारां नगर परिषद के हैं। वहाँ 60 वार्ड हैं और बहुमत का आँकड़ा 31, यानी वह परिषद आप के पास है। वोटों में आप को 24,392 मिले, कांग्रेस को 23,308 और भाजपा को 16,854। बाक़ी 11 पार्षद झालावाड़ ज़िले से हैं: झालरापाटन में पाँच, पिड़ावा में पाँच और झालावाड़ नगर परिषद में एक।

माकपा के 38 में 29 बीकानेर ज़िले की नोखा नगर पालिका के हैं, जहाँ 45 वार्ड हैं। नोखा में माकपा को 18,765 वोट मिले और भाजपा को 15,080। बाक़ी नौ पार्षद नौ अलग-अलग निकायों में एक-एक हैं, जिनमें उदयपुर नगर निगम और हनुमानगढ़ नगर परिषद भी हैं।

आरएलपी के 63 पार्षदों में सबसे बड़ा जमावड़ा नागौर ज़िले की बासनी नगर पालिका में है, 40 में से 13, और मुंडवा में 25 में से 7। बसपा के 19 पार्षदों में सबसे ज़्यादा नौ धौलपुर ज़िले में हैं: धौलपुर नगर परिषद में तीन, सैंपऊ में तीन, बाड़ी में दो और राजाखेड़ा में एक। भारत आदिवासी पार्टी के आठ पार्षद डूंगरपुर ज़िले की सागवाड़ा नगर पालिका में चार, डूंगरपुर नगर परिषद में तीन और सलूंबर नगर परिषद में एक हैं।

नोटा को पूरे राज्य में 1,09,523 वोट मिले, यानी 1.03 फ़ीसदी। आरएलपी को 1,00,277 मिले। इन नौ दलों में से सात के वोट नोटा से कम हैं।

वह अयोग्यता जो मार्च में हटी और पुस्तिका में छपी रह गई

इस चुनाव में पर्चा भरने वालों का दायरा एक क़ानूनी बदलाव से चौड़ा हुआ था, जिसका ज़िक्र नतीजों की रिपोर्टिंग में नहीं आया।

राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2026 को राज्यपाल की मंज़ूरी 24 मार्च 2026 को मिली और वह 2026 का अधिनियम संख्यांक 7 है। राजस्थान राजपत्र विशेषांक में यह 27 मार्च 2026 को छपा, विधि विभाग की 25 मार्च की अधिसूचना संख्या प.2(11)विधि/2/2026 के साथ, और उसमें लिखा है कि यह तुरंत प्रवृत्त होगा।

इसने 2009 के अधिनियम की धारा 24 में से तीन चीज़ें हटा दीं: खंड (xvii), परंतुक का खंड (ङ) और स्पष्टीकरण। खंड (xvii) वह अयोग्यता थी जिसके तहत दो से ज़्यादा संतान वाला व्यक्ति पार्षद नहीं बन सकता था। खंड (ङ) कहता था कि 27 नवंबर 1995 को जितनी संतानें थीं, उतनी रहने तक अयोग्यता लागू नहीं होगी। स्पष्टीकरण एक प्रसव में जन्मे बच्चों को एक गिनता था, गोद दिए बच्चे को गिनती में रखता था, और पहले के प्रसव से जन्मे दिव्यांग बच्चे को नहीं गिनता था।

राज्य निर्वाचन आयोग ने यह बदलाव सभी ज़िला निर्वाचन अधिकारियों को 13 जुलाई 2026 को भेजा, पत्रांक एफ.1(1)(2)नपा/रानिआ/94/II/4789, मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव राजेश वर्मा के दस्तख़त से। उसमें एक लाइन है कि नगरीय निकायों के निर्वाचन के लिए संतान संबंधी प्रावधान हटा दिए गए हैं।

आयोग की वेबसाइट पर इसी चुनाव के लिए रखी निर्वाचन विधि की पुस्तिका में धारा 24 अब भी पुरानी शक्ल में छपी है, खंड (xvii), 27 नवंबर 1995 वाले परंतुक और स्पष्टीकरण समेत। पुस्तिका के प्राक्कथन पर तारीख़ की जगह ख़ाली छोड़ी गई है। उसी पुस्तिका के पहले पन्ने पर छपा अस्वीकरण पढ़ने वाले से कहता है कि किसी शंका में अधिनियम, नियम या अधिसूचना का मूल पाठ राजपत्र से देखा जाए।

इस बदलाव से कितने लोग पर्चा भर सके, यह किसी सरकारी काग़ज़ में दर्ज नहीं है, और इस रिपोर्ट में वह दावा नहीं किया गया है। दर्ज सिर्फ़ इतना है कि 38,813 उम्मीदवार मैदान में थे, उनमें 18,694 का कोई दल नहीं था, और उनमें से 2,273 अब पार्षद हैं जिनका वोट 21 सितंबर की बैठक में गिना जाएगा।

स्रोतराज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: नगरीय निकाय आम चुनाव सितंबर 2026 की दलवार सीट-तालिका, 309 निकायों की पंक्तिवार सूची और कुल योग (15 सितंबर 2026, तड़के 12:05 बजे पढ़ी गई), राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: नगरीय निकाय आम चुनाव सितंबर 2026 की दलवार मत-तालिका, नोटा सहित, राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: दोनों चरणों के दलवार और स्त्री-पुरुष उम्मीदवारों की संख्या, राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: निकायवार मतदान प्रतिशत, दोनों चरणों का अलग-अलग, राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान, प्रेस-नोट क्रमांक एफ.4(1)(1)/नपा/रानिआ/2026/6722, 19 अगस्त 2026: नगरीय निकाय आम चुनाव का पूरा कार्यक्रम, मतदाता, वार्ड और मतदान केंद्र, राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: नगरपालिका निर्वाचन विधि की पुस्तिका, 2026 का संस्करण, जिसमें राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 और राजस्थान नगरपालिका (निर्वाचन) नियम 1994 के नियम 78 से 96 तक हैं, राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान, पत्रांक एफ.1(1)(2)नपा/रानिआ/94/II/4789, 13 जुलाई 2026, संलग्न राजस्थान राजपत्र विशेषांक 27 मार्च 2026: राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2026, राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: नगरपालिका आम चुनाव 2019 की सांख्यिकीय रिपोर्ट, 49 निकाय और 2,105 वार्ड, 20 जनवरी 2020, राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान: 91 नगर निकाय आम चुनाव 2021 का प्रतिवेदन, एक नगर निगम, नौ परिषद और 81 पालिकाओं के 3,060 वार्ड, दलवार निर्वाचित उम्मीदवारों की तालिका, पंजाब केसरी, 14 सितंबर 2026, आईएएनएस के हवाले से: नदबई के वार्ड 6 में एक वोट का अंतर, पंजाब केसरी, 14 सितंबर 2026: भरतपुर ज़िले के 235 वार्डों का दलवार ब्योरा, द सूत्र, 14 सितंबर 2026: परबतसर नगर पालिका के वार्ड 13 का परिणाम, प्रभासाक्षी, 14 सितंबर 2026: परबतसर के वार्ड 13 में भाजपा उम्मीदवार को मिला एक वोट, आज तक, 14 सितंबर 2026, रात 10:06 बजे: बालोतरा की सिंधरी नगर पालिका के वार्ड 3 का परिणाम और उम्मीदवार का आरोप, ईटीवी भारत, 14 सितंबर 2026: गिनती के दिन का लाइव ब्लॉग, जिसमें जयपुर नगर निगम के रोके गए वार्डों और ईवीएम की गड़बड़ी का ज़िक्र है, इंडिया न्यूज़, 14 सितंबर 2026, दोपहर 3:11 बजे: दोपहर एक बजे तक की गिनती का दलवार हिसाब, 7,712 वार्ड घोषित

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