विषय
रेलवे
-
समझिए
रातभर की हर सौ यात्राओं में अड़तालीस अब तीर्थ और धार्मिक मक़सद से हैं, ग्यारह साल पहले यही मक़सद तीस दिन की खिड़की में गिना जाता था
बुधवार, 23 सितंबर की शाम 4 बजे राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण, जुलाई 2025 से जून 2026, का प्रेस नोट जारी किया। रातभर बाहर रहकर लौटने वाली हर सौ यात्राओं में अड़तालीस अब तीर्थ और धार्मिक मक़सद से हैं, हर मापे गए मक़सद में सबसे ज़्यादा। मगर 2014-15 के पिछले सर्वेक्षण में यही मक़सद व्यापार और सामाजिक यात्राओं के साथ तीस दिन की खिड़की में गिना गया था, छुट्टी और स्वास्थ्य वाले साल-भर के समूह में नहीं, इसलिए अड़तालीस फ़ीसदी की तुलना सीधे पुराने आँकड़े से नहीं हो सकती।
-
समझिए
कवच का एक किलोमीटर लखनऊ मंडल में 41.47 लाख का, मुरादाबाद में 23.88 लाख का, और दोनों विज्ञप्तियाँ वजह नहीं बतातीं
शनिवार, 19 सितंबर की दोपहर रेल मंत्रालय ने 53 मिनट में चार काम मंज़ूर किए, कुल 736.23 करोड़ रुपये। सबसे बड़ी रक़म उत्तर-पूर्व रेलवे के लखनऊ मंडल में कवच 4.0 की है: 607.7 रूट किलोमीटर पर 252 करोड़। अठारह दिन पहले उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद मंडल में वही संस्करण 712 रूट किलोमीटर पर 170 करोड़ में मंज़ूर हुआ था।
-
देश
दिल्ली में ब्रिक्स की यातायात पाबंदी चार अलग सलाहों में कुल बत्तीस घंटे चली
दिल्ली यातायात पुलिस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चार बार समय बाँधा: 8 सितंबर की रिहर्सल के लिए सवा दो घंटे, 11 सितंबर को साढ़े छह, 12 को साढ़े ग्यारह और 13 को पूरे बारह। चारों सलाहों में सड़कों और मोड़ों की गिनती एक ही छपी, और जो संख्या हर बार बदली वह घंटों की थी।
-
काम की बात
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने आरक्षित डिब्बे में हुई डकैती को सेवा में कमी माना और रेलवे पर 20,000 रुपये मुआवज़ा तय किया
28 अगस्त 2004 की रात अवध-असम एक्सप्रेस के स्लीपर डिब्बे एस-8 में हथियारबंद लोग घुसे थे। बाईस साल बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने तय किया कि रात में दरवाज़े बंद न रखना और डिब्बे में टीटीई या सुरक्षाकर्मी का न होना सेवा में कमी है। मुआवज़ा 20,000 रुपये, वह भी नुक़सान, मानसिक कष्ट और मुक़दमे के ख़र्च को मिलाकर। इसी सवाल पर सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश उलटी दिशा में है, और वह इस फ़ैसले में कहीं नहीं है।
-
देश
मंत्रिमंडल ने 20,804 करोड़ की आठ रेल परियोजनाएँ मंज़ूर कीं, पर मंज़ूर 35,966 किलोमीटर में से 12,769 ही चालू हुए हैं
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 9 सितंबर को आठ मिनट के अंतर पर दो विज्ञप्तियाँ जारी कीं: नौ राज्यों की आठ मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएँ, 1,196 किलोमीटर, 2029-30 की समयसीमा। रेल मंत्रालय के अपने संसदीय जवाबों में मंज़ूरी और चालू होने के बीच का फ़ासला दर्ज है। दक्षिण वाली विज्ञप्ति हर परियोजना की लंबाई छापती है, पूरब वाली एक भी नहीं। और कार्बन बचत को पेड़ों में बदलने का गुणा दोनों में एक जैसा नहीं है।
-
समझिए रेल मंत्री ने जो सुधारने को कहा, उसकी सूची पढ़िए तो पता चलता है कि अभी क्या-क्या ख़राब है सिग्नल की तकनीकी ख़ामियाँ, तय उम्र पार कर चुके ओएचई पुर्ज़े, कोच की बिजली की वायरिंग, और वे जगहें जहाँ पटरी के फ़ास्टनर लगे ही नहीं हैं। निर्देश की सूची अपने आप एक ख़राबी की सूची है।