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सरकार की विज्ञप्ति एक ही वाक्य में भारत की जीडीपी 4 ट्रिलियन और 20 ट्रिलियन डॉलर बताती है

पीयूष गोयल ने मुंबई में बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर बात की। विज्ञप्ति में दोनों आँकड़ों को पीपीपी कहा गया है, जबकि वे दो अलग पैमाने हैं।

सरकार की विज्ञप्ति एक ही वाक्य में भारत की जीडीपी 4 ट्रिलियन और 20 ट्रिलियन डॉलर बताती है

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को मुंबई में भारत-बेल्जियम की उच्चस्तरीय बातचीत को संबोधित किया। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे।

विषय भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला मुक्त व्यापार समझौता था।

उसी भाषण की एक पंक्ति विज्ञप्ति में यूँ छपी है: भारत पीपीपी के आधार पर 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है, और 20 ट्रिलियन डॉलर के जीडीपी के साथ पीपीपी के आधार पर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

एक ही वाक्य में दो अलग आँकड़े हैं और दोनों को एक ही नाम दिया गया है।

दोनों पैमाने अलग हैं

किसी देश की अर्थव्यवस्था नापने के दो तरीक़े चलते हैं।

पहला सीधा है। देश में जो कुछ बना और बिका, उसे रुपये में जोड़ो और उस दिन के भाव पर डॉलर में बदल दो। इसे मौजूदा क़ीमतों वाली जीडीपी कहते हैं।

दूसरा तरीक़ा पूछता है कि उतने पैसे से ख़रीदा कितना जा सकता है। दिल्ली में जो कटिंग चाय पाँच रुपये की है, वह न्यूयॉर्क में तीन डॉलर की है। डॉलर के भाव से बदलने पर भारत की कमाई छोटी दिखती है, पर उससे मिलने वाला सामान और सेवा उतनी छोटी नहीं होती।

इसी को ठीक करने के लिए क्रय शक्ति समता, यानी पीपीपी, का हिसाब बनता है।

दोनों संख्याएँ सही होती हैं। पर वे एक ही चीज़ नहीं होतीं, और उन्हें आपस में बदला नहीं जा सकता।

असल आँकड़े क्या हैं

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के डेटाबेस से इस साल के आँकड़े ये हैं।

पैमानाभारत, 2026दुनिया में नंबर
मौजूदा क़ीमतों पर जीडीपी4.15 ट्रिलियन डॉलरछठा
पीपीपी के आधार पर जीडीपी18.90 ट्रिलियन डॉलरतीसरा

मौजूदा क़ीमतों पर आगे अमेरिका 32.38, चीन 20.85, जर्मनी 5.45, जापान 4.38 और ब्रिटेन 4.26 ट्रिलियन डॉलर पर हैं।

पीपीपी पर आगे सिर्फ़ दो देश हैं, चीन 44.30 और अमेरिका 32.38 ट्रिलियन डॉलर पर।

तो 4 ट्रिलियन वाला आँकड़ा मौजूदा क़ीमतों का है और उसे पीपीपी कहना ग़लत है। तीसरे नंबर वाली बात पीपीपी पर सही है, पर वहाँ का आँकड़ा इस साल 18.90 ट्रिलियन है। 20 ट्रिलियन का आँकड़ा इसी अनुमान में 2027 में आता है।

इससे फ़र्क़ क्या पड़ता है

गोयल ने उसी भाषण में दोहराया कि 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है।

अब सवाल यह है कि किस पैमाने पर।

अगर 4.15 ट्रिलियन से चलें, तो इक्कीस साल में सात गुना होना है। यह बहुत बड़ा लक्ष्य है।

अगर 18.90 ट्रिलियन से चलें, तो 1.6 गुना होना है। मुद्रा कोष का अपना अनुमान भारत को 2027 में ही 20.58 ट्रिलियन पर दिखाता है, और उसी रफ़्तार पर 30 ट्रिलियन 2030 के दशक की शुरुआत में आ जाता है।

एक ही लक्ष्य, और पैमाना बदलते ही उसका मतलब बदल जाता है।

4.15 और 18.90एक ही देश, एक ही साल, दो पैमाने। दोनों आँकड़े मुद्रा कोष के हैं

समझौते के बारे में क्या कहा गया

गोयल ने कहा कि यह समझौता दो अरब लोगों को साथ लाता है और इसमें वैश्विक जीडीपी का एक-चौथाई और विश्व व्यापार का एक-तिहाई शामिल है।

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के सभी 27 देश इसके पक्ष में हैं, और पिछले एक दशक में यूरोपीय संघ के साथ भारत का व्यापार दोगुना होकर लगभग 140 अरब डॉलर तक पहुँच गया है।

बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने कहा कि 95 फ़ीसदी से ज़्यादा भारतीय और यूरोपीय वस्तुओं के निर्यात पर लागू शुल्क या तो हटाए जाएँगे या घटाए जाएँगे।

ये तीनों बयान वक्ताओं के हैं। समझौते का पाठ अभी सार्वजनिक नहीं है, इसलिए इनकी जाँच अभी नहीं की जा सकती।

बेल्जियम में एंटवर्प बंदरगाह के डोयरगांकडॉक पर लदान करता एक कंटेनर जहाज़
तस्वीर: आल्फ़ वान बीम, विकिमीडिया कॉमन्स CC0

और पचीस साल वाली बात

गोयल ने कहा कि इस समझौते पर बातचीत पूरी होने से पहले क़रीब 25 वर्षों तक काम हुआ।

रिकॉर्ड थोड़ा अलग है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की औपचारिक बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, 2013 में रुक गई, और 2022 में दोबारा शुरू हुई।

पचीस साल की गिनती 2000 के आसपास से चलती है, जब दोनों पक्षों के बीच शिखर सम्मेलनों का सिलसिला शुरू हुआ। वह रिश्ते की उम्र है, बातचीत की नहीं।

एंटवर्प का ज़िक्र क्यों आया

डी वेवर ने एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह को भारत और यूरोप के बीच की अहम कड़ी बताया, और गोयल ने उसे यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह कहा।

दोनों भाषणों में जिस एक चीज़ का नाम सबसे ज़्यादा आया, वह हीरा है। एंटवर्प, मुंबई और सूरत तीनों का ज़िक्र गोयल ने साथ किया, और प्रयोगशाला में बने हीरों पर मिलकर नए उत्पाद और डिज़ाइन बनाने की बात कही।

इसलिए इस समझौते में बेल्जियम की दिलचस्पी का एक हिस्सा सीधा है। बाक़ी हिस्सा, जिसमें सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन और रक्षा उत्पादन शामिल हैं, अभी बातचीत में है।

स्रोतवाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, विज्ञप्ति, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक डेटाबेस

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