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रूस के दूमा चुनाव में मतदान 56.66 फ़ीसदी रहा, यह आँकड़ा केंद्रीय चुनाव आयोग का है; रविवार रात तक 20.4 फ़ीसदी प्रोटोकॉल गिने गए थे

रविवार, 20 सितंबर को रूस में तीन दिन का मतदान ख़त्म हुआ और गिनती शुरू हुई। आयोग की अध्यक्ष एला पैम्फ़िलोवा ने आख़िरी केंद्र बंद होने पर प्रारंभिक मतदान प्रतिशत 56.66 बताया, जो लेंता डॉट आरयू के उसी रात के आँकड़े 56.57 से मेल नहीं खाता। भारत में पाँच मतदान केंद्र थे। दिल्ली वाला उसी सुबह रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने खोला।

नई दिल्ली के शांतिपथ पर रूसी दूतावास की इमारत, जनवरी 2007 की तस्वीर; 20 सितंबर का मतदान केंद्र दूतावास में नहीं, रूस के अलग व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय में खुला था, उस दफ़्तर की तस्वीर नहीं मिली।
तस्वीर: Lord Mountbatten, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

रविवार, 20 सितंबर की सुबह नई दिल्ली में रूस के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय में एक मतदान केंद्र खुला। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने उसे खोला और अपना वोट डाला। समाचार एजेंसी एएनआई ने सुबह 9:18 बजे उनका बयान जारी किया। भारत में कुल पाँच केंद्र थे, दिल्ली के अलावा कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और गोवा में।

उसी दिन रात को मॉस्को में रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग ने तीन दिन के मतदान का आँकड़ा दिया। आख़िरी मतदान केंद्र बंद होने के समय मतदान 56.66 फ़ीसदी था। यह आयोग का प्रारंभिक आँकड़ा है और आयोग ने ही इसे जारी किया। आयोग की अध्यक्ष एला पैम्फ़िलोवा हैं।

गिनती उस वक़्त चल ही रही थी।

एक बात शुरू में दर्ज कर देनी चाहिए। यह रिपोर्ट जिस डेस्क पर लिखी गई, वहाँ से रूसी चुनाव आयोग की अपनी वेबसाइट cikrf.ru नहीं खुली, 21 सितंबर को भी नहीं। नीचे दिया गया आयोग का हर आँकड़ा रूसी अख़बारों और एजेंसियों के रास्ते आया है, और हर जगह यह लिखा है कि उसे किसने छापा और किस घंटे।

मतदान प्रतिशत और उसका स्रोत

मतदान तीन दिन चला। आयोग के आँकड़ों में पहले दिन का मतदान 29.45 फ़ीसदी था और दो दिन बाद 44.38 फ़ीसदी। रविवार को दिन में यह 50 फ़ीसदी के पार गया। शाम 5:40 बजे, मॉस्को समय से, 54.41 फ़ीसदी।

उसी शाम पैम्फ़िलोवा ने कहा कि मतदान 2021 के चुनाव से ऊपर निकल गया है। वेदोमोस्ती ने उसी ख़बर में 2021 का अंतिम आँकड़ा दिया, 51.72 फ़ीसदी। रात को देश के सारे केंद्र बंद हो जाने पर आयोग का प्रारंभिक आँकड़ा 56.66 फ़ीसदी आया। दोनों के बीच 4.94 अंक का फ़र्क़ है।

इसी आँकड़े पर उसी रात दो अलग संख्याएँ छपीं। वेदोमोस्ती ने रात 9:05 बजे और फिर 9:23 बजे 56.66 फ़ीसदी लिखा; वज़्ग्ल्याद ने 9:31 बजे आरआईए नोवोस्ती के हवाले से वही। लेंता डॉट आरयू ने 9:09 बजे उसी को 56.57 फ़ीसदी बताया। चार मिनट के भीतर छपे ये दो आँकड़े एक-दूसरे से मेल नहीं खाते, और यह रिपोर्ट उन्हें मिलाने की कोशिश नहीं करती। रात 9:25 बजे यूनाइटेड रशिया के दफ़्तर में पार्टी अध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने तीसरा आँकड़ा बोला, 57 फ़ीसदी।

वेदोमोस्ती ने अपने वाक्य में यह भी लिखा कि यह आँकड़ा 2021, 2016, 2003 और 1993 के चुनावों के मतदान से ऊपर है। यह नौवाँ सत्र है, यानी दूमा इससे पहले आठ बार चुनी जा चुकी है। उस वाक्य में चार चुनावों के नाम हैं। बाक़ी चार का ज़िक्र उसमें नहीं है, और यह रिपोर्ट उनके आँकड़े अपनी तरफ़ से नहीं जोड़ रही।

गिनती की पहली तस्वीर रात 10:10 बजे आई। आयोग के आँकड़ों में 20 फ़ीसदी प्रोटोकॉल गिने जाने पर यूनाइटेड रशिया के उम्मीदवार 225 में से 161 एकल सीटों पर आगे थे, कम्युनिस्ट पार्टी चार पर, न्याय-रूस तीन पर, निर्दलीय तीन पर, एलडीपीआर दो पर और ग्रीन्स एक पर। तेरह मिनट बाद पार्टी सूचियों का आँकड़ा आया। 20.4 फ़ीसदी प्रोटोकॉल पर यूनाइटेड रशिया 57.1 फ़ीसदी, कम्युनिस्ट पार्टी 14.01, एलडीपीआर 9.32, न्यू पीपल 7.93 और न्याय-रूस 5.13 फ़ीसदी पर थी। पेंशनभोगियों की पार्टी 2.05 पर थी और बाक़ी चार एक फ़ीसदी के आसपास या नीचे।

रूस में एक स्कूली व्यायामशाला में बना मतदान केंद्र, मतपेटियाँ और आयोग की मेज़, सितंबर 2016 के दूमा चुनाव की तस्वीर; 2026 की गिनती की कोई तस्वीर सार्वजनिक लाइसेंस पर नहीं मिली, यह दिखाती है कि ऐसी समितियाँ कैसे बैठती हैं।
तस्वीर: Krassotkin, विकिमीडिया कॉमन्स CC0

यह रिपोर्ट यहीं रुक जाती है। पैम्फ़िलोवा ने रात 9:20 बजे कह दिया था कि अंतिम नतीजे 25 सितंबर से पहले नहीं आएँगे, और 9:45 बजे कि प्रारंभिक नतीजे सोमवार सुबह 11 बजे रखे जाएँगे। रविवार की रात जो गिना जा चुका था, वह पाँचवाँ हिस्सा था।

एक दिन का चुनाव, तीन दिन का मतदान

चुनाव की तारीख़ एक आदेश से तय हुई थी। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 16 जून 2026 को सुबह 10:15 बजे आदेश संख्या 428 पर दस्तख़त किए, और क्रेमलिन की अपनी वेबसाइट पर उसका सार यही है कि नए सत्र के दूमा चुनाव 20 सितंबर 2026 को कराए जाएँगे। आदेश में एक ही तारीख़ है।

तीन दिन अगले दिन जुड़े। केंद्रीय चुनाव आयोग ने 17 जून को प्रस्ताव संख्या 9/90-9 पारित किया, जिसका शीर्षक ही यह है कि नौवें सत्र के दूमा चुनाव और उनके साथ जुड़े चुनाव, जो 20 सितंबर 2026 को तय हैं, लगातार कई दिनों में कराए जाएँगे। वे दिन 18, 19 और 20 सितंबर रखे गए। यानी 18 और 19 सितंबर जोड़े गए दिन हैं और चुनाव का नियत दिन रविवार ही था।

दूमा में 450 सीटें हैं। आधी, यानी 225 सीटें, एक ही संघीय क्षेत्र में पार्टी सूचियों से भरी जाती हैं और बाक़ी 225 अलग-अलग एकल सीटों से। सूची वाले हिस्से में 5 फ़ीसदी की सीमा है। उसी दिन 39 क्षेत्रों की विधानसभाएँ चुनी गईं, ग्यारह क्षेत्रों के प्रमुख चुने गए, जिनमें आठ सीधे मतदान से और तीन क्षेत्रीय संसदों से, और दस क्षेत्रीय राजधानियों की नगर परिषदें। सब मिलाकर क़रीब 20,700 पद।

एग्ज़िट पोल 49.4, गिनती 57.1

मतदान बंद होते ही दो एग्ज़िट पोल आए। सरकारी सर्वेक्षण संस्था वीत्सिओम ने यूनाइटेड रशिया को 49.4 फ़ीसदी पर रखा, कम्युनिस्ट पार्टी को 14.2, एलडीपीआर को 10.7, न्यू पीपल को 9.7 और न्याय-रूस को 6.6 पर। दूसरी संस्था इंसोमार ने यूनाइटेड रशिया को 52.8 फ़ीसदी दिया, कम्युनिस्ट पार्टी को 14.8, एलडीपीआर को 9.9, न्यू पीपल को 8.6 और न्याय-रूस को 5.5।

नमूने अलग थे और दोनों ने अपने नमूने बताए। लेंता डॉट आरयू के मुताबिक़ वीत्सिओम ने 69 क्षेत्रों के 1,755 मतदान केंद्रों पर सर्वेक्षण किया और इंसोमार ने 58 क्षेत्रों के 987 केंद्रों पर। लेंता का अगला वाक्य यह है कि दोनों एग्ज़िट पोल सभी मतदाताओं तक नहीं पहुँचते। वेदोमोस्ती ने रात 9 बजे की अपनी प्रविष्टि में इसे खोला: सर्वेक्षण सीमावर्ती और नए क्षेत्रों में नहीं हुए, और उनमें सैनिक तथा ऑनलाइन वोट डालने वाले शामिल नहीं थे।

दोनों सर्वेक्षण एक-दूसरे से भी मेल नहीं खाते। एक ही पार्टी पर उनके बीच 3.4 अंक का फ़र्क़ है, और यह फ़र्क़ मतदान बंद होने के बाद के अनुमानों का है, किसी पुराने सर्वे का नहीं। दोनों में पाँच पार्टियाँ 5 फ़ीसदी की सीमा पार करती दिखीं।

अब दोनों को गिनती के सामने रखिए। रात 10:23 बजे, 20.4 फ़ीसदी प्रोटोकॉल पर, यूनाइटेड रशिया 57.1 फ़ीसदी पर थी। वीत्सिओम के आँकड़े से यह 7.7 अंक ऊपर है और इंसोमार के आँकड़े से 4.3 अंक। 2021 में यूनाइटेड रशिया को सूची से 49.82 फ़ीसदी मिले थे। यह तुलना वेदोमोस्ती ने ख़ुद उसी प्रविष्टि में रखी, यह लिखते हुए कि एग्ज़िट पोल के आँकड़े पिछली बार के नतीजे से ऊपर जा सकते हैं।

एक और आँकड़ा उसी रात आया और वह उल्टी दिशा में जाता है। रात 9:48 बजे पैम्फ़िलोवा ने ऑनलाइन डाले गए वोटों का अलग हिसाब दिया: यूनाइटेड रशिया 49.06 फ़ीसदी, न्यू पीपल 15.42, कम्युनिस्ट पार्टी 12.26 और एलडीपीआर 10.79। जिन मतदाताओं को एग्ज़िट पोल ने छुआ ही नहीं, उनके बीच सत्तारूढ़ पार्टी का हिस्सा कुल गिनती से नीचे था, ऊपर नहीं। रविवार रात तक सार्वजनिक आँकड़ों में इस फ़र्क़ की कोई व्याख्या नहीं थी। यह रिपोर्ट भी नहीं देती।

ऑनलाइन वोट का हिसाब, घंटे दर घंटे

दूरस्थ इलेक्ट्रॉनिक मतदान इस बार 33 क्षेत्रों में हुआ। बत्तीस क्षेत्र एक साझा संघीय मंच पर थे और मॉस्को का अपना अलग मंच था। डिजिटल विकास मंत्रालय के जून के आँकड़े के मुताबिक़ इन क्षेत्रों में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 4.84 करोड़ थी, जिनमें से 86 फ़ीसदी के पास सरकारी सेवा पोर्टल का सत्यापित खाता मतदाता रजिस्टर से जुड़ा हुआ था। ऑनलाइन वोट डालने के लिए आवेदन 40 लाख से ज़्यादा लोगों ने किया।

रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन ऑनलाइन मतदान पोर्टल पर वोट डालते हुए, स्क्रीन पर मतदान पूरा होने का संदेश, मार्च 2024 के राष्ट्रपति चुनाव की तस्वीर; यह 2026 की नहीं है, पर उसी पोर्टल की बनावट यहाँ दिखती है जिससे दूरस्थ इलेक्ट्रॉनिक मतदान होता है।
तस्वीर: government.ru, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY 4.0

इसके बाद जो आँकड़े आए, वे पढ़ने में टकराते हुए लगते हैं। रविवार रात 2 बजे तक 33,31,658 मतपत्र जारी हो चुके थे; आरआईए नोवोस्ती ने इसे 'संघीय क्षेत्र और एकल निर्वाचन क्षेत्रों, दोनों के लिए जारी मतपत्रों की कुल संख्या' लिखा। दोपहर 1:10 बजे मतदान पोर्टल पर संघीय क्षेत्र के 35,00,034 मतपत्र थे और एकल क्षेत्रों के 34,77,965। रात 9:35 बजे मंत्रालय ने अंतिम संख्या दी, 36 लाख से ज़्यादा, और ऑनलाइन मतदान 90.87 फ़ीसदी। सुबह 10:14 बजे पैम्फ़िलोवा ने इसी को 33 लाख से ज़्यादा और पंजीकृत लोगों का 83 फ़ीसदी बताया था।

ये एक ही चढ़ती हुई कड़ी के अलग-अलग घंटे हैं। 40 लाख आवेदनों में से 33 लाख 83 फ़ीसदी बनते हैं और 36 लाख 90 फ़ीसदी। अंकगणित मिल जाता है।

चौथा आँकड़ा अलग चीज़ गिनता है। आरआईए नोवोस्ती ने रविवार रात 2:34 बजे शीर्षक दिया कि क़रीब साठ लाख रूसियों ने इलेक्ट्रॉनिक तरीक़े से वोट डाला, और अपनी ख़बर में साफ़ लिखा कि यह संख्या ऑनलाइन मतदान पोर्टलों और मॉस्को के सार्वजनिक चुनाव निगरानी मुख्यालय, दोनों के आँकड़ों से बनी है। मॉस्को अलग से जुड़ता है। रविवार सुबह तक मॉस्को के मंच पर संघीय क्षेत्र के 28,25,014 मतपत्र जारी हुए थे और 27,41,298 वापस आए थे। संघीय मंच के 33 लाख में मॉस्को के 25 से 28 लाख जोड़िए और साठ लाख के आसपास की संख्या बन जाती है। यह तीन आँकड़ों का टकराव नहीं है, दो अलग चीज़ों की गिनती है।

हमले भी उसी दिन गिने गए। पैम्फ़िलोवा ने दोपहर 3:36 बजे बताया कि विदेश से चुनाव के ढाँचे पर 13,277 डीडॉस हमले हुए, हमलावर ट्रैफ़िक 60 गीगाबिट से ऊपर रहा और उसकी चरम रफ़्तार 12 गीगाबिट प्रति सेकंड तक गई। उन्होंने हमलों के स्रोत के रूप में ब्राज़ील, इंडोनेशिया, ब्रिटेन, यूक्रेन और भारत के नाम लिए। वेदोमोस्ती ने इसी बयान की अपनी रिपोर्ट में मेक्सिको का नाम भी जोड़ा। निशाने पर आयोग की वेबसाइट cikrf.ru, चुनाव प्रणाली का पोर्टल, मतदान पोर्टल और सरकारी सेवा पोर्टल थे। पैम्फ़िलोवा के अनुसार हर हमला नाकाम रहा। मॉस्को के चुनाव आयोग ने ऑनलाइन मतदान प्रणाली पर बड़े पैमाने के हैकर हमलों की बात कही, जिनमें वह इलेक्ट्रॉनिक मतदाता सूची भी शामिल थी जो केंद्रों पर काग़ज़ी मतपत्र जारी करती है। पैम्फ़िलोवा ने यह भी कहा कि मॉस्को में एक पार्टी के प्रतिनिधि ने ऑनलाइन मतदान की निगरानी प्रणाली में दुर्भावनापूर्ण प्रोग्राम डालने की कोशिश की। वेदोमोस्ती के अनुसार यह कोशिश रोक दी गई।

दिल्ली का मतदान केंद्र, और विदेश में वोट का क़ानून

अलीपोव ने दिल्ली में जो कहा, एएनआई ने उसे इन शब्दों में छापा: 'हमने अभी दिल्ली में संसदीय चुनावों के लिए मतदान केंद्र खोला है, रूसी संघ के स्टेट ड्यूमा के चुनाव, जो रूसी संसद है। आप देख सकते हैं कि हमारे यहाँ 11 पार्टियाँ चुनाव में हिस्सा ले रही हैं।' उन्होंने पाँचों जगहें गिनाईं और जोड़ा कि कुछ मतदाता कुडनकुलम परमाणु बिजलीघर जैसी जगहों पर पहले ही वोट डाल चुके हैं, जहाँ अच्छी-ख़ासी संख्या में रूसी नागरिक हैं। भारतीय अधिकारियों के बारे में उनका वाक्य था: 'भारतीय अधिकारी मतदान केंद्रों पर व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के इंतज़ाम में मदद करते रहे हैं।'

मतपत्र पर ग्यारह नहीं, दस पार्टियाँ थीं। कोमरसांत ने 16 सितंबर को लिखा कि संघीय मतपत्र पर दस पार्टियाँ हैं, और गिनाईं। ग्यारहवीं सूची याबलोको की थी, जिसका पंजीकरण सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त को रद्द कर दिया; पार्टी के लोग एकल सीटों पर बने रहे। दिल्ली में मतदाता के हाथ में जो काग़ज़ आया, उस पर दस नाम थे।

यहाँ विदेश में वोट का क़ानून काम कर रहा है, और वह इस पूरी ख़बर का असली हिस्सा है। वेदोमोस्ती ने 18 सितंबर को उसे बिंदुवार लिखा। विदेश के मतदान केंद्र रूसी राजनयिक मिशनों या वाणिज्य दूतावासों के प्रमुख बनाते हैं, विदेश में मौजूद सैन्य ठिकानों पर भी। इसीलिए दिल्ली वाला केंद्र राजदूत ने खोला। रूस के भीतर एक मतदान केंद्र पर अधिकतम 3,000 मतदाता हो सकते हैं; विदेश के केंद्र पर यह सीमा लागू नहीं होती। एक शहर के लिए एक ही केंद्र इसी वजह से रखा जा सकता है।

पंजीकरण की कोई प्रक्रिया भी नहीं है। मतदान के दिन विदेशी पासपोर्ट, या राजनयिक या सेवा पासपोर्ट लेकर केंद्र पर पहुँचिए, और आपका नाम मौखिक आवेदन पर मतदाता सूची में जोड़ दिया जाता है। इसलिए दिल्ली के केंद्र के लिए पंजीकृत मतदाताओं की कोई संख्या मौजूद ही नहीं है। सूची उसी दिन बनती है। वोट भी एक ही मिलता है, संघीय क्षेत्र वाला, जिससे 450 में से 225 सांसद चुने जाते हैं; एकल सीट का मतपत्र विदेश में जारी नहीं होता। अगर केंद्र की समिति को पता चल जाए कि व्यक्ति ऑनलाइन मतपत्र ले चुका है या कहीं और वोट डाल चुका है, तो उसका नाम नहीं जुड़ता। ख़र्च चुनाव के लिए रखे संघीय बजट से आता है।

तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु बिजलीघर की दोनों इकाइयों के गुंबद, नवंबर 2016 की तस्वीर; राजदूत अलीपोव ने बताया था कि यहाँ जैसी जगहों पर रूसी नागरिक पहले ही वोट डाल चुके थे।
तस्वीर: Reetesh Chaurasia, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

पैमाना भी दर्ज है। रूसी विदेश मंत्रालय के जुलाई 2026 के आँकड़े में विदेश में रहने वाले रूसी मतदाता 18 लाख से ज़्यादा हैं, और रविवार रात तक विदेश में वोट डालने वालों की संख्या 2,12,000 से ऊपर बताई गई, जो 2021 से ज़्यादा है। केंद्रों की संख्या पर एक ही रिपोर्ट के भीतर दो आँकड़े हैं। वेदोमोस्ती ने आयोग और विदेश मंत्रालय की वेबसाइटों के हवाले से 152 देशों में 313 केंद्र लिखे, और उसी लेख में पैम्फ़िलोवा का 17 सितंबर का बयान कि कुल 333 केंद्र बने। लेख की अपनी सुर्ख़ी में 150 देशों के 'क़रीब 300' केंद्र हैं। तीनों संख्याएँ एक साथ छपी हैं।

और एक आख़िरी बात, जो बताती है कि दिल्ली का केंद्र रविवार को ही क्यों खुला। पूरे तीन दिन का मतदान विदेश के सिर्फ़ 14 केंद्रों पर हुआ, जिनमें ग्यारह दक्षिण ओसेतिया में, दो निकोसिया में और एक फुकेत में। इसराइल में मतदान 17 सितंबर को हुआ; बहरीन, कुवैत और लीबिया में 18 को; इराक़, यमन और चीन में 19 को। बाक़ी सब जगह मुख्य दिन, 20 सितंबर। भारत उसी 'बाक़ी सब' में था। इस चुनाव पर भारत सरकार का कोई बयान नहीं मिला।

ओएससीई के पर्यवेक्षक नहीं आए, 133 देशों के आए

यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन के लोकतांत्रिक संस्थाएँ और मानवाधिकार कार्यालय ने 6 अगस्त 2026 को वारसॉ और कोपेनहेगन से साझा विज्ञप्ति जारी की। उसमें लिखा है कि रूस का ओएससीई पर्यवेक्षकों को न बुलाने का फ़ैसला 1990 के कोपेनहेगन दस्तावेज़ के तहत ली गई प्रतिबद्धताओं के अनुरूप नहीं है। रूस ओएससीई का सदस्य देश है। उस दस्तावेज़ में सभी सदस्य देश पर्यवेक्षकों को बुलाने का वचन देते हैं, और यह भी दर्ज है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बना सकती है।

कार्यालय की निदेशक मारिया तेलालियान का वाक्य विज्ञप्ति में यह है: 'आने वाले स्टेट ड्यूमा चुनावों के पर्यवेक्षण के लिए न्योता न देने का फ़ैसला गहरे अफ़सोस की बात है, ख़ासकर इसलिए कि यह उन प्रतिबद्धताओं को लागू न करने के सिलसिले को जारी रखता है जो हर ओएससीई सदस्य देश ने अपने ही नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति ली हैं।' संसदीय सभा के अध्यक्ष पेरे जोआन पोंस का वाक्य है: 'ओएससीई चुनाव पर्यवेक्षण मिशन को न्योता देने से रूसी संघ का इनकार उन प्रतिबद्धताओं का गंभीर उल्लंघन है जो उसने एक ओएससीई सदस्य देश के रूप में ली हैं।'

विज्ञप्ति यह भी दर्ज करती है कि कार्यालय ने चुनाव से पहले की अपनी सामान्य बातचीत की कोशिश की, जिसमें एक आकलन मिशन भेजने पर सहमति बनाना भी शामिल था, और रूसी अधिकारियों से कोई ठोस जवाब नहीं आया। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भी न्योता नहीं मिला था, और 2021 के दूमा चुनाव में लगाई गई शर्तों ने मिशन भेजने नहीं दिया। यह लगातार तीसरा राष्ट्रीय चुनाव है जिसे ओएससीई नहीं देख सका। उसी विज्ञप्ति में वे पाबंदियाँ गिनाई गई हैं जिन्हें कार्यालय दर्ज कराना चाहता था: 'विदेशी एजेंट' घोषित लोगों का चुनाव लड़ने पर रोक, प्रचार के पैसे पर नई सीमाएँ, और पार्टियों तथा उम्मीदवारों के मतदान केंद्र पर प्रतिनिधि रखने के अधिकार में कटौती। नागरिक निगरानी संस्था गोलोस पर लगातार दबाव के बाद उसका विसर्जन भी इसी सूची में है।

इसके सामने आयोग की अपनी गिनती रखी गई है। रूसी संसद के अपने अख़बार पार्लामेंत्सकाया गज़ेता ने 18 सितंबर को आयोग में हुए एक सम्मेलन से छापा कि इस बार 133 देशों के प्रतिनिधि आए, और यह 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के 129 देशों के रिकॉर्ड से चार ज़्यादा है। आयोग के सदस्य पावेल आंद्रेयेव ने आँकड़े दिए: 133 देशों और 13 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 1,126 पर्यवेक्षक, और विदेश में रूसियों के मतदान केंद्रों पर 22 देशों के पर्यवेक्षकों की मान्यता। यह संख्या आयोग की अपनी है और इस डेस्क से आयोग की वेबसाइट पर उसकी जाँच नहीं हो सकी।

युद्ध के बीच हुआ मतदान

यह 2022 के बाद का पहला दूमा चुनाव है। दोनेत्स्क, लुहांस्क, ज़ापोरीझिया और ख़ेरसॉन के लोगों ने पहली बार दूमा के सांसद चुने। दोनेत्स्क में मतदान सुरक्षा कारणों से रविवार दोपहर 2 बजे, मॉस्को समय से, बंद कर दिया गया।

रात 9:26 बजे आयोग की ब्रीफ़िंग में पैम्फ़िलोवा ने इमारतें गिनाईं। उनके शब्द इंटरफ़ैक्स ने ये छापे: 'रॉकेट हमलों, ड्रोन हमलों और अन्य आपात घटनाओं के परिणामस्वरूप रूसी संघ के 10 क्षेत्रों में 74 इमारतें क्षतिग्रस्त और ध्वस्त हुई हैं, जहाँ चुनाव आयोग रखे गए थे। कई मामलों में क्षेत्रीय और मतदान केंद्र समितियाँ एक ही इमारत में थीं।' उन्होंने क्षेत्रवार संख्या भी दी: ज़ापोरीझिया में 17, लुहांस्क में 14, बेलगोरोद में 13, ख़ेरसॉन में 10, ब्रियांस्क में नौ, दोनेत्स्क में छह, क्रास्नोदार में दो, और क्रीमिया, समारा तथा त्यूमेन में एक-एक। जोड़ने पर 74 बनते हैं। कुछ समितियाँ वैकल्पिक इमारतों में ले जाई गईं। इंटरफ़ैक्स ने अपनी भूमिका में इन्हें यूक्रेनी सेना के हमलों का नतीजा बताया; पैम्फ़िलोवा के उद्धृत वाक्य में सेना का नाम नहीं है। रात 10:20 बजे रूसी नेशनल गार्ड के एक लेफ़्टिनेंट जनरल विक्टर पोदकोल्ज़िन ने बताया कि मतदान की तैयारी और संचालन के दौरान क़ानून-व्यवस्था में तीन लाख तीस हज़ार से ज़्यादा सैनिक और नेशनल गार्ड कर्मी लगे।

यूक्रेन ने पहले दिन ही अपनी बात कह दी थी। उसके विदेश मंत्रालय का बयान शुक्रवार, 18 सितंबर को आया। इंटरफ़ैक्स-यूक्रेन ने उसी सुबह 11:39 बजे उसका पूरा पाठ छापा। मंत्रालय ने इन चुनावों को क़ब्ज़ा करने वाले देश का तमाशा कहा और लिखा: 'यूक्रेन न इन ग़ैर-क़ानूनी चुनावों के कराए जाने को मान्यता देता है, न उनके शून्य नतीजों को। हम विदेशी राज्यों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अन्य पक्षों से भी अपील करते हैं कि वे रूस की इन कार्रवाइयों को मान्यता न दें।' बयान में यह भी है कि अस्थायी रूप से क़ब्ज़े वाले इलाक़ों में हुए ग़ैर-क़ानूनी चुनावों से चुने गए प्रतिनिधियों को रूसी संसद में शामिल करना पूरे दूमा की वैधता को और घटाता है। ओएससीई की 6 अगस्त की विज्ञप्ति में भी यही निष्कर्ष दर्ज है, कि ऐसे किसी भी चुनाव के नतीजों की अंतरराष्ट्रीय क़ानून में कोई वैधता नहीं होगी।

रविवार की रात यही स्थिति थी। पाँचवाँ हिस्सा गिना जा चुका था, प्रारंभिक नतीजे सोमवार सुबह के लिए तय थे, और अंतिम नतीजे 25 सितंबर से पहले नहीं आने थे।

स्रोतरूस के राष्ट्रपति की आधिकारिक वेबसाइट: राष्ट्रपति आदेश संख्या 428, 16 जून 2026, सुबह 10:15, जिससे दूमा के नए सत्र के चुनाव 20 सितंबर 2026 को तय हुए, केंद्रीय चुनाव आयोग का प्रस्ताव संख्या 9/90-9, 17 जून 2026: 20 सितंबर 2026 को तय चुनावों में लगातार कई दिन मतदान कराने पर, वेदोमोस्ती, 20 सितंबर 2026, रात 9:05 से चली लाइव रिपोर्ट: मतदान प्रतिशत, आयोग के प्रोटोकॉल आँकड़े, पैम्फ़िलोवा और मेदवेदेव के बयान, ऑनलाइन मतदान का अंतिम आँकड़ा, वेदोमोस्ती, 20 सितंबर 2026, रात 9:23: आयोग के प्रारंभिक आँकड़े में मतदान 56.66 फ़ीसदी, और मॉस्को चुनाव आयोग के साइबर हमलों वाले बयान, वेदोमोस्ती, 20 सितंबर 2026, शाम 5:52: 2021 का अंतिम मतदान 51.72 फ़ीसदी, और डोनेत्स्क में सुरक्षा कारणों से मतदान दोपहर 2 बजे बंद, लेंता डॉट आरयू, 20 सितंबर 2026, रात 9:09 (संशोधित 10:57): वीत्सिओम और इंसोमार के एग्ज़िट पोल, दोनों के नमूने, और मतदान 56.57 फ़ीसदी, वज़्ग्ल्याद, 20 सितंबर 2026, रात 9:31: आयोग का 56.66 फ़ीसदी, आरआईए नोवोस्ती के हवाले से, कोमरसांत, 16 सितंबर 2026, शाम 6:40: संघीय मतपत्र पर दस पार्टियाँ, और 10 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का याबलोको की सूची का पंजीकरण रद्द करना, वेदोमोस्ती, 18 सितंबर 2026, दोपहर 2:25: विदेश में मतदान का क़ानून, मतदाता सूची में मौक़े पर नाम जुड़ने की प्रक्रिया, केंद्रों की संख्या और अगाऊ मतदान वाले देश, एएनआई, नई दिल्ली, 20 सितंबर 2026, सुबह 9:18: राजदूत डेनिस अलीपोव का पूरा बयान और भारत के पाँच केंद्र, ओएससीई का लोकतांत्रिक संस्थाएँ और मानवाधिकार कार्यालय तथा ओएससीई संसदीय सभा, वारसॉ/कोपेनहेगन, 6 अगस्त 2026 की संयुक्त विज्ञप्ति, पार्लामेंत्सकाया गज़ेता, रूसी संसद का अपना अख़बार, 18 सितंबर 2026, शाम 4:06: आयोग के सदस्य पावेल आंद्रेयेव के हवाले से 133 देशों के 1,126 पर्यवेक्षक, पार्लामेंत्सकाया गज़ेता, 20 सितंबर 2026, दोपहर 1:36: ऑनलाइन मतदान पोर्टल के दोपहर 1:10 के आँकड़े और 40 लाख से ज़्यादा आवेदन, आरआईए नोवोस्ती, 20 सितंबर 2026, रात 2:34: ऑनलाइन मतदान का 'क़रीब साठ लाख' वाला आँकड़ा और रात 2 बजे तक जारी 33,31,658 मतपत्र, आरआईए नोवोस्ती, 20 सितंबर 2026, सुबह 10:14: पैम्फ़िलोवा का बयान, संघीय मंच पर 33 लाख से ज़्यादा मतदाता, पंजीकृत लोगों का 83 फ़ीसदी, रियलनोए व्रेम्या, 20 सितंबर 2026, दोपहर 3:36: पैम्फ़िलोवा के अनुसार विदेश से 13,277 डीडॉस हमले और उनके स्रोत देशों की सूची, इंटरफ़ैक्स, 20 सितंबर 2026, रात 9:26: पैम्फ़िलोवा की ब्रीफ़िंग, दस क्षेत्रों में चुनाव आयोगों की 74 इमारतें क्षतिग्रस्त या ध्वस्त, इंटरफ़ैक्स-यूक्रेन, 18 सितंबर 2026, सुबह 11:39: यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के बयान का पाठ, वज़्ग्ल्याद, 20 सितंबर 2026, सुबह 8:31: मॉस्को के ऑनलाइन मंच पर दो दिन में जारी और प्राप्त मतपत्रों की गिनती, गारंट डॉट रू: ऑनलाइन मतदान 33 क्षेत्रों में, उन क्षेत्रों में 4.84 करोड़ पंजीकृत मतदाता, डिजिटल विकास मंत्रालय के हवाले से

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