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नौकरी जाने पर मिलने वाली 60 दिन की छूट हटाने का प्रस्ताव छपा है, और वह अकेले H-1B का मामला नहीं है

11 सितंबर को अमेरिकी फ़ेडरल रजिस्टर के पन्ना 57807 पर गृह सुरक्षा विभाग का प्रस्तावित नियम छपा, जो संघीय नियमावली की उपधारा 8 CFR 214.1(l)(2) को हटाना चाहता है। यह उपधारा आठ वीज़ा श्रेणियों के लोगों और उनके परिवारों को नौकरी ख़त्म होने पर 60 दिन तक दर्जा बनाए रखने देती है। टिप्पणी की अवधि 10 नवंबर तक खुली है।

कैंप स्प्रिंग्स, मेरीलैंड के USCIS मुख्यालय में एजेंसी के कर्मचारियों की टाउन हॉल बैठक, जून 2024 की तस्वीर, उसी एजेंसी की जिसके प्रशासनिक बोझ के तर्क पर यह प्रस्ताव टिका है
तस्वीर: DHSgov, विकिमीडिया कॉमन्स Public domain

वाशिंगटन में शुक्रवार सुबह फ़ेडरल रजिस्टर के खंड 91, अंक 175 में, पन्ना 57807 से 57828 तक, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग का एक प्रस्तावित नियम छपा। शीर्षक अपने काम को छिपाता नहीं: "Eliminating the Discretionary 60-Day Grace Period"। जो चीज़ हटाई जानी है वह संघीय नियमावली की एक उपधारा है, 8 CFR 214.1(l)(2), और उसका पूरा पाठ तीन वाक्यों का है।

पहला वाक्य कहता है कि E-1, E-2, E-3, H-1B, H-1B1, L-1, O-1 या TN दर्जे में मौजूद व्यक्ति और उसके आश्रित सिर्फ़ इस आधार पर दर्जा बनाए रखने में विफल नहीं माने जाएँगे कि जिस रोज़गार पर उनका वर्गीकरण टिका था वह ख़त्म हो गया; यह छूट 60 लगातार दिनों की है या मंज़ूर अवधि के अंत तक, इनमें जो पहले आए, और हर मंज़ूर अवधि में एक बार। दूसरा वाक्य गृह सुरक्षा विभाग को यह अधिकार देता है कि वह अपने विवेक से इस अवधि को घटा दे या ख़त्म कर दे। तीसरा वाक्य यह साफ़ करता है कि इन 60 दिनों में व्यक्ति काम नहीं कर सकता, जब तक कोई और प्रावधान उसे अनुमति न देता हो।

छूट का काम इतना ही है कि आदमी क़ानूनी तौर पर देश में बना रहे और अगला काग़ज़ दाख़िल कर सके। प्रस्ताव इन तीनों वाक्यों को नियमावली से निकाल देने का है।

टिप्पणी की अवधि 10 नवंबर 2026 तक खुली है। डॉकेट संख्या USCIS-2026-0364 है, नियामक पहचान संख्या 1615-AD22, और दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर गृह सुरक्षा मंत्री मार्कवेन मलिन के हैं।

आठ वीज़ा श्रेणियों से एक उपधारा हटाने का प्रस्ताव

11 सितंबर को स्क्रॉल ने जो शीर्षक लगाया, उसमें "H-1B, other visa holders" लिखा था, और वह "other" ही असल दायरा है। प्रस्ताव आठ श्रेणियों पर एक साथ लागू होता है। E-1 संधि-व्यापारी, E-2 संधि-निवेशक, E-3 ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ, H-1B, चिली और सिंगापुर के नागरिकों वाला H-1B1, कंपनी के भीतर तबादले वाला L-1, असाधारण क्षमता वाला O-1, और उत्तरी अमेरिकी समझौते से निकला TN। इनके साथ इनके जीवनसाथी और 21 साल से कम उम्र के अविवाहित बच्चे भी।

विभाग ने कम दायरे वाला विकल्प देखा और छोड़ दिया। दस्तावेज़ के खंड IV.E में लिखा है कि कुछ श्रेणियों के लिए छूट बनाए रखने से न क़ानूनी संगति का लक्ष्य पूरा होता है और न प्रशासनिक बोझ घटता है। छूट को 60 दिन से घटाकर कम करने का विकल्प भी इसी तर्क पर छोड़ा गया, कि दिन घटाने से USCIS को हर अर्ज़ी की जाँच फिर भी करनी पड़ेगी।

नियम के पाठ में दो संशोधन हैं, और दूसरा शीर्षक में नहीं आता। पहला, धारा 214.1 से उपधारा (l)(2) हटाई जाएगी और (l)(3) को (l)(2) बना दिया जाएगा। दूसरा, धारा 204.5 की उपधारा (p)(1)(i) से 214.1(l)(2) का हवाला निकाल दिया जाएगा। दूसरे संशोधन का असर इस लेख में आगे आता है।

एक पुस्तकालय की अलमारी में अमेरिकी संघीय नियमावली के खंड, 2009 की तस्वीर, और इसी नियमावली के शीर्षक 8 की धारा 214.1 से वह उपधारा हटाई जानी है
तस्वीर: Coolcaesar at English Wikipedia, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 3.0

जो छूट बची रहेगी वह 214.1(l)(1) की दस दिन वाली है। पर दस्तावेज़ का फ़ुटनोट 16 ख़ुद बताता है कि यह दस दिन "मंज़ूरी की अवधि ख़त्म होने के बाद" के हैं, इसलिए बीच अवधि में नौकरी जाने वाले पर वह लागू नहीं होती। जिसे 15 महीने की मंज़ूरी के आठवें महीने में निकाला गया, उसके लिए दस दिन भी नहीं हैं।

प्रस्तावित नियम और लागू नियम का फ़र्क़

प्रकाशन के दिन कुछ नहीं बदला। यह NPRM है, यानी प्रस्तावित नियम-निर्माण की सूचना, और अमेरिकी प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम के तहत इसका काम राय माँगना है, नियम बनाना नहीं।

10 नवंबर की आधी रात तक कोई भी व्यक्ति regulations.gov पर टिप्पणी दर्ज करा सकता है। शर्त यह है कि टिप्पणी अंग्रेज़ी में हो या उसके साथ अंग्रेज़ी अनुवाद लगा हो, और यह कि जो लिखा जाएगा वह निजी जानकारी समेत सार्वजनिक होगा। दस्तावेज़ ख़ुद चेताता है कि टिप्पणीकार अपनी निजी जानकारी सीमित रखने पर विचार करें। ईमेल या डाक से भेजी गई बात टिप्पणी नहीं मानी जाएगी।

डॉकेट पर ईमेल चेतावनी के लिए नाम दर्ज कराया जा सकता है, ताकि टिप्पणियाँ आने या अंतिम नियम छपने की सूचना मिल जाए। विभाग यह भी लिखता है कि जो टिप्पणियाँ प्रस्ताव के किसी ख़ास हिस्से का हवाला दें, बदलाव की वजह बताएँ और आँकड़े या क़ानूनी आधार साथ लगाएँ, वे उसके सबसे काम आएँगी। दस्तावेज़ अंत में यह भी माँगता है कि लोग उन भरोसों पर टिप्पणी भेजें जो मौजूदा नियम के सहारे बने हैं।

उसके बाद विभाग को मिली टिप्पणियों पर विचार करना होगा और अंतिम नियम अलग से छापना होगा, अपनी प्रभावी तिथि के साथ। वह तिथि आज तय नहीं है।

छूट 2017 में आई, और उसके पीछे का तर्क

2017 से पहले इन आठ श्रेणियों में कोई छूट नहीं थी। दस्तावेज़ के खंड III.F में लिखा है कि तब नौकरी ख़त्म होने के अगले दिन से व्यक्ति दर्जा बनाए रखने में विफल माना जाता था और उससे तुरंत देश छोड़ने की अपेक्षा थी। यही स्थिति प्रस्ताव वापस लाना चाहता है।

छूट 18 नवंबर 2016 के अंतिम नियम से आई, जो फ़ेडरल रजिस्टर के खंड 81, पन्ना 82398 पर छपा था और 17 जनवरी 2017 से प्रभावी हुआ। उसे AC21 नियम कहा जाता है, क्योंकि वह 2000 के अमेरिकी प्रतिस्पर्धात्मकता अधिनियम को लागू करता था। तब विभाग का अपना तर्क यह था कि यह छूट उच्च-कौशल कामगारों को नया रोज़गार खोजने में मदद करेगी और अमेरिकी नियोक्ताओं के लिए कर्मचारी बदलना आसान करेगी।

दस साल बाद वही विभाग कहता है कि 2016 के तर्क ने दो बातों पर पर्याप्त विचार नहीं किया था। पहली, कि छूट उस क़ानूनी ढाँचे से मेल नहीं खाती जिसमें दर्जा उसी रोज़गार से बँधा है जिसके आधार पर वह मिला। दूसरी, कि छूट USCIS का प्रशासनिक बोझ बढ़ाती है।

दस्तावेज़ यह भी दर्ज करता है कि वह अपनी स्थिति बदल रहा है, और इसके लिए दो अदालती नज़ीरें गिनाता है। मोटर व्हीकल मैन्युफ़ैक्चरर्स एसोसिएशन बनाम स्टेट फ़ार्म (1983), जिसमें कहा गया कि एजेंसी अपना रुख़ बदल सकती है पर उसे तर्कसंगत विश्लेषण देना होगा। और FCC बनाम फ़ॉक्स टेलीविज़न (2009), जिसमें कहा गया कि एजेंसी को अदालत के सामने यह साबित नहीं करना पड़ता कि नई नीति के कारण पुरानी नीति के कारणों से बेहतर हैं; इतना ज़रूरी है कि नई नीति क़ानून के भीतर हो, उसके पीछे अच्छे कारण हों, और एजेंसी उसे बेहतर मानती हो।

DHS के अपने आँकड़े: पाँच साल में 3,28,758 लोग

दस्तावेज़ की तालिका 3 इस पूरे मामले की सबसे ठोस चीज़ है। उसमें वित्त वर्ष 2021 से 2025 तक उन मुख्य लाभार्थियों की गिनती है जिनका रोज़गार ख़त्म हुआ या जिन्होंने नियोक्ता बदला: 2021 में 40,959; 2022 में 69,268; 2023 में 80,034; 2024 में 68,997; 2025 में 69,500। पाँच साल का जोड़ 3,28,758 और सालाना औसत 65,752। इनमें 99 प्रतिशत H-1B श्रेणी के हैं।

अब उसी तालिका का दूसरा हिस्सा। इन 3,28,758 लोगों में से 60 दिन के भीतर 18,975 के नाम पर नए नियोक्ता ने फ़ॉर्म I-129 दाख़िल किया, 1,924 ने स्थायी निवास का फ़ॉर्म I-485 भरा, 5,596 ने दर्जा बदलने का फ़ॉर्म I-539, और 49 ने "compelling circumstances" वाली रोज़गार अनुमति का फ़ॉर्म I-765। चारों को जोड़ें तो 26,544 काग़ज़ बनते हैं। बाक़ी क़रीब 92 प्रतिशत के नाम पर 60 दिन के भीतर इनमें से कोई अर्ज़ी दर्ज नहीं हुई।

यह आँकड़ा जितना बताता है, विभाग ख़ुद उसकी सीमाएँ उससे ज़्यादा साफ़ लिखता है। फ़ुटनोट 49 में दर्ज है कि USCIS के पास छूट के इस्तेमाल का कोई सीधा रिकॉर्ड नहीं है, क्योंकि यह किसी फ़ॉर्म पर दर्ज नहीं होता। इसलिए विभाग ने वापस ली गई I-129 याचिकाओं को अनुमान का आधार बनाया। उसी फ़ुटनोट में यह भी है कि E-1, E-2, E-3, H-1B1, L-1 और TN श्रेणियों में नियोक्ता को नौकरी ख़त्म होने की सूचना देने की बाध्यता ही नहीं है, कि कुछ नियोक्ता H-1B में भी वापसी-पत्र नहीं भेजते, और कि जो लोग याचिका वापस होने से पहले ही नौकरी बदल गए उनकी गिनती इसमें आ गई है पर उन्हें छूट की ज़रूरत कभी पड़ी ही नहीं। इस्तीफ़े और बर्ख़ास्तगी में फ़र्क़ करना भी विभाग के डेटा से संभव नहीं है, यह लागत-लाभ विश्लेषण में अलग से लिखा है।

प्रशासनिक बोझ का आँकड़ा इससे बड़ा है। वित्त वर्ष 2018 से 20 मई 2026 तक 19 लाख से ज़्यादा याचिकाएँ और आवेदन ऐसे थे जिनमें अधिकारी को यह देखना पड़ा कि 60 दिन की छूट लागू होती है या नहीं। विभाग का कहना है कि यह जाँच जटिल है, क्योंकि नौकरी ख़त्म होने की तारीख़ के सबूत मानक नहीं होते और कई बार अधिकारी को वेतन पर्ची से महीने के भीतर की तारीख़ का अनुमान लगाना पड़ता है।

दूसरी दिशा में विभाग की अपनी गिनती छोटी है। वित्त वर्ष 2025 में 60 दिन की छूट पार करने पर दर्जा न बनाए रखने के आधार पर H-1B लाभार्थियों को कुल 37 नोटिस टु अपीयर जारी हुए। विभाग मानता है कि प्रस्ताव लागू होने पर यह संख्या थोड़ी बढ़ेगी, और अदालत जाने वाले हर व्यक्ति पर समय तथा यात्रा की लागत 204.43 से 300.53 डॉलर के बीच आँकी गई है। यह जोड़ 50 मील की आने-जाने की दूरी, ढाई घंटे की यात्रा, एक से तीन घंटे की सुनवाई, 48.05 डॉलर प्रति घंटा मुआवज़ा और 72.5 सेंट प्रति मील की सरकारी दर से बनता है। गँवाई कमाई का ऊपरी अनुमान 21,877 डॉलर है, जो 1,31,000 डॉलर के माध्यिका वार्षिक वेतन के दो महीने के हिसाब से निकाला गया है। यह माध्यिका विभाग ने उन्हीं I-129 याचिकाओं के वेतन-आँकड़ों से निकाली जो 2025 में वापस ली गई याचिका के बाद नए नियोक्ता ने भरीं।

नियोक्ताओं की गिनती तालिका 5 में है। वित्त वर्ष 2025 में 2,886 अलग-अलग कंपनियों ने 5,178 ऐसे कामगारों के लिए नियोक्ता-बदल याचिकाएँ दाख़िल कीं जिनकी पिछली याचिका वापस ले ली गई थी। लघु उद्यम मानक पर परखने के बाद इनमें 1,852 कंपनियाँ छोटी निकलीं, यानी 64.17 प्रतिशत, और 1,034 बड़ी। इनमें से H-1B याचिका भरने वाली क़रीब 99 प्रतिशत कंपनियों की याचिकाएँ सालाना संख्या-सीमा से बाहर की थीं।

और सबसे साफ़ बात लागत-लाभ के लेखा-विवरण में है। OMB परिपत्र A-4 के प्रारूप में विभाग ने वार्षिकीकृत मौद्रिक लाभ और वार्षिकीकृत मौद्रिक लागत, दोनों के ख़ाने में "Not Estimated" लिखा है। जो लाभ गिनाए गए हैं वे गुणात्मक हैं: कार्यक्रम की सत्यनिष्ठा और प्रशासनिक बोझ में कमी।

भारत का हिस्सा, जिसका ज़िक्र दस्तावेज़ में नहीं है

USCIS की अपनी रिपोर्ट, "Characteristics of H-1B Specialty Occupation Workers", वित्त वर्ष 2024 में मंज़ूर 3,99,395 H-1B याचिकाओं का ब्यौरा देती है। इनमें 2,83,397 याचिकाएँ भारत में जन्मे लोगों की थीं, यानी 71 प्रतिशत। चीन दूसरे नंबर पर, 46,680 यानी 11.7 प्रतिशत। बाक़ी आठ शीर्ष देश मिलकर सात प्रतिशत। उसी रिपोर्ट में यह भी है कि जारी रोज़गार वाली याचिकाओं में भारत और चीन का साझा हिस्सा 89 प्रतिशत है, जबकि पहली बार के रोज़गार में 71 प्रतिशत।

नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास की इमारत, 2011 की तस्वीर, उसी देश में जहाँ से 2024 की मंज़ूर H-1B याचिकाओं के 71 प्रतिशत लाभार्थी आए
तस्वीर: Soumya S Das, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

यही रिपोर्ट वेतन भी देती है, और वह माध्यिका में देती है, यानी वह रक़म जिसके ऊपर आधे लोग हैं और नीचे आधे। पहली बार मंज़ूर याचिकाओं में यह 97,000 डॉलर है, जारी रोज़गार वाली याचिकाओं में 1,32,000 डॉलर, और सब मिलाकर 1,20,000 डॉलर।

रिपोर्ट में दो और आँकड़े हैं जो आगे के हिस्से से जुड़ते हैं। मंज़ूर H-1B लाभार्थियों की औसत उम्र 34 साल है। और भारत में जन्मे लाभार्थियों में 75 प्रतिशत पुरुष तथा 25 प्रतिशत महिलाएँ हैं, जबकि सभी देशों को मिलाकर यह अनुपात 70 और 30 का है। इसका सीधा अर्थ यह है कि H-4 दर्जे में जो जीवनसाथी बैठा है, वह ज़्यादातर मामलों में महिला है।

इन दोनों दस्तावेज़ों को जोड़कर एक मोटा अंदाज़ा बनता है, पर वह अंदाज़ा ही है और उसका आधार दो अलग-अलग गिनतियाँ हैं। सालाना 65,752 में से 99 प्रतिशत H-1B हैं, और H-1B मंज़ूरियों में 71 प्रतिशत भारत में जन्मे लोग। इससे साल में चालीस हज़ार से ऊपर का आँकड़ा निकलता है। पर एक गिनती मंज़ूर याचिकाओं की है और दूसरी वापस ली गई याचिकाओं की, इसलिए यह जोड़ अनुमान से आगे नहीं जाता।

जो निकाला नहीं जा सकता उसकी वजह दस्तावेज़ में है। 22 पन्नों के इस प्रस्ताव में भारत शब्द एक बार भी उस अर्थ में नहीं आता। जहाँ "Indian" लिखा है वह जगह अमेरिका के मूल निवासी क़बीलों से परामर्श वाला कार्यकारी आदेश 13175 है, जिसमें विभाग कहता है कि इस नियम का उन क़बीलों पर कोई असर नहीं पड़ता। किसी देश का नाम लेकर कोई आँकड़ा प्रस्ताव में नहीं दिया गया है।

परिवार पर असर: H-4 दर्जा और जीवनसाथी का काम

आश्रितों पर असर दस्तावेज़ में टाला नहीं गया है, दर्ज है। खंड IV.D कहता है कि प्रस्ताव लागू होने पर व्यक्ति और उसके आश्रित मुख्य कामगार का रोज़गार ख़त्म होने के अगले दिन से दर्जा बनाए रखने में विफल माने जाएँगे। फ़ुटनोट 32 इससे आगे जाता है: व्यक्ति और उसके आश्रितों को रोज़गार ख़त्म होने के दिन ही अमेरिका छोड़ना होगा, और स्थानीय समुदाय से जुड़ी हर गतिविधि उसी दिन बंद करनी होगी।

वॉशिंगटन के डलेस हवाई अड्डे का प्रस्थान हॉल, 2015 की तस्वीर, और फ़ुटनोट 32 के मुताबिक़ रोज़गार ख़त्म होने के दिन ही देश छोड़ना आश्रितों पर भी लागू होगा
तस्वीर: Acroterion, विकिमीडिया कॉमन्स CC BY-SA 4.0

H-1B धारक का जीवनसाथी और 21 से कम उम्र के अविवाहित बच्चे H-4 दर्जे में आते हैं। H-4 जीवनसाथी को काम की अनुमति अपने आप नहीं मिलती; उसके लिए फ़ॉर्म I-765 भरना पड़ता है और शर्त यह है कि मुख्य कामगार या तो मंज़ूर I-140 का मुख्य लाभार्थी हो, या AC21 की धाराओं 106(a) और (b) के तहत H-1B दर्जा पा चुका हो। H-1B1 धारकों के आश्रित H-4 में आते तो हैं, पर उन्हें काम की अनुमति न मिलती है न वे उसके लिए अर्ज़ी दे सकते हैं। L-1 और E श्रेणियों के जीवनसाथी दर्जे के साथ ही रोज़गार-अधिकृत माने जाते हैं और उनके I-94 पर L-2S, E-1S, E-2S या E-3S अंकित हो जाता है। O-1 के आश्रित O-3 में और TN के आश्रित TD में आते हैं, और इन दोनों को काम करने का अधिकार है ही नहीं।

कितने परिवार इसमें आएँगे, यह विभाग नहीं बताता। लागत-लाभ विश्लेषण में लिखा है कि DHS का डेटा इतना बारीक नहीं है कि छूट का उपयोग करने वाले आश्रितों की भरोसेमंद गिनती दी जा सके। इसलिए तालिका 3 के 3,28,758 में जीवनसाथी और बच्चे शामिल नहीं हैं।

विभाग यह भी मानता है कि लोगों ने मौजूदा नियम के भरोसे मकान ख़रीदे, कर चुकाए और स्थानीय समुदाय में निवेश किया। उसका जवाब दो हिस्सों में है। पहला, कि ये भरोसे उन लक्ष्यों से कमज़ोर हैं जो प्रस्ताव के पीछे हैं। दूसरा, कि ऐसा कोई भी भरोसा ग़लत जगह टिका था, क्योंकि 60 दिन की छूट हमेशा विवेकाधीन रही और उसे घटाने या ख़त्म करने का फ़ैसला बाद की किसी अर्ज़ी पर ही होता था। इसके लिए 2025 का वेजेज़ ऐंड व्हाइट लायन का फ़ैसला उद्धृत है, जिसमें कहा गया कि किसी एजेंसी के विवेक के बारे में अनुमान लगाना गंभीर भरोसा नहीं माना जाएगा।

ग्रीन कार्ड की क़तार और भारत का बैकलॉग

तालिका 3 में 60 दिन के भीतर स्थायी निवास की अर्ज़ी सिर्फ़ 1,924 लोगों ने दी, यानी 0.59 प्रतिशत ने। यह आँकड़ा कम दिखता है, पर उसकी वजह अलग दस्तावेज़ में मिलती है।

I-485 तभी दाख़िल हो सकता है जब आवेदक की प्राथमिकता तिथि उसके वर्ग और देश के लिए चल रही तारीख़ से पहले की हो। सितंबर 2026 की तालिका, जिसे USCIS ने विदेश विभाग के वीज़ा बुलेटिन से लेकर छापा है, भारत के लिए यह कहती है: EB-1 में 15 अक्टूबर 2022, EB-2 में "U" यानी अनुपलब्ध, EB-3 में 1 जनवरी 2014, और अन्य कामगारों में भी 1 जनवरी 2014। तुलना के लिए, बाक़ी सभी देशों के लिए EB-2 "C" है यानी चालू, और EB-3 की तारीख़ 1 सितंबर 2024 है। चीन के लिए EB-2 में 1 सितंबर 2021 और EB-3 में 1 जनवरी 2022।

भारत के EB-3 आवेदक की क़तार बारह साल से ज़्यादा पीछे खड़ी है और EB-2 में इस महीने कोई तारीख़ है ही नहीं। जिसकी प्राथमिकता तिथि 2019 की है, वह 60 दिन में I-485 नहीं भर सकता, चाहे उसके पास मंज़ूर I-140 हो।

यहीं वह दूसरा संशोधन काम करता है जिसका ज़िक्र शीर्षक में नहीं है। धारा 204.5(p) उन लोगों के लिए बनी है जो इसी क़तार में फँसे हैं: मंज़ूर I-140 हो, प्राथमिकता तिथि चालू न हो, और "compelling circumstances" साबित हों, तो USCIS अपने विवेक से रोज़गार अनुमति दे सकता है। शर्त यह है कि अर्ज़ी दाख़िल करने की तारीख़ पर व्यक्ति दर्जे में हो। मौजूदा पाठ में इस दर्जे की परिभाषा में "214.1(l)(1) और (2) की अवधियाँ" शामिल हैं। प्रस्ताव उसमें से "और (2)" निकाल देता है।

पाठ से यह निकलता है कि नौकरी जाने के बाद वाली 60 दिन की खिड़की, जिसमें अब तक यह अर्ज़ी दाख़िल हो सकती थी, बंद हो जाएगी। तालिका 3 के मुताबिक़ पाँच साल में इस रास्ते का इस्तेमाल 49 लोगों ने किया, जो पूरी आबादी का 0.02 प्रतिशत है। संख्या छोटी है। पर जिस आबादी के लिए यह प्रावधान बना था वह ठीक वही है जिसकी प्राथमिकता तिथि चालू नहीं है, और सितंबर 2026 की तालिका में रोज़गार-आधारित वर्गों में यह शर्त भारत और चीन के आवेदकों पर लगती है, बाक़ी देशों के EB-2 आवेदकों पर नहीं।

बचे हुए रास्ते और उन पर लगी शर्तें

H-1B के लिए क़ानून में एक अलग सुविधा है। अमेरिकी संहिता की धारा 1184(n) कहती है कि नया नियोक्ता जिस दिन ग़ैर-तुच्छ याचिका दाख़िल करे, उसी दिन से कामगार नया काम शुरू कर सकता है और अनुमति याचिका के निपटारे तक चलती रहती है। पर उसी धारा की उपधारा (2)(B) शर्त लगाती है कि याचिका "मंज़ूर ठहराव की अवधि समाप्त होने की तारीख़ से पहले" दाख़िल हुई हो। बाक़ी सात श्रेणियों में यह सुविधा है ही नहीं; दस्तावेज़ ख़ुद लिखता है कि E-1, E-2, E-3, H-1B1, L-1, O-1 और TN वाले नियोक्ता तभी बदल सकते हैं जब नई याचिका मंज़ूर हो जाए।

इसके साथ एक दूसरा नियम चलता है। धारा 214.1(c)(4)(i) कहती है कि ठहराव बढ़ाने या संशोधित करने की अर्ज़ी उस व्यक्ति के लिए मंज़ूर नहीं की जा सकती जिसने पिछला दर्जा बनाए नहीं रखा। इसी उपधारा में छूट का रास्ता भी है: अगर देरी आवेदक के नियंत्रण से बाहर की असाधारण परिस्थितियों से हुई हो, व्यक्ति ने अपना दर्जा और किसी तरह न तोड़ा हो, वह सद्भावी ग़ैर-आप्रवासी बना हुआ हो और निष्कासन की कार्यवाही में न हो, तो USCIS देरी को माफ़ कर सकता है।

प्रस्तावित नियम इन दोनों पाठों को आमने-सामने रखकर कोई जवाब नहीं देता। वह एक फ़ुटनोट में AC21 पोर्टेबिलिटी वाला USCIS का पन्ना उद्धृत करता है और आगे बढ़ जाता है। नौकरी ख़त्म होने के अगले दिन दाख़िल हुई नियोक्ता-बदल याचिका के साथ जो ठहराव-विस्तार की अर्ज़ी लगेगी, उस पर क्या होगा, यह 22 पन्नों में कहीं नहीं लिखा।

बाक़ी रास्ते दस्तावेज़ में गिनाए गए हैं। छात्र या आगंतुक दर्जे में बदलने की अर्ज़ी, जो 8 CFR 248.1 के तहत तभी चलती है जब व्यक्ति दर्जा बनाए हुए हो। और देश लौटकर नई मंज़ूर याचिका पर दोबारा प्रवेश, जिसे विभाग बार-बार दोहराता है। एक व्यावहारिक बात नियोक्ताओं के लिए भी है: धारा 1184(c)(5) के तहत H-1B या O-1 कामगार को अवधि पूरी होने से पहले बर्ख़ास्त करने वाला नियोक्ता वापसी-यात्रा का उचित ख़र्च चुकाता है, पर इस्तीफ़ा देने वाला यह ख़र्च ख़ुद उठाता है।

भारत सरकार की चुप्पी और उसी हफ़्ते के दूसरे काग़ज़

11 सितंबर की शाम तक भारत सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई बयान नहीं आया था। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता-वार्ताओं की सूची में आख़िरी द्विसाप्ताहिक वार्ता 8 सितंबर की है, यानी प्रकाशन से तीन दिन पहले की। 10 और 11 सितंबर की पीआईबी विज्ञप्तियों में इसका कोई उल्लेख नहीं है। इन दोनों दिनों की सरकारी विज्ञप्तियाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से भरी हुई हैं, जो इसी हफ़्ते दिल्ली में है।

यह प्रस्ताव छह हफ़्तों के भीतर छपे काग़ज़ों की एक क़तार का हिस्सा है। 10 अगस्त को H-1B और L-1 पर 9/11 बायोमीट्रिक शुल्क का अंतिम नियम छपा, जो 9 सितंबर से प्रभावी हो चुका है और अब हर विस्तार याचिका पर यह शुल्क लगाता है। 25 अगस्त को कैप वाली H-1B याचिकाओं पर 1,03,265 डॉलर के शुल्क का प्रस्ताव छपा, जिसकी टिप्पणी अवधि 24 सितंबर को बंद हो रही है। और इंडियन एक्सप्रेस ने 9 सितंबर को ख़बर दी कि अमेरिका ने कॉग्निज़ेंट की ग्रीन कार्ड (PERM) अर्ज़ियाँ रोक दी हैं।

पृष्ठभूमि में अमेरिकी श्रम बाज़ार का आँकड़ा है। श्रम सांख्यिकी ब्यूरो की JOLTS शृंखला के मुताबिक़ जुलाई 2026 में पूरे ग़ैर-कृषि क्षेत्र में 16.66 लाख छँटनियाँ और बर्ख़ास्तगियाँ दर्ज हुईं, दर एक प्रतिशत, और सूचना क्षेत्र में यह संख्या 40,000 रही।

टिप्पणी की खिड़की 10 नवंबर को बंद होगी।

स्रोतफ़ेडरल रजिस्टर, खंड 91, अंक 175, 11 सितंबर 2026, पन्ने 57807-57828: गृह सुरक्षा विभाग का प्रस्तावित नियम 'Eliminating the Discretionary 60-Day Grace Period', CIS No. 2858-26, DHS Docket No. USCIS-2026-0364, RIN 1615-AD22, गवइन्फ़ो: उसी प्रस्तावित नियम की राजपत्र प्रति (PDF), जिसमें तालिका 3, तालिका 5 और लागत-लाभ विश्लेषण के फ़ुटनोट हैं, ई-सीएफ़आर: संघीय नियमावली शीर्षक 8, धारा 214.1, उपधारा (l) और (c)(4) का मौजूदा पाठ (9 सितंबर 2026 तक का संस्करण), ई-सीएफ़आर: संघीय नियमावली शीर्षक 8, धारा 204.5(p), 'compelling circumstances' रोज़गार अनुमति का मौजूदा पाठ, USCIS, 'Characteristics of H-1B Specialty Occupation Workers', वित्त वर्ष 2024 की कांग्रेस को रिपोर्ट: जन्म-देश के आँकड़े (तालिका 4a) और वेतन के प्रतिशतक (चित्र 10), USCIS: सितंबर 2026 के लिए दर्जा-परिवर्तन आवेदन की तालिकाएँ, जिनमें विदेश विभाग के वीज़ा बुलेटिन की रोज़गार-आधारित अंतिम कार्रवाई तिथियाँ छपी हैं, अमेरिकी संहिता, शीर्षक 8, धारा 1184: H-1B पोर्टेबिलिटी की उपधारा (n) और नियोक्ता की वापसी-यात्रा देनदारी वाली उपधारा (c)(5), regulations.gov: इसी प्रस्ताव का डॉकेट, जहाँ 10 नवंबर 2026 तक टिप्पणियाँ दर्ज होंगी, फ़ेडरल रजिस्टर, 25 अगस्त 2026: 'Fee for Certain H-1B Petitions', कैप वाली H-1B याचिकाओं पर 1,03,265 डॉलर शुल्क का प्रस्ताव, RIN 1615-AD20, फ़ेडरल रजिस्टर, 10 अगस्त 2026: H-1B और L-1 पर 9/11 बायोमीट्रिक शुल्क का अंतिम नियम, 9 सितंबर 2026 से प्रभावी, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार: प्रवक्ता की प्रेस वार्ताओं के लिप्यंतरण की सूची, जिसमें अंतिम द्विसाप्ताहिक वार्ता 8 सितंबर 2026 की है, अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो, JOLTS शृंखला (JTS000000000000000LDL और JTS510000000000000LDL): जुलाई 2026 की छँटनी और बर्ख़ास्तगी के आँकड़े, इंडियन एक्सप्रेस, 9 सितंबर 2026: कॉग्निज़ेंट की ग्रीन कार्ड (PERM) अर्ज़ियाँ रोके जाने की ख़बर

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